कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अपने पैर मजबूत करने में लगी बीजेपी को झटका लगा है. प्रदेश में पार्टी के भीतर ही विवाद हो गया है. पार्टी की सांसद और पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता रूपा गांगुली ने पार्टी के राज्य प्रभारी दिलीप घोष पर अभद्रता करने का आरोप लगाया है. रूपा गांगुली के इस आरोप के बाद बंगाल भाजपा में बवाल मच गया है.
पूर्व अभिनेत्री और सांसद ने सोमवार 19 फरवरी को रात करीब साढ़े 12 बजे एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने प्रभारी दिलीप घोष पर खुद को सार्वजनिक तौर पर बेइज्जत करने का आरोप लगाया. रूपा गांगुली ने यह कह कर भी घोष पर निशाना साधा कि वह पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से तो संपर्क कर सकती हैं, लेकिन दिलीप घोष से संपर्क करना मुश्किल हो गया है.
उन्होंने लिखा- ‘मैं मोदी जी को भी मैसेज कर सकती हूं. लेकिन मुझे आपको मैसेज करने से रोका गया है. मैं अमित भाईसाहब से भी बात कर सकती हूं… लेकिन आप मुझपर लोगों के बीच में चिल्लाए, मुझे गाली दी. मैं चुप रही, क्योंकि मेरे पापा ने मुझे सिखाया था कि बड़ों की बात सुन लो और उनका कहना मानो. आपने सार्वजनिक रूप से मुझ पर टिप्पणी की और परेशान किया.’ पार्टी के भीतर मचे इस घमासान से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर करने के भाजपा के एजेंडे को झटका लग सकता है. बीजेपी पश्चिम बंगाल में अपने पैर जमाने की कोशिश में है. बीजेपी के सामने अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर करने की चुनौती है. तो वहीं 2021 विधानसभा चुनावों में भी भाजपा खुद को बंगाल में साबित करना चाहती है. ऐसे में राज्य स्तर पर अपने नेताओं में पड़ी फूट बीजेपी के लिए चिंता का सबब हो सकती है. पश्चिम बंगाल, ओडिसा और तामिलनाडु ही ऐसे प्रमुख राज्य हैं, जहां भाजपा अब भी कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर पाई है और यहां मोदी-शाह का जादू बेअसर रहा है.


नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से एक अहम अपील की है. पार्टी अध्यक्ष मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि उनसे मुलाकात के दौरान वह उनके पैर न छुएं. उन्होंने कार्यकर्ताओं से सिर्फ ‘जय भीम’ बोल कर अभिवादन करने का आग्रह किया है. बसपा सुप्रीमों की इस अपील के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपने नेता की इस अपील को सराहा है.
नई दिल्ली। जेल में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण की रिहाई को लेकर भीम आर्मी ने सहारनपुर से एक बड़े आंदोलन का आगाज कर दिया है. 18 फरवरी को सहारनपुर में भीम आर्मी के एससी-एसटी व ओबीसी एवं अल्पसंख्यक महासम्मेलन में सामूहिक रूप से रावण की रिहाई की मांग की गई. इस दौरान चंद्रशेखर की रिहाई की मांग को लेकर भीम आर्मी के साथ तमाम अन्य संगठन भी आ गए हैं. आंदोलनकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो ऐतिहासिक आंदोलन किया जाएगा.