घोसी उप चुनाव नतीजे के मायने

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सात सीटों पर हुए उपचुनाव में तीन पर भाजपा जीती जबकि चार पर इंडिया गठबंधन के दल। इस उप चुनाव में जिस सीट की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह है उत्तर प्रदेश की घोसी सीट। जहां समाजवादी पार्टी के सुधाकर सिंह ने भाजपा के दारा सिंह चौहान को 42,759 वोटों से हराया।

यहां भाजपा की ओर से दारा सिंह चौहान मैदान में थे, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से सुधाकर सिंह। दारा सिंह चौहान इसी सीट से सपा के विधायक थे और 22 हजार वोटों से जीते थे, लेकिन मंत्री पद की लालच में वह भाजपा में चले गए। फिर घोसी के विधायक पद से इस्तीफा देकर उप चुनाव की स्थिति पैदा की। भाजपा के टिकट पर घोसी से चुनाव लड़े।

भाजपा के लिए यह प्रतिष्ठा की सीट थी। भाजपा इसे किसी भी कीमत पर जीत कर 2024 लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष पर मनो वैज्ञानिक बढ़त बनाना चाहती थी। दारा सिंह चौहान के लिए प्रचार करने के लिए दर्जन भर से ज्यादा मंत्रियों ने घोसी में चुनाव प्रचार किया। इसके अलावा यूपी के दोनों उप मुख्यमंत्री और खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दारा सिंह चौहान के पक्ष में प्रचार करने गए। बावजूद इसके भाजपा यह सीट हार गई।

यह तब हुआ जबकि ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद ने भाजपा की ओर से यहां प्रचार किया था, जिनके वोट इस सीट पर निर्णायक थे। घोसी में 55 हजार राजभर, 19 हजार निषाद, 8 हजार ब्राह्मण और 15 हजार ठाकुर मतदाता थे, जो भाजपा के वोट बैंक माने जाते है। बावजूद इसके दारा सिंह चौहान की करारी हार ने उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरण से लेकर भाजपा के वर्चस्व को तोड़ दिया है।

समाजवादी पार्टी की बड़ी जीत ने भाजपा को चारो खाने चित्त कर दिया है। इसे लोकसभा चुनाव के पहले जनता का मूड कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह साफ है कि जनता किसी पार्टी को आंख मूंद कर सपोर्ट करने की बजाए उम्मीदवारों को भी तरजीह दे रही है। यह आने वाले राजनीति के लिए अच्छा संकेत है।

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