गुलाबी नगरी के हेरिटेज से इंस्पायर्ड ‘पुराने डाक टिकटों से बनी हैंडमेड पेंटिंग्स‘ देखेंगी दुनिया !

जयपुर दुनिया का इकलौता ऐसा शहर है जिसके पास हस्तनिर्मित अद्भुत और असाधारण कला का ख़ज़ाना है यहाँ की निर्मित ज्वेलरी, सांगानेरी प्रिंट, व ब्ल्यू पॉटरी की कारीगरी देश दुनिया में जयपुर को एक अलग पहचान दिलाती आयी है. ऐसी ही ‘पुराने भारतीय डाक टिकटों’ से बनी ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट’ पेंटिंग्स जयपुर को देश विदेश में प्रसिद्धि दिला रही है. अगले वर्ष न्यूज़ीलैंड में 19 से 22 मार्च तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय टिकट प्रदर्शनी में शहर के आर्टिस्ट राहुल जैन द्वारा जयपुर के हेरिटेज से जुड़ी पेंटिंग्स की एक विशेष शृंखला को प्रदर्शित किया जाएगा.

जयपुर की हेरिटेज से इंस्पायर्ड ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट’ पेंटिंग्स का आउटडोर फ़ोटो शूट रविवार काे किया गया, जिसमें इन पेंटिंग्स के साथ जयपुर की हेरिटेज साइट्स – अल्बर्ट हॉल, जवाहर सर्किल, हवामहल, विधानसभा, सवाई मानसिंह स्टेडियम, मोती डूंगरी गणेशजी सहित शहर की अन्य प्रसिद्ध लोटस बिल्डिंग, राज मंदिर सिनेमा, मसाला चौक, वर्ल्ड ट्रेड पार्क, एयरपोर्ट, सरस पार्लर को फोटोशूट में शामिल किया गया, जिन्हें वर्ष 2020 में न्यूज़ीलैंड में होने वाले अंतरराष्ट्रीय टिकट प्रदर्शनी में दिखाया जाएगा जिससे की देश दुनिया गुलाबी नगरी जयपुर की ख़ूबसूरती से अवगत हो सकें.

देश व विदेश के पुराने डाक टिकटों से बनी इन ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट’ पेंटिग्स में महात्मा गांधी, सिनेमा के 100 वर्ष, बर्ड्स, वाइल्ड लाइफ़, नेचर, डांस, सिलाई मशीन, कार, हेंडफेन आदि विषयों पर बनी पेंटिंग काफ़ी पसंद की जा रही है इस आर्ट की पॉपुलरटी का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की ‘हेरिटेज आर्ट एंड ज्वैलस’ नाम के इस इंस्टाग्राम पेज को सिर्फ़ इस जून महिनें में ही देश दुनिया के 5000 से अधिक लोग फ़ॉलो कर चुके हैं l

भारत व अन्य देशों के डाक विभाग (फ़िलेटली ब्यूरो) द्वारा हर वर्ष अलग-अलग विषयों जैसे कला, प्रकृति, तकनीक, खेल, फुड, सिनेमा इत्यादि पर एक सीमित संख्या में डाक टिकट जारी किए जाते है जो की डाक टिकट संग्रह के कलेक्शन की हॉबी रखने वाले फिलैटलिस्ट पीढ़ी दर पीढ़ी अपने कलेक्शन में जमा करते रहते है. आधुनिक दुनिया में लोगों का इन डाक टिकटों के प्रति आकर्षण कम हो रहा है क्योंकि उनके पास इन्हें देखने-समझने का समय व माध्यम ही नहीं है और ट्रेडिशनल डाक टिकट कलेक्टर इन टिकटों को अपनी तिजोरी में ही बंद रखते हैं इसी समस्या का समाधान निकालने व लोगों की इन विंटेज डाक टिकटों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जयपुर के आर्टिस्ट राहुल जैन इन पुराने डाक टिकटों से ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट’ पेंटिंग्स पिछले दो वर्षों से बना रहे हैं. वह रोज़ाना इस हॉबी के लिए 2-3 घंटे का अतिरिक्त समय इसमे लगाते हैं. आर्टिस्ट राहुल जैन के पास भारत सहित 70 से अधिक देशों के 50,000 से अधिक देश विदेश के डाक टिकटों का थीम बेस्ड कलेक्शन संजोया हुआ है व अब तक विभिन्न विषयों पर 100 से अधिक ‘हेंडमेड विंटेज आर्ट‘ बना चुके हैं. उनकी योजना इस क्षेत्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज कराने के बाद जयपुर शहर वासियों के लिए इन कलाकृतियों का म्यूज़ियम खोलने की है.

हेरिटेज आर्ट एंड ज्वैल्स के फ़ाउंडर आर्टिस्ट राहुल जैन मूल रूप से अलवर ज़िले से हैं जो गत 10 वर्षों से जयपुर के ज्वेलरी उद्योग से जुड़े हुए हैं. जयपुर के हेरिटेज व ज्वेलरी कारीगरी से इंस्पायर्ड इन ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट‘ में कैनवास पर सब्जेक्ट को थीम बेस्ट डाक टिकटों से एक विशेष क्रम में कोलाज के रूप में चिपकाया जाता है, विशेष यह है कि काम में लिए जाने वाले डॉक टिकट रेयर कैटिगरी के होते हैं जो की भारतीय डाक विभाग द्वारा देश की आज़ादी वर्ष 1947 के बाद से विभिन्न विषयों पर छापे गए हैं व साथ ही दुनिया के लगभग हर देश के डाक टिकट इस आर्ट को मनाने में काम लिए जाते हैं. इस आर्ट की एक विशेषता यह भी है कि इसमें काम में लिए जाने वाले डाक टिकट सब्जेक्ट से संबंधित थीम पर ही होते हैं जैसे हाथी की आर्ट में सिर्फ़ हाथी की फ़ोटो वाले देश दुनिया के टिकट काम में लिए जाते हैं. कभी कभी एक पेंटिंग को बनाने में 10 दिन तक का भी समय लग जाता है, डॉक टिकटों का कलेक्शन व अशॉर्टिंग करने में लगने वाला समय अलग है. इन्वेस्टमेंट ग्रेड के टिकटों से बनी यह ‘विंटेज हेंडमेड आर्ट‘ पेंटिंग्स शीघ्र ही जयपुर वासियों के लिए भी प्रदर्शित की जाएगी.

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