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महिला दिवस विशेषः महिला सशक्तिकरण के नायक थे मान्यवर कांशीराम

हर साल मार्च महीने की 8 तारीख को महिला सशक्तिकरण की चर्चा हर साल होने वाली एक कवायद भर बनकर रह गई है. तमाम संगठनों द्वारा की जाने वाली यह सारी कवायद ‘महिला सशक्तिकरण’ का ढोल पीटती नजर आती है. लेकिन जब वास्तव में...

इस चुनाव की असली और अकेली विजेता हैं मायावती

यह धारणा पुरानी और रद्दी हो चुकी है कि भारत में चुनाव चुनाव आयोग कराता है। नई धारणा और तथ्य यह है कि भारत में चुनाव न्यूज़ चैनल कराते हैं। चैनल के लोग रिटर्निंग अफसर की भूमिका में हर कार्यक्रम में किसी एक दल...

अंबेडकरवादी आन्दोलन और ओशो का मायाजाल

अंबेडकरवादी आन्दोलन को सबसे बड़ा ख़तरा किस बात से है? यह प्रश्न जितना जटिल है उतना ही जटिल इसका उत्तर भी है. अक्सर हम सोचते हैं कि आजकल काम कर रही राजनीतिक विचारधारों या राजनीतिक सांस्कृतिक संगठनों से ये खतरा है। यह बात कुछ...

अम्बेडकरी विचारक किरवले की हत्या और विजयन के सर पर एक करोड़ का इनाम!

यूपी में आखिरी चरण के लिए मतदान बाकी है। दलित शोध छात्र रोहित वेमुला के बाद कोल्हापुर में प्रखर अम्बेडकरी विचारक किरवले की हत्या हो गयी। इससे ज्यादा खतरनाक बात यह है कि उज्जैन में आरएसएस ने गुजरात में हजारों मुसलमानों के कत्लेआम का...

क्यों भाजपा के खिलाफ खड़े हो रहे हैं दलित

हाल ही में सहज रूप से शुरू हुए दलित आंदोलनों की लहर में एक खास भाजपा-विरोधी रंग है। चाहे वह रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या पर देश भर के छात्रों का विरोध हो या फिर गुजरात में सबकी आंखों के सामने चार दलित नौजवानों...

बुद्ध की अनत्ता के सिद्धांत की चोरी और आत्मा का वेदांती भवन

वेदान्त या किसी भी अन्य आस्तिक दर्शन के अंधभक्तों से बात करते हुए बड़ा मजा आता है। कहते हैं ध्यान एक अनुभव है, इन्द्रियातीत अनुभव है। इसकी चर्चा नहीं की जा सकती इसे अनिर्वचनीय और अगम्य अनकहा ही रहने दो। अभी कल से एक...

श्मशान और मंदिर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

अक्सर ही ग्रामीण विकास के मुद्दों पर काम करते हुए गाँवों में लोगों से बात करता हूँ या ग्रामीणों के साथ कोई प्रोजेक्ट की प्लानिंग करता हूँ तो दो बातें हमेशा चौंकाती हैं। पहली बात ये कि ग्रामीण सवर्ण लोग मूलभूत सुविधाओं जैसे सड़क,...

जुमलेबाजी के जरिए नोटबंदी, बिग डाटा के बड़े झूठ

यह बात पूरी तरह से शायद कभी भी उजागर न हो कि 86.4 फीसदी करेंसी को वापस लेने के इतिहास में अभूतपूर्व रूप से बेवकूफी भरे फैसले के पीछे का राज क्या था, लेकिन अब तक यह पर्याप्त रूप से साफ हो गया है...

””चुप रहता है पर चौंकाता है मायावती का वोटर””

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने शनिवार को पार्टी उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट जारी की और दावा किया कि वो प्रदेश में ''''अकेले दम पर सरकार'''' बनाएंगी. विरोधियों ने उनके दावे पर प्रश्नचिन्ह लगाने में देर नहीं की लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों को उनके बयानों...

नोटबंदी से बदहाल किसान को बजट से आश

भारत एक कृषि प्रधान देश है. इसके चलते यहां की अर्थव्यवस्था का आधार भी खेती-किसानी है. आज भी गांव व शहर की आबादी को मिला कर अस्सी फीसदी तक लोग खेती-किसानी के काम में जुटे है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि केन्द्र...

आज का राष्ट्रवाद : एक राजनीतिक प्रपंच

समय के परिवर्तन के साथ-साथ बहुत कुछ बदल जाता है. यहाँ तक कि शब्द भी और शब्दों के अर्थ भी. इसे यूँ समझ सकते हैं कि बहुत पुराने समय में ‘वेदना’ शब्द को दो तरह से जाना जाता था, यथा... सुखद वेदना और दुखद...

गुजरात के चुनाव एवं आदिवासी समस्याएं

गुजरात में विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल सक्रिय हो गये हैं. ये चुनाव जहां भारतीय जनता पार्टी के लिए एक चुनौती बनते जा रहे हैं वहीं दूसरों दलों को भाजपा को हराने की सकारात्मक संभावनाएं दिखाई दे रही है. पिछले तीन चुनावों...

बराक की विदाई… अब कब पैदा होगा अमेरिका में ओबामा!

जनवरी 2017 में अमेरिका के प्रथम एफ्रो-अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल खतम हो जाएगा और श्वेत डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल आरंभ. 2008 में जब पहली बार बराक ओबामा विश्व के सबसे विकसित प्रजातंत्र संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए थे तो वह...

शिक्षा और ज्ञान से डरता है धार्मिक भारत

भारत के ग्रामीण या शहरी बच्चों से बात करके देखिये, वे बहुत कुछ जानना चाहते हैं. जैसी जिज्ञासा यूरोप के सभ्य समाज के बच्चे करते हैं वैसी ही जिज्ञासा भारत के बच्चे भी करते हैं. जीवन, मन, शरीर, प्रकृति, मशीनें, समाज व्यवस्था और संबंधों...

सिर्फ कैशलेस ही नहीं ”कास्ट लेस” इंडिया भी जरूरी

आज जब देश में चारों तरफ नोटबंदी ही चर्चा का विषय बना है तो इस पर एक फिल्म के गाने के कुछ बोल फिट प्रतीत होते हैं “सोने चांदी के महलों में दर्द ज्यादा है चैन थोडा़ है. इस जमाने में पैसे वालों ने...

दलित-पिछड़ा एकता में बाधक है सामंतवादी सोच

इसमें कोई शक नहीं कि दलितों और पिछड़ों में दूरियां बढ़ी हैं. हालांकि अतिपिछड़ा वर्ग दलितों के थोड़ा करीब दिखता है. लेकिन यह भी सोचना होगा कि जिस गंभीरता से इस विषय पर दलित बुद्धिजीवी सोचते हैं उतनी गंभीरता से पिछड़ों में चर्चा नहीं...

मोटिवेशन कैरियर और बुद्ध की अनत्ता

गौर कीजिए इन शब्दों पर. अक्सर ही हम सोचते हैं कि बुद्ध सिर्फ ध्यान समाधि और निर्वाण जैसी बातों के लिए ही हैं. लेकिन ये बिलकुल गलत बात है. बुद्ध के लिए परलोक या परीलोक का कोई अर्थ नहीं है. वे खालिस इस लोक...

क्रिसमस पर विशेषः सलीब पर टंगी भारतीय दलित ईसाईयों की जिंदगी

कैथलिक चर्च ने अपने ‘पॉलिसी ऑफ दलित इम्पावरन्मेंट इन द कैथलिक चर्च इन इंडिया’रिपोर्ट में यह मान लिया है कि चर्च में दलितों से छुआछूत और भेदभाव बड़े पैमाने पर मौजूद है इसे जल्द से जल्द खत्म किए जाने की जरूरत है.’ हालांकि इसकी...

कुरूपताओं से भरा शरीर इत्र छिड़कने से नहीं होता सुंदरः बुद्ध

शरीर मे बत्तीस कुरूपताओं की हमेशा स्मृति रखने का नाम कायगता-स्मृति है. बुद्ध कहते हैं- अपने शरीर में इन विषयों की स्मृति रखें-केश, रोम, नख, दांत, त्वचा, मांस, स्नायु, अस्थि, अस्थिमज्जा, यकृत, क्लोमक, प्लीहा, फुस्फुस, आत, उदरस्थ मल-मूत्र, पित्त, कफ, रक्त, पसीना, चर्बी, लार आदि....

उत्तराखंड सरकार का स्पेशल ब्रेक एक सांप्रदायिक फैसला

उत्तराखंड की सरकार ने एक अजीब और विवादित निर्णय लिया है. उसने प्रदेश के सभी कार्यालयों में मुस्लिम कर्मचारियों के लिए शुक्रवार के दिन दोपहर में जुमा की नमाज अदा करने के लिए कुछ समय का ब्रेक देने का फैसला किया है. शुक्रवार को...
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महान सम्राट असोक की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश की आवश्यकता

महान सम्राट असोक (लगभग 304–232 ईसा पूर्व) मौर्य वंश के महान शासक थे। वे पितामह चन्द्रगुप्त मौर्य के पौत्र और सम्राट बिन्दुसार के...

राजनीति

अंबेडकरवादी इन्फ्लुएंसर मुकेश मोहन को केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने क्यों भेजा है 50 करोड़ का मानहानि नोटिस, जानिये पूरा मामला

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री नीतीन गडकरी से जुड़ी ‘द कारवां’ की एक रिपोर्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। बीफ कारोबार में गडकरी...
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