Saturday, February 14, 2026

ओपीनियन

नोटबंदी पर वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का खुलासा

नोटबंदी के बाद से भाजपा-नीत सरकार और संघ-परिवार के तमाम नेता, प्रवक्ता या समर्थक सुबह से शाम तक इस बात का प्रचार कर रहे हैं कि नोटबंदी गरीबों और आम लोगों के हक में की गई है. इसका नुकसान सिर्फ बड़े लोगों या पूंजीपति...

भारतीय लोकतंत्र: एक राजनीति कारोबार

भारतीय राजनीति में विभिन्न क्षेत्रीय राजनीतिक दलों का जन्म यूं ही नहीं हुआ, इसका कारण केवल और केवल यह है कि ब्राह्मणवाद के चलते पहले से ही वर्चस्वशाली राजनीतिक पार्टियां अलोकतांत्रिक होती जा रही हैं. इन वर्चस्वशाली राजनीतिक पार्टियों के गिरते राजनीतिक आचरण के...

नसबंदी से लेकर नोटबंदी तक- वोट बैंक की प्रयोगशाला बन चुकी है देश की जनता

देशवाशियों को “बंदी” को सहन करना जैसे उनकी आदत में सुमार हो चुका है. नसबंदी, नशाबंदी, नकलबंदी, भारतबंदी और आजकल नोटबंदी, जिसने देश के अब तक के सारे बंदियों और बंदों को पीछे धकेल दिया है. देश का दुर्गभाग्य कहा जाये या अक्लमंदी, जब...

अंधविश्वासों और कर्मकांडों में सिमटे रहना भारतीयों की विशेषता

कल क्रिस्टोफर हिचन्स की विदाई तिथि गुजरी है. रेशनल और वैज्ञानिक सोच का झंडा बुलंद करने के लिए उनका संघर्ष यादगार रहा है. दुर्भाग्य से भारतीय समाज में ऐसे लोग बहुत कम हुए हैं और हुए भी हैं तो उनका आम जन से रिश्ता...

जो बहन जी की निगाह पर चढ़ गया सो चढ़ गया

तब मायावती यूपी की मुख्यमंत्री थीं और इलाहाबाद के बाहुबली सांसद अतीक अहमद जेल में बंद थे. कहानियों के मुताबिक जेलर को ऊपर से आदेश मिले थे कि अतीक अहमद को उनकी तशरीफ पर रोज सुबह-शाम चार डंडे लगाए जाएं. कहानी के मुताबिक जेलर...

शोषित वर्ग का नया उभार: नया नेतृत्व नये औजार

देश का इतिहास गवाह है कि आज के दलित, आदिवासी, अतिपिछड़े, स्त्रियां और अन्य वंचित समुदाय का सदियों से व्यवस्था निर्माणकर्ताओं द्वारा शोषण किया गया. उन्हें अपना गुलाम बनाकर रखा गया. हमारे यहां एक वर्ग विशेष का वर्चस्व रहा जिसे सामंतवाद कहा गया. इसका...

ट्रिपल तलाक के निशाने पर हिन्‍दू कोड बिल

पिछले कई महीनों से किसी न किसी बहाने ट्रिपल तलाक का मुद्दा सुर्खियों में है. कभी इस मुद्दे को किसी मंत्री के द्वारा उठाया जाता तो कभी किसी कट्टरवादी संगठन के नेता द्वारा. हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बाकायदा यह टिप्पणी की...

कालेधन पर लगाम के नाम पर मुद्रा परिवर्तन कितना सही?

आज सुबह घरों में काम करने वाली एक महिला ने बताया की 500 और 1000 रूपए के नोट बंद हो गये है. वो काफी परेशान लग रही थी, उसने आगे बताया की इस रविवार उसकी बी सी खुली थी जिसके 12000 रूपए (500 और...

सरकार ने कानून में बदलाव किए बिना की नोटबंदी, अब करेगी संशोधन

मोदी सरकार 9 नवंबर से पहले छपे 500 और 1,000 के नोटों की वैधता को समाप्त करने के लिए संभवत: भारतीय रिजर्व बैंक कानून में संशोधन करेगी. आगामी बजट में इसका उल्लेख किया जाएगा. सूत्रों ने कहा कि नोटबंदी की प्रक्रिया के तहत 500...

भारतीय धर्मगुरूओं का खतरनाक मिशन!

भारत में सामाजिक राजनीतिक बदलाव को रोकने के लिये सबसे कारगर हथियार की तरह जिस उपकरण को सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया है वो है भारत का धर्म और अध्यात्म. भारत का धर्म और इसका पलायनवादी अध्यात्म भारत की सबसे बड़ी कमजोरी रहा है...

मोदी का जयापुर गांवः चिराग तले अंधेरा

बनने को तो ये कहानी हजारों सालों से हाशिए पर पड़े दलित समाज के उत्थान का पैमाना बन सकती थी लेकिन एक कोशिश भर बन कर रह गई. और ये कोशिश भी ऐसी है जो बेइंतहा दिखावटी है. क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि...

बाबासाहेब अम्बेडकर: एक सच्चे राष्ट्रवादी

यह समाज के लिए ही नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए भी गर्व की बात है कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर एक प्रबुद्ध विचारक, न्याय के पक्षधर और स्पष्टवादी व्यक्ति थे. प्रत्येक व्यक्ति का कोई न कोई प्रेरणा-सूत्र होता है. बाबासाहेब ने कबीर, फुले और...

डॉ. अम्‍बेडकर का जीवन दर्शन

जिन लोगों ने नवभारत की तकदीर लिखी, उन लोगों में डॉ. अम्‍बेडकर खास सख्‍शियत हैं. उन्‍होंने अपने कार्य से समाज, अर्थ और राजनीति ही नहीं बल्कि धर्म के क्षेत्र में भी अद्वितीय स्‍थापनाएं दी. आज बाबासाहेब डॉ. अम्‍बेडकर एक प्रमुख प्रेरक शक्ति हैं, जिनसे...

नोटबंदी बनाम वोटों की गोलबंदी

उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाला विधानसभा का आम चुनाव श्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 8 नवम्बर-2016 को सम्पूर्ण देश को आर्थिक आपातकाल के दावानल में झोंक दिया....

परिनिर्वाण दिवस विशेषः आज भी अधूरे हैं बाबासाहेब की मृत्यु से जुड़े सवाल

डॉ. भीमराव अम्बेडकर आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनको मानने और जानने वालों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ रही है. आज हालात ये है कि लोग गांधी और अम्बेडकर की तुलना ही नहीं करते बल्कि यह जानने की कोशिश भी करते...

नोटबंदीः बिना एनेस्थीसिया ही कर दिया ऑपरेशन

हम सब जानते है कि 6 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का 21 महीने की अवधि में भारत में आपातकाल जारी रहा था. वह आपातकाल तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर उस समय के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने भारतीय...

प्रबुद्ध भारत बनाने के लिए करना होगा जाति का नाश

क्या आप जानते है? इक्कीसवीं सदी आपके लिए दासता की बेड़ियां निर्मित कर रही हैं.  क्योंकि... राजतन्त्रः किसी भी समाज को गुलाम अर्थात दास बनाता है. और पूंजीवाद राजतन्त्र का पोषाक होता है. गणतन्त्रः समाज को स्वतन्त्र रखता है और पूंजीवाद गणतन्त्र का शोषक होता है. बीसवीं सदी...

डॉ. अम्बेडकर और पिछड़ी जातियां

डॉ. अम्बेडकर को प्रायः दलितों के उद्धारक के रूप में पहचाना जाता है जबकि वे सभी पददलित वर्गों दलितों और पिछड़ों के अधिकारों के लिए लड़े थे. परन्तु वर्ण व्यवस्था के कारण पिछड़ी जातियां जो कि शूद्र हैं अपने आप को अछूतों (दलितों) से...

संविधान दिवस विशेषः भारत का भविष्य बना था संविधान

भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 में स्वीकार किया गया. संविधान के मायने क्या होते हैं, शायद उस समय भारत के लोगों को यह पता नहीं था. लेकिन दुनिया में संविधान का महत्व स्थापित हो चुका था. अमेरिका में 1779 में संविधान बन चुका...

भारतीय मीडिया और दलित-आदिवासी प्रश्न

जब हम मीडिया में दलित मुद्दों की बात करते हैं तोसबसे पहला सवाल यही आता है कि मीडिया में दलित समाज से जुड़ा हुआ मुद्दा सामाजिक मुद्दा और देश का मुद्दा क्यों नहीं बन पाता? जबकि वंचित तबके की संख्या देश में सबसे ज्यादा...
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January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

राजनीति

राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
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