Saturday, February 14, 2026

ओपीनियन

विकास की कीमत चुकाते आदिवासी

पिछली एक शताब्दी में ‘विकास’ की सबसे ज्यादा कीमत किसी ने चुकाई है तो वे हैं आदिवासी. उनकी अमीरी ही उनके लिए अभिशाप बन गई. जिस वनभूमि पर उनका आवास है, वह अपने गर्भ में कोयला, लोहा, बॉक्साइट, हीरा, यूरेनियम आदि बहुमूल्य खनिज छिपाए...

अंग्रेजी मतलब उच्च संस्कार और मार्डन युग?

कई बार व्यवहारिक जीवन के उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए इस बात का एहसास हुआ कि फर्राटेदार अँग्रेजी ना बोल पाना पिछड़ापन है बरक्स हिन्दी बोलने के. बहुत बार तो इस बात की कसीस दोस्तों-रिश्तेदारों के साथ बिताए गए पलों में ज्यादातर समय देखने को...

हमें भारत में छुआछूत, दंगा और बाबासाहेब म्यूजियम चाहिए

जर्मनी और रवांडा जैसे कुछ अफ्रीकी देशों में कई सारे होलोकॉस्ट म्यूजियम हैं स्कूल कॉलेज के बच्चों को वहां दिखाया जाता है कि हिटलर के दौर में या हुतु तुत्सी जातीय हिंसा के दौर में किस नंगाई का नाच हुआ था, कैसे पढ़े लिखे...

तीन तलाक पर अब केंद्र सरकार दिखाए अपनी नियति!

21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में मुस्लिम समुदाय का एक प्रथा जो सदियों चली आ रही थी, उसका अंत हुआ. इस प्रथा को तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत कहते हैं. अगर किसी मुस्लिम पुरूष के मुंह से 3...

रोहित वेमुला केस को दफ़नाया जा रहा है!

दोनों ने हॉस्टल के कमरे में ख़ुदकुशी की. दोनों मामलों में आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ- पहले जनवरी 2016 में, फिर दूसरा अक्टूबर 2016 में. शोध छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में मुख्य अभियुक्त हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर...

अगर तिरंगा फहराना ही देशभक्ति है तो संघ पंद्रह साल पहले ही देशभक्त हुआ है

15 अगस्त को मदरसों पर तिरंगा फहराने संबंधी योगीजी का हालिया आदेश सिर-आंखों पर है. उन्हें पूरी तसल्ली हो जाए इसलिए तिरंगा फहराने की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने में भी हमें कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए. आखिर देशभक्ति मापने का जो पैमाना उन्होंने तैयार किया है...

धर्म ने विज्ञान को आगे बढ़ाने वालों की हत्या कर दी?

कल ट्रेन में सफर के दौरान चार युवा इंजीनियर्स से बात करने का मौका मिला. चारों एक दूसरे से परिचित होते हुए अपनी पढ़ाई, कमाई, अनुभव, कम्पनी आदि का बखान कर रहे थे. जाहिर हुआ कि चारों देश की सबसे अच्छी सॉफ्टवेयर कम्पनियों में...

बिहार में टूट के कगार पर नीतीश कुमार की पार्टी!

बिहार की सियासत में एक जमाने में धुर विरोधी रहे शरद यादव और लालू यादव के रास्ते एक हो सकते हैं। नीतीश से नाराज शरद यादव ने यह कह कर कि वो अब भी महागठबंधन के साथ हैं, इसका संदेश भी दे दिया है।...

सीवर में मौत

सीवर में मौत कोई नयी घटना नहीं है . प्रभात खबर केएक सरकारी रिपोर्टर के अनुसार (9 अगस्त 2017 ) तक 22,327 सफाई कर्मी लोगो की मौत सीवर में दम घुटने से हुई है. 14 जुलाई 2017 को दक्षिण दिल्ली के घिटरोली गावं में...

आदिवासी दिवस पर विशेष : भारत के छले हुए लोग

9 अगस्त को प्रत्येक वर्ष आदिवासी दिवस आते ही मन में यह प्रश्न उठता है कि हम आदिवासियों को अपने देश (आजाद भारत) में अबतक क्या मिला? यदि हम आदिवासियों के मुद्दों को लेकर संविधान सभा में हुई बहस पर गौर करें तो यह...

जाति-धर्म की आड़ में जनता को गुमराह कर रही है सरकार और मीडिया

14वीं लोकसभा के चुनाव में देश में लंबे-लंबे वादों से बनी मोदी सरकार तीन साल बाद भी जनता के अहम सवालों की जवाबदेही से कतरा रही है. मीडिया को अपने कंट्रोल में लेकर महत्वपूर्ण मुद्दों को दफनाया जा रहा है. आज देश के कुछेक ईमानदार...

चोटी काटने, डायन बता कर मारने की घटनाएं दलित बस्तियों में ही क्यों ?

हिंसा, नफ़रत, भय और उपहास पर आधारित भी क्या कोई धर्म हो सकता है? जी हां! उसका नाम है हिन्दू, वैदिक, सनातनी, मनुवादी आदि. रुकिए! जनाब ये सब एक ही धर्म के नाम हैं, जी कुछ और भी हो सकते हैं. मगर इनके त्यौहार...

सेंधमारी की सियासत से कमजोर होता लोकतंत्र

लोकतंत्र की आत्मा पक्ष-विपक्ष, सहमति-असहमति से सिंचित होती है. केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने जिस तरह से कुछ खास मौके पर विपक्ष के गैर कानूनी इरादों या यूं कहें कि कथित गैर कानूनी कृत्यों पर सरकारी तंत्र के माध्यम से प्रहार कर रही...

सफाई अभियान के पोस्टर पर डॉ. अम्बेडकर क्यों? ब्रांड एम्बेस्डर तो शिल्पा शेट्टी है

बचपन में नाई द्वारा बाल काटने से मना किए जाने के साथ शुरू हुआ डॉ. भीम राव अम्बेडकर के अपमान का सिलसिला 1956 ई. में बौद्ध धर्म अपनाने के पूर्व तक चलता रहा. आज भारतीय स्वतंत्रता के 70 वर्ष बाद भी यह अनवरत जारी...

भगवा कट्टरपंथ से खतरे में है दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और ओबीसी समाज

आज भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में धार्मिक कट्टरपंथी अपने अड़ियलपन के कारण अभी भी अपनी विधवाओं को सती करना चाहते हैं. लड़कियों की भ्रूण हत्याओं का विरोध नहीं करते. जब कभी समाज सुधार की बात होती है तो भगवाधारी हजारों की संख्या में 'धर्म...

जेएनयू में PHD के ढांचे को तोड़ा जाना चाहिए

आखिरकार आज पीएचडी पूरी हो गई. यह संयोग ही था कि आज प्रेमचंद जयंती भी थी. वायवा के लिए प्रोफेसर चौथीराम यादव और हरिनारायण ठाकुर आए थे. मेरा विषय था- "अद्विज हिंदी कथाकारों के उपन्यासों में जाति-मुक्ति का सवाल, 1990 से 2014 तक". दोनों...

गटर में डूबती जिंदगी…

दिल्ली की एक बस्ती में तीस-बत्तीस वर्षीय युवा स्त्री रो रही थी. आस-पास बैठी महिलाएं उसे ढांढस बंधाने की नाकाम कोशिश कर रही थीं. जब हमारी फैक्ट फाइंडिंग टीम वहां पहुंची तो हमने देखा कि वहां 8 और 6 साल के दो बच्चे सहमे...

ज़िंदाबाद-मुर्दाबाद के बीच फंसी देशभक्ति

बुरहानपुर जिले के मोहद गांव के 15 लड़कों पर से राजद्रोह का मुकदमा हटाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का मुकदमा कायम किया जाना यह बताता है कि इस घटना के गंभीर सियासी निहितार्थ हैं. हिन्दुस्तान के बंटवारे के बाद से ही हिंदुत्व लगातार इस बात...

भारत की शिक्षा व्यवस्था और वर्ण-माफिया

भारत में आजादी के बाद इंजीनियरिंग, विज्ञान, मेडिसिन, मेनेजमेंट या दर्शन मानिविकी और समाज विज्ञान की पढ़ाई करने वाले तबके पर और उसकी समाज-देश के प्रति नजरिये पर गौर करना जरुरी है. भारत के इस सुदीर्घ दुर्भाग्य और हालिया “गोबर और गौमूत्र” के विराट...

भारत का बदलता परिदृश्य: विज्ञान बनाम संस्कृति

भारत में इंजीनियरिंग मैनेजमेंट मेडिसिन या तकनीक की अकेली पढाई पूरी कौम और संस्कृति के लिए कितनी घातक हो सकती है ये साफ नजर आ रहा है. इस श्रेणी के भारतीय युवाओं में समाज, सँस्कृति, साहित्य, इतिहास, धर्म की अकादमिक समझ लगभग शून्य बना...
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January 26 and Ambedkar: The Unfinished Promise of the Indian Republic

Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...

राजनीति

राज ठाकरे ने खोली अदानी की पोल

मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के लिए चुनाव का प्रचार जोर पकड़ चुका है। इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी...
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