थाने पहुंची राधे मां, SHO सहित कई पुलिसकर्मियों ने लिया आशीर्वाद

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Radhe ma

नई दिल्ली। दिल्ली के विवेक विहार थाने में विवादास्पद धर्मगुरु राधे मां के साथ पुलिसकर्मियों की फोटो वायरल हुई है. फोटो में विवेक विहार थाने के एसएचओ संजय शर्मा ने राधे मां को अपनी कुर्सी पर बैठाकर रखा है और खुद हाथ जोड़ कर उसके आगे खड़े हैं. यही नहीं, एसएचओ के साथ कई पुलिसकर्मी भी हाथ जोड़ कर खड़े हैं.

फोटो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने एसएचओ को लाइन हाजिर करने के आदेश दिया है. फोटो में एसएचओ के अलावा जो पुलिसकर्मी हाथ जोड़े खड़े हैं, इन सभी को भी पुलिस लाइन में भेजने का आदेश हुआ है.

इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से जांच के आदेश दिए गए थे. इस जांच में प्रथम दृष्टया एसएचओ संजय शर्मा को दोषी माना गया है. विवेक विहार थाने की ये तस्वीर नवरात्रि के दौरान महाअष्टमी की है. यह मामला संज्ञान में आते ही इस प्रकरण के जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

इतना ही नहीं थाने में राधे मां की जय-जयकार होने लगी. यहां तैनात पुलिस वाले भी भक्त की मुद्रा में नजर आए. राधे मां थाने क्यों आई इस पर यहां के पुलिसकर्मियों ने बोलने से इंकार किया.

जातिवादियों ने दलित महिला पर थूका, विरोध करने पर महिला के पति को बंधक बनाकर पीटा

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छपरा। देश में दलितों पर अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है. भारत के हर राज्य में दलितों के साथ भेदभाव और मार-पीट की जा रही है. पिछले एक हफ्ते में गुजरात में ही अलग-अलग जगहों पर दलितों पर अत्याचार की तीन घटनाएं हो चुकी हैं. अभी तक सरकार और प्रशासन जातिवादी गुंडों का कुछ नहीं कर पाया है. प्रशासन और पुलिस के कार्रवाई न करने से जातिवादियों का मनोबल बढ़ रहा है.

ऐसे मनोबल के चलते ही जातिवादियों ने बिहार के सारण जिले में दलित महिला वार्ड सदस्य के ऊपर थूक दिया और अपमानजनक टिप्पणी की. जब महिला ने इसका विरोध किया तो जातिवादी गुंडों ने महिला के पति और पति के बड़े भाई को बंधक बनाकर पीट दिया. दोनों को इलाज के लिए रिविलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है.

दरअसल, रिविलगंज थाना क्षेत्र के तिवारी टोला की दलित महिला वार्ड सदस्य बबिता देवी पर गांव के कुछ लोगों ने पान खाकर थूक दिया था. जब दलित महिला के पति सुभाष राम और पति के बड़े भाई रवि शंकर राम ने विरोध किया तो जातिवादी गुंडों ने उनकी पिटाई कर दी.

पिटाई के बाद दोनों घायल स्थानीय थाने में शिकायत करने गए लेकिन पुलिस ने शिकायत नहीं लिखी. इसके बाद पीड़ित छपरा पुलिस अधीक्षक के पास करने गए. पुलिस अधीक्षक ने दोनों पीड़ितों को रिविलगंज थाने जाने को कहा. जब दोनों छपरा से आ रहे थे तो रास्ते में रिविलगंज बाजार से दोनों को हथियार के बल पर किडनैप कर लिया गया. किडनैप कर के उन्हें बंद पड़े ईट के भट्टे पर ले जाकर हाथ-पैर बांधकर बेरहमी से पीटा गया. सूचना मिलने पर पुलिस वहां पहुंची तो, सभी फरार हो गये. गंभीर रूप से घायल हुए दोनों पीड़ितों को पुलिस ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया.

घायलों के बयान पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर लिया है. आरोपियो की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी भी की जा रही है. थानाध्यक्ष ने बताया कि पान खाकर थूकने का विवाद एक अक्टूबर से ही चल रहा है और इस मामले में पंचायती भी की गई. लेकिन पंचायत में भी मामला नहीं सुलझ पाया. इसके बाद विवाद और बढ़ गया. वार्ड सदस्य बबिता देवी का कहना है कि दलित होने के कारण जातिवादियों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है.

स्कूलों में पढ़ा रहे हैं ‘अनट्रेंड टीचर’ तो कैसे बढ़ेगा इंडिया?

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नई दिल्ली। ये सच है कि जब पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया. लेकिन इंडिया को पढ़ाने वाला ही अन्ट्रेंड हों तो ये जुमला बेइमानी सा लगता है. आज की तारीख में लगभग 15 लाख ऐसे ‘अनट्रेंड’ टीचर्स हैं, जो देश के अलग-अलग स्कूलों में बच्चों को तालीम देने में लगे हैं. जिसमें 10 लाख टीचर्स प्राईवेट स्कूलों में और 4 लाख से ज्यादा सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं.

दरअसल, केन्द्र सरकार ने इस साल के अंत तक उन सभी शिक्षकों को नए कोर्स करने की मोहलत दे रखी है. जो टीचर ट्रेनिंग किए बगैर ही बच्चों को तालीम दे रहे हैं. सरकार के इस फरमान के बाद मानव संसाधन मंत्रालय में लगभग 15 लाख शिक्षकों ने नए ट्रेंनिंग कोर्स के लिए आवेदन दे रखा है. जिसमें सबसे ज्यादा शिक्षकों की संख्या बिहार से है वहां से लगभग 3 लाख शिक्षक हैं. दूसरा नंबर यूपी का आता है जहां से 1 लाख 95 हजार टीचर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है. जबकि तीसरे नंबर पर मध्‍य प्रदेश का नाम है वहां से भी 1 लाख 91 हजार टीचर्स अब तक आवेदन कर चुके हैं.

नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ ओपन स्‍कूलिंग की तरफ से दिए जा रहे इस ट्रेनिंग में ऑनलाइन के साथ साथ डिश टीवी के माध्‍यम से भी पढ़ाया जाएगा. इसके अलावा ट्रेनिंग के लिए मोबाइल एप्लिकेशन को भी डेवलेप किया गया है. ट्रेंनिंग के बाद सभी शिक्षकों को डिप्‍लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन की डिग्री दी जाएगी.

लखनऊ के सिविल कोर्ट में हुआ बम धमाका

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bomb blast लखनऊ। लखनऊ के कैशरबाग स्थित सिविल कोर्ट में बुधवार को को बाथरूम में ब्लास्ट होने से हड़कंप मच गया. इस विस्फोट में किसी के जान-माल की हानि नहीं हुई है. जानकारी के मुताबिक ब्लास्ट कोर्ट के फर्स्ट फ्लोर के बाथरूम में हुआ. विस्फोटक सामग्री फ्लश में छुपाकर रखी गई थी. विस्फोट के बाद मौके पर पहुंची पुलिस जांच में जुट गई है लेकिन कोर्ट की बिल्डिंग में विस्फोटक पदार्थ कहां से आया, इसे लेकर सुरक्षा पर सवालिया निशान जरूर उठने लगा है. जांच के बाद पुलिस ने बताया कि विस्फोटक पदार्थ कम तीव्रता का था, इसीलिए इससे किसी भी प्रकार की जान-माल की हानि नहीं पहुंची है.

कानपुर में हुआ बम धमाका, 2 की मौत और 3 घायल

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कानपुर। महराजपुर इलाके की सरसौल बाजार में बुधवार की दोपहर तेज धमाके के साथ चार मकान जमींदोज हो गए. इस हादसे में तीन लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि कई अन्य जख्मी हैं. घायलों को चकेरी क्षेत्र के कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है. एनडीआरएफ की टीम मौके पर राहत और बचाव के कार्य में जुटी है. धमाके के कारणों की पड़ताल के लिए लखनऊ से एटीएस की टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है. प्रारंभिक जांच के मुताबिक, दीपावली पर अवैध पटाखे बनाने के लिए भारी मात्रा में बारुद एकत्र किया गया था, जोकि विस्फोट का कारण बना.

पुलिस के मुताबिक, सरसौल बाजार में रघुनाथ सिंह उर्फ बाबू सिंह के मकान में बुधवार की दोपहर करीब एक बजे तेज धमाके के साथ जबरदस्त विस्फोट हुआ. इस धमाके में बाबू का मकान जमींदोज हो गया, जबकि अगल-बगल के चार अन्य मकान भी ढह गए. हादसे में बाबू सिंह के बड़े बेटे नीरज तथा दो अन्य लोगों की मौत हो गई. बाजार में खरीदारी करने आए कई लोग घायल भी हुए हैं. आशंका है कि मकानों के मलबे में कुछ अन्य लोग भी दबे होंगे. हादसे के बाद नर्वल मोड़ पर स्थित आईटीबीपी के क्षेत्रीय मुख्यालय से जवान पहुंचे और स्थानीय पुलिस के साथ राहत और बचाव कार्य शुरू कराया. विस्फोट में ज मी हुए लोगों को कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

इलाके में तलाशी के लिए पांच थानों की फोर्स को मुस्तैद कर दिया गया है. डीआईजी सोनिया सिंह को खबर मिली है कि प्रत्येक बरस दीपावली में सरसौल तथा आसपास के इलाकों में अवैध पटाखों को बनाने का काम चलता है. इस इनपुट के बाद पुलिस को सरसौल कस्बे के संदिग्ध मकानों की तलाशी के काम में जुटा दिया है. अलबत्ता स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबू सिंह के मकान में अवैध पटाखों के कारोबार के बारे में कोई सूचना नहीं थी. पुलिस के मुताबिक, बाबूसिंह और उसके लड़के अवैध पटाखों का काम करते हैं. इस काम में कुछ मजदूरों को भी लगाया गया था. मजदूरों की किसी चूक के कारण बारुद में धमाका होने से यह हादसा हुआ है.

पूजा और लाठीचार्ज के बीच एक देवी, एक मनुष्य और एक शरीर

बीएचयू में धरना चल रहा था. छात्राओं की स्टोरी चल रही थी. न्यूज़ एजेंसी की माइक पर लड़कियां बता रहीं थीं छेड़ख़ानी की शिकायत के बारे में. एक लड़का भी साउंड बाइट देने आया. वो लड़कियों की सुरक्षा से शुरू करके मुद्दा हॉस्टल में मिलने वाले खाने तक ले गया. एक लड़की ने विरोध में अपना सर मुंडवा लिया था. ये सब हो रहा था एक बड़े से द्वार के सामने. किसी ने बताया कि ये बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का गेट है. लंका कहलाता है इलाक़ा. थोड़ी देर के लिए मन एक संयोग बिठाने में भटका कि लंका में महिला सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाई जा रही है. बनारस के बारे में फिर से लगा कि ये शहर नई दृष्टि देता है. पर फिर वापस उन दृश्यों पर वापस गया. छात्र भी दिखे थे छात्राओं के समर्थन में. छात्राओं का कहना था कि उनके साथ विश्वविद्यालय में छेड़ख़ानी आम है. इस बार की घटना के बारे में बताया कि एक छात्रा के कपड़े में हाथ डालने की कोशिश की गई. छात्राओं की शिकायतों की फ़ेहरिस्त आ गई ढेरों रिपोर्टों में. छात्राओं के हॉस्टल के सामने लड़कों द्वारा छेड़ख़ानी, हस्तमैथुन या लिंग दिखाने का ज़िक्र हो रहा था.

एक रिपोर्ट ने कहा कि छेड़ख़ानी की घटना के बारे में यूनिवर्सिटी गार्ड को बताने पर गार्ड हंस रहा था, कि छह बजे शाम के बाद निकलने पर ऐसा ही होता है. फिर वाइस चांसलर को सुना कि गार्ड को हटा दिया गया है. वीसी ने ये भी बताया कि बीएचयू में गार्ड केवल एक्स आर्मी वाले होते हैं. अचरज और बढ़ गया. वीसी ने ये भी कहा कि बाहर वालों ने हंगामा किया. फिर एक ये भी बयान आया कि आठ बजे रात के बाद दो लड़कियां कैंपस से बाहर निकलती हैं वही प्रोटेस्ट में बैठी हैं. बाहर निकलने वाली लड़की और विरोध में संबंध स्थापित किया गया. इस संबंध की मियाद भी बताई गई. आठ बजे रात के बाद वाली लड़कियां. आठ बजे से पहले निकलने वाली छात्राएं चुप रहती हैं.

कैंपस की छात्राओं कि पिटी हुई तस्वीरें भी आईं. वीसी के बयान वाली इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट भी ट्रेंड कर रही थी कि हर लड़की का सुनने लगे को चल गई यूनिवर्सिटी. पर क्विंट की रिपोर्ट बता रही थी कि कैसे शिक्षिकाएं भी असुरक्षित हैं. उन्हें भी नहीं छोड़ा जाता. अब उस कैंपस पर दया आने लगती है जहां मैं कभी गया भी नहीं. ये शहर मन के बहुत क़रीब है. बचपन में शहर की गलियों में ख़ूब घूमा था. मेरे जानने वाले बीएचयू में पढ़ाई के क़िस्से सुनाते थे. फिर अचानक वीडियो देखता हूं जो शायद किसी छात्र ने तब ली थी जब पुलिस वालों द्वारा छात्र-छात्राओं को खदेड़ा था. दौड़ने की आवाज़ थी. आपाधापी थी. गुस्सा था. प्रशासन के ख़िलाफ़. गालियां थीं. कुछ ऐसी गालियां जो सभी नॉर्थ इंडियन समझ पाएं, कुछ लोकल वाली थीं पर सभी गालियां मां-बहन वाली गालियां थीं और ये छात्राओं के समर्थन में जुटे छात्र थे शायद.

बनारस से ही सूत्र जुड़ा एक और ख़बर का. उसी शहर की पृष्ठभूमि पर बनी एक फ़िल्म थी. रांझना. हीरो अपनी कलाई काट लेता है, हिरोइन को पाने के लिए. हिरोइन की ना उसे बर्दाश्त नहीं. वहीं पिंक फ़िल्म में प्रशस्ति की गई थी, नो मीन्स नो. एक फ़ैसला भी आया रेप के मामले में. लड़की अगर मंद आवाज़ में ना बोले तो क्या उसे ना माना जाएगा? रेप के आरोप से फ़िल्म डाइरेक्टर बरी हो गया.

दिल्ली के एक प्रोफ़ेसर को सस्पेंड किया गया. प्रोफ़ेसर ने मां दुर्गा के ख़िलाफ़ फ़ेसबुक टिप्पणी की थी. भावनाएं आहत हुईं. टिप्पणी धर्म पर नहीं थी. किसी मिथक पर भी नहीं. किसी सोच, किसी प्रथा पर भी नहीं थी. प्रोफ़ेसर की टिप्पणी शरीर पर थी. देवी या महिला नहीं, सिर्फ़ शरीर पर. महिला एक शरीर है. एक जिस्म है. उतना ही दिखता है. उतना ही देख पाते हैं वो.

क्रांति संभव NDTV इंडिया में एडिटर ऑटो और एंकर हैं… साभार-एनडीटीवी

हरियाणा पुलिस के संपर्क में थी हनीप्रीत, लेकिन नहीं किया गिरफ्तार

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पंचकुला। हनीप्रीत को पकड़े जाने के बाद हरियाणा पुलिस ने उसे बुधवार को पंचकुला कोर्ट में पेश किया गया. जहां अदालत ने उसे 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. हनीप्रीत को एक महिला के साथ पंजाब की जिरकपुर-पटियाला रोड से गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तार करने के बाद हरियाणा पुलिस ने रात 3 बजे तक हनीप्रीत से पूछताछ की गई थी.

हनीप्रीत पिछले 38 दिनों से फरार चल रही थी. गिरफ्तार किए जाने से पहले हनीप्रीत ने कई टीवी चैनलों को अपना इंटरव्यू दिया. लेकिन सूत्रों का दावा है कि हनीप्रीत पिछले 5 दिनों से हरियाणा पुलिस के संपर्क में थी. अब सवाल उठता है कि जानकारी होने के बावजूद भी पुलिस ने हनीप्रीत को गिरफ्तार क्यूं नहीं किया.

हनीप्रीत के सरेंडर को लेकर उसके वकील ने पुलिस को पहले ही सूचना दी थी. हनीप्रीत पहले ही मीडिया के सामने आकर सहानुभूति कार्ड खेलने का प्लान बना चुकी थी. यहां तक कि पंजाब पुलिस को भी हनीप्रीत की जानकारी थी, लेकिन पंजाब में उसके खिलाफ कोई केस दर्ज न होने की वजह से उसे गिरफ्तार नहीं किया गया.

सूत्रों के मुताबिक, हनीप्रीत चंडीगढ़ से 25 किमी. दूर पटियाला के बानुर इलाके के एक रिसोर्ट में भी रही थी. सब कुछ प्लान के अनुसार किया जा रहा था. डेरे की तरफ से ही हनीप्रीत को मीडिया से बात करने की सलाह दी गई थी. हनीप्रीत तो 26 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट के बाहर पुलिस के सामने सरेंडर करने वाली थी. लेकिन बाद में उसने प्लान बदल लिया था.

अब सवाल उठता है कि अगर हरियाणा पुलिस को हनीप्रीत के बारे में जानकारी थी तो क्यूं उसे गिरफ्तार नहीं किया गया. आखिर क्यूं हनीप्रीत को 38 दिन तक एक पहेली बनाकर रखा गया. क्या अब खट्टर सरकार उन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी, जो इस दौरान अपनी ड्यूटी निभाने में असफल रहे. या फिर यह सब राम रहीम के करीबी नेताओं के कहने पर किया गया.

रिपोर्टः भारत में 1 करोड़ 40 लाख लोग जी रहे है गुलामों जैसी जिंदगी

Slavery in india

भले ही दुनिया चांद पर पहुंच चुकी हो और तरक्की के नए आयाम को पेश कर रही हो. लेकिन हम आपको एक ऐसी कड़वी सच्चाई से रुबरु कराने जा रहे हैं. जिससे देश दुनिया का सारा विकास बेईमानी सा दिखने लगेगा. दरअसल, अभी भी दुनिया भर में तकरीबन 4 करोड़ लोग गुलामी की जिंदगी जी रहे हैं. जिसमें सबसे ज्यादा अपने महान देश भारत में ही है.

आकड़ों की ये तस्वीर बयां कर रही है कि देश में तकरीबन 1 करोड़ 40 लाख लोग गुलाम जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं. जिसमें सबसे ज्यादा बच्चें और महिलाएं शामिल हैं. जिसे ज्यादातर जबरन विवाह, मजदूरी, मानव तस्करी और वेश्यावृति जैसे धंधों मे जबरन धकेला जा रहा है.

मुल्क को शर्मसार करनेवाली ये रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ ने ऑस्ट्रेलिया के वॉक फ्री फाउंडेशन के साथ मिलकर तैयार की है. जिसमें भारत को दुनिया के रंगमंच पर पिछले चार सालों से सबसे ज्यादा गुलामों वाले देश के तौर पर पेश किया है. पेश की गई इस रिपोर्ट के बाद देश की खुफिया एजेंसी आईबी ने सरकार को आगाह किया है कि इससे देश की छवि और धुमिल हो सकती है जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.

देश की सबसे बड़ी बिडंबना यही है कि चाहे वो भ्रष्टाचार का मामला हो या फिर रिश्वतखोरी का, इन सब में ये नंबर एक का मुकाम हासिल कर रखा है. और अब गुलामियत की ये नई रिपोर्ट शर्मिंदगी की सारी हदों को पार करती दिखाई दे रही है. बार-बार अपनी कूटनीतिक जीत का डंका पीटने वाली केन्द्र सरकार पर इस तरह की रिपोर्ट किसी तमाचे से कम नहीं है.

धोनी के घर में कंगारुओं की पार्टी

क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के घर सोमवार की रात कंगारुओं की पार्टी हुई. धोनी ने डिनर पार्टी देकर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की जमकर मेहमान नवाजी की. मेहमान नवाजी से ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्मिथ काफी खुश नजर आ रहे थे.

धोनी के सिमलिया स्थित गेस्टहाउस में सोमवार देर रात तक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने झारखंडी जायके का जमकर लुत्फ उठाया. इस डिनर पार्टी को गुप्त रखा गया था. इसमें ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ के साथ हेनरिक्स और पेन शामिल हुए. वहीं अंतिम समय में फिल्म अभिनेता अनुपम खेर भी वहां पहुंचे. इनके अलावा माही के कुछ दोस्तों ने भी पार्टी में शिरकत की.

सोमवार को धोनी, स्मिथ, हेनरिक्स, पेन एक ही फ्लाइट से रांची पहुंचे थे. टीम इंडिया से मात्र धोनी ही अभी तक टी-20 मुकाबले के लिए रांची पहुंचे हैं. धोनी रात लगभग आठ बजे स्वयं होटल पहुंचकर स्मिथ, पेन व हेनरिक्स को अपनी गाड़ी में बैठाकर फार्म हाउस ले आए. स्मिथ धोनी की बेटी जीवा के साथ भी खेले. डिनर पार्टी में पेन को लिट्टी चोखा काफी पसंद आया. माही की पार्टी में उपस्थित एक दोस्त ने बताया कि पेन लिट्टी बनाने का रेसेपी जानना चाह रहे थे.

पार्टी के दौरान धोनी के रील फादर अनुपम खेर भी वहां पहुंच गए. रीयल फादर पान सिंह पहले से मौजूद थे. इस तरह डिनर पार्टी में रील और रीयल फादर एक साथ थे. अनुपम ने भी खिलाडि़यों के साथ जमकर लुत्फ उठाया. अनुपम ने इसे शानदार पार्टी बताया. उन्होंने अपनी खुशी ट्वीटर पर भी व्यक्त की. उन्होंने माही की बेटी जीवा की प्रशंसा की तथा कहा वह राष्ट्रगान बहुत अच्छी तरीके से गाती है.

KV में टीचर्स के लिए 546 वैकेंसी, जल्‍द करें एप्‍लाई

केंद्रीय विद्यालय संगठन यानी KV ने टीचर्स के लिए बंपर वैकेंसी निकाली है. ये वैकेंसी नॉर्थ ईस्‍टर्न जोन के लिए हैं. कुल 546 पदों के लिए आवेदन मांगे गए हैं.

KVS इस प्रक्रिया के तहत 220 प्राइमरी टीचर्स (PRTs), 182 पोस्‍ट ग्रेजुएट टीचर्स (PGT) और 144 ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर्स (TGTs) की भर्ती करेगा. ये सभी भर्तियां ग्रुप B पोस्‍ट के लिए हैं.

कैसे करें आवेदन

जो अभ्‍यर्थी आवेदन करना चाहते हैं वे केंद्रीय विद्यालय संगठन की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर 17 अक्‍टूबर 2017 तक आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए अभ्‍यर्थियों को सावधानीपूर्वक एप्लिकेशन फॉर्म भरना होगा. एक हालिया पासपोर्ट साइज की फोटो, सिग्‍नेजचर की आवश्‍यकता भी होगी.

ऑनलाइन एप्लिकेशन सब्मिट करने से पूर्व रजिस्‍ट्रेशन नंबर जनरेट करके सुरक्षित रखना होगा. एक बार ऑनलाइन एप्लिकेशन भर देने पर उसका प्रिंटआउट निकालकर उस पर फोटोग्राफ लगाकर रखना होगा.

सेलेक्‍शन प्रक्रिया

लिखित परीक्षा और इंटरव्‍यू के आधार पर चयन किया जाएगा. जल्‍द ही KV की वेबसाइट पर लिखित परीक्षा की तारीख अपडेट कर दी जाएगी.

महत्‍वपूर्ण तिथि

आवेदन करने की अंतिम तिथि 17 अक्‍टूबर 2017 है.

अधिक जानकारी के लिए KVS की ऑफिशियल वेबसाइट kvsangathan.nic.in पर लॉगइन करें.

खुलासा (पार्ट-3): अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति दोनों का मिलाकर 1 लाख 53 हजार 847.94 करोड़ की कटौती

Parliament

इस प्रकार सिर्फ 2017-2018 के बजट में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के बजट में कुल कटौती क्रमशः 1 लाख 04 हजार 490.45 रूपया और 49 हजार 357.49 करोड़ रुपये को जोड़ दिया जाए तो दोनों समुदायों के हिस्से की इस वर्ष की कुल कटौती 1 लाख 53 हजार 847.94 करोड़ की होती है.

इस प्रकार केंद्र सरकार ने केवल इस बार के बजट (2017-18) में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के समुदायों के कल्याण के लिए आवंटित होने वाली धनराशि में से 1 लाख 53 हजार 847.94 करोड़ रुपए की कटौती कर दी और उस पर भी 35 प्रतिशत वृद्धि का दावा कर रही है. वृद्धि के इस दावे की हकीकत क्या है, इसकी चर्चा थोड़ा आगे करेंगे.

ये भी पढ़ेंः खुलासा (पार्ट-2): अनसूचित जातियों के हिस्से में से 1 लाख 04 हजार 490.45 करोड़ की कटौती

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए आवंटित धनराशि में केवल इसी वर्ष ही इतने बड़े पैमाने पर कटौती नहीं की गई, पिछले वर्ष भी इस सरकार ने बड़े पैमाने पर कटौतियाँ की थीं.

पिछले वर्ष (2016-17) के बजट में नियमतः आंवटित होने वाली धनराशि में 52 हजार 479.03 करोड़ रुपये की अनुसूचित जातियों के मद में कटौती की गई थी.

 पिछले वर्ष का कुल बजट 19 लाख 78 हजार 60 करोड़ का था, जिसमें योजनागत व्यय 5 लाख 50 हजार 010.10 करोड़ का था. अनुसूचित जाति उपयोजना की स्वीकृति नीति के हिसाब से, इस योजनागत व्यय का अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के अनुपात में 16.6 प्रतिशत आवंटित होना चाहिए था, जो कुल बजट का 4.62 प्रतिशत होता. यदि योजनागत बजट का 16.6 प्रतिशत आवंटित होता, तो यह धनराशि 91 हजार 301.66 करोड़ होती. इस धनराशि, जिस पर अनुसूचित जातियों का हक था, में भारी कटौती करके सिर्फ 38 हजार 832.63 करोड़ आवंटित किया गया अर्थात् 52 हजार 479.03 करोड़ की कटौती कर दी गई.

 इसी प्रकार अनुसूचित जनजातियों के लिए स्वीकृत अनुसूचित जनजाति उपयोजना के तहत कम से कम 47 हजार 300 करोड़ का आवंटन होना चाहिए था, जबकि सिर्फ 24 हजार 005 करोड़ रुपए का आवंटन हुआ.

 इस प्रकार अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के मद में 2016-17 के बजट में भी 23 हजार 295. 86 करोड़ रुपये की कटौती की गई थी.

यदि केवल 2016-17 और 2017-18 के बजट में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के वाजिब हकों में की गई कुल कटौती को जोड़ दिया जाए तो यह (153847.94 + 75774.86) 2 लाख 29 हजार 622.86 करोड़ रुपया होता है. यह इतनी धनराशि है कि यदि इसे अनुसूचित जाति और जनजाति के प्रत्येक बालिग-नाबालिग सदस्यों के बीच बांटा जाए तो प्रत्येक को कम से कम लगभग 10 हजार रुपये मिलेंगे.

ये भी पढ़ेंः खुलासा (पार्ट-1): मोदी सरकार ने छीन लिया दलितों के हक का 2 लाख 29 हजार करोड़ रूपए

यही इस बात के रहस्य को भी समझ लेना चाहिए कि इतने बड़े पैमाने पर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के कल्याण के लिए धनराशि के आवंटन में कटौती के बावजूद भी आंकडों की वह कौन सी बाजीगरी थी कि वित्त मंत्री ने यह घोषणा किया कि इस वर्ष के बजट में अनुसूचित जातियों के कल्याण के मद में 35 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, और सारी मीडिया इसका गुणनान करने लगी. सच्चाई यह है कि सरकार ने 2014-15 के बजट में अनुसूचित जातियों के लिए 50 हजार 548 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, जिसे घटाकर 2016-17 के बजट में 38 हजार 832.63 करोड़ रुपया कर दिया. जिसे 2017-18 के बजट में 52 हजार 392.55 करोड़ कर दिया गया. खुद इसी सरकार द्वारा पिछले बजट मदों में की गई कटौती को सुधारने को ही वृद्धि करार दे दिया गया. लेकिन कुल बजट के प्रतिशत में देखें तो 2014-15 की तुलना में 0.31 प्रतिशत कम ही है, क्योंकि 2014-15 में कुल बजट केवल 17 लाख 94 हजार 891.96 करोड़ रुपये का ही था, जबकि इस वर्ष का कुल बजट 21 लाख 46 हजार 734.78 करोड़ रुपया है.

आइए मोदी सरकार के इस दावे की भी थोड़ी जांच कर ली जाए क्या उसने सचमुच में अपने पिछले बजट (2016-17) में अनुसूचित जातियों के लिए आंवटित धनराशि (38,833 करोड़ रूपये) इस बार के बजट (2017-18) में वृद्धि (52,393 करोड़ रूपए) का जो दावा कर रही है, वह दावा कितना खोखला है और तथ्यों की बाजीगरी का क्या खेल खेला गया है. यह एक स्थापित सिद्धांत रहा है कि उन्हीं आंवटनों को अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आवंटन मान जायेगा, जो विशेष तौर पर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए लक्षित होगा, सामान्य योजनाओं और गैर-लक्षित योजनाओं को इसमें शामिल नहीं किया जायेगा. मोदी चालाकी यह रही कि इसी मद में विशेष तौर पर इन समुदायों के लिए लक्षित और सामान्य और गैर लक्षित योजनाओं को इसमें शामिल कर दिया. इसका परिणाम हुआ कि यह धनराशि बढ़ी हुई दिखी, जबकि वास्तविकता यह है कि अनुसूचित जातियों के लिए विशेष तौर पर केवल 25,708 करोड़ रूपया और अनुसूचित जनजातियों के लिए 15,643 करोड़ रूपया आवंटित किया गया, जबकि अनुसूचित जनजातियों के मद में 31,920 करोड़ रूपया दिखाया गया था.

आगे के खुलासे में पढ़ेंगे- अनुसूचित जातियों-जनजातियों के कल्याण के विभिन्न मदों में कटौती

संगीत को जनता के बीच लाने वाला पहला रेडियो स्टेशन

पचास के दशक का फ्लैशबैक. आप देख सकते हैं कि लोग फिल्मी गाने सुनने के लिए एक रेडियो के चारों तरफ इकठ्ठा हैं. किसी भी फिल्म के हिट होने के लिए अच्छा संगीत एक अनिवार्यता थी और गायकों, संगीतकारों के नाम घर-घर में पहचाने जाते थे. भले ही आपको यकीन ना हो लेकिन उन दिनों ऑल इंडिया रेडियो पर बॉलीवुड का संगीत बैन था और इस कारण रेडियो सीलोन की हिंदी सेवा भारत में बहुत हिट थी. रेडियो सीलोन पर आने वाले अमीन सायानी द्वारा प्रस्तुत ‘बिनाका गीतमाला’ और सुनील दत्त द्वारा ‘लिप्टन के सितारे’ जैसे कार्यक्रम रेडियो पर राज करते थे. ‘बिनाका गीतमाला’ 1988 से विविध भारती पर प्रसारित होने लगा.

इसी पृष्ठभूमि पर ऑल इंडिया रेडियो ने 3 अक्टूबर 1957 को विविध भारती लॉन्च किया था. यह एक ऐसा रेडियो स्टेशन था जो मनोरंजन के लिए बना था. यहां फिल्मी गाने, एकांकी, छोटे नाटक और संवादात्मक कार्यक्रम प्रसारित होते थे. कुछ पुराने संगीत कार्यक्रम जिन्हें संगीतप्रेमी आज भी याद करते हैं वो थे संगीत सरिता, भूले बिसरे गीत, जयमाला, इनसे मिलिए, छायागीत इत्यादि.

यह सभी कार्यक्रम मुंबई के बोरीवली में बनाए जाते थे और फिर इन्हें सैटेलाइट के जरिए पूरे देश में प्रसारित किया जाता था. पहले इस सेवा में कोई विज्ञापन नहीं थे लेकिन 1967 में इसमें विज्ञापनों को भी जगह मिली. समय के साथ विविध भारती हर संगीतप्रेमी की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बना गया. समय के साथ विविध भारती भी बदला है और इसने 2015 में FM चैनल लॉन्च कर दिया साथ ही उन्होंने मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट भी लॉन्च की है.

गेस्ट टीचर बिल पर आमने-सामने हुए दिल्ली के गवर्नर और मुख्यमंत्री

bejal vs kejriwal

नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर उनसे अतिथि शिक्षकों की नौकरी पक्की करने से संबंधित विधेयक बुधवार को विधानसभा में पेश करने के मंत्रिमंडल के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया.

बैजल ने पत्र में केजरीवाल से कहा कि यह विधेयक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र के शासन की संवैधानिक योजना के अनुरुप नहीं है. आपको बता दें कि पिछले महीने मंत्रिमंडल से मंजूरी पाये इस विधेयक में करीब 15000 अतिथि शिक्षकों की नौकरी पक्की करने की व्यवस्था की गयी है. ये शिक्षक फिलहाल अनुबंध पर हैं.

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच गेस्ट टीचर्स के मामले को लेकर आपसी नोंक-झोक जारी है. जहां दिल्ली सरकार गेस्ट टीचर्स को परमानेंट करने के लिए विधानसभा में बिल पेश करने की तैयारी में है, वहीं उपराज्यपाल ने इस बिल को असंवैधानिक बताया है.

बीते सप्ताह केजरीवाल की कैबिनेट ने बिल का मसौदा तैयार किया था. जिसके बाद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बताया था कि दिल्ली सरकार 4 अक्टूबर को विधानसभा में ये बिल पेश किया जाएगा जिसके लागू होने के बाद सभी गेस्ट टीचर्स को स्थायी कर दिया जाएगा.

बिल पेश होने के एक दिन पहले ही मंगलवार शाम उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अपने एक बयान में कहा कि गेस्ट टीचर्स को स्थायी करने का मामला दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आता जिससे इस बिल पर सरकार के पुनर्विचार करने की आवश्यकता है.

एलजी के इस बयान के बाद आम आदमी पार्टी के मंत्री गोपाल राय ने काह कि नए शिक्षकों की भर्ती के लिए एलजी तैयार हैं. लेकिन गेस्ट टीचर्स को पक्का करने के लिए वो मना कर रहे हैं. गोपाल राय का कहना है कि गेस्ट टीचर्स को बेरोजगार करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है.

मूंछ रखने की वजह से एक और दलित पर हमला

दलित

गांधीनगर। गुजरात में लगातार दलितों पर हमले हो रहे हैं. पिछले पांच दिनों में गुजरात के अलग-अलग जगहों पर तीन दलितों पर हमले हो चुके हैं. तीन अक्टूबर को गांधीनगर के लिंबोदरा गांव में सवर्णों ने दलित किशोर पर चाकू से हमला कर दिया. इसी गांव में दो दिन पहले दरबार जाति के सवर्णों ने दो युवकों की मूंछ रखने के लिए दो दलितों की पिटाई कर दी थी. जिसके बाद सोशल मीडिया पर दलित युवा मूंछों के साथ सेल्फी डाल रहे थे.

हमले के बाद साणंद और उसके आसपास के करीब 300 दलितों ने अपने व्हाट्सऐप की डिस्प्ले पिक्चर पर मूंछ का लोगो लगाया है जिस पर “मिस्टर दलित” लिखा हुआ है और राजमुकुट का चिह्न बना हुआ है. तीन दिन पहले ही आणंद के बोरसाड़ गांव में एक दलित को एक मंदिर में गरबा देखने से नाराज सवर्णों ने पीट-पीट कर मार डाला.

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मंगलवार को हुई घटना गांधीनगर के लिम्बोदरा गांव में शाम को करीब 5.30 बजे हुई. किशोर स्कूल से वापस आ रहा था तभी कुछ लोगों ने उस पर हमला कर दिया. हमले के कुछ देर पहले ही किशोर ने इंडियन एक्सप्रेस से बात की थी और बताया था कि 25 सितंबर को जब 24 वर्षीय दलित युवक पीयूष परमार पर कथित तौर पर सवर्णों द्वारा मूंछ रखने की वजह से हमला हुआ तो वो भी वहां मौजूद था उसे भी मारापीटा गया था. परमार गांधीनगर की एक निजी बिजली आपूर्ति कंपनी में काम करते हैं. हमले के बाद 27 सितंबर को कलोल पुलिस थाने में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न) अधिनियम के तहत पुलिस में एफआईआर दर्ज करायी गयी.

29 सितंबर को कुणाल महरेजा नामक दलित युवक पर मूँछ रखने की वजह से हमला हुआ. कुणाल एक निजी टेलीकॉम कंपनी में काम करता है. मंगलवार को घायल हुए 17 वर्षीय किशोर की बहन काजल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “उसे दर्द हो रहा है. उसे कई टांके लगे हैं. उस पर ब्लेड से हमला किया गया. हमें नहीं पता हमला करने वाले दो लोग कौन थे. वो घर भागते हुए आया. उसके पीठे से खून बह रहा था. हम तुरंत उसे गांधीनगर के सिविल अस्पताल ले गये.”

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काजल ने कहा, “उस पर पहली बार हमला हुआ तो हमने उसका नाम एफआईआर में नहीं दिया क्योंकि वो अभी स्कूल में पढ़ता है और हमें लगा इससे उसका भविष्य प्रभावित होगा. केवल पीयूष और कुणाल महेरिया ने एफआईआर करायी. लेकिन अब तो हद हो गयी. हम अपने गाँव में ही सुरक्षित नहीं हैं.”

गांधीनगर के पुलिस एसपी वीरेंद्र सिंह यादव ने कहा, “हम मामले की पड़ताल कर रहे हैं. हम ये सुनिश्चित करेंगे कि कोई भेदभाव नहीं हो. किशोर पर हमले के लिए आईपीसी की धारा 326 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गयी है.” पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार किशोर पर हमला करने वाले मोटरसाइकिल पर सवार थे और उन्होंने अपना मुंह ढंक रखा था.