प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर में 30 हजार मौतों की आशंका

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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. हालत इतनी खराब है कि तमाम स्कूल बंद कर दिए गए हैं और लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है. प्रदूषण से खतरे की बात करें तो बुधवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 478 पर पहुंच गया. मंगलवार को यह 448 था. इस बीच इस प्रदूषण के कारण जो सबसे डरावनी खबर आ रही है, वह यह है कि इसके कारण दिल्ली-एनसीआर में 30 हजार मौतों की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञ यह अंदाजा सांस के कारण बढ़ रहे मरीजों की संख्या को देखते हुए लगा रहे हैं. पिछले तीन दिन में एम्स में सांस और हार्ट से जुड़े मरीज 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं. तो फोर्टिस अस्पताल में पिछले 48 घंटे में सांस से जुड़े मरीज 25 फीसदी तक बढ़े हैं. एम्स के निदेशक और जाने-माने पल्मोनोलोजिस्ट डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इस खतरनाक प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर में 30 हजार मौतों की आशंका जताई है.

भारत में भी भर्ती करेगा ऐप्पल

हर कोई माइक्रोसॉफ्ट, फेसुबक, ऐप्पल जैसी कंपनियों में काम करना चाहता है. इन कंपनियों में काम करने के इच्छुक युवाओं के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि ऐप्पल भारत में भी लोगों का चयन करने जा रहा है. इस क्रम में ऐप्पल इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद में कैंपस प्लेसमेंट के लिए जरिए उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा.

ऐप्पल के साथ आईआईआईटी हैदराबाद में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, फिलिप्स भी आ रही है. कॉलेज के प्लेसमेंट हैड का कहना है कि ऐप्पल ने इस साल कैंपस प्लेसमेंट करने का फैसला किया है. हालांकि कंपनी ग्रेजुएट उम्मीदवारों को अपने टेलेंट का प्रदर्शन करने का मौका देगी. रिपोर्ट्स के अनुसार 350 बीटेक, बीई आदि के विद्यार्थी इस प्लेसमेंट में हिस्सा लेंगे.

वहीं आगे के प्लेसमेंट की प्रक्रिया अगले महीने से शुरू की जाएगी. बता दें कि ऐप्पल डिग्री पर ज्यादा ध्यान नहीं देता है, जबकि टेलेंट को देखता है और उनके टास्क के प्रदर्शन को लेकर उम्मीदवारों का चयन किया जाता है. चयनित होने पर उम्मीदवारों को लाखों रुपये सैलरी भी दी जाएगी.

लखनऊ का इकाना स्टेडियम हो सकता है अफगानिस्तान का घरेलू मैदान

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लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बना इकाना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम संभवत: अफगानिस्तान की राष्ट्रीय टीम का घरेलू स्टेडियम हो सकता है. अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के सदस्यों ने लखनऊ में इकाना स्टेडियम का दौरा किया और स्टेडियम की सुविधाओं की सराहना की. आईपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला ने बताया कि इकाना स्टेडियम को उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ ने पहले ही अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) दे दिया है. अफगानिस्तान बोर्ड की टीम ने कल लखनऊ में स्टेडियम का दौरा किया था और अब जो भी फैसला लेना होगा वह बीसीसीआई और अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी लेंगे. इकाना स्टेडियम के प्रबंध निदेशक उदय सिन्हा ने बताया कि कल अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के तीन सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्टेडियम का निरीक्षण किया था. सिन्हा का कहना है कि अफगान क्रिकेट बोर्ड के सदस्यों ने स्टेडियम की सुविधाओं की तारीफ की और उम्मीद जताई कि वह इस संबंध में बीसीसीआई के अधिकारियों से बात करेंगे.

उन्होंने कहा कि स्टेडियम पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है. हाल ही में यहां रणजी और दिलीप ट्रॉफी के सफल क्रिकेट मैच हो चुके हैं. इसके अलावा लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और कई पांच सितारा होटल होने के कारण अफगानिस्तान टीम को यहां आने जाने में कोई परेशानी नही होगी.

दिल्ली में फैला जहर असल में नैतिक प्रदूषण है

भारत में गरीबी या विकास की समस्या असल में व्यवस्था की नहीं बल्कि धर्म और नैतिकता की समस्या है, ये विकास की रणनीति या व्यवस्था का मुद्दा बिलकुल नहीं है. इस बात को प्रदूषण के उदाहरण से समझिये. एक आदिवासी दलित बहुल इलाके में कुछ साल मैंने वाटर और लैंड मेनेजमेंट का काम किया, ग्राम पंचायतों पटवारियों, गांव के दबंगों और एकदम गरीब दलितों और आदिवासियों को एकसाथ लेकर पानी बचाओ जमीन सुधारो की चुनौती से रोज जूझना होता था. उस समय पता चला कि भारतीय गाँवों में लोगों में अपनी ही जमीन, सडक, पहाड़, नदी, आदि को बचाने के लिए एक जैसा उत्साह नहीं है.

इसके कारण पर विचार करते हुए एक गजब की बात तब उजागर हुई थी कि भारतीय समाज में एक ही सडक एक तालाब एक पहाड़, मैदान या यहाँ तक कि एक पेड़ पर भी सभी लोगों का एक जैसा अधिकार नहीं होता. नदी, पोखर, झरने या तालाब के साफ़ हिस्से पर और कुओं पर पहला अधिकार ब्राह्मणों ठाकुरों बनियों का है, फिर ग्रामीण इलाकों के खुले मैदानों, सडकों, सार्वजनिक स्थलों का भी यही हाल है. ऐसे में दलितों आदिवासियों की बड़ी आबादी को जब तालाब या नाला सुधारने के लिए इकट्ठा किया जाता है तो उनमें कोई उत्साह नहीं होता. कारण ये कि उस तालाब या कुएं पर उनका अधिकार नहीं है. इसलिए ये तालाब या कुआं ठीक भी हो जाए तो उन्हें उसका लाभ मिलेगा ये बहुत निश्चित नहीं है. दुसरा कारण कि ये गरीब लोग हैं जिनके पास जमीन नहीं हैं, इसलिए पानी बचाकर खेती करने का कोई उत्साह इनमें हो भी नहीं सकता.

याद कीजिये, बाबासाहेब अम्बेडकर को चवदार तालाब सत्याग्रह क्यों करना पडा था. वो केस स्टडी भारत के धर्म और संस्कृति द्वारा मानव जीवन और उसके प्रकृति से सम्बन्धों के बारे में किये गए सभी दावों की पोल खोल देती है. “सर्वे भवन्तु सुखिनः” “वसुधैव कुटुंब” और “पुत्रोहम प्रथ्विव्याम” इत्यादि कम से कम भारतीय संस्कृति के लिए सबसे बड़े झूठ हैं. यहाँ समाज जीवन और प्रकृति पर हर व्यक्ति का एकसमान अधिकार नहीं है. यहां वर्ण और जाति से सबकुछ तय होता है. ये जीवन जीने का एक असभ्य और बर्बर तरीका है जिसकी पोल आधुनिक शहरी जीवन में खुलने लगी है.

जो संस्कृति ब्रह्मा के शरीर के चार हिस्सों से अलग अलग ढंग से पैदा हुई है उसने राजधानी से लेकर गांवों जंगलों तक में किस तरह का पदानुक्रम बना रखा है ये देखिये. एक गली मुहल्ले तक में प्राकृतिक या कुदरती संसाधन की मालकियत भी एकसमान नहीं है. ऐसे में उसे बचाने के लिए इकट्ठा होने का या सामूहिक प्रयास करने का सवाल ही कहाँ उठता है. प्राकृतिक संसाधनो को बचाने के लिए सामुदायिक प्रयास की आवश्यकता दुनिया भर में स्थापित हो चुकी है लेकिन भारत में एक साझे लक्ष्य से सहानुभूति रखने वाला समुदाय मिलना बड़ा कठिन है. ऐसे में असभ्य भारतीय समाज अपने खुद के बच्चों के भविष्य के लिए भी इकट्ठा नहीं हो पा रहा है अपनी व्यवस्था और सरकार पर दबाव नहीं बना पा रहा है. आज दिल्ली में जो जहर फैला है उसका क्या कारण हो सकता है?

ये असल में एक नैतिक प्रदूषण की हालत है. एक ऐसे समाज में जहां एकसाथ बैठना खाना पाप हो, एक-दूसरे से संबंधित होने के लिए आपको जाति और सरनेम पता करने की जरूरत पड़ती हो वो समाज एक साझे सामूहिक भविष्य की कल्पना कैसे कर सकता है? हर आदमी का सड़क, तालाब, पेड़, बगीचे पर अलग अलग किस्म का हक या लगाव है. जब प्राकृतिक संसाधन नष्ट होता है तो सबको इकट्ठा एक जैसा नुक्सान का दुःख नहीं होता. जिस अनुपात में आप उससे संबंधित थे उसी अनुपात में दुःख होता है. ये भारतीय संस्कृति की गजब की विशेषता है.

अगर पाषाण कालीन या वैदिक या मध्ययुगीन अवस्था में जी रहे होते तो ये अनैतिकता और ये असभ्य जीवन शैली आसानी से चल सकती थी. लेकिन आज के आधुनिक समाज में नैतिकता से शून्य हो चुकी जीवन शैली नहीं चलने वाली. नगरीय जीवन जीने के लिए एक न्यूनतम नैतिकता बोध की और सभ्यता बोध की आवश्यकता होती है जो भारत की संस्कृति में नहीं है. अब वायु, पानी, जमीन जंगल इत्यादि को जब तक सामूहिक सम्पत्ति न समझा जाएगा तब तक भारत जैसे असभ्य समाज आधुनिक जीवन के योग्य नहीं बन पाएंगे.

दिल्ली या चंडीगढ़ की हवा को ठीक करने के उपाय नहीं किये जा रहे हैं. कारण वही है. सबको लगता है कि अपना घर साफ़ कर लिया अपनी गली में बगीचा लगा लिया और हो गया समाधान. जैसे गाँव के ब्राह्मण ठाकुर ये सोचते हैं कि तालाब का अपना हिस्सा साफ़ रहे तो हम साफ़ पानी पी सकते हैं. या अपने मुहल्ले का कुआं साफ़ हो गया तो सब ठीक हो गया. आजकल एक और आदत फ़ैल रही है. शहर की सामूहिक जीवन की चिंता किये बिना अपना आसन बिछाकर प्राणायाम कर लीजिये और हो गया समाधान. ये प्राणायाम और योग की मानसिकता भी एकदम खंडित और स्वार्थी जीवनशैली को जन्म देती है. एक घर के कोने में बैठकर प्राणायाम कर लेने से मान लिया जाता है कि आपका काम हो गया. लेकिन शहर और समाज को एक बड़े इकोसिस्टम की तरह देखने का नजरिया इससे नहीं आने वाला है.

जीवन और जगत को खंडित करके देखने की ‘वैदिक बुद्धिमत्ता’ असल में अब मूर्खता साबित हो रही है. वैदिक बुद्धिमत्ता सब तरह की परिस्थितियों को खंड खंड करके देखती है. जैसे ब्रह्मा को चार खंडों में बांटकर उसने चार वर्ण बना दिए. वे एकोलोजी या इकोसिस्टम का सिद्धांत समझ ही नहीं सकते. गाँव के ब्राह्मण ठाकुर ये नहीं समझना चाहते कि गाँव का भूमिगत जल अगर प्रदूषित है तो एक कुएं को साफ़ करने का कोई अर्थ नहीं है. ठीक इसी तरह दिल्ली चड़ीगढ़ के प्रभावशाली लोग हैं जो इकोसिस्टम को नहीं समझते, वे अपने घर में एयर कंडीशन और प्यूरीफायर लगाकर सुरक्षित नहीं हो सकते.

भारत के गाँवों से लेकर शहरों तक तो वही की वही समस्या है, क्योंकि इनका धर्म और संस्कृति एक ही है. ये किसी भी शहर या गाँव में चले जाएं ये समग्रता की भाषा में सोच ही नहीं सकते. ये खंड खंड पाखंड के आदि हो चुके हैं. एक साझे सामूहिक जीवन का विरोध करते हुए इन्होंने जो धर्म और संस्कृति पैदा की है वो अब इनके शरीर और मन के जीवन को भी खंडित कर देना चाह रही है. अब इनसे कहना चाहिए कि आपके फेफड़े और ह्रदय (छाती) अगर प्रदुषण से मर रहे हैं तो चिंता मत कीजिये ये क्षत्रिय हिस्सा है जो मर रहा है, अभी भी आपके शरीर का मस्तिष्क अर्थात ब्राह्मण हिस्सा सही सलामत है. ऐसे तर्क अभी तक आये क्यों नहीं ये भी आश्चर्य की बात है.

भारत के धर्म और संस्कृति ने जैसा समाज बनाया है उसमे व्यवस्था, कानून आदि को जिम्मेदार ठहराने से पहले हमें इस देश की नैतिकता को ठीक से पकड़ना होगा. जो समाज जीवन और प्रकृति ही नहीं परमात्मा तक पर अलग अलग ढंग से अधिकार और सामित्व देता हो वहां सामूहिक साझे भविष्य के लिए पूरी कौम को इकट्ठा करना असंभव है. यही भारत की गुलामी और हार की सबसे बड़ी वजह रही है. बहर्तीय समाज किसी भी अच्छे प्रयास में यहाँ तक कि आत्मरक्षा के लिए भी इकट्ठा नहीं हो सका है.

ऐसे में प्रदूषण जैसी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी को सुलझाने का भारतीय असभ्य समाज का जो तरीका है उसपर गौर कीजियेगा. ये सोच और तरीका गहराई से देखिये, इस तरीके में भारतीय संस्कृति की मूल समस्या – अनैतिकता और अमानवीयता – साफ़ नजर आती है.

– संजय जोठे

करिश्मा के ब्वायफ्रेंड ने अपनी पत्नी को दिया तलाक

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पिछले काफी समय से हर कोई यह बात जानना चाहता है कि आखिर कब करिश्मा कपूर अपने ब्वॉयफ्रेंड संदीप तोषनीवाल के साथ शादी कर रही हैं। संदीप मुंबई बेस्ड बिजनेसमैन हैं। काफी समय से चर्चा है कि दोनों रिलेशनशिप में हैं। दोनों को ही कई मौकों पर साथ देखा जाता रहता है। संदीप ने अपनी डॉक्टर पत्नी अर्शिता से तलाक ले लिया है। ऐसे में लगता है कि अब संदीप और करिश्मा जल्द ही अपने रिश्ते को आधिकारिक कर लेंगे।

संदीप ने साल 2010 में तलाक की अर्जी दी थी। लेकिन सात सालों की लड़ाई के बाद आपसी सहमति से उन्हें तलाक मिला है। अर्शिता से तोषनीवाल की दो बेटियां हैं जिन्हें कि 3-3 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। वहीं अर्शिता को फ्लैट के साथ ही 2 करोड़ रुपए मिलेंगे। संदीप ने अर्शिता पर आरोप लगाया था कि उनका दिमागी संतुलन ठीक नहीं है और बदले में अर्शिता ने संदीप पर व्यभिचार का आरोप लगाया था। इसकी वजह से दोनों के तलाक ने भद्दा मोड़ ले लिया था।

तलाक के बाद बच्चों की कस्टडी अर्शिता को मिल गई है। संदीप बच्चों को मिलने के लिए जा सकते हैं। करिश्मा भी पिछले साल पति संजय कपूर से अलग हो चुकी हैं। संजय ने इसी साल प्रिया सचदेव के साथ शादी कर ली जोकि विक्रम चटवाल की पूर्व पत्नी हैं।

नोटबंदी विशेष- पीओएस मशीन अब करने लगी एटीएम का काम

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डिंडौरी/आलीराजपुर। नोटबंदी कर मोदी सरकार ने कालेधन के सफेद होने की उम्मीद जगाई, डिजिटल और कैशलेस भारत बनाने की बात की और भ्रष्टाचार के खात्मे की घोषणा भी. प्रदेश के सबसे निर्धन और सबसे कम साक्षर जिलों में इतना सब भले नहीं हुआ, लेकिन दुकानों में पैसे का भुगतान करने वाली पीओएस मशीन से एटीएम का काम जरुर होने लगा है. उपभोक्ता को पैसे मिल रहे हैं और व्यापारी को कमीशन. वहीं बैंक खाते खुलवाकर कमीशन से लोग लखपती भी हो गए.

2011 की जनगणना में मध्यप्रदेश के सबसे निर्धन और आदिवासी जिले डिंडौरी में नोटबंदी के पहले एक भी पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन नहीं थी, नोटबंदी के बाद इनकी संख्या लगभग 300 हो चुकी है. यहां खरीदारी के लिए लोग भुगतान तो करते ही हैं, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में इन मशीनों का उपयोग एटीएम की तरह करते हैं.

2 हजार रुपए तक पीओएस मशीनों से लिए जा सकते हैं. जिले में अलग-अलग बैंकों की 27 शाखाएं हैं. नोटबंदी के बाद बैंकों के कियोस्क सेंटर 70 से बढ़कर 120 हो गए हैं. बैंक खाते 2 लाख 97 हजार से बढ़कर 3 लाख 92 हजार हो गए हैं. खातों से लेनदेन 5 प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है.

 

योग सिखाने पर मुस्लिम टीचर के खिलाफ जारी हुआ फतवा

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रांची। योगा सिखाने वाली प्रसिद्ध मुस्लिम योगा टीचर राफिया नाज़ के खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने फतवा जारी कर दिया है. इतना ही नहीं उनके ही समुदाय के कुछ लोग उन्हें जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं, जिसके बाद प्रशासन ने उनको अंगरक्षक देने की बात कही है.

दरअसल, राफिया नाज योग टीचर हैं और वह रांची के निवारणपुर स्थित आदिम जाति सेवा मंडल के आश्रम में पहली से 10वीं कक्षा तक के बच्चों को योग सिखाती हैं. डोरंडा इलाके की रहने वाली राफिया नाज़ योग सिखाकर अपनी आजीविका चलाती हैं. योग सिखाना जारी रखने पर उन्हें फतवे के जरिये धमकाया गया है. वह अपने घर में बच्‍चों में सबसे बड़ी हैं और एक स्थानीय कॉलेज से एम.कॉम कर रही हैं. 2015 में योग गुरु रामदेव के साथ मंच साझा करने के बाद नाज चर्चा में आई थीं.

राफिया नाज ने एसएसपी कुलदीप द्विवेदी से भी मुलाकात की और मामले की जानकारी दी. एसएसपी ने नाज की सुरक्षा के लिए दो अंगरक्षक भी दिए हैं. नाज को उसके समुदाय की तरफ से ही धमकियां मिलने के बाद उसके परिजन डरे हुए हैं. राफिया नाज़ ने पत्रकारों से कहा कि मेरी समस्या दोनों समुदायों के सदस्यों के साथ है. एक तरफ, मुझे योग नहीं सिखाए जाने को कहा गया है तो दूसरी तरफ मुझे अपना नाम बदलने के लिए कहा गया है ताकि लोग मुझसे योग सीखने में संकोच न करें. हालांकि नाज ने कहा है कि मैं योग करना जारी रखूंगी और जीवन के अंत तक योग सिखाती रहूंगी.

नोटबंदीः कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल मना रहे हैं ‘काला दिवस’

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पटना। नोटबंदी को आज एक साल पूरा हो गया. 8 नवंबर 2016 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी. नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य ‘एंटी ब्लैक मनी डे’ मना रहे हैं तो वहीं कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल इसे ‘काला दिवस’ बताकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

नोटबंदी घोषणा के एक साल पूरा होने पर कांग्रेस काला दिवस मना रही है. कांग्रेस पार्टी ने देश के सभी जिलाध्यक्षों को निर्देश जारी कर दिया है कि वे अपने जिला मुख्यालयों में काला दिवस जोर-शोर से मनाए. कांग्रेस का आरोप है कि नोटबंदी के बाद से आम जनता को खासी परेशानियां का सामना करना पड़ा. इसलिए पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर देश भर में 8 नवंबर यानि कि आज कांग्रेस काला दिवस मना रही है.

कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया ने कहा कि नोटबंदी के दौरान बैंकों में लाइन लगाकर खड़े होने वाले 125 से ज्यादा लोगों की मौत हुईं. काला दिवस पर उन सभी को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी. आठ नवंबर की शाम को सभी जिला मुख्यालयों में कैंडल मार्च भी किया जायेगा.

राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई में बिहार के विपक्षी दल भी काला दिवस मना रहे हैं. पटना में राजद, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता जुटे हुए हैं. यहां सभी नोटबंदी और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगा रहे हैं.

तेजस्वी यादव ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी एवं जीएसटी के खिलाफ देश की आम जनता और व्यापारी त्राहिमाम कर रहे हैं, पर केंद्र के नेता मूंछों पर ताव दे रहे हैं. केंद्र की गलत आर्थिक नीतियों, नोटबंदी और जीएसटी के विरोध में पटना में संयुक्त विपक्षी दलों ने गांधी मैदान जेपी गोलंबर पर काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है.

कांग्रेस ने पार्टी कार्यकर्ताओं और आम लोगों से नोटबंदी के विरोध में सड़क पर उतरने की अपील की है. पार्टी के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी और विधानमंडल दल के नेता सदानंद सिंह ने कहा कि नोटबंदी के विरोध में आयोजित काला दिवस को सफल बनाने के लिए पूरी तैयारी की गई है.

प्रद्युम्न हत्याकांडः सीबीआई ने अब 11वीं कक्षा के छात्र को किया गिरफ्तार

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गुरुग्राम। रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुए प्रद्युम्न हत्याकांड मामले में एक नया मोड़ आ गया है. इस मामले में सीबीआई ने इसी स्कूल के 11वीं कक्षा के एक छात्र को हिरासत में लिया है. हिरासत में लेने के बाद सीबीआई छात्र से पूछताछ कर रही है, जबकि सीबीआई की गिरफ्त में आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार पहले से ही है.

सीबीआई द्वारा हिरासत में लिए गए छात्र के पिता ने कहा कि उनका बेटा निर्दोष है. सीबीआई पहले ही उससे 4-5 बार पूछताछ कर चुकी है. यहां तक की गुरुग्राम पुलिस भी जांच के दौरान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज करा चुकी है. उनके बेटे ने ही टॉयलेट के पास स्कूल के माली को सबसे पहले देखा था.

उन्होंने कहा कि उनका बेटा रेयान स्कूल में दूसरी क्लास से पढ़ रहा है. उनके बेटे को इस मामले में फंसाया जा रहा है. सीबीआई ने उसे पूछताछ के लिए मंगलवार की रात 9 बजे बुलाया था. उसके बाद वह वापस नहीं आया है. इसके खिलाफ वह गुरुग्राम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं, प्रद्युम्न के पिता ने इस जानकारी से इंकार किया है.

इस वारदात के बाद सबसे पहले बस कंडक्टर अशोक कुमार को ही गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उस वक्त आरोपी ने हत्या की बात कबूल की थी, लेकिन बाद में वह अपने बयान से पलट गया था. उसने कहा था कि दबाव में आकर उसने हत्या की बात स्वीकार की थी. इसके बाद भारी दबाव के बीच इस मामले की जांच सीबीआई को दी गई थी.

इस संस्थान ने भेजा था प्रधानमंत्री को नोटबंदी का प्रपोजल

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नई दिल्ली। आज नोटबंदी को एक साल पूरा हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का फैसला लिया था. पिछले साल 8 नवंबर की रात को मोदी ने कालेधन और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की तो पूरा देश सकते में आ गया क्योंकि अगली सुबह से ही लोगों में नोट बदलने की होड़ मच गई. मोदी की नोटबंदी की घोषणा के बाद से लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा.

लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि पीएम मोदी को यह करने का सुझाव कहां से मिला. जानकारी के मुताबिक ‘अर्थक्रांति संस्थान’ ने पहली बार नोटबंदी का प्रपोजल पीएम को भेजा था. इस पर मोदी ने संस्था के सदस्यों को मिलने का 9 मिनट का समय दिया लेकिन जब वे चर्चा करने पहुंचे तो करीब 2 घंटे तक इस प्रक्रिया को पूरी तरह समझा. संस्थान ने दावा किया था कि मोदी ने भी जब प्रोपजल पर चर्चा शुरू की तो उनकी रूचि इसमें काफी बढ़ गई थी और उन्होंने पूरी गहनता से इस पर विचार और चर्चा की. ‘अर्थक्रांति संस्थान’ पुणे की इकोनॉमिक एडवाइजरी संस्था है. इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और इंजीनियर शामिल हैं.

जानिए अबतक कितने पैनकार्डों को आधार से कराया जा चुका है लिंक

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नई दिल्ली। देशभर में करीब 13.28 करोड़ पर्मानेंट एकाउंट नंबर (पैन) को आधार से जोड़ा जा चुका है. यानि कुल 39.5 फीसद पैन और आधार की लिंकिंग हो चुकी है. यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी है. सरकार ने आधार और पैन की लिंकिंग के लिए 31 दिसंबर, 2017 अंतिम तारीख निर्धारित की है. यह पहले 31 अगस्त निर्धारित की गई थी. देश में कुल 115 करोड़ लोगों के पास आधार और 33 करोड़ लोगों के पास पैन कार्ड है.

सरकार ने एक जुलाई, 2017 से इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने के लिए और नये पैन के आवेदन के लिए पैन और आधार की लिंकिंग अनिवार्य कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जून में आईटीआर फाइलिंग और पैन कार्ड आवेदन के लिए इनकम टैक्स एक्ट प्रावधान की वैधता को उचित ठहराया है. हालांकि, संविधान पीठ की ओर से निजता के अधिकार पर फैसले तक इस पर आंशिक स्थगन दिया है.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने जून में कहा था कि शीर्ष अदालत ने उन लोगों को केवल आंशिक राहत दी है जिनके पास आधार या नामांकन पत्र नहीं है. ऐसे में कर अधिकारी इस तरह के लोगों का पैन रद्द नहीं करेंगे. जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) निवासी भारतीयों को आधार जारी करता है. वहीं आयकर विभाग पैन नंबर जारी करता है।

वियतनाम में डामरे तूफान का कहर, 61 की मौत

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हनोई। वियतनाम में डामरे तूफान के कारण आई बाढ़ से अब तक मरने वालों की संख्‍या 61 तक पहुंच चुकी है. वियतनाम के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री नगुयेन शुआन कुओंग ने कहा कि तूफान की वजह से देश को दुखद परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है. कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर हो गया है. यदि कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रही तो नदियों का तटबंध टूट जाएगा.

सेंट्रल वियतनाम को तूफान डामरे ने अस्‍त व्‍यस्‍त कर दिया है. यहां एशिया प्रशांत के प्रमुख नेताओं का एपेक सम्‍मेलन है जिसमें अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप, चीन के शी जिनपिंग और रूस के ब्‍लादीमिर पुतिन भी शामिल होंगे. छह से 11 नवंबर के बीच एपेक सम्मेलन का आयोजन हो रहा है.

खोज और बचाव समिति ने कहा कि 61 लोगों की मौत हो गई है और 28 लोग लापता हैं. 2000 से अधिक घर ढह गए और 80,000 से अधिक क्षतिग्रस्त हो गए. प्रधानमंत्री गुएन जुआन फुक ने आपातकालीन बैठक बुलाई है. वियतनाम के मंत्रियों ने बताया कि कुछ नदियों में इतना अधिक पानी भरा है कि उसे निकालना पड़ सकता है. सोमवार से शुरू हुए एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) की बैठक को देखते हुए डा नांग में अधिकारियों ने सैनिकों व स्‍थानीय लोगों से सफाई की अपील की.

घने कोहरे में वाहनों के टकराने के कारण 10 की मौत, 22 घायल

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फिरोजपुर। फरीदकोट-फाजिल्का रोड पर मंगलवार सुबह एक बस सड़क के किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई. इसमें 10 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 22 लोग घायल हो गए. मारे गए लोगों की बॉडी बस में बुरी तरह फंस गई थी, जिन्हें काफी मुश्किल से निकाला जा सका. चश्मदीदों के मुताबिक हादसा कोहरे की वजह से हुआ.

पुलिस के मुताबिक हादसा फिरोजपुर जिले के कारी कलां गांव के पास हुआ.मारे गए ज्यादातर लोग अप-डाउन करने वाले गवर्नमेंट इम्प्लॉई थे, जो ड्यूटी पर जलालाबाद जा रहे थे. बस-ट्रक के ड्राइवर और कंडक्टर की भी मौत हो गई. चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने घटना की इन्फॉर्मेंशन पुलिस को दी और बचाव के काम में लग गए. सदर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जख्मी लोगों को फिरोजपुर के हॉस्पिटल में भर्ती कराया. इनमें से कई की हालत गंभीर है, लिहाजा मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है.

गुजरात में भी सोमवार देर रात ऐसा ही एक हादसा हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई, 6 जख्मी हैं. पुलिस के मुताबिक मध्य प्रदेश के अलीराजपुर से 22 लोग जीप से अहमदाबाद के लिए निकले थे. वे गुजरात में खेड़ा जिले के कठवाला गांव से गुजर रहे थे, तभी सामने से आ रहा ट्रक ने उनकी जीप को टक्कर मार दी.

यौन शोषण के आरोपी को बचाना चाहती थीं सोनिया गांधी!

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Sonia Gandhi

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का एक पत्र सोमवार (6 नवंबर) को सामने आया है. सोनिया ने यह पत्र उस वक्त के वित्तमंत्री पी. चिदंबरम को लिखा था. खबरों के मुताबिक, वह पत्र तहलका मैगजीन के खिलाफ चल रही जांच को बंद करवाने के लिए लिखा गया था.

दरअसल, तहलका मैगजीन ने भाजपा के कुछ मंत्रियों पर एक स्टिंग किया था जिसमें वे कथित तौर पर आर्म्स डीलर्स से घूस लेते दिख रहे थे. इस स्टिंग को करने के लिए वाजपेयी सरकार के वक्त से तहलका के एडिटर तरुण तेजपाल के खिलाफ फुकन कमीशन जांच कर रहा था.

जांच को बंद करवाने के लिए तेजपाल ने मनमोहन सिंह को जून 2004 में पत्र लिखा था. तेजपाल ने लिखा था कि सरकारी एजंसियां उनको प्रताड़ित कर रही हैं, लेकिन गुजारिश करने के चार महीने बाद तक कोई जवाब ही नहीं आया. इसके बाद तेजपाल ने 20 सितंबर 2004 को सोनिया गांधी को पत्र लिखकर यही सब बताया.

इसके बाद पांच दिन के अंदर ही सोनिया ने अपने कांग्रेस नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के चेयरपर्सन वाले लेटरहेड पर पी. चिंदबरम को पत्र लिखकर इस मामले को ‘प्राथमिकता’ पर देखने को कहा. सोनिया के पत्र को प्राथमिकता पर देखते हुए चार दिन के अंदर-अंदर फुकन कमीशन को भंग कर दिया गया था.

दलित शिक्षक की पिटाई के विरोध में इन दो संगठनों ने खोला मोर्चा

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भिंड। मध्यप्रदेश के भिंड में भीम सेना और राष्ट्रीय अत्याचार निवारण मोर्चा 10 नवंबर को जनाक्रोश रैली और धरना प्रदर्शन करेगी. यह धरना प्रदर्शन हाल ही में सवर्णों द्वारा हुई दलित टीचर की पिटाई के विरोध में किया जाएगा. यह धरना प्रदर्शन एक रैली के रूप में चंदनपुरा अटेर रोड से शहर के कई रास्तों से होती हुई कलैक्ट्रेट कार्यालय के सामने धरना स्थल पर समाप्त होगी.

दरअसल दो नवंबर को कुछ जातिवादियों ने अटेर तहसील के खेरी गांव के रहने वाले कल्याण सिंह जाटव और उनके पुत्र महादेव सिंह की सरेआम पिटाई कर दी थी. टीचर का कसूर महज इतना भर था कि उसने अपनी मर्जी से मनपसंद उम्मीदवार को वोट डाला था. अटेर में हुए उपचुनाव में खुद को गांव के ठेकेदार समझने वाले जातिवादी गुंडे ये चाह रहे थे कि टीचर वहीं वोट डाले जहां वे चाह रहे हैं. लेकिन मनुवादियों की मंशा पूरी न हो सकी जिसके बाद उन्होंने अध्यापक की पिटाई कर दी. पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया.

घटना के बाद अध्यापक को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां पर उनकी हालत अब पहले से बेहतर बताई जा रही है. इधर पुलिस ने भी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जल्द से जल्द मामले की जांच कर कार्रवाई करने का भरोसा दे रही है. लेकिन पुलिस के रवैये को देखते हुए दलित समाज के लोगों को पुलिस पर भरोसा नहीं है, जिसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन का तरीका अपनाया है.