साहित्य-धर्म

गैर दलित आलोचकों का असली चेहरा

जिस जाति अथवा समाज का साहित्य नहीं होता, वह जाति मृत समान ही होती है. वैसे भी हमारे देश में पहले से ही दलितों का लिखा कोई साहित्य नहीं है. वर्ण-व्यवस्था के अनुसार भारत के दलितों को पढ़ने-लिखने का कोई अधिकार ही नहीं था....

बच्चियां अब बच्ची नहीं रह गई

आज से बमुश्किल दस साल पहले तक जब लड़कियां दस-बारह साल की हो जाती थी तो उन्हें एक लड़की के तौर पर देखा जाता था. उनके कपड़े और हावभाव को समाज बतौर लड़की देखने लगता था. लेकिन इन कुछ सालों में सब कुछ बदल...
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कास्ट मैटर्स

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ओपीनियन

शहीद गौरी लंकेश महिषासुर को महान राजा और अपना नायक मानती थीं

एक दैत्य अथवा महान उदार द्रविड़ शासक, जिसने अपने लोगों की लुटेरे-हत्यारे आर्यो से रक्षा की। महिषासुर ऐसे व्यक्तित्व का नाम है, जो सहज...

राजनीति

दलित संतों और इन्फ्लुएंसर्स को साधने में जुटी सपा, 5 नवंबर को बड़े कार्यक्रम का ऐलान

लखनऊ। दलित वोटों को साधने के लिए समाजवादी पार्टी कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती। इसी कड़ी में सपा की नजर अब दलित समाज के...
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