2022 चुनाव में बहनजी अपनाएंगी 2007 वाला फार्मूला !

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियां सियासी समीकरण और गठजोड़ बनाने में जुटी हुई हैं। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए कोई कोर कसर बाकी छोड़ने के मूड में नहीं हैं। यही वजह है कि बहनजी लखनऊ में डटी हुई हैं और 2022 की सियासी जंग फतह करने के लिए रणनीति तैयार कर रही हैं, जिसके आधार पर बसपा अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी।

बहनजी ने इस बार यूपी विधानसभा चुनाव के लिए जिला कोआर्डिनेटरों के बदले मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया है। इन्हीं के जरिए बहनजी 2022 में विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों का चयन करेंगी। इस बार बसपा की रणनीति हर जिले से एक या दो ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट देने की है। ओबीसी की तमाम जातियां हैं और बसपा प्रमुख इन सभी को क्षेत्र के हिसाब से टिकट देने के मूड में हैं। उत्तर प्रदेश में पचास फीसदी पिछड़ी जाति के मतदाता हैं जो सियासी तौर पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सामान्य जाति के उम्मीदवारों में बसपा सबसे ज्यादा ब्राह्मण मतदाताओं को मौका देने के मूड में दिख रही है।

साल 2007 के उत्तर प्रदेश के चुनाव में बसपा ने 403 सीटों में से 206 सीटें जीतकर सत्ता में शानदार तरीके से वापसी की थी। तब बसपा को 30 फीसदी वोट मिले थे। इस बार फिर बहनजी वही दांव चलने की तैयारी में हैं। तब बसपा ने जहां अपने प्रत्याशियों की घोषणा चुनाव से एक साल पहले ही कर दी थी, तो वहीं टिकटों के बंटवारे में पिछड़ी जातियों, अल्पसंख्यक वर्ग और सामान्य जातियों को साथ लेकर एक साझी रणनीति बनाई गई थी। सर्वसमाज को साथ लेकर चलने के कारण ही बहुजन समाज पार्टी ने शानदार सफलता दर्ज की थी। खबर है कि अगस्त और सितंबर के आखिरी महीने में बसपा की ओर से लगभग 200 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाएगी, जबकि बाकी उम्मीदवारों की घोषणा अक्टूबर के आखिर तक किया जा सकता है।

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