The Ambedkar Association of North America (AANA) US based Ambedkarite Organization, Ohio State Branch has donated Dr. Babasaheb Ambedkar Writings and Speeches (BAWS) volumes to the University of Cincinnati, Langsum Library at 2911 woodside drive, Cincinnati, Ohio on the occasion of India’s Republic Day on Friday, the 26th January 2024. Total 18 Volumes donated to this University Library. Today was a historical day for AANA and Ohio State Ambedkarite Chapter who are based in the Cincinnati suburb area.
University of Cincinnati (UC) established in 1819, embodies enduring academic excellence, vibrant campus life, and innovative spirit. UC’s campus bustles with over 50,000 students and growing. Nippert Stadium, nestled in the middle of our urban campus, echoes with the passionate roars of Bearcats fans. Beyond campus, UC students and alumni find success in Cincinnati, voted a top destination for new college graduates four years in a row. UC’s integration into the Big 12 Conference unites top-flight academics and world-class athletics, forging a dynamic path for the university, city and region.
Ms Nimisha, Librarian of Langsum Library, University of Cincinnati has received books from AANA Team. Prof. Shaileja Paik has expressed her sincere gratitude to Ambedkar Association of North America for Donating all the printed writings and speeches of our Hero Babasaheb Dr. B.R. Ambedkar. The BAWs books will be available for all students to be accessed in their respective field of studies. As we all know Babasaheb has written extensively on various subjects be it Politics, World Religions, Judiciary, Economics, Sociology, Anthropology, Theology, Human Psychology, Social Justice, Social Reforms, Pedagogies and many more including our Indian Constitution.The university is also coming up with similar academic events in the month of April this year she said.
It’s really a matter of joy for the entire Ambedkarite community that upcoming and future generations of scholars of University of Cincinnati will be benefited by accessing the writings of such an Ocean of Wisdom.
In the past, AANA donated BAWS books to Wayne State University Michigan, University of Georgia, Georgia Institute of Technology , Eastern Mennonite University, University of Delaware, North Park University Chicago, North Western University Pacific University Oregan, Arizona State University and Michigan State University(digital Catalog https://baws.in), and many more in the USA.
AANA is been instrumental to donate books to the local libraries in USA and many books written by Dr Ambedkar are in the circulation. https://aanausa.org/portfolio/book-donation-in-north-america/ Ambedkar association of North America formed in 2008 on the guided principle of Dr. B.R. Ambedkar’s lifelong work and vision to uplift the downtrodden through education. Education provides the suppressed an opportunity to escape their poverty, experience a better quality of life, and have a voice in their communities. AANA also makes it its mission to spread Buddha’s message of peace and kindness to humanity through cultural, educational, social and economic activities among the South Asian Diaspora in North America.
Website- www.aanausa.org, email- aanausa@gmail.com


भारत 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर 26 जनवरी से पूर्व संध्या पर परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित किया। सुनिए, महामहिम ने क्या कहा
15 जनवरी 1978, समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ में एक तस्वीर छपी थी। तस्वीर बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के पिता गोकुल ठाकुर की थी। वह किसी की हजामत बना रहे थे। उनका अपने मुख्यमंत्री बेटे के बारे में कहना था कि मेरे लिए वह बेरोजगार है। पैसा नहीं भेजता। और मुझे अपना पुराना रोजगार करने में कोई संकोच नहीं है।
जो व्यक्ति दो बार बिहार का मुख्यमंत्री रहा हो, उसके पिता के बारे में क्या आप ऐसी कल्पना कर सकते हैं। शायद नहीं, लेकिन यह सच था। दरअसल कर्पूरी ठाकुर परिवार के नहीं, बल्कि समाज के नेता थे। वंचितों और शोषितों के नेता थे। मुख्यमंत्री रहते रिक्शा पर चढ़कर चल देने वाले नेता थे। इसीलिए वो जननायक थे।
24 फऱवरी को कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती मनाई जा रही है। और भारत सरकार द्वारा कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा ने इस मौके को और खास बना दिया है। हालांकि भारत रत्न की मर्यादा पिछले दिनों में गिरी है, लेकिन मोदी सरकार की इस घोषणा के बाद वंचित समाज में खुशी है। वह भारत के इस सर्वोच्च सम्मान को निश्चित तौर पर काफी पहले डिजर्व करते थे। लेकिन जब देश लोकसभा चुनाव के मुहाने पर खड़ा है, और पीएम मोदी 4 फरवरी को बिहार से चुनावी मुहिम शुरू करने वाले है, ऐसे में इस सम्मान के राजनीतिक मायने भी तलाशे जाने लगे हैं।
लेकिन पहले बात जननायक कर्पूरी ठाकुर की। वह बिहार में आरक्षण के जनक रहे हैं। 1977 में दूसरी बार बिहार का सीएम बनने के बाद उन्होंने ओबीसी को सरकारी नौकरी में 26 फीसदी का आरक्षण दिया। जिसके बाद बिहार की सामंती जातियों ने उन्हें सार्वजनिक तौर पर गालियां दी और उनके खिलाफ निम्न स्तर के जातीय नारे गढ़े गए। संभवतः वह भारत के किसी प्रदेश के इकलौते मुख्यमंत्री रहे, जिन्हें पद पर रहते हुए जातीय गालियां दी गई।
हालांकि कर्पूरी डिगे नहीं। उन्होंने मुंगेरीलाल आयोग की सिफारिशों को लागू किया, जिसके बाद 90 के दशक में पिछड़ों को देश भर में 27 फीसदी आरक्षण मिला। इससे पहले शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म कर दिया ताकि वंचित समाज के बच्चे मैट्रिक की परीक्षा को पास कर सकें।
एक बार का दिलचस्प वाकया है कि जब कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री थे, तब केंद्र और बिहार दोनों जगह जनता पार्टी की सरकार थी। तमाम नेता जनता पार्टी के नेता जयप्रकाश नारायण के जन्मदिन के मौके पर इकट्ठा हुए। मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर भी आए। तब लोगों ने देखा कि उनका कुर्ता फटा है। चंद्रशेखर अपने अंदाज में दूसरे नेताओं से पैसे इकट्ठा करने लगे ताकि कर्पूरी बाबू नया कुर्ता खरीद सके। लेकिन कर्पूरी भी आखिर जननायक कर्पूरी थे, उन्होंने वह पैसा तो स्वीकार कर लिया लेकिन उसका कुर्ता खरीदने की बजाय उसे मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिया। इससे झूठी शान गढ़ने वालों को जोरदार तमाचा लगा। हालांकि भारत में सरकार के हर कदम को राजनीति के रूप में देखने की परंपरा रही है। ऐसे में बिहार के दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर को 2024 लोकसभा चुनाव के पहले भारत रत्न देने की घोषणा के मायने तलाशे जा रहे हैं। इसलिए भी क्योंकि हाल ही में बिहार ने जातीय जनगणना कर वंचित जातियों की सत्ता में भागेदारी के सवाल को बड़ा बना दिया है। समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर बिहार के नाई जाति से ताल्लुक रखते हैं। बिहार में नाई जाति अति पिछड़ी जाति में आती है। बिहार में ओबीसी 63 प्रतिशत हैं। इसमें अति पिछड़ी जातियां 36 फीसदी हैं। साफ है कि बिहार जो कि अब तक भाजपा के लिए इकलौता अजेय हिन्दीभाषी प्रदेश बना हुआ है, उसने भाजपा और संघ की नींद हराम कर रखी है।
यह फैसला तब हुआ है जब पीएम मोदी 4 फरवरी को बिहार से चुनावी अभियान शुरु करने वाले हैं। और देश के तमाम अखबारों में संपादकीय पन्ने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक लेख प्रकाशित हुआ है, जिसमें उन्होंने कर्पूरी ठाकुर को याद करते हुए उनके कसीदे पढ़े हैं। खुद को पिछड़े वर्ग का व्यक्ति बताते हुए देश के तकरीबन 52 फीसदी पिछड़ों से फिर से खुद को जोड़ने की कोशिश की है।
जननायक कर्पूरी ठाकुर निश्चित तौर पर काफी पहले भारत रत्न सम्मान डिजर्व करते थे। हालांकि उन्हें अब यह सम्मान मिल चुका है, लेकिन इसे देने की टाइमिंग को देखते हुए इसके पीछे राजनीतिक लाभ लेने की मंशा को झुठलाया नहीं जा सकता
22 जनवरी को अयोध्या में हुए राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा की चर्चा दुनिया भर में है। लेकिन सोशल मीडिया पर जिस तरह अंबेडकरी समाज के एक समूह द्वारा विरोध स्वरूप #22जनवरी_22प्रतिज्ञा की बात कही गई, उसमें सवाल उठता है कि क्या यह टकराव सही है। इस बारे में दलित दस्तक के संपादक अशोक दास ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और अंबेडकरवादी नितिन मेश्राम से चर्चा की। लिंक पर जाकर देखिए पूरा वीडियो।
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की ताजा वर्ल्ड रिपोर्ट 2024 में भारत के लिए बुरी खबर है। इस रिपोर्ट में मानवाधिकार के मोर्चे पर भारत की नीतियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस रिपोर्ट में भारत सरकार पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाया गया है। 740 पन्नों की अपनी ताज़ा रिपोर्ट में संगठन ने मणिपुर में हुए नस्लीय टकराव से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शन और जम्मू-कश्मीर के हालात का ज़िक्र किया है।
ह्यूमन राइट्स वॉच क़रीब 100 देशों में मानवाधिकारों से जुड़ी नीतियों और कार्रवाई पर नज़र रखता है। इसी के आधार पर वो अपनी सालाना विश्व रिपोर्ट तैयार करता है। ताजा रिपोर्ट 11 जनवरी 2024 को जारी की गई है, जिसमें ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि पिछले साल भारत में मानवाधिकारों के दमन और उत्पीड़न की कई घटनाएं हुई हैं। मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए संगठन ने कहा है कि- बीते साल सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, विपक्षी नेताओं और सरकार के आलोचकों को गिरफ़्तार किया। इन लोगों पर आतंकवाद समेत राजनीति से प्रेरित आपराधिक आरोप लगाए गए।
हाल ही में जगद्गुरु राम भद्राचार्य ने चमार जाति विशेष के खिलाफ विवादास्पद बयान दिया था। उनके मुताबिक राम को नहीं मानने वाला व्यक्ति चमार है। उनके इस बयान पर दलित समाज के लोगों में जमकर विरोध किया था, जिसके बाद राम भद्राचार्य को खेद जताना पड़ा। इस मुद्दे पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विक्रम ने दलित दस्तक के संपादक अशोक दास के साथ चर्चा करते हुे राम भद्राचार्य को जमकर घेरा और कई सवाल उठाए। देखिए वीडियो-
25 अक्टूबर को मेरठ में दलित समाज के इंद्र शेखर की हत्या का मामला सुर्खियों में रहा था। इंद्र शेखर को जिस तरह पहले हाथ-पैर में कील ठोककर, फिर गोली मारकर पेड़ पर लटका दिया गया था, उससे सनसनी फैल गई थी। खासतौर पर आरोपी विजयपाल गुर्जर ने खुद पुलिस को फोन कर हत्या की सूचना दी थी, जिससे समझा जा सकता है कि खास समाज के लोगों मे जातीय दंभ और दलितों के प्रति नफरत कितनी ज्यादा है।

लगता है राजनीति समाज को बदलने का आखिरी रास्ता बनती जा रही है। शायद यही वजह है कि समाज बदलने की चाहत लिये अलग-अलग क्षेत्रों के लोग अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर राजनीति में उतर रहे हैं। नई जानकारी उत्तर प्रदेश से आ रही है, जहां बहुजन समाज से ताल्लुक रखने वाले मनोज कुमार ने जज की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ कर राजनीति में आने का अपना इरादा जाहिर कर दिया है।
इसमें पूर्व न्यायाधीश के.जी. बाला कृष्णन सहित पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक, किसान नेता राकेश टिकैत, राजरत्न अंबेडकर, पूर्व सांसद राजकुमार सैनी और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और एक्टिविस्ट राजेन्द्र पाल गौतम विशेष तौर पर मौजूद रहेंगे। इस कार्यक्रम को बहुजन मैत्री एवं संविधान जागरूकता महासम्मेलन का नाम दिया गया है। कार्यक्रम बिजनौर जिले के धामपुर के के.एम. इंटर कॉलेज में होगा। कार्यक्रम को 50 से ज्यादा बहुजन समाज के संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया है।
तथागत बुद्ध ने कहा था, चरथ भिक्खवे चारिकं बहुजन हिताय-बहुजन सुखाय लोकानुकम्पाय। यानी, हे भिक्खुओं। बहुजनों के हित के लिए, बहुजनों के सुख के लिए तथा संसार पर अनुकम्पा करने के लिए चारिका यानी विचरण करो।
इसके बाद 10, 11, 12 और 13 दिसंबर को संत कबीर नगर के तमाम गांवों से गुजरते हुए 14 दिसंबर को यह यात्रा सिद्धार्थ नगर पहुंचेगी। 15 दिसंबर को भी यात्रा सिद्धार्थ नगर के अलग-अगल हिस्सों से गुजरते 16 दिसंबर को सिद्धार्थ नगर के कपिलवस्तु पहुंचेगी। इसके बाद 17 दिसंबर को यात्रा तथागत बुद्ध के जन्मस्थान नेपाल के लुम्बिनी पहुंचेगी, जहां इसका समापन होगा।
दलित समाज से ताल्लुक रखने वाले 1985 बैच के IAS अधिकारी हीरालाल सामरिया भारत के नए सूचना आयुक्त बनाए गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार 6 नवंबर को हीरालाल सामरिया को केंद्रीय सूचना आयोग के प्रमुख के रूप में शपथ दिलाई। पूर्व मुख्य आयुक्त वाई.के. सिन्हा का कार्यकाल तीन अक्टूबर को खत्म होने के बाद से यह पद खाली था। सामरिया राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले हैं। शपथ ग्रहण के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राज्यसभा के सभापति भी मौजूद रहें।
ब्रांडाइस युनिवर्सिटी। अमेरिका के बोस्टन से सटे वाल्थम में स्थित ब्रांडाइस युनिवर्सिटी में तीन दिनों तक चले सेेमिनार के आखिरी दिन भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी. वाई चंद्रचूड़ पहुंचे। चीफ जस्टिस चंद्रचूड को की-नोट एड्रेस करना था। बाबासाहेब डॉ. आंबेडकर अनफिनिस्ड लेगेसी के तहत होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का विषय इस बार Law, Caste and the Pursuit of Justice था।
इस दौरान चीफ जस्टिस ब्रांडाइस युनिवर्सिटी में लगी बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा को देखने भी पहुंचे। जहां दलित दस्तक के संपादक अशोक दास ने उनसे वंचितों को न्याय के मुद्दे पर सीधी बातचीत की। देखिए वीडियो