कॉलेज में सिंधिया को बुलाने पर दलित प्रिंसिपल सस्पेंड
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने एक सरकारी कॉलेज के दलित प्रिंसिपल बीएल अहिरवार को निलंबित कर दिया. अहिरवार अशोकनगर जिले के मुंगावाली स्थित शासकीय गणेश शंकर विद्यार्थी महाविद्यालय में प्रिंसिपल के पद पर थे. उन्हें इस पद से 11 अक्टूबर को निलंबित किया गया है.
दरअसल, अहिरवार ने राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के एक कार्यक्रम में स्थानीय सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को आमंत्रित किया था. यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को आयोजित हुआ था.
एमपी सरकार ने प्रिंसिपल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कार्यक्रम में राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह बने बैनर लगवाकर एनएसएस का कार्यक्रम करवाया और राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा कर राजनीति दल के बैनर महाविद्यालय के प्रांगण में लगाये.
क्या एक सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र के महाविद्यालय में बुलाना इतना बड़ा अपराध है कि उस महाविधालय के प्राचार्य को निलंबित कर दिया जाए?
— Jyotiraditya Scindia (@JM_Scindia) October 11, 2017
इसके अलावा अहिरवार पर कॉलेज के विद्यार्थियों को पैसों का लालच देकर किसी राजनीतिक दल को वोट देने की सिफारिश करने और शैक्षणिक वातावरण के विरूद्ध गतिविधियां संचालित किये जाने का आरोप है.
इसी बीच, कांग्रेस नेताओं ने अहिरवार के निलंबन का विरोध करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया के ग्वालियर स्थित आवास पर प्रदर्शन भी किया.
गुना के सांसद एवं लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, क्या एक सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र के कॉलेज में बुलाना इतना बड़ा अपराध है कि उस महाविद्यालय के प्राचार्य को निलंबित कर दिया जाए
उन्होंने कहा, मुंगावली डिग्री कॉलेज के दलित प्राचार्य डॉ. अहिरवार को बिना किसी नोटिस या ठोस वजह के सरकार ने निलंबित कर अपनी दलित विरोधी मानसिकता उजागर कर दी. सिंधिया ने कहा कि असंवेदनशील सरकार का यह एक तानाशाहीपूर्ण आदेश है, जो पूर्वाग्रह पूर्ण एवं घोर निंदनीय कृत्य है.
निलंबित प्राचार्य अहिरवार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैंने किसी को बुलाया नहीं था. क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया छात्रों से संवाद करना चाहते थे, इसलिए उन्हें इजाजत दे दी थी. मैं किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा नहीं हूं.
घाना के हाथों हार के साथ भारत का सफर हुआ खत्म
घाना की तरफ से एरिक अयाह (43वें और 52वें मिनट) ने दो जबकि स्थानापन्न रिकार्डो डान्सो (86वें) और इमानुअल टोकु (87वें मिनट) ने एक-एक गोल दागा. मैच के बाद भारतीय खिलाड़ियों विशेषकर धीरज सिंह की आंखों में आंसू थे जिन्होंने मैच में कुछ अच्छे बचाव किये. भारत तीनों मैच हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया. भारत को लगातार तीसरे मैच में हार का सामना करना पड़ा.
पिछले मैच में कोलंबिया के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भारत से उम्मीद बंध गयी थी लेकिन दो बार का चैंपियन घाना उससे खेल के हर क्षेत्र में अव्वल साबित हुआ. घाना ने इस जीत से तीन मैचों में छह अंक के साथ ग्रुप ए में पहले स्थान पर रहकर अंतिम सोलह में पहुंचा. कोलंबिया और अमेरिका के भी छह-छह अंक रहे लेकिन गोल अंतर में वे क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर खिसक गये.
घाना के खिलाड़ी कद काठी में काफी मजबूत थे लेकिन भारतीयों ने फुर्ती और कौशल के मामले में उन्हें शुरू में बराबर की टक्कर दी. खेल आगे बढ़ने के साथ हालांकि अंतर साफ नजर आने लगा और अफ्रीकी टीम का दबदबा बढ़ता गया. जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में मौजूद 52,614 दर्शकों में से अधिकतर ने हर पल भारतीयों का उत्साह बनाये रखा लेकिन दर्शकों का जोश मैदान का अंतर नहीं पाट पाया. पिछले मैच में गोल करने वाले जैकसन कल पूरी तरह निष्प्रभावी रहे. गेंद पर 65 प्रतिशत घाना का नियंत्रण रहा.
एरिक की जगह उतरे स्थानापन्न रिकार्डो डान्सो ने आते ही प्रभाव छोड़ा और गैब्रियल लेवल के पास पर गोल ठोक दिया. एक अन्य स्थानापन्न खिलाड़ी इनानुअल टोकु ने इसके एक मिनट बाद खाली गोल में गेंद पहुंचाकर स्कोर 4-0 कर दिया.
अधिक जनधन खाता वाले गांवों को मिलेगी महंगाई से मुक्ति
मुंबई। जिन राज्यों में प्रधानमंत्री जनधन खातों की संख्या अधिक है, उनमें ग्रामीण महंगाई निम्न स्तर पर आ गयी है. यह बात एक रिपोर्ट में सामने आई है. नोटबंदी के बाद से जनधन खातों में तेजी से इजाफा हुआ और अब तक ऐसे 30 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं. इस तरह के खाते वाले दस शीर्ष राज्यों में करीब 23 करोड़ खाते खोले गये हैं, जो कुल जनधन खातों के 75 प्रतिशत हैं. इसमें सर्वाधिक खातों की संख्या उत्तर प्रदेश में है जो 4.7 करोड़ के स्तर पर है. इसके बाद बिहार में 3.2 करोड़ और पश्चिम बंगाल में 2.9 करोड़ जनधन खाते खुले हैं.
करीब 60 प्रतिशत जनधन खाते केवल ग्रामीण इलाकों में ही खुले हैं. एसबीआई की एक रिसर्च रिपोर्ट ईकोरैप में कहा गया है, ‘‘आंकड़े दिखाते हैं कि जिन राज्यों में जनधन खाते अधिक संख्या में खुले हैं, उनमें ग्रामीण महंगाई निम्न स्तर पर है. यह दिखाता है कि अर्थव्यवस्था औपचारिक रूप ले चुकी है.’’ गौरतलब है कि जनधन योजना के अगस्त में तीन साल पूरे हो गए हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने इस योजना को गरीबों के लिए ऐतिहासिक पहल बताया था. उन्होंने कहा था, “जनधन क्रांति गरीबों, दलितों व हाशिए के लोगों को वित्तीय मुख्यधारा में लाने का एक ऐतिहासिक आंदोलन है”. पिछले महीने जनधन के तीन साल पूरे होने पर पीएम ने कहा था, “हमारा प्रयास गरीबों व हाशिए के लोगों के जीवन में गुणात्मक व परिवर्तनकारी बदलाव लाना है, जिसे मजबूती के साथ जारी रखा है.”
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 23 सिंतबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र में संबोधन देते हुए जनधन योजना की तारीफ की थी. उन्होंने कहा, ‘‘जनधन योजना निश्वित रूप से विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशी योजना के तौर पर गिनी जानी चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि कम से कम ऐसे 30 करोड़ भारतीयों के पास आज बैंक खाते हैं जिन्होंने कभी बैंक के दरवाजे को पार नहीं किया था . यह जनसंख्या अमेरिका की जनसंख्या के बराबर है. उन्होंने कहा, ‘‘जाहिर है कि इसे तीन वर्षों में पूरा करना आसान नहीं था लेकिन हमारे बैंकों ने हमारे प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित किये गए इस दूरदर्शी लक्ष्य को हासिल किया. लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि प्रत्येक भारतीय परिवार का एक बैंक खाता होगा.’’ उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि ये खाते ‘जीरो बैलेंस’ पर खोले गए.
BBAU: टॉपर दलित छात्र से विश्वविद्यालय कर रहा है भेदभाव
लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में एक दलित छात्र को टॉप करने के बावजूद भी प्र पहले पहले प्रवेश लेने से रोका गया. हाईकोर्ट के फैसले बाद विश्वविद्यालय ने दाखिला तो दे दिया लेकिन छात्रावास नहीं दे रहा है. छात्र का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनसे भेदभाव कर रहा है.
इस सिलसिले में बसंत कुमार कन्नौजिया ने बीबीएयू प्रशासन को लिखित शिकायत दी है. उन्होंने लिखा कि मैं 100 में 94 अंक ले आकर आया हूं. छात्र का कहना है कि टॉपर अनुसूचितजाति का छात्र है जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन पचा नहीं पा रहा है.
छात्र ने आरोप लगाया कि बीबीएयू ने इसी कारण पहले प्रवेश से रोक लिया था. उसके बाद मैंने प्रवेश के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने बीबीएयू को फटकार लगाते हुए तत्काल रूप से प्रवेश लेने के लिए 19 सितम्बर को आदेश दिया. उसके बाद 22 सितम्बर को दाखिला हुआ लेकिन दलित होने की वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुझे शारीरिक और मानसिक रूप से एक महीने तक परेशान किया.
बसंत का कहना है कि छात्रावास के लिए सोशल वर्क विभाग के प्रो. बीएस भदौरिया और डॉ. वीरेंद्र नाथ दूबे मुझे परेशान कर रहे हैं. जब मैं मिलने जाता हूं तब कहते हैं कि हॉस्टल मिल जायेगा. लेकिन बसंत को अभी तक हॉस्टल नहीं मिला. जबकि छात्रों को हॉस्टल प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर दिया जाता है.
टॉपर अनुसूचितजाति का छात्र छात्रावास के लिए 20 दिन से विश्वविद्यालय प्रशासन के चक्कर लगा रहा है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है. एमफिल कोर्स सेल्फ फाइनेंस होने की वजह से उसे कोई फेलोशिप भी नहीं मिलती है. प्रार्थी के परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय होने की वजह से बाहर कमरा लेकर अध्ययन कार्य करने में असमर्थ है.
पुंछ में पाकिस्तान की फायरिंग में एक जवान शहीद, एक नागरिक की मौत
श्रीनगर। पाकिस्तान ने गुरुवार को कश्मीर के पुंछ जिले में सीजफायर वॉयलेशन किया. पाक सैनिकों ने पुंछ के कृष्णा घाटी सेक्टर में फायरिंग की, जिसमें आर्मी का एक जवान शहीद हो गया. इसके अलावा एक सिविलियन पोर्टर (बोझा ढोने वाला) की भी मौत हुई है.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक डिफेंस मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन ने बताया कि पाकिस्तान की तरफ से सुबह साढ़े 10 बजे एलओसी पर छोटे हथियारों से फायरिंग की गई, जिसका इंडियन आर्मी ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया.
इससे पहले, पाक ने 6 अक्टूबर को राजौरी जिले के बाबा खोरी और अन्य इलाकों में फायरिंग की थी. इस साल सीजफायर वॉयलेशन की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस साल 12 अक्टूबर तक पाकिस्तान ने 505 बार सीजफायर वॉयलेशन किया.
अनंतनाग जिले के मरहामा संगम में गुरुवार को आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर बैंक की एक ब्रांच से 5 लाख 39 हजार रुपए का कैश लूट लिया.
जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में बुधवार सुबह आतंकियों के साथ एनकाउंटर में इंडियन एयरफोर्स की गरुड़ फोर्स के 2 कमांडो शहीद हो गए थे. 2 आतंकी भी मारे गए थे. 1990 में घाटी में आतंकवाद के सिर उठाने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि एनकाउंटर में गरुड़ फोर्स के कमांडो शहीद हुए हैं.
3 साल में कश्मीर में 183 जवान शहीद हुए
पिछले तीन साल में कश्मीर में आतंकी घटनाओं में 183 जवान शहीद हुए हैं. इनके अलावा 62 सिविलियन भी मारे गए. नोएडा के आरटीआई एक्टिविस्ट रंजन तोमर की एक अर्जी पर होम मिनिस्ट्री ने यह जवाब दिया है. यह आंकड़ा मई 2014 से मई 2017 तक का है.
कश्मीर में इस वक्त करीब 275 आतंकवादी एक्टिव हैं. इनमें से 250 तो सिर्फ पीर पंजाल रेंज में हैं. न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है. सूत्रों के मुताबिक 2017 में 291 आतंकियों ने भारत में घुसने की कोशिश की. इनमें से 80 कामयाब हो गए.
इस साल अब तक 150 आतंकी मारे गए
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल 3 अक्टूबर तक कश्मीर में 150 आतंकी मारे जा चुके हैं. यह संख्या इस दशक में सबसे ज्यादा है. इससे पहले 2016 में 150 आतंकी मारे गए थे, लेकिन वो आंकड़ा पूरे साल का था.
सिर्फ दिवस मनाने से खत्म नहीं होंगी बुराइयां और भ्रष्टाचार
भारत परंपराओं और आस्थाओं से भरा देश है. भारत ही नहीं विश्व के विभिन्न देशों की भी अपनी-अपनी मान्यतायें और धार्मिक उत्सव होते हैं. संपूर्ण विश्व भौगौलिक विषमताओं के साथ-साथ धार्मिक भिन्नताओं से भी भरा है. प्रत्येक देश की अपनी अलग मुद्रा और भगवान हैं. मगर मुद्रा और भगवान सबके लिए काम एक समान है. धर्म अौर राजनीति न तो विश्व में एक मुद्रा चाहती हैं और न ही एक मानव समुदाय.
विश्व के सभी धर्म या संप्रदाय अपने-अपने धर्म को श्रेष्ठ और अपने-अपने ईश्वर को श्रेष्ठ समझते हैं. मगर इतिहास के पन्नों पर नजर डाली जाये तो न ही अतीत में और न ही वर्तमान में संसार का काई भी मुल्क शांति से नहीं जी पा रहा है, और न ही वहां के लोगों की परेशानियां कम हो रही हैं. धर्म या संप्रदाय और रहन-सहन भिन्न-भिन्न होते हुए भी समाज की समस्यायें एक समान हैं. भारत के परिप्रेक्ष्य में देखा जाये तो समस्याओं की लंबी लिस्ट है जिसका फीता बनाया जाये तो कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक नापा जा सकता है. त्यौहारों की तरह यहां विभिन्न प्रकार के दिवसों को भी मनाया जाता है.
कुछ दिन पहले ही 2 अक्टूबर को हमारे देश में महात्मा गांधी तथा लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई गयी. ये गर्व का विषय है कि 2 अक्टूबर 2007 से यूनेस्को ने गांधी के जन्म दिन को “विश्व अहिंसा दिवस” के रूप में मनाने का ऐलान किया. मगर अफसोस इसी दिन अमेरिका में बड़ी हिंसा की घटना घटित होती है. भारत में जम्मू कश्मीर में बीएसएफ कैंप पर हमला होता है. और देश में कई हिंसक घटनायें होती है. इतना ही नहीं हैरानी तब हुई जब गुजरात से समाचार आता है कि गरबा देखने पर दलितों को मार दिया गया? तो इस दशहरे से हम क्या संदेश देश ओर समाज को देना चाहते हैं. वशुधैव कुटम्बकम को तो छोड़ दिया जाये यहां भारतैव कुटम्बकम की भावना का भी अभाव प्रकट होता है.
इस सच्चाई को भी अब देश के धर्म गुरूओं, मौलवियों, शंकराचार्यों के साथ-साथ भारत को विश्व गुरू बनाने में लगे देश प्रेमियों को गंभीरता से समझने की जरूरत है कि क्यों नहीं अभी तक तीज त्यौहारों, ईद, होली, मोहर्रम, दशहरे द्धारा सदियों से भाईचारा बडा़ है और न ही देश से बुराई और कुरीतियों का खात्मा हुआ है. ये कड़वा सच ही होगा कि ये कहा जाये कि महंगाई की तर्ज पर देश में नफरत और दहशतगर्दी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जो अवश्य ही देश की अखंडता और भाईचारे के लिए शुभ संकेत नहीं हैं.
राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रकार के दिवस मनाये जाते है. जनजागरूकता के लिए, असाध्य रोगों और बिमारियों के निवारण के लिए, विश्व शांति के लिए, मानव अधिकारों की रक्षा के लिए और गरीबों, महिलाओं के उत्थान और बराबरी आदि के लिए. कुछ दिवस तो ऐसे हैं उनकी भयानकता तो याद रहती है मगर व्यवहार में परिलक्षित नहीं होना दुख का विषय है जैसे- 1 दिसंबर एड्स दिवस,10 दिसंबर मानव अधिकार दिवस, 8 मार्च अंतराष्ट्रीय महिला दिवस, 1 मई मजदूर दिवस, 31 मई विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 16 सितंबर ओजोन संरक्षण दिवस आदि के साथ-साथ विश्व जल दिवस, पृथ्वी दिवस भी मनाया जाता है, न एड्स से ही मुक्ति मिली है, न ही मानव अधिकारों की रक्षा हुई हैं, महिलाओं पर तो पेट्रोल की कीमत की तर्ज पर अत्याचार बढ़ते जा रहे है. पर्वो से लेकर प्रेम दिवस, मदर्स डे, फादर्स डे तक, बिमारी से लेकर महापुरूषों तक और बुराई पर अच्छाई की विजय से लेकर किसान दिवस तक हमारे देश में धूम-धाम से मनाये जाते है.
मगर आंकडे़ कुछ और ही बयां करते हैं. नेताओं ने गरीबी हटाओ का नारा दिया मगर 70 साल तक गरीब और दलित राजनीति के ही विषय वस्तु बनकर रह गये हैं. ‘जय जवान जय किसान’ का नारा जोश तो भरने में अच्छा लगता है मगर जवान और किसान की जिंदगी दिन-प्रतिदिन मौत का कुंआ बनकर रह गयी है. हर चीज को राजनीतिक लाभ के लिए प्रयोग किया जाये तो परिणाम सकारात्मक नहीं हो सकते हैं. तमाम प्रकार के दिवसों के अनुकूल परिणाम हासिल नहीं होते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी द्धारा नोटबंदी के एक साल पूर्ण होने पर 8 नवंबर को भ्रष्टाचार मुक्ति दिवस मनाने का ऐलान 4 अक्टूबर को विज्ञान भवन से किया है.
कितना भ्रष्टाचार कम हुआ या खत्म हो जायेगा ये तो हर वर्ष 8 नवंबर को भ्रष्टाचार मुक्त दिवस के अवसर पर ही पता चल पायेगा अन्यथा लगता नहीं कि दिवसों को मनाने से भ्रष्टाचार खत्म हो पायेगा या बुराइयां ही खत्म हो जायेंगी. आम नागरिक और देश की जनता को खुद परिवर्तन के लिए तैयार करना होगा वरना दिवसों का सिर्फ कड़ुवा इतिहास ही दोहराया जाता रहेगा.
यह लेख आई.पी. ह्यूमेन ने लिखा है.रणवीर सेना के कार्यकर्ताओं ने पांच दलित महिलाओं से किया बलात्कार
पटना। नीतीश कुमार के सुशासन राज में दलितों पर लगातार अत्याचार जारी है. बिहार में आए दिन दलितों के साथ भेदभाव और मारपीट की घटनाएं सामने आती रहती है. 9 अक्टूबर को भी बिहार के आरा में पांच दलित महिलाओं के साथ बलात्कार होने की घटना सामने आई है. जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है.
दरअसल, आरा के डुमरिया गांव की कबाड़ बीनने वाली पांच दलित महिलाएं कबाड़ बेचने कुरमुरी गांव गईं थी लेकिन रात होने की वजह से ये पांचों युवतियां गांव में ही रुक गईं. तभी रणवीर सेना का पूर्व एरिया कमांडर अपने साथियों के साथ आ धमका और बंदूक की नोंक पर इन सभी को एक दुकान में ले गया. जहां उसने और अपने साथियों के साथ मिलकर इन पांचों के साथ बारी-बारी से बलात्कार किया.
जब पीड़ित युवतियां पुलिस के पास शिकायत करने पहुंचीं तो उन्होंने इनका मेडिकल चेक भी नहीं कराया. जब मामला मीडिया के संज्ञान में आया तो राज्य में तूफान मच गया. कई राजनातिक संगठन पीड़िताओं के समर्थन में आ गए और आरा जिले में राज्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे. आरजेडी नेताओं ने भी पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया और आरोपियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की.
10वीं पास के लिए BHEL ने निकाली बंपर भर्तियां, जल्द करें अप्लाई
Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL) ने कई पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी कर आवेदन आमंत्रित किए हैं. आवेदन से जुड़ी जानकारियां नीचे दी गई हैं.
संस्थान का नाम
Bharat Heavy Electricals Limited (BHEL)
पदों के नाम
BHEL की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में जिन पदों पर आवेदन मांगे गए हैं, उनमें फिटर, वेल्डर (जी एंड ई), टर्नर, मशीनिस्ट, इलेक्ट्रीशियन, मोटर मैकेनिक, प्लंबर, बढ़ई, ड्राफ्ट्समैन (मैकेनिकल) प्रोग्रामर और सिस्टम प्रशासन सहायक, एमएलटी पैथोलॉजी के पद शामिल हैं.
पदों की संख्या
नोटिफिकेशन के मुताबिक कुल पदों की संख्या 554 है.
योग्यता
इन सभी पदों के लिए किसी भी उम्मीदवार को 10वीं पास होना जरूरी है. इसके अलावा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ITI पास होना भी अनिवार्य है. अपनी योग्यता या फिर अपने ट्रेड के मुताबिक किसी भी पद के लिए उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.
उम्र सीमा
इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 27 साल होनी चाहिए.
अंतिम तिथि
18 अक्टूबर 2017
कैसे करें आवेदन
आवेदन करने वाले उम्मीदवार सबसे पहले BHEL की आधिकारिक वेबसाइट www.bheltry.co.in पर जाकर नोटिफिकेशन पढ़ लें. इसके बाद अपनी योग्यता अनुसार किसी पद के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरा करें. आवेदन के बाद एक प्रिंट आउट कॉपी अपने पास संभाल कर रख लें दिल्ली में होगा आशीष नेहरा का फेयरवेल मैच
नई दिल्ली। टीम इंडिया के बाएं हाथ के दिग्गज तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने आज घोषणा की है कि वह न्यूजीलैंड के खिलाफ एक नवंबर को होने वाले टी-20 मैच के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगे. साथ ही उनके होम ग्राऊंड दिल्ली में खेले जाने वाला यह मैच उनका विदाई मैच होगा.
नेहरा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी और निर्णायक टी-20 मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘ऐसे में रिटायर होना अच्छा लगता है जब लोग ‘क्यो नहीं’ से ज्यादा ‘क्यो’ सवाल पूछते हैं. मैने टीम मैनेजमेंट और चीफ सेलेक्टर एमएसके प्रसाद से बात की है. मेरे लिए घरेलू दर्शकों के सामने खेल को अलविदा कहने से बढ़कर कुछ नहीं होगा.
नेहरा ने कहा, ‘ दिल्ली के फिरोजशाह कोटला के मैदान पर ही 20 साल पहले मैंने अपना पहला रणजी मैच खेला था. मैं हमेशा कामयाबी के साथ संन्यास लेना चाहता था. मुझे लगता है कि यह सही समय है और मेरे फैसले का स्वागत किया गया है.’ 38 साल के नेहरा ने हेड कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली को इस फैसले की जानकारी दे दी है. भारत और न्यूजीलैंड 22 अक्टूबर से तीन मैचों की वनडे और तीन टी-20 मैचों की सीरीज खेलेगा.
इसके बाद 2018 में कोई टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं होना है. नेहरा ने कहा कि अच्छा प्रदर्शन कर रहे युवाओं को ही और मौके दिए जाना सही होगा. उन्होंने यह भी कहा कि वह अब आईपीएल भी नहीं खेलेंगे. भारत के लिए 1999 में पहला मैच खेलने वाले नेहरा 117 टेस्ट, 120 वनडे और 26 टी20 मैच खेल चुके हैं. उन्होंने 44 टेस्ट, 157 वनडे और 34 टी-20 विकेट लिए हैं. उन्हें डरबन में 2003 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन देकर छह विकेट लेने के लिए याद रखा जाएगा.
सलमान-जुबैर का चौंकाने वाला खुलासा: फोन रिकॉर्डिंग लीक
मुंबई। बिग बॅास 11 के सीजन का भले ही अंत हो . लेकिन ऐसा लगता नहीं है कि सलमान खान और जुबैर खान के बीच की कंट्रोवर्सी अब कभी नहीं थम पायेगी. जी हां, एक बार फिर जुबैर खान के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है. जिसका फोन रिकॉर्डिंग सामने आया है. इस कॅाल का खुलासा अजाज खान ने किया है. यह वही अजाज खान हैं जिन्होंने जुबैर की फिल्म लकीर के फकीर में लीड भूमिका निभाई थी. यह भी कहा जा सकता है कि इस कॅाल में अजाज ने जुबैर का भांडा फोड़ दिया है. इस कॅाल में जुबैर ने कहा है कि अजाज भाई मैंने आपके खिलाफ कुछ भी नहीं बोला.
Lol pic.twitter.com/Xjfs8gDxOh
— Ajaz Khan (@AjazkhanActor) October 10, 2017
मैंने तो सिर्फ इतना ही कहा कि अजाज ने मेरी फिल्म में बतौर लीड काम किया है और तू(सलमान खान) इतने बड़े राइटर का बेटा होने के बावजूद अपनी पहली फिल्म में पैरलल रोल में नजर आया है. सलमान ने मुझे धमकी दी. अगर मैं सुसाइड नहीं करता तो मुझे निकलने नहीं दिया जाता. मुझे गाली देने के लिए कहा गया. दूसरे की इज्जत उतार कर पैसे कमाए जा रहे हैं. दिन में दो बार गाली देना है. लड़ने के लिए कहा जाता है. ये सब टीआरपी के लिए होता है. दिमाग से खेलूंगा. सलमान खान ने मेरे दिल से खेला. मैं अब उसके दिमाग से खेलूंगा. अब देखें वो ऐड़ा पठान क्या करता है. उसे जो करना है कर ले.
सलमान के कारण सुसाइड मुझे प्राइवेट अस्पताल में लेकर गए. लेकिन जो सुसाइड करता है उसे सरकारी अस्पताल में लेकर जाना चाहिए था. लेकिन मेरे साथ गलत किया गया है. सलमान के खिलाफ केस फाइल हो. भाई का चमचा मैं सलमान को बोलता हूं. तेरे को ऊपर से फोन आया तेरी फटी है. तू वहां का खास है. तू तमचा है. हम गद्दारों के साथ नहीं है. मुझे भारतीय सरकार पर भरोसा है. मैं देशभक्त हूं. सलमान के बच्चे मैं एक शो के जरिए बोलना चाहता था. अपने बच्चों को बुलाना चाहता था. सलमान को क्या पता बच्चों के बारे में. वो कौन होता है मुझे कुछ भी बोलने वाला. तू शर्ट उतार कर नाचता है तो तुझे कोई रोकने नहीं आता है. फिर मुझे क्यों बोल रहा है. तू क्या करता है सब पता है. Being Human से तू क्या करता है सब पता है. तुन कार एक्सीडेंट के बाद अपनी बेड बॅाए की इमेज सुधारा है. वरना तू क्या है ये जुबेर को अच्छे से पता है.
वंचितों की व्यापक बराबरी का सवाल
आज की राजनीतिक गोलबंदी एवं सत्ता की राजनीति के केंद्रीय शब्द हैं ‘अस्मिता की चाह और ‘विकास. जब ‘अस्मिता की चाह पर चर्चा होती है तो सामाजिक एवं राजनीतिक अस्मिता की बात होती है, परंतु किसी भी सामाजिक समूह के ‘अस्मिता निर्माण की प्रक्रिया में ‘धर्म की क्या भूमिका होती है, इस पर हम न तो संवेदनशील हैं और न ही सजग. जब भी राजनीतिक दल दलित, वनवासी एवं वंचित समूहों की अस्मिता को समझकर उस पर अपनी राजनीतिक कार्ययोजना बनाना चाहते हैं तो उसमें उनके भीतर बैठी ‘धार्मिक सम्मान की चाह को नजरअंदाज कर देते हैं. दलित एवं उपेक्षित सामाजिक समूहों पर शोध करते हुए हमने पाया है कि उनमें ‘धार्मिक अस्मिता एवं सम्मान की चाह सामाजिक सम्मान की चाह में ही अंतर्निहित है. उनके लिए समाज में सम्मान का मतलब धार्मिक स्पेस में बराबर हिस्सेदारी भी है. ऐसा नहीं है कि धार्मिक स्पेस की चाह आज जगी है और पहले नहीं थी, बल्कि यह तब से ही पैदा हुई जबसे उनमें अस्पृश्यता के एहसास का उद्भव हुआ. अस्पृश्यता से मुक्ति का संबंध उनके लिए रोटी-पानी एवं हिंदू धर्म में बराबरी की चाह से ही जुड़ा रहा है. शायद इसीलिए डॉ. आंबेडकर ने महाड़ सत्याग्र्रह एवं मंदिरों में प्रवेश जैसे आंदोलन शुरू किए थे. न केवल आंबेडकर ने, बल्कि आर्य समाज एवं आज के अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलनों ने भी दलितों के लिए मंदिर प्रवेश जैसे आंदोलनों की वकालत की. इसी क्रम में कुछ समय पहले तरुण विजय के नेतृत्व ने उत्तराखंड के एक मंदिर में दलित प्रवेश आंदोलन को भी देखा जा सकता है.
1920 के आसपास स्वामी अछूतानंद का आदि हिंदू आंदोलन दलितों को धार्मिक अस्मिता प्रदान करने का ही प्रयास था. हमें यह समझना होगा कि ऐसे समूहों को रोटी के साथ ही धार्मिक स्पेस भी चाहिए. ऐसा धार्मिक स्पेस जहां उन्हें बराबरी का एहसास हो, दैनंदिन जीवन के संघर्षों और टकराहट को झेलने के लिए आध्यात्मिक एहसास तो हो ही, बराबरी पर टिके हुए ऐसे भाईचारे का भी एहसास हो जो उन्हें दैनंदिन जीवन एवं समाज में नहीं दिखाई पड़ता. उन्हें ऐसे धार्मिक स्पेस की जरूरत है, जहां वे अपने दुखों से उबरने की कामना करते हुए अपने देवता के समक्ष रो सकें. कितना दुर्भाग्य है कि हमने समाज में उन्हें ‘रोने का स्पेस भी नहीं दिया.
जो मार्क्स धर्म को जनता का ‘अफीम कहते हैं, वे ही यह भी कहते हैं कि धर्म ‘दुखी हृदय की आर्त पुकार है. अगर कभी आप बनारस में लगने वाले रविदास मेले में जाएं तो रविदास की मूर्ति के सामने लाइन में लगे तमाम महिलाएं-पुरुष अश्रुपूर्ण नेत्रों से रविदासजी की मूर्ति पर सिक्कों से लेकर सोना फेंकते दिखाई देंगे. दलितों में जो समूह आर्थिक रूप से मजबूत भी हो गया है, उन्हें भी धार्मिक स्पेस एवं सम्मान की चाह है. रविदास मेले में आपको रोटी-प्याज खाते गरीब के साथ-साथ कोट-टाई पहने ऑस्ट्रेलिया के एनआरआई भी खासी तादाद में मिल जाएंगे.
कबीर पंथ, रविदास पंथ, शिवनारायण पंथ ऐसे ही ‘धार्मिक स्पेस हैं, जिन्हें उपेक्षित समूहों ने अपने ‘दुख की पुकार के लिए, बराबरी की चाह एवं सामाजिक सम्मान की आकांक्षा से विकसित किया है. दलितों में छिपी इसी चाह को समझते हुए कांशीराम और मायावती ने दलित जनता को अपने साथ जोड़ने के लिए दलित समूहों के संतों और गुरुओं को सम्मान देने की रणनीति पर लंबे समय तक कार्य किया. कबीर, रविदास जैसे संतों की मूर्तियां बनवाईं और उनके ‘स्मृति स्थल विकसित किए. शायद इतना स्पेस भी दलित समाज के लिए काफी नहीं था. उन्हें और अधिक स्पेस चाहिए था. उन्हें हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के भी मंदिर चाहिए. जो आर्थिक रूप से थोड़े मजबूत हैं, उन्हें धार्मिक तीर्थों और धार्मिक उत्सवों को खुलकर मनाने की भी छूट चाहिए. उनमें से अनेक ने बौद्ध धर्म को अपने धार्मिक स्पेस के रूप में अपने लिए आविष्कृत किया ही है. साथ ही गांवों में रहने वाले तमाम दलितों को ‘अपने कुलदेवता पूजने की भी छूट चाहिए. पहले जहां खेतों-बागों में पीपल के पेड़ के नीचे मिट्टी के चबूतरे पर मूर्ति रखकर पूजा की जाती थी, वहां अब छोटे मंदिर विकसित होने लगे हैं. जैसे-जैसे गांवों में दलित-वंचित समूह आर्थिक रूप से थोड़ा बेहतर होता जा रहा है, वैसे-वैसे उन्हें भव्य मंदिर भी चाहिए. शायद इसी भाव की अभिव्यक्ति उनमें विकसित हो रही ‘मंदिर की चाह में प्रस्फुटित होती है.
जयापुरा बनारस के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गोद लिया गांव है. वहां मुसहर जाति की एक बस्ती है, जिसका नाम ‘अटलनगर रखा गया है. उसके प्रवेश पर ही पेड़ के पास एक छोटा मंदिर बनाया गया है जिसमें ‘शिवजी के साथ ‘शबरी माता की एक छोटी मूर्ति लगाई गई है. गांव में मुहसर जाति के लोग बहुत दिनों से चाह रहे थे कि, ‘काश उनके लिए शबरी माता का मंदिर होता, लेकिन उनके पास ‘शबरी माता का एक छोटा मंदिर बनाने की न तो आर्थिक शक्ति है और न ही सामाजिक ताकत. आज वे इस मंदिर के बन जाने से बहुत खुश हैं और गर्व से कहते हैं कि यहां पचास कोस तक शबरी माता का दूसरा कोई और मंदिर नहीं है. ऐसे ही सपेरा जाति में ‘गोगा पीर का मंदिर बनाने की चाह है जो सांपों के देवता माने जाते हैं, परंतु इस प्रयोजन के लिए उनके पास भी आर्थिक-सामाजिक शक्ति का अभाव है. वे कहते हैं कि अगले चुनाव में नेताओं के समक्ष वे अपनी यह मांग रखेंगे.
देश के विभिन्न् हिस्सों में दलितों की अनेक जातियां हैं और सभी जातियों के अपने-अपने देवता और नायक हैं. इन देवताओं के मंदिर अथवा परिसर विकसित होने से उनमें आत्मसम्मान का भाव तो बढ़ता ही है, उन्हें अपना धार्मिक स्पेस भी मिलता है, जहां वे अपने लोगों के बीच अपने तौर-तरीकों के पूजा-पाठ कर सकते हैं. बिहार में दुसाध जाति एक प्रभावी दलित जाति है. उनकी बस्तियों के पास आपको अनेक देवी-देवताओं के मंदिर तो दिखेंगें ही, वहीं चूहड़मल, सहलेस, राहु एवं गोरेया देव के मंदिर भी मिलेंगे. मैं सिर्फ यह नहीं कहना चाह रहा हूं कि प्रत्येक दलित जाति के जातीय देवताओं के मंदिर हों. मेरा बस इतना कहना है कि अन्य सामाजिक समूहों की तरह दलित एवं वंचित सामाजिक समूहों में भी समाज में धार्मिक स्पेस की चाह रही है और मौजूदा दौर में यह और बढ़ रही है. उन्हें भी धार्मिक बराबरी एवं अपने दुख-दर्द का बयान करने के लिए देवस्थान चाहिए. वे भी हिंदू धर्म के अनेक देवी-देवताओं में जिसे चाहें, उसे पूजने की छूट चाहते हैं. वे अपनी जाति से जुड़े कुलदेवता का भी मंदिर चाहते हैं. कुछ बौद्ध के रूप में रहना चाहते हैं, कुछ रविदासी, कबीरपंथी एवं शिवनारायणी के रूप में अपनी धार्मिक अस्मिता चाहते हैं. कई के जातीय देवता उनकी अस्मिताओं के महत्वपूर्ण प्रतीक चिह्न हैं. उनके लिए सम्मानित जीवन का तात्पर्य रोजी-रोटी की बेहतरी के साथ साथ ‘धार्मिक स्पेस की प्राप्ति भी है और हमें उनकी यह आकांक्षा समझनी होगी.
बद्री नारायण का यह लेख नई दुनिया से साभार है. लेखक प्राध्यापक एवं समाज विज्ञानी हैं.
तलवार दंपति हुए रिहा तो असली कातिल कौन?

इलाहाबाद। आरुषि-हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने डॉ. राजेश तलवार और नूपुर तलवार को बरी कर दिया है. कोर्ट का मानना है कि जांच में कई तरह की खामियां है और सबूतों का आभाव है. तलवार दंपति ने सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी. 26 नवंबर, 2013 को उनको सीबीआई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरूषी-हेमराज हत्याकांड में एक नया मोड़ आ गया है. अगर आरूषी-हेमराज की हत्या तलवार दंपति ने नहीं की तो फिर किसने की? इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले को क्या सीबीआई सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी?
डबल मर्डर के चार साल बाद 2012 में आरुषि की मां नूपुर तलवार को कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा और फिर जेल जाना पड़ा. नवंबर 2013 में तमाम जिरह और सबूतों को देखने के बाद सीबीआई कोर्ट ने आरुषि के पिता राजेश और मां नूपुर तलवार को उसकी हत्या के जुर्म का दोषी माना. उनको उम्र कैद की सजा सुना दी गई. इसी के साथ देश की सबसे सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री पर पर्दा गिर गया.
15-16 मई, 2008 की रात को आरुषि का शव नोएडा में अपने घर में बिस्तर पर मिली. इसके बाद एक-एक कर इतनी नाटकीय घटनाएं सामने आईं कि पूरा मामला क्रिसी क्राइम थ्रिलर की फिल्म में बदल गया. इसमें अगले पल क्या होगा ये किसी को पता नहीं था. नोएडा के मशहूर डीपीएस में पढ़ने वाली आरुषि के कत्ल ने पास पड़ोस के लोगों से लेकर पूरे देश को झकझोर दिया था. 23 मई, 2008 को पुलिस ने बेटी की हत्या के आरोप में राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया. लेकिन तब तक मामले में इतने मोड़ आ चुके थे कि मर्डर का ये मामला एक ब्लाइंड केस बन गया.
31 मई, 2008 को आरुषि-हेमराज मर्डर केस की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई. कत्ल के आरोप में डॉक्टर राजेश तलवार सलाखों के पीछे थे. आरुषि केस देश भर में सुर्खियां बना हुआ था. तलवार का नार्को टेस्ट हुआ. शक की सुई तब तक तलवार से हटकर उनके नौकरों और कंपाउंडर तक पहुंच गई थी. तलवार परिवार के करीबी दुर्रानी परिवार का नौकर राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया गया.
इस बीच तलवार 50 दिन जेल में गुजार चुके थे. उन्हें जमानत मिल गई. 2010 में दो साल बाद सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. सुनवाई चलती रही और फिर शक की सुई आरोपों की शक्ल में एक बार फिर तलवार दंपति पर टिक गई. गाजियाबाद कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को सबूत मिटाने का दोषी पाया. दोनों के खिलाफ आरुषि-हेमराज मर्डर केस में शामिल होने के आरोप तय किए गए.
शिक्षा और स्वास्थ्य पर गुजरात में बोले राहुल
छोटा उदयपुर/गुजरात। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को भाजपा सरकार पर हमला करते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सरकार की जिम्मेदारी है. इसमें लगाए गए बजट में लाभ हानि नहीं देखा जाता परंतु भाजपा इस खर्चे को बोझ समझती है. उसने गुजरात में 12000 स्कूल बंद कर दिए. भाजपा सरकार शिक्षा व स्वास्थ्य विभाग को धन कमाने का जरिया बनाना चाहती है. यह देशहित मेें कतई नहीं हो सकता.
राहुल गांधी आदिवासी छात्रों से बात कर रहे थे. इस क्रम में जब एक छात्र ने आधारभूत सुविधाओं की कमी और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया तब राहुल ने कहा, ‘शिक्षा और स्वास्थय विभाग धन कमाने का जरिया बन गया है. जब कांग्रेस की सरकार आएगी तब यह बदल जाएगा.‘ उन्होंने आगे कहा, शिक्षा व्यवस्था का लक्ष्य शिक्षित करना होना चाहिए न कि धन कमाना. गुजरात में करीब 12000 स्कूल बंद हो गए हैं जो संभवत: किसी और राज्य में नहीं हुआ है.
गुजरात में अंतिम कांग्रेस सरकार छाबिलदास मेहता 17 फरवरी 1994 से 13 मार्च 1995 तक रही. उन्होंने भाजपा सरकार पर शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक खर्च न करने का आरोप लगाया. राहुल ने कहा, ‘शिक्षा सबके लिए होनी चाहिए और इसलिए शिक्षा विभाग में सरकारी निवेश आवश्यक है. और यह काम कांग्रेस करेगी.‘ जब एक छात्र ने बिजली की कमी का मुद्दा उठाया तब राहुल ने कहा, ‘आप गलत व्यक्ति से पूछ रहे हैं, यह सवाल प्रधानमंत्री और गुजरात के मुख्यमंत्री से करना चाहिए.‘ कांग्रेस नेता राहुल ने कहा कि ऐसी सोच है कि आदिवासी देश को कुछ नहीं दे सकते लेकिन यह पूरी तरह गलत है. वे काफी कुछ सीखा सकते हैं जैसे रहने का ढंग और पर्यावरण संरक्षण आदि.‘
महिला सुरक्षा पर सवाल के जवाब में राहुल ने गुजरात सरकार का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘आपकी सरकार की मार्केटिंग में कहा जा रहा है छात्रों समेत सब खुश है और यहां कमियां ही कमियां दिख रही हैं.
अब मोबाइल में होगा आधार….
नई दिल्ली। अब आपको आधार कार्ड हमेशा अपने पास रखने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी. क्योंकि सरकार ने एम आधार एप को अपडेट कर दिया है. आईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडेय के मुताबिक सेल्फ सर्विस अपडेट पोर्टल में टीओटीपी को जोड़ा दिया गया है. जिसके बाद आप अपने आधार कार्ड को फोन में रख सकते हैं. एम आधार की ये सुविधा अभी आपको एंड्राइड फोन पर ही मिलेगी.
दरअसल, एप के बीटा वर्जन में डेमोग्राफिक डाटा उपलब्ध रहता है. जिससे आधार कार्ड में जो जानकारी होती हैं, वो मोबाइल पर दिख जाती हैं. इसके अलावा अब फिक्स टाइम के अंदर ओटीपी के डाउनलोड होने का इंतजार नहीं करना होगा. ये ओटीपी मोबाइल पर हमेशा मौजूद रहेगा. इसके लिए मोबाइल नेटवर्क की भी जरुरत नहीं होगी.
आपको बता दें कि केन्द्र सरकार लगभग सभी जगहों पर आधार कार्ड को अनिवार्य बनाता जा रहा है. अब रेलवे ने भी आठ सितंबर से एम आधार को वैध पहचान पत्र के रुप में दर्जा दे दिया है. दूसरी तरफ हरियाणा सरकार भी सभी लोगों को 31 अक्टूबर से पहले अपना आधार नंबर पैंशन आईडी से लिंक करवा लेने को कहा है. ऐसा न करवाने पर इनका नाम पेंशन सूची से काट दिया जाएगा. जिसके बाद भविष्य में इन्हें संबंधित विभाग की तरफ से कभी भी पेंशन नहीं मिल पाएगी.
दलितों-आदिवासियों को मिलने वाली योजना का लाभ हड़प रहे हैं नौकरशाह और ग्राम प्रधान
रीवा। राष्ट्रीय दलित महासभा के कार्यकर्ताओं ने रीवा जिले के तहसील कार्यालय नईगढ़ी का घेराव और विरोध प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं में शासन की योजनाओं का लाभ दलितों को न मिलने पर निराशा है. दलित महासभा ने प्रदर्शन से पहले प्रशासन और सरकार के विरोध में रैली निकाली.
दलित महासभा ने कहा कि दलितों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. नौकरशाह उनका हक और अधिकार हड़प रहे हैं, इस पर रोक लगनी चाहिए. महासभा का कहना है कि सैकड़ों सालों से उनका जहां पर घर बना है वहां का पट्टा नहीं दिया जा रहा है.
एक कार्यकर्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है. उनके उत्थान के लिए जो भी पैसा आ रहा है उसे पंचायतों द्वारा हजम कर लिया जाता है. गरीब होने के बाद भी गरीबी रेखा में नाम नहीं जोड़ा जा रहा है. कार्यकर्ता का कहना है कि वे जहां रहते हैं उस जमीन का उनको तत्काल पट्टा दिया जाए.
दलित महासभा की के विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों गांव की आदिवासी महिलाएं भी आईं. आदिवासी महिलाओं ने बताया कि उनका पुश्तैनी कच्चा मकान बना हुआ है, लेकिन सरकार ने आज तक उनको पट्टा नहीं दिया है. सरपंच लोग भेदभाव कर रहे हैं. गरीबी रेखा में नाम तक नहीं जोड़ा जा रहा है. जिससे योजनाओं से हम वंचित हैं. हमारी मांगों पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है.
महिला शौचालय में घुसे राहुल गांधी…
छोटा उदयपुर। राहुल गांधी का एक फोटो वायरल हो रहा है. इस फोटो में राहुल गांधी महिला शौचालय से बाहर निकलते दिखे. जिसे कुछ लोगों ने और मीडिया ने कैप्चर कर लिया. बुधवार को गुजरात के छोटा उदयपुर में राहुल ‘संवाद’ कार्यक्रम के तहत युवाओं से बात कर रहे थे.
कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी टाउन हॉल से निकले थे. उन्हें फ्रेश होने के लिए टॉयलेट जाना था. एक तरफ टॉयलेट्स के दरवाजे पर गुजराती में ‘महिलाओं माटे शौचालय’ यानी महिलाओं के लिए शौचालय’ लिखा था, जबकि दूसरी तरफ पुरुषों के टॉयलेट्स थे.
दोनों टॉयलेट्स में जेन्ट्स-लेडीज के साइन नहीं बने थे. राहुल गांधी गुजराती में लिखा पढ़ नहीं पाए. ऐसे में गलती से लेडीज टॉयलेट्स में जा घुसे.
इस दौरान बाहर खड़े एसपीजी ने मीडिया वालों को यह कहते सुन लिया कि राहुल गांधी लेडीज टॉयलेट में चले गए हैं. एसपीजी अधिकारी कांग्रेस उपाध्यक्ष को रोकने के लिए जा ही रहे थे कि तभी राहुल तेजी से बाहर आ गए.
इसी दौरान कुछ फोटोग्राफर्स ने लेडीज टॉयलेट से निकलती हुई उनकी तस्वीरें खींच ली. इस घटना से राहुल गांधी कुछ असहज नजर आएं.
गौरतलब है कि राहुल गांधी 9-11 अक्टूबर तक गुजरात दौरे पर थे. गुजरात दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कई साभाएं और रैली भी की. इन रेलियों में राहुल गांधी ने गुजरात सरकार और केंद्र सरकार पर निशाना साधा था.
