
वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को असीमित शक्तियां देने के खिलाफ लंबे समय से प्रर्दशन चल रहा है. जिसके बाद अधिकतर लोगों ने मतदान से भी दूरी बना रखी है और बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं. इस दौरान प्रदर्शनकारियों एवं बलों के बीच हुए संघर्ष में 10 लोगों की मौत हो गई. मतदान के जरिए सरकार वेनेजुएला पर पूर्ण राजनीतिक प्रभुत्व हासिल करने की पूरी कोशिश कर रही है.
सरकार के इस कदम से अमेरिकी प्रतिबंध और नए सिरे से सड़कों पर दंगे होने की आशंका बढ़ गई है. अप्रैल से शुरू हुए इन संघर्षों में कम से कम 122 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2,000 लोग घायल हुए हैं. हसा के कारण मतदान बुरी तरह प्रभावित हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने मतदान केंद्रों पर हमला किया जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की. इस हिंसा में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई.
अर्जेंटीना, कोलंबिया, पेरू, पनामा, और अमेरिका का कहना है कि वे इस मतदान को मान्यता नहीं देंगे. कनाडा और मैक्सिको ने भी चुनाव को अस्वीकार करने के संबंध में बयान जारी किया है. इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निकी हेली ने एक ट्वीट में कहा,‘‘मादुरो का यह दिखावटी चुनाव तानाशाही की ओर एक और कदम है. हम अवैध सरकार को स्वीकार नहीं करेंगे. वेनेजुएला की जनता एवं लोकतंत्र की जीत होगी.’’राजधानी में करीब 20 लाख लोग हैं लेकिन दर्जनों मतदान केंद्र वस्तुत खाली रहे.

दलित दस्तक (Dalit Dastak) साल 2012 से लगातार दलित-आदिवासी (Marginalized) समाज की आवाज उठा रहा है। मासिक पत्रिका के तौर पर शुरू हुआ दलित दस्तक आज वेबसाइट, यू-ट्यूब और प्रकाशन संस्थान (दास पब्लिकेशन) के तौर पर काम कर रहा है। इसके संपादक अशोक कुमार (अशोक दास) 2006 से पत्रकारिता में हैं और तमाम मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। Bahujanbooks.com नाम से हमारी वेबसाइट भी है, जहां से बहुजन साहित्य को ऑनलाइन बुक किया जा सकता है। दलित-बहुजन समाज की खबरों के लिए दलित दस्तक को सोशल मीडिया पर लाइक और फॉलो करिए। हम तक खबर पहुंचाने के लिए हमें dalitdastak@gmail.com पर ई-मेल करें या 9013942612 पर व्हाट्सएप करें।

