पिछले महीने बिहार विधान सभा के चुनाव पूरे हुये और नीतीश कुमार ने बीस सालों में दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बनाया। चूंकि ये बिहार के चुनाव थे जहाँ भात-रोटी पर बाते कम होती है और चुनावी चटनी-अचार...
ज्योतिबा फुले और बाबा साहेब अम्बेडकर का जीवन और कर्तृत्व बहुत ही बारीकी से समझे जाने योग्य है। आज जिस तरह की परिस्थितियाँ हैं उनमे ये आवश्यकता और अधिक मुखर और बहुरंगी बन पड़ी है। दलित आन्दोलन या दलित अस्मिता को स्थापित करने के...
जुलाई की बात है, देश के कुछ युवा वर्ग सिनेमा घरों मे रोते बिलखते, खुद का शर्ट फाड़ते दिखे। ये महज़ एक फिल्म का जादू था जिसका नाम सैंयारा है, कह सकते हैं, हमें कुछ ठीक-ठीक क्रांति जैसा देखने को मिला। ऐसा इसीलिए कहा...
26 नवंबर की तारीख भारत के इतिहास में संविधान दिवस के तौर पर दर्ज है। साल 1949 में इसी दिन भारत की संविधान सभा ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर की अध्यक्षता में लिखे गए दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान को अंगीकृत किया था। संविधान...
वो साल था 1984 का। पंजाब आतंकवाद के कारण जल रहा था। वहां से रोज बेगुनाहों के कत्ल के समाचार आ रहे थे। पंजाब को लेकर सारा देश चिंतित था। तब पंजाब की स्थिति पर चर्चा करने के लिए समाजवादी आंदोलन से जुड़े राजनीतिक...
बिहार के कुछ इलाकों में दस दिनों तक घूमने के बाद यह पता चल गया था कि एनडीए की स्थिति मजबूत है। दस लोगों में से 7 लोग यही कह रहे थे। मैं ज्यादातर दलित और कुछ पिछड़ी बस्तियों में गया था। वो खबरें...
बिहार चुनाव के दूसरे चरण में सबकी निगाहें दलित और मुसलमान मतदाताओं पर है। दूसरे चरण में जिन 122 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है, उसमें लगभग 100 सीटें ऐसी है, जिस पर जीत-हार का फैसला दलित मतदाता करेंगे। यह समाज जिधर जाएगा,...
1946 के संयुक्त भारत की अंतरिम सरकार के पहले कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल पूर्वी बंगाल के एक प्रमुख अनुसूचित जाति के नेता थे। वे भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान की संविधान सभा के सदस्य बने रहे। उन्होंने पाकिस्तान में कई महत्वपूर्ण पदों को...
*रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई*
*तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई*
आपको इस तरह नहीं जाना चाहिए था, सर।
आपको क्या किसी को भी इस तरह नहीं जाना चाहिए।
एक सक्षम, प्रतिभाशाली और प्रतिबद्ध वरिष्ठ IPS अधिकारी, Sh Y Puran Kumar जिसने अपनी...
पिछले लगभग दस-बारह सालों से विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए राजनीतिक रणनीतिकार के तौर पर काम कर रहे थे। सुना है इस काम में इन्होंने काफी धन कमाया। बाद में इन्हें लगा क्यों ना सीधे ही राजनीति में ही हाथ आजमाए जाएं। तो इन्होंने...
क्या आपको पता है कि देश की प्राइवेट यूनिवर्सिटी में भी रिजर्वेशन मिलना चाहिए?? नहीं पता? हाल ही में दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में शिक्षा पर 31-सदस्यीय संसदीय समिति, जिसमें तमाम दलों के प्रतिनिधि शामिल थे, ने इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट दी है।...
भारत की आजादी से पहले ब्रिटिश शासन के दौरान मतदान का अधिकार सीमित और शर्तों के आधार पर था। तब केवल वे लोग वोट दे सकते थे जिनके पास संपत्ति, आय, शिक्षा या टैक्स भुगतान जैसी योग्यता होती थी। इस कारण आबादी का बड़ा...
11 अगस्त को लुटियन दिल्ली की सड़कें जन प्रतिनिधियों (सांसदों) से पटी पड़ी थी। भारत के राजनीतिक इतिहास में यह संभवतः पहली बार हुआ जब 300 सांसद एक साथ सड़क पर उतरें। मुद्दा वोट चोरी का था। इस विरोध प्रदर्शन से एक घटना याद...
प्रिय बाबा, जब पूरा देश आपको अश्रुपूरित नेत्रों से विदा कर रहा है, मैंने एक कोना पकड़ लिया है, अपनी आधी जिंदगी जिस वटवृक्ष के साये में महफ़ूज़ हो कर काटी - आज आपके जाने से वह बेटी-सी बहू अपनी टूटी हुई हिम्मत बटोरने...
भारतीय समाजशास्त्र में प्रो. नन्दू राम अगर अपनी लेखनी से भारत की एक-चौथाई जनता का समाजशास्त्रीय सच प्रकाशित एवं स्थापित नहीं करते तो भारतीय समाजशास्त्र कुछ वर्णों का ही समाजशास्त्र बनकर रह जाता।
अपने अदम्य सहस एवं ज्ञान की गहराई के आधार पर उन्होंने आई....
कुछ नायक खामोश होते हैं। उनकी कोई प्रचारक सेना नहीं होती, कोई सोशल मीडिया कैंपेन नहीं चलता। वे न तो अपने संघर्ष की मार्केटिंग करते हैं, न ही उपलब्धियों का ढोल पीटते हैं। लेकिन उनके जाने के बाद, एक खालीपन रह जाता है, सिर्फ...
भारत एक विशेष दौर से गुज़र रहा है और जब तक ऐसा है, पक्ष या विपक्ष दोनों में से एक को चुनना होगा। कुछ समय के लिए विविधता, मतभेद, व्यक्तिगत आकांक्षा, महत्वाकांक्षा, व्यक्तिगत मत आदि को एक तरफ रखते हुए जो तानाशाही, सांप्रदायिकता और...
कभी-कभी एक तस्वीर, सौ भाषणों से ज्यादा कह जाती है। आंध्र प्रदेश की श्री वेंकटेश्वर वेटरनरी यूनिवर्सिटी में जमीन पर बैठे डॉ. रवि वर्मा की तस्वीर ऐसी ही है, जिसने भारतीय शिक्षा व्यवस्था में जातिवाद की कलई एक बार फिर खोल दी है। ज़मीन...
जाति के नाम पर इंसान को जानवर से भी बदतर हालत में धकेल देना, यही है सनातनी हिन्दू धर्म की वह असली जड़, जिसे आप चाहे कितना भी चंदन से रगड़ लें, यह सड़ांध फैलाती रहेगी। इटावा के नागला नंदी गांव में जो हुआ,...
(प्रदीप सुरीन) क्या आप जानते हैं कि एविएशन कवर करने वाले ज़्यादातर पत्रकार एयर इंडिया से यात्रा करने को सबसे लास्ट ऑप्शन रखते हैं। पिछले पंद्रह सालों में (जब से मैंने एविएशन कवर करना शुरु किया) मेरी भी सबसे लास्ट चॉइस एयर इंडिया ही...
Every year on January 26, India commemorates the adoption of its Constitution with ceremonial grandeur parades, patriotic speeches, and ritual invocations of nationalism. Yet,...