चौथी बार खारिज हुई नीरव मोदी की जमानत याचिका

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले मामले में आरोपी और भगोड़े नीरव मोदी को लंदन की अदालत से झटका लगा है. अदालत ने नीरव को जमानत देने से इनकार कर दिया है. इसके अलावा जज ने नीरव को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए ये शक जताया है कि अगर बेल मिली तो सबूतों से छेड़छाड़ हो सकती है.

सुनवाई के दौरान जज की तरफ से नीरव मोदी के वकील को फटकार भी लगाई गई है. जज ने कहा है कि वह इस बात पर यकीन नहीं कर सकते कि बेल मिलने पर किसी सबूत को नष्ट नहीं किया जाएगा. सुनवाई के दौरान जज ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि भविष्य में क्या होगा, कौन जानता है.

जज ने कहा कि याचिकाकर्ता पर कई देशों में धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं, ऐसे में जमानत देना ठीक नहीं होगा. बता दें कि ये चौथी बार है जब नीरव मोदी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया है.

इससे पहले लंदन की ही एक अदालत ने नीरव मोदी को 26 जून तक जेल (न्यायिक हिरासत) में रहने का फैसला सुनाया था. 48 साल का कारोबारी नीरव मोदी हिंदुस्तान में 13,000 करोड़ रुपए के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में वॉन्टेड है.

उसे 19 मार्च को होलबोर्न से गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद से ही वह प्रत्यर्पण कार्यवाही के खिलाफ लड़ रहा है. नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) 13,000 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी मामले के संबंध में जांच कर रही हैं.

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अब हरियाणा और छत्तीसगढ़ में भी मायावती ने तोड़ा गठबंधन

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लोकसभा चुनाव 2019 की सियासी जंग फतह करने के लिए बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने देश के अलग-अलग राज्यों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन के फॉर्मूले को आजमाया था, लेकिन उनकी यह कोशिश पूरी तरह से फेल हो गई. उत्तर प्रदेश से बाहर किसी और राज्य में बसपा कुछ खास असर नहीं दिखा सकी है. इसी का नतीजा है कि बसपा ने एक-एक कर सारे दलों के गठबंधन तोड़ दिया है. इसकी शुरुआत यूपी में सपा के साथ हुई और अब छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की पार्टी से बसपा ने गठबंधन खत्म कर लिया है.

यूपी के बाद बसपा ने हरियाणा में भी अपने गठबंधन साथी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (एलएसपी) से नाता तोड़ लिया है. मायावती ने एलएसपी के अध्यक्ष राजकुमार सैनी के साथ चुनावी तालमेल किया था. गठबंधन के तहत हरियाणा की 10 सीटों में से 8 पर बसपा ने अपने प्रत्याशी उतारे थे और एलएसपी ने 2 सीटों पर चुनाव लड़ा था. मोदी लहर में दोनों पार्टियों को बुरी तरह से हार का मुंह देखना पड़ा है.

लोकसभा चुनावों से पहले हुए बसपा-एलएसपी गठबंधन में 55-35 का फार्मूला विधानसभा चुनावों के लिए तय किया गया था. बसपा को 55 और एलएसपी को 35 सीटों पर चुनाव लड़ना था, लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद मायावती ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. हालांकि, मायावती ने पहले हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल के साथ गठबंधन किया था, लेकिन इनेलो की पारिवारिक टूट का हवाला देकर बसपा ने यह गठबंधन तोड़ा और राजकुमार सैनी की पार्टी एलएसपी के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया और अब उसे खत्म कर दिया.

लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार का असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रह है. छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के साथ बसपा ने गठबंधन तोड़ दिया है. अब आगामी निकाय और पंचायत चुनावों में दोनों ही पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बसपा के अपने कैडर वोट को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं.

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 से पहले सितंबर में अजीत जोगी की पार्टी ने बसपा के साथ गठबंधन किया था. इस चुनाव में प्रदेश की कुल 90 में से 35 सीटों पर बसपा और 55 सीटों पर गठबंधन में अजीत जोगी की पार्टी ने चुनाव लड़ा था. दोनों के गठबंधन को सात सीटें मिली थीं, जिनमें दो बसपा की थीं. इसके बाद लोकसभा चुनाव में सभी 11 सीटों पर बसपा ने अकेले चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद अब दोनों की राह जुदा हो गई है.

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कुछ ही देर में एम्स एमबीबीएस 2019 परीक्षा का परिणाम होगा जारी,

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स नई दिल्ली का परीक्षा खंड 12 जून को यानि आज एम्स एमबीबीएस 2019 परिणाम जारी करने के लिए पूरी तरह तैयार है. परिणाम कुछ ही देर में जारी किया जाएगा. एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एम्स परिणाम 2019 परीक्षा के संयोजक की आधिकारिक वेबसाइट aiimsexams.org पर अपलोड किया जाएगा. मेरिट सूची और प्रत्येक उम्मीदवार के स्कोरकार्ड भी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध किए जाएंगे. जानकारी के अनुसार, सामान्य योग्यता सूची और श्रेणी-वार एम्स एमबीबीएस 2019 की मेरिट सूची 12 जून को इसके होमपेज पर ऑनलाइन मोड में उपलब्ध होगी.

वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए लगभग 1207 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एम्स 2019 प्रवेश परीक्षा प्रत्येक दिन 25-26 मई को दो पालियों में आयोजित की गई थी. ये सीटें नई दिल्ली, बठिंडा, भोपाल, भुवनेश्वर, देवगढ़, गोरखपुर, जोधपुर, कल्याणी, मंगलगिरी, नागपुर, पटना, रायपुर, रायबरेली, ऋषिकेश और तेलंगाना में स्थित 15 एम्स में विभाजित हैं.

एम्स परिणाम 2019 रैंक कार्ड डाउनलोड कैसे करें

  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स की परीक्षा अनुभाग की आधिकारिक वेबसाइट aiimsexams.org पर जाएं.
  • मुखपृष्ठ पर, एम्स परिणाम 2019 टैब खोजें. परिणाम के लिंक पर क्लिक करें और आवश्यक विवरण जैने नाम, रोल नंबर या पंजीकरण संख्या दर्ज करें.
  • आपका अनुभागीय स्कोर और एम्स परिणाम 2019 स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा.
  • परिणाम डाउनलोड करें और एम्स एमबीबीएस 2019 रिजल्ट का प्रिंटआउट लें.

काउंसलिंग का दौर जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू होगा और कुल तीन चरणों में योग्य उम्मीदवारों को सीट आवंटित करने के लिए निर्धारित किया गया है. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, एम्स नई दिल्ली की तरफ से मेरिट के आधार पर स्टूडेंट्स की काउंसलिंग जुलाई के पहले सप्ताह से आयोजित की जाएगी. रिपोर्ट्स की मानें तो एम्स द्वारा तीन चरणों में सीटों का अलॉटमेंट किया जाएगा. ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, एम्स की परीक्षा में जो स्टूडेंट्स सफल होते हैं उनको सलाह है कि वो काउंसलिंग के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें.

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मौत का बुखार: बिहार में ‘चमकी’ से 11 दिन में 60 बच्चों की मौत

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उत्तर बिहार के बच्चों पर दिमागी बुखार का कहर जारी है. बीते 24 घंटे में मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच व केजरीवाल अस्पताल में इलाजरत पांच बच्चों की मौत हो गई. वहीं, इस बीमारी से ग्रसित 23 नए बच्चों को मंगलवार को दोनों अस्पतालों में भर्ती कराए गए. इनमें से 15 बच्चों का एसकेएमसीएच व आठ का केजरीवाल अस्पताल में इलाज किया जा रहा है. इन बच्चों की मौत के साथ बीते 11 दिनों में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 60 हो गई है. वहीं, नए भर्ती बच्चों को मिलकर 154 पीड़ित सामने आ चुके हैं.

उधर, पीड़ितों व मौत की बढ़ रही संख्या के मद्देनजर पटना मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक हुई. वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख डॉ. आरडी रंजन, राज्य वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल अधिकारी डॉ. एमपी शर्मा व राज्य जेई-एईएस के नोडल समन्वयक संजय कुमार ने एसकेएमसीएच पहुंच पूरी स्थिति का जायजा लिया. इस दौरान अधिकारियों ने दो राउंड चारों पीआईसीयू का निरीक्षण किया. इसके बाद विभाग की टीम केजरीवाल अस्पताल भी पहुंची. इधर, सिविल सर्जन डॉ ने बताया कि मंगलवार को चार ही बच्चों की मौत चमकी बुखार से हुई है. भर्ती मरीजों की संख्या में भी अंतर देखा जा रहा है. ऐसे में अधिकारियों ने सुव्यवस्थित तरीके से डाटा अपडेट करने पर भी जोर दिया है.

एससकेएमसीच में मंगलवार को मोतीपुर के मछुआ की पांच वर्षीय चांदनी कुमारी, बोचहां कनहारा के चार वर्षीय शिवा कुमार, मोतीपुर की नौ वर्षीया सगुफ्ता की मौत हो गई. वहीं, सीतामढ़ी के रून्नीसैदपुर के जिलावतपुर के सात वर्षीय नीलेश कुमार ने इमरजेंसी में दम तोड़ दिया. परिजनों के अनुसार उसे भी चमकी-तेज बुखार की समस्या थी. उधर, केजरीवाल अस्पताल में मुशहरी कन्हौली की ढाई वर्षीय संध्या की मौत हो गयी.

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ऋषभ पंत जाएंगे इंग्लैंड, शिखर धवन की जगह मिल सकता है मौका

नई दिल्ली। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के बैकअप के तौर पर गुरुवार सुबह इंग्लैंड के लिए रवाना होंगे. सूत्रों ने पुष्टि की है कि वह चोटिल ओपनर शिखर धवन के कवर के तौर पर इंग्लैंड पहुंचेंगे. उन्होंने साथ ही बताया कि बीसीसीआई पंत के लिए सबसे उपयुक्त फ्लाइट का इंतजाम करने की कोशिशों में लगा था ताकि वह जल्द से जल्द इंग्लैंड में भारतीय टीम से जुड़ सकें. हालांकि धवन चोट से उबर रहे हैं और अभी भारत की 15 सदस्यीय टीम का हिस्सा रहेंगे.

वर्ल्ड कप के लिए टीम चुने जाने से पहले पंत को टीम इंडिया के अंतिम 15 में शामिल होने का बड़ा दावेदार माना जा रहा था लेकिन उनकी जगह दिनेश कार्तिक को चयनकर्ताओं ने वरीयता दी. सूत्रों की मानें तो धवन के चोटिल होने के बाद पंत को टीम में शामिल किया जा सकता है.

सूत्रों ने बताया कि ऋषभ को बैकअप के तौर पर इंग्लैंड बुलाया जा रहा है. उन्होंने कहा, ‘ऋषभ पंत को स्टैंडबाय के तौर पर पहले ही बुलाया जा रहा है, ताकि वह परिस्थितियों के मुताबिक ढल सकें. यदि धवन फिट नहीं हो पाते हैं तो हम आईसीसी के समक्ष इस बात को रखेंगे और स्वीकृति मिलने पर ऋषभ को तुरंत टीम में शामिल कर लिया जाएगा.’

उम्मीद है कि ऋषभ पंत गुरुवार को भारत और न्यू जीलैंड के बीच होने वाले मैच की शाम को नॉटिंगम पहुंचेंगे. हालांकि वह तब तक टीम से नहीं जुड़ सकेंगे, जब तक शिखर धवन चोटिल होने के चलते आगे नहीं खेल सकेंगे. पंत को दिल्ली में उनके घर पर टीम जर्सी से लेकर आधिकारिक सामान तक दे दिया गया है. यदि पंत टीम में शामिल होते हैं तो वह नंबर-4 पर खेल सकते हैं और रोहित शर्मा के साथ लोकेश राहुल ओपनिंग का जिम्मा संभाल सकते हैं.

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गुजरात में कल 140 से 165 किमी प्रति घंटा तक की रफ्तार से आ सकता है ‘वायु’

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नई दिल्ली। अरब सागर में हवा के कम दबाव की स्थिति गहराने के कारण उत्पन्न चक्रवात ‘वायु’ महाराष्ट्र से उत्तर में गुजरात की ओर बढ़ रहा है. 13 जून यानी कल ‘वायु’ चक्रवात गुजरात पहुंच जाएगा. राज्य सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है. स्कूल और कॉलेज दो दिन (12 और 13 जून) के लिए बंद है. मौसम विभाग के आधिकारिक ट्वीट के मुताबिक चक्रवाती तूफान ‘वायु’ पिछले 6 घंटे में पूर्वी मध्य अरब सागर के ऊपर उत्तर की ओर बहुत गंभीर तरीके आगे बढ़ा है. 12 जून को तड़के करीब 02:30 बजे पूर्वी मध्य अरब सागर में गोवा से 450 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में, मुंबई से 290 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में और वेरावल (गुजरात) से लगभग 380 किमी की दूरी पर केंद्रित रहा.

मौसम विभाग द्वारा मंगलवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, सुदूर समुद्र में हवा के कम दबाव का क्षेत्र तेजी से बनने के कारण ‘वायु’ के 13 जून को गुजरात के तटीय इलाकों पोरबंदर और कच्छ क्षेत्र में पहुंचने की संभावना है. विभाग ने अगले 24 घंटों में चक्रवाती तूफान के और अधिक गंभीर रूप धारण करने की संभावना व्यक्त करते हुये कहा कि उत्तर की ओर बढ़ता ‘वायु’ 13 जून को सुबह गुजरात के तटीय इलाकों में पोरबंदर से महुवा, वेरावल और दीव क्षेत्र को प्रभावित करेगा. इसकी गति 140 से 150 किमी से 165 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है.

उधर चक्रवात ‘वायु’ से निपटने के लिये गुजरात प्रशासन हाई अलर्ट पर है, जिसके गुरुवार को वेरावल के पास तट पर पहुंचने की संभावना है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने मंगलवार को कहा कि तटीय इलाके में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जायेगा. मौसम संबंधी हालिया रिपोर्ट के अनुसार चक्रवात ‘वायु’ वेरावल तट के करीब 650 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और अगले 12 घंटे में इसके तीव्र चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है. यह तूफान 13 जून तक राज्य के तट पर पहुंच सकता है.

मौसम विभाग ने तूफान के मद्देनजर सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय इलाकों में 13 और 14 जून को भारी बारिश होने और 110 किमी प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है. इसे देखते हुये गुजरात सरकार ने भी हाई अलर्ट जारी करते हुये सौराष्ट्र और कच्छ इलाकों में नेशनल डिजास्टर रेस्पोंस फोर्स (एनडीआरएफ) के जवानों को तैनात किया है. तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है. साथ ही बंदरगाहों को खतरे के संकेत और सूचना जारी करने को कहा गया है.

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बागी होकर भी शिवपाल हैं सपा के विधायक, घर वापसी की चर्चा तेज

समाजवादी पार्टी से बगावत करके पिछले साल शिवपाल यादव ने अलग अपनी पार्टी बनाई और लोकसभा चुनाव में ताल ठोककर कुछ सीटों पर सपा के सियासी समीकरण को बिगाड़ दिया. वहीं अखिलेश यादव बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ गठबंधन कर शानदार प्रदर्शन के लिए पूरी तरह आश्वस्त थे, लेकिन गठबंधन का गणित ऐसा ध्वस्त हो गया कि सपा अब तक के सबसे खराब दौर में पहुंच गई. अब शिवपाल की सपा में वापसी और अखिलेश के साथ उनके रिश्ते को सुधारने के लिए मुलायम सिंह यादव की ओर से कोशिश की जा रही है.

दिलचस्प बात यह है कि शिवपाल यादव अभी भी सपा से ही विधायक हैं. सपा से बगावत करने के बाद शिवपाल की सदस्यता के समाप्त करने के लिए सपा आलाकमान की ओर से आज तक किसी तरह की कोई चिट्ठी नहीं लिखी गई है. जबकि सपा के खिलाफ लोकसभा चुनाव में खुद भी लड़ चुके हैं और अपनी पार्टी से कई नेताओं को अलग सीट पर मैदान में उतारा था.

इसके बाद भी अखिलेश यादव ने शिवपाल के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया, जिससे की उनकी विधानसभा से सदस्यता खत्म हो. इसी के चलते आज भी वो सपा के ही विधायक हैं. माना जा रहा है कि सपा की ओर से समझौते की यह आखिरी गुंजाइश रखी गई है.

सोमवार को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ में मुलायम सिंह का हालचाल लेने उनके आवास पर पहुंचे थे. इस दौरान शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव भी वहां पर मौजूद थे. सपा सूत्रों की मानें तो सीएम योगी के वहां से जाने के बाद मुलायम सिंह यादव ने शिवपाल और अखिलेश यादव से बंद कमरे में करीब आधे घंटे बातचीत की.

बता दें कि लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव बेटे अखिलेश और भाई शिवपाल के बीच सुलह कराने की लगातार कोशिशें कर रहे हैं. दोनों के बीच मतभेद दूर करने के लिए पिछले दिनों मुलायम ने अखिलेश और शिवपाल से अलग-अलग मुलाकात की थी. इसके बाद सोमवार को दोनों नेता मुलायम सिंह को देखने उनके आवास पर पहुंचे थे. इसके चलते माना जा रहा है कि उनके बीच नजदीकियां बढ़ती दिख रही है.

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योगी कैबिनेट ने वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाई, सरकारी नौकरी के लिए BTC के साथ B.Ed किया अनिवार्य

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज  कैबिनेट की बैठक हुई. इस बैठक में सरकार ने 6 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई है. योगी सरकार ने राज्य के बुजुर्गों को तोहफा दिया है. सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन में इजाफा कर दिया है. पेंशन राशि को 400 रुपये प्रति महीने से बढ़ाकर 500 रुपये प्रति महीना कर दिया गया है. आपको बता दें कि हर मंगलवार को योगी कैबिनेट की मीटिंग होती है. इससे पहले बीते मंगलवार यानी 4 जून को हुई बैठक में 8 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई थी.

इन प्रस्तावों पर लगी मुहर

  • वृद्धा अवस्था पेंशन 400 से बढ़कर 500 रुपये कर दिए गए हैं. राज्य अंश में 100 रुपए की और वृद्धि की गई है. आपको बता दें कि 79 से ऊपर के बुजुर्ग को पहले से ही 500 रुपये पेंशन दी जा रही है. यूपी में 41 लाख लाभार्थी अभी पेंशन पा रहे है. 1 जनवरी से यह बढ़ा हुआ पैसा लागू होगा.
  • प्रदेश में लघु माइक्रो ग्रेवी की स्थापना हेतु निमवाली 1961 में छठवां संशोधन किया गया है. ताजी बियर के तहत यह संशोधन किया गया है, जिसमे होटल में माइक्रो ग्रेवी लगाया गया है जिसमे बियर का उत्पादन होता है देश के 7 राज्यो में ऐसी स्थापना हुआ है.
  • लाइसेंस फीस 25 हजार से बढ़ाकर ढाई लाख की गई है. लाइसेंस नवीनी करण के लिए 2 लाख रुपये लगेंगे. प्रतिदिन 600 लीटर 2.1 लाख लीटर प्रतिवर्ष से अधिक उत्पादन नहीं होगा.
  • रायबरेली में एम्स के निर्माण चल रहा है, जिसे साल 2020 में निर्माण को पूरा करना है. वहीं, पुराने और जर्जर पड़े भवन को ध्वस्त करने से संबंधित प्रस्ताव पर भी कैबिनेट बैठक में मुहर लगी है. इस प्रस्ताव के तहत 76 आवास को ध्वस्त किया जाएगा.
  • पीजीआई के डॉक्टरों के एज लिमिट अब 2 साल बढ़ाया गया है, अब भर्ती के लिए 35 से 37 साल कर दिया है.
  • सहायक शिक्षा के लिए बीटीसी के साथ अब शिक्षकों को बीएड करना होगा.
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अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में मिला लापता विमान AN-32 का मलबा

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के लापता एएन-32 विमान का मलबा मिल गया है. मलबा अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले में मिला है. हादसे के वक्त इस विमान में 13 लोग सवार थे. इंडियन एयरफोर्स के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने पुष्टि करते हुए यह जानकारी दी है. भारतीय वायुसेना ने कहा, “अरुणाचल प्रदेश के टाटो इलाके के उत्तरपूर्व में लीपो से 16 किलोमीटर उत्तर में लगभग 12,000 फुट की ऊंचाई पर वायुसेना के लापता एएन-32 विमान का मलबा आज देखा गया. अब हेलीकॉप्टर विस्तृत इलाके में तलाश कर रहे हैं”. 3 जून से लेकर अब तक लापता हुए इस विमान को तलाशने के लिए इंडियन एयरफोर्स ने लगातार अभियान जारी कर रखा था.

बता दें कि हवाई खोज अभियान पिछले 7 दिनों से जारी है. रूसी एएन-32 विमान से सम्पर्क 3 जून को दोपहर में असम के जोरहट से चीन के साथ लगी सीमा के पास स्थित मेंचुका उन्नत लैंडिंग मैदान के लिए उड़ान भरने के बाद टूट गया था. विमान में 13 व्यक्ति सवार थे. विमान के लापता होने के बाद वायुसेना ने मेंचुका और उसके आसपास के क्षेत्र में एक व्यापक खोज अभियान शुरू किया गया था.

वायुसेना ने बीते शनिवार को एएन- 32 परिवहन विमान के बारे में सूचना मुहैया कराने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने की भी घोषणा की थी. शनिवार को एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ ने समग्र खोज अभियान की असम के जोरहट हवाई ठिकाने पर हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में समीक्षा की थी.

1986 में एयरफोर्स में हुआ था शामिल रूस निर्मित एएन-32 परिवहन विमान को 1986 में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था. वर्तमान में, भार तीय वायुसेना 105 विमानों को संचालित करती है जो ऊंचे क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों को लैस करने और स्टॉक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसमें चीनी सीमा भी शामिल है. 2009 में भारत ने 400 मिलियन का कॉन्ट्रैक्ट यूक्रेन के साथ किया था जिसमें एएन-32 की ऑपरेशन लाइफ को अपग्रेड और एक्सटेंड करने की बात कही गई थी. अपग्रेड किया गया एएन-32 आरई एयरक्राफ्ट 46 में 2 कॉन्टेमपररी इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर्स शामिल किए गए हैं. लेकिन एएन-32 को अब तक अपग्रेड नहीं किया गया था.

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‘मेरे खिलाफ लिखने वालों पर हुआ एक्शन, तो खाली हो जाएंगे न्यूज चैनल’: राहुल गांधी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट लिखने वाले पत्रकार की गिरफ्तारी पर बवाल मचा हुआ है. ये मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस पर तंज कसा है. मंगलवार को उन्होंने ट्वीट किया कि अगर इस तरह उनके खिलाफ लिखने वाले पत्रकारों पर एक्शन शुरू हुआ तो मीडिया हाउस में स्टाफ की कमी पड़ जाएगी.

कांग्रेस अध्यक्ष ने ट्वीट किया, ‘अगर हर पत्रकार जो मेरे खिलाफ फर्जी आरोप लगाकर, RSS/BJP का प्रायोजित एजेंडा चलाते हैं, अगर उन्हें जेल में डाल दिया गया तो न्यूज़पेपर और न्यूज़ चैनलों में स्टाफ की कमी पड़ जाएगी. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मूर्खतापूर्ण रवैया अपना रहे हैं, गिरफ्तार किए गए पत्रकारों को तुरंत रिहा करने की जरूरत है.’

आपको बता दें कि यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखने वाले पत्रकार प्रशांत कनौजिया को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. जिसका काफी विरोध किया जा रहा है, कई संगठन और पत्रकार लगातार योगी सरकार पर निशाना साध रहे हैं और पत्रकार की रिहाई की मांग कर रहे हैं. यही मसला अब राजनीतिक रूप ले चुका है.

इतना ही नहीं, पत्रकार की गिरफ्तारी के बाद योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर से भी दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था. गोरखपुर के पीर मोहम्मद और धर्मेंद्र भारती ने भी सीएम योगी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट लिखा था. पत्रकार की गिरफ्तारी का मामला तो देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जिसपर मंगलवार को ही सुनवाई होनी है.

यूपी में ना सिर्फ पत्रकार और आम व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया. बल्कि योगी आदित्यनाथ पर लगे आरोपों को लेकर ही एक न्यूज़ चैनल ने डिबेट करवाई जो भारी साबित हुई. यूपी पुलिस ने न्यूज़ चैनल के हेड और संपादक को भी गिरफ्तार कर लिया गया था.

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प्रशांत कनौजिया मामला और पत्रकारों की आपसी फूट

प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह से पत्रकारों के बीच फूट पड़ी है उसको ठीक से ऑब्जर्ब करने की जरूरत है. प्रेस क्लब के एक पदाधिकारी पत्रकार ने तो खुद को पूरे मामले से अलग कर लिया है. खबर है कि वो ‘सीएम साहेब’ के क्षेत्र से आते हैं और साहेब से उनका ‘करीबी’ रिश्ता है. एक वरिष्ठ पत्रकार ने तो प्रशांत का समर्थन करने वालों से ही 10 सवाल पूछ लिया है. ये भी कहा जा रहा है कि प्रशांत ने जो फेसबुक पर लिखा है, ऐसे लिखने वाले को पत्रकार नहीं कहना चाहिए. प्रशांत को एक विचारधारा से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि प्रशांत जैसे लोग खुन्नस निकाल रहे हैं.

खास बात ये है कि उन्होंने ये सवाल पूछते हुए प्रशांत को बार-बार सिर्फ “कनौजिया” लिख कर संबोधित किया है. आखिर क्या वजह है कि वो वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत को उसके सरनेम से संबोधित कर रहे हैं जो उसकी जातीय अस्मिता को भी बताता है. उनके लिखे पर जिन लोगों के कमेंट प्रशांत के खिलाफ आये हैं, उन सभी में एक “सामान्यता” है. आप उस ‘सामान्यता’ को समझ सकते हैं. हालांकि प्रशांत के समर्थन में काफी वरिष्ठ पत्रकार भी हैं, लेकिन ये घटना कई सवाल खड़ा करती है.

सवाल यह है कि क्या जो पत्रकार प्रशांत पर किसी खास ‘विचारधारा’ से जुड़ने का आरोप लगा रहे हैं क्या उनका किसी ‘विचारधारा’ से संबंध नहीं है? दूसरा सवाल, जिस तरह सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ा है और उसने सो कॉल्ड मेन स्ट्रीम मीडिया को चुनौती दिया है, उससे कई पत्रकार खुन्नस खाए हुए हैं. वो ये बात पचा नहीं पा रहे हैं कि कोई नया पत्रकार अपने बूते बिना किसी संस्थान की मदद के कैसे अपना मकाम बना रहे हैं और अपनी बात कह पा रहे हैं. क्या भंवर मेघवंशी और एच.एल. दुसाध जैसे लोग जो लगातार लिख रहे हैं, वो पत्रकारिता नहीं है?

तीसरा सवाल, क्या ये मान लिया जाए कि जो लोग बड़े मीडिया संस्थानों में बैठे हुए हैं सिर्फ वही बेहतर कर रहे हैं, क्या उसी को मानक मान लिया जाये, और जो पत्रकार बिना किसी सत्ता और धनाढ्यों का सहारा लिए यूट्यूब या वेबसाइट के जरिये बड़ा काम कर रहे हैं क्या उनके लिखे-पढ़े को नकार देना चाहिए? आखिर यह कौन तय करेगा?

क्या वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश सर, आशुतोष जी, अभिसार शर्मा, दिलीप सी. मडंल या फिर पुण्य प्रसून वाजपेयी जब तक बड़े संस्थानों में थे और संपादक थे तो उनका लिखा ठीक था, लेकिन क्या जब वो यूट्यूब और वेबसाइट में लिख रहे हैं तो क्या वो “पत्रकारिता’ की कसौटी पर खरा नहीं है? भड़ास फ़ॉर मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह जब तक बड़े मीडिया संस्थानों में थे तो वो पत्रकार थे लेकिन जब वो एक अनोखा काम कर रहे हैं तो क्या अब उनको पत्रकार न माना जाए? जाहिर है कि ये सब बड़ा योगदान दे रहे हैं.

पत्रकारिता कंटेंट का खेल है, जिसने बेहतर लिखा है उसको पढ़ा ही जाएगा, चाहे वो किसी पत्र-पत्रिका में लिखे, किसी चैनल पर बोले या फिर वेबसाइट या यूट्यूब पर बोले और लिखे. ये हक सिर्फ पाठक का है कि वो किसको पढ़ना और देखना-सुनना चाहते हैं. पाठक ही ये तय करेगा कि कौन कैसा लिख रहा है. कोई “पत्रकार” सिर्फ अपने को और ‘अपने जैसों’ को ही पत्रकार माने और बाकी सबको नकार दे ये क्या बात हुई? प्रशांत एक पत्रकार है और उसको कमतर समझना सिर्फ अहम है और कुछ नहीं. अगर बड़े पत्रकारों ने पत्रकारिता को संभाला होता और इसकी गरिमा को बनाये रखा होता तो आज पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर इतना बड़ा संकट नहीं होता.

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पत्रकार मामले में SC की योगी सरकार को नसीहत, ‘हम उस देश में रहते हैं जहां संविधान लागू है’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट लिखने वाले पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाई है. साथ ही गिरफ्तार पत्रकार प्रशांत को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी कर दिया है. मंगलवार को इस मामले में अदालत में सुनवाई हुई, इस दौरान SC ने यूपी सरकार से कहा कि आप किसी भी नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं कर सकते हैं. नागरिकों के अधिकारों को बचाए रखना जरूरी है.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि आपत्तिजनक पोस्ट पर विचार अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन गिरफ्तारी क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत कनौजिया की पत्नी को मामले को हाईकोर्ट ले जाने को कहा है. बता दें कि प्रशांत कनौजिया को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान IPC की धारा 505 के तहत इस मामले में एफआईआर दर्ज करने पर भी सवाल खड़े किए. अदालत ने यूपी सरकार से पूछा है कि किन धाराओं के तहत ये गिरफ्तारी की गई है. ऐसा शेयर करना सही नहीं था लेकिन फिर गिरफ्तारी क्यों हुई है.

सुनवाई के दौरान जस्टिस बनर्जी ने कमेंट किया कि हम उसके (पत्रकार) के काम की तारीफ नहीं कर रहे हैं, ना ही उनपर लगे आरोपों का खंडन कर रहे हैं. लेकिन ऐसा करने वाले को जेल में रखना ठीक नहीं है. जस्टिस बनर्जी ने कहा कि हम उस देश में रह रहे हैं जहां पर संविधान लागू है.

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश की सरकार ने ये भी कहा कि इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जगह इलाहाबाद हाईकोर्ट में होनी चाहिए. सरकार का कहना है कि प्रशांत ने केवल आपत्तिजनक पोस्ट ही नहीं किया बल्कि इससे पहले जाति को लेकर भी कमेंट कर चुके हैं.

आपको बता दें कि प्रशांत कनौजिया एक फ्रीलांस पत्रकार हैं, उन्हें उत्तर प्रदेश की पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार किया था. उनपर आरोप है कि उन्होंने ट्विटर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट किया था. यूपी में उनकी गिरफ्तारी के अलावा न्यूज चैनल के हेड और संपादक को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, चैनल ने योगी आदित्यनाथ पर एक डिबेट का आयोजन किया था.

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शिखर धवन के अंगूठे में फ्रैक्चर, टूर्नामेंट से बाहर होने की आशंका

टीम इंडिया के मिशन वर्ल्ड कप को एक बड़ा झटका लगा है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतकीय पारी खेल टीम को जीत दिलाने वाले ‘गब्बर’ शिखर धवन चोटिल होने की वजह से टीम से बाहर हो गए हैं. वह तीन हफ्ते के लिए बाहर हुए हैं, लेकिन उन्हें फ्रैक्चर है इसलिए लग रहा है कि अब वर्ल्डकप में उनकी वापसी मुश्किल ही है. धवन के बाहर होते ही कई सवाल हैं जो खड़े हुए हैं, अब टीम में ओपनिंग कौन करेगा और फिर चौथे नंबर पर कौन खेलेगा.

आपको बता दें कि शिखर धवन टीम से बाहर हुए हैं तो ये सवाल खड़े हो रहे हैं कि ओपनिंग कौन करेगा. अगर टीम के कॉम्बिनेशन को देखें तो केएल राहुल की उम्मीद सबसे ज्यादा लग रही है. राहुल इससे पहले भी ओपनिंग कर चुके हैं, IPL और टेस्ट क्रिकेट में भी वह ओपनिंग करते आए हैं.

ऐसे में 13 जून को होने वाले न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में रोहित शर्मा के साथ ओपनिंग करने केएल राहुल उतर सकते हैं. अभी राहुल चौथे नंबर पर खेल रहे हैं. लेकिन दूसरा बड़ा सवाल ये है कि अगर राहुल ओपनिंग करेंगे तो फिर चौथे नंबर पर कौन खेलेगा. अभी तक दोनों मैचों में भारत ने अपनी टीम नहीं बदली है.

ऐसे में न्यूजीलैंड के खिलाफ दिनेश कार्तिक, विजय शंकर और केदार जाधव चौथे नंबर पर दिख सकते हैं. केदार जाधव अभी महेंद्र सिंह धोनी के बाद छठे नंबर पर खेल रहे हैं. बता दें कि विजय शंकर टीम में नए हैं ऐसे में वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में उन्हें मौका मिलता है या नहीं, इसपर सवाल खड़े हो सकते हैं. वहीं, दिनेश कार्तिक लंबे समय से टीम में अंदर बाहर होते रहे हैं.

हालांकि, अगर इस बात की पुष्टि होती है कि शिखर पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो जाते हैं. तो BCCI की ओर से उनका रिप्लेसमेंट भी मांगा जा सकता है. इस कड़ी में धवन के टीम स्क्वॉड से बाहर होने पर श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है. दोनों ही खिलाड़ियों ने IPL और घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी टीम को जीत दिलाई है.

बता दें कि वर्ल्डकप जैसे टूर्नामेंट में स्क्वायड से हटकर प्लेयर्स चुनने की छूट कम ही मिलती है, ऐसे में ये नियम टीम की चिंता बढ़ा सकता है.

वर्ल्ड कप में ये है पूरी टीम…

विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा (उप कप्तान), शिखर धवन, केएल राहुल, विजय शंकर, एमएस धोनी (विकेटकीपर), केदार जाधव, दिनेश कार्तिक, युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, मो. शमी, रवींद्र जडेजा

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भारत ने रविवार को ओवल में खेले गए मुकाबले में पांच बार की विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम को 36 रनों से मात दी. भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पांच विकेट पर 352 रनों का स्कोर बनाया. जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम 316 रन बनाकर आउट हो गई. भारत की ओर से शिखर धवन ने शानदार शतक लगाया. इसके बाद भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह ने तीन-तीन विकेट लिए.

ऑस्ट्रेलियाई टीम की यह हार इस लिहाज से भी बड़ी है क्योंकि उसे 20 साल और 19 मैचों बाद विश्व कप में रनों का पीछा करते हुए हार का सामना करना पड़ा है. बीते चार विश्व कप में उसने कभी भी रनों का पीछा करते हुए कोई मैच नहीं गंवाया था.

वर्ल्ड कप में रनों का पीछा करते हुए कंगारू टीम को आखिरी बार 1999 में हार का सामना करना पड़ा था. उस मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी का न्योता मिलने पर 8 विकेट पर 275 रन बनाए थे. पाकिस्तान की ओर से इंजमाम उल हक ने 81 रनों की पारी खेली थी. इसके जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम 265 के स्कोर पर ऑल आउट हो गई थी. हालांकि फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराकर खिताब पर कब्जा किया था. इसके बाद उसे कभी विश्व कप में रनों का पीछा करते हुए हार का सामना नहीं करना पड़ा.

2003 और 2007 के विश्व कप में विजेता बनी ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पूरे टूर्नमेंट में कोई मैच नहीं हारा था. हालांकि 2011 में उसे लीग मैच में पाकिस्तान और फिर विश्व कप क्वॉर्टर फाइनल में उसे भारत से हार का सामना करना पड़ा था लेकिन दोनों मौकों पर ऑस्ट्रेलिया पहले बल्लेबाजी कर रही थी. 2015 के विश्व कप में विजेता बनी कंगारू टीम को लीग मैच में कंगारू टीम से 1 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था.

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कठुआ रेप मामले में 6 दोषियों में से तीन को उम्रकैद, पीड़िता की मां ने की फांसी की मांग

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कठुआ रेप मामले में पंजाब के पठानकोट की एक विशेष अदालत ने फ़ैसला सुना दिया है. इस मामले में कोर्ट ने सात में से छह अभियुक्तों को दोषी ठहराया है.

कोर्ट से बाहर आए पीड़िता पक्ष के वकील मुबीन फ़ारूक़ी ने कहा कि विशाल को छोड़ कर सभी छह अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है. मामले में आनंद दत्ता, दीपक खजुरिया, सांझी राम, तिलक राज, सुरिन्दर वर्मा और प्रवेश कुमार दोषी ठहराए गए हैं. विशाल को कोर्ट ने बरी कर दिया है.

जम्मू के कठुआ में पिछले साल जनवरी के महीने में आठ साल की एक बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी.

पीड़िता की मां ने की फांसी की मांग कोर्ट के फ़ैसले के बाद पीड़िता की मां ने मुख्य अभियुक्त सांझी राम को फांसी देने की मांग की है.

पीड़िता की मां ने कहा, “मुझे राहत मिली है, लेकिन न्याय तब मिलेगा जब सांझी राम और विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया को फांसी दी जाएगी.”

“मेरी बेटी का चेहरा आज भी मुझे परेशान करता है और यह दर्द जीवनभर रहेगा. जब मैं उसकी उम्र के दूसरे बच्चों को खेलते देखती हूं तो मैं अंदर से टूट जाती हूं.”

पीड़िता पक्ष के वकील मुबीन फ़ारूकी ने कहा, “आज सच की जीत हुई है. आज पूरे देश की जीत हुई है. पूरे देश ने यह लड़ाई मिल कर लड़ी थी. दीपक खजुरिया, प्रवेश कुमार और सांझी राम को 376डी, 302, 201, 363, 120बी, 343 और 376बी के तहत दोषी ठहराया गया है. वहीं तिलक राज, आनंद दत्ता और सुरिन्दर वर्मा को आईपीसी की धारा 201 के तहत दोषी ठहराया गया है. यह संवनैधानिक भावना की जीत है. सत्यमेव जयते.”

वहीं अभियुक्तों के वकील ने हाई कोर्ट जाने की बात कही है.

पुलिस के मुताबिक़ बच्ची को कई दिनों तक ड्रग्स देकर बेहोश रखा गया था. उसे पिछले साल 10 जनवरी को अग़वा किया गया था और क़रीब एक सप्ताह बाद उसका शव मिला था. इस मामले को लेकर देशभर में प्रदर्शन हुए थे.

मामले की सुनवाई बंद कमरे में तीन जून को पूरी कर ली गई थी और फ़ैसला 10 जून को सुनाना तय हुआ था.

सोमवार को क़रीब दस बजे मामले के सभी सात अभियुक्तों को कोर्ट लाया गया. इसके बाद फ़ैसले को सुनाने की कार्यवाही शुरू हुई.

फ़ैसले को लेकर जम्मू के कठुआ में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. ज़िले में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है. पठानकोट में कोर्ट के बाहर भी भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है.

कठुआ रेप और हत्या मामले में जब पुलिस चार्जशीट दायर करने जा रही थी तो रास्ते में कुछ स्थानीय पत्रकारों ने उनका रास्ता रोक लिया था. अभियुक्तों के पक्ष में रैलियां निकाली गई थीं.

इसे देखते हुए मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दख़ल दिया और आदेश दिया कि मामले का ट्रायल जम्मू से बाहर पठानकोट में किया जाएगा और इस ट्रायल में हर दिन कैमरे के सामने कार्यवाही होगी.

इस मामले की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनने को मिली थी. अप्रैल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने आठ वर्षीय बच्ची से रेप और हत्या की घटना को ‘डरावना’ बताया था. उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इस संबंध में प्रशासन न्याय ज़रूर सुनिश्चित करवाएगा.

मामले में कब क्या हुआ?

  • नाबालिग बच्ची 10 जनवरी 2018 को गुम हुई थी और 17 जनवरी को उसका शव मिला था.
  • जम्मू और कश्मीर सरकार ने 23 जनवरी 2018 को मामले की जांच राज्य पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी थी.
  • क्राइम ब्रांच ने 10 फ़रवरी 2018 को एक स्पेशल पुलिस ऑफ़िसर दीपक खजुरिया को गिरफ़्तार किया.
  • क्राइम ब्रांच ने 10 अप्रैल 2018 को इस मामले में कठुआ की एक अदालत में आरोप-पत्र दाख़िल किया था.
  • आरोप पत्र दाख़िल करते समय कठुआ के कई वकीलों ने अदालत के बाहर हंगामा किया और पुलिस को आरोप-पत्र दाख़िल करने से रोकने की कोशिश की थी.
  • आरोप-पत्र दाख़िल होने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 18 अप्रैल 2018 की तारीख़ दी.
  • क्राइम ब्रांच ने अपने आरोप-पत्र में लिखा था कि पहले बच्ची का अपहरण किया गया, उसे नशीली दवाएं खिलाई गईं और कई दिनों तक उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया जाता रहा.
  • क्राइम ब्रांच ने अपने आरोप-पत्र में ये भी कहा कि बच्ची को कई दिनों तक इलाक़े के एक मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया था. बाद में उसकी हत्या कर दी गई.
  • 16 जनवरी 2018 को ‘हिंदू एकता मंच’ नाम के एक संगठन ने कठुआ में वकीलों के समर्थन में रैली निकाली, जिसमें बीजेपी के स्थानीय विधायक राजीव जसरोटिया और दूसरे नेता भी शामिल थे.
  • 4 मार्च 2018 को बीजेपी के दो मंत्री चौधरी लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा ने कठुआ में ‘हिंदू एकता मंच’ की रैली को संबोधित किया और मामले की सीबीआई जाँच की मांग की.
  • 5 अप्रैल 2018 को इस पूरी घटना के मुख्य अभियुक्त सांझी राम ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. 13 अप्रैल 2018 को बीजेपी के दो मंत्री लाल सिंह और चंद्र प्रकाश गंगा से पार्टी ने इस्तीफ़ा माँगा.
  • 16 अप्रैल 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू और कश्मीर सरकार से इस बात का जवाब माँगा कि पीड़िता के परिवारवालों ने मामले के ट्रायल को राज्य से बाहर कराए जाने की मांग की है.
  • 18 अप्रैल 2018 को पहली सुनवाई में क्राइम ब्रांच से कहा गया कि सभी आरोपियों को आरोप-पत्र की कॉपी दी जाए.
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर 7 मई 2018 की तारीख़ दी थी. दरअसल, पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाख़िल कर केस का ट्रायल जम्मू और कश्मीर से बाहर कराने की मांग की थी.
  • इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पंजाब के पठानकोट में ट्रांसफर कर दिया था.
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जम्‍मू-कश्‍मीर में किश्तवाड़ के जंगलों में मिली आतंकी गुफा, सेना ने किया ध्वस्त

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ भारतीय सुरक्षाबलों के ऑपरेशन ऑलआउट के बाद से आतंकियों ने अपने ठहरने का ठिकाना बदल लिया है. यहां किश्तवाड़ के केशवान क्षेत्र में आतंकियों के नए ठिकानों का पता चला है. बताया जा रहा है कि आतंकियों ने जंगलों के बीच पहाड़ काटकर उसमें सुरंग बना रखी थी और उसमें ही रहा करते थे. सेना की 26 राष्ट्रीय राइफल और पुलिस के विशेष दस्ते ने आतंकी ठिकाने को ध्वस्त कर दिया है. सुरक्षाबलों की कार्रवाई के पहले ही आतंकी वहां से भाग निकले थे. सेना को सुरंग से गोला बारूद और खाने-पीने का सामान बरामद हुआ है.

भारतीय सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि केशवान के जंगलों में लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी जमाल दीन मौजूद है. जानकारी के आधार पर सेना और पुलिस के जवानों ने पूरे जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया. सर्च ऑपरेशन के दौरान एक पहाड़ का सामने का हिस्सा कटा दिखाई दिया. इस पहाड़ में छोटा सा रास्ता कटा गया था, जिसे सूखे पौधों से ढक दिया गया था.

सुरक्षाबलों ने पौधों को हटाया तो पहाड़ी के बीच में से एक रास्ता निकला हुआ था. रास्ता देखते ही जवान अलर्ट हो गए और पूरे इलाके को घेर लिया. एक जवान जब पहाड़ी के अंदर घुसा तो अंदर से पहाड़ को काटकर पूरा घर बनाया गया था. इस घर में खड़े होने की जगह तो नहीं थी लेकिन उसकी लंबाई काफी ज्यादा थी. सेना को वहां से एके-47 की गोलियों से भरी हुई तीन मैगजीन, खाने-पीने का सामान, जिसमें आटा, चावल, मैगी, जूस, गैस सिलेंडर, चूल्हा, कंबल, कपड़े, दवाइयां आदि बरामद किए गए हैं. बताया जाता है कि सेना के आने से पहले आतंकी वहां से फरार हो गए थे. सेना ने आतंकी ठिकाने को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है

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युवराज ने लिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास

टीम इंडिया के दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है. युवराज ने साउथ मुंबई होटल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में यह ऐलान किया. युवराज ने अपने करियर की शुरुआत सौरव गांगुली की कप्तानी में साल 2000 में नैरोबी में की थी. तब केन्या के खिलाफ पदार्पण वनडे मुकाबले में उनकी बैटिंग नहीं आई थी. युवी ने अपना आखिरी वनडे दो साल पहले 30 जून 2017 को वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था.

युवराज सिंह टीम इंडिया के ऐसे चुनिंदा खिलाड़ियों में से रहे, जिन्होंने वनडे और टी-20 में जबरदस्त सफलता हासिल की. हालांकि टेस्ट में उनका प्रदर्शन औसत रहा. युवी ने देश के लिए 304 वनडे खेलकर 8701 रन बनाए. उन्होंने 14 शतक भी जड़े. वनडे क्रिकेट में युवराज के नाम 111 विकेट भी हैं. वहीं टी-20 क्रिकेट में युवराज ने 58 मैच खेलकर 117 रन बनाए. इस प्रारूप में उनके नाम 8 अर्धशतक हैं. टी-20 में उन्होंने 28 विकेट चटकाए हैं. टेस्ट क्रिकेट में युवराज का बल्ला खामोश रहा है. उन्होंने 40 टेस्ट खेलकर 1900 रन बनाए. इनमें 3 शतक भी शामिल हैं.

1983 में कपिल देव की कप्तानी में वर्ल्ड कप जीतने के बाद से विश्व खिताब के लिए तरस रही टीम इंडिया का कप का सूखा युवराज सिंह की बदौलत ही खत्म हो सका. तब टीम इंडिया ने 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप में उन्होंने 6 मैचों में 148 रन बनाए और मैन ऑफ द सीरीज रहे. इसी टूर्नामेंट में उन्होंने इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड की छह गेंदों पर छह छक्के जड़े थे. वहीं 2011वर्ल्ड कप में भी युवराज मैन ऑफ द टूर्नामेंट रहे थे.

माना जा रहा है कि भारत के सर्वश्रेष्ठ वनडे क्रिकेटरों में से एक युवराज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से इसलिए संन्यास लिया क्योंकि वे आईसीसी से मान्यता प्राप्त विदेशी टी-20 लीग में फ्रीलांस करियर बनाना चाहते हैं. बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने हाल में बताया था कि युवराज अंतरराष्ट्रीय और प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास के बारे में सोच रहे हैं. वो जीटी-20 (कनाडा) और आयरलैंड व हालैंड में यूरो टी-20 स्लैम टूर्नामेंट में खेलने पर विचार कर रहे हैं. उन्हें इन टूर्नामेंटों में खेलने की पेशकश मिल रही हैं.

युवराज इस साल आईपीएल में मुंबई इंडियंस की ओर से खेले थे, लेकिन उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले. यही कारण है कि वो भविष्य की योजनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.

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गुलाबी नगरी के हेरिटेज से इंस्पायर्ड ‘पुराने डाक टिकटों से बनी हैंडमेड पेंटिंग्स‘ देखेंगी दुनिया !

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जयपुर दुनिया का इकलौता ऐसा शहर है जिसके पास हस्तनिर्मित अद्भुत और असाधारण कला का ख़ज़ाना है यहाँ की निर्मित ज्वेलरी, सांगानेरी प्रिंट, व ब्ल्यू पॉटरी की कारीगरी देश दुनिया में जयपुर को एक अलग पहचान दिलाती आयी है. ऐसी ही ‘पुराने भारतीय डाक टिकटों’ से बनी ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट’ पेंटिंग्स जयपुर को देश विदेश में प्रसिद्धि दिला रही है. अगले वर्ष न्यूज़ीलैंड में 19 से 22 मार्च तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय टिकट प्रदर्शनी में शहर के आर्टिस्ट राहुल जैन द्वारा जयपुर के हेरिटेज से जुड़ी पेंटिंग्स की एक विशेष शृंखला को प्रदर्शित किया जाएगा.

जयपुर की हेरिटेज से इंस्पायर्ड ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट’ पेंटिंग्स का आउटडोर फ़ोटो शूट रविवार काे किया गया, जिसमें इन पेंटिंग्स के साथ जयपुर की हेरिटेज साइट्स – अल्बर्ट हॉल, जवाहर सर्किल, हवामहल, विधानसभा, सवाई मानसिंह स्टेडियम, मोती डूंगरी गणेशजी सहित शहर की अन्य प्रसिद्ध लोटस बिल्डिंग, राज मंदिर सिनेमा, मसाला चौक, वर्ल्ड ट्रेड पार्क, एयरपोर्ट, सरस पार्लर को फोटोशूट में शामिल किया गया, जिन्हें वर्ष 2020 में न्यूज़ीलैंड में होने वाले अंतरराष्ट्रीय टिकट प्रदर्शनी में दिखाया जाएगा जिससे की देश दुनिया गुलाबी नगरी जयपुर की ख़ूबसूरती से अवगत हो सकें.

देश व विदेश के पुराने डाक टिकटों से बनी इन ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट’ पेंटिग्स में महात्मा गांधी, सिनेमा के 100 वर्ष, बर्ड्स, वाइल्ड लाइफ़, नेचर, डांस, सिलाई मशीन, कार, हेंडफेन आदि विषयों पर बनी पेंटिंग काफ़ी पसंद की जा रही है इस आर्ट की पॉपुलरटी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की ‘हेरिटेज आर्ट एंड ज्वैलस’ नाम के इस इंस्टाग्राम पेज को सिर्फ़ इस जून महिनें में ही देश दुनिया के 5000 से अधिक लोग फ़ॉलो कर चुके हैं l

भारत व अन्य देशों के डाक विभाग (फ़िलेटली ब्यूरो) द्वारा हर वर्ष अलग-अलग विषयों जैसे कला, प्रकृति, तकनीक, खेल, फुड, सिनेमा इत्यादि पर एक सीमित संख्या में डाक टिकट जारी किए जाते है जो की डाक टिकट संग्रह के कलेक्शन की हॉबी रखने वाले फिलैटलिस्ट पीढ़ी दर पीढ़ी अपने कलेक्शन में जमा करते रहते है. आधुनिक दुनिया में लोगों का इन डाक टिकटों के प्रति आकर्षण कम हो रहा है क्योंकि उनके पास इन्हें देखने-समझने का समय व माध्यम ही नहीं है और ट्रेडिशनल डाक टिकट कलेक्टर इन टिकटों को अपनी तिजोरी में ही बंद रखते हैं इसी समस्या का समाधान निकालने व लोगों की इन विंटेज डाक टिकटों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जयपुर के आर्टिस्ट राहुल जैन इन पुराने डाक टिकटों से ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट’ पेंटिंग्स पिछले दो वर्षों से बना रहे हैं. वह रोज़ाना इस हॉबी के लिए 2-3 घंटे का अतिरिक्त समय इसमे लगाते हैं. आर्टिस्ट राहुल जैन के पास भारत सहित 70 से अधिक देशों के 50,000 से अधिक देश विदेश के डाक टिकटों का थीम बेस्ड कलेक्शन संजोया हुआ है व अब तक विभिन्न विषयों पर 100 से अधिक ‘हेंडमेड विंटेज आर्ट‘ बना चुके हैं. उनकी योजना इस क्षेत्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज कराने के बाद जयपुर शहर वासियों के लिए इन कलाकृतियों का म्यूज़ियम खोलने की है.

हेरिटेज आर्ट एंड ज्वैल्स के फ़ाउंडर आर्टिस्ट राहुल जैन मूल रूप से अलवर ज़िले से हैं जो गत 10 वर्षों से जयपुर के ज्वेलरी उद्योग से जुड़े हुए हैं. जयपुर के हेरिटेज व ज्वेलरी कारीगरी से इंस्पायर्ड इन ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट‘ में कैनवास पर सब्जेक्ट को थीम बेस्ट डाक टिकटों से एक विशेष क्रम में कोलाज के रूप में चिपकाया जाता है, विशेष यह है कि काम में लिए जाने वाले डॉक टिकट रेयर कैटिगरी के होते हैं जो की भारतीय डाक विभाग द्वारा देश की आज़ादी वर्ष 1947 के बाद से विभिन्न विषयों पर छापे गए हैं व साथ ही दुनिया के लगभग हर देश के डाक टिकट इस आर्ट को मनाने में काम लिए जाते हैं. इस आर्ट की एक विशेषता यह भी है कि इसमें काम में लिए जाने वाले डाक टिकट सब्जेक्ट से संबंधित थीम पर ही होते हैं जैसे हाथी की आर्ट में सिर्फ़ हाथी की फ़ोटो वाले देश दुनिया के टिकट काम में लिए जाते हैं. कभी कभी एक पेंटिंग को बनाने में 10 दिन तक का भी समय लग जाता है, डॉक टिकटों का कलेक्शन व अशॉर्टिंग करने में लगने वाला समय अलग है. इन्वेस्टमेंट ग्रेड के टिकटों से बनी यह ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट‘ पेंटिंग्स शीघ्र ही जयपुर वासियों के लिए भी प्रदर्शित की जाएगी.

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मध्यप्रदेश प्रदेश की यूनिवर्सिटीज और कॉलेज में एससी/एसटी सेल के गठन की मांग, राज्यपाल को नाजी ने लिखा पत्र.

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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति युवा संघ( najjys) ने राज्यपाल को पत्र लिख कर विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में एससी/एसटी सेल के गठन करने की मांग की है.

जानकारी अनुसार संघ के राष्ट्रीय महासचिव अंकित पचौरी (ankit pachauri) ने देश मे हाल ही में चल रहे डॉ. पायल तड़वी मामले का हवाला देकर प्रदेश के सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में एससी/एसटी वर्ग के छात्रों के लिए सेल का गठन करने की बात कही है पचौरी का कहना है कि अनु.जाति और अनु.जनजाति के विद्यार्थी अपनी समाज को लेकर प्रताड़ित और भेदभाव का शिकार होते है, पर शिकायत नही कर पाते और या तो पढ़ाई वीच में छोड़ते है या फिर अनुचित कदम उठा लेते है. अंकित पचौरी ने यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में ही एससी/एसटी सेल बनाने की मांग की है.

शिकायत पर कार्रवाई होती तो नही जाती डॉ पायल की जान.

डॉ पायल तड़वी सुसाइड मामला शोसल मीडिया पर ट्रोल कर रहा है. देश का ज्वलंत मुद्दा भी बन चुका है. डॉ पायल तड़वी ने अपनी ही सीनियर के जातिगत तानों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी, इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति युवा संघ (नाजी) के राष्ट्रीय महासचिव अंकित पचौरी ने कहा कि यदि समय पर डॉ पायल की शिकायत पर अस्पताल प्रशासन कार्यवाही करता तो पायल आत्महत्या नही करती. पचौरी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई- दिल्ली के निर्देश अनुसार विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में इस वर्ग के छात्रों की शिकायत और समस्याओं के लिए एससी/एसटी सेल गठित होना चाहिए. लेकिन कई महाविद्यालयों में आज तक गठन नही हुआ है.

हमने मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल को अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रों पर प्रताड़ना, भेदवाव एवं अन्य समस्याओं की शिकायत और निराकरण के लिये एससी/एसटी सेल का गठन यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों किये जाने का निवेदन किया है.

अंकित पचौरी, राष्ट्रीय महासचिव राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति युवा संघ(नाजी)

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बिलखती बेटियां, स्तब्ध समाज

छोटी बच्चियों के साथ निरंतर हो रही आपराधिक घटनाएं हमारे समाज के माथे पर कलंक ही हैं. यह दुनिया बेटियों के लिए लगातार असुरक्षित होती जा रही है और हमारे हाथ बंधे हुए से लगते हैं. कोई समाज अगर अपनी संततियों की सुरक्षा भी नहीं कर सकता, उनके बचपन को सुरक्षित और संरक्षित नहीं रख सकता तो यह मान लेना चाहिए सडांध बहुत गहरी है. ऐसे समाज का या तो दार्शनिक आधार दरक चुका है या वह सिर्फ एक पाखंडपूर्ण समाज बनकर रह गया है जो बातें तो बड़ी-बड़ी करता है, किंतु उसका आचरण बहुत घटिया है.

स्त्रियों की तरफ देखने का हमारा नजरिया, उनके साथ बरताव करने का रवैया बताता है कि हालात अच्छे नहीं हैं. किंतु चिंता तब और बढ़ जाती है, जब निशाने पर मासूम हों. जिन्होंने अभी-अभी होश संभाला है, दुनिया को देख रहे हैं. परख रहे हैं. समझ रहे हैं. उनके अपने परिचितों, दोस्तों, परिजनों के हाथों किए जा रहे ये हादसे बता रहे हैं कि हम कितने सड़े हुए समाज में रह रहे हैं. हमारी सारी चमकीली प्रगति के मोल क्या हैं, अगर हम अपने बच्चों के खेल के मैदानों में, पास-पड़ोस में जाने से भी सहमने लगें. किंतु ऐसा हो रहा है और हम सहमे हुए हैं. बेटियां जिनकी मौजूदगी से यह दुनिया इतनी सुंदर है, वहशी दरिंदों के निशाने पर हैं.

कानूनों से क्या होगाः बच्चों और स्त्रियों की सुरक्षा को लेकर कानूनों की कमी नहीं है. किंतु उन्हें लागू करने, एक न्यायपूर्ण समाज बनाने की प्रक्रिया में हम विफल जरूर हुए हैं.इन घटनाओं के चलते पुलिस, सरकार और समाज सबका विवेक तथा संवेदनशीलता कसौटी पर है. निर्भया कांड के बाद समाज की आई जागरूकता और सरकार पर बने दबावों का भी हम सही दोहन नहीं कर सके. कम समय में न्याय, संवेदनशील पुलिसिंग और समाज में व्यापक जागरूकता के बिना इन सवालों से जूझा नहीं जा सकता. हमारी ‘परिवार’ नाम की संस्था जो पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों की स्थापना का मूल स्थान था, पूरी तरह दरक चुकी है. पैसा इस वक्त की सबसे बड़ी ताकत है और जायज-नाजायज पैसे का अंतर खत्म हो चुका है. माता-पिता की व्यस्तताएं, उनकी परिवार चलाने और संसाधन जुटाने की जद्दोजहद में सबसे उपेक्षित तो बच्चा ही हो रहा है. सोशल मीडिया ने इस संवादहीनता के नरक को और चौड़ा किया है. संयुक्त परिवारों की टूटन तो एक सवाल है ही. ऐसे कठिन समय में हमारे बच्चे क्या करें और कहां जाएं? अवसरों से भरी पूरी दुनिया में जब वे पैदा हुए हैं, तो उनका सुरक्षित रहना एक दूसरी चुनौती बन गया है. भारतीय परिवार व्यवस्था पूरी दुनिया में विस्मय और उदाहरण का विषय रही है, किंतु इसके बिखराव और एकल परिवारों ने बच्चों को बेहद अकेला छोड़ दिया है.

स्कूल निभाएं जिम्मेदारीः ऐसे समय में जब परिवार बिखर चुके हैं, समाज की शक्तियां अपने वास्तविक स्वरूप में निष्क्रिय हैं, हमारे विद्यालयों, स्वयंसेवी संगठनों को आगे आना होगा. एक आर्थिक रूप से निर्भर समाज बनाने के साथ-साथ हमें एक नैतिक, संवेदनशील और परदुखकातर समाज भी बनाना होगा. संवेदना का विस्तार परिवार से लेकर समाज तक फैलेगा तो समाज के तमाम कष्ट कम होगें. शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता इस काम में बड़ा योगदान दे सकते हैं. सही मायने में हमें कई स्तरों पर काम करने की जरूरत है, जिसमें परिवारों और स्कूलों दोनों पर फोकस करना होगा.

परिवार और स्कूलों में नई पीढ़ी को संस्कार, सहअस्तित्व, परस्पर सम्मान और शुचिता के संस्कार देने होगें. स्त्री-पुरुष में कोई छोटा-बड़ा नहीं, कोई खास और कोई कमतर नहीं यह भावनाएं बचपन से बिठानी होगीं. पशुता और मनोविकार के लक्षण हमारी परवरिश, पढ़ाई- लिखाई और समाज में चल रहीं हलचलों से ही उपजते हैं. मोबाइल और मीडिया के तमाम माध्यमों पर उपलब्ध अश्लील और पोर्न सामग्री इसमें उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहे हैं. इसके साथ ही समाज में बंटवारे की भावनाएं इतनी गहरी हो रही हैं कि हम स्त्री के विरूद्ध अपराध को पंथों को हिसाब से देख रहे हैं. निर्मम हत्याएं, दुराचार की घटनाएं मानवता के विरुद्ध हैं. पूरे समाज के लिए कलंक हैं. इन घटनाओं पर भी हम अपनी घटिया राजनीति और पंथिक मानसिकता से ग्रस्त होकर टिप्पणी कर रहे हैं. दुनिया के हर हिस्से में हो रहे हमलों, युध्दों, दंगों और आपसी पारिवारिक लड़ाई में भी स्त्री को ही कमजोर मानकर निशाना बनाया जाता है. यह बीमार सोच और मनोरोगी समाज के लक्षण हैं.

पाखंडपूर्ण समाज और शुतुरमुर्गी सोचः समाज की पाखंडपूर्ण प्रवृत्ति और शुतुरमुर्गी रवैया ऐसे सामाजिक संकटों में साफ दिखता है. साल में दो नवरात्रि पर कन्यापूजन कर बालिकाओं का आशीष लेने वाला समाज, उसी कन्या के लिए जीने लायक हालात नहीं रहने दे रहा है. संकटों से जूझने, दो-दो हाथ करने और समाधान निकालने की हमारी मानसिकता और तैयारी दोनों नहीं है. अलीगढ़, भोपाल से लेकर उज्जैन तक जो कुछ हुआ है, वह बताता है कि हमारा समाज किस गर्त में जा रहा है. हमारी परिवार व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था, समाज व्यवस्था, धर्म सत्ता सब सवालों के घेरे में है. हमारा नैतिक पक्ष,दार्शनिक पक्ष चकनाचूर हो चुका है. हम एक स्वार्थी, व्यक्तिवादी समाज बना रहे हैं, जिसमें पति-पत्नी और बच्चों के अलावा कोई नहीं है. विश्वास का यह संकट दिनों दिन गहरा होता जा रहा है. शायद इसीलिए हमें परिजनों और पड़ोसियों से ज्यादा हिडेन कैमरों और सर्विलेंस के साधनों पर भरोसा ज्यादा है. भरोसे के दरकने का यह संकट दरअसल संवेदना के छीज जाने का भी संकट है.

कैसे बचेंगी बेटियाः बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा जब हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिया होगा, तब शायद वे कोख में मारी जानी वाली बेटियों की चिंता कर रहे थे. हमारे समय के एक बड़े संकट भ्रूण हत्या पर उनका संकेत था. लेकिन अब इस नारे के अर्थ बदलने से लगे हैं. लगता है कि अब दुनिया में आ चुकी बेटियों को बचाने के लिए हमें नए नारे देने होगें. एक बेहतर दुनिया किसी भी सभ्य समाज का सपना है. हमारी संस्कृति और परंपरा ने हमें स्त्री के पूजन का पाठ सिखाया है. हम कहते रहे हैं- ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता’ (जहां नारियों की पूजा होता है, वहां देवता वास करते हैं). हमारी बुद्धि, शक्ति और धन की अधिष्ठात्री भी सरस्वती, दुर्गा-काली और लक्ष्मी जैसी देवियां हैं. बावजूद इसके उन्हें पूजने वाली धरती पर बालिकाओं का जीवन इतना कठिन क्यों हो गया है? यह सवाल हमारे समाने है, हम सबके सामने, पूरे समाज के सामने. हादसे की शिकार बेटियों की चीख हमने आज नहीं सुनी तो मानवता के सामने हम सब अपराधी होगें, यकीन मानिए.

प्रो. संजय द्विवेदी