रिलायंस जियो ने पेश किया दिवाली धन धना धन ऑफर

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नई दिल्ली। टेलिकॉम सेक्टर में कंपनियां यूजर्स की जरुरतों को ध्यान में रखते हुए नए प्लान्स पेश कर रही है. इसी क्रम में रिलायंस जियो ने नए दिवाली धन धना धन ऑफर का ओलान किया है. इसके तहत यूजर्स को 399 रुपये के रीचार्ज पर 100 फीसद का कैशबैक दिया जा रहा है. इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने अपने पोस्टपेड इनफिनिटी प्लान्स में अतिरिक्त लाभ की घोषणा की है.

इस ऑफर का लाभ आज यानी 12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक उठाया जा सकता है. इसके तहत जियो प्राइम यूजर्स को 399 रुपये का पैक लेने पर 50 रुपये के 8 वाउचर यानी 400 रुपये के वाउचर मिलेंगे. इन वाउचर्स को 309 रुपये या इससे ज्यादा के पैस और 91 रुपये से ज्याद के एड-ऑन पैक्स के को रिचार्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. आपको बता दें एक बार में केवल एक ही वाउचर रीडीम किया जा सकता है. इन सभी वाउचर्स का इस्तेमाल यूजर्स 15 नवंबर से पहले तक कर सकते हैं. यूजर्स इसे माइजियो एप, जियो वेबसाइट, जियो स्टोर, रिलायंस डिजिटल लार्ज फॉरमेट स्टोर और कंपनी के पार्टनर ऑफलाइन व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (जियो मनी, पेटीएम, अमेज़न पे और मोबिक्विक) से रीचार्ज करा सकते हैं.

अगर यूजर 399 रुपये का रिचार्ज कराते हैं और इसके साथ 50 रुपये का वाउचर इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें 259 रुपये का पेमेंट करना होगा.

399 रुपये के प्लान में यूजर्स को पहले 1 जीबी डाटा दिया जा रहा था. वहीं, अब इस प्लान के तहत 10 जीबी डाटा प्रति बिलिंग साइकल में दिया जा रहा है. इसी के साथ 499 रुपये के प्लान में 20 जीबी, 649 रुपये के प्लान में 30 जीबी और 799 रुपये के प्लान में 40 जीबी डाटा दिया जा रहा है. 999 रुपये वाले प्लान की बात करें तो इसमें प्रति बिलिंग साइकल 50 जीबी डाटा दिया जा रहा है.

अगर प्रीमियम प्लान्स की बात करें तो 1,199 रुपये के प्लान में 75 जीबी डाटा, 1,599 रुपये के प्लान में 100 जीबी डाटा, 1,999 रुपये प्लान में 125 जीबी डाटा और 2,999 रुपये के प्लान में 200 जीबी डाटा प्रति महीने दिया जा रहा है.

अमिताभ बच्चनः एक सदी के नायक

Amitabh Bachchan

आज अमिताभ बच्चन 75 साल के हो रहे हैं. इसे लेकर फिल्म फिल्म प्रेमियों में भारी हर्ष है. इस अवसर पर भारतीय फिल्म वर्ल्ड उन्हें बधाइयों के सैलाब में डुबो दिया है. इस अवसर पर मैं भी उन्हें जन्म दिन कि बधाई देते हुए, उनके शतायु होने कि कामना करता हूं. मित्रों मैंने भिन्न-भिन्न अवसरों पर अमिताभ बच्चन को लेकर दर्जन से अधिक छोटे बड़े लेख लिखे हैं. उनके प्रति मेरी राय से मेरे नियमित पाठक भलीभांति अवगत भी होंगे. बहरहाल जब भी उन पर कुछ लिखता हूं, तीन बातें मेरे जेहन में जरुर आती हैं.

सबसे पहले मेरे जेहन को जो स्ट्राइक करता है, वह है मारियो पूजो का अति जनप्रिय क्राइम नॉवेल ‘गॉड फादर’, जिस पर इसी नाम से मार्लोन ब्रांडो और अल पचीनो जैसे विश्व विख्यात एक्टरों को लेकर ‘हालीवुड‘ में एक सदाबहार फिल्म भी बनी, जिसका अनुकरण दुनिया के तमाम देशों के फिल्मकारों ने किया. आपमें से ढेरों लोग शायद वह उपन्यास नहीं भी पढ़े होंगे किन्तु वह कालजयी फिल्म जरुर देखे होंगे, ऐसी मेरी धारणा है.

इसी उपन्यास में एक चरित्र, एक फिल्म एक्टर का भी है, जो हॉलीवुड में स्ट्रगल कर रहा है पर, सफलता उससे कोसों दूर है. वह एक्टर गॉड फादर की एक पार्टी में शामिल होता है. जब गॉड फादर से मिलने का अवसर प्राप्त होता है, वह उसके चेहरे पर छाई उदासी का सबब पूछता है. वह अपनी विफलता से अवगत करते हुए फ्लोर पर जाने वाली एक फिल्म का जिक्र करते हुए बताता है कि अगर वह फिल्म मिल जाये तो करियर में उछाल आ जाय. गॉडफादर उसे फिल्म दिलाने का आश्वासन देता है. उसके लोग जब उस फिल्म के निर्माता से उसे लेने का अनुरोध करते हैं, वह विदक जाता है. कई बार समझाने पर भी तैयार नहीं होता, क्योंकि उस एक्टर ने कभी उसकी प्रेमिका को हम विस्तार बना लिया था.

बहरहाल गॉड फादर के लोगों द्वारा कई बार समझाने पर भी जब वह निर्माता उस एक्टर को लेने के लिए तैयार नहीं होता तब उसके लोग, उसके सबसे कीमती रेस के घोड़े का सर काटकर उसके बिस्तर पर रख देते हैं. सुबह जब वह सोकर उठता है, तब घोड़े का कटा सर अपने बगल में देखकर हतप्रभ रह जाता है. वह समझ जाता है कि यह सब गॉड फादर के लोगों कि करतूत है. वह घटना से बुरी तरह डरकर अपनी फिल्म में एक एक्टर को चांस दे देता है. फिल्म सुपर-डुपर हिट होती है. बात यहीं तक नहीं सिमित रहती है, गॉड फादर इस फिल्म के लिए उसे बेस्ट एक्टर का ऑस्कर पुरस्कार भी दिलवा देता है. फिर गॉड फादर का वह कृपा-पात्र एक्टर पीछे मुड़कर नहीं देखता.

अमिताभ बच्चन इस मामले में शायद फिल्म हिस्ट्री के सबसे खुशनसीब एक्टरों में से एक रहे, जिन्हें दुनिया के मारिओ पूजो के गॉड फादर से भी ज्यादा शक्तिशाली इंदिरा गांधी जैसी अतिशक्तिशाली शख्सियत का कृपा-पात्र बनने का अवसर मिला. अगर ऐसे शक्तिशाली राजनितिक परिवार का उन्हें कृपा-लाभ नहीं मिलता, क्या वह अपनी पहली ही फिल्म ‘सात हिन्दुस्तानी’ में एक्टिंग के लिए नेशनल अवार्ड जीत पाते? इस परिवार का कृपा-पात्र होने के कारण ही लगातार आधे दर्जन से अधिक विफल फिल्म देने के बावजूद, बॉलीवुड ने उन्हें किक आउट नहीं किया. परवर्तीकाल में जब इमरजेंसी के दौर में हिंसक दृश्यों पर बेरहमी से कैंची चलायी जाने लगी, अमिताभ बच्चन की फिल्मों को सूचना प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल की टीम ने इससे मुक्त रखा. इमरजेंसी के दौर में इंदिरा सरकार की उदारता के कारण ही एक्शन और हिंसा प्रधान फिल्मों पर उनकी मोनोपोली कायम हुई, जो कालांतर में एंग्री यंगमैन के रूप में उनकी छवि चिरस्थाई करने का सबब बनी.

दूसरी बात जो जेहन में कौंध जाती है, वह है महान एक्शन-एंग्री हीरो क्लिंट ईस्टवुड की फिल्म ‘डर्टी हैरी’. दिसंबर 1971 में रिलीज हुई इस फिल्म ने पूरी दुनिया में दिखाए जाने वाले पुलिस के चरित्र में क्रान्तिकारी बदलाव ला दिया. इस फिल्म में क्लिंट ईस्ट वुड ने ‘हैरी कालाहन’ नामक जिस गुस्सैल पुलिस ऑफिसर का चरित्र निर्वाह किया, उसने पूरी दुनिया में पुलिस नायक के चरित्र में आमूल बदलाव कर दिया. देखते ही देखते कुछ ही वर्षों में दुनिया के विभिन्न देशों की विभीन्न भाषाओँ में हैरी कालाहन भिन्न–भिन्न नामों से परदे पर आ गया. खुद हॉलीवुड में हैरी कालाहन सीरिज की और चार फ़िल्में थोड़े-थोड़े अन्तराल पर आयीं और सभी में हीरो रहे क्लिंट ईस्टवुड.

भारत में हैरी कालाहन का आगमन मई, 1973 में ‘जंजीर’ के जरिये हुआ. पहले इस चरित्र को निभाने के लिए प्रकाश मेहरा ने देवानंद और राजकुमार से संपर्क किया. किन्तु बच्चन के समकालीन शत्रुघ्न सिन्हा के शब्दों में, ‘प्रभु की असीम कृपा या लक फैक्टर‘ अमिताभ के साथ कुछ ज्यादा ही रहा, इसलिए हैरी कालाहन के इन्डियन संस्करण ’विजय’ को परदे पर उतारने का अवसर अमिताभ को मिला और लोगों को पता है, जंजीर ने एक्टर बच्चन के लिए क्या चमत्कार किया. जंजीर की सफलता के बाद अमिताभ बच्चन ने अपनी एक्टिंग में दिलीप कुमार की ‘एक्टिंग स्टाइल’ और लम्बे-पतले क्लिंट ईस्टवुड की ‘ही मैन‘ छवि का इतना शानदार कॉकटेल तैयार किया कि भारतीय फिल्म-प्रेमियों के दिलों पर उनका स्थाई राज हो गया.

तीसरी बात यह कि फिल्मों में खुद तथा अपने परिवार को पूरी तरह रमाने के बावजूद इनमें ‘पे बैक टू द सिनेमा की भावना पैदा न हो सकी, इसलिए वे एक मुकम्मल फ़िल्मकार बनकर फिल्म-वर्ल्ड को ऐसा कुछ न दे सके, जिससे उसकी समृद्धि में कुछ इजाफा होता. फिल्म-दुनिया का इतिहास गवाह है कि सुपर स्टार/एक्टर के रूप में बढ़िया से स्थापित होने के बाद अधिकांश ने ही ऐसी फिल्मों का निर्माण किया जिससे फिल्मोद्योग के मान-सम्मान में भारी इजाफा हुआ.

हिंदी फिल्मों की मशहूर त्रिमूर्ति, राज-दिलीप-देव के साथ गुरुदत्त ने कुछ-कुछ ऐसी चुनिन्दा फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया, जो माइल स्टोन बनीं. इस मामले में राज कपूर और गुरुदत्त तो बेमिसाल रहे. आज राज-दत्त की परम्परा को शानदार तरीके से आगे बढा रहे हैं आमिर खान. इस मामले अमिताभ भारत ही नहीं, दुनिया के दरिद्रतम एक्टरों में से एक हैं. इन्होंने एबीसीएल बैनर तले जिन फिल्मों का निर्माण किया, उनसे बॉलीवुड फिल्मों का सम्मान घटा ही, बढ़ा एक इंच भी नहीं. कमसे कम जिस क्लिंट ईस्ट वुड की ‘ही मैन’ छवि की इन्होने कॉपी कर बहुत कुछ हासिल किया, उनसे तो कुछ प्रेरणा लेनी ही चाहिए थी.

अपने जमाने में पॉपुलरिटी के शिखर को छूने वाले क्लिंट ईस्टवुड एक्टर के रूप में मजबूती से स्थापित होने के बाद फिल्म निर्माण और निर्देशन में कदम रखे और मिलियन डॉलर बेबी सहित कई ऑस्कर विनर फ़िल्में बना कर हालीवुड की इज्जत में इजाफा किया. उन्ही की तरह ‘मैड मैक्स’ सीरिज के एक्शन हीरो मेल गिब्सन ने पैट्रिऑट और पैशन ऑफ़ क्राइस्ट जैसी फिल्मों का निर्माण और निर्देशन कर हालीवुड की बुलंदी में भारी योगदान किया. राज कपूर, गुरुदत, आमिर खान, क्लिंट ईस्ट वुड, मेल गिब्सन जैसे सुपर स्टारों की लम्बी फेहरिस्त है जिन्होंने फिल्मों से नाम यश कमाया तो, कुछ बढ़िया- बढियां फ़िल्में बनाकर अपने-अपने फिल्म वर्ल्ड को धन्य भी किया, नहीं किया तो बच्चन ने. ऐसे में हम अभिताभ बच्चन के 75 साल होने पर दुआ करते हैं कि ‘मुक्कदर का यह सिकंदर’ भी कुछ खास फ़िल्में बनाकर बालीवुड को धन्य करें, ताकि वे सुकून के साथ अपने जीवन के शेष दिन एन्जॉय कर सकें. अगर ऐसा नहीं करते हैं तो शेष जीवन विवेक दंश की पीड़ा झेलते रहेंगे.

बिग बॉस में जुबैर की वापसी संभव, शर्ते लागू

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मुंबई। बिग बॉस शो से बाहर हुए जुबैर खान का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है. जुबैर का गुस्सा होस्ट सलमान खान पर इस कदर फूटा है कि मीडिया के सामने वे सल्लू के खि‍लाफ कई शॉकिंग बयान देते नजर आ रहे हैं. अब खबर आ रही है कि बिग बॉस में उन्हे फिर से बुलाया जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में जुबैर ने कहा है कि अगर बिग बॉस उन्हें वापस बुलाना चाहता है तो उन्हें उनकी एक शर्त माननी होगी. जुबैर ने इंटरव्यू में कहा है कि वे ‘कलर्स के इस ऑफर पर एक ही शर्त पर गौर फरमाएंगें जब सलमान खान खुद उनसे माफी मांगे और स्वीकारे की जो उन्होंने मेरे साथ किया वो गलत था.

आपको बता दें कि सलमान खान ने जुबैर खान को औरतों के साथ बदतमीजी करने के बाद काफी अपशब्द कहा था. जिसके बाद जुबैर की नींद की गोलियां खा लेने की खबर आई थी. बाद में उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा था. जिसके बाद जुबैर ने सलमान को निशाना बनाते हुए कहा था कि सुपरस्टार ने बीईंग ह्यूमन के जरिये अपनी बैड बॉय की इमेज को सुधारने की कोशिश की है. साथ ही उन्होंने सलमान को बॉडीगार्ड के बिना मिलने की चुनौती भी दी थी. जुबैर खान ने सलमान खान के खिलाफ धमकाने की शिकायत थाने में दर्ज कराई थी.

मेट्रो में ऐसे करें सस्ता सफर…

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नई दिल्ली। 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो ने किराया बढ़ा दिया. जिसके बाद से दिल्ली की जनता में निराशा पैदा हो गई. लोग मेट्रो के किराया बढ़ोतरी का विरोध भी कर रहे हैं. लेकिन मेट्रो का किराया बढ़ने के बावजूद भी आप सस्ते में सफर कर सकते हैं.

डीएमआरसी ने कहा है कि जो लोग मेट्रो के ‘नॉन पीक आवर्स’ यानि जब भीड़ कम होती है, उस दौरान सफर करते हैं तो उन्हें 20% की छूट मिलेगी. बता दें कि इससे पहले दिल्ली मेट्रो में सिर्फ उन्ही लोगों को किराए में 10 प्रतिशत छूट मिलती थी जो सिर्फ नॉन पीक आवर्स में मेट्रो स्टेशन में एंट्री और एग्जिट करते थे.

गौरतलब है कि ये डिस्काउंट मेट्रो कार्ड से सफर करने पर मिलाने वाले 10% डिस्काउंट के अलावा दिया जाता है. यानि कुल मिलाकर यात्री को 20 प्रतिशत का डिस्काउंट मिल जाता है.

अब, DMRC के ताजा नियमों के हिसाब से 10% का ये ऐक्स्ट्रा डिस्काउंट उन यात्रियों के लिए भी होगा जो ‘नॉन पीक हावर्स’ में मेट्रो स्टेशन पर एंट्री करते हैं लेकिन पीक आवर्स (ज्यादा भीड़ वाले समय) में स्टेशन से बाहर आते हैं. इसके लिए डीएमआरसी ने कम भीड़ वाले तीन टाइम जोन्स भी बनाए हैं.

ये हैं ‘नॉन पीक आवर्स’ पहला टाइम जोन मेट्रो शुरू होने से लेकर सुबह के 8 बजे तक होता है. दूसरा दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे और तीसरा रात 9 बजे से लेकर मेट्रो बंद होने तक रहेगा. हालांकि दिल्ली मेट्रो ने ये साफ कर दिया है कि पीक आवर्स के समय जो यात्री मेट्रो में एंट्री और एग्जिट करते हैं उन्हें ये छूट नहीं मिलेगी. इसके साथ ही भीड़-भाड़ वाले समय एंट्री करके, नॉन पीक आवर्स में एग्जिट करने वाले लोगों को भी ये अतिरिक्त डिस्काउंट नहीं मिल सकेगा.

देश को बोलने वाला नहीं, काम करने वाला प्रधानमंत्री चाहिएः मायावती

Mayawati

लखनऊ। देश को बोलने वाला नहीं बल्कि काम करने वाला प्रधानमंत्री चाहिए. ये कहना है बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती का. उन्होंने आज लखनऊ में भाजपा पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि देश महंगाई, बेरोजगारी और बदतर शिक्षा की समस्या से घिरा हुआ है. लेकिन पीएम मोदी को इस समस्या से कोई सरोकार नहीं है. उन्हें बोलने के सिवाय और कुछ नहीं आता है.

दरअसल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को यूपी की एक सभा में कहा था कि देश को पहली बार बोलने वाला प्रधानमंत्री मिला है. शाह के इस बयान पर मायावती ने मोदी और शाह दोनों को निशाने पर ले लिया.

मायावती ने यूपी की योगी सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के तर्ज पर ही योगी सरकार भी चल रही है. जिसकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है. बद से बदतर हो रही कानून व्यवस्था पर भी मायावती ने योगी सरकार पर जमकर हमला बोला.

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि आज प्रदेश में चारों तरफ अराजकता का माहौल है. समाज में लोगों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है जो देश के लिए चिंता की बात है. बसपा प्रमुख ने केन्द्र सरकार के साथ साथ योगी सरकार पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष की बातों को दबाने और लोगों की आवाज को दरकिनार करने के लिए मोदी सरकार सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर रही है.

दो साल से बहिष्कार का दंश झेल रहे तीन आदिवासी परिवार

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Social boycott

महासमुंद। ग्राम पड़कीपाली के तीन आदिवासी परिवार विगत 2 साल से बहिष्कार का दंश झेल रहे हैं. गांव में उनसे न कोई बात करता है और न ही दुकान से उन्हें सामान मिलता है. यहां तक कि नाई-धोबी के लिए भी दूसरे गांव पर निर्भर होना पड़ रहा है. इससे परेशान पीड़ित परिवारों ने मानवाधिकार आयोग, थाना समेत जिले के आला अधिकारियों से लिखित शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है.

क्या है मामला पीड़ित शौकीलाल, लखेराम तथा सुकलाल ने शिकायत में बताया कि उसके चाचा भीमसेन से उसका भूमि संबंधित मामला जिला न्यायालय में लंबित है. उसका चाचा केस हार गया था तो उसने ग्राम पड़कीपाली के मुखिया त्रिलोचन, मणिधर व रोहित से मिलीभगत व सांठगांठ करते हुए उनके परिवार को ग्राम से बहिष्कार कर दिया.

नाई-धोबी की भी मनाही शिकायत में पीड़ितों ने बताया कि मुखिया द्वारा किए गए ऐलान के अनुसार आदिवासी परिवार से कोई भी बातचीत नहीं करता और कोई भी रोजी मजदूरी के लिए नहीं बुलाता. उनके घर पर गांव के किसी का भी आना-जाना नहीं है. दुकान वाले उन्हें घरेलू आवश्यकता के सामान नहीं देते हैं.

यहां तक कि नाई-धोबी की भी मनाही कर दी गई है. मुखिया ने यह भी ऐलान किया है कि यदि आदिवासी परिवार से कोई संबंध रखेगा तो उसे पांच हजार रूपए का अर्थदंड दिया जाएगा. यदि कोई व्यक्ति उन परिवार से बातचीत करते हुए किसी को देख लेता और उसकी सूचना देता है तो उसे एक हजार रूपए इनाम देने की भी घोषणा की गई है.

पीड़ित आदिवासियों ने बताया कि मुखिया द्वारा किए गए उक्त ऐलान के बाद उनका गांव में जीना मुश्किल हो गया है. गांव समाज में होते हुए भी एकाकी जीवन जीने के लिए मजबूर हो गए हैं.

नाई की व्यवस्था के लिए उन्हें 3 किलोमीटर दूर के गांव डोंगरीपाली और धोबी की व्यवस्था के लिए गांव रिखादादर व घरेलू आवश्यक सामानों के लिए उन्हें दूर के गांवों में जाना पड़ रहा है. पीड़ित आदिवासियों ने शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ में कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.

सांकरा के थाना प्रभारी कोमल नेताम ने कहा कि शिकायत पर मामले की विवेचना की जा रही है. दो भाइयों के बीच जमीन विवाद चल रहा है. गांव में किसी तरह के बहिष्कार की पुष्टि नहीं हुई.

नई दुनिया से साभार

BSF के चार जवानों पर आदिवासी किशोरी से बलात्कार का आरोप

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कोरापुट। ओडिशा के कोरापुट जिले में बीएसएफ के चार जवानों पर एक नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ बलात्कार का आरोप लगा है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक नाबालिग युवती के भाई ने आरोप लगाया कि मंगलवार को बीएसएफ की वर्दी पहने चार लोगों ने युवती से गैंगरेप किया. उसका कहना है कि ये जवान माओवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता नौवीं कक्षा की छात्रा है. वह कुंडुलिहाटा इलाक़े में अपने आधार कार्ड का पंजीकरण करा के अपने गांव मुसुलीगुड़ा लौट रही थी. बताया जा रहा है कि रिक्शे से उतरने के बाद वह पैदल जा रही थी कि तभी वर्दी पहने लोगों ने उसे रोक लिया.

पीड़िता के भाई का आरोप है कि चार बीएसएफ जवान लड़की को जंगल में ले गए और वहां उसका मुंह बंद कर उसका यौन शोषण किया. उसने यह भी बताया कि उसकी एक रिश्तेदार ने लड़की को बचाया और कोरापुट के ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया. मामला दर्ज कर चुकी पुलिस के मुताबिक लड़की की हालत नाज़ुक है. पुलिस ने आरोपियों के फरार होने की बात भी कही है.

सत्याग्रह के मुताबिक बीएसएफ के डीआईजी जेसी नायक ने घटना में जवानों की भूमिका से इनकार किया है. नायक ने आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि बीएसएफ की कंपनी घटनास्थल से क़रीब 35 किलोमीटर दूर है और बीएसएफ इस इलाक़े में सक्रिय नहीं है. उधर, घटना सामने आने के बाद ग़ुस्साए स्थानीय लोगों ने सड़कों पर जाम लगा दिया. मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस विधायक कृष्ण चंद्र सागरिया के साथ पार्टी के कार्यकर्ता कोरापुट के पुलिस अधीक्षक के कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए हैं.

पटाखों की बिक्री पर लगे बैन के पीछे पनपती राजनीति

नई दिल्ली। दिल्‍ली में पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर विरोध के स्‍वर भी धीरे-धीरे बुलंद हो रहे हैं. इसमे फिलहाल सबसे अहम सवाल यह उठाया जा रहा है कि कहीं यह मात्र एक राजनैतिक खेल का परिदृश्य तो नहीं. त्रिपुरा के गवर्नर तथागत रॉय का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों की बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध में राजनीति शामिल है.

तथागत रॉय ने याचिकाकर्ताओं और ‘पुरस्कार-वापस करने वाले लोगों को विशेष रूप से लक्षित करते हुए कहा, ‘पुरस्कार-वापसी और अन्य लोग जो इस पर याचिका दर्ज करने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी आंखें हमेशा अल्पसंख्यक वोट बैंक की ओर ही रहती हैं. मुझे पक्‍का यकीन है कि इस मुद्दे में राजनीति हो रही है.’

रॉय ने अपने ट्वीट में पटाखों पर प्रतिबंध के बारे में कहा, ‘कभी दही हांडी, आज पटाखा, कल को हो सकता है प्रदूषण का हवाला देकर मोमबत्ती और अवार्ड वापसी गैंग हिंदुओं की चिता जलाने पर भी याचिका डाल दे!’ रॉय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बारे में कुछ नहीं कहा, लेकिन साथ ही कहा कि वह प्रतिबंध से नाखुश हैं.

एक बार फिर आमने-सामने हुए राहुल गांधी और स्मृति ईरानी

rahul vs smriti

नई दिल्ली। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बीच एक बार फिर जुबानी जंग शुरू हो गई है. जहां एक तरफ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मोदी सरकार की बखिया उधेड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ स्मृति ईरानी भी मोर्चा संभाल रही हैं.

दरअसल, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पिछले तीन दिनों से गुजरात दौरे पर हैं. जहां पर वे मोदी सरकार की बखिया उधेड़ रहे हैं. ऐसे में स्मृति ईरानी ने भी अमेठी पहुंचकर राहुल के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है. जहां बीते 3 दिनों में राहुल गांधी गुजरात के अलग-अलग जगहों पर जाकर मोदी को भला बुरा कह रहे हैं तो स्मृति ईरानी भी राहुल पर तंज कसती नहीं थक रही हैं.

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राहुल गांधी आज (11 अक्टूबर) गुजरात के छोटा उदयपुर में हैं. जहां उन्होंने केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि मौजूदा सरकार उद्योगपतियों के लिए है. ग़रीबों को महज सपने ही दिखाए जाते हैं. साथ ही राहुल ने अमित शाह के बेटे जय शाह मामाले पर निशाना साधते हुए कहा कि जय शाह नरेंद्र मोदी के स्टार्टअप इंडिया के स्टार्टअप आइकन हैं. तभी तो भ्रष्टाचार की इजाजत नहीं देंने का दावा करने वाले मोदी जय शाह विवाद पर चुप हैं.

वहीं दूसरी तरफ स्मृति ईरानी ने भी राहुल पर तंज कसते हुए कहा है कि राहुल गांधी के पास अमेठी की जनता के लिए समय नहीं है. जबसे भाजपा नेताओं का अमेठी में आना-जाना बढ़ा है, तब से राहुल भी यहां आने-जाने लगे हैं. साथ ही स्मृति ने कहा कि अपने सांसद से यहां की जनता का मोहभंग हो रहा है.

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आपको बता दें कि स्मृति ने 2014 के लोकसभा के चुनाव में अमेठी सीट से राहुल को कड़ी टक्कर दी थी. हालांकि वो जीत नहीं पाई थी. लेकिन उन्हें मिले समर्थन की वजह से राहुल की जीत का अंतर 2009 के मुकाबले काफी कम हो गया था. लेकिन हार के बाद भी अमेठी में स्मृति का आना-जाना लगातार जारी है.

फीफा ने रद्द की पाक फुटबॉल फेडरेशन की मान्यता

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नई दिल्ली। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन फुटबॉल (फीफा) ने पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन (पीएफएफ) की मान्यता रद्द कर दी है. अब फीफा से जुड़ी किसी भी गतिविधि में पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन भाग नहीं ले सकेगा. पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन पर यह सस्पेंशन फीफा ने तत्काल प्रभाव से लगाया है.

फीफा के प्रवक्ता के मुताबिक, पीएफएफ को उनकी मान्यता रद्द करने की जानकारी दे दी गई है और अब पीएफएफ तत्काल प्रभाव से फीफा के किसी भी आयोजन में भाग नहीं ले पाएगा. फीफा की अधिकारिक फेबसाइट पर इस पीएफएफ के इस सस्पेंशन का उल्लेख किया गया है.

फीफा ने यह निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि पीएफएफ के कामकाज और अकाउंट्स का नियंत्रण कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों द्वारा किया जा रहा है, जो कि पीएफएफ के अनुबंधों का उल्लंघन है. फीफा के अधिनियमों के अनुसार, पीएफएफ ने उन शर्तों को माना था कि उसका संचालन बिना किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव के बिना स्वायत्त रूप से होगा. लेकिन कोर्ट द्वारा प्रशासकों की नियुक्ति करने से इन नियमों का पालन नहीं हुआ, जिस कारण फीफा ने पीएफएफ को सस्पेंड करने का फैसला लिया.

फीफा द्वारा जारी स्टेटमेंट में बताया गया है कि पीएफएफ के ऊपर से यह प्रतिबंध तक तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक पीएफएफ ऑफिस और उसके अकाउंट्स का संचालन स्वतंत्र रूप से संचालन करने के लिए उसके पास वापस नहीं आ जाता.

रेलवे में निकली कई पदों पर भर्ती, जल्द करें अावेदन

उत्तर रेलवे ने कई पदों के लिए भर्ती निकाली है और यह भर्ती उन लोगों के लिए है, जो पहले रेलवे में काम कर चुके हैं. रेलवे ने अपने सेवानिवृत कर्मचारियों को नौकरी का मौका दिया है. इस भर्ती के माध्यम से उन लोगों का चयन किया जाएगा, जो सिविल इंजीनियरिंग में रेलवे के कर्मचारी रह चुके हैं. भर्ती में कुल 4690 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा, जिसमें ट्रेकमैन, सीनियर सेक्शन इंजीनियर और कई पद शामिल है. अगर आप भी सिविल इंजीनियरिंग में कर्मचारी रह चुके हैं तो आप इसके लिए अप्लाई कर सकते हैं. भर्ती में आवेदन करने की आखिरी तारीख 29 अक्टूबर 2017 है.

पदों की जानकारी- भर्ती में ट्रेकमैन पद के लिए 4434 उम्मीदवार और सीनियर सेक्शन इंजीनियर पद के लिए 127 उम्मीदवारों को चयन किया जाएगा. ट्रेकमैन पद पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को 5200-20200 रुपये पेस्केल और सीनियर सेक्शन इंजीनियर पद के उम्मीदवारों को 9300-34800 रुपये दिए जाएंगे. इनके लिए 62 साल तक के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं और उम्मीदवारों का चयन मेडिकल फिटनेस के आधार पर किया जाएगा. इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को फीस नहीं देनी होगी.

कैसे करें अप्लाई- इन पदों पर हर कोई अप्लाई नहीं कर सकता. रिटायर्ड रेलवे कर्मचारियों को ऑफलाइन के माध्यम से अप्लाई करना होगा. इसके लिए पहले आवेदन पत्र भरें और उसके साथ पेंशन, एजुकेशन, सर्विस सर्टिफिकेट संबंधी कागज की फॉटोकॉपी बड़ौदा हाऊस, नई दिल्ली कार्यालय पर भेज दें. भर्ती में आवेदन करने के इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 28 अक्टूबर 2017 से पहले आवेदन कर सकते हैं. ट्रेकमैन और सीनियर सेक्शन इंजीनियर पदों के साथ साथ उम्मीदवार जूनियर ऑफिसर, वेल्डर आदि पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिनके लिए 62 और 34 उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.

SBI ने पुराने चेक को लेकर ग्राहकों को दी बड़ी राहत

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नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में विलय हुए 5 सहायक बैंकों और भारतीय महिला बैंक के ग्राहकों के लिए खुशखबरी है, उनके जो चेक 30 सितंबर के बाद मान्य नहीं रहे थे उनकी मान्यता को 31 दिसंबर तक कर दिया गया है। अब SBI के सभी सहायक बैंकों और भारतीय महिला बैंक के पुराने चेक 31 दिसंबर तक बिना रोक-टोक के सामान्य चेक की तरह चलेंगे।

हालांकि SBI ने इस मान्यता को बढ़ाने के बाद भी सभी ग्राहकों से अनुरोध किया है कि 31 दिसंबर से पहले नई चेकबुक के लिए आवेदन कर लें, 31 दिसंबर के बाद किसी भी सहायक बैंक या भारतीय महिला बैंक का पुराना चेक मान्य नहीं होगा।

नई चेकबुक के लिए आवेदन इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग या ATM से किया जा सकता है। इसके अलावा शाखा जाकर भी नई चेकबुक के लिए आवेदन किया जा सकता है। पहली अप्रैल 2017 से SBI में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (SBBJ), स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (SBH), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (SBM), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (SBP), स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (SBT) और भारतीय महिला बैंक का विलय हो चुका है।

सकलदीप बिना देखे गरीब छात्रों के जीवन में भर रहे हैं रौशनी

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सकलदीप शर्मा

गोपालगंज। गोपालगंज शहर से 6 किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में एक छोटा सा गांव है कोन्हवा. उस गांव के नेत्रहीन सकलदीप शर्मा बच्चों को शिक्षित कर उनके जीवन में उजियारा लाने की कोशिश कर रहे हैं. सबको यकीन नहीं होगा कि जिसे खुद आंखो से दिखाई नहीं देता, वह दूसरों को कैसे पढ़ा सकता है. लेकिन यह हकीकत है. इसे कुदरत का चमत्कार कहें या सकलदीप की जिद्द, बोर्ड पर जब वे कुछ लिखते हैं तो एक शब्द गलत नहीं होता.

मई 1991 से सकलदीप को सिरदर्द परेशान करने लगा. दर्द जब असहनीय हो गया तो उनके पिता रामाशीष मिस्त्री, जो की इण्डियन आर्मी में जवान थे उन्हें दिल्ली एम्स में लेकर गए. कई तरह की जांच के बाद डॉक्टरों ने सकलदीप के पिता को बताया कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है और बिना देर किये ऑपरेशन करना होगा. तब तक सकलदीप की एक आंख की रौशनी पूरी तरह जा चुकी थी. वे हाई स्कूल की परीक्षा में भी नहीं बैठ सके.

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कुछ दिनों बाद ऑपरेशन करके ट्यूमर को निकाला गया. उनके प्राण तो बच गए लेकिन दोनों आंखों की रौशनी हमेशा के लिए चली गयी. कुछ समय बाद उनके पिताजी का भी देहांत हो गया. यहां से शुरु हुई सकलदीप की जिन्दगी के साथ जंग. सकलदीप बताते हैं कि कुछ नहीं समझ पा रहे थे वे कि आखिर करें तो क्या. कई-कई रातें उनकी पलकें तक नहीं झपकती थीं. अन्दर से वे बहुत टूट चुके थे लेकिन हौसला नहीं छोड़ा.

एक दिन उन्होंने बच्चों को पढ़ाने का निश्चय कर लिया. कितने दिनों तक अकेले अभ्यास किया लिखने का. जैसे-जैसे प्रयास सफल होता गया, उनकी हिम्मत भी बढ़ती गयी. आज वे ब्लैकबोर्ड पर कुछ भी लिख लेते हैं. दुर्भाग्य से वे मैट्रिक की परीक्षा में तो शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने तैयारी पूरी कर ली थी. खासकर गणित विषय की.

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आज उनके पास पढ़ने के लिए लगभग 30 बच्चे आते हैं. जिनमें से आधे से अधिक हाई स्कूल के विद्यार्थी हैं. उनके कुछ स्टूडेंट को स्कॉलरशिप भी मिल चुका है. सकलदीप कितने नेक इंसान हैं, यह बात वे अभिभावक ही बता पाएंगे जिनके पास अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं हैं. खुद आर्थिक तंगी झेल रहे सकलदीप शर्मा ने पूरे गांव के लोगों से कह रखा है कि जिन बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं, वे उनके बच्चों को निःशुल्क पढ़ाएंगे.

सकलदीप की बौद्धिक क्षमता इतनी बढ़ चुकी है कि वे किसी भी विषय को आसानी से कविता का रुप दे सकते हैं. उनके द्वारा रचित पचास पन्नों की कविता का एक संग्रह तैयार है. जिसमें उन्होंने देशभक्ति, आध्यात्मिकता, शिक्षा और समाजिक विसंगतियों को छूने की कोशिश की है. बहुत जल्द उनकी कविताओं का लोकार्पण होगा.

प्रेम प्रकाश की रिपोर्ट

जयंती विशेष: संपूर्ण क्रांति के जनक जयप्रकाश नारायण

रायपुर। संपूर्ण क्रांति आंदोलन चलाने वाले स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता जयप्रकाश नारायण की आज जयंती है. उनका जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के छोटे से गांव सिताबदियारा में हुआ था.वे जेपी और लोक नायक के नाम से मशहूर थे. उनके पिता हर्सुल दयास श्रीवास्तव और मां फूल रानी देवी थीं. उन्हें पढ़ने का बहुत शौक था. इसलिए वे पढ़ाई के लिए पटना चले गए थे. जेपी आंदोलन ने भूतपूर्व इंदिरा गांधी की सत्ता हिला दी और उन्हें सत्ता से हाथ धोना पड़ गया. दरअसल ये 1970 का वक्त था. जब देश महंगाई से लेकर कई बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा था. लोग तानाशाह इंदिरा गांधी से परेशान थे. जिसके बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ जयप्रकाश नारायण ने आंदोलन चलाया.

भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के लिए उन्होंने संपूर्ण क्रांति नाम का आंदोलन चलाया. इसमें 7 क्रांति शामिल थी, जिसमें राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक क्रांति शामिल थी. जयप्रकाश नारायण की एक हुंकार पर युवा उठ खड़े हुए. जेपी घर-घर में क्रांति के पर्याय बन गए. यहां तक कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, लालमुनि चौबे, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, सुशील मोदी ये सारे नेता उसी छात्र युवा संघर्ष वाहिनी का हिस्सा थे.

जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी के कई फैसलों को अलोकतांत्रिक बताते हुए पत्र लिखा था. इससे राजनीतिक जगत में सनसनी मच गई. इन्होंने लोकपाल बनाने और लोकायुक्त नियुक्त करने की भी मांग की थी. अप्रैल 1974 में जयप्रकाश नारायण ने जुलूस निकाला, जिसमें लाखों लोगों ने हिस्सा लिया. इस आंदोलन से इंदिरा गांधी को विरोध का इतना सामना करना पड़ा कि उनके हाथ से सत्ता निकल गई. 1975 में कोर्ट में इंदिरा गांधी पर चुनावों में भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो गया और जयप्रकाश ने विपक्ष को एकजुट कर उनके इस्तीफे की मांग की. जिसके बाद इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकालकी घोषणा कर दी और जेपी समेत हजारों विपक्षी नेताओं को जेल में ठूंस दिया गया.

आपातकाल में जब वे जेल में बंद थे, तभी जयप्रकाश नारायण की जबियत अक्टूबर 1976 को खराब हुई. जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया. जांच में पता चला कि उनकी किडनी खराब है. वे डायलिसिस पर रहे. करीब ढाई-तीन साल के बाद 8 अक्टूबर 1979 को पटना में हार्ट डिजीज और डायबिटीज से उनका निधन हो गया.

जयप्रकाश नारायण को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया. समाजसेवा के लिए उन्हें मैगसेसे पुरस्कार भी मिला था. पटना में हवाई अड्डे का नाम और दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल ‘लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल’ का नाम जेपी के नाम पर पड़ा.

अनुपम खेर बने FTII के नए अध्यक्ष

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बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर को पुणे के जाने-माने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का अध्यक्ष चुना गया है। खेर से पहले गजेंद्र चौहान इस पद पर थे, जिन्हें 2015 में नियुक्त किया गया था। गजेंद्र को संस्थान के छात्र-छात्राओं के विरोध प्रदर्शनों का सामना भी करना पड़ा था। गजेंद्र चौहान का कार्यकाल 3 मार्च 2017 को खत्म हो गया था। अपने 14 महीने के कार्यकाल के दौरान गजेंद्र चौहान सिर्फ एक बार ही संस्थान में किसी मीटिंग को अटेंड करने गए थे। बता दें कि चौहान को एफटीआईआई का चेयरमैन बनाए जाने पर उनका काफी विरोध किया गया था। 139 दिनों तक एफटीआईआई के छात्रों ने हड़ताल की थी जिनमें से कुछ छात्रों ने अनशन भी किया था। चौहान की काफी आलोचना उनके कैंपस से बाहर रहने को लेकर भी हुई थी। एफटीआईआई छात्रों के साथ-साथ फिल्मी जगत के कई कलाकारों ने भी गजेंद्र चौहान की काबिलियत पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें संस्थान का उच्चतम पद देने का विरोध किया था। संस्थान के छात्रों ने पूणे से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर तक विरोध प्रदर्शन किया था, जिसकी वजह से चौहान अपने नियुक्ति के सात महीने तक अपना पदभार संभाल नहीं पाए थे।

कश्मीर पर सवाल से मच गया बवाल

पटना। सुनने में अजीब लगे, लेकिन बिहार के शिक्षा विभाग ने कश्मीर को अलग ही मान्यता दे दी है. कम से कम उनके द्वारा पूछे गए सवाल में तो यही लिखा है. यह सवाल सातवीं क्लास की छमाही परीक्षा में अंग्रेज़ी विषय में पूछा गया है. सवाल है कि जब चीन के लोगों को चायनीज़ कहा जाता है तब नेपाल के लोग को क्या कहा जाता है. फिर इंग्लैंड के लोगों को क्या कहा जाता है. उसके बाद कश्मीर के लोगों के बारे में पूछा गया और अंत में भारत के लोगों के बारे में पूछा गया है कि उन्हें क्या कहा जाता है?

यह परीक्षा केन्द्र के सर्व शिक्षा अभियान के तहत बिहार शिक्षा परिषद आयोजित करती है. निश्चित रूप से यह गलत सवाल है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी इसके लिए सवाल छापने वाले प्रिंटर को दोषी मानते हैं, हालांकि उनका कहना है कि यह एक बड़ी गलती है, जो नहीं होनी चाहिए.

बिहार में भाजपा खुद सत्ता में है इसलिए पूरा मामला राजनीतिक तूल शायद नहीं पकड़े, लेकिन दबी जुबान से अधिकारी भी मानते हैं कि यह सवाल सेट करने वालों की गलती है. फिलहाल इस मामले की जांच का आदेश दिया गया है. इससे पहले राज्य सरकार को कई बार पटना होईकोर्ट से फटकार भी लग चुकी है, लेकिन कुछ चीजें शायद कभी नहीं बदलतीं.

ऑस्ट्रेलियाई टीम की बस पर पत्थर से हमला

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नई दिल्ली/गुवाहाटी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही टी20 सीरीज का दूसरा मैच गुवाहाटी के नए बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया. 7 बार मिली करारी शिकस्त के बाद आखिरकार ‘कंगारू’ जीत हासिल करने में सफल रहे लेकिन मैच के बाद होटल लौट रही ऑस्ट्रेलियाई टीम की बस पर पत्थर से हमला किया गया. टीम के ओपनर एरोन फिंच ने ट्विटर पर बस की टूटी खिड़की की तस्‍वीर पोस्‍ट करते हुए लिखा, ”होटल आते समय टीम की बस की खिड़की पर पत्‍थर फेंका जाना काफी डरा देने वाला अनुभव है.”

वहीं अब तक इस मामले में अब तक आईसीसी, बीसीसीआई और क्रिकेट ऑस्‍ट्रेलिया की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. ऑस्‍ट्रेलिया की टी20 टीम के कप्‍तान डेविड वॉर्नर ने फिंच के ट्वीट को रिट्वीट किया और ग्‍लेन मैक्‍सवेल ने पोस्‍ट को लाइक किया. जेसन बेहरनडॉर्फ के नेतृत्व में गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन के दम दूसरे टी-20 मैच में मंगलवार को भारत को आठ विकेट से हरा दिया. इस जीत के साथ ही उसने तीन टी-20 मैचों की सीरीज में 1-1 से बराबरी कर ली है और अपनी सीरीज जीतने की उम्मीदों को जिंदा रखा है.

बता दें कि दूसरे टी-20 मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले अपने गेंदबाजों और फिर बल्लेबाज हैनरिक्स के शानदार अर्धशतक की मदद से भारत को 8 विकेट से हरा दिया. भारत के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया को ये जीत 7 टी 20 मैच हारने के बाद मिली है. ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारत के मजबूत बल्लेबाजी क्रम को दूसरे टी-20 मैच में 118 रनों पर ही रोक दिया. जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने ये लक्ष्य 15.3 ओवर में 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया. मैन ऑफ द मैच का अवॉर्ड चार विकेट लेने वाले ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज जेसन बेहरेनडॉर्फ को दिया गया.