क्या नरेन्द्र मोदी देश के डिवाईडर इन चीफ हैं?

टाइम दुनिया की सबसे प्रभावशाली पत्रिकाओं में से एक है. इस पत्रिका ने अपने ताजे अंक (20 मई 2019) के मुखपृष्ठ पर मोदी के पोर्ट्रेट को प्रकाशित करते हुए उन्हें ‘इंडियास डिवाईडर इन चीफ (भारत को बांटने वालों का मुखिया)’ बताया है. पत्रिका ने यह प्रश्न भी पूछा है कि क्या “दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातंत्र, मोदी राज के और पांच वर्षों में बच सकेगा?” इसके साथ ही, पत्रिका में एक और लेख भी प्रकाशित हुआ है, जिसका शीर्षक है ‘मोदी द रिफॉर्मर’ (सुधारवादी मोदी). इसमें कहा गया है कि मोदी के रहते ही देश आर्थिक सुधारों की अपेक्षा कर सकता है. मुख्य लेख का शीर्षक ‘इंडियास डिवाईडर इन चीफ’ निश्चय ही मोदी राज की मुख्य ‘उपलब्धि’ का अत्यंत सारभर्गित वर्णन करता है. इस लेख में राहुल गाँधी की भी कई मुद्दों पर आलोचना की गयी है. परन्तु इसके बावजूद भी यह दिलचस्प है कि राहुल गाँधी ने इस लेख को री-ट्वीट किया है जबकि मोदी भक्त इसके लेखक आतिश तासीर पर टूट पड़े हैं.

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा का कहना है कि तासीर पाकिस्तानी हैं और उनसे इसके अलावा और क्या अपेक्षा की जा सकती थी. यह बयान भाजपा की पाकिस्तान को भारत का शत्रु इन चीफ निरुपित करने की नीति के अनुरूप है. भाजपा की साइबर टीम ने तासीर के विकिपीडिया पेज पर हल्ला बोल दिया और उसमें यह जोड़ दिया कि वे “कांग्रेस के पीआर मैनेजर हैं”. यह परिवर्तन, तासीर के विकिपीडिया पेज के ‘करियर’ वाले खंड में किया गया है. सच यह है कि तासीर अमरीकी नागरिक हैं. उनकी मां भारत की जानीमानी स्तंभ लेखक तवलीन सिंह हैं. उनके पिता, पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर हैं, जिन पर आसिया बीबी नामक ईसाई महिला का समर्थन करने के लिए ईशनिंदा कानून के अंतर्गत मुक़दमा दायर किया गया था और जिन्हें उनके ही अंगरक्षक ने गोलियों से भून दिया था.

पात्रा ने यह भी दावा किया कि टाइम ने पहले भी मोदी विरोधी लेख प्रकाशित किये थे. सच यह है कि इसके पहले टाइम ने जो लेख प्रकाशित किये थे, उनका मूल भाव यह था कि मोदी भारत के लिए एक आशा की किरण बनकर उभरे हैं. उदाहरण के लिए, पत्रिका में वर्ष 2015 में प्रकाशित एक लेख का शीर्षक था ‘व्हाई मोदी मैटर्स (मोदी क्यों महत्वपूर्ण हैं)’. बल्कि ताज़ा अंक के दूसरे महत्वपूर्ण लेख (जिसे पत्रकारिता की भाषा में सेकंड लीड कहा जाता है) में मोदी को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो देश में आर्थिक सुधार लाने में सबसे अधिक सक्षम हैं. इस प्रख्यात पत्रिका ने मोदी को ‘डिवाईडर इन चीफ’ क्यों बताया और क्यों यह प्रश्न उठाया कि अगर मोदी फिर से प्रधानमंत्री बने तो देश में प्रजातंत्र का बचना संदेहास्पद हो जायेगा?

तासीर किसी जटिल प्रक्रिया से इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं. वे बताते हैं कि किस प्रकार गौरक्षा के नाम पर मुसलमानों को पीट-पीट कर मार डालने का क्रम शुरू हुआ और किस तरह बाद में, दलितों को भी निशाना बनाया जाने लगा. यह एक ओर मुसलमानों के दमन का प्रयास था तो दूसरी ओर ऊना जैसी घटनाओं के ज़रिये, दलितों को कुचलने का.

पिछले पांच सालों में ऐसी कई चीज़ें हुईं हैं, जिनसे लगता है कि देश में प्रजातंत्र खतरे में हैं. सरकार मोदी की मुट्ठी में है. शक्तियों का किस कदर केन्द्रीयकरण हो चुका है, इसका प्रमाण मोदी का यह दावा है कि उन्होंने जानकारों की राय को दरकिनार करते हुए, बालाकोट में हवाई हमले करने का आदेश दिया. उनका स्वयं का कहना है कि सम्बंधित सैन्य अधिकारी और विशेषज्ञ चाहते थे कि बारिश और बादलों के चलते हमले को स्थगित कर दिया जाए. परन्तु मोदी ने अपनी पैनी बुद्धि का उपयोग करते हुए यह आदेश दिया कि हमला उसी समय किया जाए क्योंकि बादलों के कारण पाकिस्तानी राडार, भारतीय विमानों को पकड़ नहीं पाएगीं!

यह सर्वज्ञात है कि सभी महत्वपूर्ण निर्णय मोदी स्वयं लेते हैं. नोटबंदी के निर्णय के बारे में वित्त मंत्रालय और केबिनेट को कुछ भी पता नहीं था. स्वायत्त संस्थाओं को मोदी कुचल रहे हैं और उन पर अपना नियंत्रण कायम कर रहे हैं. प्रजातान्त्रिक संस्थाओं को भी योजनाबद्ध तरीके से कमज़ोर किया जा रहा है.

इसके साथ ही, वे विभिन्न धार्मिक समुदायों को भी विभाजित कर रहे हैं. वे खून के प्यासे कथित गौरक्षकों पर कोई रोक नहीं लगा रहे हैं. उन्हें अपने उन मंत्रियों से कोई परेशानी नहीं है जो धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ ज़हर उगलते हैं, जो लिंचिंग के आरोपियों के शवों को तिरंगे में लपेटते हैं और जो ज़मानत पर रिहा, लिंचिंग के दोषियों का अभिनन्दन करते हैं. जाहिर है कि इससे हिन्दू राष्ट्रवादी एजेंडे को लागू करने के लिए बेक़रार अपराधियों को प्रोत्साहन मिलता है. उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले योगी आदित्यनाथ को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया और आतंकी हमले के प्रकरण में आरोपी प्रज्ञा ठाकुर, जो कि स्वास्थ्य कारणों से ज़मानत पर रिहा हैं, को अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाया. मोदी धर्मनिरपेक्ष, प्रजातान्त्रिक भारत पर हिंदुत्व को थोपना चाहते हैं.

भारतीय संविधान, देश की एकता का प्रतीक है परन्तु मोदी के केबिनेट सहयोगी अनंत कुमार उसे बदल डालना चाहते हैं. मोदी सरकार में भाजपा का पितृ संगठन आरएसएस दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति कर रहा है. विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थाओं में भगवा विचारधारा वालों को भर्ती किया जा रहा है. कई स्तंभकारों का मानना है कि भारत का मीडिया भी मोदी की उतनी आलोचना नहीं कर रहा है जितनी कि उसे करनी चाहिए. यह कुछ हद तक सही भी है. मीडिया का एक हिस्सा और कुछ लेखक-पत्रकार मोदी और शाह के खिलाफ मुद्दे उठा रहे हैं परन्तु मीडिया का एक बड़ा हिस्सा भाजपा सरकार के दबाव में दण्डवत हो गया है. यह दबाव किस तरह का है उसकी एक बानगी भाजपा के उभरते हुए सितारे तेजस्वी सूर्या का यह कथन है कि “अगर आप मोदी के साथ नहीं हैं तो आप भारत-विरोधी शक्तियों को मज़बूत कर रहे हैं”. सरकार की आलोचना को राष्ट्रद्रोह का पर्यायवाची बना दिया गया है.

‘डिवाईडर इन चीफ’ की उपाधि, मोदी के व्यक्तित्व और उनकी विचारधारा से एकदम मेल खाती है. यह पहली बार है जब देश पर कोई हिन्दू राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री लोकसभा में पूर्ण बहुमत के साथ राज कर रहा है. इसके पहले भी देश में भाजपा सरकारें थीं परन्तु चूँकि वे अपने अस्तित्व के लिए अन्य पार्टियों पर निर्भर थीं, इसलिए वे खुलकर हिन्दुत्ववादी एजेंडा लागू नहीं कर सकीं. टाइम ने देश में व्याप्त वर्तमान माहौल को ‘ज़हरीला धार्मिक राष्ट्रवाद’ बताया है.

गाँधी, जिन्हें हिन्दू राष्ट्रवादी हत्यारे ने मौत के घाट उतार दिया था ‘इंडियास यूनीफायर इन चीफ (भारत को एक करने वालों के मुखिया)’ थे. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान प्रधानमंत्री ने अपने राजनैतिक एजेंडे को लागू करने के लिए वह भूमिका निभायी जो राष्ट्रपिता की भूमिका के ठीक विपरीत थी. टाइम का लेख, हमें याद दिलाता है कि किस तरह देश को धार्मिक आधार पर बांटा जा रहा है और प्रजातंत्र को कमज़ोर किया जा रहा है.

राम पुनियानी (अंग्रेजी से हिन्दी रूपांतरण अमरीश हरदेनिया) Read it also-मायावती ने फिर किया पलटवार

कैसा चुनावी राष्टवाद और ये कैसी गोडसे भक्ति??

अब जब लगभग 2019 के आम चुनावों का शोरगुल थमने वाला है. 23 मई को मतगणना शुरू हो जाएगी. देश के करोड़ों मतदातावों के मन की बात ईवीएम के बटन के माध्यम से अपने सांसद को चुना होगा. हर चुनावों की भांति इस बार का चुनाव भी मतदाताओं के लिए अपनी उम्मीदों को कायम रखने और भविष्य में नई सरकार के प्रति सपनों को संजोए रखने का सिलसिला जारी रहा. किसी को रोजगार के सपने, किसी को बेहतर शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य के सपने, किसी को भूख मिटाने के सपने,किसी को भ्र्ष्टाचार से मुक्ति के सपने, और किसी को असमानता, भेदभाव, शोषण से मुक्ति के सपने देखे होंगे और किसी ने भयमुक्त, अपराधमुक्त, और किसी ने हिंसा और नफरत मुक्त भारत के सपने सँजोये होंगे.

मगर उस बात से हैरानी है कि सात चरणों में से 6 चरणों की वोटिंग हो चुकी है, मगर उपरोक्त सपनो के ऊपर राजनीतिक दलों का कोई फोकस रहा ही नहीं. गौरतलब ये भी है कि मीडिया, जो समाज का आँख और कान समझा जाता है इन जन सरोकारों को उठाने में कंजूसी कर गया जो लोकतंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं कहे जा सकते क्योंकि मीडिया या प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होता है. मीडिया (टीवी) और मोदी ने इन इस चुनाव को भारत बनाम विपक्ष बना दिया एक तरफ ऐसा दरसाने की कोशिश की गई कि मोदी ही असली राष्ट्रभक्त हैं और मोदी ही असली भारत है बाकी पार्टियां चाहे आजादी के आंदोलन की मुखिया कांग्रेस हो या अन्य लेफ्ट पार्टियां और गठबंधन सबको गोदी टीवी मीडिया और मोदी ने राष्ट्र भक्ति में फेल साबित करने की भरपूर कोशिश की. और भी हैरान करने वाली बातें इस आम चुनाव में भाजपा, और नरेंद्र मोदी ने की, ऐसा प्रतीत हो रहा था चुनाव भारत की राजनैतिक पार्टियों के मध्य हो रहा है या भारत और पाकिस्तान के मध्य? ऋग्वेद में सबसे अधिक बार सिंधु नदी का नाम आया है उसी प्रकार इस चुनाव में नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान का नाम सबसे अधिक बार लिया. न्यू इंडिया, डिजिटल इंडिया, बुलेट ट्रेन ,स्किल इंडिया, रोजगार, स्वच्छ भारत, स्मार्टसिटी, काला धन, अच्छे दिन, सब चुनावी राष्ट्रवाद की बाढ़ में बहा दिए गए सायद इनकी अब जरूरत ही नहीं देश को!

इस आम चुनाव में कुछ नया इतिहास भी बना और कुछ इतिहास के पन्नों को या तो भुला दिया गया या फाड़ दिया गया. राष्टपिता महात्मा गाँधी को बीजीपी की प्रज्ञा ठाकुर ने पुनः मार दिया. जब उन्होंने गोडसे को असली राष्ट्र भक्त कहा अगर राष्ट्र पिता का दर्जा प्राप्त फकीर को गोली मारने वाला व्यकि भाजपा की नजरों में असली राष्ट्र भक्त है तो इससे ज्यादा क्या प्रमाण चाहिए कि आरएसएस पोषित भाजपा कैसा राष्ट्रवाद लाना चाहती है? जब जातियों से, धर्म से, हिंदुत्व से, राम-हनुमान से नैया पार होती नहीं दिखी तो अंततः भारत माता को ही चुनाव में ला खड़ा कर दिया. गाय माता को दोहते-दोहते, श्री राम -श्री राम जपते-जपते दिल्ली दूर नजर आने लगी तो राष्टवाद को ही चुनावी नारों में सामिल कर आरएसएस ने आगे के लिए कुछ छोड़ा नहीं ऐसा प्रतीत होता है.जब देश में ट्रेनों का जाल बिछ चुका था तभी नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन की बात कही.जब देश में कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल फोन, ब्राडबैंड , ईमेल, फेक्स, सब पहले से मौजूद थे तब मोदी ने डिजिटल इंडिया की बात कही होगी. जब देश मे 15 अगस्त 1969 को इसरो अस्तित्व में आ चुका था और 19 अप्रैल 1975 को आर्यभट्ट उपग्रह अंतरिक्ष मे भेजा चुका था तब 2017 में मोदी अंतरिक्ष मे भारत ने ताकत दिखाई कहते है. जब 90 वर्ष पहले देश मे रेडियो प्रसारण हो चुका था तभी 2014 से नरेंद्र मोदी आकाशवाणी से मन की बात कह सके होंगे.

एक फ़्रेन्च कहावत है कि“Rome wasn’t built in a day.

हाँ कुछ बातों के लिए मोदी सरकार बधाई की पात्र भी है कि उसने देश मे कुछ पहले से चली आ रही योजनाओं का नाम बदलकर आगे बढ़ाया जिनमे निर्मल भारत को स्वच्छ भारत नाम देकर आगे बढ़ाया, 15 मार्च 1950 में गठित योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग बना दिया.एफडीआई और जीएसटी को और कठोर बना कर आगे बढ़ाया, डीजल और पेट्रोल के दामों को पिछली सरकार जहाँ छोड़कर गयी थी उसको और आगे तक पहुँचाया.पीछे छूटा तो सिर्फ और सिर्फ विकास, रोजगार, सहिष्णुता, भाईचारा और जनतन्त्र में जनों की आवाज. हर्ष का विषय ये भी है कि हमारा देश 21वीं सदी में भूखा प्यासा रहकर भी देश भक्ति तथा राष्ट्रवाद के लिए वोट देने के लिए ही नहीं अपितु मर मिटने को भी तैयार है. ऐसे में 23 मई 2019 के बाद आने वाली नई सरकार के लिए कुछ ज्वलन्त मुद्दों पर चिंता करने की जरूरत नहीं होगी,

मसलन बेरोजगारी, भुखमरी, कुपोषण, भरष्टाचार, गरीबी, निरक्षरत आदि पर नीति बनाने की आवश्यक्ता ही महसूस नहीं होनी चाहिए क्योंकि भारत की संस्कृति” जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की भावना से ओतप्रोत है. नव राष्टवाद के जनक न गांधी को मानते हैं, न नेहरू को और न ही डॉ0 आंबेडकर को और न ही भारतीय संविधान को. चुनावी और दिखावटी राष्टवाद से ही अगर युवाओं का जीवन, बेरोजगारों का जीवन, किसानों का जीवन, वंचित और पिछड़ों का जीवन, बीमारों ,भुखमरों, शोषितो, महिलाओं और आदिवासियों का जीवन सुखमय और खुशहाल हो जाता है तो मैं ऐसी सरकार को बार-बार देश के लिए दिल्ली में विराजमान होने की वकालत करुँगा.

आई0 पी0 ह्यूमन स्वतन्त्र स्तम्भकार इसे भी पढ़ें-उत्तर प्रदेश में दलित दूल्हे को मंदिर जाने से रोका

‘गिरफ्तार होने का डर नहीं, हर धर्म में होते हैं आतंकवादी’

अभिनेता से नेता बने कमल हासन पिछले दिनों चुनाव प्रचार के दौरान दिए एक बयान को लेकर विवादों के घेरे में हैं. कमल ने कहा था कि आजाद भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था और उसका नाम था नाथूराम गोडसे. अब इस बयान को लेकर उन्होंने सफाई दी है और कहा है कि हर धर्म के आतंकवादी पाए जाते हैं और कोई धर्म यह दावा नहीं कर सकता कि वह किसी और धर्म से बेहतर है. बयान को लेकर हो रहे विरोध पर हासन ने कहा कि वह गिरफ्तार होने से डरते नहीं हैं. बता दें कि कमल के बयान के बाद उनकी रैलियों में पत्थर और अंडे फेंके जाने की घटनाएं सामने आई हैं.

‘हर धर्म में होते हैं आतंकवादी’ पत्रकारों से बात करते हुए कमल ने कहा, ‘आतंकवादी हर धर्म में होते हैं. इतिहास में ऐसे कई लोगों को कई धर्मों में देख सकते हैं. मैंने यही कहा था कि हर धर्म के अपने आतंकवादी होते हैं. कोई यह दावा नहीं कर सकता कि हम दूसरे धर्म से बेहतर हैं और हमने ऐसा कभी नहीं किया. इतिहास गवाह है कि हर धर्म में चरमपंथ होता है. मैं उस दिन सौहार्द्र के बारे में बात कर रहा था.’

‘गिरफ्तार होने का डर नहीं, गिर रहा राजनीति का स्तर’ इस बयान के बाद मिल रहीं धमकियों और त्रिची में पत्थर फेंके जाने की घटना के बारे में हासन ने कहा कि उन्हें डर नहीं लग रहा. उन्होंने कहा कि राजनीति का स्तर नीचे जा रहा है और वह कीचड़ उछालने में शामिल नहीं होंगे. वह गिरफ्तार होने से डरते नहीं हैं. अगर उन्हें गिरफ्तार किया गया तो और भी परेशानी होगी. कमल ने आगे कहा कि यह चेतावनी नहीं, सलाह है.

‘हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, कर किसी तक पहुंचने की कोशिश’ जब उनसे यह सवाल किया गया कि यह खासकर मुस्लिम समुदाय तक पहुंचने की कोशिश थी तो उन्होंने जवाब दिया कि वह मुस्लिम, ईसाई या हिंदू, हर समुदाय तक पहुंचने की कोशिश करेंगे. गौरतलब है कि हासन ने तमिलनाडु के करुर जिले की अरिवाकुरिची विधानसभा सीट उपचुनाव के लिए प्रचार के दौरान कहा था, ‘आजाद भारत का पहला आतंकवादी एक हिंदू था और उसका नाम नाथूराम गोडसे था. मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूं क्योंकि यहां पर कई सारे मुस्लिम मौजूद हैं. मैं महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने खड़े होकर यह कह रहा हूं.’

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देश की जनता से माफी मांगती हूं, मेरा बयान गलत, मैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का बहुत सम्मान करती हूं : प्रज्ञा ठाकुर

साध्वी प्रज्ञा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान पर प्रज्ञा ठाकुर ने माफी मांग ली है. रात को 1 बजे किए गए ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘मैं नाथूराम गोडसे के बारे में दिये गए मेरे बयान के लिये देश की जनता से माफ़ी मांगती हूं. मेरा बयान बिलकुल ग़लत था. मैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का बहुत सम्मान करती हूं.’ गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर  चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं. आगर मालवा शहर में रोड शो के दौरान NDTV के सहयोगी ज़फर मुल्तानी से बात करते वक्त उनसे नाथूराम गोडसे को लेकर एक सवाल पूछा, जिस पर उनका जवाब आया कि वह देश भक्त थे, हैं और रहेंगे. बता दें, यह सवाल इसलिए पूछा गया, क्योंकि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे का उल्लेख करते हुए कमल हासन ने रविवार को कहा था कि ‘आजाद भारत का पहला उग्रवादी एक हिंदू था.’

 

रोड शो के दौरान प्रज्ञा ठाकुर से इस मसले पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ”नाथूराम गोडसे देश भक्त थे, है और रहेंगे. उनको आतंकवादी कहने वाले लोग स्वयं की गिरेबान में झांक कर देखें, ऐसा बोलने वालो को इस चुनाव में जवाब दे दिया जाएगा.” इसके बाद एनडीटीवी के सहयोगी ज़फर मुल्तानी ने पूछा, क्या आप नाथू राम गोडसे का समर्थन करती हैं. इस पर उन्होंने नजरअंदाज कर अपना रोड शो जारी रखा. हालांकि कि नाथूराम गोडसे वाले बयान पर बीजेपी प्रज्ञा ठाकुर सहमत नहीं है. प्रज्ञा ने प्रदेश अध्यक्ष से माफी मांगी और उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया.

बता दें, प्रज्ञा ने कहा था आतंकवादी विरोधी दस्ते (एटीएस) प्रमुख करकरे ने मालेगांव विस्फोट मामले की जांच के दौरान उन्हें यातनाएं दी थीं और उनके शाप की वजह से ही करकरे की 26/11 आतंकवादी हमले में मौत हुई थी. इसके अलावा उन्होंने एक बयान दिया था कि 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में शामिल होने के लिये उन्हें अपने ऊपर गर्व है. इस मसले पर चुनाव आयोग से प्रज्ञा ने दिवंगत आईपीएस अधिकारी के खिलाफ अपने बयान के लिए माफी मांगी थी.

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यूपी: वाराणसी में लोगों को धमकी दी जा रही है, चुनाव निष्पक्ष कैसे होंगे- मायावती

नई दिल्ली। बसपा प्रमुख मायावती ने पीएम नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा, मायानती ने ट्वीट कर लिखा, ” पीएम श्री नरेन्द्र मोदी को वाराणसी में हर हाल में जितवाने की कोशिश में वहां के हर गली-कूचे व घर-घर में जो बाहरी लोगों के माध्यम से पहले लालच और फिर धमकी आदि दी जा रही है उससे वहाम मतदान स्वतंत्र व निष्पक्ष कैसे हो पाएगा? चुनाव आयोग की, बंगाल की तरह, वाराणसी पर नजर क्यों नहीं है?

मायावती ने गुरुवार को कहा था कि देश में जब से लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई है तबसे खासकर बंगाल में आए दिन कोई ना कोई खबर जरूर सुर्खियों में रहती है जिसके लिए वहां पूरे तौर से बीजेपी और आरएसएस के लोग ही जिम्मेदार है.

मायावती ने कहा ‘खासकर इस चुनाव में जहां तक बंगाल में आये दिन चुनावी हिंसा व बवाल आदि होने का सवाल है तो ऐसा साफ तौर से लगता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व इनके चेले अमित शाह के नेतृत्व में उनकी पूरी पार्टी व सरकार ने सोची-समझी रणनीति के तहत ही ममता बनर्जी सरकार को निशाने पर लिया हुआ है. चुनाव में इनको षड्यन्त्र के तहत निशाना बनाया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ‘इतना ही नहीं बल्कि अब तो वहां ये दोनों गुरु व चेले जिस प्रकार से हाथ धोकर ममता बनर्जी व उनकी पार्टी के पीछे पड़े हैं वह एक खतरनाक प्रवृत्ति है जो कतई भी उचित व न्यायसंगत नहीं है.’

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अब चूरू में दलित युवक से मारपीट, चप्पल चटवाई, VIDEO किया वायरल

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प्रदेश में एक के बाद एक शर्मनाक वारदातें सामने आ रही हैं. अलवर गैंगरेप के बाद अब चूरू के सादुलपुर में एक दलित को मारपीट कर चप्पल चटवाने का मामला सामने आया है. मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना का आरोपियों ने न केवल वीडियो बनाया, बल्कि बाद में उसे वायरल भी कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद समाज के लोग आक्रोशित हैं. इस संबंध में पीड़ित ने चार नामजद लोगों समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया है.

जानकारी के अनुसार, मामला सादुलपुर कस्बे से जुड़ा है और करीब दस दिन पुराना बताया जा रहा है. वहां टैम्पो चालक युवक गत 5 मई की रात को अपने घर जा रहा था. इसी दौरान कुछ दबंग उसके ऑटो में बैठे. बाद में किराए को लेकर पीड़ित की उनसे कहासुनी हो गई. इस पर दबंगों ने उसके साथ गाली गलौच की और उसे जबरन पकड़कर एक मकान में ले गए.

वहां दबंगों ने युवक की जमकर पिटाई की. बाद में उसे चप्पल चटवाई गई और उसका वीडियो बना लिया. मारपीट के दौरान दबंग युवक पर चोरी का आरोप लगाते हुए सुनाई दे रहे हैं. बदमाशों ने बाद में युवक को छोड़ दिया, लेकिन साथ ही घटना के बारे में किसी को बताने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी दे डाली.

बदमाश यहीं नहीं रुके और बाद में उन्होंने घटना का वीडियो वायरल कर दिया. वीडियो वायरल होने पर घटना सामने आई तो दलित समाज के लोगों में आक्रोश फैल गया. गुरुवार को पीड़ित और समाज के लोग थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में अंकित, सुखवीर, बलवान और सुमित सहित अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है.

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नरेंद्र मोदी की जाति के विवाद का अंत

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नरेंद्र मोदी की ओबीसी जाति को लेकर मायावती, तेजस्वी यादव, अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल के आरोप सामने आए हैं. चारों ने ये कहा है कि मोदी असली ओबीसी नहीं है. बाद में कागज के खेल से ओबीसी बन गए हैं.

नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली ने इसका जवाब अपने तरीके से दिया है,

पत्रकारिता का दायित्व है कि ऐसे मौके पर सच का पता लगाए और तथ्य सामने रखे. ये देखे बगैर की इसमें किसका लाभ और किसका नुकसान है. पूरी ईमानदारी से. दस्तावेजी सच. क्योंकि दो तरह के दावे हैं, तो पब्लिक को सच जानने का अधिकार है.

चूंकि टीवी और अखबार वाले दूसरे जरूरी कामों में बिजी हैं, इसलिए ये काम मुझे करना पड़ रहा है.

इस मामले में फैक्ट इस प्रकार हैं.

1. मोदी जी की मोढ घांची या मोध घांची जाति शुरुआत में ओबीसी की लिस्ट मे नहीं थी. राज्य की पिछड़ी जाति की लिस्ट में ये जाति 1994 में लाई जाती है.

2. ओबीसी या अदर बैकवर्ड क्लासेस की लिस्ट केंद्र सरकार की होती है. ये लिस्ट मंडल कमीशन ने बनाई थी. इस रिपोर्ट के अंत में पिछड़ी जातियों की जो लिस्ट है, उसमें मोढ घांची जाति नहीं है. इसकी पुष्टि आप किसी भी विश्वविद्यालय या संस्थान की लाइब्रेरी में रखी मंडल कमीशन की रिपोर्ट से कर सकते हैं.

3. इसलिए नरेंद्र मोदी ये बात तो गलत कह रहे हैं कि वे पिछड़ी मां की संतान हैं. जब उनका जन्म हुआ तो उनकी जाति न गुजरात में पिछड़ी जाति में थी, न केंद्र में ओबीसी लिस्ट में.

4. केंद्र की ओबीसी लिस्ट में इस जाति को नोटिफिकेशन संख्या – 12011/68/98-BCC dt 27/10/1999 के जरिए लाया जाता है. उसके गजट नोटिफिकेशन का लिंक आप इस पोस्ट के कमेंट बॉक्स में जाकर देख सकते हैं. यानी नरेंद्र मोदी पहले ओबीसी नहीं थे. लेकिन अब हैं.

5. इस नोटिफिकेशन के जरिए 27 अक्टूबर 1999 को नरेंद्र मोदी की जाति ओबीसी लिस्ट में शामिल की जाती है. उस समय गुजरात और केंद्र दोनों जगह बीजेपी की सरकार थी. केशुभाई पटेल मुख्यमंत्री और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे.

6. फैक्ट ये हुआ कि जब बीजेपी की सरकार थी, तब नरेंद्र मोदी की जाति को ओबीसी की लिस्ट में शामिल किया गया. इसके लिए गुजरात की ओबीसी लिस्ट में 23 नंबर की एंट्री में संशोधन किया गया. इस नंबर पर पहले सिर्फ घांसी (मुस्लिम) का जिक्र था. 1999 में इसमें मोढ घांची को शामिल किया गया.

7. नई जातियों को ओबीसी लिस्ट में शामिल किया जाता रहा है.

8. ये रिसर्च का विषय है कि मोढ घांची जाति में पिछड़ेपन के किन लक्षणों के आधार पर राज्य सरकार ने उसे ओबीसी बनाने की सिफारिश की और केंद्र सरकार ने उसे किस आधार पर ओबीसी में शामिल कर लिया.

9. नरेंद्र मोदी जब कहते हैं कि वे ओबीसी हैं तो वो गलत नहीं है. कानूनी स्थिति यही है कि उनकी जाति अब ओबीसी है.

10. लेकिन जब वे कहते हैं कि वे पिछड़ी मां के बेटे हैं तो वे झूठ बोलते हैं.

दिलीप मंडल के फेसबुक पेज से Read it also-ममता के समर्थन में उतरी मायावती

अखिलेश यादव का बदला और बहुजन नेताओं का राजनैतिक एका

फाइल फोटो

“जब उन्होंने हमारे जाने के बाद मुख्यमंत्री आवास को गंगा जल से धोया था तब हमने भी तय कर लिया था कि हम उनको पूड़ी खिलाएंगे.”

यह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव का ट्विट है. चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में यह ट्विट कर अखिलेश यादव ने अपने मन की पीड़ा बयान की है. अखिलेश यादव ने जो ट्विट किया है, वह महज एक ट्विट भर नहीं है, बल्कि यह उनके भीतर का दर्द है, जो उन्हें तब महसूस हुआ जब उनके मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद वहां रहने से पहले वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे गंगा जल और गौ मूत्र से पवित्र करवाया था. योगी मुख्यमंत्री आवास को एक ‘शूद्र समाज’ के व्यक्ति के रहने से अपवित्र हुआ मान रहे थे, जिसके कारण उन्हें उस आवास को पवित्र करने की जरूरत महसूस हुई. तभी से अखिलेश यादव ने उस अपमान को अपने भीतर पाल रखा था. जैसा कि उन्होंने इस ट्विट में कहा भी है. पहले भी कई मौकों पर वह इस घटना का जिक्र कर चुके हैं.

अम्बेडकरी आंदोलन से जुड़ने के बाद मैं लगातार एक बार पढ़ता-सुनता आ रहा हूं जिसमें कहा जाता है कि “गुलामों को उनकी गुलामी का अहसास करा दो वो विद्रोह कर देगा.” अखिलेश यादव का “उनको पूड़ी खिलाने” का प्रण ऐसा ही है. योगी आदित्यनाथ के उस जातिवादी कदम ने अखिलेश यादव को इतना अपमानित महसूस कराया कि वो किसी भी तरह भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए जुट गए. उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के साथ बने इस गठबंधन को बनाने में सबसे ज्यादा किसी ने मेहनत की तो वो अखिलेश यादव ही हैं. उसका परिणाम भी दिख रहा है. चुनाव परिणाम इस बात को और पुख्ता करेंगे कि अखिलेश का प्रण कितना कामयाब होगा.

सीएम बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी के गृहप्रवेश के पहले शुद्धिकरण (फाइल फोटो)

यूपी में बना महागठबंधन खासकर यादवों, जाटवों, मुसलमानों और कुछ अन्य दलित-पिछड़ी जातियों का गठबंधन है, जिसमें राष्ट्रीय लोक दल के अजीत सिंह के भरोसे जाट वोटरों से भी इसमें जुड़ने की अपील की जा रही है. इस महागठबंधन को बनाने में अखिलेश यादव ने जहां काफी मेहनत की तो बहुजन समाज पार्टी की मुखिया ने भी एक परिपक्व और समझदार राजनीतिज्ञ की तरह अखिलेश यादव को तवज्जो दिया. यह बहनजी की दूरदर्शिता ही थी, जिसकी वजह से यह गठबंधन बन पाया. सवाल है कि जब उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज की दो प्रमुख राजनैतिक ताकतें एक साथ आ गई हैं तो क्या बहुजन समाज का आम इंसान यह सपना देख सकता है कि एक दिन तमाम प्रदेशों में मौजूद बहुजन समाज के नेतृत्व वाले राजनैतिक दल एक साथ आएं? या फिर कम से कम एक-दूसरे के साथ मिलकर न सिर्फ दलितों-पिछड़ों-अल्पसंख्यकों के लिए बल्कि समाज के हर व्यक्ति के लिए बेहतर सरकार की कल्पना पर बात करें. जैसे बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के युवा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बिहार में राजनीति करने के बावजूद यूपी में अखिलेश यादव और मायावती जी के साथ दिखते हैं.

सोचिए, जब दिल्ली में उदित राज और वाल्मीकि समाज का कोई नेता प्रदेश को नेतृत्व दे, महाराष्ट्र में बहुजनों का नेतृत्व रामदास अठावले और प्रकाश आम्बेडकर मिलकर करें और इसमें समान विचारधारा वाले अन्य नेताओं को भी शामिल करें. छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी उभर कर आए. बिहार के बहुजन नेताओं में बनी एकता जारी रहे तो वह दृश्य कैसा होगा. जाहिर है कि बड़े नेताओं का अहम उन्हें साथ आने से रोकता रहा है लेकिन अगर एक पल वो अहम को किनारे रख देने को तैयार हो जाएं तो इसमें सिर्फ समाज का नहीं, बल्कि उन नेताओं का भी फायदा होगा. और अगर ऐसा संभव होगा तो इसमें सबसे बड़ी भूमिका बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती जी को निभानी होगी. अम्बेडकरवादी विचारधारा वाले बहुजन समाज के सक्रिय और प्रभावी राजनेताओं में मायावती सबसे आगे खड़ी दिखती हैं. अगर वो पहल करें तो देश की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है. अखिलेश यादव ने जिस अपमान का घूंट पिया, तमाम दलित-पिछड़े राजनेता भी अपने जीवन में वही अपमान महसूस कर चुके हैं. आज के वक्त में उनका राजनैतिक एका ही पूरे समाज को न्याय दिला सकता है और भेदभाव रहित एक बेहतर भारत बना सकता है.

जंगल में भटकने के बाद रोने लगा चीनी नागरिक, इस सब इंस्पेक्टर ने सुरक्षित घर पहुंचाया

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नोएडा के एक पुलिसकर्मी ने जंगल में भटक गए एक चीनी नागरिक को सुरक्षित वहां से ढूंढ़ निकाला. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जंगल में भटकने के बाद चीन का यह नागरिक रोने लगा. इस दौरान पुलिसकर्मी ने चीन के नागरिक को ग्रेटर नोएडा में उसके घर वापस पहुंचाने में मदद की. पुलिस के मुताबिक चीनी नागरिक की पहचान शिंग फू के तौर पर हुई है, जो यहां मोबाइल उत्पादन कंपनी में काम के सिलसिले से आया था लेकिन उसका फोन और पर्स कहीं खो गया था.

पुलिस ने बताया कि हिंदी या अंग्रेजी नहीं समझने वाला शिंग फू मंगलवार को अपने साथियों से भी बिछड़ गया था और जंगल में भटक गया था. कासना पुलिस थाना क्षेत्र के तहत आने वाली एक पुलिस चौकी के प्रभारी सब इंस्पेक्टर कोमल सिंह मंगलवार को रात करीब साढ़े नौ बजे गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के पास के इलाके में गश्त पर थे, जब उन्होंने जंगल के पास वाली सड़क पर कुछ संदिग्ध गतिविधि देखी.

पीटीआई के अनुसार कोमल ने बताया, ‘मैंने वाहन रोक कर इस बारे में जानना चाहा और वहां झाड़ियों के पास मुझे एक व्यक्ति नजर आया. मैंने उससे पूछा कि वह कौन है और वह बस इतना कह सका ‘प्लीज हेल्प’.’

उन्होंने बताया कि वह अंग्रेजी के बस यही दो शब्द जानता था और उसे हिंदी भी नहीं आती थी. लेकिन वह काफी परेशान लग रहा था. सिंह ने बताया कि उन्होंने उसे अपने कार में आने का इशारा किया और अपने एक पहचान वाले को फोन किया जो एक निजी एजेंसी में अनुवादक के तौर पर काम करता है.

कोमल के अनुसार किस्मत से उसे चीनी भाषा आती थी और इस तरह से पता चला कि शिंग ग्रीनवुड सोसाइटी के फेज टू में रहता है. यह जगह वहां से कुछ छह-सात किलोमीटर दूर थी, जहां वह खो गया था. सिंह ने बताया कि उसे भूख भी लगी थी और उसने आईसक्रीम का एक ठेला देख कर आईसक्रीम खाने की इच्छा जताई.

सिंह ने बताया कि अपने समूह के साथ फिर से मिलने के बाद वह बहुत भावुक हो गया था. उसने टूटी-फूटी हिंदी में धन्यवाद किया और पुलिस एवं भारत को महान बताया.

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Pulwama Encounter: सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को किया ढेर, एक जवान शहीद, ऑपरेशन जारी

सांकेतिक चित्र

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार सुबह से सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है. सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया है और इसमें एक जवान शहीद हो गया है. बताया जा रहा है कि दलीपोरा में सुरक्षाबलों की घेराबंदी तथा तलाश अभियान (कासो) के दौरान गुरुवार सुबह आतंकवादियों से मुठभेड़ हो गई.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय राइफल (आरआर), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान दल ने गुरुवार तड़के पुलवामा के दलिपोरा गांव में कासो शुरू किया. सुरक्षा बलों के जवानों ने गांव के सभी निकास मार्गों को बंद कर दिया. इसके बाद सुरक्षा बलों के जवान जब गांव में एक विशेष क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे, तो वहां छिपे हुए आतंकवादियों ने स्वाचालिक हथियारों से गोलीबारी शुरू की. सुरक्षा बलों के जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलायीं.

सूत्रों के अनुसार इस दौरान सुरक्षा बलों के दो जावन तथा एक स्थानीय निवासी घायल हो गए. इसमें एक जवान शहीद हो गया है जबकि बाकी घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. सूत्रों ने बताया कि अतिरिक्त सुरक्षा बलों तथा राज्य पुलिस के जवानों को किसी तरह के प्रदर्शन को रोकने के लिए मुठभेड़ वाली जगह के आसपास वाले क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया है. अंतिम सूचना मिलने तक मुठभेड़ जारी थी. प्रशासन ने पुलवामा में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवा स्थगित कर दी है.

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ममता के समर्थन में उतरी मायावती

नई दिल्ली। ममता बनर्जी और भाजपा के बीच छिड़ा युद्ध चुनाव आयोग के फैसले के बाद अब राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है. विपक्ष के तमाम नेताओं ने इस मामले में ममता बनर्जी का समर्थन किया है. ममता बनर्जी के समर्थन में बसपा प्रमुख मायावती भी सामने आ गई हैं और उन्होंने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को आड़े हाथों लिया है. आखिरी चरण के प्रचार पर एक दिन पहले ही बैन लगाने के चुनाव आयोग के फैसले का जिक्र करते हुए बसपा प्रमुख ने इस पर सवाल उठाया है.

उन्होंने आरोप लगाया है कि आज बंगाल में पीएम मोदी की दो रैलियों के कारण प्रचार पर सुबह से बैन नहीं लगाया गया. साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग दबाव में काम कर रहा है. मायावती ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में प्रचार पर गुरुवार रात 10 बजे से प्रतिबंध लगाया है, क्योंकि प्रधानमंत्री की दिन के वक्त दो रैलियां हैं… अगर उन्हें प्रतिबंध लगाना ही था, तो आज सुबह से ही क्यों नहीं…? यह पक्षपातपूर्ण है, और चुनाव आयोग दबाव में काम कर रहा है…”

साथ ही मायावती ने कहा, ‘यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, BJP प्रमुख अमित शाह तथा उनके नेता (पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तथा तृणमूल कांग्रेस प्रमुख) ममता बनर्जी को निशाना बना रहे हैं, योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया जा रहा है… यह बेहद खतरनाक और अन्यायपूर्ण ढर्रा है, जो देश के प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता…’ मायावती ने अमित शाह और नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए दोनों को गुरु और चेला कह कर संबोधित किया. दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने इसे ‘लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन’ कहा. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आयोग ने प्रक्रिया का पालन नहीं करते हुए सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी को रैलियों की इजाजत दी.

दरअसल भारत के चुनावी इतिहास में इस तरह की पहली कार्रवाई में चुनाव आयोग ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के नौ लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार (Lok Sabha Election) गुरुवार को रात 10 बजे समाप्त करने का आदेश दिया है. निर्धारित समयानुसार प्रचार एक दिन बाद शुक्रवार शाम को समाप्त होना था. लेकिन आयोग ने मंगलवार को कोलकाता में भाजपा तथा तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच झड़पों के बाद यह फैसला किया है.

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चुनाव खत्म होने से पहले ही बोली कांग्रेस, PM पद के बगैर गठबंधन सरकार में शामिल होने को तैयार

पटना। आम चुनाव में भले ही अभी एक चरण का मतदान बाकी है, लेकिन कांग्रेस ने बहुमत न मिलने की स्थिति में गठबंधन के संकेत दिए हैं. यही नहीं कांग्रेस का कहना है कि यदि उसे गठबंधन में पीएम का पद नहीं मिलता है, तब भी उसे कोई समस्या नहीं होगी. कांग्रेस के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पार्टी का एकमात्र उद्देश्य एनडीए को केंद्र में एक बार फिर से सरकार गठन से रोकना है.

आजाद ने कहा, ‘हम पहले ही अपना स्टैंड क्लियर कर चुके हैं. यदि कांग्रेस के पक्ष में सहमति बनती है तो हम नेतृत्व स्वीकार करेंगे. लेकिन, हमारा लक्ष्य हमेशा यह रहा है कि एनडीए की सरकार सत्ता में वापस नहीं लौटनी चाहिए. हम सर्वसम्मति से लिए गए फैसले के साथ जाएंगे.’ कांग्रेस लीडर का यह कहना इस बात का संकेत है कि पार्टी आम चुनाव के नतीजों को लेकर बहुत उत्साहित नहीं दिख रही है और बीजेपी को रोकने की कीमत पर गठबंधन में बड़े त्याग के लिए भी तैयार है.

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘जब तक हमें पीएम का पद ऑफर नहीं किया जाता है, हम इस बारे में कुछ नहीं कहेंगे और किसी के भी जिम्मेदारी संभालने पर ऐतराज नहीं होगा.’ बता दें कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा था कि यदि उसे आम चुनाव में जीत का भरोसा है तो पीएम पद के अपने उम्मीदवार का ऐलान करे.

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चुनाव 2019: प्रचार के दौरान कमल हासन पर फेंकी गई चप्पलें,

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चेन्नई। अभिनेता से नेता बने कमल हासन पर बुधवार शाम तिरुप्परनकुंदरम विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान मदुरै में चप्पलें फेंकी गईं. कमल हासन ने तीन दिन पहले बयान दिया था कि ‘आजाद भारत का पहला चरमपंथी हिंदू’ था, उन्होंने नाथुराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या की ओर इशारा करते हुए यह बात कही थी. पुलिस ने बताया कि चप्पलें हासन को नहीं लगीं, वह भीड़ पर ही गिर गईं. पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में भाजपा कार्यकर्ता, हनुमान सेना और अन्य संगठन के सदस्यों पर आरोप लगाया गया है. अरवाकुरिचि और तिरुप्परनकुंदरम विधानसभा सीट पर रविवार को उपचुनाव होंगे. कमल हासन की पार्टी मक्कल नीधि मैयम (एमएनएम) ने इन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

वहीं दूसरी ओर विवादों में घिरने के बाद कमल हासन ने बुधवार को कहा कि उन्होंने वही कहा है जो एक ऐतिहासिक सच था. हासन ने मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष अग्रिम जमानत याचिका दायर की है. इससे पहले अदालत ने हासन की पूर्व याचिका पर गौर करने से इनकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी खारिज करने की अपील की थी. मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति वी पुगलेंधी ने कहा कि प्राथमिकी रद्द करने की याचिकाओं को अवकाश के दौरान तत्काल सुनवाई की याचिकाओं के तौर पर नहीं लिया जा सकता. हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर अग्रिम जमानत याचिका दायर की जाती है तो उस पर सुनवाई हो सकती है.

अरवाकुरिचि पुलिस ने मंगलवार को हासन के खिलाफ भादसं की धाराएं 153 ए और 295 ए के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. एमएनएम ने दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद विकास मंत्री के टी राजेंद्र भालाजी के खिलाफ चेन्नई एवं तिरुचिरापल्ली में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. मंत्री ने कहा था कि हासन के इस बयान के लिए उनकी जीभ काट ली जानी चाहिए. हासन की पार्टी ने दावा किया कि रविवार को उनके दिये गये बयान को ‘संदर्भ से पूरी तरह हटाकर’ पेश किया गया.

रविवार के बयान के बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए फिल्मी दुनिया से राजनीति में उतरे हासन ने अपने विरोधियों से बस ‘जायज आरोप’ लगाने को कहा है और पूछा कि राजनीति में कदम रखने के बाद क्या वह समाज के बस एक ही तबके की बात करें. हासन ने मदुरै के समीप तिरूपुरकुंदरम में उप चुनाव के प्रचार के दौरान कहा, ‘मैं अरवाकुरिचि में जो कुछ कहा, उससे वे नाराज हो गये. मैंने जो कुछ कहा है वह ऐतिहासिक सच है. मैंने किसी को झगड़े के लिए नहीं उकसाया.’

उन्होंने कहा कि सच विजयी होता है न कि जाति और धर्म, तथा ‘मैने ऐतिहासिक सच कहा है.’ हासन ने कहा, ‘शब्द का अर्थ समझिए. मैं (गोडसे के खिलाफ) आतंकवादी या हत्यारा शब्द का इस्तेमाल कर सकता था. हम सक्रिय राजनीति में हैं, कोई हिंसा नहीं होगी.’ उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाषण को चुनिंदा ढंग से संपादित किया गया . उन्होंने यह कहते हुए विरोधियों पर निशाना साधा कि उनके खिलाफ लगाये गये आरोप के लिए हमारे मीडिया के दोस्त भी जिम्मेदार हैं. उन्होंने कहा कि क्या उनके आलोचक उनके बयान में ऐसा कुछ दिखा सकते हैं जो हिंसा भड़काए और कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोपों से उन्हें पीड़ा पहुंची है.

हासन ने कहा, ‘वे कह रहे हैं कि मैंनें हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई. मेरे परिवार में भी कई हिंदू हैं. मेरी बेटी भी हिंदू धर्म को मानती है.’ हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कौन से बेटी, क्योंकि उनकी दो बेटियां हैं. हासन ने कहा, ‘मुझे अपमानित करने के लिए मेरी विचारधारा का ढोल मत पीटिए. आपके हाथ कुछ नहीं आएगा. दरअसल ईमानदारी मेरी विचारधारा का आधार है जबकि आपके साथ ऐसा नहीं है.’ उन्होंने बिना किसी का नाम लिये कहा, ‘आपने अपने बुनियाद को झूठा बना लिया है, आप कहीं भी हों, चाहे दिल्ली या चेन्नई में, आप लंबे समय तक झूठ बोलकर लोगों को बेवकूफ नहीं बना सकते.’

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मानुषी छिल्लर मिस वर्ल्ड 2017, अब बनेंगी इस एक्टर की पत्नी!

नई दिल्ली। साल 2017 में मिस वर्ल्ड का खिताब जीत चुकी हैं मानुषी छिल्लर जल्द बॉलीवुड में एंट्री कर सकती हैं. मानुषी ने जब से मिस वर्ल्ड का खिताब जीता है उसके बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि वो अब फिल्मों में भी हाथ आजमाएंगी. पहले खबर थी की वो रणवीर सिंह के साथ बॉलीवुड में डेब्यू कर सकती हैं. लेकिन अब खबर आ रही है कि वो अक्षय कुमार से साथ इंडस्ट्री में उतरेंगी वो भी उनकी पत्नी बनकर. हालांकि इसको लेकर अभी तक मेकर्स की तरफ से किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है

वैसे ये तो रही मानुषी के फिल्मी करियर की बात. लेकिन क्या आपको याद है कि मानुषी ने मिस वर्ल्ड का खिताब कैसे जीता था? अगर नहीं याद तो हम आपको याद दिला देते हैं. साल 2017 में चीन के सान्या शहर एरीना में मिस वर्ल्ड समारोह का आयोजन हुआ था. मानुषी के साथ दुनिया की 108 सुंदरियां भी कॉम्पटिशन में थीं. ग्रैंड फिनाले में मानुषी से सवाल पूछा गया कि किस प्रोफेशन को सबसे ज्यादा तनख्वाह मिलनी चाहिए और क्यों?

इस पर मानुषी ने जो जवाब दिया था उसके बाद वहां मौजूद हर शख्स के हाथ तालियों के लिए उठ गए थे. इस सवाल के जवाब में मानुषी ने कहा था, मेरे हिसाब से एक मां को सबसे ज्यादा इज्जत मिलनी चाहिए. वहीं, सैलरी की बात है तो मतलब रुपयों से नहीं होना चाहिए बल्कि सम्मान और प्यार से है. मानुषी के इसी जवाब ने ना सिर्फ उन्हें इज्जत दिलाई बल्कि वर्ल्ड कप का खिताब भी दिला दिया. आपको बता दें कि 2017 में मानुषी ने 17 साल बाद भारत की झोली में ये खिताब डाला था. उनसे पहले प्रियंका चोपड़ा मिस वर्लड बनी थीं.

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मेरे पास जो कुछ है शुभचिंतकों ने दिया है, मैंने कुछ छुपाया नहीं: मायावती

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नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के लिए अंतिम चरण का मतदान 19 मई को होगा. इसके लिए प्रचार अभियान तेज हो गया है. इस बीच बुधवार सुबह बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी बीएसपी को बहन जी संपत्ति पार्टी कहते हैं. उन्होंने कहा कि बीएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास जो कुछ भी है. यह उनके शुभचिंतकों और समाज द्वारा दिया गया है और सरकार से कुछ भी नहीं छुपाया गया है.

मायावती ने कहा कि जनहित और देशहित के मामले में बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहुत फिट हैं और इनकी तुलना में मोदी बहुत ज्यादा अनफिट हैं. उन्होंने कहा ‘बीएसपी की सरकार ने विकास के मामले में हर स्तर पर उत्तर प्रदेश का नक्शा बदल दिया. लखनऊ की खूबसूरती को जिस तरह चार चांद लगाए गए, उससे यह समझा जा सकता है कि जनहित और देशहित के मामले में बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कितनी ज्यादा फिट हैं तथा इनकी तुलना में पीएम मोदी कितने ज्यादा अनफिट हैं.

मायावती ने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी वास्तम में जब मैं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री था उससे अधिक समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. लेकिन उनकी विरासत बीजेपी और देश की सांप्रदायिकता पर काला धब्बा है. जब हमारी सरकार थी तब उत्तर प्रदेश दंगों और अराजकता से मुक्त था.

उन्होंने कहा, मोदी सरकार दलित विरोधी है. दलितों को गुमराह करने का हथकंडा अपना रही है. पीएम मोदी शालीनताओं को तार-तार कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि बेनामी संपत्ति वाले बीजेपी से जुड़े हैं, बीजेपी शाही खर्च वाली पार्टी है. क्या मोदी सरकार विदेश से काला धन वापस ला पाई? साथ ही उन्होंने कहा कि नोटबंदी सबसे बड़ा घोटाला है.

मायावती ने फिर किया पलटवार

लखनऊ। बीएसपी सुप्रीमो मायावती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच इन दिनों बहसबाजी तीखी हो गई है. इससे यह साफ नजर आ रहा है कि मायावती खुद को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में प्रॉजेक्ट कर रही हैं. इसका अंदाजा पीएम मोदी और उनके बीच इन दिनों चल रही बहसबाजी में भी नजर आता है. यूपी की चुनावी रैलियों में मायावती और गठबंधन पर हमला बोलते हैं तो बीएसपी चीफ भी उन पर पलटवार करने से पीछे नहीं हटतीं.

पीएम मोदी के बेनामी संपत्ति के आरोप के जवाब पर मायावती ने कहा कि सबसे ज्यादा बेनामी संपत्ति वाले लोग बीजेपी से जुड़े हैं. इनका हिसाब-किताब कालीन के अंदर छिपा है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जनहित और देशहित के मामले में बीएसपी अध्यक्ष फिट हैं और इसकी तुलना में मोदी अनफिट हैं. राष्ट्रीय स्तर पर खुद को पेश करने की कोशिश में जुटी मायावती इन दिनों खुलकर पीएम मोदी पर निशाना साध रही हैं.

मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘पीएम मोदी शालीनताओं को पार कर चुके हैं, वह बीएसपी को बहनजी की संपत्ति पार्टी कहने में घबराते नहीं है. बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास जो कुछ भी है वह शुभचिंतकों और समाज के लोगों ने दिया है और सरकार से कुछ भी छिपा नहीं है.’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा बेनामी संपत्ति वाले भ्रष्ट लोग बीजेपी से जुड़े हैं.

‘सिर्फ कागजों पर ईमानदार हैं मोदी’ मायावती ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, ‘मोदी सिर्फ कागजों पर ही ईमानदार नजर आते हैं, ठीक ओबीसी के दावे की तरह. मोदी वास्तव में कुछ हैं और जनता के सामने कुछ और बनने की कोशिश करते हैं. इनका हिसाब-किताब कालीन के अंदर छिपा रहता है.’ मायावती ने कहा कि बीजेपी और पीएम मोदी ने पिछले 5 साल में बीएसपी को बदनाम करने की हर कोशिश लेकिन विफल रही, क्योंकि उनका हिसाब खुली किताब की तरह है.

‘दलितों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते मोदी’ मायावती ने यह भी कहा, ‘विदेशों से कालाधन न ला पाने के पीछे इनकी क्या राजनीति है, यह देश अच्छी तरह जानता है. मायावती ने पीएम मोदी के दलित की नहीं दौलत की बेटी के आरोप पर कहा, यह उनका असली चेहरा दिखाता है जिनकी मानसिकता दलितों के प्रति घोर जातिवादी है. ये लोग सदियों से पीड़ित शोषित समाज को थोड़ा भी आगे बढ़ना नहीं देखना चाहते. आरक्षण का विरोध करते हैं जिसमें बीजेपी नंबर एक पर है.’

‘पीएम के रूप में मोदी की विरासत काला धब्बा जैसी’ मायावती ने आगे कहा, ‘मैं यूपी की चार बार सीएम रही हूं लेकिन मेरी शानदार विरासत रही है. बीएसपी सरकार के समय यूपी की कानून और शासन व्यवस्था की लोग आज भी तारीफ करते नहीं थकते.’ उन्होंने आगे कहा, ‘मोदी मुझसे ज्यादा समय तक सीएम रहे लेकिन उनकी विरासत ऐसी रही कि जो बीजेपी और देश की संप्रभुता पर काला धब्बा है.’

‘पब्लिक ऑफिस होल्ड करने में विफल मोदी’ मायावती ने कहा, ‘इससे पता चलता है कि जनहित और देशहित के मामले में बीएसपी अध्यक्ष कितनी फिट हैं और इसकी तुलना में मोदी कितने अनफिट हैं. हमारी सरकार में यूपी दंगा और अराजकता से मुक्त रहा है जबकि मोदी का गुजरात में ही नहीं पीएम के रूप में भी कार्यकाल नफरत, घृणा और अराजकता से भरा रहा है. वह पब्लिक ऑफिस होल्ड करने में विफल रहे हैं.’

‘महामिलावटी लोगों के पास नामी और बेनामी संपत्तियों का अंबार’ बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को विपक्षियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि महामिलावटी लोगों के पास नामी और बेनामी संपत्तियों का अंबार लगा हुआ है. मोदी ने एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि महामिलावटी लोगों ने राजनीति के नाम पर अपने और अपने रिश्तेदारों के लिए बंगले खड़े किए. नामी और बेनामी संपत्तियों का अंबार लगाया. एजेंसियां इसका हिसाब ले रही हैं. इसीलिए ये लोग एक-दूसरे के साथ आने को मजबूर हो गए हैं.

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कोलकाता में कल रात से अबतक क्या-क्या हुआ

नई दिल्ली। कोलकाता में मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में बवाल के बाद से पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है. इस हंगामे की वजह से आखिरी चरण की वोटिंग से पहले टीएमसी और बीजेपी का टकराव गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है. ममता बनर्जी ने जहां हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है, वहीं बीजेपी ने चुनाव आयोग से ममता के चुनाव प्रचार पर बैन की मांग की है. आइए सिलसिलेवार ढंग से बताते हैं कोलकाता में कल से अबतक क्या-क्या हुआ.

ममता को चुनौती दे शाह ने शुरू किया रोड शो जाधवपुर में रैली की इजाजत रद्द करने और हेलिकॉप्टर उूसमतारने की अनुमति नहीं मिलने से भड़के बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ममता बनर्जी को चुनौती दी कि वह कोलकाता आ रहे हैं, हिम्मत है तो दीदी गिरफ्तार करें. मंगलवार को कोलकाता में अमित शाह के रोड शो से पहले कुछ जगहों पर पीएम मोदी और शाह के पोस्टरों को कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया. शाम को शाह का रोड शो शुरू हुआ. सड़क पर भगवा जनसैलाब दिख रहा था. ‘जय श्री राम’ और ‘मोदी-मोदी’ के नारों के साथ अमित शाह का रोड शो आगे बढ़ रहा था.

शाम 6.20 पर कलकत्ता यूनिवर्सिटी गेट पहुंचे शाह शाम 6 बजकर 20 मिनट के आस-पास शाह कलकत्ता यूनिवर्सिटी गेट पहुंचे. वहां तृणमूल छात्र परिषद के कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाए. पुलिस ने तत्काल हालात को संभाला.

विद्यासागर कॉलेज के सामने रोड शो पर पत्थरबाजी 10 मिनट के भीतर ही विद्यासागर कॉलेज के सामने रोड शो पर पत्थरबाजी हुई. आरोप है कि इसके बाद कुछ बीजेपी समर्थकों ने 2 मोटरसाइकलों और एक साइकल में आग लगा दी. हालांकि बीजेपी ने इसके लिए तृणमूल को जिम्मेदार ठहराया. शाह ने बुधवार को दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनके कार्यकर्ता अपनी ही गाड़ियां क्यों जलाते. इस अग्निकांड के बाद मंगलवार देर शाम हिंसा और तेजी से भड़की और पुलिस को हालात संभालने में पसीने छूट गए. बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई.

शाह पर फेंके गए डंडे और बोतल, ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा खंडित हालात तब और खराब हो गए जब टीएमसी के कुछ समर्थकों ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर झंडों के डंडे और बोतल फेंकने लगे. सुरक्षा कर्मियों ने अमित शाह को बचाया. बीजेपी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को शांत कराने का प्रयास किया. विद्यासागर कॉलेज पास बीजेपी और तृणमूल छात्र परिषद के कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प के दौरान समाज सुधारक ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा टूट गई. इसके लिए बीजेपी और टीएमसी एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. करीब सवा 7 बजे पुलिस हालात को संभाल पाई.

विद्यासागर की प्रतिमा तोड़े जाने पर आरोप-प्रत्यारोप अमित शाह के रोड शो में बवाल के बाद बीजेपी ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर गुंडागर्दी का आरोप लगाया. बीजेपी ने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र की हत्या की गई है और सूबे में संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह फेल हो गई है. जवाब में ममता बनर्जी ने भी मोर्चा संभाल लिया और हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा खंडित करने का आरोप लगाया. ममता ने विद्यासागर कॉलेज का दौरा कर हालात का जायजा लिया. टीएमसी चीफ ने कहा कि बाहरी लोगों को लाकर बीजेपी ने हिंसा कराई है.

टीएमसी नेताओं चेंज की ट्विटर पर डीपी, विद्यासागर की तस्वीर लगाई ईश्वर चंद विद्यासागर की प्रतिमा टूटने पर आक्रामक रुख अपनाते हुए टीएमसी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल की डीपी में महान समाज सुधारक की तस्वीर लगा दी. बाद में टीएमसी के सभी प्रमुख नेताओं ने ट्विटर पर अपनी-अपनी डीपी के तौर पर ईश्वर चंद विद्यासागर की तस्वीर को लगा लिया.

मूर्ति तोड़े जाने के खिलाफ पैदल मार्च का ममता का ऐलान टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने बुधवार को बेलाघाट से पैदल मार्च निकालने का ऐलान किया है. वह विद्यासागर कॉलेज के छात्रों को भी संबोधित करेंगी. उनका यह मार्च बेलाघाट से शुरू होगा. इस बीच, बुधवार को ही विद्यासागर कॉलेज के छात्रों ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है. टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में प्रोटेस्ट मार्च निकाला है. वहीं, बीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर में मूक-विरोध शुरू किया है. केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, हर्षवर्धन, विजय गोयल समेत कई बीजेपी नेता इस प्रदर्शन में शामिल हुए.

अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ममता और टीएमसी पर बोला हमला बुधवार 11 बजे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईश्वर चंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़े जाने के लिए टीएमसी को जिम्मेदार बताया. शाह ने कहा कि रोड शो के दौरान टीएमसी कार्यकर्ताओं ने 3 बार हमले किए. टीएमसी पर ईश्वर चंद विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने का आरोप लगाते हुए अमित शाह ने सवाल किया कि कॉलेज का गेट बंद था, उनके समर्थक सड़क पर थे तो गेट किसने खोला? इस आधार पर उन्होंने कहा कि मूर्ति को अंदर से तोड़ा गया. उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अबतक ममता के चुनाव प्रचार पर रोक क्यों नहीं लगी है. शाह ने कहा कि चुनाव में संभावित हार देख ममता बौखला गईं हैं और चुनाव में गड़बड़ी कर रही हैं. बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि अगर सीआरपीएफ नहीं होती हमारा बचना मुश्किल था.

…तो इसलिए मायावती को आया नरेंद्र मोदी पर ‘गुस्सा’!

लखनऊ। बीएसपी प्रमुख मायावती की सियासी दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव देखने को मिला है. छठे चरण तक रैलियों के मंच से ही पीएम नरेंद्र मोदी उनके निशाने पर थे. सातवें चरण में अब उनकी सुबह का आगाज भी मोदी पर हमले से हो रहा है. मोदी पर माया के आक्रमक तेवर निजी हमलों में बदल चुका है. जानकारों का कहना है कि आखिरी चरण की नजदीकी लड़ाई में मायावती की चिंता कोर वोटों में सेंध बचाने की है. साथ ही मोदी से सीधे मुकाबला होना 23 मई के बाद त्रिशंकु नतीजों की स्थिति में ‘विकल्प’ बनने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है.

यूपी में अब आखिरी चरण की 13 सीटों पर चुनाव बचा हुआ है. यह सभी सीटें पूर्वांचल की हैं. इसमें अधिकतर सीटें पिछड़ा, सवर्ण व दलित बहुल हैं. पिछड़े में गैर यादव अति-पिछड़ी जातियां अधिकतर सीटों पर प्रभावी हैं. वहीं दलितों में भी गैर जाटव वोटर कई सीटों पर अच्छी तादाद में हैं. 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने दलित वोटों में भी अच्छी सेंधमारी की थी. अब एक बार फिर पूर्वांचल के जातीय कुरुक्षेत्र में मोदी की अगुआई में बीजेपी ने बीएसपी के इन कोर वोटों पर नजर गड़ा रखी है. पीएम मोदी जिस तरह से राजस्थान के अलवर में हुई सामूहिक बलात्कार की वीभत्स घटना पर मायावती की ‘जवाबदेही’ तय कर रहे हैं, यह इसकी नजीर है.

सीधी लड़ाई में परसेप्शन अपने वोटरों को जोड़ने के साथ ही फ्लोटिंग वोटरों को भी पाले में करने में अहम भूमिका निभाता है. महागठबंधन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मायावती का मोदी पर तीखा हमला इसी रणनीति का हिस्सा है. आम तौर पर केंद्रीय एजेंसियों के दबाव या अपनी स्थानीय मजबूरियों में दबे क्षेत्रीय दलों (इक्का-दुक्का) ने मोदी पर इतने तीखे हमले नहीं किए है, जितना मायावती ने किया है. खुद मायावती पर कांग्रेस सीबीआई के दबाव में काम करने का आरोप लगा चुकी है. बीएसपी के एक नेता का कहना है कि मोदी पर सीधा व निजी हमला बोलकर मायावती की रणनीति अपने वोटरों को यह संदेश देने की है कि वह अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं और बीजेपी चुनाव हार रही है. कोर वोटरों को जोड़े रखने और जमीनी पर गठबंधन की गणित को और मजबूत करने के लिए यह संदेश जरूरी भी है. इसका असर हुआ तो बीजेपी के पाले में छिटकने वाली गैर-जाटव व अति पिछड़े जाति के वोटरों को भी गठबंधन के पाले में वापस लाना आसान होगा.

2019 के चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि मोदी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा इस बार यूपी बनता नजर आ रहा है. 2014 में इसी ने मोदी को शीर्ष पर बिठाया था. यूपी से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए बीजेपी को सबसे अधिक उम्मीद ममता बनर्जी की अगुवाई वाले पश्चिम बंगाल से है. ममता बनर्जी का मोदी के खिलाफ विरोध तो लोकतंत्र के ‘थप्पड़’ तक पहुंच चुका है. विपक्षी एकता के सूत्रधारों के लिए ममता और मायावती दोनों ही सबसे अहम किरदारों में हैं. मायावती के प्रधानमंत्री बनने के सपनों को उनके गठबंधन पार्टनर अखिलेश यादव से लेकर बिहार में आरजेडी के अगुआ लालू प्रसाद यादव भी दे चुके हैं.

हाल में ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मायावती को संघर्षों का नैशनल सिंबल बताया. दिल्ली में तीसरे मोर्चे के लिए संभावना तभी बनेगी तब यूपी में महागठबंधन बीजेपी के आंकड़ों को काफी नीचे पहुंचा दे. ऐसी स्थिति में मायावती एसपी-बीएसपी गठबंधन के मुखिया के तौर पर दिल्ली की राजनीतिक फैसलों में भी अहम भूमिका निभाएंगी इसलिए भी नतीजों की घड़ी में मायावती ने खुद को मोदी के मुखर विरोधी के तौर पर स्थापित करना शुरू कर दिया है. रणनीतिक तौर पर रिजल्ट के पहले विपक्षी दलों की बैठकों से भी एसपी-बीएसपी की दूरी भी सभी विकल्पों को खुले रखने की ओर इशारा कर रही है.

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उत्तर प्रदेश में दलित दूल्हे को मंदिर जाने से रोका

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उत्तर प्रदेश के अमरोहा स्थित एक दलित परिवार ने इलाके के कथित उच्च जाति के लोगों पर उन्हें एक मंदिर में जाने से रोकने का आरोप लगाया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को एक दलित युवक शोभित जाटव की शादी थी. इसके लिए बारात निकलने से पहले आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर जाना था. शोभित के पिता का कहना है कि न केवल उनके लिए रास्ता रोका गया बल्कि, दूल्हे की अंगूठी और पैसे भी लूटने की कोशिश की गई. बताया जाता है कि इस घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति है. हालांकि. बाद में पुलिस की निगरानी में दूल्हे को मंदिर में प्रवेश कराया गया. पुलिस ने इस मामले में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. वहीं, स्थानीय पुलिस अधिकारी ने इस घटना को केवल दो परिवारों के बीच का विवाद बताया. उनका कहना है कि इसका जातिगत हिंसा से कोई संबंध नहीं है.

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दलित महिला से छेड़छाड़ के बाद घर में घुसकर की मारपीट

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सांकेतित चित्र

बल्लभगढ़। तिगांव बाजार से सामान खरीदकर ऑटो में घर लौट रही एक दलित महिला के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है. महिला के विरोध करने पर आरोपित ने अपने रिश्तेदारों को बुलाकर महिला व उसके भाई पर हमला कर दिया. घायल बहन-भाई को अस्पताल में दाखिल कराया गया. पुलिस ने इस मामले में आरोपित युवक सहित 5 के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है.

थाना छांयसा पुलिस के अनुसार, एक गांव में रहने वाली दलित समुदाय की 26 साल की महिला ने दी शिकायत में बताया कि वह इन दिनों अपने मायके में आई हुई है. सोमवार को कुछ सामान खरीदने के लिए तिगांव बाजार में गई थी. दोपहर के समय सामान की खरीददारी करने के बाद वह घर जाने के लिए ऑटो में सवार हो गई. इसी ऑटो में उसके बराबर एक युवक बैठ गया. आरोप है कि युवक ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी. महिला के विरोध करने पर वह गाली गलौज करने लगा. महिला जब अपने गांव में पहुंची, तो उसे उसका भाई मिल गया. उसने सारी बात अपने भाई को बताई. आरोपित युवक को ऑटो को नीचे उतारने की कोशिश की. हल्की हाथापाई के बाद मामला शांत हो गया. महिला और उसका भाई अपने घर चले गए. आरोप है कि थोड़ी ही देर में युवक महिला के गांव में ही रहने वाले अपने रिश्तेदारों को फोन कर बुला लाया. आरोपित युवक सहित 5 अन्य महिला के घर में घुस गए और उसे वह उसके भाई को लाठी-डंडों व रॉड से पीटा. इसके बाद फरार हो गए. एसएचओ कुलदीप सिंह ने बताया कि महिला की शिकायत पर आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस की टीम गांव में गश्त कर रही है. आरोपित पुलिस की पकड़ से अभी बाहर हैं.

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