हिमाचल और गुजरात में किस करवट बैठेगा चुनावी ऊंट?

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हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा के चुनाव इस मायने में विशेष हैं कि उत्तर एवं पश्चिम भारत के इन दो राज्यों के ये चुनाव नरेन्द्र मोदी के दो बड़े निर्णयों से प्राप्त परिणामों के बाद हो रहे हैं. विमुद्रीकरण के लगभग तीन माह बाद फरवरी में 5 राज्यों में जो चुनाव हुए थे, उनमें उत्तरप्रदेश में जहां बीजेपी ने समाजवादियों का सफाया कर दिया था, वहीं पंजाब में कांग्रेस सत्ता में आई. पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में बीजेपी सत्ता में रही. लेकिन अब मामला वैसा ही नहीं है. खासकर जीएसटी की जटिलता ने जहां व्यापारी वर्ग को बेहद नाराज कर दिया है, वहीं करों की ऊंची दरों ने आम लोगों का मोहभंग किया है. विमुद्रीकरण का जो नकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, उसकी अंतिम परिणति अब बेरोजगारी के रूप में सामने आने लगी है. निश्चित रूप से ये तथ्य इन दोनों राज्यों के चुनाव पर अपना असर डालेंगे.

तो यहां प्रश्न यह उठता है कि क्या हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस बनी रहेगी और गुजरात में बीजेपी बेदखल हो जाएगी? फिलहाल इन दोनों प्रश्‍नों के जो उत्तर नजर आ रहे हैं, वह यह कि दोनों में से किसी के होने की संभावना नहीं है. 68 सीटों वाली हिमाचल की विधानसभा में कांग्रेस ने 2012 में 36 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. बीजेपी इससे 10 कम रही थी. कांग्रेस ने अपने 83 वर्षीय जिस नेता को भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया है, वे इस बीच लगातार भ्रष्टाचार के मामलों में चर्चा में रहे हैं. ऐसा करके पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण केंद्र से बेदखल कांग्रेस के इस निर्णय ने बीजेपी के हाथों एक अच्छा तीखा और घातक हथियार थमा दिया है और नरेन्द्र मोदी इस हथियार का जमकर इस्तेमाल भी कर रहे हैं.

हिमाचल के 43 प्रतिशत मतदाता युवा हैं. इनके लिए मुख्य मुद्दा है-राज्य का विकास, ताकि उन्हें रोजगार मिल सके. उल्लेखनीय है कि आचार संहिता लागू होने के कुछ ही पहले प्रधानमंत्री ने वहां साढ़े तेरह सौ करोड़ रुपयों की परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी और 15 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का वायदा भी किया था. प्रधानमंत्री की आर्थिक विकास की विभिन्न योजनाओं में पर्यटन शुरू से ही प्राथमिकता पर रहा है, जिसकी हिमाचल में काफी संभावनाएं हैं. प्रधानमंत्री मतदाताओं को इस बात की याद भी दिला रहे हैं.जाहिर है कि बीजेपी के पास कहने के लिए काफी है और करने के लिए भी. कांग्रेस के पास कहने के लिए कुछ नहीं है, सिवाय वायदों के. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का प्रभाव शून्य-सा है. ऐसे में ताज्जुब नहीं कि हिमाचल प्रदेश में बीजेपी का कद पहले से दुगुना हो जाये और कांगेस का घटकर आधा रह जाए.

हालांकि गुजरात के चुनावों में अभी काफी वक्त है, लेकिन इतना निश्चित है कि वहां हिमाचल जैसा वहां कोई चमत्कार होने नहीं जा रहा है. नरेन्द्र मोदी के काल में वहां बीजेपी ने 92 (सरकार बनाने के लिए) से 23 सीटें अधिक (कुल 115) पाई थीं. इस बीच वहां स्थितियां क्रमशः खराब ही होती गई हैं. हार्दिक पटेल के आंदोलन तथा आनंदी बेन पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के निर्णय ने पटेलों को विमुख कर दिया है. व्यापार प्रधान इस राज्य का व्यापारी न केवल जीएसटी से बेहद परेशान है, बल्कि वह अर्थव्यवस्था की मंदी को भी झेल रहा है. तो फिर इस आक्रोश की अभिव्यक्ति कहां हो? कांग्रेस को वोट देने का अर्थ है, अपना वोट खराब करना. बावजूद इसके कांग्रेस के वोटों का प्रतिशत पिछले 38.9 से 2-3 प्रतिशत बढ़ सकता है लेकिन सरकार बीजेपी की ही बनने की संभावना है. यदि इस समय कांग्रेस में आंतरिक कलह नहीं होता तथा राष्ट्रीय नेतृत्व किसी अन्य के हाथ में होता, तो वह बीजेपी को एक अच्छी टक्कर दे सकती थी. किन्तु कुल मिलाकर वहां स्थिति कमोवेश पहले जैसी ही बनी रहेगी, ऐसा लगता है.

डॉ. विजय अग्रवाल वरिष्ठ टिप्पणीकार हैं. एनडीटीवी से साभार

गुजरात की सभी सीटों पर केंडिडेट उतराने की तैयारी में बसपा

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अहमदाबाद। गुजरात चुनाव पर देश भर की नजरें हैं. कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल अपनी-अपनी चुनावी रैलियां और साभाएं कर रहे हैं. इस बीच बहुजन समाज पार्टी भी गुजरात की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. जिसके बाद से भाजपा और कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि गुजरात में अगर मायावती सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगी तो वो जिग्नेश के चलते दलित वोटों पर हक जता रही कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी होगी क्योंकि माया की एंट्री से दलित वोट बंटेंगे. हालांकि गुजरात में बसपा का जनाधार नहीं है, फिर भी जीत-हार में उसकी बड़ी भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है.

गुजरात में 7 फीसदी दलित और 11 फीसदी आदिवासी मतदाता हैं. गुजरात में 40 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जो दलित और आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं. इनमें से 27 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए और 13 सीटें अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हैं. सारा दारोमदार इन्हीं चालीस सीटों पर है.

बसपा ने गुजरात की 182 सीटों पर पूरी ताकत के साथ उतरने का मन बनाया है. बसपा ने 2002 के विधानसभा चुनावों में अपने 34 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, जिसमें से कोई भी जीत नहीं सका था. 2002 में बसपा को 0.32 फीसदी वोट मिले थे. 2007 के विधानसभा चुनावों में बसपा ने 166 उम्मीदवार उतारे और सभी को हार का मुंह देखना पड़ा. हालांकि पार्टी को अपना वोट शेयर बढ़ाने में जरूर कामयाबी मिली, उसे 2.62 फीसदी वोट मिला. 2012 में बसपा 163 विधानसभा सीटों पर लड़ी उसे 1.25 फीसदी वोट मिला. यानी 2007 की तुलना में बसपा को नुकसान का सामना करना पड़ा.

दलित चिंतक अशोक भारतीय ने कहा कि कांग्रेस ने जरूर जिग्नेश मेवाणी को गले लगाया है लेकिन वो बहुत ज्यादा प्रभाव डालने में सफल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि जिग्नेश का आधार गुजरात के शहरी दलित मतदाताओं में है. इसके अलावा गुजरात के जमीन से जुड़े दलित नेता बसपा के साथ खड़े हैं. ऐसे में कांग्रेस जिग्नेश का समर्थन लेकर भी बहुत ज्यादा करिश्मा नहीं करने वाली है.

प्रद्युमन हत्याकांड: आरोपी छात्र ने कबूला जुर्म, कहा- बस मैंने उसे मार डाला

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गुरूग्राम। रेयान इंटरनेशनल स्कूल में 7 साल के प्रद्युम्न की हत्या के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है. जहां हरियाणा पुलिस ने बस कंडक्टर अशोक कुमार को आरोपी ठहराया था वहीं सीबीआई ने रेयान स्कूल के 11वीं में पढ़ने वाले छात्र को आरोपी बताया है.

अशोक को केंद्रीय जांच एजेंसी ने क्लीन चिट दे दी है. सीबीआई के अनुसार आरोपी छात्र ने खुद ये बात कबूली है कि उसने प्रद्युम्न की हत्या कर दी है. सीबीआई अधिकारी ने बताया कि 11वीं के छात्र ने प्रद्युम्न को कुछ जरूरी बात बताने का लालच देकर वॉशरूम में बुलाया और कुछ ही सेकेंड बाद गला रेतकर उसकी हत्या कर दी. वो चाकू सोच-समझकर लाया था कि उसे किसी न किसी की हत्या करनी है. प्रद्युम्न गलत समय पर उसकी आंखों के सामने पड़ गया.

सीबीआई के मुताबिक प्रद्युम्न नहीं तो किसी न किसी को तो उसे मारना ही था. पूछताछ के दौरान आरोपी छात्र ने बताया कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था. मैं पूरी तरह ब्लैक हो गया था और बस मैनें उसे मार डाला. सीबीआई ने बताया कि अशोक को आरोपी बताते हुए हरियाणा पुलिस ने जिस चाकू को पेश किया था उसी चाकू से आरोपी छात्र ने प्रद्युम्न का कत्ल किया था. सीबीआई ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी छात्र को वॉशरूम में चाकू ले जाते हुए देखा गया था. चाकू को वॉशरूम के कमोड से बरामद किया गया है. टीचर और बच्चों से पूछताछ के बाद पता चला कि 11वीं का हाफ इयरली एग्जाम चल रहे थे. 6 सितंबर को आरोपी ने अपना पहला एग्जाम दिया था और 8 सितंबर को छात्र का दूसरा एग्जाम था.

दिल्ली आना मना है

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Pollution in delhi
दिल्ली धुंआ-धुंआ है. लोग नाक और मुंह ढक कर घूम रहे हैं. बावजूद इसके अंदर जहर ही घोट रहे हैं. आखिर हम कैसे समाज में रह रहे हैं, जहां न साफ पानी है और न साफ हवा. आप सड़कों पर निकल जाइए, हवा में उड़ती प्लास्टिक जरूर दिख जाएगी. गायों का पेट चीरा जाता है तो उसमें से पांच और दस किलो प्लास्टिक निकल रहा है. आप सब्जी खरीदने चले जाइए, एक बार में आपको कम से कम दस प्लास्टिक मिलेगा. थैला लेकर जाने के बावजूद. एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की जो स्थिति है, उसके कारण पच्चीस से तीस हजार लोग मर सकते हैं. तो क्या हम उस स्थिति में पहुंच गए हैं जहां हम राह चलते दम घुटने से मरेंगे और हमारी पीढ़ियां सड़कों पर तड़प-तड़प कर मरेंगी? देश की आजादी को सिर्फ सात दशक हुए. आप सरकारों से पुछिए कि उन्होंने इन सत्तर सालों में क्या किया, तो वो इतनी योजनाएं गिनवाएंगे कि आप माथा पकड़ कर बैठ जाएंगे. सरकारें कहेंगी कि उन्होंने सैकड़ों कॉलेज बनवा दिए, बड़े-बड़े अस्पतालें खड़े कर दिए, फ्लाईओवर, मेट्रो बन गए. देश भर में बिजली पहुंच गई, कच्ची सड़कें पक्की हो गई. मॉल खुल गए, पूरा देश चकाचक हो गया. देश की सेना चाक चौबंद हो गई, विदेशों से हमारे रिश्ते सुधर गए. सच है, ऐसा हुआ भी है. लेकिन…… लेकिन साफ हवा का क्या? साफ पानी का क्या? गुणवत्ता शिक्षा का क्या, एक आम मरीज को इंसान समझने वाले अस्पताल का क्या? ये सब कहां है? इंसान को जीने के लिए सबसे पहले स्वच्छ हवा और साफ पानी चाहिए, इनका क्या? यह ठीक है कि हमारी सरकारों ने बहुत काम किया लेकिन ये चीजें क्यों नहीं दे पाईं. यह सच है कि पर्यावरण को सुधारने की जिम्मेदारी हर इंसान की है, लेकिन जब कोई इंसान खुद की जिम्मेदारी को समझ कर कोई काम न करे तो फिर आखिर उससे वो काम जबरन ही करवाया जा सकता है. जैसे चोरी के लिए कानून न हो तो चोरी बढ़ती रहे. इसके खिलाफ कानून इसीलिए बने हैं क्योंकि यह नहीं होना चाहिए. इसी तरह बेहतर समाज को बनाने के लिए कई और भी बाते हैं जो कानून बनाकर सुधारे गए हैं. कानून न बने होते तो आज भी विधवाएं पति के साथ ही जला दी जाती लेकिन यह रुका क्योंकि इसके खिलाफ कानून बनें. इसी तरह प्रदूषण का मामला है. दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं है, नोएडा का पानी पीने लायक नहीं है. यानि अगर आपको दिल्ली-एनसीआर में रहना हो तो आपको साफ हवा या स्वच्छ पानी में से किसी एक को चुनना होगा. यह समझने की जरूरत है कि यह इतना भयानक है कि इसको रोकने के लिए जो कानून जरूरी हो वह बनाया जाना चाहिए था, जो सख्ती बरतनी जरूरी थी, वह बरतनी चाहिए थी. लेकिन तमाम सच्चाईयों के बीच एक सच्चाई यह भी है कि हमारी सरकारें तो एक पॉलिथीन तक पर बैन लगाने का माद्दा नहीं दिखा सकी, वो आखिर पर्यावरण को सुधारने के लिए दूसरे उपाय क्या करेगी?

दलित बच्चे को दाखिला नहीं दे रहा मनुवादी अध्यापक

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बांदा। पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया, लेकिन यह क्या हमारे समाज में एक बच्चे को पढ़ने से रोका जा रहा है यानि इंडिया को बढ़ने से रोका जा रहा है. यूपी के बांदा में एक ऐसा ही मामला सामने आया है. जहां एक अध्यापक एक दलित बच्चे का दाखिला सिर्फ इसलिए नहीं ले रहा है क्योंकि बच्चा दलित समाज से है.

दरअसल, बांदा के नरैनी में दलित महिला अपने बेटे का स्कूल में दाखिला कराने के लिए पिछले सात महीने से चक्कर लगा रही है. दलित महिला जिस स्कूल में रसोइए का काम कर चुकी है, उसी स्कूल का प्रधानाध्यापक स्कूल में बच्चे का नाम लिखने को तैयार नहीं है.

नरैनी के बरुवा कालिंजर की रहने वाली दलित बुइया देवी ने सोमवार (6 नवंबर) को जिलाधिकारी को अर्जी देकर बच्चे के दाखिले की गुहार लगाई है. इसमें कहा कि गांव के प्राथमिक स्कूल में प्रधानाध्यापक बच्चे का एडमिशन नहीं कर रहे हैं. अप्रैल से वह बेसिक शिक्षा विभाग में चक्कर लगा रही है. निजी स्कूलों में पढ़ाने की उसकी हैसियत नहीं है.

प्रधानाध्यापक का कहना है कि अपने स्कूल में वे दलितों का दाखिला नहीं लेते. बुइया देवी ने खंड शिक्षा अधिकारी और एसडीएम को भी अर्जी दी थी. यहां तक कि विधायक के कहने पर भी प्रधानाध्यापक ने दलित बच्चे को दाखिला नहीं दिया.

चीन ने एक रात में हटाया दिल्ली जैसा स्मॉग

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नई दिल्ली। दिल्ली में जिस तरह की प्रदूषण वाली धुंध छाई हुई है, वैसे ही हालात चीन की राजधानी पेइचिंग में पिछले चार दिनों से थी. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के यहां पहुंचने से पहले ही धुंध को हटा दिया गया. ट्रंप को प्रदूषण से कोई दिक्कत न हो इसलिए चीन ने आसमान में छाई धुंध की मोटी परत को मंगलवार रात में ही हटा दिया.

दरअसल, चीन की राजधानी में बीते चार दिनों से धुंध थी और बुधवार को ट्रम्प को यहां पहुंचना था, चीन ने ऐसे में कमाल दिखाया और ट्रंप के आने से पहले आपातकालीन उपायों के जरिये आसमान साफ किया. चीन ने गाड़ियों और कंस्ट्रक्शन पर अस्थाई रोक लगा दी. स्टील, सीमेंट और कोयला कंपनियों के प्रोडक्शन पर अस्थाई रोक लगा दी. दूसरे शहरों से आने वाले वाहनों पर रोक लगा दी गई. लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने को कहा गया. एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया गया जिससे पानी की बौछार के साथ डस्ट पार्टिकल्स नीचे आ गए.

दूसरी ओर नई दिल्ली में बुधवार को एक विशेष मेहमान- ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स आए. लेकिन उन्हें धुंध के बीच ही एयरपोर्ट पर उतरना पड़ा. सोशल मीडिया पर कई भारतीय यूजर्स ने इस बात पर सवाल उठाया कि आखिर हम चीन जैसे आपातकालीन उपाय क्यों नहीं उठा सकते.

अब सवाल ये है कि भारत में क्या ये संभव है? देखा जाए तो दोनों ही देश घनी आबादी वाले हैं और जिन शहरों की बात की जा रही है वहां काफी भीड़ है. ऐसे में वाहनों पर रोक लगाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत बनाना होगा साथ ही तकनीक का इस्तेमाल भी करना होगा.

इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ आधार को लिंक कराना जरूरी

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नई दिल्ली। अब इंश्योरेंस पॉलिसी को भी आधार नंबर से लिंक कराना जरूरी कर दिया गया है. यह जानकारी बीमा नियामक आईआरडीएआई (बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण) ने दी है. वैसे तो आधार कार्ड काफी अहम चीजों के लिए पहले ही अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन अब आपको अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी को भी आधार नंबर से लिंक करवाना होगा.

बीमा नियामक IRDAI ने बीमाकर्ताओं (इंश्योरर)- जनरल और लाइफ-से कहा है कि वो अगले आदेश का इंतजार किए बिना इस नियम को तत्काल प्रभाव से लागू करें. आधार को इंश्योरेंस पॉलिसी से लिंक करवाना धन-शोधन निवारण (रिकॉर्ड्स का रखरखाव) के दूसरा संशोधन नियम, 2017 के तहत अनिवार्य किया गया है. नियामक ने यह बात 8 नवंबर 2017 को जारी किए अपने बयान में कही है. इरडा ने बताया, “ये नियम कानूनन मान्य हैं और जीवन एवं सामान्य बीमा कंपनियों (स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं सहित) को अगले निर्देशों का इंतजार किए बिना इसे लागू करना होगा.”

IRDAI ने कहा है कि बीमा सहित तमाम वित्तीय सेवाओं के लिए आधार और पैन/ फॉर्म 60 का उल्लेख करना अनिवार्य हैं. आपको जानकारी के लिए बता दें कि फॉर्म 60/61 उन लोगों की ओर से भरा जाता है जिनके पास पैन कार्ड नहीं होता है और वो ऐसे लेनदेन कर रहे हैं जिसके लिए पैन की जानकारी देना आवश्यक होता है.

IRDAI ने बताया, “1 जून 2017 को एक अधिसूचना के माध्यम से केंद्र सरकार ने धन-शोधन निवारण (रिकॉर्ड का रखरखाव) के दूसरे संशोधन नियम, 2017 को अधिसूचित किया था जो कि बीमा सहित वित्तीय सेवाओं का लाभ उठाने के लिए आधार और पैन/फॉर्म 60 को अनिवार्य करती है. साथ ही मौजूदा पॉलिसी के साथ भी इसे (आधार नंबर) लिंक करवाना जरूरी है.”

आधार को लिंक कराने का नियम जीवन बीमा कंपनियों और सामान्य बीमा कंपनियों पर लागू होता है जिसमें स्वास्थ्य बीमा कंपनियां भी शामिल हैं. भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण या आईआरडीएआई को पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए संसद की ओर से एक अधिनियम की मदद से गठित किया गया है. इसमें 10 सदस्य होते हैं जिसमें एक चेयरमैन, पांच पूर्णकालिक सदस्य और चार अंशकालिक सदस्य होते हैं. देश में 24 लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां और 33 बीमाकर्ता (स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं सहित) हैं जो देश में इस तरह की सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं.

मायावती की नसीहत- “नोटबंदी माफी दिवस” मनाए बीजेपी

नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर बीएसपी प्रमुख मायावती ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्‍होंने मोदी सरकार के इस फैसले को देश के इतिहास का एक काला अध्याय बताया है. उनका मानना है कि नोटबंदी का फैसला जल्दबाजी में और नासमझी में उठाया गया कदम था. बीएसपी प्रमुख ने कहा कि सरकार के इस फैसले से मुट्ठीभर नेताओं और उद्योगपतियों को ही फायदा हुआ है. देश की जनता को तो तंगी और बेरोजगारी जैसे कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर मायावती का कहना है कि. आज सरकार की नीति के कारण ही सरकारी बैंक कंगाल हो रहे हैं. क्योंकि अभी हाल ही में सरकारी बैंकों को 2.11 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी मुहैया कराई गई है. यानि देश की आम जनता की गाढ़ी कमाई का धन बैंकों में डूबता जा रहा है.

बीएसपी प्रमुख ने ये भी कहा कि मोदी सरकार की मनमानी और अड़ियल रवैये के कारण ही देश एक प्रकार से आपातकाल के दौर से गुजर रहा है. जिससे छुटकारा पाने के लिए लोगों को उनकी भावनाओं के मकड़जाल से मुक्त होना होगा. साथ ही उन्होंने ‘एन्टी ब्लैक मनी डे’ मना रही बीजेपी को सालाह देते हुए कहा कि वे इनकी जगह पर ‘नोटबन्दी माफी दिवस मनाएंगे तो यह ज्यादा बेहतर होगा.

हिमाचल में हुआ 74 प्रतिशत मतदान, 18 दिसंबर होगी गिनती

चुनाव

शिमला। हिमाचल प्रदेश की 68 विधानसभा क्षेत्रों के लिए आज मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया. राज्य में कड़ी सुरक्षा के बीच वोटिंग हुई. राज्य में 74 फीसदी मतदान हुई. मतदान को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम पुख्ता किए गए थे.

हिमाचल चुनाव में इस बार सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और वर्तमान मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बीच है. वहीं बहुजन समाज पार्टी 42 सीटों से चुनाव लड़ रही है, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) 14, स्वाभिमान पार्टी, लोक गठबंधन पार्टी छह-छह और सीपीआई तीन सीटों से चुनावी मैदान में है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हिमाचल प्रदेश के मतदाताओं को घर से बाहर निकलने और राज्‍य में हो रहे विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्‍या में वोट देने की अपील की. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आज देवभूमि हिमाचल प्रदेश में मतदान का दिन है. मेरी विनती है कि सभी मतदाता लोकतंत्र के महापर्व में भाग लें और भारी संख्या में मतदान करें.’

भीम आर्मी और चंद्रशेखर रावण को लेकर बड़ी खबर

सहारनपुर। भीम आर्मी भारत एकता मिशन सहारनपुर द्वारा आज 9 नवम्बर को सहारनपुर में रखा गया कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है, हालांकि संस्थान के पदाधिकारी प्रशासन को अपना ज्ञापन देंगे. यह जानकारी संस्थान के सदस्यों ने दी. प्रेस रिलिज जारी कर उन्होंने मांगे पूरी नहीं होने पर 3 दिसम्बर को सहारनपुर में बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है. संस्था के सदस्यों ने कहा कि अगर प्रशासन ने हमारी मांगे नहीं मानी तो हम इतना बड़ा आंदोलन करेंगे जिसका अंदाजा देश के प्रधानमंत्री भी नहीं लगा सकते. असल में निकाय चुनाव के कारण सहारनपुर में धारा 144 लगी हुई है, ऐसे में धरना के लिए ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर कार्यवाही की आशंका थी, जिसको देखते हुए यह फैसला लिया गया है. भीम आर्मी के पदाधिकारियों का कहना है कि हम लोग हमेशा संविधान के दायरे में रहकर काम करते हैं तो हमें आचार संहिता का ध्यान रखते हुए और प्रशासन का सम्मान करते हुए ये फैसला करना पड़ा. उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर रावण भी ऐसा ही चाहते थे. इस बीच चंद्रशेखर आजाद रावण को लेकर बड़ी खबर यह आ रही है कि उनपर से जल्दी ही रासुका हटाया जा सकता है. भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने प्रशासन के आश्वासन के बाद यह बात कही है. उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा एडवोकेट चंद्रशेखर, विनय रत्न औऱ मंजीत नोटियाल पर की गई कार्रवाई बेबुनियादी है. संस्थान के पदाधिकारियों का कहना है कि हमारे कहने पर प्रशासन ने चंद्रशेखर रावण को इलाज के लिए मेरठ भेज दिया जहां उनकी हालत में काफी सुधार है.

पद्मावती के विरोध में आए पूर्व राजघराने वजह जानिए

एक दिसंबर को रिलिज होने जा रही फिल्म पद्मावती का विरोध हर दिन बढ़ता जा रहा है. अब राजस्थान के पूर्व घराने एक साथ इस फिल्म के विरोध में उतर आए हैं. उनका कहना है कि फिल्म में रानी पद्मावती को गलत तरीके से दिखाया गया है. जिन घरानों ने विरोध किया है और विरोध के जो कारण बताए हैं, डालते हैं उस पर एक नजर- पद्मावती की कहानी सुनकर बड़े हुए हैं, छेड़छाड़ नहीं होने देंगे हम रानी पद्मावती के शौर्य औ बलिदान की कहानियों के साथ बड़े हुए हैं. जहां हजारों महिलाओं के साथ अस्मिता को बचाने के लिए जौहर किया था उसे कोई कैसे  ड्रीम सीक्वेंस का नाम देकर प्रेम कथा बता सकता है? – दिया कुमारी, जयपुर घराना पहले मेवाड़ के राजपरिवार को दिखाई जाए फिल्म हम विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं. हमारी मांग है कि ऐसी कमेटी बनाई जाए जिसमें पूर्व महाराणा महेंद्र सिंह के परिवार और इतिहासकारों को शामिल किया जाए. पहले उके समक्ष फिल्म की स्क्रीनिंग हो – रणधीर सिंह भिंडर, भिंडर घराना भंसाली ने इतिहास को उपन्यास बनाकर पेश कर दिया भंसाली ने इतिहास को उपन्यास बनाकर पेश कर दिया है. इसी तरह कोई पीएम मोदी के चरित्र से जोड़कर कुछ भी दिखाएगा, तो क्या सेंसर बोर्ड पास कर देगा. क्या बोर्ड को पता भी है कि ग्रेनेडियर्स (सेना की एक यूनिट) का स्थापना दिवस जौहर दिवस के दिन ही मनाया जाता है. – महेन्द्र सिंह मेवाड़,  मेवाड़ घराना डिस्क्लेमर से कुछ नहीं बदलेगा निर्देशक एक डिस्क्लेमर से अपनी स्क्रिप्ट का बचाव करेंगे कि किरदार काल्पनिक है, लेकिन राजस्थान को गलत तथ्यों से काफी चोट पहुंचेगी क्योंकि यहां का हर कण पद्मावती के बलिदान को जानता है. – सिद्धी कुमारी, बीकानेर भंसाली पद्मावती के परिवार से तो बात कर लेते भंसाली से पिछले दो सालों से पद्मावती से जुड़े तथ्यों को फिल्म में शामिल करने को कहा जा रहा है. उन्हें कम से कम रानी पद्मावती के घराने से तो बातचीत कर तथ्यों की जानकारी लेनी चाहिए थी. – अंशिका कुमारी, करौली घराना घरानों की आपत्ति से अलग राजस्थान के इतिहासकार भी भंसाली का विरोध कर रहे हैं. राजस्थान के इतिहास के जानकार राव शिवराजपाल सिंह का कहना है कि यदि भंसाली को रानियों को दरबार में नृत्य करते हुए ही दिखाना था तो पद्मावती की जगह किसी काल्पनिक किरदार की कहानी प्रस्तुत कर देते. वे विवाद को भुनाते हैं. वो मुस्लिम देशों में फिल्म के प्रति जिज्ञासा जगाकर मार्केट बनाना चाहते हैं, यह गलत है.  साभारः दैनिक भास्कर

आदिवासी सुपरमॉम मेरीकॉम ने रचा इतिहास

वियतनाम। सुपरमॉम कही जाने वाली बॉक्सर एमसी मेरीकॉम ने इतिहास रच दिया है. मेरीकॉम ने सातवें एशियन वुमन बॉक्सिंग चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल जीत लिया है. शानदार बॉक्सर ने उत्तर कोरिया की किम ह्यांग मी को हराकर यह गोल्ड अपने नाम किया. यह एशियन चैंपियनशिप में मैरीकॉम का लगातार पांचवा गोल्ड है. इसके अलावा मैरीकॉम पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन भी हैं. ऐसा करने वाली वह इकलौती बॉक्सर हैं. गौरतलब है कि मेरीकॉम तीन बच्चों की मां और सासंद भी हैं. वे संभवतः देश की ऐसी पहली खिलाड़ी हैं, जिन्होंने सांसद रहते हुए एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीता है. इससे पहले कांग्रेस के नवीन जिंदल और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह भी सांसद रहते अंतरराष्ट्रीय खिताब जीत चुके हैं, हालांकि उनका पदक एशियन चैंपियनशिप में नहीं है.