Friday, February 13, 2026

ओपीनियन

बाबा साहेब के ब्राह्मणीकरण की साजिश

भारत में जो भी ज्ञानी-ध्यानी लोग पैदा होते हैं.... वो किसी भी जाति में पैदा हों..... ये ब्राह्मण उन्हें अपनी संतान कहने का कोई न कोई कारण ढूंढ ही लेते हैं.... इस जन्म की बात घोषित करें या पूर्वजन्म की..... यानि कि चित भी...

डॉ. अम्बेडकर और मातृत्व अवकाश

मातृत्व लाभ बिल 2016 को राज्यसभा ने मंजूरी दे दी. लोकसभा की मंजूरी अभी बाकी है. बिल से सरकारी और निजी क्षेत्रा में काम करने वाली महिलाओं को 26 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलने का रास्ता साफ हो गया. हालांकि तमिलनाडू में 26 हफ्ते...

आप कितने दलित क्रिकेटरों को जानते हैं?

कहा जाता है कि क्रिकेट अमीरों का खेल है. शायद इसीलिए भारतीय क्रिकेट में जो गिने चुने दलित खिलाड़ी रहे, वे भी गुमनाम ही रहे. इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा की नई क़िताब ''विदेशी खेल अपने मैदान पर'' में उन्होंने क्रिकेट का एक समाजशास्त्रीय...

क्या भूमंडलीकरण से दलित सशक्त हुए?

हाल में एक समाचार पत्र में छपे लेख में चंद्रभान प्रसाद जी ने एक गांव का उदाहरण देकर दिखाया है कि भूमंडलीकरण के बाद दलित बहुत खुशहाल हो गए हैं क्योंकि रोज़गार के करोड़ों अवसर पैदा हो गए हैं. हमें इस कहावत को ध्यान...

अखिलेश-मुलायम की मिली भगत!

अखिलेश सरकार के मंत्रियों पर लूटपाट का आरोप लगाकर अपने ही मुख्यमंत्री बेटे की कान खिंचाई करना मुलायम सिंह यादव की अब आदत बन गई है. मुलायम सिंह यादव ने अपने गांव में रहने वाले सवर्णों से यह सब सीखा है. दरअसल, सवर्ण अपने...

सवर्णवादी इतिहासकारों का शिकार हुआ तथागत बुद्ध और अशोक महान का इतिहास

संघ से जुड़े राष्ट्रीय वनवासी कल्याण परिषद की पत्रिका के मई 2016 के अंक में एक लेख छपा है कि सम्राट अशोक के हिन्दू से बौद्ध बनने और अहिंसा के प्रचार करने की वजह से विदेशी आक्रमणकारियों के लिये भारत की सीमायें खुली थीं....

​सुंदर पिचाई पर कोई क्यों नहीं बनाता फिल्म…!!

अस्सी के दशक में एक फिल्म आई थी, नाम था लवमैरिज. किशोर उम्र में देखी गई इस फिल्म के अत्यंत साधारण होने के बावजूद इसका मेरे जीवन में विशेष महत्व था. इस फिल्म के एक सीन से मैं कई दिनों तक रोमांचित रहा था....

सांसदों के पास दलितों के लिए वक्त नहीं!

देश भर में दलितों पर हो रहे हमलों के विरोध में तमाम राजनीतिक पार्टियां संसद से बाहर दलित हितैषी होने का दावा करती है. सारे राजनेता दलितों के सबसे बड़े हमदर्द बनने की कोशिश करते हैं. लेकिन असलियत हैरान करने वाली है. संसद के...

राह दिखाता गुजरात दलित आंदोलन

उना से शुरू होकर पूरे गुजरात में फैल चुके दलित आंदोलन ने न सिर्फ दलितों की मुक्ति की राह दिखाई है, बल्कि यह देश भर में उत्पात मचाने वाले सांप्रदायिक-जातिवादी हत्यारे गिरोहों का एक मुंहतोड़ जवाब भी पेश कर रहा है. यह आंदोलन इसलिए...

जब लड़ने को खड़े हुए, तब ही पीएम मोदी का बयान क्यों आया?

जब तक दलित पिट रहे थे तब तक मोदी का बयान नही आया. जब वो लड़ने उठ खड़े हुये तब मोदी क्यो बोले? क्यों? लड़ने वालो को इस बयान की क्या जरूरत है? अपने बयान से वो दलितो की मदद कर रहे हैं या...

बहुजन बाला दीपा कर्माकर से गोल्ड मेडल की उम्मीद

ब्राजील के रियो के मशहूर मरकाना स्टेडियम में ‘सांबा’ नृत्य के साथ खेलों के महाकुम्भ ओलम्पिक की शुरुआत हो चुकी है. इसमें हिस्सा ले रहे 209 देशों के 11,000 से अधिक खिलाड़ियों ने अपना जौहर दिखाना शुरू कर दिया है. अमेरिका की युवा निशानेबाज...

दलित आंदोलन से बैकफुट पर भाजपा

हाल ही में सहज रूप से शुरू हुए दलित आंदोलनों की लहर में एक खास भाजपा-विरोधी रंग है. चाहे वह रोहिथ वेमुला की सांस्थानिक हत्या पर देश भर के छात्रों का विरोध हो या फिर गुजरात में सबकी आंखों के सामने चार दलित नौजवानों...

आनंदी बेन का जाना: गुजरात में दलित-अल्पसंख्यक आन्दोलन को दबाने की एक कवायद

हम प्रतिवर्ष समूचे राष्ट्र को उद्वेलित कर देने वाले “स्वतंत्रता दिवस” समारोह धूमधाम से मनाते हैं. इस अवसर पर भारत छोड़ो आन्दोलन का याद आना स्वाभाविक ही है. भारत छोड़ो आन्दोलन का वह समय था जब हमारे लक्ष्यों और आदर्शों की निष्ठा ने राष्ट्र...

हिन्दू धर्म ग्रंथ और महिला सम्मान का प्रश्न

प्राचीन काल से लेकर आज के समय तक एक उपमा जो स्त्रियों के लिए हमेशा दी जाती है, वह है कि सीता-सावित्री की तरह बनो. इस उपमा में सीता या सावित्री के व्यक्तित्व की ऊंचाईयों और गहराईयों को समझने की बात नहीं होती. यहां...

बहुजन छात्र- युवाओं पर पुलिस दमन के निहितार्थ

बिहार की राजधानी पटना में 3 अगस्त, 2016 को अपने हक-हकूक के लिए सड़क पर आवाज बुलंद करने उतरे दलित छात्रों पर पुलिसिया दमन की बर्बर कार्रवाई दुखद है क्योंकि दलितों का वोट सभी लेना चाहते हैं लेकिन उनको बराबरी का हक कोई भी...

गुजरात में दलित प्रतिरोध और दलित राजनीति की नयी दिशा

पिछले दिनों गुजरात के ऊना में मरी गाय का चमड़ा उतारने पर गाय को मारने के आरोप में गोरक्षा समिति के गुंडों द्वारा चार दलितों की बुरी तरह से पिटाई की गयी थी जिस पर दलितों ने विरोध स्वरूप मरी गाय को उठाने का...

भाजपा के दलित प्रेम की कसौटी पर यूपी विधान सभा चुनाव

ये बात सही है कि भारत में दलित चेतना का संचार देश के दक्षिण-पश्चिमी तट से शुरू हुआ. पर आज देश में बहुजन आन्दोलन या दलित अस्मिता की बात होती है तो लखनऊ के अंबेडकर पार्क और नोएडा के दलित चेतना केंद्र के बिना...

आखिर दलितों के घर क्यों जाते हैं सवर्ण नेता

हमारा देश जाति प्रधान देश है. देश में 4 वर्ण हैं, जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र में बंटा हुआ है. ब्राह्मण और क्षत्रिय सवर्ण यानी उच्च जाति के खुद को मानते हैं, जबकि शुद्र मतलब अनुसूचित जाति जनजाति यानी दलित समाज को ब्राह्मण...

मायावती का चरित्रहनन और राजनीतिक पतन का मर्सिया

भारत के 20 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले सूबे उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी मायावती को भारतीय जनता पार्टी का एक वरिष्ठ नेता सार्वजनिक तौर पर जिस घिनौनी भाषा का इस्तेमाल करता है. आखिर इस बयान की जद में क्या...

चमड़ी उतारना छोड़े दलित

डॉक्टर अम्बेडकर कहते थे यदि कोई काम आपको अछूत बनाता है तो उस काम को तुरन्त छोड़ दीजिये. साफ़ सुथरे रहिये और गंदगी वाला काम मत कीजिये. मैं समझता हूँ जिस तरह दलितों ने गुजरात में मरी हुई गाय को फेंककर विरोध किया है,...
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January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

राजनीति

राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
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