सलमान खान की ‘रेस 3’ में दिख सकती हैं सपना चौधरी

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नई दिल्ली। बिग बॉस ऐसा प्लेटफॉर्म है जो कई लोगों की जिंदगी बदल चुका है. अपने करियर में अस्त हो चुके लोगों की जिंदगी बदल गई तो कई नए लोग आए और उन्हें काम मिला. इस बात को जिक्र खुद सलमान खान भी इस बार वीकेंड का वार में कर चुके हैं. फिर कॉमनर्स के लिए बिग बॉस में आकर अपनी पहचान कायम करना एक बहुत बड़ा मौका होता है. शायद सपना चौधरी भी इस बात को जानती हैं और तभी तो उन्होंने माना है कि इस शो के बाद वे अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करना चाहती हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने की भी इच्छा जताई है.

लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह कि सपना चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि वे फिल्मों में काम करना चाहती हैं और सलमान खान की फिल्म में डांस नंबर करना उनकी हसरत है. चलिए अच्छा है जो उन्होंने अपनी हसरत जता दी है, सलमान खान सबकी सुनते हैं. लेकिन सलमान खान सपना के बिहेवियर से थोड़ा उखड़े हुए थे.

फ्लिपकार्ट के फाउंडर्स पर लगा 9.96 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप

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धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस ने ई कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के फाउंडर्स और कंपनी के कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. बेंगलुरू के एक बिजनसमैन ने फ्लिपकार्ट पर 9.96 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है.

इंदिरा नगर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने कहा कि यह मामला लैपटॉप्स की सप्लाई के बदले फ्लिपकार्ट द्वारा सी-स्टोर कंपनी को बकाये का भुगतान नहीं करने से जुड़ा है. इस मामले में फ्लिपकार्ट के सचिन बंसल, बिनी बंसल और कंपनी के दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

पुलिस ने कहा कि शिकायत के मुताबिक सी-स्टोर का अन्य इलेक्ट्रॉनिक गुड्स सहित लैपटॉप्स की बिक्री के लिए फ्लिपकार्ट के साथ कॉन्ट्रैक्ट था और उसने लगभग 14 हजार लैपटॉप्स की सप्लाई की थी. शिकायतकर्ता ने कहा कि उसके 1480 यूनिट्स लौटा दिए गए, जबकि बाकी का कोई भुगतान नहीं किया गया. इसके अलावा शिपिंग सहित अन्य चार्जेस का भुगतान भी नहीं किया गया.

पटना हॉफ मैराथन में दौड़ेंगे ओलंपियन एथलीट मिल्खा सिंह

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पटना। पटना हाफ मैराथन में ओलंपियन एथलीट मिल्खा सिंह भी दौड़ेंगे. 17 दिसंबर को होने वाली रन फॉर बिहार थीम पर पटना हॉफ मैराथन में देश के कई हिस्सों से धावक आ रहे हैं. जीविका के निदेशक डी बाला मुरूगन 21 किमी तो पटना प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर चार किमी दौड़ लगाएंगे.

कई और अधिकारी भी मैराथन में भाग लेंगे. मैराथन के लिए बिहार सहित दूसरे राज्यों के 600 से अधिक लोग निबंधन करा चुके हैं. अगले वर्ष फुल मैराथन का आयोजन होगा. प्रमंडलीय आयुक्त आनंद किशोर ने बताया कि पटना हॉफ मैराथन के लिए फ्लैग ऑफ दौड़ का आगाज 29 नवंबर को ज्ञान की स्थली नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर से होगा. 101 किमी दूरी तय करते हुए 30 नवंबर को शाम चार बजे गांधी मैदान पहुंचेंगे.

पटना मैराथन में भाग लेने के लिए निबंधन 10 दिसंबर तक कराया जा सकता है. तीन तरह की दौड़ होगी. हाफ मैराथन 21.1 किमी की होगी. सुबह 6.45 बजे गांधी मैदान से दौड़ शुरू होगी. सुबह 8.15 बजे 10 किमी लंबी और सुबह नौ बजे चार किमी के लिए दौड़ होगी. तीनों स्तर के दौड़ में देश और विदेश के प्रतिभागी भाग लेने जा रहे हैं. आयुक्त ने कहा कि उम्र के हिसाब से 10 केटेगरी में दौड़ को बांटा गया है. महिलाएं भी इसमें शामिल होंगी. पहला निबंधन दानापुर की प्रियंका कुमारी कराया है. 10 लाख रुपये का पुरस्कार 126 प्रतिभागियों के बीच वितरित होगा. पहला पुरस्कार 40 हजार, दूसरा 20 हजार तथा तीसरा पुरस्कार 15 हजार मिलेगा. इसके साथ अन्य श्रेणी में प्रथम 20 हजार, द्वितीय 10 हजार और तृतीय पांच हजार रुपये मिलेगा.

मैराथन के दौरान जगह-जगह नुक्कड़ नाटक और मनोरंजन के साधन उपलब्ध रहेंगे. शराबबंदी, दहेजप्रथा, बाल विवाह, नुक्कड़ नाटक, गीत एवं पोस्टर के माध्यम से सामाजिक सरोकार के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा. पटना मैराथन के एक दिन पहले एक्सपो में सभी प्रतिभागियों को टी-शर्ट और बैग दिया जाएगा. पटना मैराथन के लिए ऑफ लाइन निबंधन बोरिंग रोड और राजेंद्र नगर स्थित गोल्ड जिम में हो रहा है. आवदेक ऑनलाइन निबंधन करा सकते हैं.

  •  दिसंबर को रन फॉर बिहार थीम पर होगी मैराथन
  •  किमी दौड़ेंगे जीविका निदेशक, चार किमी आयुक्त
  • नवंबर को पटना हॉफ मैराथन के लिए फ्लैग ऑफ दौड़
  •  विजेताओं के बीच वितरित होगा दस लाख का पुरस्कार

मौजूदा वित्त वर्ष के लिए ब्याज दर कम करेगा है EPFO

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नई दिल्ली। कर्मचारी ​भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भविष्य निधि (पीएफ) जमाओं पर ब्याज दर को घटा सकता है. ईपीएफओ ने 2016-17 में अपने 4.5 करोड़ अंशधारकों को 8.65 प्रतिशत ब्याज दिया.

श्रम मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार ईपीएफओ ब्याज दर घटा सकता है. उन्होंने कहा, ‘बांडों पर निम्न आय तथा ईटीएफ निवेश सीधे अंशधारकों के खातों में डालने की योजना के मद्देनजर ईपीएफओ 2017-18 के लिए भविष्य निधि जमाओं पर रिटर्न की दर में कटौती कर सकता है.’

अधिकारी के अनुसार हालांकि ईपीएफओ को मौजूदा वित्त वर्ष के लिए आय अनुमानों को गणना अभी करनी है. इसी के आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अंशधारकों के खाते में डाले जाने वाले ब्याज का फैसला होगा.

पद्मावती विवादः राजपूतों के समर्थन में आया खाप

संजयलीला भंसाली द्वारा निर्मित फिल्म पद्मावती में दिखाए गए आपत्तिजनक दृश्यों फिल्म रिलीज नहीं करने की मांग को लेकर सोमवार को राजपूत समाज क्षेत्र की खापों सामाजिक संगठनों ने विरोध जताते हुए प्रदशर्न किया साथ ही लघु सचिवालय पहुंचकर डीसी विजय कुमार सिद्दप्पा को ज्ञापन सौंपा प्रदर्शन की अगुवाई पंवार खाप नेता सतेंद्र परमार कर रहे थे.

सोमवार सुबह पंवार खाप नेता सतेंद्र परमार की अगुवाई में सर्वप्रथम पंवार खाप 32 सर्वजातिय के बैनर तले विभिन्न खापों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य एवं मौजिज व्यक्ति रोज गार्डन में एकत्रित हुए. यहां मौजूद विभिन्न समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि फिल्म की कहानी में निर्देशक संजय लीला भंसाली ने पैसे कमाने के उद्देश्य ये राजपूत इतिहास ही नहीं अपितु पूरे हिंदू समाज के इतिहास को नीचा दिखाने का दुस्साहस किया है. पद्मावती का जौहर केवल राजपूत इतिहास के सम्मान की बात नहीं है ये तो भारतवर्ष के नारी मान की बात है.

फिल्म की कहानी के अनुसार जो कुछ रानी पद्मावती के बारे में दिखाया गया है वह पूरी तरह से सरासर झूठ है, क्योंकि कभी भी राजपूत रानियों ने नाच गाना नहीं किया.

कॉल सेंटर्स में काम करने वाले हो रहे हैं नस्लभेद का शिकारः रिसर्च

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नई दिल्ली। भारत को भले ही कॉल सेंटर्स का हब माना जाने लगा हो, लेकिन देश-विदेश को सर्विस उपलब्ध करा रहे बीपीओ कर्मचारी खासे तनाव में रहते हैं. विदेश से आने वाली कॉल्स पर उन्हें नस्लवादी टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है. अमेरिका जैसे देशों के लोग उन्हें ‘जॉब चोर’ तक कह देते हैं.

‘बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिग (बीपीओ) सेंटर्स इन इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लाइंट से बात करते हुए कर्मचारियों को नस्लवादी गालियां सुननी पड़ती हैं, जो तनाव का कारण बनती हैं. इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ केंट की श्वेता राजन ने यह रिपोर्ट तैयार की है. वह बताती हैं, ‘यह मंदी के बाद की सच्चाई है. पश्चिमी देशों के क्लाइंट्स का स्वभाव कॉल सेंटर्स वालों के लिए काफी रूखा होता है. यदि उन्हें लगता है कि कॉलर भारतीय है तो उनका सबसे बड़ा डर यह होता है कि ये लोग उनकी नौकरी चुरा रहे हैं और सारी चीजें आउटसोर्स हो रही हैं.’

एक कॉल सेंटर वर्कर ने बताया, ‘अपशब्द यह रोज की बात है, दिन में एक या दो बार. कॉल के बीच में कोई क्लाइंट कहता है, यू इंडियंस!’ रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ने भी बीपीओ कर्मचारियों को प्रभावित किया है. श्वेता का कहना है कि ब्रेग्जिट और अमेरिका में ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद नस्लभेदी टिप्पणियां बढ़ गई हैं.

90 के दशक में जब विदेशी कंपनियां भारत आई थीं, तब उन्होंने पूरी कोशिश की थी कि कॉलर्स को पता न चल पाए कि उनकी मदद करने वाला कोई भारतीय है. इसका एक कारण यह भी था कि लोग विदेश में बैठे किसी व्यक्ति से मदद लेने के बजाय उनके देश के व्यक्ति से प्रोडक्ट या सर्विस पर मदद लेना चाहेंगे. 90 के दशक में भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका तक भेजा गया, ताकि वे वहां बात करने के तौर-तरीके सीख जाएं.

टेस्ट इतिहास की 100वीं हार श्रीलंका के लिए बनी सबसे बड़ी हार

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नागपुर। श्रीलंका के लिए उसके टेस्ट इतिहास की 100वीं हार सबसे बड़ी टेस्ट हार बन गई. श्रीलंका को कल भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट में पारी और 239 रन से हार का सामना करना पड़ा जो उसकी 266 टेस्टों में 100वीं हार है.

श्रीलंका के टेस्ट इतिहास की यह सबसे बड़ी हार है. श्रीलंका इससे पहले 2001 में केपटाउन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पारी और 229 रन से हारा था. श्रीलंका की 2017 में यह 7वीं टेस्ट हार है और उन्होंने इस तरह एक कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक पराजय के अपने रिकार्ड की बराबरी भी कर ली है.

श्रीलंका ने 2015 में 7 टेस्ट गंवाए थे. इस साल 7 पराजयों में श्रीलंका ने 4 पारी से गंवाये हैं और 2 मैचों में उसे 280 रन से ज्यादा की हार मिली है. श्रीलंका 2017 में कुल 35 मैच गंवा चुका है जो उसके पिछले सबसे खराब प्रदर्शन से 10 हार अधिक है. श्रीलंका भारत में 19 टेस्टों में 11 हार चुका है और उनमें से 9 में उसे पारी की हार मिली है.

GST में बदलाव से 10 हजार करोड़ का घाटा

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GST के टैक्स स्लैब में बदलाव करने से सरकारी खजाने की सेहत पर पड़ी है. जीएसटी में संशोधन के चलते पिछले महीने के मुकाबले इस बार सरकारी राजस्व को 10 हजार करोड़ का घाटा हुआ है. वित्त मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि 27 नवंबर तक फाइल किए गए रिटर्न्स से सरकार को 83,346 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है. यह राशि अक्टूबर में 95,131 करोड़ जबकि सितंबर में 93,141 करोड़ रुपये थी.

टैक्स कलेक्शन में आई यह कमी जीएसटी के स्लैब में परिवर्तन के चलते हुआ है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक जीएसटी के अंतर्गत अब तक 95.9 लाख टैक्सपेयर्स रजिस्टर हो चुके हैं. इनमें से 15.1 लाख कम्पोजिशन डीलर्स हैं, जिन्हें हर तिमाही में रिटर्न फाइल करने होते हैं. अक्टूबर से 26 नवंबर तक 50.1 लाख जीएसटी रिटर्न्स फाइल हुए हैं.

केंद्र ने राज्यों को जुलाई और अगस्त महीने के लिए 10,806 करोड़ रुपये का मुआवजा भी जारी किया है. इसके अलावा राज्यों को सितंबर और अक्टूबर महीने के लिए 13,695 करोड़ रुपये कंपोजिशन के तौर पर जारी किए गए हैं. जीएसटी लागू होने के बाद यह चौथा महीना है. जीएसटी के अंतर्गत रेवन्यू में गिरावट को समझाते हुए मंत्रालय ने बताया कि शुरुआत में इंटीग्रेटेड जीएसटी गुड्स के एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने पर लिया जाता था. गौरतलब है कि जुलाई में सरकार को 95000 करोड़, जबकि अगस्त में 91000 करोड़ और सितंबर में 92150 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था.

राजस्व संग्रह में आई गिरावट के पीछे जीएसटी दर में कमी को मुख्य वजह बताया गया है. इसके अलावा कर प्रशासन इस समय कारोबारियों की स्व:घोषणा के आधार पर ही कर प्राप्ति कर रहा है. रिटर्न का मिलान, इलेक्ट्रानिक ट्रांजिट परमिट प्रणाली यानी ई-वे बिल और प्रतिकूल शुल्क वसूली जैसे कई प्रावधानों को आगे के लिये टाल दिया गया है. इसके अलावा जीएसटी लागू होने के शुरुआती तीन माह में एकीकृत जीएसटी यानी आईजीएसटी के रूप में अतिरिक्त कर वसूली हुई थी. आईजीएसटी के रूप में दिये गये कर को अब माल की अंतिम बिक्री होने पर उसका क्रेडिट लिया गया है. इससे भी कर वसूली में कम रही है.

जीएसटी लागू होने के बाद अब तक शुरुआती जीएसटीआर-3बी जुलाई में 58.7 लाख, अगस्त में 58.9 लाख, सितंबर में 57.3 लाख और अक्तूबर में 50.1 लाख दर्ज किये गये हैं.

जीएसटी परिषद ने 10 नवंबर को आम इस्तेमाल वाली 177 वस्तुओं पर कर दर को मौजूदा 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था. 28 प्रतिशत के सर्वाधिक कर दर वाले स्लैब में वस्तुओं की संख्या को घटाकर सिर्फ 50 कर दिया जो कि पहले 227 थी. देश में जुलाई 2017 से जीएसटी के तहत 1200 से अधिक वस्तुओं और सेवाओं को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत कर की श्रेणी में लाया गया था.

शिल्पा शिंदे के बाद अब नई ‘भाबीजी’ शुभांगी अत्रे भी छोड़ सकती हैं शो

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&टीवी के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘भाबीजी घर पर हैं!’ के फैंस को एक बार फिर से तगड़ा झटका लग सकता है. शिल्पा शिंदे के बाद एक बार फिर से शुभांगी अत्रे भी शो को अलविदा कह सकती हैं. इसके बाद फिर शो के फैंस को नई ‘अंगूरी भाभी’ देखने को मिल सकती हैं.

बॉलीवुड लाइफ की रिपोर्ट के मुताबिक शिल्पा शिंदे के बाद अब शुभांगी अत्रे ने भी शो छोड़ने का मन बना लिया है. बताया तो ये भी जा रहा है कि शो के मेकर्स अब नई ‘अंगूरी भाभी’ की तलाश में जुट गए हैं. अगर आपको लग रहा है कि शिल्पा की ही तरह शुभांगी का भी शो के मेकर्स के साथ झगड़ा हो गया है और इसीलिए वो शो छोड़ने वाली हैं. तो ऐसा नहीं है. बल्कि वजह तो कुछ और ही है. खबर है कि शुभांगी ने राजनीति में आने का फैसला किया है जिसकी वजह से वह शो छोड़ना चाहती हैं.

हाल ही में शुभांगी उत्तरप्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव ‘बीजेपी’ के लिए प्रचार करके आई हैं. जहां पर उनसे राजनीति में आने का सवाल किया गया. इसपर उन्होंने कहा, मैं पॉलिटिक्स में आने को लेकर कंफ्यूज हूं. लेकिन मुझे लगता है हमारे जैसे युवाओं के लिए यह एक अच्छा मौका है. बदलाव के लिए इन दिनों युवा राजनीति में आने लगे हैं क्योंकि कुछ भी असंभव नहीं है. फिलहाल शुभांगी राजनीति में आने को लेकर स्पष्ट तो नहीं हैं. लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं अगर एक्ट्रेस को मौका मिला तो वह जरूर इस अवसर को भुनाना चाहेंगी. इसलिए अगर फैंस को टीवी पर नई भाबीजी दिखे तो उन्हें अचंभित नहीं होना चाहिए.

आपको बता दें कि बहुत जल्द ‘भाबी जी..’ में आपको चुनाव वाला ट्विस्ट दिखाई देने वाला है जिसमें अनीता और अंगूरी भाभी चुनाव में खड़ी हुई दिखाई देंगी और जनता से अपने लिए वोट मांग रही होंगी. ये खबर शो के प्रमोशन का भी एक हिस्सा हो सकता है. बहरहाल अगर शुभांगी शो छोड़ कर जाती हैं तो उनके फैंस काफी निराश हो जाएंगे.

आयकर के पूरे आंकलन के आधार पर होगी कार्यवाही

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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद भारी मात्रा में नकदी बैंक खातों में जमा करने वालों के खिलाफ आयकर विभाग अगले साल जनवरी से समग्र आकलन कार्यवाही शुरू करेगा. इसके दायरे में ऐसे असेसी खासतौर पर आएंगे, जिन्होंने बैंकों में बड़े पैमाने पर पुराने नोट जमा किए हैं, मगर अब तक कोई आयकर रिटर्न नहीं भरा है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर अधिकारियों को ऐसे लोगों या फर्मो को नोटिस भेजने का काम 31 दिसंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया है. सीबीडीटी विभाग का नीति निर्धारक निकाय है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयकर विभाग भेजी गई नोटिस का असेसी से जवाब मिलने के बाद पूर्ण आकलन की कार्यवाही शुरू कर देगा. कुछ मामलों में नोटिस का जवाब मिल गया है. ऐसे असेसी के जवाबों का विश्लेषण किया जा रहा है. जिन लोगों ने अपने काले धन को सफेद के रूप में दिखाने की कोशिश की है और इस तरह टैक्स चोरी को अंजाम दिया है, उन पर मुकदमा चलाया जाएगा. यह कार्रवाई ऑपरेशन क्लीन मनी का हिस्सा है. विभाग ने यह ऑपरेशन इस साल की शुरुआत में चालू किया था. इसका मकसद नोटबंदी के बीच काले धन के मामलों का पता लगाना था.

विभाग ने इस ऑपरेशन के पहले चरण के दौरान मिले डाटा और जानकारी के आधार पर लोगों का ऑनलाइन सत्यापन किया. इसके बाद करीब 18 लाख ऐसे असेसी की एक सूची बनाई, जिन्होंने अपने बैंक खातों में बीते साल आठ नवंबर से 30 दिसंबर के बीच भारी मात्रा में पुराने नोट जमा किए थे. खास बात यह है कि सूची में वही लोग शामिल किए गए जिन्होंने आकलन वर्ष 2017-18 के लिए अब तक कोई आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है.

ज्योतिबा फुले-बाबासाहेब में एक समानता और प्रवाह

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ज्योतिबा फुले और अम्बेडकर का जीवन और कर्तव्य बहुत ही बारीकी से समझे जाने योग्य है. आज जिस तरह की परिस्थितियां हैं, उनमें ये आवश्यकता और अधिक मुखर और बहुरंगी बन पडी है. दलित आन्दोलन या दलित अस्मिता को स्थापित करने के विचार में एक “क्रोनोलाजिकल” प्रवृत्ति है. समय के क्रम में उसमें एक से दूसरे पायदान तक विकसित होने का एक पैटर्न है और एक सोपान से दूसरे सोपान में प्रवेश करने के अपने कारण हैं. ये कारण सावधानी से समझे और समझाये जा सकते हैं.

अधिक विस्तार में न जाकर ज्योतिबा फुले और अम्बेडकर के उठाये कदमों को एकसाथ रखकर देखें. दोनों में एक जैसी त्वरितता और स्पष्टता है. समय और परिस्थिति के अनुकूल दलित समाज के मनोविज्ञान को पढ़ने, गढ़ने और एक सामूहिक शुभ की दिशा में उसे प्रवृत्त करने की दोनों में मजबूत तैयारी दिखती है. चूंकि, कालक्रम में उनकी स्थितियां और उनसे अपेक्षाएं भिन्न है, इसलिए एक ही ध्येय की प्राप्ति के लिए गए उनके कदमों में समानता होते हुए भी कुछ विशिष्ट अंतर भी नजर आते हैं.

ज्योतिबा के समय में जब कि शिक्षा दलितों के लिए एक दुर्लभ आकाशकुसुम था और शोषण के हथियार के रूप में निरक्षरता और अंधविश्वास जैसे “भोले-भाले” कारणों को ही मुख्य कारण माना जा सकता था– ऐसे वातावरण में शिक्षा और कुरीति निवारण –इन दोनों उपायों पर पूरी ऊर्जा लगा देना आसान था. न केवल आसान था बल्कि यही संभव भी था और यही ज्योतिबा ने अपने जीवन में किया भी. क्रान्ति-दृष्टाओं की नैदानिक दूरदृष्टि और चिकित्सा कौशल की सफलता का निर्धारण भी समय और परिस्थितियां ही करती हैं.

इस विवशता से इतिहास का कोई क्रांतिकारी या महापुरुष कभी नहीं बच सका है. ज्योतिबा और उनके स्वाभाविक उत्तराधिकारी अम्बेडकर के कर्तव्य में जो भेद हैं, उन्हें भी इस विवशता के आलोक में देखना उपयोगी है. इसलिए नहीं कि एक बार बन चुके इतिहास में अतीत से भविष्य की ओर चुने गये मार्ग को हम इस भांति पहचान सकेंगे, बल्कि इसलिए भी कि अभी के जाग्रत वर्तमान से भविष्य की ओर जाने वाले मार्ग के लिए पाथ्य भी हमें इसी से मिलेगा.

ज्योतिबा के समय की “चुनौती” और अम्बेडकर के समय के “अवसर” को तत्कालीन दलित समाज की उभर रही चेतना और समसामयिक जगत में उभर रहे अवसरों और चुनौतियों की युति से जोड़कर देखना होगा. जहां ज्योतिबा एक पगडंडी बनाते हैं उसी को अम्बेडकर एक राजमार्ग में बदलकर न केवल यात्रा की दशा बदलते हैं बल्कि गंतव्य की दिशा भी बदल देते हैं. नए लक्ष्य के परिभाषण के लिए अम्बेडकर न केवल मार्ग और लक्ष्य की पुनर्रचना करते हैं, बल्कि अतीत में खो गए अन्य मार्गों और लक्ष्यों का भी पुनरुद्धार करते चलते हैं. फुले में जो शुरुआती लहर है वो अम्बेडकर में प्रौढ़ सुनामी बनकर सामने आती है. एक नैतिक आग्रह और सुधार से आरम्भ हुआ सिलसिला किसी खो गए सुनहरे अतीत को भविष्य में प्रक्षेपित करने लगता है. आगे यही प्रक्षेपण अतीत में छीन लिए गए “अधिकार” को फिर से पाने की सामूहिक प्यास में बदल जाता है.

इस यात्रा में पहला हिस्सा जो शिक्षा, साक्षरता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जन्माने जैसे नितांत निजी गुणों के परिष्कार में ले जाता था. वहीं, दूसरा हिस्सा अधिकार, समानता और आत्मसम्मान जैसे कहीं अधिक व्यापक, इतिहास सिद्ध और वैश्विक विचारों के समर्थन में कहीं अधिक निर्णायक जन-संगठन में ले जाता है. इतना ही नहीं, इसके साधन और परिणाम स्वरूप राजनीतिक उपायों की खोज, निर्माण और पालन भी आरम्भ हो जाता है.

यह नया विकास स्वतंत्रता के बाद की राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीति में बहुतेरी नई प्रवृत्तियों को जन्म देता है. जो समाज हजारों साल से निचली जातियों को अछूत समझता आया था, उसकी राजनीतिक रणनीति में जाति का समीकरण सर्वाधिक पवित्र साध्य बन गया. ये ज्योतिबा और आम्बेडकर का किया हुआ चमत्कार है, जिसकी भारत जैसे रुढ़िवादी समाज ने कभी कल्पना भी न की थी. यहां न केवल एक रेखीय क्रम में अधिकारों की मांग बढ़ती जाती है बल्कि उन्हें अपने दम पर हासिल करने की क्षमता भी बढ़ती जाती है.

इसके साथ-साथ इतिहास और धार्मिक ग्रंथों के अंधेरे और सड़ांध भरे तलघरों में घुसकर शोषण और दमन की यांत्रिकी को बेनकाब करने का विज्ञान भी विकसित होता जाता है. ये बहुआयामी प्रवृत्तियां जहां एक साथ एक ही समय में इतनी दिशाओं से आक्रमण करती हैं कि शोषक और रुढ़िवादी वर्ग इससे हताश होकर “आत्मरक्षण” की आक्रामक मुद्रा में आ जाता है. एक विस्मृत और शोषित अतीत की राख से उभरकर भविष्य के लिए सम्मान और समानता का दावा करती हुई ये दलित चेतना इस पृष्ठभूमि में लगातार आगे बढ़ती जाती है.

-संजय जोठे

M.A. Development Studies, 
IDS, University of Sussex U.K.
PhD. Scholar, School of Habitat Studies
Tata Institute of Social Sciences (TISS)
Mumbai, India 

सायना के वारियर्स भिड़ेंगे सिंधू के स्मैशर्स से

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नई दिल्ली। प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) के तीसरे संस्करण के उद्घाटन मुकाबले में 23 दिसंबर को पीवी सिंधू के चेन्नई स्मैशर्स का मुकाबला सायना नेहवाल के अवध वारियर्स से होगा.

टूर्नामेंट का पहला चरण नार्थ-ईस्टर्न वारियर्स के घरेलू मैदान गुवाहाटी में खेला जाएगा जो दूसरे दिन कैरोलिना मारिन के हैदराबाद हंटर्स से मुकाबला करेंगे. गुवाहाटी चरण 26 दिसंबर तक चलेगा. इसके बाद दिल्ली, लखनऊ और चेन्नई में अगले चरण खेले जाएंगे. अंतिम चरण और सेमीफाइनल तथा फाइनल हैदराबाद में होंगेे.

23 दिन की इस लीग का समापन 14 जनवरी को हैदराबाद में फाइनल के साथ होगा. टूर्नामेंट के सेमीफाइनल 12 और 13 जनवरी को होंगे.

‘सूरमा’ बन कर हॉकी खेलेंगे दिलजीत दोसांझ

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दिलजीत दोसांझ जल्द अपनी अप-कमिंग फिल्म ‘सूरमा’ में नजर आने वाले हैं। सोमवार को ‘सूरमा’ का टीजर पोस्टर रिलीज किया गया था। अब फिल्म के पोस्टर का फर्स्ट लुक जारी किया गया गया है। दिलजीत के साथ इस फिल्म में ‘जुड़वा 2’ स्टार तापसी पन्नू नजर आएंगी। इस फिल्म में दिलजीत हॉकी लेजेंड संदीप सिंह का किरदार निभाते हुए नजर आएंगे। दलजीत ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अपनी फिल्म ‘सूरमा’ का पोस्टर शेयर किया। दिलजीत पोस्टर शेयर करते हुए लिखते हैं, ‘एक हॉकी स्टिक और एक बुलेट ये तब उसे डायरेक्शन देते हैं जब सब इसे हमेशा के लिए बदल देते हैं। ग्रेटेस्ट कमबैक स्टोरी एवर’

बता दें कि इस फिल्म के निर्माताओं ने 27 नवंबर को फिल्म का पहला टीजर पोस्टर रिलीज किया था। जिसमें आधा दिलजीत का तो आधा संदीप सिंह का चेहरा नजर आ रहा है। अब इसके बाद इस फिल्म के पोस्टर का फर्स्ट लुक रिलीज किया गया है। पोस्टर को ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है। वह पोस्टर शेयर कर लिखते हैं, ‘#सूरमा में दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू और अंगद बेदी। फिल्म बेस्ट ऑन लेजेंड संदीप सिंह, डायरेक्टेर शाद अली, प्रोड्यूस्ड बाय सोनी पिक्चर नेट्वर्क प्रोडक्शन, चित्रांगदा सिंह और दीपक सिंह, 29 जून 2018’

बिहार के इस हाई स्कूल में दलित छात्रों को अलग बैठाते हैं शिक्षक

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B.B Ram school , Nagra Saran Bihar
छपरा। बिहार के सारण (छपरा) जिले से एक बड़ी खबर है. शहर मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर नगरा प्रखंड में स्थित बीबी राम माध्यमिक सह प्लस टू स्कूल के शिक्षकों द्वारा दलित छात्र-छात्राओं को अलग क्लास रूम में पढ़ाने का मामला प्रकाश में आया है. यही नहीं, बल्कि दलित छात्र-छात्राओं के लिए अलग सेक्शन व उपस्थिति रजिस्टर भी बनाया गया है. मामला सामने आने के बाद अम्बेडकर रविदास महासंघ ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संगठन के महासचिव रामराज राम ने जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकिशोर सिंह को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है. आवेदन में कहा गया है कि बीबी राम माध्यमिक सह प्लस टू हाई स्कूल में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को अलग क्लास रूम पढ़ाया जा रहा है. वहीं विद्यालय में जातीय आधार पर दलित छात्र-छात्राओं का सेक्शन ‘ई’ और अलग उपस्थिति रजिस्टर भी बनाया गया है. इसके आधार पर ही दलित छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा दलित छात्र-छात्राओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए अलग क्लास रूम में पढ़ाया जा रहा है. महासंघ ने डीएम से विद्यालय की ऐसी व्यवस्था की जांच कर अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की मांग की है. साथ ही विद्यालय में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओ को सम्मिलित कर पढ़ाने की मांग किया है. उन्होंने कहा कि समय रहते विद्यालय प्रबंधन पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा. जिसकी पूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी. मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद ने कहा कि बीडीओ को भेजकर मामले की जांच करायी जाएगी. सही पाए जाने पर दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

खुद को पाकिस्तानी बताने वाले रेस्लर को सोनू सूद ने चटाई धूल

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सोनू सूद पर्दे पर जितने फिट और रफ एंड टफ दिखते हैं. वह असल जिंदगी में भी कुछ ऐसे ही हैं. इसका एक नजारा हाल ही में रेस्लिंग रिंग में देखने को मिला. सोनू सूद ‘द ग्रेट खली’ की रेस्लिंग एकेडमी पहुंचे हुए थे. यहां कुछ ऐसा हुआ कि सभी देखते रह गए. सोनू सूद रिंग के अंदर माइक लेकर अपने कुछ किस्से सुना रहे थे और वहां मौजूद लोगों से बात कर रहे थे. इतने में वहां एक शख्स एक महिला के साथ अंदर आता है.

वह शख्स खुद को पाकिस्तान का रहने वाला बता रहा था. उसके साथ जो महिला थी, उसके हाथ में पाकिस्तान का झंडा था. वीडियो में आप देख सकते हैं कि वह शख्स सोनू सूद को रेस्लिंग करने के लिए उकसा रहा था.

सोनू सूद ने बड़ी ही विनम्रता से उसका चैलेंज एक्सेप्ट किया और उसे ऊपर बुला लिया. फिर क्या था दोनों की फाइट शुरू हुई. लेकिन दूसरा पहलवान सोनू के दांव-पेंच के आगे नहीं टिका और जल्दी ही नॉक आउट हो गया. उसके हारने के थोड़ी देर बाद गाना बजता है और रिंग में खड़ी बुर्के वाली महिला सोनू के साथ डांस करने लगती है.