कौन हैं आप लोग और आंदोलन भी किसके खिलाफ कर रही हो..?
मेरी नजर में आप सभी लोग निहायती बेवकूफ हो. आप पुरुषों के खिलाफ आंदोलन कर रही हो. आपको चाहिए भी क्या कि छेड़-छाड़ बन्द हो, यूनिवर्सिटी में हर जगह कैमरे लगे, और लाइट...
हमें ये सोचना चाहिए कि हमारे देश में 22 ऑफिशियल भाषाओं के होने बावजूद भी हम हर मामले में पीछे क्यों हैं? या कहीं ऐसा तो नहीं कि भारत इसिलए पीछे है क्योंकि यहां इतनी ऑफीशियल भाषाएं हैं?
क्योंकि सवाल ये है कि अगर इतनी...
हाल ही में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में नौवीं में पढ़ने वाली एक छात्रा को एक मनचले लड़के ने सिर्फ इसलिए मार डाला क्योंकि उसने उसके प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. ये सिर्फ इस बात का संकेत है कि पुरुष अपने वर्चस्व...
बीएचयू प्रकरण में न्यायिक जांच के आदेश से एक अध्याय समाप्त हो चुका है, कुछ बातें कही जानी चाहिए जो अब तक नहीं कही गई हैं. सबसे पहली बात उन लड़कियों के बारे में, जो वाकई अपनी सुरक्षा से खौफ़ज़दा थीं और धरने पर...
मेरे जवाब से बेहतर है मेरी खामोशी,
न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली।
27 अप्रैल, 2012 को संसद में उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये शेर पढ़ा था. उन दिनों यूपीए सरकार हर मोर्चे पर फेल हो रही थी. घोटाले पर घोटाले...
नवरात्रि में हमारा समाज कन्याओं की पूजा करता आया है. उन्हें भोजन पर आमंत्रित किया जाता है. चरण धोकर स्वागत किया जाता है और तिलक के बाद दक्षिणा और उपहार देकर विदा करने की परंपरा है. पूरे नौ दिन तक देश शक्ति की अराधना...
मशहूर फ्रेंच विचारक लुई अल्तुसर से हमारी मुलाकात 1980 के आसपास हुई थी. उन दिनों वे ‘फिलॉसफी ऑफ रीडिंग’ (पाठ का प्रयोजन) के अध्ययन के सिलसिले में भारत आए थे. उनके अध्ययन का सार यह था कि किसी किताब का पाठ हम सभी अलग-अलग...
प्राचीन वैदिक समाज को श्रम विभाजन तथा सामाजिक जिम्मेदारियों के तहत चार वर्णों में विभाजित किया गया था. कालांतर में इनसे लाखों जातियां बन गईं. प्राचीन वर्ण व्यवस्था का सही या गलत होना हमेशा से विवादित रहा है, परंतु इसमे कोई शक नही है...
कच्चे तेल के दाम में पचास फीसदी से भी ज़्यादा की कमी आ गई है मगर पेट्रोल के दाम में कमी क्यों नहीं आई है. मीडिया में महानगरों के तेल के दाम बताने का चलन है, लेकिन दूर दराज़ के शहरों के दाम देखेंगे...
डिजिटल इंडिया से न्यू इंडिया की संकल्पना आजकल सरकार की प्रमुखता में है. इसके प्रचार-प्रसार के लिए काफी धनराशि खर्च की जा रही है. हालांकि अभी भी हमारा देश कई चुनौतियों से जूझ रहा है जिनमें आतंकवाद, नक्सलवाद तो गंभीर समस्यायें हैं ही, इसके...
पांच सितम्बर को गौरी लंकेश जैसी महान पत्रकार की हुई हत्या समाज के लिए निंदनीय है. उनकी हत्या के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए प्रयोग की गयी अभद्र भाषा हमारी सांस्कृति को शोभा नहीं देता. इस अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों पर...
हिंदी दिवस परिपाटी, पाखंड, प्रहसन सब कुछ है- साथ में कुछ लोगों के लिए यह प्रायश्चित भी कि कैसे वे अपनी ही भाषा के साथ धोखा कर रहे हैं. इस प्रायश्चित की सीमा बस यही है कि वे सच्चे दिल से मानते हैं कि...
संविधान में सभी लोगों के लिए समान अवसर और न्याय की व्यवस्था है. इसी संविधान ने अनुसूचित जाति/ जन जाती को सरकारी शिक्षा, नौकरी और चुनावों में आरक्षण दिया. पिछड़ों को भी 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया. लेकिन आजादी के 70 वर्षों बाद भी...
मेरे एक मित्र ने कहा कि में रविदास को नहीं मानता क्योंकि उन्होंने ब्राह्मणवाद को माना है. मेरा उनको उत्तर इस प्रकार है.
पहली बात रविदास का असली नाम रैदास है. आप अपने दादा के समय के लोगों के नाम किसी से भी पूछ कर...
वरिष्ठ पत्रकार स्व. गौरी लंकेश की हत्या पर आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले वाले 4 लोगों को प्रधानमंत्री मोदी अपने निजी अकाउंट से क्यों फॉलो कर रहे हैं? भाजपा द्वारा इसका यह जवाब दिया जा रहा है कि फॉलो करने का मतलब विचारों से सहमति...
पत्रकार गौरी हत्याकांड का कारण विचारधारा है या कानून व्यवस्था? हत्या की वारदात से फैली सनसनी के बाद यह बहस शुरू हुई. शुरुआत विचारधारा से हुई. विचारधारा की बात खारिज करने के लिए कानून व्यवस्था की बात रखी गई. अब अगर हत्या के कारणों...
छात्र जीवन में अनायास ही एक बार दक्षिण भारत की यात्रा का संयोग बन गया. तब तामिलनाडु में हिंदी विरोध की बड़ी चर्चा होती थी. हमारी यात्रा ओडिशा के रास्ते आंध्र प्रदेश से शुरू हुई और तामिलनाडु तक जारी रही. इस बीच केरल का...
आज ही सुबह ही कंवल भारती जी की एक फेसबुक पोस्ट से चिंतित हो उठा था. आरएसएस के कुछ लोग उनके घर आए थे और उन्हें लगा था कि क्या मौत ने उनका घर देख लिया है?
शाम में गौरी लंकेश की हत्या की सूचना...
झारखंड आंदोलन के दिनों झारखंडी समाज ने जो एकजुटता और मूल्य विकसित किये थे लगता है अब वे तेजी से विघटित हो रहे हैं. कुछ समय पहले राजनीतिक अस्थिरता की वजह से अराजकता की स्थिति थी, अब एक सशक्त सरकार के होने के बावजूद...
इस देश के सभी नागरिक स्वतंत्र हैं? क्या यह प्रश्न कुछ अटपटा लगा. यदि हां, तो आप में चिंतन की थोड़ी संभावना अवशेष है. यदि नहीं तो इसका अनुमान आप स्वयं लगाये. इस देश मे समस्या इसी बात की है कि आप अपने दायित्वों...
Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...