अखिलेश से मिले बसपा के बागी, तो बहनजी ने अखिलेश को चेताया

2019 के लोकसभा चुनाव में हमेशा साथ निभाने और एक-दूसरे की तारीफों के पुल बांधने वाले समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी अब आमने-सामने है। जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, दोनों पार्टियों के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। मंगलवार 15 जून को छह बसपा समर्थकों के अखिलेश यादव से मिलने के बाद प्रदेश का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

बसपा के बागी विधायक असलम राइनी ने दावा किया है कि बसपा के बागी विधायक नई पार्टी बनाएंगे। बसपा से निष्कासित लालजी वर्मा नई पार्टी के नेता होंगे। नई पार्टी बनाने के लिए 12 विधायकों की जरूरत है। फिलहाल 11 विधायकों का साथ मिल चुका है। एक और विधायक का साथ मिलते ही नई पार्टी का ऐलान कर दिया जाएगा। इससे पहले बसपा से बगावत करने वाले विधायकों ने मंगलवार (15 जून) की सुबह सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद हलचल तेज हो गई है।  बसपा विधायकों के सपा में जाने की चर्चा होने लगी थी।

 अखिलेश यादव से मिलने जाने वाले विधायकों में असलम राइनी (विधायक, भिनगा-श्रावस्ती) के अलावा मुजतबा सिद्दीकी ( विधायक प्रतापपुर-इलाहाबाद), हाकिम लाल बिंद (विधायक हांडिया-प्रयागराज), हरगोविंद भार्गव (विधायक सिधौली-सीतापुर), असलम अली चौधरी (विधायक, ढोलाना-हापुड़), सुषमा पटेल (विधायक, मुंगरा बादशाहपुर) शामिल हैं।

इसको लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने सपा और अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। सुश्री मायावती ने एक के बाद पांच ट्विट कर अखिलेश यादव पर हमला बोला। मायावती ने लिखा कि, घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना कि बीएसपी के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं घोर छलावा है।

उन्होंने आगे लिखा कि जबकि उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आरोप में बीएसपी से निलंबित किया जा चुका है। सपा में अगर इन निलंबित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती। क्योंकि इनको यह मालूम है कि बीएसपी के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बीएसपी में आने को आतुर बैठे हैं।

गौरतलब है कि मायावती ने अपने हाल ही में अपने दो विधायकों राम अचल राजभर और लालजी वर्मा को पिछले हफ्ते पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसी के बाद बागी विधायकों की गतिविधियां अचानकर तेज हो गईं। दोनों के निष्कासन के बाद बसपा ने तेजी से इस्तीफों का भी दौर शुरू हो गया। वाराणसी में बड़ी संख्या में बसपा पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था।

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