चक्रवाती तूफान तितली उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटीय तटों तक पहुंचने के बाद बंगाल की ओर बढ़ गया है. ओडिशा के गोपालपुर में आए समुद्री तूफान की चपेट में आकर मछुआरों की एक नाव डूब गई. इसमें पांच मछुआरे सवार थे, जिन्हें बचा लिया गया है. वहीं, तूफान से आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में 8 लोगों की मौत हो गई है.
ओडिशा के मौसम विभाग ने अगले 12 घंटों तक तूफानी हवाओं की चेतावनी जारी की है. एहतियात के तौर पर ओडिशा से तीन लाख लोगों को तटीय इलाकों से हटाकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है.
तितली का लैंडफॉल ओडिशा के गोपालपुर से 86 किमी दक्षिण-पश्चिम में रहा. तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में बिजली के पोल और पेड़ गिरने की खबरें हैं. राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है.
तूफान से आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में भारी बारिश हुई जिससे सैकड़ों पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए. जिले के कई मंडलों में दो सेंटीमीटर से लेकर 26 सेमी. तक बारिश दर्ज की गई है. सड़क मार्ग बड़े पैमाने पर अवरुद्ध हुआ और राज्य सड़क परिवहन निगम ने अपनी बस सेवाएं निलंबित कर दी. एसडीएमए ने मुसीबत में फंसे लोगों की मदद करने के लिए टोल फ्री नंबर 18004250101 बनाया है जबकि तीन उत्तरी तटीय जिलों में नियंत्रण कक्ष चालू कर दिए गए हैं. गोपालपुर में तूफानी हवाएं 140 से 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पहुंच रही है, इसकी गति 165 किमी प्रति घंटे तक होने का अनुमान है. जानकारी के मुताबिक गोपालपुर में सुबह साढ़े चार बजे 126 किमी प्रति घंटे और कलिंगपटनम में 56 किमी प्रति घंटे की तेजी से तूफानी हवाएं दर्ज की गईं.
आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू इस तूफान का जायजा लेने के लिए गुरुवार सुबह ही अमरावती के गर्वनेंस मॉनीटरिंग सेंटर पहुंच गए थे. तूफान की रफ्तार इतनी ज्यादा है कि गोपालपुर और बेरहमपुर में कई पेड़ उखड़ गए.
‘तितली’ के ओडिशा और आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ने के साथ-साथ प्रशासन मुस्तैद हो गया है. तूफान में होने वाले नुकसान से बचने के लिए अलग-अलग जिलों में एनडीआरएफ 18 टीमें तैनात की गई हैं. ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बंगाल के कई इलाकों में तितली तूफान को लेकर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है और 3 लाख लोगों को महफूज़ जगहों पर पहुंचाया गया है.
ओडिशा सरकार ने तूफान के चलते 11 और 12 तारीख को स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला किया है. इसके अलावा तूफान से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एक उच्चस्तरीय बैठक भी की है. उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तट पर ‘तितली’ के प्रभाव को देखते हुए कई ट्रेनों को रद्द किया गया है तो वहीं कुछ के रूट में बदलाव किया है.
ओडिशा सरकार पहले ही गंजम, पुरी, खुर्दा, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा जिलों के प्रशासन को चक्रवाती तूफान ‘तितली’ की राह में आने वाले सभी संभावित क्षेत्रों को खाली कराने के निर्देश दे चुकी है. मौसम विभाग द्वारा चक्रवात तितली के गंभीर स्तर पर पहुंचने की सूचना देने के बाद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इन पांच जिलों के जिला अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि कोई दुर्घटना ना घटे.
गंजम जिले में पहले ही जिला खाली करने की प्रक्रिया शुरू होने की समीक्षा करने के बाद पटनायक ने कहा कि सभी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी केंद्रों को 11 -12 अक्टूबर को बंद रखा जाएगा, हालांकि शिक्षक ड्यूटी पर रहेंगे. मुख्य सचिव आदित्य प्रसाद पधी ने कहा कि राज्य में 11 अक्टूबर को होने जा रहे छात्र संघ चुनावों को रद्द कर दिया गया है.
चक्रवात और इसके साथ भारी बारिश आने की संभावना के बीच सभी अधिकारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है. तूफान और बारिश से पूरे राज्य के चपेट में आने की संभावना है.
मौसम विभाग ने कहा कि ओडिशा के गोपालपुर और आंध्र प्रदेश के कलिंगापत्तनम के बीच गुरुवार तड़के भूस्खलन होने की संभावना है. अगले 18 घंटों में गुरुवार तड़के तक इसके बहुत गंभीर स्तर पर पहुंचने का भी अनुमान है. गंजम, गजपति, पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, खुर्दा, नयागढ़, कटक, जाजपुर, भद्रक, बालासोर, कंधमाल, बौंध और ढेंकनल में गुरुवार तक तेज से मूसलाधार बारिश होने की संभावना है.
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बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित बसपा कांग्रेस का महागठबंधन बनने से पूर्व ही टूट गया है, वो भी एक ऐसे व्यक्ति को दोष देते हुए, जिसे उनकी पार्टी भी सीरियस नहीं लेती. पर बहन मायावती ने कांग्रेस अध्यक्ष व सप्रंग अध्यक्षा के प्रति नरम रुख रखते हुए सारा ठीकरा दिग्विजय सिंह पर फोड़ दिया है और राजस्थान व मध्यप्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. रणनीति अब यह है कि बहुजन समाज के तमाम संघर्षशील लड़ाकू लोगों को टिकट दे कर सारी सीटें लड़ी जाए.
कोई क्यों मुंबई, नागपुर, दिल्ली या लखनऊ में बैठ कर तय कर रहा है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ का दलित आदिवासी अपने मताधिकार का कैसे उपयोग करेगा? चुनावी राज्य के बजाय किन्ही अन्य राज्यों में बैठे लोग किस मकसद से एजेंडा तय कर रहे है और क्यों? दलित आदिवासी बहुजन मूलनिवासी वोटों के इन सौदागरों से पूछिए कि आप होते कौन हैं हमारे बारे में निर्णय करने वाले? हमें मूर्ख या गुलाम समझ रखा है जो हमारे नाम पर कोई और, कहीं और फैसला करोगे?

प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार सिंह ने ‘दलित दस्तक’ को इसकी जानकारी देते हुए खुशी जताई. उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रदेश के सभी पदाधिकारी प्रदेश में लगातार पार्टी को बढ़ाने में लगे हैं. इन्हीं कोशिशों की बदौलत पार्टी लगातार लोगों को जोर रही है. शिवसेना से बसपा में शामिल नेताओं के बारे में उन्होंने कहा कि सभी ने बसपा की सदस्यता लेते हुए पार्टी की नीतियों में यकीन जताया है और 2019 में बहन कु. मायावती जी को प्रधानमंत्री बनाने का संकल्प लिया है.
भारतीय टीम ने एक समय 45 ओवरों में 225/3 रन बनाए थे, लेकिन आखिरी पांच ओवरों में सिमरन सिंह और आयुष बदोनी 79 रन जुटाकर टीम को 300 के पार ले जाने में कामयाब रहे. सिमरन ने 37 गेंदों की पारी में 4 छक्के जड़े, जबकि बदोनी ने 28 गेंदों की पारी में ताबड़तोड़ 5 छक्के उड़ाए.

पटना। मध्यप्रदेश व राजस्थान के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन नहीं करने की बसपा सुप्रीमो मायावती की घोषणा के बाद बिहार में भी महागठबंधन में शामिल होने को लेकर राजनीतिक कयासबाजी शुरू हो गयी है.
पर बसपा लोकसभा चुनाव को लेकर अपने पत्ते बिहार में अभी नहीं खोल रही है. लोकसभा चुनाव में बसपा महागठबंधन में शामिल होगी या फिर अकेले चुनाव लड़ेगी, इसको लेकर पार्टी में अभी असमंजस की स्थिति है. प्रदेश संगठन को पार्टी सुप्रीमो मायावती की घोषणा का इंतजार है. बसपा का बिहार में उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में प्रभाव है.
पार्टी बिहार में लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारती रही है. पार्टी का आधार वोट रोहतास, कैमूर, बक्सर, छपरा, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण जिलों में है. लेकिन, राज्य में बसपा का न तो कोई सांसद है और नहीं विधानसभा का सदस्य. बसपा नेताओं का कहना है कि पार्टी अकेले चुनाव लड़ने के लिए बिहार की लोकसभा की सभी 40 सीटों पर जोर-शोर से तैयारी कर रही है.
पार्टी पिछले दो बार से लोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव अकेले दम पर लड़ी रही है. इधर, बिहार कांग्रेस का मानना है कि जनविरोधी भाजपा सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल के नेतृत्व में बसपा को साथ आना चाहिए. अगर वह महागठबंधन का हिस्सा बनती है तो उनका स्वागत होगा. वहीं, राजद का कहना है कि लोकसभा चुनाव तक स्थिति जरूर बदलेगी.
लोकसभा चुनाव तक बदलेगी परिस्थिति
राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका हालिया बयान छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के परिप्रेक्ष्य में है. मुझे लगता है कि लोकसभा चुनाव तक स्थिति जरूर बदलेगी. हालांकि, बेहतर होता कि विधानसभा चुनावों में भी वे गठबंधन बनाकर चुनाव लड़तीं.
उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्ष को समाप्त करने की राजनीति कर रही है, जो सभी विपक्षी दलों के लिए नुकसानदायक है. ऐसे में सभी विपक्षी दलों को मिलकर मुकाबला करना चाहिए. यह भी सही है कि महागठबंधन बनाने का प्रयास सभी दलों को मिल कर ही करना होगा.
राहुल के नेतृत्व में महागठबंधन में आने पर होगा स्वागत प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा ने बताया कि महागठबंधन में बसपा के शामिल होने पर कांग्रेस इसका स्वागत करेगी. केंद्र की जनविरोधी सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में बसपा आना चाहेगी तो उसका स्वागत किया जायेगा.
लेकिन, सीटों का बंटवारा शीर्ष नेतृत्व करेगा. वहीं, प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष डॉ अखिलेश सिंह ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा महागठबंधन में जरूर शामिल होगी. राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनाव के लिए पहले से महागठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं थी. मध्यप्रदेश व राजस्थान में उनका अपना निर्णय है, लेकिन लोकसभा चुनाव में बसपा साथ रहेगी.
संगठन को मजबूत करने के लिए जोर-शोर से चल रही तैयारी
बिहार में संगठन को मजबूत करने के लिए जोर-शोर से तैयारी चल रही है. खासकर लोकसभा चुनाव को देखते हुए बूथ स्तर तक यूथ को तैयार किया जा रहा है.
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सह बिहार प्रभारी राम अचल राजभर ने बताया कि लोकसभा चुनाव को लेकर सभी सीटों पर जोर-शोर से तैयारी चल रही है. जिलावार बैठक की जा रही है. बिहार के प्रदेश अध्यक्ष भरत बिंद की मानें तो जिला स्तर, विधानसभा स्तर व बूथ स्तर पर कमेटी गठित की जा रही है. पूरे प्रदेश में पार्टी पदाधिकारियों का कार्यक्रम रखा गया है.
लखनऊ। प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग शनिवार से दलित सम्मेलन कराएगा. विभाग की मीडिया प्रभारी सिद्धिश्री ने बताया कि छह से 24 अक्टूबर तक सभी 18 मंडलों में दलित सम्मेलन होंगे. इसके तहत 6, 7, 8 को गांव-गांव में भ्रमण करके व्यापारिक व सामाजिक संगठनों से जुड़े दलितों से बातचीत करके संपर्क उनसे बातचीत होगी, पारिवारिक सम्मेलन होगा और रात्रि भोज किया जाएगा. 9 और 10 अक्टूबर को सभी आरक्षित विधान सीटों पर संविधान से स्वाभिमान यात्रा निकाली जाएगी. 14 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर संविधान सम्मान सभा का आयोजन किया जाएगा. इसमें दलित कांग्रेसी नेता और स्वतंत्रा संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा. 22 अक्टूबर को प्रदेश के छह मंडलों में संविधान बचाओ देश बचाओ सम्मेलन होगा. इसी तरह से 23 और 24 अक्टूबर को भी आयोजन होंगे.