जय भीम ! नमो बुद्धाय !! बुद्धमेव जयते !!!
दिनांक 30 जुलाई 2023 को सिद्धार्थ टैंपल ट्रस्ट, यमुना विहार, दिल्ली के द्वारा बौद्ध विहार परिसर में Dr Ambedkar Library , Education Centre एवं Computer Centre का उदघाटन पूज्य भिक्खू चंदिमा थेरो, संस्थापक – अध्यक्ष , सारनाथ महाविहार धम्म शिक्षण समिति के सानिध्य में मुख्य अतिथि महोपासक आनन्द श्रीकृष्णा जी – प्राख्यात साहित्यकार एवं सामाजिक चिंतक के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर पूज्य भिक्खु संघ के द्वारा बुद्ध – धम्म – संघ वंदना संपन्न कराई गई । पूज्य भिक्खू चंदिमा थेरो एवं आनन्द श्रीकृष्णा जी के द्वारा शिलालेख का लोकार्पण किया गया तथा पूज्य भिक्खू चंदिमा थेरो के द्वारा HOLY BAUDDH BOOK ( पवित्र बौद्ध ग्रन्थ) TRIPITAK ( त्रिपिटक ) पुस्तकालय में संरक्षित की गई।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री राजेन्द्र पाल गौतम – पूर्व मंत्री दिल्ली सरकार, श्री जे सी आदर्श – अपर जिलाधिकारी (सेवा निवृत्त ) एवं सामाजिक चिंतक, श्री आर ए सेठ – अपर आयुक्त ( GST) , श्री गम्भीर सिंह – अपर जिलाधिकारी, गाजियाबाद, डॉ. आत्मा राम जोशी – पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष , समता सैनिक दल, श्री एस एस गौतम – प्राख्यात साहित्यकार एवं सामाजिक चिंतक, डॉ अजय कुमार -प्रोफेसर , दिल्ली विश्व विद्यालय एवं डॉ. एस पी अशोक – Advocate on Record , Supreme Court of India एवं अन्य न्यायाधीश गण , प्रशासक, साहित्यकार, शिक्षाविद्, सामाजिक चिंतक आदि उपस्थित हुए एवं समाज और छात्र – छात्राओं को मार्ग दर्शन प्रदान किया गया । NCC Cadets के द्वारा पूज्य भंतेजी , मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को Guard of Honour दिया गया। काकार्यक्रम की अध्यक्षता श्री बलजोर सिंह जी (Ex MLA) , अध्यक्ष – सिद्धार्थ टैंपल ट्रस्ट के द्वारा की गई।
कार्यक्रम का संचालन एस एस वरुण – महासचिव , सिद्धार्थ टैम्पल ट्रस्ट, यमुना विहार , दिल्ली के द्वारा किया गया।
इस अवसर पर देश -विदेश से बौद्ध धर्म तथा बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर के जीवन दर्शन में आस्थावान धम्म उपासक – उपासिकाएं उपस्थित हुए।
सादर अभिवादन एस एस वरुण महासचिव सिद्धार्थ टैम्पल ट्रस्ट, यमुना विहार, दिल्ली


भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद अपने तेलंगाना दौरे के दूसरे दिन तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव यानी केसीआर से मिले। इससे पहले चंद्रशेखर आजाद केसीआर की बेटी कविता राव से भी मिल चुके हैं। इस दौरान चंद्रशेखर लगातार केसीआर सरकार की तारीफें करते दिखे। चंद्रशेखर ने अपने बयान में कहा था कि उन्हें कविता दीदी ने खाने पर बुलाया था। लेकिन साफ है कि जब दो राजनीतिक लोग साथ बैठते हैं तो बात राजनीति की भी होती है।
खुद को अंबेडकरवादी आंदोलन का सिपाही कहने वाला कोई व्यक्ति जब तेलंगाना में जाता है, खासतौर पर हैदराबाद में, तो उसकी एक कोशिश पूर्व आईपीएस अधिकारी और एससी-एसटी सोशल वेलफेयर एंड एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के सेक्रेट्री रहे आर.एस.प्रवीण कुमार से मिलने की जरूर होती है। क्योंकि सोशल वेलफेयर इंस्टीट्यूट का सेक्रेट्री रहने के दौरान उन्होंने जिस तरह तेलंगाना में लाखों एससी-एसटी बच्चों की जिंदगी बदल कर रख दी, उसकी चर्चा दुनिया भर में हुई थी।
तो क्या दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 जुलाई को अपनी ताकत दिखाने के बाद चंद्रशेखर आजाद चार राज्यों के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले जिस तरह राजनीति के पुराने खिलाड़ियों के बीच अपनी धमक कायम करना चाहते थे, उसकी शुरूआत हो गई है? कमोबेश लग तो कुछ ऐसा ही रहा है। लेकिन चंद्रशेखर का यह कदम बहुजनों को रास नहीं आ रहा है और बहुजन समाज के लोग चंद्रशेखर को जमकर ट्रोल कर रहे हैं।
साल 2018 में राजस्थान में हुए विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का प्रदर्शन शानदार रहा था। बसपा ने प्रदेश के छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। तब बहुजन समाज पार्टी ने कांग्रेस को बाहर से समर्थन दिया था। लेकिन सत्ता के लालच में बसपा के सभी छह विधायकों ने खुद को कांग्रेस में विलय कर लिया था और इस तरह छह सीटों जीतने के कुछ महीने बाद ही बसपा की राजस्थान में जीरो सीट हो गई थी।
लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती का कहना है कि अब बसपा बाहर से समर्थन देने की बजाय सरकार में शामिल होगी यानी अब पार्टी के विधायक सरकार में मंत्री बनेंगे।
(10 मई, 2022) मणिपुर से रोज हिंसा और आगजनी की खबरें आ रही हैं। 


अमेरिका से बड़ी खबर आई है। अमेरिका में अंबेडकरवादियों के संगठन अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (AIC) ने अपने बड़े प्रोजेक्ट के उदघाटन की तारीख तय कर दी है। वाशिंगटन डीसी स्थित एआईसी के मुख्यालय पर बाबासाहेब की 12 फीट की प्रतिमा का अनावरण 14 अक्टूबर 2023 को किया जाएगा। यह मौका इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि भारत के बाहर पहली बार बाबासाहेब आंबेडकर की इतनी बड़ी प्रतिमा लगाई जा रही है। ऐसा कर अमेरिकी अंबेडकरवादियों ने इतिहास रच दिया है। एआईसी के अध्यक्ष राम कुमार जी ने इसकी घोषणा की। उन्होंने लिखा-
इस खबर के सामने आते ही दुनिया भर से बधाईयों का तांता शुरू हो गया। जेएनयू के प्रोफेसर और अंबेडकर चेयर के प्रमुख प्रो. विवेक कुमार ने बधाई देते हुए लिखा-
भारत के मणिपुर राज्य में पिछले दो महीनों से जारी हिंसा की गूंज भले ही दिल्ली में बैठे सत्ताधारियों तक नहीं पहुंच रही हो, दुनिया में इसके कारण भारत की भारी फजीहत हो रही है। इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने सदन में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर दी है और सरकार को घेरा है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस चिंता को समझने की बजाय भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि ईयू में संबंधित सांसदों को स्पष्ट कर दिया गया है कि यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।
ऊपरी स्तर में एक प्रांगण है, जिसके मध्य अगढ़ित पत्थरों से निर्मित एक अर्धवृत्तकक्षीय संरचना है। इस कक्ष का प्रांगण ढली हुई तथा सादी टाइलो्ं से बना है जो कि अब मिट्टी से ढक दिया गया है। टाइलों पर टेढ़ी नक्काशी, वनस्पति, जीव जन्तु, मेष युद्ध, दूध पिलाती गाय, हिरण का पीछा कर तीर छोड़ता धनुर्धारी घुड़सवार, नृत्यांगना, छज्जे में बैठे वार्तालाप करते स्त्री-पुरुष इत्यादि अंकित हैं जो कश्मीर एवं मध्य एशिया की असाधारण कला को दर्शाते हैं। ऐसा अनुमान है कि इन वस्तुओं का निर्माण ईसवी सन् की प्रारंभिक शताब्दियों में किया गया था।