UPPCL इंजीनियरों के लिए सुनहरा मौका, जल्‍द करें आवेदन

  Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) ने Junior Engineer के पद पर आवेदन के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है. इस सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले रोजगार संबंधी सभी आवश्यक जानकारियां पढ़ लें, उसके बाद ही आवेदन करें. संस्थान का नाम Uttar Pradesh Power Corporation Limited (UPPCL) पद का नाम Junior Engineer कुल पद 1196 योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की हो. चुनाव प्रक्रिया लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर चयन किया जाएगा. अंतिम तारीख 23 अक्टूबर 2017 कैसे करें आवेदन आवेदन करने के लिए ऑफिशियल वेबसाइट www.uppcl.org पर जाएं.

पीएम मोदी पर भड़के प्रकाश राज, कहा- ये तो मेरे से भी बड़े एक्टर निकले

Prakash Raj

बेंगलुरू। एक महीने से ज्यादा बीत गया है लेकिन अभी तक कन्नड़ पत्रकार गौरी लंकेश के हत्यारों का पता नहीं चल पाया है. जिसको लेकर पत्रकारों और बुद्धिजीवियों में सरकार के प्रति हताशा है. लोग राज्य सरकार और केंद्र सरकार का लगातार विरोध कर रहे हैं. इसी कड़ी में टॉलीवुड और बॉलीवुड के अभिनेता ने प्रकाश राज ने भी मोदी सरकार और राज्य सरकार पर निशाना साधा है.

प्रकाश राज ने रविवार को बेंगलुरू में डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया की स्टेट मीट कार्यक्रम में कहा, “इस भयावह घटना का जश्न मनाने वाले कुछ लोगों को मोदी जी खुद फॉलो करते हैं… इसी से मुझे चिंता होती है, हमारा देश कहां जा रहा है…? हम सब जानते हैं कि ये कौन लोग हैं और उनकी क्या विचारधारा है.”

इसके बाद प्रकाश राज ने कहा कि प्रधानमंत्री का व्यवहार उस अभिनेता जैसा है, जो अपने प्रशंसकों को खुश करने की कोशिश कर रहा हो. उन्होंने कथित रूप से कहा, “वह (प्रधानमंत्री) मुझसे बड़ा अभिनेता बनने की कोशिश कर रहे हैं…”

प्रकाश राज ने आगे कहा कि ‘मैं कोई अवॉर्ड नहीं चाहता. मुझसे न कहें कि अच्छे दिन आएंगे. मैं जाना पहचाना एक्टर हूं, जब आप एक्ट‍िंग करते हैं तो मैं पहचान लेता हूं.’ ‘इस मामले पर चुप रहकर क्या पीएम मोदी क्रूरता को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका कि उनके ही कुछ फॉलोअर्स जश्न मना रहे हैं?’

गौरी लंकेश की हत्या को एक माह बीत जाने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस मुद्दे पर चुप्पी की वजह से जाने-माने दक्षिण भारतीय अभिनेता प्रकाश राज ने कहा है कि वह अपने पांच राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने के इच्छुक हैं.

आपको बता दे कि पांच सितंबर को बेंगलुरू में पत्रकार गौरी लंकेश की उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 52-वर्षीय अभिनेता तथा गौरी लंकेश के बीच गहरी मित्रता थी. प्रकाश राज ने कहा कि वह गौरी को 30 सालों से जानते थे.

रणवीर सिंह ने ड्राइवर को नहीं दी 2 महीने से सैलरी

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती की शूटिंग में आए दिन दिक्कतें आ रही हैं. अब खबर है कि शूटिंग में रणवीर सिंह के ड्राइवर और बॉडीगार्ड में लड़ाई की वजह से ब्रेक लगा. जिसके बाद डायरेक्टर भंसाली को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा. ड्राइवर का आरोप है कि रणवीर ने दो महीने से उसे सैलरी नहीं दी है.

पद्मावती के खास सीन के लिए रणवीर सिंह के साथ फिल्म सिटी में शूटिंग चल रही थी. तभी बाहर से रणवीर के बॉडीगार्ड विनायक और ड्राइवर सूरज पाल के आपस में लड़ने की आवाजें आने लगी. जिसके बाद क्रू ने दोनों को झगड़ा बंद करने को कहा. लेकिन वो माने नहीं. वे आपस में एक-दूसरे पर चिल्लाते रहे.

स्पॉटबॉय की खबर के मुताबिक, घटनास्थल पर मौजूद एक शख्स ने बताया कि ड्राइवर सूरज रणवीर के मैनेजर से अपनी 2 महीने की बकाया सैलरी मांग रहा था. उसे दो महीने का मेहनताना जो कि 85000 है नहीं मिला था. लेकिन रणवीर की मैनेजर उसकी सुनने के मूड में नहीं थी. मैनेजर ने बॉडीगार्ड से ड्राइवर को बाहर करने को कहा. फिर गुस्साए बॉडीगार्ड ने ड्राइवर सूरज को पीटना शुरू कर दिया. इस बीच मैनेजर ने बीच बचाव करने की कोशिश की लेकिन प्रयास असफल रहा.

लेकिन स्पॉटबॉय के अनुसार, अभी तक ड्राइवर को उसकी सैलरी नहीं मिली है. उसने रणवीर की बहन को भी कॉन्टैक्ट किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. आखिरकार ड्राइवर ने इस मामले को यूनियन के पास ले जाने का प्लान किया है.

टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया में कई चौंकाने वाले बदलाव

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 5 वनडे मैचों की सीरीज खत्म होने के बाद अब इस दौरे के तीन टी-20 मुकबलों के लिए भी टीम की घोषणा कर दी गई है। वनडे सीरीज में 4-1 से ऑस्ट्रेलियाई टीम को मात देने के बाद चयनकर्ताओं ने 7 अक्टूबर से शुरू हो रही टी-20 मुकाबले के लिए कई बदलाव किए हैं।
  नेहरा और दिनेश कार्तिक टीम में बीसीसीआइ ने रविवार रात को वनडे सीरीज खत्म होने के बाद तीन टी-20 मैचों के लिए 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। टी-20 मुकाबलों के लिए 38 साल के तेज गेंदबाज आशीष नेहरा के अलावा दिनेश कार्तिक को भी टीम में जगह मिली है। अश्विन और जडेजा फिर से बाहर इस टीम में फिर से चौंकाने वाले कदम के तौर पर भारत के शीर्ष स्पिनरों रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा को जगह नहीं दी गई है। इससे पहले उन्हें वनडे से भी बाहर रखा गया था। शायद चयनकर्ता उन्हें टेस्ट मैचों के लिए या विदेशी दौरों के लिए बचाकर रखना चाहते हैं। ये दोनों खिलाड़ी अब रणजी ट्रॉफी में खेलते दिखेंगे। लोकेश राहुल और शिखर धवन की वापसी पहले मां और फिर पत्नी की तबीयत खराह होने के बाद से टेस्ट और वनडे मैचों से बाहर रहे शिखर धवन की टीम में वापसी हुई है। इसके अलावा टेस्ट मैचों में बल्लेबाजी क्रम बदलने के बाद असफल रहे और वनडे टीम में जगह नहीं पा सके लोकेश राहुल को भी टी-20 टीम में जगह दी गई है। पांच पांडवों का स्थान बरकरार वनडे टीम में रहे पांच युवा पांडवों को टी-20 टीम में भी जगह दी गई है। बल्लेबाजों में मनीष पांडे और केदार जाधव और गेंदबाज में युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव और अक्षर पटेल को बरकरार रखा गया है। उम्मीद है कि चयनकर्ता इन्हें 2019 विश्व कप के लिए तैयार कर रहे हैं। यह है 15 सदस्यीय टी-20 टीम विराट कोहली (कप्तान), रोहित शर्मा (उप कप्तान), शिखर धवन, केएल राहुल , मनीष पांडे, केदार जाधव, दिनेश कार्तिक, महेंद्र सिंह धौनी (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, कुलदीप यादव, यजुवेंद्र चहल, जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार, आशीष नेहरा और अक्षर पटेल। यह है टी-20 सीरीज का कार्यक्रम पहला टी-20- 7 अक्टूबर, रांची दूसरा टी-20, 10 अक्टूबर, गुवाहाटी तीसरा टी-20, 13 अक्टूबर, हैदराबाद

लास वेगास में गोलीबारी, 50 की मौत और 400 घायल

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Las Vegas

लास वेगास। अमेरिका के लास वेगास में चल रहे एक म्यूजिक कंसर्ट में अज्ञात हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी. इस गोलीबारी में 50 लोगों की मौत हो गई और लगभग 400 लोग घायल हो गए. एक हमलावर को ढेर कर दिया गया है, जबकि एक अन्य हमलावर की तलाश की जा रही है.

पुलिस ने बताया कि वे मांडले बे रिजॉर्ट और कैसिनो पर एक सक्रिय शूटर की जांच कर रहे हैं. लास वेगास मेट्रोपोलिटन पुलिस ने ट्विटर पर लिखा कि हम मांडले बे कैसिनो के आसपास एक शूटर की मौजूदगी की जांच कर रहे हैं. कृपया सभी उस इलाके से दूर रहें.

रूट 91 हार्वेस्ट फेस्टिवल के पास एक बंदूकधारी को देखे जाने की खबर मिलने के बाद अधिकारियों ने दर्जनों गश्ती वाहनों को स्ट्रिप पर भेजा. यूनिर्विसटी मेडिकल सेंटर की प्रवक्ता दनिता कोहेन ने बताया कि दर्जनों लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. उन्होंने बताया कि उनमें से कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई.

प्रत्यक्षर्दिशयों का कहना है कि म्युज़िक फेस्टिवल दौरान एक बंदूकधारक घुसा और मशीनगन से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी जिसके जवाब में पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी. गोलीबारी के दौरान उन्होंने वहां से भागते समय कई घायलों को देखा था. उनमें से कुछ लोग थोड़ी देर बाद निकटवर्ती ट्रॉपिकाना होटल-कैसिनो के भूमिगत तल पर एकत्रित हो गए थे. कुछ अधिकारी अपने वाहनों के पीछे से कार्रवाई कर रहे थे जबकि अन्य अधिकारी राइफल लेकर मेंडले बेय होटल और कैसिनो के भीतर पहुंच गए.

अधिकारियों ने लास वेगस स्ट्रिप और इंटरस्टेट 15 के हिस्सों को बंद कर दिया. पुलिस ने लोगों से मांडले बे कसीनो की तरफ न जाने की अपील की है. लोगों का कहना है कि घटनास्थल पर एक शूटर के होने की संभावना है.

लाल बहादुर शास्त्री ने हमेशा जात-पात का विरोध किया

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Lal Bahadur shastri

नई दिल्ली। जय जवान जय किसान का नारा देने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की आज 114वीं जयंती है. शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दो अक्टूबर, 1904 को शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के घर हुआ था. उन्होंने 11 जनवरी, 1966 को उज़्बेकिस्तान के ताशकंद में अंतिम सांस ली थी. उसी दिन उन्होंने ताशकंद घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे. वह पहले व्यक्ति थे, जिन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से नवाजा गया था. लालबहादुर जी ने अपना जीवन बेहद सादगी से जिया.

  • लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1901 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे. जब लाल बहादुर शास्त्री केवल डेढ़ वर्ष के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया.
  • बचपन में दोस्तों के साथ शास्त्री जी गंगा नदी के पार मेला देखने गए थे. वापस लौटते के समय उनके पास नाववाले को देने के लिए पैसे नहीं थे और दोस्तों से पैसे मांगना उन्होंने ठीक नहीं समझा. बताया जाता है कि उस समय गंगा नदी भी पूरे उफान पर थी. उन्होंने दोस्तों को नाव से जाने के लिए कह दिया और बाद में खुद नदी पार करके आए.
  • एक बार जब लाल बहादुर रेलमंत्री थे तो वे जनता से मिलने काशी गए थे. तब एक व्यक्ति ने आकर सहज लहजे में कहा कि आपका कुर्ता फटा हुआ है. इस पर उन्होंने ने कहा कि गरीब का बेटा हूं. ऐसे रहूंगा तो गरीब का दर्द समझ सकूंगा.
  • शास्त्री जी जात-पात का हमेशा विरोध करते रहे. यहां तक कि उन्होंने कभी अपने नाम के आगे भी अपनी जाति का उल्लेख नहीं किया. शास्त्री की उपाधि उनको काशी विश्वविद्यालय से मिली थी.
  • लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल में देश में भीषण मंदी का दौर था. देश के कई हिस्सों में भयानक अकाल पड़ा था. उस समय शास्त्री जी ने देश के सभी लोगों को खाना मिल सके इसके लिए सभी देशवासियों से हफ्ते में 1 दिन व्रत रखने की अपील की थी.
  • लालबहादुर शास्त्री की मौत को अरसा बीत चुका है. लेकिन आज तक पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की मौत की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है. उनकी मौत को करीब पांच दशक गुजर जाने के बाद भी उनकी मृत्यु रहस्य ही बनी हुई है.

शास्त्री जी के बेटे सुनील शास्त्री का मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहना था कि उनके पिता को जहर देकर मारा गया है. उन्होंने कहा था कि जब शास्त्रीजी की बॉडी को देखा तो उनकी चेस्ट, पेट और पीठ पर नीले निशान थे. जिसे देखकर साफ लग रहा था कि उन्हें जहर दिया गया है.

जिस महिषासुर का दुर्गा ने वध किया उन्हें आदिवासी अपना पूर्वज और भगवान क्यों मानते हैं?

देश भर में दुर्गोत्सव के साथ दशहरा की भी धूम रही. पर झारखंड में गुमला की सुदूर पहाड़ियों पर बसने वाले आदिम जनजाति असुर दस दिनों तक शोक में डूबे रहे. दरअसल महिषासुर को अपना पुरखा मानने वाले असुरों को इसका दुख है कि उनके पूर्वज को छल से मारा गया.

महिषासुर का शहादत दिवस झारखंड के सिंहभूम इलाके में भी मनाया गया. कई जगहों पर महिषासुर पूजे जाते रहे हैं.

इसी सिलसिले में नवरात्र के नवमी पूजन के दिन यानि शुक्रवार को चाकुलिया में आयोजित शहादत दिवस कार्यक्रम में आदिवासी संथाल, भूमिज, कुड़मी के साथ दलित समुदाय के लोग भी शामिल हुए.

महिषासुर को पूजे जाने की खबर झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के कई आदिवासी इलाकों से भी मिलती रही है. अलबत्ता बंगाल के काशीपुर में महिषासुर शहादत दिवस का आयोजन बड़े पैमाने पर होने लगा है.

सखुआपानी गुमला की सुषमा असुर कहती हैं कि उनकी उम्मीदें बढ़ी है कि अब देश के कई हिस्सों में आदिवासी इकट्ठे होकर पुरखों को शिद्दत से याद कर रहे हैं.

झारखंड की राजधानी रांची से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर गुमला जिले के सखुआपानी, जोभापाट आदि पहाड़ी इलाके में असुर बसते हैं. इंटर तक पढ़ी सुषमा कथाकार हैं और वे आदिवासी रीति, पंरपरा, संस्कृति को सहेजे रखने के अलावा असुरों के कल्याण व संरक्षण पर काम करती हैं.

2011 की जनगणना के मुताबिक झारखंड में असुरों की आबादी महज 22 हजार 459 है. झारखंड जनजातीय शोध संस्थान के विशेषज्ञों का मानना है कि आदिम जनजातियों में असुर अति पिछड़ी श्रेणी में आते हैं, जिनकी अर्थव्यवस्था न्यूनतम स्तर पर है. असुरों में कम ही लोग पढ़े-लिखे हैं.

जगन्नाथपुर कॉलेज में इतिहास विभाग के प्राध्यापक और आदिवासी विषयों के जानकार जगदीश लोहरा का कहना है कि असुरों के अलावा कई और आदिवासी समुदाय भी मानते हैं कि वे लोग महिषासुर के वंशज हैं. इन समुदायों को ये भी जानकारी मिलती रही है कि वह आर्यों-अनार्यों की लड़ाई थी. इसमें महिषासुर मार दिए गए. कई जगहों पर लोग महिषासुर को राजा भी मानते हैं.

आदिवासी विषयों के एक अन्य जानकार लक्ष्मीनारायण मुंडा के मुताबिक इसे आदिवासी समुदाय द्वारा उनके पुरखों के इतिहास को सामने लाने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए. क्योंकि कथित तौर पर मिथकों के जरिए एक बड़े तबके की भावनाएं दबाई जाती रही हैं.

छल से मारे गए!

सुषमा असुर कहती हैं कि महिषासुर की याद में नवरात्र की शुरुआत के साथ दशहरा यानि दस दिनों तक वे लोग शोक मनाते हैं.

इस दौरान किसी किस्म की रीति-रस्म या परपंरा का निर्वहन नहीं होता. बड़े-बुजुर्गों के बताए गए नियमों के तहत उस रात एहतियात बरते जाते हैं जब महिषासुर का वध हुआ था. मूर्ति पूजक नहीं हैं, लिहाजा महिषासुर को दिल में रखते हैं.

बकौल सुषमा किताबों में भी पढ़ा है कि देवताओं ने असुरों का संहार किया, जो हमारे पूर्वज थे. सुषमा का जोर इस बात पर है कि वह कोई युद्ध नहीं था.

वो बताती हैं कि महिषासुर का असली नाम हुडुर दुर्गा था. वह महिलाओं पर हथियार नहीं उठाते थे. इसलिए दुर्गा को आगे कर उनकी छल से हत्या कर दी गई.

वाकिफ कराने की चुनौती

इस असुर महिला के मुताबिक आने वाली पीढ़ी को पुरखों के द्वारा बताई गई बातों तथा परंपरा को सहेजे रखने के बारे में जानकारी देने की चुनौती है. कई युवा लिखने-पढ़ने को आगे बढ़े भी, पर पिछली कतार में रहने की वजह से जिंदगी की मुश्किलों के बीच ही वे उलझ जा रहे हैं. वे खुद भी कठिन राहों से गुजरती रही है.

इसी इलाके से मिलन असुर को विश्वास है कि उनके पुरखों का नरसंहार किया गया. इसलिए शोक मनाना लाजिम है और इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए , जबकि नरसंहारों के विजय की स्मृति में दशहरा मनाया जाता है.

गौरतलब है कि साल 2008 में विजयादशमी के मौके पर झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने रांची के मोराबादी मैदान में होने वाले रावण दहन समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि रावण आदिवासियों के पूर्वज हैं. वे उनका दहन नहीं कर सकते.

जबकि पिछले दिनों तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्‍मृति ईरानी ने महिषासुर को ‘शहीद’ के तौर पर बताए जाने पर काफी नाराजगी जताई थी.

पुरखे-परंपरा के लिए संघर्ष

झारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति ‘अखड़ा’ की अगुआ वंदना टेटे कहती हैं कि आप इसे पूर्वज-पंरपरा को याद रखने के तौर पर देख सकते हैं. बेशक आदिवासियों को अपने रूट्स में जाने की जरूरत है, ताकि एक ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सके, क्योंकि कई चीजें गुम होती जा रही है और कई विषयों को अलग-अलग तरीके से उनके सामने रखा जाता रहा है.

बकौल वंदना वे अक्सर असुरों के बीच जाती रही हैं. वाकई में वे लोग महिषासुर को अपना पूर्वज मानते रहे हैं साथ ही कई मौके पर भाषा, संस्कृति, पंरपरा और पुरखौती अधिकारों के लिए सृजनात्मक संघर्ष करने के लिए खड़े होते हैं.

दसाई और काठी नृत्य

उधर झारखंड के चाकुलिया में देशज संस्कृति रक्षा मंच के बैनर तले महिषासुर शहादत दिवस मनाने वालों में कपूर टुडू ऊर्फ कपूर बागी बताते हैं कि दशहरा के मौके पर संथाल समाज के लोग दशकों से नृत्य-गीत के माध्यम से महिषासुर के मारे जाने पर दुख जताते हैं.

इसे दसाई और कांठी नाच कहा जाता है. इन समुदायों में शोक गीत के बोल-‘ हर रे हय रे हय ओकार नमरे हय, ओकाय नमरे हुदुड़ दर्गी’… लोकप्रिय हैं.

उनका जोर है कि आदिवासियों को विश्वास है कि महिषासुर फिर लौटेंगे, क्योंकि उनके राजा को छल-कपट से मारा गया. रावण वध जैसी पौराणिक घटनाओं को भी मिथकीय रूप दिया जाता रहा है.

रावण दहन क्यों?

सिहंभूम इलाके के कुमारचंद्र मार्डी कहते हैं कि महिषासुर वीर पुरूष थे और छल से ही मारे गए. बुराई पर अच्छाई की जीत बताकर और रावण का पुतला बनाकर जलाये जाने को भी वे लोग सहज तौर पर नहीं लेते, क्योंकि रावण भी हमारे पूर्वज थे.

मार्डी के मुताबिक इस पूरे मामले में बड़ा इतिहास है, जिसे जानने की जरूरत है.मार्डी इस मुहिम को सकारात्मक बताते हैं कि कुड़मी-भूमिज समेत कई समाज-समुदाय के लोग भी इस मसले पर उनका साथ देते रहे हैं.

मार्डी कहते हैं कि अब उत्तर भारत में भी महिसासुर का शहादत दिवस मनाया जाने लगा है.

देशज संस्कृति रक्षा मंच से ही जुड़े दिलीप महतो बताते हैं कि कुड़मी समाज में इस तरह की परंपरा रही है. वे लोग किसी देवी की पूजा या उत्सव का विरोध नहीं करते, लेकिन जिस तरह से महिषासुर का वध दर्शाया जाता है, वह आहत करता रहा है.

इस बारे में असलियत सामने लाये जाने की जरूरत है. क्योंकि इतिहास को गलत तरीके से दर्शाया जा रहा है. हालांकि इस विषय पर बहसें होती रही है.

इस बीच असुर आदिवासी विजडम डॉक्यूमेटेंशन इनीसियेटिव में खंडवा मध्य प्रदेश की आदिवासी महिला सुंगधी वीडियो के मार्फत यह बताने की कोशिश कर रही हैं वे लोग असुरों की संतान हैं तथा मेघनाद को पूजते हैं.

लिहाजा नस्लीय भेदभाव और इंसानी गरिमा के हनन की कोशिशों के खिलाफ वे आवाज मुखर करना चाहती हैं.

नीरज सिन्हा का यह लेख ‘द वायर’ से साभार है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और झारखंड में रहते हैं)

दलित युवाओं ने सोशल मीडिया पर शुरू किया अनोखा कैंपेन

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नई दिल्ली। मूंछ रखने को लेकर एक दलित युवक के साथ मारपीट की घटना के बाद इस समाज के युवाओं ने सोशल मीडिया पर #DalitWithMoustache अभियान चला दिया है. इस घटना को लेकर आक्रोशित दलित युवाओं ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराते हुए मूंछों के साथ अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाली है. यह अभियान इतना जोर पकड़ चुका है कि तमाम दलित युवाओं ने अपने फेसबुक और ट्विटर अकाउंट से दलित युवाओं से मूंछों वाली अपनी तस्वीर पोस्ट करने की अपील कर डाली है, जिसके बाद तमाम युवा इसमें जुट गए हैं.

गुजरात में घटी इस घटना का विरोध भी गुजरात के युवाओं ने ही किया. अहमदाबाद और गांधीनगर के दलित युवाओं ने सोशल मीडिया पर इस अनोखे कैंपेन की शुरुआत करते हुए अपनी मूंछों के साथ सेल्फी क्लिक करके पोस्ट करने लगे. फोटो के साथ वह जातिवाद ना विरोध मा (जातिवाद के विरोध में) पीयूष भाई ना समर्थन मा (पीयूष के समर्थन में) और संविधान ना समर्थन मा (संविधान के समर्थन में) जैसे हैशटैग का इस्तेमाल कर रहे हैं. गुजरात से शुरु हुए इस विरोध अभियान में देश भर के युवा शामिल हो गए.

ये भी पढेंः दलित ने रखी स्टाइलिश मूंछें तो मनुवादियों ने कर दी पिटाई

दिल्ली में रहने वाले सुमित चौहान नाम के युवा ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, ‘अहमदाबाद में स्टाइलिश मूंछ रखने पर दलित युवकों की पिटाई की गई. जातिवादियों की गुंडागर्दी का विरोध किजिए … आप सब अपनी फेसबुक वॉल पर अपनी मूंछों वाली फोटो अपलोड किजिए. हैशटैग लगाईये #DalitWithMoustache इस पोस्ट के ठीक बाद सुमित चौहान ने कोरियोग्राफर बिट्टो पंवार की फोटो सांझा करते हुए लिखा- इतनी शान वाली मूछें देखकर तो राख हो जाओगे जातिवादियों.’

जितेन्द्र चंदेलकर ने #DalitWithMoustache हैसटैग के साथ एक फोटो साझा करते हुए लिखा- ‘दलितों की मूंछो से जलने वालों ये लो और जलो.. इस फोटो में मूंछ भी है, और हमारे प्यारे बाबासाहेब भी’. तो वहीं विकास दयाल ने लिखा- ‘महाराष्ट्र वालो मेरी भी मूंछे हैं….. गलत नियत नहीं मानविय धारणा को जगाओ.’

घटना गुजरात की राजधानी गांधीनगर से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर लिंबोदरा गांव में घटी. 25 सितंबर को गांव के ही पीयूष परमार और उसके भाई को मूंछे रखने की वज़ह से पीटा गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया. पीड़ित पीयूष के मुताबिक उसे सिर्फ इसलिए बुरी तरह पीटा गया क्योंकि उसने स्टाइलिश मूंछे रखी थी. दलित समाज के लोगों का आरोप है कि अक्सर ऊंची जाति के लोग उनके साथ मारपीट करते हैं. आरोपियों की पहचान मयूर सिंह वघेला, राहुल विक्रमसिंह और अजीत सिंह वघेला के रूप में हुई.

गुजरात में दलितों के खिलाफ अपराधों के ब्योरे पर नजर डालें तो NCRB के मुताबिक गुजरात में हर साल दलित उत्पीड़न की 1000 वारदातें होती हैं. जबकि रोजाना दलित उत्पीड़न के 3 मामले सामने आते हैं. 2014 में गुजरात में 1100 अत्याचार के मामले रजिस्टर किये गये थे, जो 2015 में बढ़कर 6655 हो गये थे.

जाहिर है कई ऐसे भी मामले हैं, जो दर्ज नहीं हो पाते हैं. हालांकि घटना के विरोध में जिस तरह दलित समाज के युवाओं ने विरोध दर्ज कराया है, उससे यह साफ हो गया है कि अब युवा अपने उपर हो रहे अत्याचारों को चुपचाप सहने को तैयार नहीं हैं.

अमेरिका से क्रूड की पहली खेप पहुंचेगी भारत

नई दिल्ली। भारत में पहली बार अमेरिकी कच्चे तेल की खेप सोमवार को पहुंचेगी. यह खेप ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (वीएलसीसी) के जरिये पहुंचेगी. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आइओसी) ने जुलाई में अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद की थी. इसके साथ अमेरिकी कच्चे तेल की भारी सप्लाई भारत में शुरू होने का रास्ता खुल गया है.

एक अमेरिकी अधिकारी ने शुक्रवार को कहा था कि आइओसी और बीपीसीएल ने मार्च 2018 तक कच्चे तेल के आठ पोत खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है. आइओसी प्रमुख ने कहा कि हमने गुजरात के वाडीनार के लिए एक और खेप का ऑर्डर दिया है. यह खेप एक महीने में पहुंचेगी. आइओसी पहली खेप में अमेरिका से लाख बैरल हाई सल्फर क्रूड मार्स और पश्चिमी कनाडा से चार लाख बैरल कच्चा तेल आयात कर रही है. दूसरी खेप में वह 19 लाख बैरल अमेरिका कच्चा तेल खरीदेगी. इसमें से करीब आधा शेल ऑयल होगा. शेल ऑयल भी कच्चा तेल ही होता है. यह किसी तेल कुएं के बजाय जमीन के अंदर चट्टानों के बीच एकत्रित भंडारों से निकाला जाता है. आइओसी ने 9.50 लाख बैरल लाइट स्वीट ईगल फोर्ड शेल ऑयल और इतना ही हैवी सोर मार्स क्रूड आयात होगा.

आइओसी के बाद सार्वजनिक क्षेत्र की दूसरी ऑयल कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) भी अमेरिकी कच्चा तेल आयात करने का प्रयास कर रही हैं. आइओसी के चेयरमैन संजीव सिंह के अनुसार लाख बैरल (प्रति बैरल 158 लीटर) अमेरिकी कच्चे तेल का पोत सोमवार की सुबह तक पारादीप बंदरगाह पर पहुंच जाएगा. केंद्र सरकार अमेरिका और कनाडा का कच्चा तेल अमेरिकी तटों से खरीदने के लिए सार्वजनिक कंपनियों को प्रोत्साहित कर रही है क्योंकि सरकार इसे सस्ते विकल्प के तौर पर देखती है. अमेरिकी कच्चे तेल की वजह से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति मांग से ज्यादा हो गई है.

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश भारत दक्षिण कोरिया, जापान और चीन की तरह अमेरिकी कच्चा तेल खरीदने लगा है. तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में कमी किये जाने के बाद मध्य पूर्व में हेवी सोर क्रूड यानी हाई सल्फर क्रूड की कीमत बढ़ने लगी है.

पाकिस्तान ने फिर किया सीजफायर का उल्लंघन, दो की मौत और 12 घायल

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पुंछ। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से की जा रही भारी गोलीबारी में एक बच्चे सहित दो लोगों की मौत हो गई और 12 लोग घायल हो गए. वहीं कुपवाड़ा के तंगधार सेक्टर में सेना ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया है. एलओसी पर ही एक घुसपैठिया ढेर हो गया. केरन क्षेत्र में पाकिस्तान ने भारी गोलाबारी की, जिसके बाद भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की. पाकिस्तानी सेना द्वारा भारतीय चौकियों पर बिना किसी कारणवश गोलाबारी और गोलीबारी शुरू की गई.

कुछ दिन पहले ही पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम चौकियों तथा गांवों पर मोर्टार के गोले दागे और छोटे हथियार से गोलीबारी की जिसमें दो आम नागरिक घायल हो गए थे. रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि भारतीय सेना ने इसका प्रभावी ढंग से जवाब दिया.

प्रवक्ता ने बताया था कि पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा से लगे पुंछ और भीमबर गली सेक्टर में सुबह करीब सवा आठ बजे से बिना किसी उकसावे के अग्रिम चौकियों को निशाना बनाना शुरू किया था. उन्होंने छोटे हथियारों, स्वचालित राइफलों से गोलीबारी की और मोर्टार दागे थे. पाकिस्तानी सैनिकों ने नियंत्रण रेखा पर भीमबर गली, बालाकोट, शाहपुर और पुंछ गांवों में भी मोर्टार दागे और स्वचालित राइफलों से गोलीबारी की थी.

दलित प्रो. नंदूराम को समाजशास्त्र के क्षेत्र में अतुल्य योगदान के लिए मिलेगा सम्मान

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नई दिल्ली। भारतीय समाजशास्त्र परिषद प्रोफेसर नंदू राम को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित करेगा. प्रो. नंदूराम को यह सम्मान भारतीय समाजशास्त्र परिषद की 9 नवंबर को लखनऊ में होने वाली राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में दिया जाएगा. उन्हें यह सम्मान उनके समाजशास्त्र के क्षेत्र में किए गए योगदान के लिए दिया जा रहा है. प्रोफेसर राम समाज शास्त्र के क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं. वह जवाहर लाल विश्वविद्यालय में पहुंचने वाले पहले दलित प्रोफेसर थे।

प्रोफसर नंदूराम ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई की. उसके बाद उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से समाजशास्त्र में एमए और पीएचडी किया.1978 से प्रो. नंदूराम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल सिस्टम्स और स्कूल ऑफ सोशल साइंस में पढ़ाने लगे. वह समाजशास्त्र में डॉ. अंबेडकर चेयर के संस्थापक प्रोफेसरों में से एक थे.

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प्रो. राम देश के तमाम संस्थानों से भी जुड़े रहें और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई. 1999-2001 तक प्रो. नंदूराम सेंटर फोर द स्टडी ऑफ सोशल सिस्टम्स के चेयरपर्सन रहे. इसके अलावा वह देश में राज्य और केंद्र के कई विश्वविद्यालयों की कार्यकारी परिषद और प्रशासनिक परिषद के सदस्य भी रहे. 2001-2004 तक वह बाबासाहेब अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान राष्ट्रीय संस्थान, महू के निदेशक के पद पर कार्यरत रहे.

प्रो. नंदूराम भारतीय योजना आयोग द्वारा ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना (2011-2017) के तहत बनाए गए ‘भारतीय अनुसूचित जाति (एससी) सशक्तीकरण’ योजना के वर्किंग ग्रुप के सदस्य भी थे. उन्होंने तीन दर्जन से भी अधिक शोधपत्रों और कई पुस्तकों को भी लिखा है जिनमें मुख्य रूप से है-

-The Mobile Scheduled Castes: Rise of a New Middle Class (1988) -Beyond Ambedkar: Essays on Dalits in India (1995) -Ambedkar, Dalits and Buddhism, (2008) -Dalits in Contemporary India, (2008) -Caste System and Untouchability in South India, (2008) -Encyclopedia of Scheduled Castes in India : In 5 Volumes.

गरबा देख रहे दलित को मनुवादियों ने उतारा मौत के घाट

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अहमदाबाद। देश में कोई भी जगह हो, जमीन हो, संस्कृति हो या फिर कोई भी वस्तु हो मनुवादी अपना हक जमाने की कोशिश करते हैं. और इस हक जमाने की कोशिश में वे निम्न तबके और कमजोरों को दबाने की कोशिश भी करते हैं. अगर कोई नहीं दबता और उनका विरोध करता है तो मनुवादी उनसे मार-पीट पर उतारू हो जाते हैं.

ऐसी ही एक घटना एक बार फिर गुजरात के आणंद से आई है. जहां मनुवादियों ने गरबे पर अपना अधिकार समझ लिया. और एक दलित य़ुवक को सिर्फ इसलिए पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया कि वह गरबा देख रहा था.

एक अक्टूबर की सुबह करीब चार बजे गरबा देखने को लेकर ऊंची जाति के पटेल समुदाय के लोगों ने एक 21 वर्षीय दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी.

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, जयेश सोलंकी, उसका चचेरा भाई प्रकाश सोलंकी और दो अन्य दलित व्यक्ति भदरनिया गांव में एक मंदिर के पास बने मकान के नजदीक बैठे हुए थे. तभी एक व्यक्ति ने उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की. उसका कहना था कि दलितों को गरबा देखने का कोई अधिकार नहीं है. इस बीच उसने कुछ और लोगों को भी वहां बुला लिया. ऊंची जाति के लोगों ने दलितों को पीटना शुरू कर दिया और इस बीच किसी ने जयेश का सिर दीवार में दे मारा. जयेश को करमसद के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत लाया गया घोषित कर दिया.

पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ हत्या से संबंधित आइपीसी की विभिन्न धाराओं और अत्याचार रोकथाम अधिनियम के तहत एफआइआर दर्ज कर ली है. एससी-एसटी प्रकोष्ठ के पुलिस उपाधीक्षक एएम पटेल ने बताया कि यह पूर्व नियोजित हमला नहीं लग रहा. गरमा-गरमी के बीच जयेश की हत्या कर दी गई. उसके और अभियुक्तों के बीच कोई दुश्मनी नहीं थी. पुलिस सभी पहलुओं से मामले की पड़ताल कर रही है. अभियुक्तों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

गौरतलब है कि गांधीनगर के निकट एक गांव में 25 और 29 सितंबर को हुईं दो अलग-अलग घटनाओं में मूंछे रखने पर ऊंची जाति के राजपूत समुदाय के लोगों ने दो दलितों की पिटाई कर दी थी. 29 सितंबर को हुई घटना के आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया है. मालूम हो कि पिछले साल जुलाई में ऊना कस्बे में चार दलितों की बर्बरतापूर्वक पिटाई के बाद राज्यभर में जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हुए थे.

शिया मस्जिद के बाहर हुआ आत्मघाती हमला, 22 की मौत

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काबुल। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में शुक्रवार को एक शिया मस्जिद के बाहर आत्मघाती हमले में 22 लोगों की मौत की खबर है. न्यूज एजेंसी एएफपी ने काबुल पुलिस के हवाले से बताया है कि हमले में कम से कम 22 लोगों की मौत हुई है. हालांकि अफगानिस्तान के टोलो न्यूज के मुताबिक आत्मघाती हमले में 5 लोगों की मौत हुई है और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.

पुलिस ने बताया कि इस दिन मुस्लिम समुदाय अपने सबसे पवित्र दिन का जश्न मनाने के लिए मस्जिद में इकट्ठे हुए थे. काबुल शहर के आपराधिक जांच निदेशक जनरल सलीम अल्मास ने बताया, “आत्मघाती हमलावर मस्जिद के बाहर अपनी भेड़ें चरा रहा था तभी उसने खुद को विस्फोट कर लिया.

बताया जा रहा है कि शुक्रवार की नमाज के बाद सभी मस्जिद से वापस जा रहे थे. हालांकि अब तक किसी तालिबान और आईएस आतंकी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. लेकिन आशंका यही जताई जा रही है क्योंकि इन समूहों ने पिछले कुछ सालों में अल्पसंख्यक समुदाय को बार-बार अपना निशाना बनाया है.

बता दें कि मुस्लिम समुदाय मुहर्रम के 10 वें दिन सातवीं शताब्दी के पैगंबर मोहम्मद के पोते इमाम हुसैन की हत्या के लिए शोक मनाया जाता है. इस दिन मुस्लिम वफादार अपने आप को चोट पहुंचाकर अपनी शहादत देते हैं. लेकिन हाल के वर्षों में इस दिन काफी हिंसा देखी गई है.

यशवंत सिंहा ने दिया करारा जबाव, तिलमिला उठे जेटली

नई दिल्ली। भाजपा के ही दो दिग्गज नेताओं में जुबानी जंग अब दुश्मनी तक पहुंच गई है. पार्टी में किनारे कर दिए गए भाजपा नेता एवं पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा और वर्तमान वित्तमंत्री अरुण जेटली के बीच तल्खी इतनी बढ़ गई है कि दोनों एक दूसरे पर निजी हमले करने लगे हैं. दोनों के बीच एक-दूसरे पर पलटवार का खेल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.

सिन्हा द्वारा देश की अर्थव्यवस्था के लिए जेटली को कठघरे में खड़ा करने के बाद जेटली सिन्हा पर भड़क गए. अरुण जेटली ने गुरुवार को कहा कि

“कुछ लोग 80 साल की उम्र में नौकरी के आवेदक बनना चाहते हैं.”

अब इस पर यशवंत सिन्हा ने कहा है-

‘अगर मैं नौकरी का आवेदक होता, तो शायद वो (अरुण जेटली) पहले नंबर पर ना होते’.

सिन्हा ने आगे कहा कि 80 की उम्र में नौकरी का मजाक अच्छा था, मुझे पसंद आया. सिन्हा ने अरुण जेटली पर यह कह कर भी निशाना साधा कि जिन्होंने लोकसभा की शक्ल नहीं देखी वो मेरे ऊपर आरोप लगा रहे हैं. यहां गौरतलब है कि जेटली आज तक लोकसभा का चुनाव नहीं जीते हैं. यशवंत सिन्हा ने अरुण जेटली पर एक के बाद एक 10 वार किए, जिससे जेटली तिलमिला गए हैं. आइए देखते हैं कि आखिर सिन्हा ने अरुण जेटली को लेकर क्या कह दिया?

1. ‘अगर मैं नौकरी का आवेदक होता, तो शायद वो (अरुण जेटली) पहले नंबर पर ना होते’.

2. अरुण जेटली मेरी पृष्ठभूमि भूल गए हैं. मैंने राजनीति में दर-दर की ठोकर खाई है. 12 साल की IAS की नौकरी बाकी थी जब राजनीति में आया. 3. मैं हर सेक्टर पर चर्चा करने को तैयार हूं, हर सेक्टर में गिरावट हो रही है. 4. मैंने राजनीति में आने के कुछ समय के बाद ही अपनी लोकसभा की सीट चुन ली थी. मुझे अपनी लोकसभा की सीट चुनने में 25 साल नहीं लगे हैं. जिन्होंने लोकसभा की शक्ल नहीं देखी, वो मेरे ऊपर आरोप लगा रहे हैं. 5. मैंने वीपी सिंह की सरकार में मंत्री पद ठुकरा दिया था, लेकिन अरुण जेटली ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में राज्यमंत्री का पद स्वीकार कर लिया. वह लोकसभा में पहुंचे भी नहीं थे. 6. कालेधन और पनामा पर जेटली गुमराह कर रहे हैं. पनामा मामले में भारत में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है. 7. मैं और चिदंबरम कभी दोस्त नहीं रहे हैं, बल्कि अरुण जेटली और चिदंबरम दोस्त रहे हैं. 8. हम मुद्दे से भटकने नहीं देंगे, इसलिए पर्सनल आरोप लगा रहे हैं. जो लोकसभा का सदस्य है वही लोगों की बात समझ सकता है, पांव में छाले पड़ेंगे तो ही कुछ समझ आएगा. 9. लोग आज भी मेरे पास जॉब की सर्च में आते हैं, क्या अरुण जेटली के पास लोग आते हैं. 10. उन्होंने कहा कि मैं यूज़लैस मंत्री था, अगर ऐसा था तो मुझे विदेश मंत्री क्यों बनाया गया था? भाजपा के इन दोनों नेताओं की नोकझोक पर विपक्ष भी चुप्पी साधे मजे ले रहा है.