महागठबंधन टूटते ही केरल इकाई ने नीतीश कुमार से संबंध तोड़ा

पटना। नीतीश कुमार की धोखेबाजी से खफा हो कर उनके पुराने संबधो में दरार तो आनी शुरू हो ही गयी है साथ ही जदयू की केरल इकाई ने गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा भारतीय जनता पार्टी का विरोध किया और खफा होकर संबंध तोड़ लिया. जदयू की केरल इकाई के प्रमुख व राज्यसभा के सदस्य वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वह फासीवादी शक्तियों के खिलाफ लड़ाई में उच्च सदन से इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं. उन्होंने कहा, “इसकी जो भी कीमत होगी, हम चुकाने के लिए तैयार हैं.”

उन्होंने कहा, “हमें जदयू का राजग के साथ गठबंधन स्वीकार नहीं है और नीतीश कुमार के साथ हमारे संबंध समाप्त हो चुके हैं. हम सभी ने सोचा था कि वह फासीवादी प्रवृत्तियों के खिलाफ जंग करेंगे लेकिन वह अब इसका एक हिस्सा बन गए हैं. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव और बिहार में पार्टी के विधायक नीतीश कुमार के निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, “ मैं शरद यादव और जदयू विधायकों को फोन कर कहूंगा कि वे कहें कि हम इसे स्वीकार नहीं करते हैं.”

उन्होंने कहा कि वह 5 अगस्त को उप राष्ट्रपति के चुनाव के बाद केरल लौट आएंगे और भविष्य की योजना पर निर्णय लेने के लिए राज्य परिषद बैठक आयोजित करेंगे. नीतीश कुमार ने बुधवार को महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ गठबंधन कर गुरुवार सुबह बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर महागठबंधन को धोखा देने और ‘व्यक्तिगत स्वार्थ’ के लिए भाजपा से हाथ मिलाने को लेकर निशाना साधा है.

‘सामाजिक उत्थान पत्रिका’ के 25 साल पूरे, ‘दलित लेखक संघ’ ने मनाई रजत जयंती

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नई दिल्ली। ‘सामाजिक उत्थान पत्रिका’ के 25 साल पूरे हो गए. इस उपलक्ष्य में ‘दलित लेखक संघ’ ने 25 जुलाई को रजत जयंती समारोह का आयोजन किया. यह समारोह दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ.

समारोह में इस पत्रिका के संपादक नेतराम ठगेला को शाल, सम्मान-पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. समारोह की अध्यक्षता कर्मशील भारती ने किया. उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में पत्रिका के संपादक नेतराम ठगेला को बधाई देते हुए कहा कि इतनी व्यवस्थाएं रखते हुए कोई पत्र निकलना अपने आप में चुनौतीपूर्ण कार्य है.

वहीँ समारोह का संचालन कर रहे हीरालाल राजस्थानी ने शुरूआती भूमिका बनाते हुए कहा कि यह पत्रिका संत दुर्बलनाथ के विचारों से शुरू होकर डॉ. अम्बेडकर के सिद्धांतों का एक अनोखा सफर तय करती आई है. जिसने एक दलित उपजाति (खटीक) को अम्बेडकर की विचारधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर दिखाया है.

मुख्य अतिथि के तौर हीरालाल बड़सीवाल ने भी पत्रिका के 25 वर्ष पूरे होने पर संपादक की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज को जागरूक करने का बहुत सशक्त माध्यम है. वहीँ अशोक कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण अविश्मरणीय रहेगा साथ ही नेतराम जी का एकल प्रयास भी सराहना के काबिल है.

मुख्य वक्ता के तौर पर शील बोधि ने डॉ. अम्बेडकर के अथक प्रयासों को याद करते हुए समाज में एक समाचार पत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. कार्यक्रम के शुरू में पूनम तुषामड़ ने संविधान की प्रस्तावना पड़ते हुए ‘दलित लेखक संघ’ के इतिहास पर भी एक नज़र डाली. अंजलि ने इस अवसर पर आलेख पाठ पढ़ा. मुकेश मिरोथा ने सम्मान पत्र का वचन किया. अंत में धन्यवाद ज्ञापन हरपाल भारती ने किया.

बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को समर्पित एक गीत भी श्रवण बेखबर द्वारा रचित गीत भी गया गया. विशेष उपस्थिति में बलविंद्र बलि, निरोतीलाल महामना, प्रेम चौहान, अनुरुद्ध, संजीव कौशल, नरेश राम, सुनीता, कुलीना, श्री सुधीर, दलित दस्तक के संपादक अशोक दास, जय सिंह आर्य, मामचंद रिवाडिया, रामसिंह दिनकर, सलमान, आर. पी. सिंह आदि मौजूद रहे.

बिना सिक्योरिटी क्लीयरेंस के चल रही है प्रभु की तेजस एक्सप्रेस

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मुंबई। रेलवे के बारे में अभी कुछ दिन पहले ही कैग की रिपोर्ट का खुलासा हुआ जिसमें रेलवे के खाने को इंसानो लायक नहीं बताया गया पर अब बड़ी खबर आयी है की मुंबई से गोवा के बीच चलाई गई लग्जरी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस को रेलवे ने बिना क्लीयरेंस के लिए लोगों के लिए शुरू कर दिया. ऐसा करके रेलवे ने लाखों लोगों की जान खतरें में डाल दी. रेलवे ने तेजस को ट्रेन यात्रा का भविष्य बताया था.

जानकारी के मुताबिक रेलवे ने कमिश्नर ऑफ रेलवे सिक्योरिटी (CRS) से अनिवार्य सुरक्षा मंजूरी लिए बिना ही ट्रेन शुरू कर दी. मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन के अंतर्गत आने वाले सीआरएस ने पिछले हफ्ते सेंट्रल रेलवे और रेल मंत्रालय से चिट्ठी लेकर पूछा कि नई ट्रेन क्यों शुरू की गई और बिना सीआरएस के सुरक्षा मंजूरी के उसे क्यों चलाया गया.

इसके जवाब में रेलवे ने दावा किया कि वर्तमान में ट्रेन कई विशेष सुविधाओं के बिना चल रही है और साथ ही किसी नए रोलिंग स्टॉक को शामिल नहीं किया गया, जिसके लिए नए क्लीयरेंस की जरुरत हो. अपने पत्र में सीआरएस ने रेलवे को इस ओर ध्यान दिलाया है कि बिना उसकी मंजूरी के ट्रेन चलाना रेलवे बोर्ड पॉलिसी सर्कुलर नंबर 6 का सीधे-सीधे उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि मौजूदा स्थिति में किसी भी नए रोलिंग स्टॉक की शुरुआत होने पर उसे सेफ्टी ट्रायल की नई प्रक्रिया से होकर गुजरना होता है और ताजा प्रमाण पत्र प्राप्त करना जरुरी होता है. रेलवे के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सूत्रों ने बताया कि पॉलिसी सर्कुलर महत्वपूर्ण है क्योंकि कोई भी नया रोलिंग स्टॉक व्हील इंट्रेक्शन को बदल देता है और उस स्थिति में नियामक को नई सुरक्षा मंजूरी लेने की आवश्यकता होती है.

बता दें की तेजस एक्सप्रेस को मई में रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने हरी झंडी दिखाई थी. तेजस मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल से गोवा के करमाली के बीच चलती है. तेजस का किराया प्रति टिकट पर प्रति किलोमीटर के हिसाब से देश की ट्रेनों के मुकाबले सबसे ज्यादा है.

सरकारी नौकरी छोड़ पर्यावरण बचाने में लगा दी जिदंगी

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सिरमौर। पर्यावरण को बचाने के लिए लोग लंबे-लंबे लेख तो लेख लिखते हैं पर जमीनी स्तर पर काम करने का हौसला लाखों में से कुछ के ही पास होता है कुछ इस तरह का हौसला लेकर ही अनिल पैदल हुए. हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के मटरू गांव में 21 जनवरी, 1964 में जन्मे डॉ. अनिल को समाजसेवा का शुरू से ही जुनून था. यह जूनून इस हद तक था कि अपनी सरकारी नौकरी को ज्वाइन करने के दो साल बाद ही त्यागपत्र दे दिया. जल, पर्यावरण संरक्षण और लोगों की सेवा का संकल्प लिया और समर्पित हो गए समाज के लिए, 25 साल से उनकी तपस्या लगातार जारी है. बात 1990 की है जब उन्होंने सिरमौर जिले के पच्छाद विकास खंड के घिन्नी घाड़ क्षेत्र का दौरा किया. वहां पर पर्यावरण और ग्रामीणों की दयनीय स्थिति को देखकर वह हैरान रह गए. पूरा क्षेत्र पानी की समस्या से जूझ रहा था, जंगल धड़ाधड़ काटे जा रहे थे. तब उन्होंने निर्णय किया कि यहां के लोगों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के लिए कुछ करेंगे.

बता दें की उन्होंने 1992 में गैर सरकारी संगठन साथी की नींव ऱख पर्यावरण बचाने की मुहिम छेड़ दी थी. संस्था के गठन के बाद ग्रामीणों ने स्वैच्छिक मदद की. इससे अभियान को आगे ले जाने की राह आसान हुई.

सबसे पहले घिन्नी घाड़ क्षेत्र में जल व मृदा संरक्षण के लिए चेकडैम व जोहड़ों का निर्माण करवाया. परंपरागत जलस्नोतों के संरक्षण व वर्षा जल भंडारण के लिए भी लोगों को जागरूक किया गया. सरकार व विश्व बैंक के सहयोग से चल रही योजनाओं का लाभ उठाया गया. जलस्त्रोत बचाए रखने के लिए पनढाल क्षेत्र में 42 हेक्टेयर में वाटर टैंक, चेकडैम व वर्षा जल संग्रहण टैंक बनवाए गए. इससे पानी की समस्या काफी हद तक सुलझने लगी.

पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रामीणों की मांग पर फलदार व लुप्त होते पौधे उपलब्ध करवाए. जब मांग बढ़ी तो स्थानीय लोगों की सहायता से नर्सरी शुरू की गई.

अब साथी संस्था देशभर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों के बीज उपलब्ध करवाती है. चारे व ईंधन की समस्या सुलझाने के लिए भी 85.5 हेक्टेयर में तारबंदी कर पौधे उगाए गए. इसमें पौधों की जीवित दर 65 प्रतिशत से अधिक है. पौधरोपण व चेकडैमों के निर्माण के बाद इस क्षेत्र में जमीन में नमी भरपूर है और प्राकृतिक जलस्नोत कभी सूखते नहीं हैं.

जानकारी देते हुए डॉ. अनिल बताते हैं कि 25 साल से किफायती पर्यावरण मित्र गतिविधियों से 52 गांवों के 6,025 परिवारों को लाभ मिला है. पच्छाद में मिली कामयाबी के बाद अब शहर पांवटा साहिब व शिलाई विकास खंड में भी ‘साथी’ की मुहिम रंग ला रही है. पर्यावरणीय मुद्दों के अलावा लोगों की आजीविका सुधारने के प्रयास सार्थक रहे हैं. संस्था के प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में भूक्षरण, पर्यावरण ठहराव संभव हो पाया है.

कृषि उत्पादकता में प्रति हेक्टेयर दोगुनी वृद्धि हुई है. कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिये युवाओं का मार्गदर्शन किया. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन करवाया गया. हाल ही में शिमला में ‘साथी’ संस्था को सरकार ने सम्मानित किया जिसके बाद हमारे हौसलो का औऱ अधिक बल मिला है. वे कहते हैं कि दूसरे प्रदेशों के लोगों को भी अपने जिले, मंडलो में प्रकृति की प्रति गंभीर होना चाहिए, अगर पेड़, जल नहीं बचेगें तो मानव का आस्तित्व खतरे में आ जायेगा.

 

पंचायत ने परिवार के सामने करवाया लड़की का बलात्कार

मु्जफ्फराबाद। अक्सर सुनने में आता है कि पंचायतें हमारी न्याय व्यवस्था का एक भाग है, लेकिन इन पंचायतों का फैसला हमेशा नकारात्मक और बेहद शर्मनाक होता है. ये सब हमे भारतीय पंचायतों में देखने को मिलता है. लेकिन भारत के अलावा एक देश ऐसा भी है जहां कि पंचायतें अजीबो-गरीब और शर्मनाक फैसले सुनाती है. मामला है पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का. जहां की पंचायत ने लोगों के दिल दहला दिए. दरअसल यहां एक गांव में पंचायत के अजीबोगरीब आदेश पर एक व्यक्ति ने 16 वर्षीय लड़की से उसके ही परिवार के सामने बलात्कार किया.

मीडिया खबर मुताबिक, पीड़ित लड़की के भाई पर मोहल्ले में रहने वाले नाबालिग से 16 जुलाई को रेप करने का आरोप था. यह मामला जब गांव की पंचायत के सामने लाया गया तो उसने लड़की के भाई को पड़ोसी लड़की से रेप का दोषी मानते हुए उसकी बहन से भी रेप किए जाने का फरमान सुना दिया. किशोरी के परिवार ने इसका विरोध किया. इस वारदात के बाद पीड़िता के परिजनों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई और पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित पंचायत के सभी सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज करते हुए 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

मुल्तान मंडल के पुलिस प्रमुख अहसान यूनिस ने बताया कि प्रांत के मु्जफ्फराबाद के राजपुर गांव में 18 जुलाई को हुई इस घटना के सिलसिले में पुलिस ने 20 लोगों को गिरफ्तार किया है. इस मामले की जांच हो रही है.

ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह सरकार चला रही है भाजपा: कांग्रेस

लखनऊ। मौजूदा सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगते जा रहे हैं और विपक्षी पार्टी काग्रेंस समय समय पर बीजेपी को घेरती रहती है. ताजा बयान में उत्तर प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ ने केंद्र की नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार पर ईस्ट इंडिया कम्पनी की तर्ज पर व्यापार की तरह सरकार चलाने का आरोप लगाया है. चेयरमैन इरशाद अली ने एक बयान में कहा कि जिस तरह अंग्रेज आजादी से पहले भारतीयों से भूखे पेट चप्पू चलवाते थे, उसी तरह देश-प्रदेश की सरकारें आज आम जनता को आधे महीने से कम का भोजन दे कर उन्हें भूखे पेट मरने को मजबूर कर रही हैं, इस सरकार में गरीब सताये जा रहे हैं तो अमीरों की मौज ही मौज है.

बता दें की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आम उपभोक्ताओं को हर महीने प्रति कार्ड 5 से 7 किलो अनाज दिया जा रहा है, जो किसी भी परिवार के महीने भर का भोजन नहीं हो सकता. उसमें भी कोटेदार की घटतौली भी जारी रहती है. काग्रेंसी नेताओं ने कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार तथा कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने वर्ष 2013 में भोजन का अधिकार कानून बनाकर गरीबों के लिए 2 रुपये किलो गेहूं तथा 3 रुपये किलो चावल और 1 रुपये किलो मोटा अनाज उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराया था. लेकिन आज की भाजपा सरकारें उक्त कानून का अनुपालन कराने में औपचारिकता ही पूरी कर रही हैं, जो ईस्ट इंडिया कम्पनी के कानून जैसा साबित हो रहा है.

नेताओं ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से राशन वितरण में हो रही गड़बडिय़ों का संज्ञान लेकर प्रति व्यक्ति खुराक का आंकलन कराकर राशन उपलब्ध कराने की मांग की जिससे की गरीब रेखा से नीचे जीवन जी रहे लोगों में भूखमरी की स्थिति पैदा न हो.

 

भस्मासुर निकले नीतीश, सुप्रीम कोर्ट जाएगी RJD: लालू

 

पटना। राजद नेता लालू यादव ने नीतीश कुमार औरर भाजपा पर पलटवार किया है. लालू ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश को एकजुट किया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों ने उनकी हत्या कर दी. नीतीश के फैसले से गांव-गांव के लोग नाराज हैं. लालू ने कहा कि अफसोस है कि हमारे बीच गांधी नहीं है.

लालू ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों को झांसा दिया. अमित शाह ने कहा कि 15-15 लाख रुपये देने का वादा जुमला था. बीजेपी ने 15-15 लाख देने का ढोंग रचा था, मोदी ने देश की जनता से किया वादा नहीं निभाया.

मायावती का जिक्र करते हुए लालू ने कहा कि दलित भाई और पिछड़े वर्ग के लोगों ने हमें वोट दिया. लालू ने नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने नीतीश के डीएनए पर भी सवाल उठाया था. नीतीश पर निशाना साधते हुए लालू ने बिहार की एक कहावत कही और कहा कि एगो छौड़ी बुड़की.. जिधर देखे दही चूड़ा.. उधर जाए हुड़की.

उन्होंने कहा कि बिहार के लोग जागरूक हैं और उनके फैसले से गांव-गांव के लोग नाराज हैं. राजद नेता ने कहा कि हम सत्ता के लोभी नहीं हैं. नीतीश सत्ता के बहुत बड़े लोभी हैं, अवसरवादी हैं. नरेंद्र मोदी और आरएसएस के खिलाफ हमको मैंडेट मिला था.

लालू ने कहा कि नीतीश ने बीजेपी को खाने पर बुलाकर पत्तल खींचा था. वे लोग आए और ड्रामा शुरू कर दिया. बिहार के लिए जिस पैकेज की घोषणा हुई थी उसका क्या हुआ. उन्होंने कहा कि यह बीजेपी, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ था. जनता ने सेक्युलर ताकतों को वोट दिया था. लालू ने कहा कि आरएसएस के लोगों ने अफवाह फैलाई कि अगर लालू-नीतीश जीत गए तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे.

लालू ने कहा कि मैंने शिव की तरह नीतीश को आशीर्वाद दिया कि जाओ राज करो और वो भस्मासुर निकला. उन्होंने कहा कि हमारे खिलाफ नीतीश के कहने पर केस दर्ज हुआ. सुशील मोदी को कहा गया कि आप रोज प्रेस कान्फ्रेंस करो. नीतीश कुमार अमित शाह से मिल चुके थे. सब सेटिंग था.

उन्होंने कहा कि तेजस्वी ने कौन सा अपराध किया है. बड़ी पार्टी होने के बावजूद हमने नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया. लालू ने कहा कि जो दोस्त होता है वो मुश्किल में काम आता है. नीतीश कुमार ने कभी फोन भी नहीं किया.

मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय मीडिया विपक्ष से लड़ रहा है. लालू ने कहा कि मैंने नीतीश को फोन किया था और उन्होंने कहा कि हम इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं. सिर्फ मीडिया हल्ला कर रहा है.

लालू ने यह भी कहा कि लालच होता तो नीतीश को मुख्यमंत्री नहीं बनाता. नीतीश कफन की बात कर रहे हैं अरे उनके कफन में तो झोला है. उन्होंने कहा कि अगर नीतीश को मुख्यमंत्री बनने का मन नहीं था, तो नेता चुनते. बैठक बनाकर नेता का चुनाव होना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल को हमें पहले बुलाना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. विधायकों को रात भर कमरे में बंद करके रखा गया. हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.

लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार पर मर्डर का केस है. 16 नवंबर 1991 को सीताराम सिंह की हत्या हुई. मेरे छोटे भाई इस मामले में मुदालय हैं. लालू ने कहा कि नीतीश ने सीताराम सिंह की हत्या की. लालू ने कहा कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी कभी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े. अगर लड़ते भाव पता चल जाता.

लालू ने कहा कि नीतीश कुमार की पहले से बीजेपी के साथ सेटिंग थी और उन्होंने बीजेपी के साथ ही जाना था. तेजस्वी तो एक बहाना था. उन्होंने कहा कि अच्छा हुआ कि नकली नीतीश चले गए. लालू ने कहा कि अखिलेश, मायावती, ममता बनर्जी सहित तमाम विपक्षी नेता बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला है. 27 अगस्त को पटना में विपक्ष की जोरदार रैली होगी.

आईआईटी रूड़की में भी दलित-आदिवासी छात्रों से भेदभाव

रूड़की। आरक्षित वर्ग के बच्चे मेहनत करके अगर आईआईटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थान में जगह बना भी लेते हैं तो उनका ऐसा उत्पीड़न किया जाता है कि वे छात्र वहां अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाते. कई छात्रों की ऐसी शिकायत भी रही है कि मनुवादी मानसिकता के अध्यापक कई छात्रों को जानबूझकर फेल भी कर देते हैं ताकि आईआईटी से उनकी पढ़ाई पूरी न हो सके. जातिवादी मानसिकता के अध्यापक पिछड़ों, दलितों और आदिवासी समुदाय के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

आपको बता दें कि इससे पहले एम्स जैसे बड़े शिक्षण संस्थान समेत कई मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने भी अपने साथ जाति के आधार पर भेदभाव की बाते कहीं थी. बाद में जब उनकी खबरें मीडिया का हिस्सा बनी तो उन छात्रों की दोबारा परीक्षा कराई गई तो सभी छात्र पास हो गए. लेकिन इस प्रकिया में छात्रों के तीन- चार साल बर्बाद हो गए. अब यही जातिवाद का गंदा खेल आईआईटी में भी खेला जा रहा है.

इस मामले में सामाजिक चिंतक और आईआईटी रूड़की के छात्र रहे सुनील कुमार कहते हैं कि देश की शिक्षा-व्यवस्था में भयानक खामियां हैं. आईआईटी में पढ़ने वाले बच्चे अगर अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं तो इसका दोष सिर्फ बच्चों का नहीं है, दोष उन अध्यापकों का भी है जिनके निम्न स्तर के ज्ञान के चलते बच्चों को विषय की पढ़ाई समझ में नहीं आ रही है. अगर खराब प्रदर्शन करने वाले छात्रों को निकाला जाता है तो जिस अध्यापक के छात्र खराब प्रदर्शन कर रहे हैं उसको भी निकाला जाना चाहिए.

आखिरकार ऐसा कैसे संभव है कि देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रवेश परीक्षा को पास करके छात्र वहां अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहा है. आईआईटी के अध्यापकों पर भी इस बात की जिम्मेदारी आनी चाहिए. अगर आईआईटी में पढ़ाने वाले अध्यापकों के छात्र फेल हो रहे हैं तो कहीं न कहीं उनके कमजोर ज्ञान और पढ़ाने के कौशल में कमी के चलते ऐसा हो रहा है. और जहां तक आईआईटी में जातिवाद की बात है तो यहां भी समाज के अन्य जगहों के जैसा ही जातिवाद है. इस बात की पूरी संभावना है कि सवर्ण जातिवादी मानसिकता के अध्यापक छात्रों को जाति के आधार पर फेल करते हों.

वॉयस ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछले एक साल में आईआईटी में खराब प्रदर्शन के आधार पर 889 छात्रों को आईआईटी से बाहर किया गया है. बाहर किए गए छात्रों में से लगभग 98 फीसदी छात्र आरक्षित वर्ग के हैं. जिससे साफ है कि आईआईटी में जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है.

आईआईटी में पढ़ना हर छात्र का सपना होता है. लोगों का मानना है कि यहां से पढ़े हुए छात्र इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बड़ी से बड़ी सफलता हासिल करते हैं. यहां तक की IIT में एडमिशन लेने के लिए भी छात्रों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि पिछले एक साल में IIT के 889 छात्रों को खराब परफॉर्मेंस की वजह से बाहर निकाल दिया गया है. आपको बता दें कि M.Tech और MSC की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की संख्या करीब 630 है.

नीतीश के शपथग्रहण पर राहुल-अखिलेश ने ली चुटकी

नई दिल्ली। भारत में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चायें बिहार की राजनीति को लेकर हैं. जिस तरह से नीतीश ने पाला बदला है उसको देखकर उन पर सवाल उठने लाजमी हैं जिस बीजेपी की नीतीश बुराई करते थकते नहीं थे आज उसकी गोदी में बैठने की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं. बता दें की बीजेपी की मदद से कल इस्तीफा देने वाले नीतीश कुमार आज छठी बार पर मुख्यमंत्री बने हैं. महागठबंधन की सरकार से इस्तीफ़े के तुरंत बाद नीतीश कुमार को बीजेपी का साथ मिल गया और उन्होंने गुरुवार सुबह ही दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है.

उनके इस कदम पर लोगो की खूब प्रतिक्रियाऐं आ रहीं हैं. किसी ने राजनीति का मास्टरस्ट्रोक कहा तो किसी ने इसे मौकापरस्ती कहा. यहां तक कि सोशल नेटवर्टिंग वेबसाइट ट्विटर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी चुटकी ली है. यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सीधे नीतीश कुमार पर ताना कसते हुए ट्विटर पर लिखा- ना ना करते, प्यार तुम्हीं से कर बैठे, करना था इंकार मगर इक़रार तुम्हीं से कर बैठे.

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने बिहार के घटनाक्रम को लेकर ट्वीट किया- एक बार फिर से बिहार में राज्यपाल ने सरकारिया कमीशन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया है. Single largest party RJD को मौका नहीं दिया गया है. BJP का प्रजातंत्र में विश्वास ना पहले था ना अब है. इस कृत्य के लिए धिक्कार है.

वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बेहद उदासीन स्वरों में अफसोस जताया. उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान की राजनीति में यही समस्या है. अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर जाते हैं. उन्होंने कहा, “मैं पहले ही जान गया था कि यह (महागठबंधन) ज़्यादा दिन तक नहीं चल पाएगा… हिन्दुस्तान की राजनीति की यही समस्या है कि राजनेता स्वार्थ के लिए कुछ भी कर जाते हैं… जो जनादेश मिला था, वह सांप्रदायिकता के खिलाफ था, लेकिन अब..

‘आम आदमी’ एवं ‘दलित’ की नई राजनीतिक परिभाषा

नई दिल्ली। राजनीति समाज में भ्रम फैलाने वाला सर्वोच्च, संगठित एवं सर्वाधिक शक्तिशाली संस्थान है. और भ्रम फैलाने का सबसे अच्छा माध्यम यह है कि शब्दों के परंपरागत-संस्कारगत अर्थों को भ्रष्ट करके उनकी परिभाषायें बदल दी जायें. इस राजनीतिक औजार की सबसे अधिक जरूरत लोकतांत्रिक प्रणाली वाली व्यवस्था में पड़ती है, और भारत में फिलहाल यही प्रणाली काम कर रही है.

अभी राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के चुनाव में दो शब्द काफी चर्चा में रहे-दलित एवं आम आदमी. परंपरागत अर्थ में ‘दलित’ का अर्थ है- जिसको दला गया, यानी कि दबाया गया, सताया गया, तिरस्कृत किया गया. यह ‘पद-दलित’ शब्द से लिया गया है, जो इसके अर्थ को भारत की जातिगत सामाजिक संरचना के साथ व्यक्त करता है-पैरों तले कुचलना. यह एक सामाजिक अवहेलना है, जिसे हमारे संविधान में ‘सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग’ कहा गया.

‘आम आदमी’ शब्द ‘विशिष्ट व्यक्ति’ शब्द के विपरीत है. विशिष्ट, यानी कि किसी भी कारण से बना समाज का प्रभावशाली वर्ग, जिसे अंग्रेजी में ‘इलीट’ कहते हैं. ये संख्या में थोड़े से होते हैं. ‘आम आदमी’ यानी कि इस वर्ग के अतिरिक्त शेष बचे हुए लोगों का समूह. इसे आप देश की ‘भीड़’ कह सकते हैं. उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ रहे गोपालकृष्ण गांधी ने इस पद की योग्यता के रूप में स्वयं को ‘आम आदमी’ घोषित किया. जाहिर है कि उनकी जुबान पर यह शब्द उन्हें खड़ा करने वाले राजनीतिक दलों ने धरा होगा. अन्यथा स्वयं के सम्पूर्ण जीवन को ‘सत्य का प्रयोग’ कहने वाले महात्मा गांधी के पोते के ओठों पर इतना असत्य शब्द नहीं आया होता.

आइये, हम इस ‘आम आदमी’ की आमीयत का थोड़ा जायजा लेते हैं: राष्ट्रपिता के पोते के रूप में एक अत्यंत श्रद्धेय परिवार में जन्म लेने के केवल 22 साल बाद ही गोपालकृष्ण गांधी इस देश की सबसे ऊंची और अभिजात्य नौकरी में आ गये, जिसे आई.ए.एस. के नाम से जाना जाता है. इससे पहले उन्होंने पढ़ाई भी की थी, तो उस समय के सबसे बड़े इलीट कॉलेज दिल्ली के सेंट स्टीफन से और वह भी अंग्रेजी साहित्य में. कलेक्टरी के बाद अनेक पदों पर रहने के साथ-साथ वे पहले उपराष्ट्रपति के तथा बाद में राष्ट्रपति के सचिव रहे. लंदन में नौकरी की. दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त रहे. नार्वे और आइसलैंड में राजदूत रहे. और सन् 2003 में इस सबसे रौबदार और सुविधाजनक नौकरी से रिटायर होने के बाद पश्चिम बंगाल में राज्यपाल बना दिये गये. वैसे यह जानना भी ठीक ही होगा कि इनके दादा के पिता राजकोट के राजा के दीवान थे.तो यह है भारत के आम आदमी की तस्वीर.

अब आइये देखते हैं-हमारे देश के दलित का चेहरा, लेकिन राजनीतिक आइने में. राष्ट्रपति पद के लिए खड़ी श्रीमती मीरा कुमार ने स्वयं को ‘दलित की बेटी’ बताकर मतदाताओं से अन्तरात्मा की आवाज़ पर मतदान की अपील की. लेकिन क्या सचमुच उनकी अपनी आत्मा के अंदर से अपने लिए निकला शब्द ‘दलित’ सही है? जाति के आधार पर उत्तर होगा-‘हां’, लेकिन ‘सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक आधार पर’?

बात शुरू करते हैं तीन पीढ़ी पहले से. मीरा कुमार के दादा न केवल ब्रिटिश सेना में ही थे, बल्कि बहुत अच्छी अंग्रेजी भी बोलते थे. बाद में नौकरी छोड़कर शिवनारायणी संप्रदाय के महंत बनकर उन्होंने समाज में अपने लिए एक सम्मानजनक स्थान बनाया. पिता जगजीवन राम मीरा कुमार के जन्म से आठ साल पहले ही बिहार विधान परिषद के सदस्य नामांकित कर दिये गये थे. देश की आजादी से एक साल पहले जब अंतरिम सरकार बनी थी, उस समय जिन बारह सदस्यों को इसमें शामिल किया गया था, उनमें से एक बाबू जगजीवन राम भी थे. इसके बाद वे लगातार सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे.

मीरा कुमार इसी परिवार में पली-पढ़ी हैं. उनकी पढ़ाई देश के प्रसिद्ध जयपुर के महारानी गायत्री देवी गल्र्स पब्लिक स्कूल के साथ-साथ दिल्ली के मिरांडा कॉलेज जैसे संस्थानों में हुई. जब नौकरी की बात आई, तो वे शामिल हुईं-देश की अत्यंत प्रतिष्ठित एवं अभिजात्य नौकरी-भारतीय विदेश सेवा में. बाद में मंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष के उनके रूप सर्वज्ञात हैं.

तो ये हैं हमारे देश के ‘आम आदमी’ एवं ‘दलित’ की वर्तमान राजनीतिक परिभाषा. निःसंदेह रूप से उपराष्ट्रपति एवं राष्ट्रपति के रूप में इनकी योग्यता पर तनिक भी उंगली नहीं उठाई जा सकती. लेकिन राजनीतिक आवश्यकताओं के समक्ष योग्यतायें कैसे निरस्त होकर असहाय की मुद्रा में खड़ी हो जाती हैं, यह इसका प्रमाण है. जाहिर है कि राजनीति जो न कराये, वही थोड़ा.

(डॉ. विजय अग्रवाल का यह लेख NDTV हिंदी से साभार लिया गया है. लेख में कोई बदलाव नहीं किया गया है)

डॉ. एपीजे कलाम की पुण्यतिथि आज, रामेश्वरम में मोदी करेंगे मेमोरियल का उद्घघाटन

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नई दिल्ली। देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री गुरुवार को तमिलनाडु पहुंचे. यहां से पीएम रामेश्वरम जाएंगे जहां वो डॉ. कलाम के समाधि स्थल पर बने मेमोरियल का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा पीएम यहां अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे.

पीएमओ द्वारा जारी एक बयान के अनुसार प्रधानमंत्री डीआरडीओ द्वारा डिजाइन किए और बनाए गए मेमोरियल पर तिरंगा फहराने के अलावा डॉ. कलाम की प्रतिमा का भी अनावरण करेंगे. इसके बाद पीएम मोदी, कलाम संदेश यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. यह एक प्रदर्शनी की बस है जो देश के अलग-अलग राज्यों में यात्रा करते हुए 15 अक्टूबर को डॉ. कलाम की जयंती पर दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचेगी.

डॉ. कलाम को समर्पित यह मेमोरियल उसी जगह पर बनाया गया है जहां डॉ. कलाम को दफन किया गया था. सिर्फ 9 महीने में तैयार हुए इस मेमोरियल को बनाने में 20 करोड़ रुपए का खर्च आया है और इसे राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट की तर्ज पर बनाया गया है.

मेमोरियल को बनाने के लिए चेटीनाड लकड़ी का उपयोग हुआ है. गेट पर कलाम की 7 फीट ऊंची प्रतिमा लगी है साथ ही चारों कोनों में मेमोरियल हॉल बनाए गए हैं जिनमें कलाम के राष्ट्रपति रहने के दौरान उनका भाषण, वैज्ञानिक के रूप में उनके काम के अलावा शिलॉन्ग में उनके आखिरी भाषण को दर्शाया गया है.

डा. एपीजे कलाम के बारे में जानिए कुछ रोचक बातेंः- 

  • उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम था. उनका जन्म 15 अक्टूबर, 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ था.
  • वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति, जानेमाने वैज्ञानिक और अभियंता के रूप में देश में जाने जाते थे.
  • बच्चों से बेहद प्यार करने वाले ए पी जे अब्दुल कलाम ने बहुत सारी किताबें भी लिखी थीं.
  • भारतीय गणतंत्र के ग्यारहवें निर्वाचित राष्ट्रपति थे.
  • स्वभाव से बेहद ही हंसमुख और कविताओं के शौकीन 1962 में ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ में आये थे.
  • डॉक्टर अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ.
  • 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था जिसके बाद ही भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया.

योगीराज में दलित नाबालिग से गैंगरेप

जालौन। योगी की मुख्यमंत्री बनने के बाद से उत्तर प्रदेश में रेप, हत्या के मामले में तेजी से बढ़ोत्तरी आई है जिसमें दलित युवतियों के साथ रेप की घटनाओं में कमी होने का नाम नहीं ले रही ताजा मामला जालौन का है जहां एक दलित नाबालिग को घर से बहला फुसलाकर दो युवक खेत पर ले गए और वहां बारी बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया गया. घर पहुंचकर किशोरी ने परिजनों को आपबीती बताई. परिजनों ने युवक के परिजनों को शिकायत की तो वह मारपीट पर उतारू हो गए. किशोरी के पिता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दोनों युवकों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने किशोरी को डॉक्टरी के जिला अस्पताल भेजा है.

बता दें की जालौन नगर के एक मोहल्ले की निवासी 15 वर्षीय दलित किशोरी मंगलवार शाम घर पर अकेली थी. इस दौरान मोहल्ले का राहुल (18) पुत्र गंगाराम वर्मा और पवन (19) किशोरी के घर पहुंच गए. किशोरी को नगर में घूमाने की बात कहकर राहुुल किशोरी को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया. उसके साथ पवन भी था. बातों में उलझाकर दोनों युवक किशोरी को नगर के बाहर एक खेत में ले गये. वहां किशोरी के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया. दोनों के चंगुल से छूटने के बाद रोते हुए किशोरी घर पहुंची और माता पिता को आप बीती सुनाई.

किशोरी के माता पिता शिकायत लेकर राहुल के घर पहुंचे. आरोप है कि राहुल के परिजनों ने किशोरी के परिजनों के साथ गाली गलौच और मारपीट कर दी. इसके बाद किशोरी का पिता कोतवाली पहुंचा और दोनों युवकों के खिलाफ तहरीर दी. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है. कोतवाल महाराज सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर किशोरी को चिकित्सीय परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है जिसके बाद उन युवको पर मुकदमा कायम किया जायेगा

                                           

दलितों के बाल काटने से नाई का इंकार

लखीमपुर खीरी। बदलते भारत के दौर में बदलाव प्रत्येक जगह देखने को मिला रहा है पर नहीं बदलती तो वह दलितों की स्थिति, यह जस की तस नजर आती है इसका ताजा उदहारण उत्तर प्रदेश का है जहां दलितों के साथ छुआछुत आम है.

मैगलगंज थाना क्षेत्र के गांव ककरहा निवासी वाल्मीकि समाज के एक व्यक्ति के दाढ़ी-बाल बनाने से एक नाई द्वारा इनकार किए जाने का मामला सामने आया है. पीड़ित ने जातिसूचक गालियां देकर धमकाने का भी नाई पर आरोप लगाया है. मामले में पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, तो पीड़ित ने डीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है. ककरहा गांव निवासी संतोष कुमार वाल्मीकि ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में बताया है कि 17 जुलाई को वह अपनी बहन के घर जा रहा था. रास्ते में पसगवां थाना के गांव मछेछा में बस से उतरकर सेविंग कराने के लिए नाई की दुकान पर बैठ गया. आरोप है कि नाई ने उसे जातिसूचक गालियां देते हुए सेविंग करने से इंकार कर दिया. विरोध करने पर पिटाई की धमकी भी दी.

इसके बाद संतोष ने मोहम्मदपुर ताजपुर चौकी पुलिस को तहरीर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई. फिर पसगवां के प्रभारी निरीक्षक को तहरीर दी गई. कोई कार्रवाई न होते देख पीड़ित ने डीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है.

 

कल इस्तीफा देने के बाद, आज फिर मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार

पटना। बुधवार रात भर चले सियासी ड्रामे के बाद नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है.राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इसके साथ ही नीतीश कुमार 6ठी बार बिहार के मुख्यमंत्री बन गए हैं. उनके अलावा भाजपा नेता सुशील मोदी ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण के साथ ही राज्य में एक बार फिर से भाजपा-जदयू की सरकार काबिज हो गई है.

शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर नीतीश कुमार और सुशील मोदी को बधाई दी है. पीएम ने लिखा है कि नीतीश कुमार जी और सुशील मोदी जी को बधाई, बिहार के विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करें.

इससे पहले नीतीश कुमार ने बुधवार रात बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर इस्तीफा देते हुए राजनीतिक भूचाल पैदा कर दिया. उनके इस्तीफे के कुछ ही घंटों में राज्य के अंदर नई सरकार बनाने की कवायदें पूरी हो गईं. इसके कहा जा रहा है कि नीतीश के मंत्री मंडल में दोनों ही दलों के 13-13 मंत्री होंगे और सुशील मोदी उपमुख्यमंत्री बनेंगे. सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार शनिवार को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेंगे.

जदयू और भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर कुल 132 विधायकों के समर्थन का दावा कर रही है. विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है और इस लिहाज से यह गठबंधन बहुमत का आंकड़ा पार कर चुका है. बिहार में लालू कुनबे पर भ्रष्टाचार के आरोपों और सीबीआई-ईडी के जांच ने राज्य में सरकार को कमजोर करने का काम किया. 7 जुलाई से शुरू हुआ यह घटनाक्रम 26 जुलाई की रात नीतीश के इस्तीफे पर आकर खत्म हुआ और इसी के साथ राज्य में महागठबंधन टूट गया. जहां इसके पीछे भ्रष्टाचार एक बड़ा कारण था वहीं लालू यादव का पुत्र मोह भी इस सरकार के लिए नुकसानदायक साबित हुआ. 7 जुलाई को लालू प्रसाद के घर पर सीबीआई का छापा पड़ा था. उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी आरोपी बनाए गए. भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का झंडा उठाए नीतीश ने तेजस्वी से कहा कि जनता में सफाई दें. लालू प्रसाद और तेजस्वी जिद पर अड़े थे. बार-बार कहा कि इस्तीफा नहीं देंगे. बुधवार को नीतीश कुमार ने फैसला किया कि अब ऐसा नहीं चल सकता. जदयू विधायकों की बैठक बुलाई गई. फिर शाम सवा छह बजे नीतीश कुमार अकेले ही राजभवन पहुंचे. प्रभारी राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी एक दिन पहले ही पटना पहुंचे थे. नीतीश ने उनको इस्तीफा सौंप दिया, जिसे मंजूर भी कर लिया गया. बाहर निकले नीतीश ने कहा कि मैं सब चीजों को झेलता रहा, लेकिन अब संभव नहीं था.

अफगानिस्तान में तालिबान का हमला, 26 सैनिकों की मौत

काबुल। अफगानिस्तान के दक्षिणी कंधार प्रांत स्थित सैन्य ठिकाने पर आतंकी संगठन तालिबान ने हमला कर दिया, जिसमें कम से कम 26 अफगान सैनिकों की मौत हो गई और 30 से ज्यादा घायल हो गए. इसके अलावा आठ सैनिक अभी तक लापता हैं.

तालिबान आतंकियों ने यह हमला मंगलवार रात किया. टोलो न्यूज के मुताबिक जब तालिबान आतंकियों ने दक्षिणी कंधार प्रांत के खाक्रिज जिले में स्थित सैन्य ठिकाने पर हमला बोला, उस समय वहां पर 82 सैनिक मौजूद थे. इसके अलावा बाकी सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं.

वहीं, अफगानिस्तान के उत्तरी बघलान के बघलान-ए-मरकजी जिले में सैन्य अभियान में कम से कम 50 तालिबान आतंकी मारे गए हैं. बुधवार को स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने 20 से ज्यादा गावों से तालिबान का सफाया कर दिया. मंगलवार रात तक इस सैन्य अभियान में 50 से ज्यादा तालिबान आतंकी मार गिराए गए हैं.

इसके अलावा करीब 70 आतंकी घायल हो गए हैं. बघलान दौरे के समय जनरल शोयायोर गुल और उप रक्षामंत्री ने कहा कि सैन्य कार्रवाई में भारी नुकसान होने के बाद तालिबान आतंकी बघलान-ए-मरकजी जिले से भाग रहे हैं. यह अभियान आठ दिन पहले उस समय शुरू किया गया था, जब तालिबान आतंकियों ने जिले में हमला करके कब्जा कर लिया था.

सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष के दौरान आम नागरिकों के घर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं. इस अभियान के दौरान अफगानिस्तान वायुसेना ने भी तालिबान आतंकियों को निशाना बनाया. बताया जा रहा है कि हवाई हमले से तालिबान को ज्यादा नुकसान हुआ. वहीं, इस संघर्ष के चलते एक हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए.

लोकसभा कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर फंसे बीजेपी सांसद

दिल्ली। लोकसभा के नियमो का उल्लघंन करके बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी के लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर मुश्किल में फंस गए हैं. उन पर आरोप लगे हैं कि लोकसभा की कार्यवाही के दौरान जब विपक्षी सदस्य हंगामा कर रहे थे तो उन्होंने अपने फोन से उसका वीडियो बनाया. विपक्षी दलों की ओर से 24 जुलाई को अनुराग ठाकुर की इस हरकत का कड़ा विरोध किया गया, जबकि आप सांसद भगवंत मान ने मामले को लेकर स्पीकर को एक पत्र लिखकर विरोध जताया गया. हालांकि अनुराग ठाकुर की ओर से पूरे मामले पर माफी मांग ली गयी है पर उनकी इस गलती को नोटिस कर लिया लिया गया है.

हालांकि विपक्ष अनुराग ठाकुर के खिलाफ भगवंत मान की तरह कार्रवाई करने की मांग पर अड़ा है. मामले में कांग्रेसी सांसद मल्लिकार्जुल खड़गे ने जानना चाहा कि आखिर क्यों नहीं अनुराग ठाकुर के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. मल्लिकार्जुन खडगे ने स्पीकर सुमित्रा महाजन से कहा कि सांसद भगवंत मान के खिलाफ ऐसे ही एक आरोप में कार्रवाई करते हुए संसद के दो सत्रों के लिए निलंबित कर दिया था. मान पर संसद के बाहर का वीडियो शूट करने का आरोप था, जबकि अनुराग ठाकुर पर संसद के भीतरी भाग का वीडियो लेने का आरोप है. ऐसे में क्यों नहीं उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

मामले में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि मेरे नोटिस में ऐसा कुछ नहीं आया है. लेकिन फिर भी अगर ऐसा कुछ हुआ है, तो वो निंदनीय है. मामले को लेकर सुमित्रा महाजन ने अनुराग ठाकुर से कहा कि अगर आपने ऐसा कुछ किया है, तो आपको सदन से माफी मांगनी चाहिए. स्पीकर के ऐसा कहने पर अनुराग ठाकुर ने एक बयान देते हुए अपनी हरकत पर माफी मांगी.

विपक्ष के हंगामे और शोर-शराबे के बीच अनुराग ठाकुर ने कहा कि अगर किसी को मेरे मोबाइल से आपत्ति है, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं. स्पीकर सुमित्रा महाजन ने अनुराग ठाकुर को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसी हरकत भविष्य में दोहरायी गयी, तो सख्त कार्रवाई की जाएंगी और जो भी संसद की गरिमा को ठेस पंहुचायेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी.

INDvsSL: टेस्ट के पहले दिन चमके धवन आैर पुजारा

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गॉल। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट के पहले दिन का खेल समाप्त होने तक भारत 399/3 का स्कोर बना लिया था. स्टंप्स के समय चेतेश्वर पुजारा (144*) और अजिंक्य रहाणे (39*) क्रीज़ पर मौजूद थे. शिखर धवन ने 190 रनों कि शानदार पारी खेली.

श्रीलंका के खिलाफ गॉल में आज से खेले जा रहे तीन मैचों की सीरीज के पहले टेस्ट मैच के पहले दिन टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, वहीँ ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या ने भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया. हार्दिक पांड्या भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में खेलने वाले 289वें खिलाडी बने.

टॉस जीतकर बल्लेबाज़ी करने उतरी टीम इंडिया की पारी की शुरुआत काफी धीमी रही, जहां दोनों ही ओपनर शिखर धवन और अभिनव मुकुंद ने अपनी टीम को संभली हुई शुरुआत दिलाई. दोनों ने पहले विकेट के लिए 45 गेंदों में 27 रनों की महत्वपूर्ण साझीदारी निभाई, जिसके बाद अभिनव मुकुंद (12) को तेज़ गेंदबाज़ नुवान प्रदीप ने अपना शिकार बनाया. इसके बाद बल्लेबाजी करने उतरे चेतेश्वर पुजारा अच्छी लय में नज़र आए. उन्होंने शिखर धवन के साथ मिलकर दूसरे विकेट के लिए 88 रनों की अटूट साझेदारी निभाई, वहीँ शिखर धवन ने भी अपनी फॉर्म को जारी रखते हुए शानदार अर्धशतक बनाया.

लंच तक समाचार लिखे जाने तक भारत का स्कोर 27 ओवरों में 115/1 है. शिखर धवन (64*) और चेतेश्वर पुजारा (37*) दोनों ही बल्लेबाज़ नाबाद वापस पवेलियन लौटे. भोजनकाल के बाद भारतीय बल्लेबाजों की कोशिश बड़े से बड़े स्कोर तक पहुंचने की होगी.

लंच के बाद भारतीय टीम ने अपने 115/1 के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया, वहीँ श्रीलंकाई टीम के गेंदबाज़ विकेट के लिए तरसते नज़र आए. मैच के पहले दिन का दूसरा सत्र पूरी तरह भारत के नाम रहा, जहां शिखर धवन और चेतेश्वर पुजारा ने श्रीलंका के गेंदबाजों को जमकर परेशान किया. बाएं हाथ के बल्लेबाज़ शिखर धवन ने अपने टेस्ट करियर का पांचवां शतक पूरा किया. दूसरी तरफ चेतेश्वर पुजारा भी अपने 12वें शतक की ओर अग्रसर हैं. दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 253 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई, जो भारत की तरफ से दूसरे विकेट के लिए श्रीलंका के खिलाफ सबसे बड़ी साझेदारी है. सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन (190) काफी तेज़ी के साथ अपने दोहरे शतक की तरफ बढ़ रहे थे कि चायकाल से कुछ देर पहले उनको नुवान प्रदीप ने एंजेलो मैथ्यूज के हाथों की शोभा बनाया, जिसके बाद भारत को दूसरा झटका लगा.

श्रीलंका की तरफ से नुवान प्रदीप को 2 विकेट हासिल हुए. चायकाल तक रिपोर्ट लिखे जाने तक भारतीय टीम का स्कोर 55 ओवरों में 282/2 था. चेतेश्वर पुजारा (75*) और कप्तान विराट कोहली (1*) बनाकर क्रीज़ पर मौजूद थे.

चायकाल के बाद टीम इंडिया ने अपने स्कोर 282/2 से आगे खेलना शुरू किया. चेतेश्वर पुजारा के शानदार नाबाद शतक की बदौलत विराट कोहली की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने अपनी स्थिति काफी मजबूत करली है. पहले दिन का खेल समाप्त होने तक भारत का स्कोर 399/3 था. चेतेश्वर पुजारा (144*) और अजिंक्य रहाणे (39*) क्रीज़ पर मौजूद थे. चेतेश्वर पुजारा ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को जमकर परेशान करते हुए अपने विकेट के लिए तरसा दिया.

टेस्ट क्रिकेट में भारत द्वारा बनाया गया यह स्कोर एक दिन में अपनी घरेलू धरती से बाहर बनाया गया भारत का सबसे बड़ा स्कोर है. पुजारा और रहाणे के बीच चौथे विकेट के लिए तक 113* नाबाद साझेदारी हो चुकी है. इससे पहले विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था, जिसके बाद भारत कि तरफ से सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन (190) ने आतिशी पारी खेल अपनी टीम के विशाल स्कोर कि नींव रखी. चेतेश्वर पुजारा के साथ शिखर धवन ने दूसरे विकेट के लिए मिलकर 253 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी निभाई. खतरनाक दिख रहे शिखर धवन को नुवान प्रदीप ने अपना शिकार बनाया. इसके बाद बल्लेबाज़ी करने उतरे कप्तान विराट कोहली (3) ने ख़ासा निराश किया और उनको भी तेज़ गेंदबाज़ प्रदीप ने वापस पवेलियन की राह दिखाई. इससे पहले नुवान प्रदीप ने अभिनव मुकुंद (12) को भी आउट कर मेहमान टीम को पहला झटका दिया था.

इसके बाद दाएं हाथ के बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने अपने टेस्ट करियर का 12वां शतक जमाया और वापस नाबाद पवेलियन लौटे. श्रीलंका की तरफ से तेज़ गेंदबाज़ नुवान प्रदीप को 3 विकेट हासिल हुए. उनके अलावा श्रीलंका का कोई भी गेंदबाज़ भारतीय बल्लेबाजों को आउट नहीं कर पाया. कल भारतीय बल्लेबाजों की कोशिश बड़ा से बड़ा स्कोर खड़ा करने की होगी.

गूगल के भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई अल्फाबेट बोर्ड में शामिल

वाशिंगटन। गूगल के लिए शानदार काम करने वाले भारत में जन्मे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को एक और उपलब्धि प्राप्त हो गयी है. पिचाई को अल्फाबेट के निदेशक मंडल में भी नियुक्त किया गया है. गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट ने यह जानकारी दी है. कैलीफोर्निया स्थित बहुराष्ट्रीय कंपनी अल्फाबेट के सीईओ लेरी पेज ने सोमवार को एक बयान में कहा कि गूगल के सीईओ के तौर पर पिचाई शानदार काम कर रहे हैं. उनके प्रयासों से गूगल को मजबूत रफ्तार और भागीदारी मिल रही है.

उनके साथ कई इनोवेटिव प्रोडक्ट भी विकसित किये जा रहे हैं. उनके साथ काम करना अच्छा लग रहा है. हमें खुशी है कि वह अल्फाबेट के बोर्ड में शामिल हो रहे हैं. चेन्नई के रहने वाले पिचाई आइआईटी खड़गपुर के छात्र रहे हैं और गूगल में लंबे अरसे से जुड़े हैं. उन्हें दो साल पहले गूगल के सीईओ के तौर पर नियुक्त किया गया था. अल्फाबेट के बोर्ड में पिचाई की नियुक्ति 19 जुलाई से प्रभावी हुई है. 13 सदस्यीय बोर्ड में चार और अन्य अधिकारियों को भी शामिल किया गया है.

गूगल के सीईओ के तौर पर वह कंपनी के प्रोडक्ट डवलपमेंट और टेक्नोलॉजी स्ट्रैटजी के अलावा गूगल के रोजमर्रा के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते हैं. उन्होंने गूगल में 2004 में नौकरी शुरू की थी. उन्होंने कंपनी के कई कंज्यूमर प्रोडक्ट विकसित करने में अहम भूमिका निभाई. आज ये उत्पाद दुनियाभर में लोग इस्तेमाल कर रहे हैं जिसके बाद गूगल सीईओ की चौतरफा तारीफें जारी हैं.

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षामित्र

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लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक पद पर समायोजित शिक्षामित्र आज सड़क पर उतर आएं. पूरे यूपी में शिक्षामित्रों के भरोसे संचालित स्कूल बंद रहे. सभी जिलों में शिक्षामित्रों ने जुलूस निकाल कर अपना विरोध दर्ज किया. उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद में शिक्षामित्रों के सामने भुखमरी का संकट आ जाएगा. देवरिया जनपद मुख्यालय के सुभाष चौक पर शिक्षा मित्रों ने जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया है. यही हाल संतकबीर नगर और गोरखपुर में भी है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद बुधवार को गोरखपुर में शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. यहां कलेक्‍ट्रेट से होते हुए शिक्षा मित्र गोरखनाथ मंदिर के मुख्य गेट पर पहुंच गए. वहां पर उन्‍होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया है. हालांकि पुलिस ने मंदिर के मुख्य द्वार को बंद कर गोरखनाथ ओवरब्रिज पर प्रदर्शनकारियों को रोकने का किया, लेकिन चकमा देकर दूसरे रास्ते से प्रदर्शनकारी शिक्षामित्र गोरखनाथ मंदिर के मुख्‍य गेट तक पहुंच गए. मंदिर के मुख्‍य गेट के सामने सभी शिक्षामित्र बैठ गए हैं और नारेबाजी कर रहे हैं. मंदिर प्रबंधन और पुलिस उन्‍हें समझाने में लगी हुई है. मंदिर गेट पर शिक्षामित्रों के बैठ जाने से रास्‍ता पूरी तरह जाम हो गया है. गोरखनाथ रोड के साथ अलीनगर, बाबीना मार्ग भी जाम हो गया है.

ये भी पढ़ेंः- यूपी के 1.72 लाख शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत

संतकबीरनगर में शिक्षामित्रों के समायोजन को निरस्त किए जाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आक्रोशित शिक्षा मित्रों ने बुधवार को बीएसए आफिस में तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी. हालांकि इससे पहले बीएसए माया सिंह कार्यालय का ताला बंद कर बाहर निकल आईं. सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल मौके पर पहुंच चुका है.

कन्नौज में सुप्रीम कोर्ट चुनौती के तौर पर लिया गया है. बुधवार को शिक्षा मित्र स्कूल नहीं पहुंचे. इससे कई विद्यालयों में ताला लटक गया. ब्लाक संसाधन केंद्रों पर दोपहर में बैठक की तैयारी है. इसके बाद अगले कदम पर फैसला लिया जाएगा. शिक्षा मित्र संघ के पदाधिकारी बड़े आंदोलन की तरफ भी कदम बढ़ा सकते हैं.