ओडिशा-आंध्र में चक्रवात कहर, मछुआरों की नाव पलटी, एक की मौत

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चक्रवाती तूफान तितली उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटीय तटों तक पहुंचने के बाद बंगाल की ओर बढ़ गया है. ओडिशा के गोपालपुर में आए समुद्री तूफान की चपेट में आकर मछुआरों की एक नाव डूब गई. इसमें पांच मछुआरे सवार थे, जिन्हें बचा लिया गया है. वहीं, तूफान से आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में 8 लोगों की मौत हो गई है.

ओडिशा के मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों तक तूफानी हवाओं की चेतावनी जारी की है. एहतियात के तौर पर ओडिशा से तीन लाख लोगों को तटीय इलाकों से हटाकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है.

तितली का लैंडफॉल ओडिशा के गोपालपुर से 86 किमी दक्षिण-पश्चिम में रहा. तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में बिजली के पोल और पेड़ गिरने की खबरें हैं. राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है.

तूफान से आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में भारी बारिश हुई जिससे सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए. जिले के कई मंडलों में दो सेंटीमीटर से लेकर 26 सेमी. तक बारिश दर्ज की गई है. सड़क मार्ग बड़े पैमाने पर अवरुद्ध हुआ और राज्य सड़क परिवहन निगम ने अपनी बस सेवाएं निलंबित कर दी. एसडीएमए ने मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करने के लिए टोल फ्री नंबर 18004250101 बनाया है जबकि तीन उत्तरी तटीय जिलों में नियंत्रण कक्ष चालू कर दिए गए हैं. गोपालपुर में तूफानी हवाएं 140 से 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पहुंच रही है, इसकी गति 165 किमी प्रति घंटे तक होने का अनुमान है. जानकारी के मुताबिक गोपालपुर में सुबह साढ़े चार बजे 126 किमी प्रति घंटे और कलिंगपटनम में 56 किमी प्रति घंटे की तेजी से तूफानी हवाएं दर्ज की गईं.

आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू इस तूफान का जायजा लेने के लिए गुरुवार सुबह ही अमरावती के गर्वनेंस मॉनीटरिंग सेंटर पहुंच गए थे. तूफान की रफ्तार इतनी ज्यादा है कि गोपालपुर और बेरहमपुर में कई पेड़ उखड़ गए.

‘तितली’ के ओडिशा और आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ने के साथ-साथ प्रशासन मुस्तैद हो गया है. तूफान में होने वाले नुकसान से बचने के लिए अलग-अलग जिलों में एनडीआरएफ 18 टीमें तैनात की गई हैं. ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बंगाल के कई इलाकों में तितली तूफान को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है और 3 लाख लोगों को महफूज़ जगहों पर पहुंचाया गया है.

ओडिशा सरकार ने तूफान के चलते 11 और 12 तारीख को स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला किया है. इसके अलावा तूफान से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक उच्चस्तरीय बैठक भी की है. उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तट पर ‘तितली’ के प्रभाव को देखते हुए कई ट्रेनों को रद्द किया गया है तो वहीं कुछ के रूट में बदलाव किया है.

ओडिशा सरकार पहले ही गंजम, पुरी, खुर्दा, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा जिलों के प्रशासन को चक्रवाती तूफान ‘तितली’ की राह में आने वाले सभी संभावित क्षेत्रों को खाली कराने के निर्देश दे चुकी है. मौसम विभाग द्वारा चक्रवात तितली के गंभीर स्तर पर पहुंचने की सूचना देने के बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इन पांच जिलों के जिला अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि कोई दुर्घटना ना घटे.

गंजम जिले में पहले ही जिला खाली करने की प्रक्रिया शुरू होने की समीक्षा करने के बाद पटनायक ने कहा कि सभी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को 11 -12 अक्टूबर को बंद रखा जाएगा, हालांकि शिक्षक ड्यूटी पर रहेंगे. मुख्य सचिव आदित्य प्रसाद पधी ने कहा कि राज्य में 11 अक्टूबर को होने जा रहे छात्र संघ चुनावों को रद्द कर दिया गया है.

चक्रवात और इसके साथ भारी बारिश आने की संभावना के बीच सभी अधिकारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है. तूफान और बारिश से पूरे राज्य के चपेट में आने की संभावना है.

मौसम विभाग ने कहा कि ओडिशा के गोपालपुर और आंध्र प्रदेश के कलिंगापत्तनम के बीच गुरुवार तड़के भूस्खलन होने की संभावना है. अगले 18 घंटों में गुरुवार तड़के तक इसके बहुत गंभीर स्तर पर पहुंचने का भी अनुमान है. गंजम, गजपति, पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, खुर्दा, नयागढ़, कटक, जाजपुर, भद्रक, बालासोर, कंधमाल, बौंध और ढेंकनल में गुरुवार तक तेज से मूसलाधार बारिश होने की संभावना है.

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मनुवाद की छाती पर बिरसा-फुले-अम्बेडकर…

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मनुवाद की छाती पर बिरसा-फुले-अम्बेडकर…

इस नारे को 8 अक्टूबर को जीवंत कर दिया महाराष्ट्र की अंबेडकरवादी वीरांगनाओं कांता रमेश अहीर और शीला बाई पवार ने. उन्होंने बिना किसी डर के राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर के परिसर में लगी “मानवता पर कलंक मनु” की मूर्ति की मुँह पर सरेआम कालिख़ पोती और वहीं बेख़ौफ खड़े होकर गिरफ्तारी भी दी.

मानवता पर कलंक मनु ने भारतीय समाज को पूरी तरह विकृत कर देने वाली संहिता बनाई. उसने गैर-बराबरी, भेदभाव और असमानतामूलक व्यवहार को लिपिबद्ध करते हुए दुनिया की सबसे निकृष्ट किताब मनु स्मृति लिखी जिस कारण महिलाओं और शूद्रों को सदियों से ग़ुलामी झेलनी पड़ी और आज तक झेलनी पड़ रही है. मानवता के विरोधी मनु की मूर्ति देश के केवल इसी हाईकोर्ट में लगी है जो न केवल मानवता बल्कि इस देश के संविधान के ख़िलाफ़ भी है.

राजस्थान हाईकोर्ट में वर्ष 1989 से अवैध रूप से मनु प्रतिमा लगी है, इसे हटाने के आदेश खुद कोर्ट दे चुका है, लेकिन उस पर मनुप्रेमियों ने स्टे लगवा दिया. मूर्ति के लगने के निर्णय के बाद से ही अम्बेडकरवादियों ने लगातार इसका विरोध किया है , इसी विरोध का परिणाम रहा कि ना तो इस मूर्ति का उद्घाटन हुआ और न नेमप्लेट लगी. मनु की ये मूर्ति बिना नाम की खड़ी हुई है, सवर्ण कानूनी दाँवपेंच खेल कर इस मामले को उलझाए हुए है. लेकिन अंबेडकरवादी संगठन भी बिना थके 26 सालों इसके अगेंस्ट केस लड़ रहे हैं.

वर्ष 1996 में मान्यवर कांशीराम जी ने इस मूर्ति को हटाने के लिये सभा भी की थी. बाद में महाराष्ट्र के मजदूर नेता बाबा आढाव ने वर्ष 2000 और 2005 में भी मनु मूर्ति हटाने के लिए पुणे से जयपुर तक यात्राएँ निकलवाई. राजस्थान के अंबेडकरवादी साथी भी लगातार इसके ख़िलाफ़ प्रयासरत रहे.

विरोध की इसी मुहिम को राष्ट्रीय पटल पर हमारी वीरांगनाओं ने ज़िंदा किया है मनु की मूर्ति को कालिख़ पोतकर. विरोध की यह गूँज पूरे देश में गूँजनी चाहिए. मनु की मूर्ति या विचारों अम्बेडकरवादी ही ख़त्म करेंगे. देश के बहुजन आंदोलन को बहुजन बेटियाँ ही आगे ले जाएंगी…..

इन वीरांगनाओं को क्रांतिकारी जयभीम…..

इनकी गिरफ्तारी और पुलिस प्रताड़ना के ख़िलाफ़ लामबंद होइए. इन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है. राजस्थान के बहुजन वकील और एक्टिविस्ट साथी इनकी मदद करें. #BahuajanPride #WeDareWeCar

यूपी: पूर्व बसपा विधायक की गोली लगने से मौत, शव के पास मिली पिस्टल

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बुलंदशहर सदर सीट से बसपा के पूर्व विधायक हाजी अलीम की गोली लगने से संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. पूर्व विधायक का गोली लगा शव उनके आवास के ऊपर के कमरे में बुधवार सुबह साढ़े 11 बजे बैड पर पड़ा मिला. शव के पास दो खोखे और उनकी लाइसेंसी पिस्टल पड़ी थी. हत्या या आत्महत्या को लेकर पुलिस जांच-पड़ताल कर रही है. पूर्व विधायक के पीआरओ ने घटना की तहरीर दी है.

एसएसपी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नजदीक से कनपटी पर एक गोली लगने और उसके पार होने की बात सामने आई है, इस मामले में जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा. पोस्टमार्टम के बाद रात नौ बजे पूर्व विधायक के शव को आवास विकास प्रथम के पास स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया. इस दौरान भारी संख्या में लोग मौजूद रहे.

नगर कोतवाली क्षेत्र के ऊपरकोट के मोहल्ला मिर्चीटोला निवासी हाजी अलीम (57 वर्ष) बुलंदशहर सदर सीट से बसपा के टिकट पर 2007 और 2012 में लगातार दो बार विधायक चुने गए थे. बताया जाता है कि मंगलवार रात हाजी अलीम अपने आवास पर पहली मंजिल के कमरे में सोए हुए थे. सुबह जब नहीं उठे तो करीब 11.30 बजे कमरे की खिड़की तोड़कर उनके परिजन अंदर पहुंचे. अंदर बैड पर हाजी अलीम की दायीं कनपटी पर गोली लगा खून से लथपथ शव पड़ा था. पास में पिस्टल और दो खोखे मिले. पूर्व विधायक की गोली लगने से मौत की खबर से पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया.

एसएसपी समेत एसपी सिटी, एसपी क्राइम, सीओ और कोतवाल मौके पर पहुंचे. फोरेंसिक टीम ने मौके पर जांच-पड़ताल कर कुछ साक्ष्य भी जुटाए. पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पूर्व विधायक के पीआरओ रईस अब्बासी ने नगर कोतवाली में पूर्व विधायक का गोली लगा शव कमरे में मिलने की तहरीर दी है. उधर, रात करीब आठ बजे आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार पूर्व विधायक की कनपटी पर नजदीक से एक गोली लगने की बात सामने आई है. पोस्टमार्टम के पास आवास विकास प्रथम के पास स्थित कब्रिस्तान में पूर्व विधायक के शव को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया. इस दौरान हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी.

पूर्व विधायक का गोली लगा शव उनके आवास पर कमरे में मिला है. मौके से उनका लाइसेंसी पिस्टल और दो खोखे मिले हैं. तीन डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पास से कनपटी पर गोली लगने की बात सामने आई है. अभी हादसा, आत्महत्या या हत्या पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता, जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ होगी.

कनपटी पर नजदीक से लगी गोली, खुदकुशी अथवा हादसे की आशंका

पूर्व विधायक हाजी अलीम की संदिग्ध मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पूरा मामला खुदकुशी अथवा हादसे की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कनपटी में नजदीक से गोली लगने का पता चला है. इसके अलावा एक ही गोली सिर से आरपार हो जाने की भी पुष्टि हुई है. ऐसे में दो खोखे में से एक पुराना होने की आशंका है.

बुधवार शाम को चिकित्सकों के पैनल ने पूर्व विधायक हाजी अलीम के शव का पोस्टमार्टम किया. पोस्टमार्टम के बाद शव को पीड़ित परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया, वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट को पुलिस के अवलोकन के लिए भेज दिया गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पूरा मामला खुदकुशी अथवा हादसे का प्रतीत हो रहा है. एसपी सिटी डा.प्रवीन रंजन सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के सिर में बेहद नजदीक से गोली लगने का पता चला है.

गोली का एंट्री और एग्जिट पाइंट भी एक-एक मिला है यानि एक ही गोली सिर से आरपार हुई है. ऐसे में प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुदकुशी अथवा हादसे में मौत की आशंका है. फिर भी पुलिस अन्य बिंदुओं पर जांच कर रही है. जल्द ही जांच पूरी कर घटना की तह तक पहुंचा जाएगा.

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बीकानेर में राहुल की रैली, BSP के वोट बैंक में सेंध की कोशिश

राजस्थान विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राज्य के दौरे पर हैं. वो बुधवार को अपने दौरे के दूसरे दिन दलितों के मजबूत गढ़ बीकानेर में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. जबकि राहुल से पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह गुरुवार को बीकानेर में दलित सम्मेलन के जरिए जातीय गणित साधने की कोशिश कर चुके हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बुधवार को बीकानेर की संकल्प रैली से पहले राजधानी जयपुर में यूथ कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बैठक में शिकरत शामिल हुए. इस दौरान राहुल ने इस बैठक में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यूथ कांग्रेस की अहम भूमिका बताई.

बीकानेर की संकल्प रैली के जरिए राहुल ने राज्य की राजनीतिक समीकरण को साधने की योजना बनाई है. बीकानेर दलित बहुल इलाका माना जाता है. विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीकानेर रैली कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

बता दें कि राजस्थान में करीब 17.8 दलित फीसदी मतदाता हैं. इनमें 3.9 फीसदी हिस्सा गांवों में और 3.9 फीसदी हिस्सा शहरों में है. राज्य में कुल 200 सीटें हैं. इनमें 142 सीट सामान्य, 33 सीट अनुसूचित जाति और 25 सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं.

राजस्थान में दलित मतदाता बीजेपी का परंपरागत वोटर माना जाता है, लेकिन उपचुनाव में पार्टी से उसका मोहभंग हुआ है. इसी का नतीजा था कि कांग्रेस को जीत और बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा था. ऐसे में बीजेपी राजस्थान में अपने परंपरागत वोट बैंक दलित, राजपूत और ब्राह्मण के खिसकने से परेशान है. बीते एक दशक में दलित वोटबैंक कांग्रेस को छोड़ बीजेपी के साथ जुड़ गया है. लेकिन इस बार दलित बीजेपी का मोह छोड़ फिर से अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस की तरफ लौट सकते हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने ऐसे में जातीय समीकरण साधने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. दलित समुदाय का सबसे ज्यादा वोट इसी बीकानेर संभाग में है. इसके अलावा कई सीटों पर निर्णायक भूमिका में है. बीकानेर संभाग में दो लोकसभा क्षेत्र बीकानेर और श्रीगंगानगर दलित समुदाय के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा 5 विधानसभा सीटें भी दलित समुदाय के आरक्षित हैं.

दलित सीटों से ज्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि बीकानेर संभाग में 19 विधानसभा सीटों पर दलितों का साथ आना या छिटकना हार-जीत तय करने में अहम भूमिका अदा करता है.

SC/ST एक्ट को लेकर हुए आंदोलन में जिस तरह से दलितों पर कार्रवाई हुई है, उससे वे खासा नाराज हैं. ऐसे में कांग्रेस लगातार दलितों को साधने की कोशिश में है. राहुल इसी नाराजगी को कैश कराने की जुगत में हैं.

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दलित-आदिवासी वोटों के बिखराव की यह पटकथा कौन लिख रहा है?

जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, उन राज्यों में अचानक कई दलित, आदिवासी, बहुजन, मूलनिवासी संज्ञाओं वाली राजनीतिक पार्टियों का प्रवेश, उद्भव हो गया है और उनके नवनियुक्त नेतागण सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा इस तरह कर रहे हैं, जैसे कि वे हेलिकॉप्टर में भर कर आसमान से जमीन पर उम्मीदवारों का छिड़काव कर देंगे.

दलित बहुजन मूलनिवासी नेताओं के तूफानी हवाई दौरे शुरू हो चुके हैं. नामचीन और बेनाम, दोनों ही वैरायटी के नेताओं का भारी मात्रा में राजस्थान सहित सभी चुनावी राज्यों में पदार्पण हो रहा है. इनमें से कुछ तो निजी विमानों व चॉप्टर का आनंद भी उठा रहे हैं. हाल यह है कि जिनको कोई बस में न बुलाएं, उनके लिए हेलीकॉप्टर भेजे जा रहे हैं. जमीन से आसमान तक आनंद ही आनंद है, मौजां ही मौजां.

आचार संहिता लागू हो गई है, राज्य सरकारों द्वारा 2 अप्रैल के केस वापस लेने का वादा धरा का धरा रह गया है. इससे दलित आदिवासी वर्ग में नाराजगी का बढ़ना स्वाभाविक मानते हुए भी भाजपा की सत्तारूढ़ सरकारों ने यह खतरा उठा लिया है. वे इस मुद्दे पर एकदम मौन हैं. उनकी खामोशी अजा/जजा वर्ग के फंसे हुए आंदोलनकारियों को आक्रोशित कर रही है, वहीं बड़ी संख्या में अन्य वर्गों को तुष्ट भी कर रही है.

electionबहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित बसपा कांग्रेस का महागठबंधन बनने से पूर्व ही टूट गया है, वो भी एक ऐसे व्यक्ति को दोष देते हुए, जिसे उनकी पार्टी भी सीरियस नहीं लेती. पर बहन मायावती ने कांग्रेस अध्यक्ष व सप्रंग अध्यक्षा के प्रति नरम रुख रखते हुए सारा ठीकरा दिग्विजय सिंह पर फोड़ दिया है और राजस्थान व मध्यप्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. रणनीति अब यह है कि बहुजन समाज के तमाम संघर्षशील लड़ाकू लोगों को टिकट दे कर सारी सीटें लड़ी जाए.

एक और घटना पर गौर करना भी लाज़मी होगा कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के एक अनाम से गांव की दो अधेड़ महिलाएं जयपुर पहुंची और उन्होंने हाईकोर्ट में लगी मनु की मूर्ति पर काला रंग स्प्रे कर दिया और पकड़ी भी गई. वो अभी पुलिस हिरासत में हैं. उनके पक्ष में माहौल खड़ा किया जा रहा है, मूर्तियों के मान अपमान की राजनीति फिर से लौटने की संभावना प्रबल हो रही है. इसके साथ-साथ सुनियोजित तरीके से हर विधानसभा क्षेत्र से एक दलित या आदिवासी उम्मीदवार किसी न किसी वैकल्पिक दल या समूह से उतारने की कोशिश हो रही है, ताकि वह 5 से 15 हजार वोटों का कबाड़ा करके भाजपा की जीत को पक्का कर दे.

उपरोक्त बातों को अलग अलग देखा जाए तो यह स्वाभाविक सी प्रक्रिया लगती है, मगर इनको जोड़कर देखा जाये तो कुछ और ही तस्वीर बनती दिखलाई पड़ती है. ऐसा लगता है कि कोई शातिर जमात सुव्यवस्थित रूप से इस पटकथा को रच रहा है, जिसके ध्वजवाहक बने लोग दरअसल लीडर नहीं बल्कि डीलर हैं और इस नाटक को मासूम लोग बिना समझे मंचित करने को उतावले हो रहे हैं. सवाल है कि आखिर वो कौन लोग, समूह या ताकतें है जो राजस्थान की अनुसूचित जाति के 17 प्रतिशत आबादी वाले मतदाताओं और 13 फीसद वाले जनजाति वोटरों की ताकत को बिखेरने का उच्चस्तरीय षड्यंत्र रच रहे हैं? इनकी पहचान व पर्दाफाश होना बहुत जरूरी है.

अजीब प्रहसन चल रहा है. मंच पर भाजपा को रोकने की बातें, कसमें और वादे किए जा रहे हैं और धरातल पर जो काम हो रहा है, उससे चुनावी राज्यों में सीधे सीधे भाजपा की सत्ता में वापसी सुनिश्चित हो रही है. इसलिए अब शायद वक़्त आ गया है जब हमें खुलकर यह जरूर पूछना चाहिए कि पार्टनर लोगों आपका एक्चुअल प्लान क्या है? करना क्या चाहते हो? ये मिशन, विचारधारा, जन गोलबंदी आदि इत्यादि के बड़े बड़े शब्दों की आड़ में क्या करने जा रहे हो? कहीं कोई और लोग तो एजेंडा फिक्स नहीं कर रहे हैं? यह देखना बेहद जरूरी है.

कोई क्यों मुंबई, नागपुर, दिल्ली या लखनऊ में बैठ कर तय कर रहा है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ का दलित आदिवासी अपने मताधिकार का कैसे उपयोग करेगा? चुनावी राज्य के बजाय किन्ही अन्य राज्यों में बैठे लोग किस मकसद से एजेंडा तय कर रहे है और क्यों? दलित आदिवासी बहुजन मूलनिवासी वोटों के इन सौदागरों से पूछिए कि आप होते कौन हैं हमारे बारे में निर्णय करने वाले? हमें मूर्ख या गुलाम समझ रखा है जो हमारे नाम पर कोई और, कहीं और फैसला करोगे?

नहीं, अब यह नहीं चलने वाला. राजस्थान वाले साथी राजस्थान में तय करेंगे, एमपी वाले एमपी में और छतीसगढ़ वाले छत्तीसगढ़ में सब कुछ तय करेंगे. ‘वोट हमारा – निर्णय तुम्हारा’ नहीं चलेगा। हम सामूहिक रूप से निर्णय करेंगे, हम यह तय करेंगे कि कौन हमारे राज्यों में संविधान विरोधी, दलित आदिवासी विरोधी भाजपा को रोक सकता है? हम ऐसे जिताऊ, टिकाऊ और गैर बिकाऊ तथा 2 अप्रैल के आंदोलन में हमारे साथ खड़े रहे उम्मीदवारों को चुनेंगे, यही हमारा मापदंड है और यही हमारा गठबंधन है. बाकी तो ठगबंधन है, डीलें हैं और डीलरशिप के मामले हैं, जिन्हें समझना अब इतना मुश्किल भी नहीं हैं.

– भंवर मेघवंशी (संपादक – शून्यकाल)

तीन राज्यों के चुनावी सर्वे से उड़ी भाजपा की नींद

PC- thehindu

नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले तीन महत्वपूर्ण राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के सर्वे ने भाजपा की नींदे उड़ा दी है. चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद कई सर्वे सामने आए हैं. इसके मुताबिक भाजपा सिर्फ एक राज्य मध्यप्रदेश में वापसी कर सकती है, जबकि छत्तीसगढ़ और राजस्थान की सत्ता भाजपा से छिनने की पूरी संभावना है. इन दोनों राज्यों में कांग्रेस के सरकार बनाने की संभावना जताई जा रही है. चुनावी नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे.

मध्य प्रदेश के लिए हुए सर्वे में कुल 230 सीटों में से भाजपा को 126 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं कांग्रेस 97 सीटें हासिल कर सकती है. इसके साथ ही सात सीटें अन्य को मिलने की संभावना है. सी वोटर, आई.ई.टेक ग्रुप और टाइम्स नाऊ के सर्वे में यह बात सामने आई है.

वहीं राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर हुए सर्वे में 200 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस को इस बार 129 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है जबकि भाजपा को सिर्फ 63 सीटें मिलने की बात कही जा रही है. सी वोटर और टाइम्स नाऊ के सर्वे में यह अनुमान लगाया गया है. साल 2013 के चुनाव की बात करें तो तब कांग्रेस को सिर्फ 21 सीटें मिली थी जबकि बीजेपी को 163 सीटें मिली थीं. राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी एक दल को 101 सीटों की जरूरत होगी.

इसके साथ ही छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सी वोटर, आई.ई.टेक ग्रुप और टाइम्स नाऊ के सर्वे के औसत में यह बात सामने आई है कि यहां 90 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को इस बार 39 सीटें मिल सकती है जबकि कांग्रेस को बहुमत से 1 सीट ज्यादा यानी 47 सीटें मिलने की संभावना है. अन्य के खाते में 4 सीटें जा सकती हैं. इस सर्वे के सामने आने के बाद भाजपा नेताओं में खलबली मच गई है. हालांकि असल नतीजें क्या होंगे, यह तो 11 दिसंबर को चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही पता चल सकेगा.

गुजरातः साबरकांठा मामले की आग, बिहार-UP के लोगों का पलायन जारी

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गुजरात से पलायन करते बिहार के लोग (फोटो क्रेडिटः पीटीआई)

अहमदाबाद। उत्तर भारतीयों पर गुजरात में हो रहा हमला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. गुजरात सरकार भले ही मामले को संभाल लेने का दावा कर रही हो, प्रदेश भर में हिंसा जारी है. मंगलवार को सूरत और वडोदरा में हिंसा के मामले सामने आए. वडोदरा में तो बिहार के लोगों से भरी ट्रेन पर हमला कर दिया गया. ट्रेन की 6 बोगियों में जमकर तोड़फोड़ की गई.

मंगलवार को ही सूरत, अहमदाबाद समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों से लोग छोड़कर लोग रवाना हो चुके हैं. लोगों की मजबूरी का फायदा फैक्ट्रियों के मालिक भी जमकर उठा रहे हैं. तमाम स्थानीय कंपनियों और फैक्ट्रियों में लोगों ने तनख्वाह नहीं देने की शिकायत की है. हमला बढ़ता देख वो जल्दी-जल्दी में बिना अपनी तनख्वाह लिए ही घर वापस जा रहे हैं. अभी तक इन घटनाओं को लेकर पूरे राज्य में कुल 68 FIR दर्ज हो चुकी हैं, जबकि 500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

दूसरी ओर इस मामले में राजनीति भी तेज हो गई है. कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर ले रही हैं. तो वहीं बीजेपी ने अल्पेश ठाकोर के बहाने इन घटनाओं का जिम्मेदार कांग्रेस को ही बताया है. गौरतलब है कि गुजरात के साबरकांठा जिले में 28 सितंबर को एक बच्ची के साथ बलात्कार हुआ था और इस आरोप में बिहार निवासी मजदूर को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद से ही गुजरात में हिन्दी भाषी लोगों पर हिंसा बढ़ गई.

क्या बिहारी होना गुनाह है?

गुजरात बिहार के लोगों पर हो रहे अत्याचार और उसके बाद उनके पलायन को लेकर सुर्खियों में है. हफ्ते भर पहले 28 सितंबर को बिहारियों के खिलाफ भड़की हिंसा अब तक शांत नहीं हो सकी है. या यूं भी कहा जा सकता है कि इस हिंसा को शांत होने नहीं दिया जा रहा है. बिहार के लोगों पर हमला जारी है, और गुजरात से उनका पलायन भी जारी है.

दरअसल, गुजरात के साबरकांठा जिले में 28 सितंबर को 14 वर्षीय बालिका के साथ दुष्कर्म के मामले में बिहार के एक युवक का नाम आया था. इसके बाद पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया था. यह गलत काम था और गुनहगार को उसकी सजा जरूर मिलनी चाहिए. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक व्यक्ति के अपराध के लिए उस प्रदेश के सभी लोगों को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है? इस घटना के बाद जिस तरह बिहार से ताल्लुक रखने वाले हर व्यक्ति को निशाना बनाया जा रहा है, उसके बाद क्या यह सोचा जाए कि गुजरात में रहने वाला बिहार का हर व्यक्ति बलात्कारी है. या फिर क्या गुजरात के लोग यह दावा कर सकते हैं कि गुजरात में होने वाले यौन हिंसा में गुजरात का कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं है? जाहिर सी बात है कि दोनों बातें झूठी है.

गुजरात में रह रहे बिहार और उत्तर भारतीय लोगों को 10 अक्टूबर तक गुजरात छोड़ने की धमकी दी गई है. कहा गया है कि यदि 10 अक्टूबर तक उन्होंने गुजरात नहीं छोड़ा तो उनके हाथ-पैर काट दिए जाएंगे. मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस धमकी के बाद अब तक 50 हजार लोग गुजरात से कूच कर गए हैं. इसमें वो तमाम लोग भी शामिल हैं, जो पिछले 5, 10 और 15 साल से गुजरात में नौकरी कर रहे थे. खुद को गुजरात का अंग मान चुके थे. उन्होंने अपने पूरे जीवन में गुजरात में ऐसा माहौल नहीं देखा, जो अब देखने को मिल रहा है.

बीते 10 सालों के आंकड़े बताते हैं कि पेट की खातिर बिहार से 7 लाख लोग गुजरात पहुंचे. सूरत जिसे हीरों के कारोबार के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, वहां तो गुजराती से कहीं ज्यादा 56 फीसदी लोग बिहार और उत्तर भारत से हैं. इसकी वजह बिहार के लोगों का मेहनतकश होना है. वो जहां जाते हैं, अपनी मेहनत के बूते अपना एक मुकाम बना लेते हैं. देश के तमाम शहरों में अगर बिहारी मजदूर हैं तो बिहार के लोग वहां अधिकारी भी हैं.

लेकिन बीते दस दिनों में बिहारियों की सारी मेहनत, उनकी सारी ईमानदारी को लोग भूल चुके हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अकेले गुजरात के मेहसाणा से बिहार और उत्तर भारत के 200 परिवारों ने अपने घर खाली कर दिए हैं और वे अपने अपने घरों को लौट गए हैं. कल तक ये सभी गुजरात में बसने का सपना देख रहे थे. इनके बच्चे वहां के स्कूलों में पढ़ रहे थे. इनके दोस्त भी वही गुजराती थे, जो आज उन्हें मार कर भगा रहे हैं. उन पर हमले कर रहे हैं. ये सभी एक ही सवाल पूछ रहे हैं, क्या बिहारी होना सबसे बड़ा गुनाह है? बिहारी गाली क्यों है?

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शिवसेना कार्यकर्ता बसपा में शामिल

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की दिल्ली प्रदेश इकाई को बड़ी सफलता मिली है. दिल्ली में सक्रिय शिवसेना के नेताओं ने बहुजन समाज पार्टी में आस्था जताते हुए बसपा ज्वाइन कर लिया. सोमवार 8 अक्टूबर को दर्जन भर से ज्यादा शिवसैनिकों ने शिवसेना छोड़ कर बसपा की सदस्यता ली.

प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार सिंह ने ‘दलित दस्तक’ को इसकी जानकारी देते हुए खुशी जताई. उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रदेश के सभी पदाधिकारी प्रदेश में लगातार पार्टी को बढ़ाने में लगे हैं. इन्हीं कोशिशों की बदौलत पार्टी लगातार लोगों को जोर रही है. शिवसेना से बसपा में शामिल नेताओं के बारे में उन्होंने कहा कि सभी ने बसपा की सदस्यता लेते हुए पार्टी की नीतियों में यकीन जताया है और 2019 में बहन कु. मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लिया है.

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मा. कांशीराम के परिनिर्वाण पर मायावती ने लिया संकल्प

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें याद किया. इस मौके पर आम तौर पर लखनऊ में रहने वाली मायावती आगामी चुनावों के कारण दिल्ली में ही मौजूद थीं, जहां उन्होंने पार्टी के केंद्रीय कार्यालय स्थित बहुजन प्रेरणा केंद्र जाकर मान्यवर कांशीराम जी को श्रद्धांजली दी. साथ ही बसपा संस्थापक की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजली देने के लिए देश भर के कार्यकर्ताओं का आभार जताया. इस दौरान उन्होंने आगामी चुनावों को लेकर एक बार फिर अपना संदेश साफ तौर पर दे दिया.

श्रद्धांजली देने के बाद वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने मान्यवर श्री कांशीराम जी के सपनों का भारत बनाने के लिये बीजेपी जैसी घोर जातिवादी, साम्प्रदायिक, अहंकारी व विद्वेषपूर्ण सरकार को सत्ता से बाहर करने के संकल्प को दोहराया. उन्होंने कहा कि बी.एस.पी. दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों एवं सर्वसमाज के गरीबों, मजदूरों, किसानों आदि के सम्मान व स्वाभिमान के साथ कभी भी कोई समझौता नहीं कर सकती, चाहे उसके लिये कांग्रेस व बीजेपी सरकारों का कितना ही विद्वेष व प्रताड़ना झेलना पड़े.

गठबंधन पर एक बार फिर अपने बयान में उन्होंने कहा कि भाजपा को हटाने के लिए ही चुनावी गठबन्धनों के लिये भी हमारी पार्टी ने सम्मानजनक सीटें मिलने मात्र की शर्त रखी. इसका मतलब साफ तौर पर यह है कि गठबन्धन में बी.एस.पी. सीटों के लिए भीख नहीं मांगेगी. ऐसा नहीं होने पर वह अकेले अपने बलबूते पर ही चुनाव लड़ती रहेगी.

उन्होंने ऐलान किया कि बाबासाहेब और कांशीराम जी के बताये रास्ते पर पूरे जी-जान से चलती रहेगी तथा इन मामलों में कभी भी किसी भी ताक़त के आगे ना तो टूटेगी और ना ही झुकेगी, बल्कि हर समस्या व षड़यन्त्र का सामना करते हुये सत्ता की मास्टर चाबी को प्राप्त करने के लिए कोशिश जारी रखेंगी.

पार्टी प्रमुख ने कांग्रेस और भाजपा पर यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस व बीजेपी दोनों ही पार्टियां बी.एस.पी. व इसके नेतृत्व को बदनाम व राजनीतिक तौर पर कमजोर करने के लिए साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों हथकण्डों का लगातार इस्तेमाल करती रहती हैं. खासकर चुनावों के समय तो यह प्रयास और भी ज़्यादा सघन व विषैला हो जाता है, जिससे काफी ज्यादा सावधान रहने की सख़्त ज़रूरत है.

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गाड़ी आगे चलाने पर जातिवादियों ने ले ली दलित युवकी की जान

शिमला। हिमाचल प्रदेश से एक परेशान कर देने वाली खबर सामने आई है. खबर यह है कि एक दलित युवक को जातिवादी युवकों ने इसलिए पीट-पीट कर मार डाला, क्योंकि वह अपनी गाड़ी उनसे आगे चला रहा था. घटना शिमला से करीब 120 किलोमीटर दूर नेरवा इलाके में बीते शुक्रवार को घटी.

पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक 24 साल का रजत अपनी मां को लेने के लिए जा रहा था। जब वह नेरवा बाजार से गुजर रहा था तो पीछे से एक स्विफ्ट कार में आ रहे तीन स्थानीय युवकों ऋषभ भिकटा (19) ,कार्तिक लोथता (20) और निखिल, जिनका संबंध राजपूत समाज से था जोर जोर से हॉर्न बजाकर साइड मांगने लगे. वो रजत को लगातार गालियां देने लगें कि दलित होकर वह कैसे उनके आगे चल सकता है.

चूंकि सड़क तंग थी इसलिए रजत पास नहीं दे पाया. इससे भड़के तीनों जातिवादी गुंडे रजत को गाड़ी से खींचकर पीटने लगे. हालांकि तब ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात एक जवान ने बीच-बचाव कर मामला सुलझा दिया, लेकिन आरोपी अगले मोड़ पर रुककर रितेश का इंतजार करने लगे. आरोपियों ने बीच सड़क में अपनी गाड़ी रोककर रितेश का रास्ता रोक लिया और उसे बेरहमी से पीटकर फरार हो गए. थोड़ी ही देर में जब रितेश के परिजनों को पता चला तो वह घटनास्थल पर पहुंचे और उसे खून से लतपथ बेहोश पाया. उसे नेरवा के स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.

पुलिस ने तीनों आरोपियों ऋषभ भिकटा ,कार्तिक लोथता और निखिल को गिरफ्तार कर लिया है. उनके खिलाफ IPC की धारा 341, 223, 506, 302 और SC/ST एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सिरमौर जिला के बसपा नेता को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया था.

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मोदी के गुजरात में बिहार-यूपी के लोगों के साथ मारपीट

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ मारपीट के बाद भगदड़ मच गई है. इन दोनों प्रदेशों के लोग गुजरात छोड़कर वापस अपने राज्य लौटने लगे हैं. इसके बाद सियासत भी गरमा गई है.

दरअसल गुजरात के हिम्मतनगर में पिछले हफ्ते 14 महीने की एक बच्ची से बलात्कार की घटना हुई थी. इस मामले में बिहार के एक शख़्स का नाम आया था, जिसे बाद में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. इस वाकये के बाद गुजरात के कई इलाकों में रहने वाले यूपी और बिहार के प्रवासियों पर स्थानीय लोगों ने हमला शुरू कर दिया है. खासकर गांधीनगर, अहमदाबाद, पाटन, साबरकांठा और मेहसाणा इलाक़े से सैकड़ों प्रवासियों के साथ मारपीट की खबर है, जिसके बाद वो गुजरात छोड़कर वापस अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने उत्तर भारतीयों पर हमले के मामले में तकरीबन 342 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है.

घटना के बाद सियासत गरमा गई है. पीएम मोदी के गृह राज्य में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के लोगों पर हमले को लेकर कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने कहा कि पीएम को यह नहीं भूलना चाहिए कि कल को उन्हें वोट मांगने के लिए वाराणसी ही जाना है. Read it also-हमें सीवर/सेप्टिक टैंको में मारना बंद करो!
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भारत ने लगातार तीसरी बार अंडर-19 एशिया कप पर किया कब्जा

नई दिल्ली। भारत की अंडर-19 क्रिकेट टीम ने एशिया कप खिताब जीत लिया है. रविवार को उसने श्रीलंका को 144 रनों से रौंदकर छठी बार एसीसी अंडर-19 एशिया कप पर कब्जा किया. अंडर-19 भारतीय टीम ने इससे पहले 2016, 2014, 2012 (पाक के साथ संयुक्त रूप से), 2003 और 1989 में यह खिताब जीता था.

मीरपुर के शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 50 ओवरों में 304/3 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया. लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम 38.4 ओवरों में 160 रनों पर सिमट गई. भारत की ओर से स्पिनर हर्ष त्यागी ने सर्वाधिक 6 विकेट चटकाए.

अंडर-19 भारतीय टीम की ओर से पांच में से चार बल्लेबाजों ने अर्धशतक जमाए. सलामी जोड़ी यशस्वी जायसवाल (85), अनुज रावत (57) के अलावा विकेटकीपर बल्लेबाज व कप्तान सिमरन सिंह (नाबाद 65) और आयुष बदोनी ( नाबाद 52) ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं.

भारतीय टीम ने एक समय 45 ओवरों में 225/3 रन बनाए थे, लेकिन आखिरी पांच ओवरों में सिमरन सिंह और आयुष बदोनी 79 रन जुटाकर टीम को 300 के पार ले जाने में कामयाब रहे. सिमरन ने 37 गेंदों की पारी में 4 छक्के जड़े, जबकि बदोनी ने 28 गेंदों की पारी में ताबड़तोड़ 5 छक्के उड़ाए.

इससे पहले यशस्वी और अनुज की जोड़ी ने भारत को शानदार शुरुआत दी और 121 रनों की साझेदारी की. भारत की अंडर-19 टीम ने सेमीफाइनल में बांग्लादेश को दो रनों से हराकर एशिया कप के फाइनल में जगह बनाई थी.

जबाव में श्रीलंका ने लगातार अंतराल पर विकेट गंवाए. निशान मुदुसखा फर्नांडो ने 49 रनों की पारी खेली. हर्ष त्यागी (10-0-38-6) के अलावा सिद्धार्थ देसाई ने 2 विकेट चटकाए. मोहित जांगड़ा को एक सफलता मिली, जबकि एक खिलाड़ी रन आउट हुआ.

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RRB group d admit card 2018: 10 अक्टूबर के एडमिट कार्ड जारी, यूं करें डाउनलोड

नई दिल्ली। आरआरबी ग्रुप डी भर्ती परीक्षा के 10 अक्टूबर को होने जा रहे सीबीटी (कंप्यटूर बेस्ड टेस्ट) के एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं. गौरतलब है कि परीक्षा से चार-चार दिन पहले एडमिट कार्ड जारी किए जा रहे हैं. रेलवे इससे पहले जिस-जिस दिन परीक्षा है, उसके एडमिट कार्ड जारी कर चुका है. तमाम आरआरबी 10 अक्टूबर की तक की परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर चुके हैं.

इस बीच रेलवे ने 05 अक्टूबर शुक्रवार को 16 अक्टूबर के बाद का ग्रुप डी भर्ती परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया. लेकिन अभी भी ये पूरा जारी नहीं किया गया है. 17 अक्टूबर से 26 अक्टूबर तक की परीक्षा तिथियों, शहर और शिफ्ट की डिटेल्स जारी की गई हैं. 27 और 28 अक्टूबर को परीक्षा नहीं होगी. 29 अक्टूबर को और उसके बाद किस उम्मीदवार की परीक्षा किस दिन होगी, ये जानकारी 18 अक्टूबर के पता चलेगी. यानी 28 अक्टूबर के बाद की परीक्षा तिथि, शहर और शिफ्ट की डिटेल्स 18 अक्टूबर को जारी होगी.

rrb group d admit card 2018: यूं डाउनलोड करें

STEP 1- उम्मीदवार ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक कर अपने आरआरबी की वेबसाइट पर जाएं. होम पेज पर दिए गए Click here to Download E-Call Letter के लिंक पर क्लिक करें. STEP 2 – अपना यूजर आईडी और जन्मतिथि डालें. STEP 3- लॉग-इन करते ही आपका एडमिट कार्ड आपके सामने आ जाएगा. इसका प्रिंट आउट ले लें. परीक्षा में इसे साथ लेकर पहुंचे.

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राजस्थान, MP समेत 5 राज्यों में चुनाव की घोषणा, 11 दिसंबर को नतीजे

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया है. राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में नवंबर से दिसंबर के बीच मतदान पूरा हो जाएगा, जिसके बाद 11 दिसंबर को सभी राज्यों के नतीजे एक साथ घोषित किए जाएंगे. चुनाव आयोग की घोषणा के साथ आज से ही इन पांच राज्यों में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है.

छत्तीसगढ़

पहला चरण: छत्तीसगढ़ में पहले चरण के मतदान के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव अधिसूचना जारी होगी. 23 अक्टूबर को नामांकन पत्र भरने की आखिरी तारीख है और 26 अक्टूबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे. इस चरण में 18 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा.

दूसरे चरण: छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण के मतदान के लिए 26 अक्टूबर को चुनाव अधिसूचना जारी होगी. 2 नवंबर को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है. जबकि 5 नवंबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे. इस चरण में 72 विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होगा.

मध्य प्रदेश- मिजोरम चुनाव

मध्य प्रदेश में एक ही चरण में मतदान होगा. यहां 230 विधानसभा सीट हैं, जिनके नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 9 नवंबर है, जबकि 14 नवंबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे. यहां सभी सीटों पर एक साथ 28 नवंबर को मतदान होगा. मिजोरम में भी मध्य प्रदेश के साथ ही मतदान कराया जाएगा.

राजस्थान-तेलंगाना चुनाव

राजस्थान में 12 नवंबर को चुनाव अधिसूचना जारी होगी. जिसके बाद नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 19 नवंबर होगी. नाम वापसी 22 नवंबर तक होगी. इन दोनों राज्यों में 7 दिसंबर को मतदान होगा.

इन सभी पांच राज्यों में 11 दिसंबर को मतगणना होगी.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि 15 दिसंबर से पहले चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. उन्होंने बताया कि चुनाव में आधुनिक ईवीएम व वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही मतदान की वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी.

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वर्धा के बौद्ध अध्ययन केन्द्र के अध्‍ययन-अध्‍यापन का दसवें वर्ष का समारोह सम्‍पन्‍न 

वर्धा। 5 सितंबर 2018: महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के डॉ. भदन्‍त आनंद कौसल्‍यायन बौद्ध अध्‍ययन केंद्र में अध्‍ययन अध्‍यापन के दस वर्ष पूरे होने पर 5 सितंबर को कुलपति प्रो. गिरीश्‍वर मिश्र की मुख्‍य उपस्थिति में समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्‍यक्षता संस्‍कृति विद्यापीठ के अधिष्‍ठाता प्रो. एल. कारुण्‍यकारा ने की. इस अवसर पर प्रतिकुलपति प्रो. आनंद वर्धन शर्मा एवं वरिष्‍ठ प्रोफेसर मनोज कुमार विशिष्‍ठ अतिथि के रूप में तथा केंद्र के संस्‍थापक प्रो. एम. एल. कासारे मुख्‍य वक्‍ता के रूप में उपस्थित थे. कार्यक्रम का संचालन केंद्र प्रभारी निदेशक डॉ. सुरजीत कुमार सिंह ने किया. बुद्ध वंदना से कार्यक्रम का प्रारंभ भिक्षु राकेश आनंद एवं मुदिता बोधी ने की.

नागपुर में अशोक विजयदशमी के दिन 14 अक्टूबर, 1956 को बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर ने अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी. उसी ऐतिहासिक स्थल से मात्र 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वर्धा. जहाँ वर्धा की राष्‍ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा 14 अप्रैल, 2004 को बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर की जयंती के दौरान कार्यक्रम के अध्‍यक्ष व महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय के तत्‍कालीन कुलपति प्रो. जी. गोपीनाथन द्वारा भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर के अगाध हिंदी-प्रेम एवं हिंदी के प्रति उनकी सं‍वैधानिक प्रतिबद्धता को देखकर और भारत में बौद्ध धम्‍म एवं दर्शन को पुनर्जीवित करने के, उनके कार्य को सुदृढ़ आधार प्रदान करने के लिए विश्‍वविद्यालय में ‘डॉ. भदन्‍त आनन्‍द कौसल्‍यायन बौद्ध अध्‍ययन केन्द्र’ की आधारशिला रखी गई. इसका प्रस्ताव महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा और राष्ट्र भाषा प्रचार समिति, वर्धा द्वारा अगले वर्ष 2005 में डॉ. भदंत आनंद कौसल्यायन की जन्मशताब्दी समारोह 29-30 मार्च, 2005 को मनाते हुए, एक प्रस्ताव पारित किया कि वर्धा में उनके नाम से एक बौद्ध अध्ययन केंद्र स्थापित किया जाए. इस केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव को महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की नई दिल्ली में आयोजित चौथी विद्या परिषद ने तत्‍कालीन कुलपति प्रो.जी.गोपीनाथन की अध्यक्षता में 14 जुलाई, 2005 को पास किया. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली की इपोक मेकिंग सोशल थिंकर्स योजना के अंतर्गत 11वीं पंचवर्षीय योजना में अनुदान की स्‍वीकृति मिली. 05 अक्‍टूबर, 2008 को विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्‍यक्ष प्रो. सुखदेव थोरात ने वर्धा आकर केंद्र के प्रथम पाठ्यक्रम बौद्ध अध्‍ययन में स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा की कक्षायें विधिवत आरंभ करने का उद्घाटन किया.

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बिहार के छपरा में जातीय गुंडागर्दी

छपरा (बिहार)। सारण जिले गड़खा प्रखंड में एक मामूली सी बात पर सवर्ण राजपूतों ने जातीय गुंडागर्दी का अपना चेहरा दिखा दिया. जातिवादी गुंडों ने प्रखंड के ईश्वरीय उच्च विद्यालय में पढ़ने वाले दलित समाज के छात्र के साथ मारपीट की. हैरत की बात यह है कि दलित छात्र को भरे स्कूल में प्रिंसिपल और अन्य शिक्षकों के सामने स्कूल से खिंचकर पीटा गया. हालांकि मामला सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और अंचलाधिकारी ने स्कूल में पहुंच कर मामले की पूरी जानकारी ली. गड़खा पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए झौवा बसंत के रहने वाले आरोपी गणेश सिंह को गिरफ्तार कर लिया. घायल छात्र बनवारी बसंत का रहने वाला है और उसका नाम विकास कुमार मांझी है. विकास हाई स्कूल में आठवीं का छात्र है.

आरोपी गणेश सिंह फाइल फोटो

जानकारी के अनुसार गड़खा प्रखंड के ईश्वरीय हाई स्कूल में बुधवार को दर्जनों बच्चो फुटबॉल खेल रहे थे. इसी क्रम में विकास कुमार मांझी अपने पास आई गेंद को संभाल नहीं पाया और उससे बॉल छूट कर एक युवती को लग गई. युवती ने यह बात अपने पिता एवं भाई को बताई. जिस पर वो आक्रोशित होकर स्कूल में आये और हंगामा करने लगे. उस दौरान हेडमास्टर ने समझाकर मामले को शांत करा दिया. लेकिन इसके बाद गुरूवार को दोपहर में लंच के समय युवती के पिता, भाई सहित दर्जनों गुंडें स्कूल में पहुंच गए और छात्र को खींच कर बेरहमी से पीटा, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया. फिलहाल छात्र का इलाज चल रहा है. पुलिस घायल छात्र के बयान पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई कर रही है.

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बिहार में महागठबंधन को लेकर अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती बसपा

पटना। मध्यप्रदेश व राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन नहीं करने की बसपा सुप्रीमो मायावती की घोषणा के बाद बिहार में भी महागठबंधन में शामिल होने को लेकर राजनीतिक कयासबाजी शुरू हो गयी है. पर बसपा लोकसभा चुनाव को लेकर अपने पत्ते बिहार में अभी नहीं खोल रही है. लोकसभा चुनाव में बसपा महागठबंधन में शामिल होगी या फिर अकेले चुनाव लड़ेगी, इसको लेकर पार्टी में अभी असमंजस की स्थिति है. प्रदेश संगठन को पार्टी सुप्रीमो मायावती की घोषणा का इंतजार है. बसपा का बिहार में उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में प्रभाव है. पार्टी बिहार में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारती रही है. पार्टी का आधार वोट रोहतास, कैमूर, बक्सर, छपरा, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण जिलों में है. लेकिन, राज्य में बसपा का न तो कोई सांसद है और नहीं विधानसभा का सदस्य. बसपा नेताओं का कहना है कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ने के लिए बिहार की लोकसभा की सभी 40 सीटों पर जोर-शोर से तैयारी कर रही है. पार्टी पिछले दो बार से लोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ी रही है. इधर, बिहार कांग्रेस का मानना है कि जनविरोधी भाजपा सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल के नेतृत्व में बसपा को साथ आना चाहिए. अगर वह महागठबंधन का हिस्सा बनती है तो उनका स्वागत होगा. वहीं, राजद का कहना है कि लोकसभा चुनाव तक स्थिति जरूर बदलेगी. लोकसभा चुनाव तक बदलेगी परिस्थिति राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका हालिया बयान छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में है. मुझे लगता है कि लोकसभा चुनाव तक स्थिति जरूर बदलेगी. हालांकि, बेहतर होता कि विधानसभा चुनावों में भी वे गठबंधन बनाकर चुनाव लड़तीं. उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्ष को समाप्त करने की राजनीति कर रही है, जो सभी विपक्षी दलों के लिए नुकसानदायक है. ऐसे में सभी विपक्षी दलों को मिलकर मुकाबला करना चाहिए. यह भी सही है कि महागठबंधन बनाने का प्रयास सभी दलों को मिल कर ही करना होगा. राहुल के नेतृत्व में महागठबंधन में आने पर होगा स्वागत प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा ने बताया कि महागठबंधन में बसपा के शामिल होने पर कांग्रेस इसका स्वागत करेगी. केंद्र की जनविरोधी सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में बसपा आना चाहेगी तो उसका स्वागत किया जायेगा. लेकिन, सीटों का बंटवारा शीर्ष नेतृत्व करेगा. वहीं, प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष डॉ अखिलेश सिंह ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा महागठबंधन में जरूर शामिल होगी. राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए पहले से महागठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं थी. मध्यप्रदेश व राजस्थान में उनका अपना निर्णय है, लेकिन लोकसभा चुनाव में बसपा साथ रहेगी. संगठन को मजबूत करने के लिए जोर-शोर से चल रही तैयारी बिहार में संगठन को मजबूत करने के लिए जोर-शोर से तैयारी चल रही है. खासकर लोकसभा चुनाव को देखते हुए बूथ स्तर तक यूथ को तैयार किया जा रहा है. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सह बिहार प्रभारी राम अचल राजभर ने बताया कि लोकसभा चुनाव को लेकर सभी सीटों पर जोर-शोर से तैयारी चल रही है. जिलावार बैठक की जा रही है. बिहार के प्रदेश अध्यक्ष भरत बिंद की मानें तो जिला स्तर, विधानसभा स्तर व बूथ स्तर पर कमेटी गठित की जा रही है. पूरे प्रदेश में पार्टी पदाधिकारियों का कार्यक्रम रखा गया है.

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बिहार में महागठबंधन पर पसोपेश में तेजस्वी यादव

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता लालू यादव और तेजस्वी यादव हमेशा इस बात के हिमायती रहे कि अगर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) एक साथ महागठबंधन का हिस्सा बन जाएं तो यूपी और बिहार मिलकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का विजयी रथ रोक सकते हैं. लेकिन जिस तरह मायावती ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका दिया है, उससे आरजेडी भी सकते में है. तेजस्वी ने तो इससे संबंधित सवाल पर चुप्पी साध ली.

विपक्षी एकता की कोशिश कर रहे तेजस्वी बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर किसी भी सीमा तक बलिदान देने को तैयार हैं, पर मायावती के स्टैंड ने सबकुछ गड़बड़ कर दिया है. हालांकि बिहार में बसपा का कोई विधायक या सांसद नहीं है, लेकिन यूपी से सटे रोहतास, बक्सर, पश्चिम चंपारण और कैमूर में पार्टी कई बार निर्णायक भूमिका में दिखाई देती है.

जब बुधवार को मायावती ने कांग्रेस पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को बीजेपी का एजेंट तक बता डाला. संयोग से दिग्विजय सिंह उस दिन पटना में ही थे और तेजस्वी से मुलाकात भी की थी.

जब दिल्ली जाने से पहले तेजस्वी से ये पूछा गया कि महागठबंधन से मायावती ने दूरी बना ली है तो उन्होंने कहा, समय आने दीजिए, समय पर पता चल जाएगा.

फिर दिग्विजय सिंह के बारे में मायावती के बयान पर तेजस्वी सकपका गए और इतना ही कहा कि मुझे इस पर कुछ नहीं कहना है.

लिहाजा मायावती के मूड को भांपने से पहले तेजस्वी कुछ नहीं कहना चाहते. एक कारण ये भी है कि बिहार में कांग्रेस के साथ आरजेडी की सियासी साझीदारी लंबे अरसे से है और तेजस्वी अपने किसी बयान से राहुल के साथ बनी केमिस्ट्री नहीं बिगाड़ना चाहेंगे.

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दलित सम्मेलन के जरिए दलितों को लुभाने को तैयार कांग्रेस

लखनऊ। प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग शनिवार से दलित सम्मेलन कराएगा. विभाग की मीडिया प्रभारी सिद्धिश्री ने बताया कि छह से 24 अक्टूबर तक सभी 18 मंडलों में दलित सम्मेलन होंगे. इसके तहत 6, 7, 8 को गांव-गांव में भ्रमण करके व्यापारिक व सामाजिक संगठनों से जुड़े दलितों से बातचीत करके संपर्क उनसे बातचीत होगी, पारिवारिक सम्मेलन होगा और रात्रि भोज किया जाएगा. 9 और 10 अक्टूबर को सभी आरक्षित विधान सीटों पर संविधान से स्वाभिमान यात्रा निकाली जाएगी. 14 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर संविधान सम्मान सभा का आयोजन किया जाएगा. इसमें दलित कांग्रेसी नेता और स्वतंत्रा संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा. 22 अक्टूबर को प्रदेश के छह मंडलों में संविधान बचाओ देश बचाओ सम्मेलन होगा. इसी तरह से 23 और 24 अक्टूबर को भी आयोजन होंगे.

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