बंगाल भाजपा में घमासान, रुपा गांगुली ने लगाया बड़ा आरोप

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अपने पैर मजबूत करने में लगी बीजेपी को झटका लगा है. प्रदेश में पार्टी के भीतर ही विवाद हो गया है. पार्टी की सांसद और पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता रूपा गांगुली ने पार्टी के राज्य प्रभारी दिलीप घोष पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है. रूपा गांगुली के इस आरोप के बाद बंगाल भाजपा में बवाल मच गया है.

पूर्व अभिनेत्री और सांसद ने सोमवार 19 फरवरी को रात करीब साढ़े 12 बजे एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने प्रभारी दिलीप घोष पर खुद को सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत करने का आरोप लगाया. रूपा गांगुली ने यह कह कर भी घोष पर निशाना साधा कि वह पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से तो संपर्क कर सकती हैं, लेकिन दिलीप घोष से संपर्क करना मुश्किल हो गया है.

उन्होंने लिखा- ‘मैं मोदी जी को भी मैसेज कर सकती हूं. लेकिन मुझे आपको मैसेज करने से रोका गया है. मैं अमित भाईसाहब से भी बात कर सकती हूं… लेकिन आप मुझपर लोगों के बीच में चिल्लाए, मुझे गाली दी. मैं चुप रही, क्योंकि मेरे पापा ने मुझे सिखाया था कि बड़ों की बात सुन लो और उनका कहना मानो. आपने सार्वजनिक रूप से मुझ पर टिप्पणी की और परेशान किया.’ पार्टी के भीतर मचे इस घमासान से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर करने के भाजपा के एजेंडे को झटका लग सकता है. बीजेपी पश्चिम बंगाल में अपने पैर जमाने की कोशिश में है. बीजेपी के सामने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर करने की चुनौती है. तो वहीं 2021 विधानसभा चुनावों में भी भाजपा खुद को बंगाल में साबित करना चाहती है. ऐसे में राज्य स्तर पर अपने नेताओं में पड़ी फूट बीजेपी के लिए चिंता का सबब हो सकती है. पश्चिम बंगाल, ओडिसा और तामिलनाडु ही ऐसे प्रमुख राज्य हैं, जहां भाजपा अब भी कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर पाई है और यहां मोदी-शाह का जादू बेअसर रहा है.

चंद्रशेखर रावण की रिहाई के लिए फिल्म जगत भी आया सामने

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मुंबई। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण की रिहाई के लिए पिछले कई महीनों से तमाम संगठन अपने-अपने तरीके से आंदोलन कर रहे हैं. इसमें दलित आंदोलन से जुड़े लोगों के अलावा अन्य एक्टिविस्ट, मानवाधिकार कार्यकर्ता और सिविल सोसाइटी के लोग शामिल हैं. इसी कड़ी में अब चंद्रशेखर रावण की रिहाई के लिए फिल्म जगत से जुड़े लोग भी सामने आ गए हैं. मशहूर फिल्म निर्माता और ‘जय भीम कामरेड’ सहित कई महत्वपू्र्ण डाक्यूमेंट्री बनाने वाले डाक्यूमेंट्री फिल्म मेकर आनंद पटवर्धन ने भी चंद्रशेखर रावण की रिहाई की मांग की है.

मुंबई में पटवर्धन ने चंद्रशेखर की रिहाई के लिए सिविल सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे अभियान पर हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया है. इस अभियान में आनंद पटवर्धन के अलावा सिविल राइट एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवार और जावेद आनंद, सीपीआईएम के नेता प्रकाश रेड्डी, ऑल इंडिया सेक्युलर फोरम के नेता और प्रख्यात लेखक राम पुनियानी के अलावा कई लोगों ने हिस्सा लिया और चंद्रशेखर की रिहाई के लिए अपना समर्थन दिया है.

असल में चंद्रशेखर आजाद रावण की गिरफ्तारी और उसके बाद उनपर दो बार रासुका लगाने की देश भर के एक्टिविस्टों ने निंदा की है. देश में नागरिक अधिकार और मानवाधिकार के पक्षधरों ने इसे बदले की भावना से लिया गया कदम बताते हुए भाजपा और योगी सरकार को निशाने पर लिया है. तीन महीने की रासुका की अवधि पूरी होने पर चंद्रशेखर के खिलाफ दुबारा रासुका लगाने पर लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है.

बसपा प्रमुख ने नेताओं से की अपील

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से एक अहम अपील की है. पार्टी अध्यक्ष मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि उनसे मुलाकात के दौरान वह उनके पैर न छुएं. उन्होंने कार्यकर्ताओं से सिर्फ ‘जय भीम’ बोल कर अभिवादन करने का आग्रह किया है. बसपा सुप्रीमों की इस अपील के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने नेता की इस अपील को सराहा है.

असल में आमतौर पर यह देखा गया है कि बसपा कार्यकर्ताओं में पार्टी अध्यक्ष मायावती का पैर छूने की होड़ मची रहती है. कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद तमाम कार्यकर्ता अपनी पार्टी अध्यक्ष के पहुंचते ही उनके पैर छूने लगते थे. यही नहीं, संसद भवन में भी मायावती के पहुंचने पर उनके राज्यसभा सांसद उनके पैर छूने लगते थे. कई बार विपक्षी इसकी आलोचना भी करते हैं.

हालांकि ऐसा नहीं है कि अपने नेता का पैर छूने का रिवाज सिर्फ बसपा में ही है, बल्कि बसपा के पहले से मौजूद तमाम राजनैतिक दलों में बड़े नेताओं के पैर छूने की परंपरा रही है. लेकिन जब पहली बार बसपा सत्ता में आई और एक दलित महिला को मुख्यमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ तो नजारा कुछ और था. मायावती यूपी की जनता के साथ-साथ उस समाज का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, जिसका हजारों सालों से शोषण हो रहा था. ऐसे में उनके मुख्यमंत्री बनते ही बड़े-बड़े धन्नासेठों और कथित ऊंची जाति के लोग अपना मतलब निकालने के लिए बसपा प्रमुख के पास पहुंचने लगे. इसमें यूपी के वो ब्राह्मण और ठाकुर भी शामिल थे, जिन्होंने दलितों का खूब शोषण किया था. स्वार्थवश इन्होंने सावर्जनिक तौर पर मायावती का खूब पैर पकड़ा और मायावती ने उन्हें मना भी नहीं किया. बल्कि माना जाता है कि उन्होंने इसका आनंद लिया.

इससे यूपी सहित देश के तमाम हिस्सों में मौजूद दलितों और पिछड़ों को खूब शांति मिली. असल में वो अपने शोषकों को अपने समाज की नेता के पैरों में देख रहे थे. यही वजह रही कि बसपा और मायावती को बहुत तेजी से देश के वंचित तबके का सहयोग मिला. लेकिन तब से तीन दशक बीत चुके हैं. ऐसे में मायावती का कार्यकर्ताओं से पैर न छूने की अपील से जाहिर है कि कार्यकर्ताओं के बीच साकारात्मक मैसेज जाएगा.

पीएम मोदी के परीक्षा पर चर्चा में दलित बच्चों को अस्तबल में बैठाया

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हिमाचल प्रदेश।16 फरवरी को जब देश भर में नीरव मोदी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक से हजारों करोड़ रुपये गबन करने की खबर से हड़कंप मचा था, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश भर के बच्चों के साथ ‘परीक्षा पर चर्चा’ कर रहे थे. लेकिन पीएम मोदी के इस कार्यक्रम पर कलंक लग गया है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में परीक्षा पर चर्चा के दौरान चेस्था ग्राम पंचायत में दलित बच्चों को घोड़े के अस्तबल में बैठाने की खबर है.

असल में कार्यक्रम को टीवी पर देखने के लिए बच्चों को गर्वनमेंट हाई स्कूल, कुल्लू के स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के हेड के घर बुलाया गया था. इस दौरान सामान्य वर्ग के बच्चे घर के अंदर चले गए जबकि दलित समाज के बच्चों को मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष के घर के बाहर अस्तबल में घोड़े की लीद के बीच बैठाया गया. बच्चों ने इस संबंध में शुक्रवार को कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर युनूस को लिखित शिकायत दी, जिसके बाद मामला गरमा गया.

बच्चों का आरोप है कि टीचर मेहरचंद ने उन्हें बाहर अस्तबल में बैठने को कहा. बच्चों ने यह भी आरोप लगाया कि टीचर ने उन्हें बीच से प्रोग्राम छोड़कर नहीं जाने को लेकर भी हिदायत दी. इस दौरान बच्चे अस्तबल के दुर्गंध से परेशान रहे. इस घटना के बाद बच्चों से भेदभाव के अन्य मामले भी खुलने लगे. बच्चों का आरोप है कि उन्हें मीड डे मिल के दौरान भी जातिगत भेदभाव झेलना पड़ता है और अलग बैठाया जाता है.

घटना सामने आने के बाद स्थानीय अनुसूचित जाति कल्याण संघ ने विरोध प्रदर्शन किया, और स्कूल के प्रधानाचार्य राजन भारद्वाज और कुल्लू के डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन जगदीश पठानिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

प्रधानाचार्य राजन ने हालांकि घटना को लेकर मांफी मांगी है और भविष्य में ऐसा नहीं होने देने की बात कही है. मामला बढ़ने के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने इस बारे में शिक्षा विभाग के सचिव से रिपोर्ट मांगी है. जहां तक प्रधानमंत्री मोदी की बात है तो जैसे वो नीरव मोदी के मामले पर चुप हैं, वैसे ही अपने ही कार्यक्रम के दौरान दलित बच्चों के साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार पर उनकी कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है.

गुजरात में दलितों ने भाजपा विधायक को दौड़ा कर पीटा

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अहमदाबाद। भाजपा और दलित समाज के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं. दोनों के बीच एक रंजिश भरा माहौल बनता जा रहा है. इस माहौल से पार्टी अपने राजनीतिक गढ़ गुजरात में भी नहीं बच पा रही है. असल में इन दिनों एक वीडियो खूब वायरल हुआ है, जिसमें लोग एक विधायक को दौड़ा कर पीट रहे हैं. विधायक अपनी जान बचाकर जनता के बीच से पुलिस के पास जाता है. एक पुलिसकर्मी विधायक को सुरक्षा में लेकर वहां से ले जाता है.

घटना शुक्रवार की है. गुजरात में दलित कार्यकर्ता भानुभाई वानकर की मौत के बाद उनके परिवार वालों से मिलने गये बीजेपी विधायक कर्षण सोलंकी को लोगों को जबर्दस्त गुस्से का सामना करना पड़ा. सोलंकी गांधीनगर के सिविल अस्पताल गये थे. अस्पताल के बाहर कई लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान जब कर्षण सोलंकी ने भानुभाई के परिवार वालों से मुलाकात करने की कोशिश की तो प्रदर्शन कर रहे लोग काफी गुस्से में आ गये. लोगों को गुस्से को देखते हुए उन्हें वहां से दौड़कर भागना पड़ा. इस दौरान लोगों ने विधायक से हाथा-पाई भी की.

असल में देश में जिस तरह का माहौल बन रहा है और कट्टर हिंदुत्व के नाम पर गुजरात के ऊना से लेकर महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव तक में दलितों के साथ जो रहा है. उसकी प्रतिक्रियाएं अब देखी जाने लगी हैं.

मोदी सरकार से नहीं डरता भगोड़ा नीरव मोदी, देखिए क्या कि

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नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक में घोटाला कर देश का हजारों करोड़ रुपये गबन करने वाला नीरव मोदी मजे में है. उसे इस बात की कोई फिक्र नहीं है कि देश में उसके घोटाले से हड़कंप मचा हुआ है. असल में नीरव मोदी ने कुछ ही दिन पहले ही अपने दो नए स्टोर्स खोले हैं.

ये स्टोर्स मकाऊ और कुआलालंपुर में खोले गए हैं. ये दोनों नए स्टोर्स नीरव मोदी ने खुद पर एफआईआर दर्ज होने के बाद खोले हैं, जिससे साफ है कि देश का पैसा लेकर भागा मोदी बिना किसी चिंता के देश के बाहर अपने बिजनेस को बढ़ाने में जुटा है. दूसरी ओर सीबीआई ने इंटरपोल के जरिए दुनिया के सभी एयरपोर्ट को अलर्ट कर दिया है. यानी देश से लेकर विदेश तक नीरव मोदी की तलाश जारी है. बता दें कि नीरव मोदी के खिलाफ एलओयू की मदद से बैंकों से लोन लेने का आरोप है.

विलुप्त होने के कगार पर 42 भारतीय भाषाएं

नई दिल्ली। भारत ऐसा देश है जहां माना जाता है कि हर 3 कोस यानि की 9 किलोमीटर के बाद भाषा बदल जाती है. एक ही राज्य में एक ही स्थानीयता में भी पचास सौ किलोमीटर की दूरी पर आपको बिल्कुल अलग भाषा सुनने को मिल सकती है. इस लिहाज से भारत देश में भाषाओं और उनसे जुड़ी संस्कृतियों का खजाना है. लेकिन भाषाओं के इसी खजाने में भारत में 42 बोलियां पर संकट मंडरा रहा है. ऐसा माना जाता है कि संकटग्रस्त इन भाषाओं को बोलने वाले कुछ हजार लोग ही हैं.

गृह मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार इन 42 भाषाओं में से कुछ भाषाएं विलुप्त प्राय भी हैं. संयुक्त राष्ट्र ने भी ऐसी 42 भारतीय भाषाओं या बोलियों की सूची तैयार की है. यह सभी खतरे में हैं और धीरे-धीरे विलुप्त होने की ओर बढ़ रही हैं. जिन भाषाओं पर संकट है, उनमें 11 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की हैं. ये भाषाएं ग्रेट अंडमानीज, जरावा, लामोंगजी, लुरो, मियोत, ओंगे, पु, सनेन्यो, सेंतिलीज, शोम्पेन और तकाहनयिलांग हैं. जबकि मणिपुर की सात संकटग्रस्त भाषाएं एमोल, अक्का, कोइरेन, लामगैंग, लैंगरोंग, पुरुम और तराओ हैं. तो वहीं हिमाचल प्रदेश की चार भाषाएं- बघाती, हंदुरी, पंगवाली और सिरमौदी भी खतरे में हैं.

अन्य संकटग्रस्त भाषाओं में ओडिशा की मंडा, परजी और पेंगो हैं. कर्नाटक की कोरागा और कुरुबा जबकि आंध्र प्रदेश की गडाबा और नैकी हैं. तमिलनाडु की कोटा और टोडा विलुप्त प्राय हैं. असम की नोरा और ताई रोंग भी खतरे में हैं. उत्तराखंड की बंगानी, झारखंड की बिरहोर, महाराष्ट्र की निहाली, मेघालय की रुगा और पश्चिम बंगाल की टोटो भी विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही हैं.

इस स्थिति को लेकर सरकार भी चिंतित है. सरकार मैसूर स्थित भारतीय भाषाओं के केंद्रीय संस्थान देश की खतरे में पड़ी भाषाओं के संरक्षण और अस्तित्व की रक्षा करने के लिए केंद्रीय योजनाओं के तहत कई उपाय कर रहा है. इन कार्यक्रमों के तहत व्याकरण संबंधी विस्तृत जानकारी जुटाना, एक भाषा और दो भाषाओं में डिक्शनरी तैयार करने के काम किए जा रहे हैं. इसके अलावा, भाषा के मूल नियम, उन भाषाओं की लोककथाओं, इन सभी भाषाओं या बोलियों की खासियत को लिखित में संरक्षित किया जा रहा है.

मध्यप्रदेश में मतदाताओं को धमका रहे हैं शिवराज सरकार के मंत्री

भोपाल। राजस्थान के उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा बौखलाई और डरी हुई सी है. भाजपा के डर का आलम यह है कि अब उसके नेता जनता को यह कह कर धमकाने लगे हैं कि सरकार की योजनाओं का लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा जिन लोगों ने भाजपा को वोट दिया है.

मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा कोलारस में चुनाव प्रचार के दौरान सियासी बवाल मच गया है. मंत्रीजी ने वोटरों से कहा कि सरकारी योजना का फायदा कमल पर बटन दबाने वालों को ही मिलेगा, पंजे वालों को नहीं. इस बयान के बाद जहां कांग्रेस ने भाजपा को घेरा है तो वहीं भाजपा सफाई देने लगी है. बयान सामने आने के बाद भाजपा ने सफाई में कहा कि यशोधरा का मतलब धमकाना नहीं समझाना था कि बीजेपी विधायक के चुने जाने से तालमेल बेहतर होगा.

दूसरी ओर इस मामले में कांग्रेस की शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने मध्यप्रदेश की खेल एवं युवा विकास मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को नोटिस जारी कर 20 फरवरी तक उनसे जवाब मांगा गया है. असल में राजस्थान उपचुनाव में हार के बाद भाजपा डरी हुई है. राजस्थान के बाद अब मध्य प्रदेश की दो सीटों कोलारस-मुंगावली पर उपचुनाव होने हैं. ये दोनों क्षेत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र में आते हैं, इसलिए कांग्रेस के लिए यह प्रतिष्ठा का प्रश्न है. तो भाजपा ने भी इन दोनों सीटों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ यशोधरा राजे सिंधिया को उतार दिया है. इन दिनों सीटों का परिणाम 24 फरवरी को आएगा.

मायावती ने मोदी से पूछा क्या हुआ आपका वादा

नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक प्रकरण में अब भाजपा और पीएम मोदी चारो ओर से घिरने लगे हैं. बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने पीएम मोदी को उनका वह बयान याद दिलवाया है, जिसमें मोदी ने कहा था कि ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा.’

एक बयान जारी कर बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पूछा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की नाक के नीचे 20 हज़ार करोड़ रूपये का बैंक महाघोटाला हो गया और सरकार सोती रही, यह कैसी जनहितैषी सरकार है. उन्होंने कहा कि मोदी द्वारा देश को दिये गये इस आश्वासन का क्या हुआ कि ना खायेंगे और ना खाने देंगे? मोदी पर सवाल दागते हुए उन्होंने कि क्या जनधन योजना के अन्तर्गत करोड़ों गरीबों व मेहनतकश लोगों की गाढ़ी कमाई का हजारों करोड़ रूपया अपने चहेते उद्योगपतियों व धन्नासेंठों को ग़बन करने के लिये ही सरकारी बैंकों में जमा कराया गया था?

यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि देश में आर्थिक महाघोटालों व अर्थव्यवस्था में मज़बूती के दावों के बावजूद रोज़गार के अवसर उपलब्ध नहीं होने आदि से यह साफ तौर पर लगता है कि मोदी सरकार में सरकारी व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है.

इधर महाराष्ट्र और केंद्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने भी मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि नीरव मोदी जो पैसा लेकर भाग गया वह राष्ट्रीय खजाने का था, जिसे उसने स्पष्ट रूप से लूट लिया. अब इस घोटाले से उजागर होता है कि पीएम मोदी का प्रसिद्ध नारा ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ खोखला वादा था. शिवसेना ने सवाल उठाया कि क्या उसका आधार कार्ड बैंक खातों से जुड़ा था? इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का कहना था कि बिडंबना यह है कि आम आदमी को आधार कार्ड के बिना अस्पताल में इलाज भी नहीं मिल सकता है, लेकिन नीरव मोदी जैसा आदमी बिना आधार कार्ड के भी किसी बैंक से 11,500 करोड़ रुपये बेईमानी से निकाल सकता है.’ ठाकरे ने घोषणा की है कि भविष्य में वह मोदी के साथ कोई भी मंच साझा नहीं करेंगे.

गुजरात में दलितों के सामने बैकफुट पर भाजपा, माननी पड़ी सारी मांगे

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अहमदाबाद। थानगढ़ और ऊना में दलित उत्पीड़न की घटना के बाद पाटण में दलित सामाजिक कार्यकर्ता के आत्मदाह ने गुजरात सरकार को मुश्किल में डाल दिया है. दलितों को जमीनों के पट्टे व कब्जे दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता भानुभाई वणकर ने 15 फरवरी को जिला कलेक्ट्रेट के सामने आत्महत्या कर लिया था. इसके बाद शुरू हुए आंदोलन के बाद आखिरकार गुजरात सरकार को दलितों के सामने झुकना पड़ा. रविवार को जिग्नेश मेवाणी और तमाम अन्य दलित संगठनों द्वारा बुलाए बंद और देर शाम तक चले ड्रामे के बाद आखिरकार सरकार और प्रशासन ने दलितों के विद्रोह के आगे सरेंडर कर दिया और उनकी सारी मांगे मान ली.

इससे पहले मामला तब बिगड़ गया जब भानुभाई के घर वालों ने उनके द्वारा की जा रही मांगे नहीं माने जाने तक उनका शव लेने से मना कर दिया था. तो घटना के बाद दलित संगठनों और जिग्नेश मेवाणी ने 18 फरवरी को अहमदाबाद व गांधीनगर बंद का आवाह्न किया था, जिससे दलित समाज के लोग सड़क पर आ गए. पति की मौत के बाद से ही उपवास पर बैठी भानुभाई वणकर की पत्नी इंदूबेन की भी रविवार को हालत बिगड़ गई.

गुजरात सरकार के लिए मामला इसलिए भी पेंचिदा हो गया था कि 19 फरवरी से गुजरात विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है. तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के साथ गुजरात यात्रा पर आ रहे थे. ऐसे में दलित आंदोलन के चलते सरकार व प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. जिग्नेश मेवाणी द्वारा भी एक के बाद एक ट्विट से सारी जानकारियां सामने आती रही. मेवाणी की टीम ने जब उनकी गिरफ्तारी का वीडियो शेयर किया तो देश भर में गुजरात पुलिस की ज्यादती पर बहस होने लगी, इससे भी प्रशासन दबाव में आ गया.

मेवाणी का कहना है कि गुजरात के 50 लाख दलितों का भरोसा अब गुजरात सरकार पर नहीं रह गया है. यह सरकार दलित विरोधी है. उन्होंने गुजरात में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की.

भानूभाई के आत्मदाह के बाद मामला शांत करने के लिए गुजरात सरकार ने फिलहाल तो सारी शर्ते मान ली है, लेकिन मेवाणी के तेवर देखते हुए और विधानसभा सत्र के कारण यह मामला अभी और जोर पकड़ सकता है.

चंद्रशेखर की रिहाई के लिए आंदोलन शुरू, जेल से भेजी चिट्ठी में योगी सरकार को निशाने पर लिया

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नई दिल्ली। जेल में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण की रिहाई को लेकर भीम आर्मी ने सहारनपुर से एक बड़े आंदोलन का आगाज कर दिया है. 18 फरवरी को सहारनपुर में भीम आर्मी के एससी-एसटी व ओबीसी एवं अल्पसंख्यक महासम्मेलन में सामूहिक रूप से रावण की रिहाई की मांग की गई. इस दौरान चंद्रशेखर की रिहाई की मांग को लेकर भीम आर्मी के साथ तमाम अन्य संगठन भी आ गए हैं. आंदोलनकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो ऐतिहासिक आंदोलन किया जाएगा.

महासम्मेलन में उत्तराखंड के प्रदेश प्रभारी महक सिंह ने चंद्रशेखर रावण के भेजे गए आठ पेज का संदेश पढ़ा, जिसमें चंद्रशेखर ने वर्तमान सरकार को काले अंग्रेजों की सरकार घोषित करते हुए इससे मुक्ति की बात कही थी. रावण ने संदेश में कहा कि जब तक भगवा सरकार को खत्म नहीं कर दिया जाएगा, तब तक आंदोलन चलता रहेगा.

महासम्मेलन में जमीयत उलमा-ए-हिंद ने भी चंद्रशेखर की रिहाई का समर्थन किया, तो वहीं समर्थन के लिए पूर्व आइपीएस एसआर दारापुरी, हिमाचल प्रदेश के पूर्व डीजीपी पृथ्वीराज, रालोद के जिला अध्यक्ष राव केसर सलीम, के अलावा चंद्रशेखर की मां कमलेश, जेएनयू से आए प्रदीप नरवाल भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे. सम्मेलन में यूपी, महाराष्ट्र, उत्तराखंड आदि प्रदेशों से बड़ी तादाद में लोग पहुंचे.

हालांकि इस कार्यक्रम को लेकर पुलिस का रवैया ठीक नहीं रहा. पहले तो पुलिस ने कार्यक्रम को लेकर इजाजत नहीं दी, लेकिन भीम आर्मी के लोगों के तेवर को देखते हुए और किसी भी हाल में आंदोलन पर अड़े रहने के बाद प्रशासन को इसकी इजाजत देनी पड़ी.

बिहार में गूंजा ‘नीतीश-सुशील चोर’ है का नारा

बिहार। पटना में आज से शुरू हुए तीन दिवसीय राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन के दौरान आरजेडी के विधायकों ने जमकर बवाल मचाया और कार्यक्रम के दौरान नारेबाजी की. नाराज आरजेडी के विधायकों ने सम्मेलन का बीच में ही बहिष्कार कर दिया और निकल गए.

सम्मेलन को संबोधित करते समय उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने एक टिप्पणी की जहां उन्होंने कहा कि आज के दिन देश के तीन मुख्यमंत्री जेल की हवा खा रहे हैं. बात साफ है, सुशील मोदी का इशारा कहीं ना कहीं आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तरफ था और यह टिप्पणी सुनते ही सम्मेलन में मौजूद आरजेडी के सभी विधायकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और नारेबाजी करते हुए कार्यक्रम छोड़ कर बाहर आ गए.

सम्मेलन से बाहर निकलने के दौरान आरजेडी के विधायकों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सुशील मोदी के विरोध में नारेबाजी भी की और कहा कि नीतीश-सुशील चोर हैं.

आरजेडी के विधायकों ने आरोप लगाया कि सुशील मोदी ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन जैसे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को राजनीतिक मंच बना दिया और लालू प्रसाद के खिलाफ टिप्पणी की.

आजतक से बातचीत करते हुए आरजेडी विधायक शक्ति सिंह यादव ने कहा कि सुशील मोदी ने राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन जैसे कार्यक्रम को और बिहार को बदनाम किया है, जहां पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. शक्ति सिंह यादव ने कहा कि अगर चर्चा ही करनी है तो सुशील मोदी भाजपा के भ्रष्टाचार की चर्चा करते और बताते कि डायमंड कारोबारी नीरव मोदी देश से 11 हजार करोड़ लेकर कैसे फरार हो गया

फिर पुराने खेमे में लौटे लवली, फिर कांग्रेस में आएं

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नई दिल्ली। नौ महीने पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले अरविंदर सिंह लवली ने शनिवार को दोबारा कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। लवली ने ठीक एमसीडी चुनाव से पहले नाराजगी की वजह से बीजेपी ज्वाइन कर ली थी। लवली ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में अपने दिल की बात बताई और कहा कि भाजपा में जाने का निर्णय लेना मेरे लिए कोई खुशी का निर्णय नहीं था। पीड़ा में लिया हुआ डिसिजन था वो। वैचारिक रूप से मैं वहां मिसफिट था।

अरविंदर सिंह लवली के दोबारा कांग्रेस में शामिल होने की बात पर मुहर लगाते हुए खुद कांग्रेस के दिल्ली अध्यक्ष अजय माकन ने जानकारी दी है कि लवली ने दोबारा कांग्रेस ज्वाइन कर ली है।

कहा जा रहा है कि लवली की वापसी के पीछे राहुल गांधी का हाथ है। सूत्रों का कहना है कि लवली और राहुल गांधी की एक मीटिंग हुई थी और उन्हीं के समझाने पर लवली ने कांग्रेस में शामिल होने का कदम उठाया है।

कल से बदल जाएगा बीजेपी मुख्यालय का पता

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नई दिल्ली। अब भारतीय जनता पार्टी का नया पता होगा 6 दीन दयाल मार्ग. BJP के पुराने दफ्तर 11 अशोक रोड को रविवार को खाली कर दिया जाएगा और पार्टी नए पते 6 दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर चली जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और तमाम टॉप बीजेपी नेतृत्व बीजेपी के नए दफ्तर के उद्घाटन के मौके पर मौजूद रहेंगे. इससे पहले बीजेपी का मुख्यालय 34 साल तक 11 अशोक रोड रहा है.

8000 वर्ग मीटर में फैले BJP के इस नए दफ्तर की बिल्डिंग बनने में करीब डेढ़ साल का समय लगा. आधुनिक सुविधाओं के तहत बनाए गए पार्टी का मुख्यालय बहुमंजिला इमारत में होगा, जिसमें तीन ब्लॉक होंगे. मुख्य इमारत सात-मंजिला होगी, और उसके आसपास मौजूद दोनों इमारतें तीन-तीन मंजिल की होंगी. सभी तरह की आधुनिक सुविधाओं से लैस इस दफ्तर के ग्राउंड फ्लोर पर बीजेपी और जनसंघ से जुड़े महापुरुषों की प्रतिमा लगाई गई है. ग्राउंड फ्लोर पर ही आठ प्रवक्ताओं के लिए कमरे होंगे.

बीजेपी अध्यक्ष का दफ्तर बिल्डिंग के सबसे ऊपर के हिस्से यानी तीसरी मंजिल पर होगा. दूसरी मंजिल पर पार्टी के दूसरे नेता, महासचिव, सचिव, उपाध्यक्षों की बैठने की व्यवस्था की गई है. मीडिया के लिए ग्राउंड फ्लोर पर एक हॉल बनाया गया है और वक्ताओं के लिए भी अलग-अलग रूम बनाए गए हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल भी ग्राउंड फ्लोर पर ही बनाया गया है, जिसमें पार्टी की नियमित ब्रीफिंग होगी.

पार्टी दफ्तर में खाने पीने के लिए एक बड़ी कैंटीन की व्यवस्था की गई है. नए पार्टी मुख्यालय में काफी बड़े हिस्से में गार्डेन बनाया गया है. बहुत बड़ी लाइब्रेरी भी पढ़ने लिखने के लिए बनाई गई है. पार्टी दफ्तर में दो बेसमेंट पार्किंग की व्यवस्था की गई है.

बीजेपी के नए मुख्यालय की खास बात यह है कि पार्टी अध्यक्ष के लिए पूरा सचिवालय बनाया गया है. अध्यक्ष के रूम के साथ उनके स्टाफ के लिए एक कार्यालय बनाया गया है. साथ ही में बड़ी बैठकों के लिए बड़े कॉन्फ्रेंस हॉल बनाए गए हैं. वहीं उसी फ्लोर पर ही आम बैठक की भी व्यवस्था की गई है. अब BJP 2019 के चुनावों के लिए नए पते से ही रणनीति बनाएगी.

सवर्ण महिलाओं से 14 साल कम जीती हैं दलित महिलाएः UN Report

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महिलाओं को लेकर हाल ही में आई यूएन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है. यह रिपोर्ट भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति का आंकलन करती है. साथ ही दलित और उच्च वर्ग की महिलाओं के बीच के अंतर को भी सामने लेकर आती है. साथ ही इस बहस को और गहरा करती है कि महिला होने के बावजूद दलित औऱ सवर्ण समाज की महिलाओं की स्थिति अलग है.

यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक दलित समाज की महिलाएं सवर्ण समाज की महिलाओं से कम जीती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि दलित महिला सवर्ण महिला से 14.6 यानि करीब साढे 14 साल कम जीती हैं. इसकी वजह पूरी स्वच्छता का न होना, पूरी तरह से साफ पानी की सप्लाई नहीं होना और स्वास्थ सुविधाओं की कमी है. यूएन ने इस स्थिति को बेहतर करने के लिए सन् 2030 तक लैंगिक समानता को अपना एजेंडा घोषित किया है.

इस रिपोर्ट पर राष्ट्रीय दलित महिला आंदोलन की संयोजक रजनी तिलक कहती हैं-

देश में दलित महिलाओं का बहुत शोषण होता है. वह आर्थिक औऱ सामाजिक रूप से बहुत पिछड़ी हैं. मध्यमवर्गीय महिलाएं भी एक दबाव में अपनी जिंदगी जीती है. सफाईकर्मी समाज की महिलाओं की हालत तो बहुत खराब है. उनके पास इतनी सहूलियत भी नहीं होती कि वह ठीक से खाना भी खा पाए, इसलिए वो कुपोषण की शिकार हो जाती हैं. साथ ही शिक्षा के अभाव के कारण वह जागरूक नहीं होती और बीमारियों का शिकार हो जाती है. झुग्गियों और ठेठ गांव में रहने वाली महिलाओं के सामने तो स्वच्छता की चुनौतियां बढ़ जाती है. मेरा मानना है कि अगर और जमीनी स्तर पर सर्वे किया जाए तो स्थिति इससे भी बुरी मिलेगी.

 सर्वे के मुताबिक दलित महिलाओं की औसत उम्र 39.5 जबकि उच्च जाति की महिलाओं की औसत उम्र 54.1 साल है. इस रिपोर्ट में 89 देशों का सर्वे किया गया है. य़ही नहीं विकासशील देशों में 50 प्रतिशत से ज्यादा शहरी महिलाओं और लड़कियों को साफ पानी, स्वच्छता और जरूरत के हिसाब से रहने की जगह में से किसी न किसी समस्या से गुजरना पड़ता है.

असल में इस अहम रिपोर्ट के पीछे की सच्चाई की ओर झांकना भी जरूरी है. आज भी दलित समाज की 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गांवों में घोर गरीबी में जीती है. वहां न उनको साफ पानी मिल पाता है और न ही स्वच्छता. खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को शौच की समस्या का सामना करना पड़ता है. इस रिपोर्ट से भारतीय महिलाओं के अंतर की एक बड़ी सच्चाई सामने आती है.

क्या कांग्रेस की तरफ लौट रहे हैं दलित

तीन दशक पहले तक दलित समाज को कांग्रेस के परंपरागत वोटर के रूप में देखा जाता था. लेकिन यूपी में बसपा के उभार औऱ बिहार में लालू यादव के उदय के साथ ही दलित वोटर कांग्रेस को छोड़कर बसपा और समान विचारधारा वाली दूसरी पार्टियों में जाने लगा. बीते चुनाव में यूपी को छोड़कर देश के तमाम राज्यों के दलितों ने भाजपा को वोट दिया. यही वजह रही कि भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद तमाम प्रदेशों के विधानसभा चुनावों में प्रचंड जीत हासिल की. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा से दलितों का मोहभंग हो गया है.

हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए विश्वविद्यालयों के चुनाव के साथ ही राजस्थान के उपचुनाव से भी इस बात के संकेत मिल गए हैं कि दलित वोटर अब वापस कांग्रेस की ओर देखने लगे हैं. खासकर राजस्थान में तो इस बात के साफ संकेत मिल चुके हैं. सवाल है कि आखिर इतनी जल्दी दलितों का मोहभंग कांग्रेस से क्यों हो गया है?

परेशान भाजपा खुद इसकी वजह तलाशने में जुट गई है. फीडबैक में दलितों की नाराजगी की तीन वजह सामने आयी है. पहली वजह डांगावास काण्ड है, जिसमें पांच दलितों समेत छह लोगों की बर्बर हत्या कर दी गई थी. दूसरी वजह नोखा-बीकानेर के डेल्टा मेघवाल कथित आत्महत्या प्रकरण में तमाम आंदोलन के बावजूद सीबीआई जांच न होना और तीसरी वजह भाजपा की ही दलित विधायक चंद्रकांता मेघवाल के साथ पुलिस अधिकारियों द्वारा थाने में बदसलूकी की घटना पर पर्दा डालने और आरोपी आईपीएस चूनाराम जाट की बीच चुनाव में दौसा के पुलिस अधीक्षक के पद पर की गयी ताजपोशी मानी जा रही है.

दलितों के भीतर इस बात को लेकर गुस्सा है कि सरकार ने जाट समुदाय के वोट बैंक के लिए दलितों के साथ हुई बर्बरता पर चुप्पी साध ली, ताकि जाट नाराज न हो जाए. हालांकि इस बड़े मामले में कांग्रेस की चुप्पी भी दलितों को खल गई. लेकिन उनके लिए भाजपा को सबक सिखाना ज्यादा जरूरी था. दलितों का रुख आने वाले दिनों में बिहार और यूपी के उपचुनाव और कर्नाटक औऱ राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद और स्पष्ट हो जाएगा.

गुजरात में प्रशासन के सामने दलित ने खुद को जला डाला, मेवाणी ने किया बंद का ऐलान

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​प्रतीकात्मक फोटो​

अहमदाबाद। गुजरात के पाटन में एक दलित कार्यकर्ता भाबु वणकर ने कलेक्टर कार्यालय के परिसर ख़ुद को आग लगा ली. घटना गुरुवार दोपहर एक बजे की है. आत्मदाह करने के बाद 95 फीसदी तक जल चुके वणकर की मौत हो गई. वणकर दादुखा गांव में दलितों को खेती के लिए ज़मीन आवंटन करवाने के लिए संघर्ष कर रहे थे.

वणुभाई पिछले तीन साल से समी तहसील पर दुदखा गांव में सरकारी जमीन पर दलित परिवार को कब्जा दिलवाने के लिए संघर्ष कर रहे थे. हफ्तेभर पहले ही उन्होंने पत्र लिखकर प्रशासन को आत्मदाह की चेतावनी भी दी थी. इसको देखते हुए गुरुवार को कलेक्टर ऑफिस में भारी पुलिस बंदोबस्त था. फायर ब्रिगेड भी बुलवाई गई थी. इसके बावजूद भानुभाई ने खुद को आग लगा ली. घटना के बाद पाटन कलेक्टर आनंद पटेल ने कहा कि जिस जमीन पर कब्जा मांगा जा रहा है, वह 1955 से सरकार के पास है. सरकार को सिफारिश भेजी गई है. फैसला सरकार को करना है.

इस घटना के बाद दलित कार्यकर्ता और गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने शुक्रवार को पाटन बंद का ऐलान किया है. साथ ही मेहसाणा ज़िले के पुलिस प्रमुख के निलंबन की भी मांग की है. सामाजिक कार्यकर्ता की मौत के बाद स्थानीय दलित एकजुट होने लगे हैं और आंदोलन की तैयारी में है. इसको देखते हुए पाटन और आस-पास के ज़िलों से दो सौ पुलिसकर्मी और करीब सौ रिज़र्व बल के पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया है.

योगी सरकार ने पेश किया धार्मिक बजट, जानिए जरूरी बिन्दु

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज 16 फरवरी को अपना पहला पूर्ण बजट पेश किया. इस बजट को राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा बजट बताया गया है. वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने 4 लाख 28 हजार करोड़ रुपये का मेगा बजट पेश किया. यह बजट पिछले साल की तुलना में 11.4 प्रतिशत ज्यादा है. पिछले साल 3.84 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था. वहीं इस बजट में 7 हज़ार 485 करोड़ 6 लाख का अनुमानित घाटा बताया गया है.

बजट के महत्पूर्ण बिन्दुओं की बात करें तो वह यूं है-

1. बजट में नई योजनाओं के लिए 14,341.89 करोड़ रुपये रखा गया है. 2. इस साल बजट में धार्मिक कार्यों के लिए ज्यादा पैसा आवंटन किया गया है. कुंभ के लिए 1500 करोड़ रुपय आवंटित किए गए हैं. 3. धर्मार्थ कार्य के लिए कैलाश मानसरोवर भवन और गाजियाबाद में इस भवन के निर्माण के लिए 94.26 करोड़ आवंटित किया गया है. ब्रज तीर्थ विकास परिषद के लिए 100 करोड़ रुपये का आवंटन. 4. मदरसा अनुदान के मद में सरकार ने 215 करोड़ रुपये दिया है. इसके अलावा अरबी फारसी मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए 404 करोड़ रुपये और अरबिया फारसी पाठशालाओं के लिए 486 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. 5. गरीबों को 5 लाख घर देने का लक्ष्य रखा गया है. वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट को 250 करोड़ आवंटित हुए हैं. 6. स्वच्छ भारत मिशन को 1100 करोड़ और कान्हा गौशाला के लिए 98 करोड़ का बजट आवंटन. 7. किसानों का आय दोगुना करने के दावे के साथ किसानों को खाद के लिए 100 करोड़ रुपए. 8. शिक्षा के क्षेत्र में सर्व शिक्षा मिशन को 18167 करोड़ रुपये का बजट आवंटन हुआ है. माध्यमिक शिक्षा अभियान के लिए 480 करोड़ रुपये दिए गए हैं. दीनदयाल राजकीय मॉडल विद्यालय के लिए 26 करोड़ रुपये. राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के लिए 167 करोड़. अहिल्याबाई निःशुल्क शिक्षा योजना को 21 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है. मेडिकल कॉलेजों के लिए 126 करोड़ रुपये दिए गए हैं. ग्रेटर नोएडा एम्स को MBBS की 100 सीटें एलॉट. 9. बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए 650 करोड़ रूपए जारी. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए 550 करोड़ रुपये और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए 1000 करोड़ आवंटित किए गए हैं.

अनिल अंबानी ने आप नेता पर ठोका 5 हजार करोड़ की मानहानि का दावा

नई दिल्ली। राफेल डील में खुद को बदनाम किए जाने का आरोप लगाते हुए उद्योगपति अनिल अंबानी ने आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह पर पांच हजार करोड़ रुपये का मानहानि दावा ठोक दिया है. अनिल अंबानी ने संजय सिंह को कानूनी नोटिस भेजा है. अनिल अंबानी ने कहा कि संजय सिंह के आरोपों से उनकी छवि को नुकसान हुआ है.

अंबानी के केस के जवाब में संजय सिंह ने राफेल डील के मामले में अनिल अंबानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए केंद्रीय सतर्कता ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुख से समय मांगा है. आप नेता ने 13 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि भारत और फ्रांस में 36 राफेल विमानों को लेकर 56,000 करोड़ रुपये की डील हुई है. इसमें रिलायंस डिफेंस लिमिटेड फ्रांस की एविएशन कंपनी डसॉल्ट एविएशन को 22,000 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिलने का आरोप लगाया गया है.

साथ ही मानहानि के नोटिस पर संजय सिंह ने भी पलटवार किया है. इस बारे में ट्विट का सहारा लेते हुए संजय सिंह ने लिखा है, ‘उद्योगपतियों की दबंगई चरम पर है. पहले घोटाला करेंगे, फिर उसके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर मानहानि का केस करेंगे. उन्होंने कहा कि वह अपनी बात पर कायम है. ये बंदर घुड़की नहीं चलेगी.’

करन कुमार

आंख मारने वाली सीन पर वायरल हुई प्रिया प्रकाश ने दी सफाई

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नई दिल्ली। मलयालम फिल्म ओरू अदार लव के एक गाने मनिक्य मलाराया पूवी से रातो रात हिट हुई मलयालम एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वॉरियर हर तरफ छाई हुईं हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद जहां प्रिया के परेशान घरवालों द्वारा उसे हॉस्टल भेजने की खबर आई तो वहीं सोशल मीडिया पर भी तरह तरह के कमेंट आए. अब अभिनेत्री प्रिया प्रकाश ने खुद ही इस दृश्य को लेकर सफाई दी है.

गाने में प्रिया के आंखों मारने वाले सीन पर प्रिया ने एनडीटीवी से कहा है कि आंख वाला सीन हमारा कोई पहले से तय सीन या प्रैक्टिस किया हुआ सीन नहीं था. यह सीन अच्छा हुआ और हमारे डायरेक्टर ने एक बार में ही ओके कर दिया था. बता दें कि प्रिया एक क्लासिकल डांसर हैंसाथ ही कर्नाटक म्यूजिक भी सीख रही हैं. गाना उनका डांस के बाद दूसरा लव है