वियतनाम में डामरे तूफान का कहर, 61 की मौत

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हनोई। वियतनाम में डामरे तूफान के कारण आई बाढ़ से अब तक मरने वालों की संख्‍या 61 तक पहुंच चुकी है. वियतनाम के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री नगुयेन शुआन कुओंग ने कहा कि तूफान की वजह से देश को दुखद परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है. कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर हो गया है. यदि कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रही तो नदियों का तटबंध टूट जाएगा.

सेंट्रल वियतनाम को तूफान डामरे ने अस्‍त व्‍यस्‍त कर दिया है. यहां एशिया प्रशांत के प्रमुख नेताओं का एपेक सम्‍मेलन है जिसमें अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप, चीन के शी जिनपिंग और रूस के ब्‍लादीमिर पुतिन भी शामिल होंगे. छह से 11 नवंबर के बीच एपेक सम्मेलन का आयोजन हो रहा है.

खोज और बचाव समिति ने कहा कि 61 लोगों की मौत हो गई है और 28 लोग लापता हैं. 2000 से अधिक घर ढह गए और 80,000 से अधिक क्षतिग्रस्त हो गए. प्रधानमंत्री गुएन जुआन फुक ने आपातकालीन बैठक बुलाई है. वियतनाम के मंत्रियों ने बताया कि कुछ नदियों में इतना अधिक पानी भरा है कि उसे निकालना पड़ सकता है. सोमवार से शुरू हुए एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) की बैठक को देखते हुए डा नांग में अधिकारियों ने सैनिकों व स्‍थानीय लोगों से सफाई की अपील की.

घने कोहरे में वाहनों के टकराने के कारण 10 की मौत, 22 घायल

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firozpur

फिरोजपुर। फरीदकोट-फाजिल्का रोड पर मंगलवार सुबह एक बस सड़क के किनारे खड़े ट्रक से टकरा गई. इसमें 10 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और 22 लोग घायल हो गए. मारे गए लोगों की बॉडी बस में बुरी तरह फंस गई थी, जिन्हें काफी मुश्किल से निकाला जा सका. चश्मदीदों के मुताबिक हादसा कोहरे की वजह से हुआ.

पुलिस के मुताबिक हादसा फिरोजपुर जिले के कारी कलां गांव के पास हुआ.मारे गए ज्यादातर लोग अप-डाउन करने वाले गवर्नमेंट इम्प्लॉई थे, जो ड्यूटी पर जलालाबाद जा रहे थे. बस-ट्रक के ड्राइवर और कंडक्टर की भी मौत हो गई. चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने घटना की इन्फॉर्मेंशन पुलिस को दी और बचाव के काम में लग गए. सदर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जख्मी लोगों को फिरोजपुर के हॉस्पिटल में भर्ती कराया. इनमें से कई की हालत गंभीर है, लिहाजा मौत का आंकड़ा बढ़ सकता है.

गुजरात में भी सोमवार देर रात ऐसा ही एक हादसा हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई, 6 जख्मी हैं. पुलिस के मुताबिक मध्य प्रदेश के अलीराजपुर से 22 लोग जीप से अहमदाबाद के लिए निकले थे. वे गुजरात में खेड़ा जिले के कठवाला गांव से गुजर रहे थे, तभी सामने से आ रहा ट्रक ने उनकी जीप को टक्कर मार दी.

यौन शोषण के आरोपी को बचाना चाहती थीं सोनिया गांधी!

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Sonia Gandhi

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का एक पत्र सोमवार (6 नवंबर) को सामने आया है. सोनिया ने यह पत्र उस वक्त के वित्तमंत्री पी. चिदंबरम को लिखा था. खबरों के मुताबिक, वह पत्र तहलका मैगजीन के खिलाफ चल रही जांच को बंद करवाने के लिए लिखा गया था.

दरअसल, तहलका मैगजीन ने भाजपा के कुछ मंत्रियों पर एक स्टिंग किया था जिसमें वे कथित तौर पर आर्म्स डीलर्स से घूस लेते दिख रहे थे. इस स्टिंग को करने के लिए वाजपेयी सरकार के वक्त से तहलका के एडिटर तरुण तेजपाल के खिलाफ फुकन कमीशन जांच कर रहा था.

जांच को बंद करवाने के लिए तेजपाल ने मनमोहन सिंह को जून 2004 में पत्र लिखा था. तेजपाल ने लिखा था कि सरकारी एजंसियां उनको प्रताड़ित कर रही हैं, लेकिन गुजारिश करने के चार महीने बाद तक कोई जवाब ही नहीं आया. इसके बाद तेजपाल ने 20 सितंबर 2004 को सोनिया गांधी को पत्र लिखकर यही सब बताया.

इसके बाद पांच दिन के अंदर ही सोनिया ने अपने कांग्रेस नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के चेयरपर्सन वाले लेटरहेड पर पी. चिंदबरम को पत्र लिखकर इस मामले को ‘प्राथमिकता’ पर देखने को कहा. सोनिया के पत्र को प्राथमिकता पर देखते हुए चार दिन के अंदर-अंदर फुकन कमीशन को भंग कर दिया गया था.

दलित शिक्षक की पिटाई के विरोध में इन दो संगठनों ने खोला मोर्चा

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kalyan

भिंड। मध्यप्रदेश के भिंड में भीम सेना और राष्ट्रीय अत्याचार निवारण मोर्चा 10 नवंबर को जनाक्रोश रैली और धरना प्रदर्शन करेगी. यह धरना प्रदर्शन हाल ही में सवर्णों द्वारा हुई दलित टीचर की पिटाई के विरोध में किया जाएगा. यह धरना प्रदर्शन एक रैली के रूप में चंदनपुरा अटेर रोड से शहर के कई रास्तों से होती हुई कलैक्ट्रेट कार्यालय के सामने धरना स्थल पर समाप्त होगी.

दरअसल दो नवंबर को कुछ जातिवादियों ने अटेर तहसील के खेरी गांव के रहने वाले कल्याण सिंह जाटव और उनके पुत्र महादेव सिंह की सरेआम पिटाई कर दी थी. टीचर का कसूर महज इतना भर था कि उसने अपनी मर्जी से मनपसंद उम्मीदवार को वोट डाला था. अटेर में हुए उपचुनाव में खुद को गांव के ठेकेदार समझने वाले जातिवादी गुंडे ये चाह रहे थे कि टीचर वहीं वोट डाले जहां वे चाह रहे हैं. लेकिन मनुवादियों की मंशा पूरी न हो सकी जिसके बाद उन्होंने अध्यापक की पिटाई कर दी. पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया.

घटना के बाद अध्यापक को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है, जहां पर उनकी हालत अब पहले से बेहतर बताई जा रही है. इधर पुलिस ने भी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जल्द से जल्द मामले की जांच कर कार्रवाई करने का भरोसा दे रही है. लेकिन पुलिस के रवैये को देखते हुए दलित समाज के लोगों को पुलिस पर भरोसा नहीं है, जिसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन का तरीका अपनाया है.

छात्र राजनीति में उभरते आदिवासी नेतृत्व को सलाम

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द वायर

इस ख़बर को ज़रूर ध्यान से सुना/पढ़ा जाना चाहिए. ज़मीनी स्तर पर उभर रही जम्हूरियत की इस ताज़ा हवा को महसूस किया जाना चाहिए. उभरते आदिवासी युवा नेतृत्व को सलाम किया जाना चाहिए और उन्हें भावी राजनीति के दावेदारों के तौर पर शुभकामनाएं दी जानी चाहिए.

ख़बर है पश्चिमी मध्य प्रदेश और उससे लगे राजस्थान के आदिवासी बहुल जिलों में हुए छात्रसंघ चुनाओं में आदिवासी छात्र संगठन की ऐतिहासिक जीत हुई है. मध्य प्रदेश के लगभग 15 ज़िलों के 25 महाविद्यालयों में कुल मिलाकर 162 छात्र प्रतिनिधियों ने बहुत समय के संघर्ष के बाद पहली बार हुए छात्रसंघ चुनावों में जीत का परचम लहराया है. इनमें से पचास प्रतिशत लड़कियां हैं. राजस्थान में भी आदिवासी छात्र संगठन के प्रतिनिधियों ने कई महाविद्यालयों में जीत हासिल की है.

बाबा साहब आंबेडकर के जन्मदिवस 14 अप्रैल, 2015 में बड़वानी ज़िले के सेंधवा ब्लाक में 30-40 आदिवासी छात्रों के साथ आदिवासी मुक्ति संगठन व अन्य समविचारी शैक्षिक प्रयोगों के मार्गदर्शन में औपचारिक रूप से गठित हुए आदिवासी छात्र संगठन ने पहले सेंधवा के महाविद्यालयों में आदिवासी छात्रों के साथ जारी भेदभाव, छात्रावास, शिक्षा की गुणवत्ता और लड़कियों के शौचालयों की सुविधा से महाविद्यालय प्रशासन के साथ संघर्ष किया और बहुत कुछ हासिल हुआ.

आदिवासी छात्र संगठन को समुदायों का समर्थन मिला और पहली पीढ़ी के छात्र विशेष रूप से लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते थोड़ा आसान हुए. एक साल बाद 14 अप्रैल, 2016 को भोपाल में यही संगठन राज्य स्तरीय संगठन बना. वर्तमान में इसके अध्यक्ष रामू टेकाम हैं, उपाध्यक्ष प्रकाश बंडोड, सचिव महेश भावर, संगठन महामंत्री धर्म सिंह बस्कोले हैं जो आदिवासी मुक्ति संगठन से संबद्ध हैं.

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इस जीत के मायने क्या हैं? यह जीत असल में शोषण के विरुद्ध पैदा हुई चेतना की विरासत का, वर्तमान दौर की सबसे प्रमुख चुनौतियों से निपटने का, रास्ता है. राजनैतिक चेतना की भी एक संपन्न विरासत खड़ी की जा सकती है आज इस बात से पूरी तरह मुतमईन हुआ जा सकता है.

भीमा नाइक, खाज्या नाइक, टांटिया भील, मामा बालेश्वर दयाल आदि के नेतृत्व में अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ बनी राजनैतिक चेतना का सफ़र उनके साथ ख़त्म नहीं हुआ, बल्कि झाबुआ में खेड़ुत मजदूर चेतना संगठन के रूप में उत्तर भारत में संभवतया पहले जन संगठन के रूप में उभर कर आया.

इसका संघर्ष आज़ाद भारत में वन विभाग के रूप में कठोर औपनिवेशिक सत्ता से शुरू हुआ जो आज भी देश भर में आदिवासी इलाकों में बदस्तूर जारी है. बाद में और इसी जन संगठन के समानांतर आदिवासी मुक्ति संगठन ने बड़वानी और बुरहानपुर में आदिवासी समाज के आत्म-सम्मान और संसाधनों पर उनके सांवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष शुरू किया और शोषण के तमाम मठों, गढ़ों और सत्ता प्रतिष्ठानों को पुरजोर चुनौती दी.

इसके साथ ही नर्मदा बचाओ आंदोलन, हालांकि जिसे विस्थापन के खिलाफ संघर्ष के रूप में ही महत्व ज़्यादा मिला, लेकिन इस महत्वपूर्ण आंदोलन ने आदिवासियों को विकास के पूंजीवादी प्रारूप और विनाश की कार्यवाही बताने का काम बखूबी किया.

इसी क्षेत्र में जागृत आदिवासी संगठन ने बड़वानी जिले में ही विभिन्न मोर्चों पर आदिवासी समुदायों के शोषण को लेकर जागृति पैदा की और आज भी सक्रियता से कर रहा है.

दिलचस्प यह देखना है कि जिन प्रमुख जन संगठनों और जन आंदोलनों का ज़िक्र किया गया है, वो सब अभी भी नए युवा नेतृत्व को पैदा कर रहे हैं और आज के दौर की उभरती चुनौतियों को अपने नज़रिये से जवाब दे रहे हैं.

आदिवासी मुक्ति संगठन के नेता गजानन भाई जो इन छात्रसंघ चुनाओं के दौरान आदिवासी छात्र संगठन के लिए ढाल बन कर खड़े रहे, बताते हैं कि ‘कैसे सत्तासीन दल के छात्र संगठन को हराना मुश्किल रहा. छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों को खुले आम धमकियां दी गईं. धन का प्रलोभन दिया गया और चुनाव के दौरान हिंसा की तैयारी की गई.

भाजपा के दिग्गज नेताओं ने इसमें सक्रियता से दिलचस्पी ली और तमाम सरकारी एजेंसियों ने किसी भी सूरत में आदिवासी छात्र संगठन को हारने की कोशिश की.’

गजानन भाई ने बताया कि ‘दो निर्विरोध जीतीं कक्षा प्रभारी लड़कियों ने हालांकि अंतिम समय पर धमकियों से डरकर वोट नहीं किया, शायद हम उन्हें सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पाए इसका अफ़सोस है.’

आदिवासी छात्र संगठन के महामंत्री धरम सिंह का कहना कि ‘यह एक ऐतिहासिक मौक़ा है. एक दौर था जब गांव से निकलकर आदिवासी किसी कस्बे में जाता था तो उसे लंगूर, बंदर कहा जाता था और ठगी और शोषण की इन्तिहा थी.’

हालांकि अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं. आज जब सेंधवा या राजपुर जैसे कस्बों में जाकर देखते हैं तो इन जन संगठनों के प्रभाव का पता लगता है. क्या थाना, क्या तहसीलदार, क्या कलेक्टर सभी अपने दायरे में रहकर पूरे सम्मान और प्रतिष्ठा से इन समुदायों से संवाद करते हैं.

व्यापारी वर्ग ने दोस्ती का संबंध बनाया है और भेदभाव की घटनाएं नगण्य हुई हैं. आज जो आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और गरिमा इन समुदायों ने सतत संघर्ष से हासिल की है उसका अगला चरण आदिवासी छात्र संगठन हमारे सामने हैं.

ऐसे समुदायों के लिए जहां हमारी आज की आधुनिक शिक्षा प्रणाली किसी काम की नहीं थी, क्योंकि यह आदिवासी बच्चों में केवल और केवल अपने समाज व अपनी जीवन पद्धति के प्रति हीनताबोध भरने का ही काम करती थी, आज पूरी धमक के साथ अपनी आदिवासियत को अपनी गरिमा मानते हुए तथाकथित मुख्यधारा के लिए आरक्षित जगहों पर अपने दावे ठोक रहे हैं. अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं और उसकी धमक को सुना जा रहा है.

यह इन पूर्ववर्ती संघर्षों की ही विरासत है कि हमारी आज की विघटनकारी शिक्षा प्रणाली ने छात्रों को अपने समुदाय की मौलिक ज़रूरतों से दूर नहीं कर पाया, बल्कि सालों के संघर्षों से निकली मांगों को और मजबूती ही दी.

यह देखना भी बहुत रोमांचित करता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसकी हज़ार हज़ार बेनामी कंपनियां इन इलाकों में सघन काम रहीं हैं.

दिसंबर, 2015 में इस इलाके के एक गांव मटली (राजपुर) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भगवान इंद्र का इकलौता मंदिर बनाने की चेष्टा की जिसे पूरी राज्य सरकार ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया. खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मंदिर में मूर्ति स्थापना के लिए आने वाले थे, पर यह इसी ऐतिहासिक आदिवासी चेतना का बल था कि इन समुदायों ने इस सरकार प्रायोजित हिंदूकरण के आयोजन को पूरी तरह नकार दिया.

इस खबर को इन पूरे ऐतिहासिक संदर्भों में देखना इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है कि देश में जिस तरह से सांप्रदायिक लहर चल रही है और तमाम समुदायों को जबरन हिंदूकरण की प्रक्रिया में धकेला जा रहा है, संस्थानों को खुलेआम सरकार के संरक्षण में भगवा रंग में रंगा जा रहा है. ऐसे में एक सतत चेतना का निर्माण कर रहे जन संगठनों की भूमिका को ज़्यादा तवज्जो दी जानी चाहिए ताकि आज की चुनौतियों को सामूहिक चेतना की विरासत के आधार पर जवाब दिया सके.

(सत्यम श्रीवास्तव सामाजिक आंदोलनों से जुड़े हैं.) द वायर से साभार

कुर्सी नहीं देने पर दलित का घर जलाया

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नवादा। सुशासन बाबू नीतीश कुमार के राज में दलितों पर अत्याचार रूकने का नाम नहीं ले रहा है. राज्य के प्रत्येक जिले से आए दिन दलितों पर जुल्म की खबरें आती रहती हैं. इसी कड़ी में बिहार के नवादा से दलित उत्पीड़न की खबर सामने आई है, जहां मनुवादियों ने एक दलित के घर को आग के हवाले कर दिया. यह घटना नवादा के रजौली थानाक्षेत्र के सिमरकोल गांव की है.

पीड़ित ने बताया कि सोमवार (6 नवंबर) को गांव में खेल दिखाने वाले कुछ लोग आए हुए थे. इसी क्रम में वहां मौजूद कुछ सवर्ण लोगों ने बैठने के लिए कुर्सी की मांग की. किसी कारणवश कुर्सी नहीं देने पर मनुवादियों ने महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया. इसके बाद वो सभी लोग वहां से चले गए.

दूसरे दिन सुबह मनुवादियों ने राजेन्द्र राजवंशी के घर मे आग लगा दी जिसमें मुर्गा, बकरी, बिछावन और अन्य सामान सहित हज़ारों की संपत्ति जलकर राख हो गयी. जिस वक्त आग लगाई गई उस वक़्त घर में कोई भी पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था.

घटना की सूचना पाकर रजौली पुलिस ने घटना स्थल पर जाकर मामले का जायजा लिया. वही पीड़ित परिवार सहित गांव की अन्य महिलाओं ने रजौली थाना पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज करवाई. आरोपी फिलहाल गांव से फरार है पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है.

पतंजलि वर्सेस कोलगेट की तरह हो रही है भारतीय राजनीति

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पतंजलि का एक टूथपेस्ट है ‘दंत कांति’, जिसका विज्ञापन बड़े जोर-शोर से किया जा रहा है. बाबा रामदेव इसमें आयुर्वेदिक शक्ति का प्रमुख रुप से प्रचार कर रहे हैं और विदेशी केमिकल वाले टूथपेस्ट से खबरदार रहने की सलाह दे रहे हैं. अब आप थोड़ी देर के लिए इसे भारतीय जनता पार्टी मान ले.

दूसरी ओर कोलगेट अपने एक नये प्रकार का टूथपेस्ट लेकर आया है. जिसका नाम दिया है ‘वेद शक्ति’ और इसे पतंजलि टूथपेस्ट के विरुद्ध उतारकर प्रचार किया जा रहा है. आप इसे विपक्षी पार्टी के रूप में देख सकते हैं. कांग्रेस पार्टी भी मान लेंगे तो गलत नहीं होगा.

भारत की वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति को समझाने और पक्ष-विपक्ष की पार्टियों की राजनीति को समझाने के लिए यहां दंत कांति और वेद शक्ति का जिक्र किया गया है. यदि आप इनके बारे में जान जाएंगे तो आपको भारतीय राजनीति के परिदृश्य की समझ बेहतर हो सकती है.

इन दोनों प्रोडक्ट में एक खास बात कॉमन है. वह यह की दोनों प्रोडक्ट अपने आप को स्‍वदेशी के नाम पर हिंदुत्व के रूप में दिखाना चाहते हैं. पतंजलि यह बताना चाहती हैं कि उनका प्रोडक्ट शुद्ध रुप से भारतीय है. जिसे मैं खुले शब्दों में कहूं तो हिंदुत्ववादी. वह इसकी आड़ लेकर आयुर्वेद का प्रचार करते हैं कि आयुर्वेद सारे विज्ञान का जड़ है. दरअसल, इनका मकसद आयुर्वेद का प्रचार करना या हिंदुत्व का प्रचार करना नहीं है. इनका मकसद हिंदुत्व की आड़ में अपने प्रोडक्ट को बेचकर बड़ा मुनाफा कमाना है.

कोलगेट थोड़ा पीछे ही सही वह भी सॉफ्ट हिंदुत्व को लपकने की कोशिश में है. हांलाकि वह टूथपेस्‍ट निर्माताओं में सबसे पुराने और बड़े ग्राहकों वाली कम्‍पनी रही है. दरअसल, वह अपने नए प्रोडक्ट के माध्यम से पतंजलि द्वारा लगाए जा रहे विदेशी के आरोप को झूठलाना चाहती है. इसी कड़ी में उन्होंने अपने नए टूथपेस्ट का नाम रखा है ‘वेद शक्ति’. कोलगेट को यह भ्रम है कि ऐसे ग्राहक जो कट्टर हिंदुत्ववादी विचारधारा के हैं. वह उनके प्रोडक्ट को हाथों-हाथ लेंगे जिससे कॉलगेट मार्केट में अपने नए उत्‍पाद को बनाये रखने में कामयाब हो पाएगा.

हिंदुत्व को लुभाने के लिए पहले से ही पतंजलि अपने कई प्रोडक्ट निकाल रही है. कोलगेट अपने ‘वेद शक्ति’ टूथपेस्‍ट के माध्यम से उन्हें नहीं लुभा सकता. बावजूद इसके कोलगेट ऐसे प्रोडक्ट निकाल रहा है तो इसके दो कारण हो सकते हैं, पहला कोलगेट अपने विदेशी होने की छवि को सुधारना चाहता है, दूसरा वह आयुर्वेद के नाम पर अपने प्रोडक्ट को जिंदा रखना चाहता है जबकि कोलगेट को नए वैज्ञानिक तथ्यों के साथ मार्केट में उतरना चाहिए था और यह बताना चाहिए था कि उनका ‘वेद शक्ति’,’दंत कांति’ से ज्यादा उपयोगी है. ऐसा करने से उसकी पहुंच ज्यादा ग्राहकों तक होती और वह पतंजलि के ग्राहकों को भी अपनी ओर खींच सकता था.

लेकिन कोलगेट के इस विज्ञापन को देखने के बाद उस पर बड़ी दया आती है. कोलगेट यहां एक मासूम की तरह दिखता है और ऐसा लगता है कि उसके पास कोई और चारा नहीं है. पतंजली का मकसद ‘दंत कांति‍’ के माध्यम से कोलगेट के ग्राहक को अपनी ओर खींचना है जबकि कोलगेट बचाव की मुद्रा में है. मान लीजिए ग्राहक के लिये ये दो ही विकल्प हो तो मजबूरी में कहें या स्वाभाविक तौर पर लोग पतंजलि के टूथपेस्ट की ओर ही आकर्षित होंगे और हो रहे हैं.

दरअसल, आज भारतीय राजनीति की यही स्थिति है. एक भारतीय जनता पार्टी है जो उग्र हिंदुत्व को बढ़ा रही है तो दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी है जो कि साफ्ट हिंदुत्व को आगे बढ़ा रही है. ऐसी स्थिति में आम भारतीय वोटरों के पास चुनने के लिए दो ही ऑप्शन है. निश्चित रूप से हिंदूवाद को पसंद करने वाले लोग भाजपा को ही पसंद करेंगे. यानि कांग्रेस पार्टी का सॉफ्ट हिंदुत्व के आधार पर सफाया होना निश्चित है. अथवा लोग नए विकल्प की तलाश करेंगे.

जबकि होना यह था कि कांग्रेस एक प्रगतिशील और गैर सांप्रदायिक वैज्ञानिक विचारधारा वाली पार्टी के रुप में सामने आती, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. यही कारण है कि ऐसी स्थिति में साम्यवादी और अम्बेडकरवादी पार्टियां अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं. यदि यह दोनों विचारधाराएं भी सांप्रदायिकता के राह पर चलेंगी तो उनका भी यही हश्र होना निश्चित है.

इन नई विचारधाराओं के सामने चुनौती इस बात की होगी कि वह किस प्रकार प्रगतिशील वैज्ञानिक गैर सांप्रदायिक विचारधारा को लेकर आगे बढ़ सके. भारत की आम जनता को दो वक्त की रोटी, रहने को घर और शांत वातावरण चाहिये. चाहे वह किसी भी धर्म व संप्रदाय को मानने वाला हो. लेकिन भारत की जनता की मजबूरी यह है कि उसके पास दूसरा मजबूत विकल्प नहीं है.

यह लेख सचिन कुमार खुदशाह का है

कुहरा नहीं दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग है

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नई दिल्ली। दिल्ली में सर्दी बढ़ते ही धुंध ने भी अपने पैर पसारना शुरु कर दिए हैं. मंगलवार (7 नवंबर) की सुबह दिल्ली में धुंध की मोटी चादर बिछी रही जिसके चलते दिखना तक दूभर हो गया है. प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान से आगे निकल गया है. इसके मद्देनजर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने दिल्ली सरकार को खत लिखा है कि वो स्कूल में आउटडोर गेम्स पर रोक लगाएं. प्रदूषण के स्तर को देखते हुए सुबह की सैर पर भी लोग कम दिखाई पड़े.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली के लोधी रोड की हवा की गुणवता बेहद खराब श्रेणी में थी. इसी तरह राजधानी के अलावा नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुंच गया है. बताया जा रहा है कि अगर प्रदूषण की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो इस बार सर्दी की वजह से नहीं बल्कि प्रदूषण के चलते स्कूल बंद करने पड़ेंगे. मंगलवार की सुबह धुंध के कारण करीब 500 मीटर दूर तक देखना मुश्किल रहा. सुबह 7.30 बजे के बाद भी धुंध का बरकरार थी. धुंध की वजह से वाहनों गति भी धीमी दिखी.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रदूषण को देखते हुए दिवाली पर पटाखा बैन किया था. इसके अलावा दिल्ली सरकार भी प्रदूषण को लेकर कसर कस ली है. दरअसल दिल्ली सरकार ऑड-इवन को लेकर विचार कर रही है. हाल में ही दिल्ली सचिवालय से जारी एक पत्र में दिल्ली परिवहन निगम को दिशा-निर्देश जारी किए थे कि दिल्ली में कभी भी ऑड-ईवन स्कीम की घोषणा हो सकती है. ऐसे में डीटीसी पर्याप्त मात्रा में बसों की व्यवस्था रखे.

इस बाबत ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के अलावा डीटीसी के एमडी के बीच 23 अक्टूबर को मीटिंग हो चुकी है. डीटीसी को आदेश दिया गया है कि वो सात दिन के भीतर एक्शन प्लान बनाए जिसमें बस/कंडेक्टर की व्यवस्था आदि के बारे में पूरी जानकारी हो.

जम्मूः सुरक्षा बलों ने मार गिराए तीन आतंकी

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जम्मू। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में बीते सोमवार की शाम सेना और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर मौलाना मसूद अजहर का भतीजा ताल्हा राशिद भी मारा गया है. सेना ने इस एनकाउंटर में ताल्हा समेत दो आतंकियों को मार गिराया है. इस मुठभेड़ में सेना का एक जवान भी शहीद हुआ है.

पुलवामा मुठभेड़ पर सेना और कश्मीर पुलिस ने कि कहा कि बेहतर तालमेल की वजह से ऑपरेशन सफल हो सका था. सुरक्षाबलों से मिली जानकारी के मुताबिक कल देर शाम उन्हें पुलवामा के एक गांव में जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली थी. इसके बाद इलाके की घेराबंदी करके ऑपरेशन शुरू किया गया.

इससे पहले मारे गए आंतंकियों के पास एक अमेरिकी हथियार की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. इसी के बाद सुरक्षाबलों में हड़कंप मचा था. इस हथियार को लेकर शुरूआती जांच में ही इन आतंकियों का सुराग मिला था. माना जा रहा है कि इन्हीं आतंकियों के साथ तल्हा रशीद भी आया था. ऐसे में ताल्हा रशीद का मारा जाना आतंकियों के लिए बहुत बड़ा झटका और सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है.

मसूद अजहर का भतीजा तल्हा रशीद आउटफिट डिविजनल कमांडर था. वह पठानकोट में हुए आतंकी हमले का मुख्य मास्टरमाइंड भी था. भारत लगातार मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चीन इसमें अपने वीटो पावर के दम पर अड़ंगा लगा रहा है.

55 की उम्र में गांधी को हुआ था शादीशुदा महिला से प्यार, सी राजगोपालचारी से किया था इजहार!

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महात्मा गांधी की आत्मकथा “सत्य के साथ मेरे प्रयोग” को दुनिया की सबसे बेबाक आत्मकथाओं में एक माना जाता है लेकिन उनके जीवन का एक पहलू ऐसा भी है जिसका जिक्र करना उन्होंने मुनासिब नहीं समझा था. महात्मा गांधी ने एक अमेरिकी एक्टिविस्ट मार्ग्रेट सैंगर से आत्मकथा में इस प्रसंग का उल्लेख न करने के बारे में सफाई देते हुए इसे “बहुत ही निजी” मामला बताया था. दो अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी की करीब 13 वर्ष की आयु में उम्र में छह महीने बड़ी कस्तूरबा से शादी हो गयी थी. लेकिन शादी के करीब तीन दशक बाद महात्मा को एक अन्य महिला सरलादेबी चौधरानी से प्रेम हो गया. सरला पहले से विवाहित थीं. उस समय महात्मा की उम्र 55 साल और सरला की उम्र 47 साल. ऐसा नहीं है कि गांधीजी ने इस प्रेम को छिपाया. उस समय तक गांधी जी कांग्रेस में सर्वप्रमुख नेता नहीं हुए थे. लेकिन एक विवाहित महिला से उनकी भावनात्मक निकटता चर्चा का विषय रही थी.

खुद महात्मा ने सी राजागोपालचारी को लिखे एक पत्र में बताया था कि “मुझे प्रेम हो गया है.” राजागोपालचारी को गांधीजी की आत्मस्वीकृति से धक्का लगा था. राजागोपालचारी ने गांधीजी को कड़े शब्दों में पत्र लिखकर कस्तूरबा गांधी को सुबह का सूरज और सरलादेबी जौधरी को केरोसिन लैम्प बताया था. सरलादेबी रविंद्रनाथ टैगोर की भतीजी लगती थीं. वो उनकी बहन की बेटीं थीं. सरलादेबी का विवाह राम भज दत्त चौधरी से हुआ था. गांधीजी ने सरला के संग अपने रिश्ते को “आध्यात्मिक विवाह” बताया था. हालांकि इस बात के कोई संकेत या प्रमाण नहीं मिलते कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध थे.

सरला केवल भावनात्मक ही नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी गांधीजी से नजदीकी तौर पर जुड़ी हुई थीं. सरला ने गांधीजी के साथ पंजाब, बनारस, अहमदाबाद, बॉम्बे, बरेली, झेलम, सिंहगढ़, हैदराबाद (सिंध), झांसी और कोलकाता जैसे कई शहरों का दौरा किया. सरलादेबी गांधीजी की कितनी करीबी थीं इसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि उनके इसरार पर गांधीजी ने जवाहरलाल नेहरू से इंदिरा का विवाह सरलादेबी के बेटे दीपक से करने का सुझाव दिया. हालांकि नेहरू ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया.

जनसत्ता ऑनलाइन से साभार

ममता बनर्जी ने GST को बताया ‘ग्रेट सेल्फिश टैक्स’

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जीएसटी के मुद्दे में मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताए जाने के बाद ममता बनर्जी ने इसे ‘ग्रेट सेल्फिश टैक्स’ का नाम दिया.

उन्होंने कहा कि इसका प्रयोग लोगों को तंग करने और देश की अर्थव्यवस्था को तबाह करने के लिए जा रहा है. उन्होंने नोटबंदी को भी एक आपदा के रूप में परिभाषित किया और ट्विटर उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया कि वे नोटबंदी के खिलाफ अपना विरोध जताने के लिए अपनी डिस्पले पिक्चर को काले रंग से बदल दें.

ममता ने ट्वीट कर कहा, ‘ग्रेट सेल्फिश टैक्स लोगों को परेशान करने के लिए लगाया गया है, नौकरियां छीनने के लिए. व्यवसाय को चोट पहुंचाने के लिए. अर्थव्यवस्था को खत्म करने के लिए. जीएसटी से निपटने में सरकार पूरे तरीके से विफल हो चुकी है.’

‘योगी सरकार नहीं चाहती जेल से बाहर आएं चंद्रशेखर रावण’

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की स्वराज अभियान समिति ने भीम आर्मी के पूर्व प्रमुख चंद्रशेखर के समर्थन में 4 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में समित के सदस्य और पूर्व पुलिस महारनिरीक्षक एसआर दारापुरी न कहा कि पुलिस ने भीम आर्मी के चंद्रशेखर पर रासुका लगाकर दलितों का दमन किया है. उन्होंने कहा कि एक दिन पहले ही चंद्रशेखर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी जिसमें न्यायालय ने माना था कि चंद्रशेखर पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं.

दारापुरी ने कहा कि यूपी पुलिस की इस कार्रवाई से स्पष्ट हो गया है कि योगी सरकार किसी भी हालत में चन्द्रशेखर को जेल से बाहर नहीं आने देना चाहती क्योंकि उसे डर है कि उसके बाहर आने से दलित वर्ग के लामबंद हो जाने की सम्भावना है. इसे रोकने तथा भीम आर्मी को ख़त्म करने के इरादे से सरकार ने चन्द्रशेखर पर रासुका लगा कर तानाशाही का परिचय दिया है. इसी ध्येय से सरकार ने भीम आर्मी के लगभग 40 सदस्यों पर मुक़दमे लाद दिए हैं जिनमें अधिकतर छात्र हैं जिनका भविष्य अधर में लटक गया है.

पूर्व पुलिस महारनिरीक्षक दारापुरी ने कहा कि सहारनपुर के शब्बिरपुर के दलित अब दोहरे दलित उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं. एक तो ठाकुरों द्वारा उनके घर जलाये गये और चोटें पहुंचाई गयीं, दूसरे उन्हें ही ठाकुरों पर हमले के आरोपी बना कर जेल में डाला गया. वर्तमान में शब्बीरपुर के 9 दलित जेल में है और उनमें से 2 पर रासुका भी लगाया गया है. दलितों को अब तक मिला मुआवजा नुक्सान के मुकाबले बहुत कम है. दलितों द्वारा ठाकुरों के हमले से बचने के लिए की गयी आत्मरक्षा की कार्रवाही को भी ठाकुरों पर हमला मान कर केस दर्ज कर गिरफ्तारियां की गयी हैं.

दारापुरी ने कहा कि शब्बीरपुर के दलितों पर ठाकुरों द्वारे हमले तथा पुलिस द्वारा भीम आर्मी का दमन एवं चन्द्र शेखर पर रासुका योगी सरकार के दलित दमन का प्रतीक है, जिसका सभी दलित संगठनों एवं जनवादी ताकतों द्वारा मज़बूती से विरोध किया जाना चाहिए.

पटवारी पदों पर बंपर वैकेंसी, जानें-कब तक कर सकते हैं आवेदन

मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने ‘पटवारी’ पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इन पदों के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 11 नवंबर, 2017 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन से जुड़ी जानकारियां नीचे दी गई हैं. संस्थान का नाम मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड पदों के नाम पटवारी पदों की संख्या नोटिफिकेशन के अनुसार पदों की कुल संख्या 9,235 है. योग्यता उम्मीदवार ने किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन की हो. साथ ही हिंदी टाइपिंग की और कंप्यूटर की जानकारी हो. चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा. उम्र सीमा उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी चाहिए. अंतिम तिथि 11 नवंबर 2017 कैसे करें आवेदन उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.vyapam.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

जल्द हीं आमिर और शाहरुख एक साथ दिखेंगे पर्दे पर

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तीनों खान में सलमान खान ने आमिर खान और शाहरुख खान दोनों के साथ काम किया है, लेकिन आमिर खान और शाहरुख खान ने अब तक साथ में फिल्म नहीं की है, लेकिन अब ऐसा होना जा रहा है। खबर है कि ‘ठग्स ऑ‍फ हिन्दोस्तान’ में शाहरुख खान छोटी किंतु महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आएंगे। यह फिल्म आदित्य चोपड़ा बना रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार उन्होंने शाहरुख से छोटी भूमिका निभाने का आग्रह किया। शाहरुख और आदित्य बेहद अच्छे दोस्त हैं और आदित्य का कहना शाहरुख टाल नहीं पाए। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और कैटरीना कैफ भी लीड रोल में हैं। पहली बार अमिताभ बच्चन और आमिर खान भी एक ही फिल्म में नजर आएंगे। इसको लेकर दर्शकों में बेहद उत्साह है।

विजय कृष्णा आचार्य के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को भव्य बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी जा रही है। फिल्म का बजट 90 करोड़ रुपये तय किया गया था जो अब 100 करोड़ रुपये के ऊपर हो गया है।