सवर्ण ने किया टॅार्चर तो दलित ने कर ली खुदकशी

बरेली। दलितों के उत्पीड़न मामले में यूपी का नम्बर सबसे ऊपर आता है यहां कभी दलित महिलाओं से बलात्कार की घटनाऐं सामने आती हैं तो कभी दलितों को चोरी के इल्जाम में जबरदस्ती फसांया जाता है. ताजा मामला बरेली के बिथरी चैनपुर के नरियावल का है जहां शनिवार शाम को एक युवक ने फंदा लगाकर जान दे दी. आरोप है कि नरियावल बाजार में तीन दिन पहले सराफा दुकान में चोरी के बाद दुकानदार चोरी का इल्जाम लगाकर उसे उठा ले गया. फिर शुक्रवार रात और शनिवार सुबह कमरे में बंद कर मारा गया. अपने ऊपर झूठे इल्जाम और टॉर्चर से तंग आकर दलित युवक ने दोपहर में घर में फंदा लगाकर खुदकशी कर ली.

युवक की पत्नी की तरफ से रात में सर्राफ और उसके साथियों के खिलाफ पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई. खुदकशी करने वाला वीरपाल उर्फ ऋषिपाल (34) पुत्र मंगलीराम मूल रूप से पीलीभीत में बिलसंडा के गांव खजुरिया का निवासी था. लगभग 15 वर्षों से नरियावल में रहकर मजदूरी करता था.

बता दें की नरियावल में तीन दिन पहले जवाहरलाल की अनूप ज्वैलर्स नाम की दुकान में चौकीदार को बंधक बनाकर चोरी हुई थी. अज्ञात बदमाशों के खिलाफ इसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज है. वीरपाल की पत्नी पूनम का आरोप है कि ज्वैलर्स दुकानदार उनके पति पर आरोप लगाकर शुक्रवार शाम को जबरन उसे घर से उठा ले गए थे जहां उस युवक की बुरी तरह पिटाई कर देर रात छोड़ा. पर इतने पर भी दंबगो का मन नहीं माना सुबह फिर से घर से उठा ले गए. शनिवार दोपहर लगभग ढाई-तीन बजे वीरपाल घर लौटा तो चेहरे और पीठ पर चोटों के निशान मिले. पत्नी, बच्चों ने पूछा तो किसी से कुछ नहीं बोला. शाम करीब साढ़े चार बजे घर पर पत्नी की साड़ी से फंदा बनाकर लटक गया. काफी देर तक बाहर न आने पर पत्नी भीतर पहुंची तो वीरपाल लटका मिला.

 

अब दलित लड़कियों के लिए हर राज्य में खुलेंगे 5 बोर्डिंग स्कूल

ऩई दिल्ली। भारत में दलित लड़कियां शिक्षा के मामले में बहुत पीछे हैं यह बात किसी से छुपी नहीं है. इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक जरूरी कदम उठाया है जिसके तहत सरकार हर राज्य में दलित लड़कियों के लिए 5 बोर्डिंग स्कूल खोलने पर विचार कर रही है.

यह कदम ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत लिया जा रहा है. खबर है कि शुरूआत में केंद्र सरकार इन बोर्डिंग का खर्चा उठायेगी तो वहीं तीन साल बाद इन स्कूलों की फंडिंग राज्य सरकार को ही करनी होगी. बता दें की सामाजिक न्याय मंत्रालय के प्रस्ताव के मुताबिक, सरकार उन ब्लॉकों में दलित लड़कियों के लिए बोर्डिंग स्कूल खोलेगी, जो शिक्षा के मामले में काफी पिछड़े हुए हैं. शिक्षा के स्तर को बढ़ावा देने के लिए लक्ष्य को लेकर शैक्षिक रूप से पिछड़े और सामाजिक रूप से कमजोर समुदायों, खासकर उनकी बच्चियों के लिए यह प्रस्ताव काफी लाभप्रद होगा, जिससे उनकी शिक्षा की स्थिति में बड़ा सुधार होगा.

इस नए प्रस्ताव के अनुसार उन राज्यों के पांच जिलों में पांच स्कूल खोले जाएंगे जहां अनुसूचित जाति की संख्या काफी है. आपको बता दें कि स्कूल में छठी से 12वीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी. इस नए प्रस्ताव के मुताबिक 70 फीसदी सीट SC छात्राओं के लिए आरक्षित रखी जाएंगी और बाकी के 30 फीसदी में अन्य कैटिगरीज जैसे जनरल और OBC को एडमिशन मिलेगा. बता दें की इन बोर्डिंग स्कूलों में दाखिले केवल उन लड़कियों के लिए खुले होंगे जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये से कम है.

बलिदान दिवसः ऊधम सिंह ने लिया था जलियांवाला बाग का प्रतिशोध

जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रतिशोध लेने वाले क्रांतिकारी ऊधम सिंह का जन्म 29 दिसम्बर 1899 को सरदार टहल सिंह के घर पर हुआ था. ऊधम सिंह के माता-पिता का देहांत बहुत ही कम अवस्था में हो गया था. जिसके कारण परिवार के अन्य लोगों ने उन पूरा ध्यान नहीं दिया. काफी समय तक भटकने के बाद अपने छोटे भाई के साथ अमृतसर के पुतलीघर में शरण ली जहां एक समाजसेवी संस्था ने उनकी सहायता की.

मात्र 20 वर्ष की अवस्था में ही उन्होनें बैशाखी के पर्व पर अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार को अपनी आंखों से देखा. सभी लोगों के घटनास्थल से चले जाने के बाद वे वहां फिर गये और वहां की मिट्टी को अपने माथे पर लगाकर कांड के खलनायकों से बदला लेने की प्रतिज्ञा की. उन्होनें अमृतसर में एक दुकान भी किराये पर ली. अपने संकल्प को पूरा करने के लिए वे अफ्रीका से अमरीका होते हुए 1923 में इंग्लैंड पहुंच गये. वहीं क्रांतिकारियों से उनका संपर्क हुआ. 1928 में वे भगत सिंह के कहने पर भारत वापस आ गये. लेकिन लाहौर में उन्हें शस्त्र अधिनियिम के उल्लंघन के आरोप में पकड़ लिया गया और चार साल की सजा सुनाई गयी. इसके बाद वे फिर इंग्लैंड चले गये.

13 मार्च 1940 को वह शुभ दिन आ ही गया जब ऊधम सिंह को अपना संकल्प पूरा करने का अवसर मिला. इंग्लैंड की राजधानी लंदन के कैक्स्ट्रन हाल में एक सभा होने वाली थी. इसमें जलियांवाला बाग कांड के दो खलनायक सर माइकेल ओ डायर और भारत के तत्कालीन सेक्रेटरी आफ स्टेट लार्ड जेटलैंड आने वाले थे. ऊधम सिंह चुपचाप मंच की कुछ दूरी पर बैठ गये और उचित अवसर की प्रतीक्षा करने लग गये. सर माइकेल ओ डायर ने भारत के खिलाफ खूब जहर उगला. जैसे ही उनका भाषण पूरा हुआ ऊधम सिंह ने गोलियां उनके सीने पर उतार दीं. वह वहीं गिर गये. लेकिन किस्मत से दूसरा खलनायक भगदड़ की वजह से बचने में कामयाब हो गया. लेकिन भगदड़ का लाभ उठाकर ऊधम सिंह भगे नहीं अपितु स्वयं ही अपने आप को गिरफ्तार करवा लिया.

न्यायालय में ऊधम सिंह ने सभी आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा कि मैं गत 21 वर्षों सें प्रतिशोध की ज्वाला में जल रहा था. डायर और जैटलैंड मेरे देश की आत्मा को कुचलना चाहते थे. इसका विरोध करना मेरा कर्तव्य था. न्यायालय के आदेश पर 31 जुलाई 1940 को पेण्टनविला जेल में ऊधम को फांसी दी गयी.

स्वतंत्रता प्राप्ति के 27 साल बाद 16 जुलाई 1974 को उनके भस्मावशेषों को भारत लाया गया तथा पांच दिन बाद हरिद्वार में प्रवाहित किया गया.

-By मत्युंजय दीक्षित 

9 गुना बढ़े टमाटर के दाम, बाढ़ और बारिश के कारण और बढ़ सकते है रेट

नई दिल्ली। सप्लाई में कमी की वजह से टमाटर के दाम देश के 17 अहम शहरों में 90 रुपये के निशान को पार कर चुके हैं. इन शहरों में दिल्ली, कोलकाता, इंदौर और तिरुवनंतपुरम जैसी मेट्रो सिटी भी हैं. बारिश और बाढ़ की वजह से टमाटर के दामों में फिलहाल राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं. वहीं यह स्थिति अगस्त के आखिर तक बनी रह सकती है.

ऐसी भी रिपोर्ट हैं कि प्याज की देश की सबसे बड़ी थोक मार्केट लसलगांव में भी प्याज के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. बताया जा रहा है कि लसलगांव मार्केट में सिर्फ दो हफ्तों में प्याज के दाम दोगुने से ज्यादा हो चुके हैं. शुक्रवार को प्याज के दाम पिछले 19 महीने के सबसे ऊंचे दाम पर थे. स्थानीय मार्केट की कमिटी के एक मेंबर ने बताया कि फिलहाल ताजा स्टॉक मौजूद नहीं है. फिलहाल जो प्याज आ रही है वह स्टोरेज से आ रही है. किसान भी अपना ज्यादातर स्टॉक बेच चुके हैं.

दिल्ली में टमाटर के दाम 92 रुपये प्रति किलो हैं. तीन महीने पहले यह दाम 26 रुपये प्रति किलो थे, जबकि एक साल पहले इन्हीं दिनों में 48 रुपये प्रति किलो थे. वहीं प्याज को लेकर सूत्रों ने बताया कि लसलगांव में प्याज 25,000 क्विंटल प्रतिदिन आती थी, जबकि अब सिर्फ 12,000 क्विंटल ही आ रही है. इस वजह से प्याज के दाम में बढ़ोतरी हुई है.

IIAS शिमला में शोध करेंगे डॉ. अजय कुमार, दलित मुद्दों पर लिख चुके हैं किताब

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में शोध कर रहे डॉ. अजय कुमार को फैलोशिप मिली है. इस फैलोशिप के तहत डॉ. अजय कुमार इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडी में पोस्ट-डॉक्टरल शोध करेंगे. यह संस्थान शिमला स्थित राष्ट्रपति भवन से संचालित होता है.

डॉ. अजय कुमार यह फेलोशिप उनके शोध विषय “दलित अस्मितावादी इतिहास लेखनः वैकल्पिक अधीनस्थ समाजशास्त्र की तलाश में (एक समीक्षात्मक मूल्यांकन) के लिए दी गई है.

डॉ. अजय कुमार उन्नाव के भवानीदीन खेड़ा गंगौली गांव के रहने वाले हैं. वह बहुत ही गरीब किसान के बेटे हैं. डॉ. अजय ने अपने पीएचडी का शोध “उत्तर प्रदेश में समकालीन दलित आंदोलनः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन” विषय पर था जिसका निर्देशन प्रोफेसर बीबी मलिक ने किया.

अब डॉ. अजय कुमार भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद में “उत्तर प्रदेश में समकालीन दलित नेतृत्व की बदलती राजनीति एवं प्राथमिकताएंः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन” विषय पर शोध कर रहे हैं. डॉ. अजय कुमार के दर्जनों शोध आलेख दलित आंदोलन, दलित नेतृत्व, नारीवादी आंदोलन, दलित एवं महिला विमर्श, लोकतंत्र एवं छात्र आंदोलन विषयों पर अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं.

जामिया यूनिवर्सिटी में होगी ‘ऐरोनॉटिक्स’ की पढ़ाई

नई दिल्ली। हवाई जहाज की दुनिया में अपना करियर देखने वालो के लिए यह बड़ी खबर आयी है. ऐरोनॉटिक्स’ जैसे विषय में रूची रखने वाले छात्रों के जल्द ही जामिया कार्स शुरू करेगा. बता दें की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में 3 साल का डिग्री कोर्स शुरू होने वाला है. इसी अकादमिक सेशन से बीएससी ऐरोनॉटिक्स डिग्री की पढ़ाई शुरू होगी. जामिया इस कोर्स को पवन हंस लिमिटेड के साथ शुरू करेगा. यूनिवर्सिटी ने बताया कि जामिया पहली ऐसी सेंट्रल यूनिवर्सिटी है जो ऐविएशन सेक्टर में इस तरह का कोर्स ला रही है.

आपको बता दें कि बीएससी ऐरोनॉटिक्स तीन साल की डिग्री का कोर्स होगा जिसमें ग्रेजुएशन डिग्री जामिया की ओर से दी जाएगी और ‘एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग’ में सर्टिफिकेट डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल ऐविएशन की ओर से दिया जाएगा. इस कोर्स का थियोरी पार्ट फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग में पढ़ाया जाएगा और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पवन हंस लिमिटेड की ओर से दी जाएगी.

इस कोर्स में अप्लाई करने के लिए साइंस और गणित कॉम्बिनेशन के साथ 12वीं कक्षा पास करना जरूरी है. इस कोर्स में एडमिशन एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर होगा. फिलहाल कोर्स का सिलेबस तय किया जा रहा है. आने वाले दो महीने के अंदर ही इसके शुरू होने की उम्मीद है जिसका नोटिफिकेशन जामिया की वेबसाइट पर छात्रों को प्राप्त हो जायेगा.

भारत ने 304 रनों से जीता पहला टेस्ट, सीरीज में 1-0 की बढ़त

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गॉल। भारत ने श्रीलंका को पहले टेस्ट मैच में 304 से हराकर शानदार विजय हासिल की है . इस के साथ भारत तीन मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे हो गया है. 550 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की दूसरी पारी 76.5 अवरों में 245 रनों पर सिमट गई. दूसरी पारी में श्रीलंका के 8 विकेट ही हुए और गुणरत्ने तथा कप्तान रंगना हैराथ चोट के चलते बल्लेबाजी के लिए नहीं उतरे. इससे पहले सुबह भारत ने विराट कोहली के शतक की मदद से दूसरी पारी 3 विकेट पर 240 रन बनाकर घोषित की थी.

मोहम्मद शमी ने उपुल थरंगा (10) को बोल्ड कर श्रीलंका को पहला झटका दिया. इससे दो गेंद पहले ही शमी की गेंद पर थरंगा का विराट कोहली ने दूसरी स्लिप में कैच छोड़ दिया था, लेकिन थरंगा इस जीवनदान का कोई फायदा नहीं उठा सके. इसके बाद उमेश यादव ने 02 रन पर खेल रहे गुणतिलका को पुजारा के हाथों कैच आउट करा कर भारत को दूसरी सफलता दिला दी. इसके बाद जडेजा ने मेंडिस (36) को रिद्धिमान साहा के हाथों कैच करवाया. अंपायर ने मेंडिस को नॉट आउट करार दिया था, लेकिन कोहली ने जडेजा के कहने पर रिव्यू लिया और फैसला भारत के हक में हुआ. इसके बाद जडेजा ने अपने अगले ही ओवर में 2 रन पर खेल रहे श्रीलंका के सबसे अनुभवी बल्लेबाज़ एंजेलो मैथ्यूज़ को अपनी फिरकी के जाल में फंसाकर हार्दिक पांड्या के हाथों कैच आउट करा दिया.

116/4 की विषम स्थिति में करुणारत्ने को निरोशन डिकवेला का साथ मिला और दोनों ने पारी को कुछ हद तक संभालते हुए शतकीय भागीदारी की. इन्होंने पांचवें विकेट के लिए 101 रन जोड़े. इस साझेदारी को रविचंद्रन अश्विन ने तोड़ा जब उन्होंने डिकवेला को 67 के निजी स्कोर पर विकेटकीपर साहा के हाथों झिलवाया. एक समय श्रीलंका ने 5 विकेट पर 240 रन बना लिए थे, लेकिन इसके बाद अगले 5 रनों में उसके 3 विकेट गिरे. करुणारत्ने मात्र 3 रनों से शतक चूके और 97 के निजी स्कोर पर अश्विन की गेंद पर बोल्ड हुए. अश्विन ने इसी ओवर में नुवान प्रदीप को विराट के हाथों झिलवाया तो जडेजा ने लाहिरू कुमारा को आउट कर श्रीलंकाई पारी को समेट दिया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि चोट के कारण गुणरत्ने और कप्तान रंगना हैराथ बल्लेबाजी के लिए नहीं उतरे. अश्विन ने 65 रनों पर 3 और जडेजा ने 71 रनों पर 3 विकेट लिए.

इससे पहले, भारत ने दूसरी पारी में 3 विकेट पर 239 रन बनाकर पारी घोषित की. इस तरह भारत की कुल बढ़त 549 रनों की हुई. श्रीलंका को जीत के लिए चौथी पारी में 550 रनों का लक्ष्य मिला है, जबकि उसके पास केवल 10 बल्लेबाज हैं. असेला गुणारत्ने अंगूठे की चोट के कारण इस मैच के साथ ही पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं.

भर्ती प्रक्रिया में BHU ने किया भेदभाव, SC/ST और OBC कर रहे हैं विरोध प्रदर्शन

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वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वद्यालय में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. यह विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति-प्रक्रिया में गड़बड़ी के खिलाफ किया गया. छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में एससी/एसटी/ओबीसी के आरक्षण में अनियमितताओं को लेकर भारी रोष प्रकट किया.

एक तरफ जहां अनारक्षित वर्ग के कुल सीटों की संख्या 103 है, वहीं एससी के लिए सिर्फ 03 तो ओबीसी और एसटी के लिए शून्य हैं. छात्रों ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय हुई अनियमतताओं को लेकर प्रशासन से लिखित में सवाल भी पूछें हैं. छात्रों का कहना है कि बिना यूजीसी के अनुमति के रोस्टर प्रणाली में परिवर्तन लाया गया है जो की साफ तौर पर अनुचित है. यही नहीं बल्कि कुल आरक्षित पदों की संख्या 241 से घटाकर 41 कर दी गई है.

छात्रों ने सवाल उठाया है कि चयन प्रक्रिया में अनावश्यक जल्दबाज़ी क्यों की जा रही है. प्रार्थियों को साक्षात्कार में नियमानुसार समय न देकर, एक दिन का ही समय क्यों दिया जा रहा है? बड़े संख्या में छात्रों का सैलाब बीएचयू प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते नज़र आया.

उनका कहना है कि डीओपीटी 2006 में नहीं लागू होने पर इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय मे नियुक्तियों पर रोक है, लेकिन काशी हिन्दू विश्वविद्यालाय मे नहीं है. नई 13 पॉइंट रोस्टर प्रक्रिया को डीओपीटी 2006 के अनुसार 02/07/1997 से लागू नहीं किया जा रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन बैक लॉग वैकेंसी भी नहीं निकाल रहा है.

“आरक्षण हमारी भीख नहीं हमारा अधिकार है” इस नारे की आवाज़ पुरे बीएचयू में गूंज उठी, मानो अपने हक़ की यह कोई लड़ाई नहीं बल्कि एक आंदोलन हो. छात्रों का यह भी कहना है कि संवैधानिक आरक्षण प्रणाली के अनुसार बीएचयू के विज्ञापित पदों मे एससी एसटी को 22.5% और ओबीसी को 27% पद नहीं दिये गए है. सामान्य श्रेणी के आवेदन पत्र मे जाति का विवरण भी मांगा गया है जिसका कोई अर्थ नहीं.

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने मनमाने तरीके से नियुक्ति कर रहा है. दलितों, पिछड़ों और आदिवासी छात्रों के खिलाफ विश्वविद्यालय साजिश रच रहा है. छात्रों ने आगे कहा कि अगर प्रशासन हमारी बातें नहीं मानता और हमारे सवालों का जबाव नहीं देता है तो हम आंदोलन करेंगे.

उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण पर भड़के ट्रंप

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण पर बुरी तरह भड़क गए हैं उन्होनें कहा है कि उत्तर कोरिया का अंतरमहाद्वीप बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) परीक्षण उसके निरंकुश शासन का दुस्साहसी एवं खतरनाक कदम है और यह कदम प्योंगयांग को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से और अलग थलग कर देगा. बता दें कि उत्तर कोरिया ने एक महीने में दूसरी बार आईसीबीएम का परीक्षण किया गया. इससे एक दिन पहले ही अमेरिकी कांग्रेस ने रूस, ईरान और उत्तर कोरिया पर नए कड़े प्रतिबंध लागू करने के लिए मतदान किया था.

ट्रंप ने प्योंगयांग के आईसीबीएम परीक्षण के कुछ घंटों बाद कहा कि उत्तर कोरिया ने आज एक और बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया जो एक महीने से भी कम समय में ऐसा दूसरा परीक्षण है. यह उत्तर कोरिया के शासन का नया दुस्साहसी एवं खतरनाक कदम है. उन्होंने कहा कि अमेरिका इस कदम की निंदा करता है और उत्तर कोरियाई शासन के इस दावे को खारिज करता है कि ये परीक्षण और ये हथियार प्योंगयांग की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हैं. उन्होंने कहा कि इस दावे के विपरीत इनका प्रतिकूल प्रभाव होगा.

ट्रंप ने कहा,‘विश्व को डरा कर ये हथियार एवं परीक्षण उत्तर कोरिया को और अलग थलग बनाते हैं, इसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करते हैं और इसके लोगों को वंचित करते हैं.’उन्होंने कहा, ‘अमेरिका अपने देश और क्षेत्र में अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा.’जो अन्य देशों को किसी भी तरह से परेशान नहीं करेंगे.

बसपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए जयवीर सिंह, मायावती ने उठाए सवाल

लखनऊ। देश भर से गैर भाजपा नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने की मुहिम चला रही भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में भी सेंधमारी कर दी है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के दो और बसपा के एक एम.एल.सी जयवीर सिंह ने भाजपा ज्वाइन कर लिया है. ठाकुर जयवीर सिंह फिलहाल बहुजन समाज पार्टी से एम.एल.सी थे. वह अलीगढ़ से बसपा के सांसद भी रह चुके हैं. पार्टी छोड़ने पर बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा और जयवीर सिंह दोनों को निशाने पर लिया है. बसपा प्रमुख ने कहा है कि भाजपा की सत्ता की भूख अब हवस में बदल गई है. इसके लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है जो देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है.

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हलचल शनिवार सुबह शुरू हो गई, जब अमित शाह लखनऊ पहुंचे. शाह तीन दिन के यूपी दौरे पर हैं. उनके लखनऊ पहुंचते ही सपा के दो और बसपा के एक विधान परिषद सदस्य ने अपनी-अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया. सपा से इस्तीफा देने वाले एमएलसी बुक्कल नवाब और यशवंत सिंह हैं. शाह के दौरे के पहले ही दिन हुए इस घटनाक्रम के बाद सभी विपक्षी पार्टियां सतर्क हो गई हैं. जयवीर सिंह के इस्तीफा देने के दौरान उनके साथ चुनाव से पहले बसपा छोड़ भाजपा में गए स्वामी प्रसाद मौर्या भी मौजूद थे.

इस राजनीतिक घटनाक्रम के तुरंत बाद बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने प्रेस रिलीज जारी कर भाजपा पर आरोप लगाया कि मणिपुर, गोवा, बिहार और गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार ने लोकतंत्र का भविष्य खतरे में डाल दिया है. जयवीर सिंह पर टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जयवीर सिंह को भाजपा के सरकारी शोषण व आतंक का मुकाबला करना चाहिए था, न कि बीजेपी एंड कंपनी के सामने अपने हथियार डालना चाहिए था.

फंसे कर्ज वसूली से ज्यादा माफ कर रहे हैं बैंक: CAG

नई दिल्ली। अक्सर चौकाने वाले खुलासे करने वाली कैग यानि नियंत्रण एंव महालेखा परीक्षक ने एक और बड़ा खुलासा किया है जो बैंको की कर्जमाफी को लेकर है. बताया गया है की सरकारी बैंकों के फंसे कर्ज की समस्या अनुमान से कहीं अधिक गंभीर है. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक फंसे की वास्तविक राशि को कम करके दिखा रहे हैं. करीब दर्जन भर सरकारी बैंक ऐसे हैं जिन्होंने अपने फंसे कर्ज की राशि रिजर्व बैंक के अनुमान की तुलना में 15 प्रतिशत तक कम बतायी है. हकीकत यह है कि सरकारी बैंक फंसे कर्ज की राशि को वसूलने से ज्यादा माफ कर रहे हैं. यह चौंकाने वाला खुलासा नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है जिसे वित्त राज्य मंत्री अजरुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को लोकसभा में पेश किया.

कैग ने यह रिपोर्ट ‘सरकारी क्षेत्र के बैंकों के पूंजीकरण’ का ऑडिट करने के बाद तैयार की है. इस रिपोर्ट में यह भी बताया किया गया है कि बैंक अपने बलबूते बाजार से पूंजी जुटाने में नाकाम रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वर्ष 2018-19 तक 1,10,000 करोड़ रुपये बाजार से जुटाने का लक्ष्य दिया था. हालांकि इस लक्ष्य के मुकाबले बैंक जनवरी 2015 से मार्च 2017 के दौरान मात्र 7,726 करोड़ रुपये ही बाजार से जुटा पाए. कैग ने 2019 तक बाकी एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी बाजार से जुटाने की बैंकों की क्षमता पर आशंका भी जतायी है.

कैग रिपोर्ट में सबसे अहम बात जो सामने आयी है, वह यह है कि सरकारी बैंक फंसे कर्ज की वसूली करने की तुलना में इसे माफ अधिक कर रहे हैं. सरकारी बैंकों ने वर्ष 2011-15 के दौरान भारी भरकम 1,47,527 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज माफ किये जबकि सिर्फ 1,26,160 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी.

रिपोर्ट से पता चलता है कि सरकारी बैंकों के फंसे कर्ज की राशि तीन साल में बढ़कर तीन गुना हो गयी. मार्च 2014 में बैंकों का सकल एनपीए 2.27 लाख करोड़ रुपये था जो मार्च 2017 में बढ़कर 6.83 लाख करोड़ रुपये हो गया. हालांकि इससे चौंकाने वाली बात यह है कि कई सरकारी बैंक अपनी एनपीए की वास्तविक राशि नहीं दिखा रहे हैं. सरकारी बैंक एनपीए की राशि को कम करके दिखा रहे हैं. कैग रिपोर्ट के अनुसार दर्जन भर सरकारी बैंकों ने अपना जितना एनपीए बताया, वह आरबीआई के अनुमान से 15 प्रतिशत कम था.

कैग ने सरकार की ओर से बैंकों को दी गयी पूंजी की प्रक्रिया में भी कई तरह की खामियां उजागर की हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी बैंकों की पूंजी बहूमूल्य है, देश के पैसों को यूंही कर्जधारियों की जेंब में डालने का क्या औचित्य है सरकार को इस और गंभीर रूप से ध्यान देना होगा वर्ना परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं.

यूपी में भाजपा की सेंधमारी पर भड़कीं मायावती, कहा- भाजपा की सत्ता की भूख अब हवस बन गई है

लखनऊ। बसपा प्रमुख मायावती ने भाजपा पर निशाना साधा है. मायावती ने कहा कि भाजपा सत्ता की भूखी है और अब ये भूख, हवस में बदल गई है. भाजपा सत्ता और सरकारी मशीनरी का खुला दुरूपयोग कर रही है जोकि निंदनीय है. इससे लोकतंत्र ही खतरे में पड़ गया है.

बसपा सुप्रीमों ने कहा कि माणिपुर, गोवा, बिहार और गुजरात के बाद अब उत्तर प्रदेश का ताजा राजनीतिक घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि मोदी सरकार ने लोकतंत्र का भविष्य खतरे में डाल दिया है. उन्होंने कहा कि भाजपा गुजरात में सरकार का ऐसा दुरुपयोग कर रही है कि विधायकों को अपना राज्य छोड़कर सुरक्षित जगह जाने को मजबूर होना पड़ रहा है. संवैधानिक संस्थाएं अपनी भूमिका को निभाने में असमर्थ सी नजर आ रही है.

मायावती ने कहा कि वास्तव में माणिपुर और गोवा में लोकतंत्र की हत्या करके वहां सरकार बनाने के बाद बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी शुरु हो गया है. भाजपा विपक्षी पार्टियों के खिलाफ सरकारी मशीनरी जैसे सीबीआई, इनकम टैक्स, ईडी और पुलिस आदि के दुरूपयोग कर नेताओं को भ्रष्ट साबित करने का खुला अभियान चलाया हुआ है. जोकि अति-निन्दनीय के साथ-साथ लोकतंत्र के लिये खतरा भी है. पश्चिम बंगाल व उड़ीसा की सरकारें भी भाजपा के सरकारी आतंक से पीड़ित हैं.

BJP विधायक ने कहा- ‘वंदे मातरम’ बोलो वरना चले जाओ पाकिस्तान

मुंबई। बीजेपी के नेता देशभक्ति का हवाला देकर वंदे मातरम् को जबरदस्ती थोपने पर आमदा है. इस मुद्दे पर जुबानबाजी इतनी ज्यादा है की महाराष्ट्र विधानसभा दहलीज तक पहुंच गयी है. जहां बीजेपी विधायक राज पुरोहित और एएमआईएम के विधायक वारिस पठान के बीच वंदे मातरम को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा के बाहर जमकर बहस हुई. इस का वीडियो भी सामने आया है. बीजेपी विधायक पठान के सामने जोर-जोर से वंदे मातरम के नारे लगा रहे थे. वीडियो में विधायक को यह कहते हुए देखा जा सकता है कि अगर ‘वंदे मातरम’ और ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ नारे नहीं लगा सकते तो पाकिस्तान चले जाओ, देश छोड़ दो. गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के सभी स्कूलों और सरकारी व निजी संस्थानों में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को अनिवार्य कर दिया है. न्यायमूर्ति एम वी मुरलीधरन ने अपने आदेश में कहा कि राज्य के सभी निजी और सरकारी स्कूलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके यहां छात्र सप्ताह में कम से कम दो बार सोमवार और शुक्रवार को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाएं.

न्यायमूर्ति मुरलीधरन ने यह भी कहा कि अन्य सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों में भी महीने में कम से कम एक बार राष्ट्रीय गीत गाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर लोगों को बंगाली या संस्कृत में यह गीत गाने में कठिनाई हो रही हो तो तमिल में इसका अनुवाद करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं.

उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी वैध कारण की वजह से राष्ट्रीय गीत गाने में असमर्थ हो तो उसे इसके लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. न्यायमूर्ति ने कहा कि युवा ही इस देश के भविष्य हैं और न्यायालय को विश्वास है कि इस आदेश को सही भाव और उत्साह के साथ पालन किया जाएगा जिसके बाद तमिलनाडू में तो किसी तरह का बयान सामने नहीं आया पर बीजेपी के विधायक ने महाराष्ट्र में इसको थोपने की पूरी कोशिश की है.

 

ऐसे ही चलता रहा तो नहीं हो पाएगा दलितों का विकास

देश में प्रमोशन में आरक्षण को खत्म करने का षड्यंत्र 2012 से चला था. उस वक्त देश में सबसे पुरानी और ऐतिहासिक पार्टी कांग्रेस की सरकार थी. जिसको दलितों और पिछड़ों की मसीहा पार्टी माना जाता था. मगर ये सरकार नहीँ सरकाट होगी अब पता चला है. चलो गैरों से क्या शिकवा. जब अपनों ने ही मुंह मोड़ दिया तो ये तो होना ही था.

जिस महापुरूष ने अंतिम सासों तक दलित समाज के लिए संघर्ष किया. आज उनके संघर्ष से उपजे नेताओं ने समाज को अंधेरे मे धकेल दिया है. सुरक्षित सीटों से जीते सांसद और विधायक सिर्फ पार्टियों के बहुमत के लिए ही साबित होते हैं वरना गूंगों और बहरों की तरह एक कोने मे सदन का बोझ बन कर रह गए हैं. क्या इनके अंदर का स्वाभिमान मर चुका है? इनको अपने समाज की कोई चिंता नही रह गई है?

शायद पूना पैक्ट के बाद बाबासाहेब समझ गए थे कि ये जन प्रतिनिधि सिर्फ सवर्ण पार्टियों के मोहरे बन कर रह जाएंगे. इसलिए उन्होंने संविधान में राजनैतिक आरक्षण को सिर्फ 10 साल के लिए रखा था. मगर वोट बैंक की राजनीति के कारण इसको आगे बढ़ाया जाता रहा है और भ्रम फैला रखा है कि नौकरियों मे आरक्षण को बढ़ाया गया जबकी संविधान मे इसकी कोई समयसीमा निर्धारित नहीँ है.

देश मे जातिगत शोषण के शिकार लोग आजाद भारत मे भी गुलामों से बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं. छुआछूत और भेदभाव जारी है. स्कूलों में आज भी मिड डे मील के तहत मिलने वाले भोजन के दौरान दलित बच्चों को सवर्ण बच्चों से अलग बैठाया जाता है. आज भी दलित सार्वजनिक स्थान से पानी नहीँ भर सकते. दलितों की बारात सवर्णों के गांव से जाने पर दूल्हे को घोड़ी पर नहीँ बैठने दिया जाता. क्या ऐसे ही देश बढ़ेगा? ऐसे ही देश का विकास होगा?

यहां तो दलित जैसे हिन्दू नहीं काफिर हैं. ऐसा व्यव्हार क्या देश को सभ्यता और विकास के शिखर पर ले जा पायेगा? इतिहास गवाह है कि भारत की आंतरिक अशांति और कमजोरी का लाभ उठाकर इस्लाम से लेकर अंग्रेजों ने सदियों से देश को गुलाम बनाया. 100 साल भी आजादी के नहीँ हुए फिर से गिद्ध नजरें भारत की ओर गड़ने लगी हैं. राजनेता हैं कि कुर्सी को ही अपना खुदा मान बैठे हैं. 21वी सदी और कंप्यूटर इंटरनेट और स्पेस क्रान्ति के दौर मे भी भारत अगर जातिवाद को खत्म नहीँ कर पाया तो इतिहास पुनः दासता की दास्तां लिखने को तैयार होगा. इसलिए… सोच बदलो. समाज जगाओ. अनेक नहीँ एक बनो, नेक बनो. जय भीम

यह लेख आई.पी ह्यूमैन का है.

स्कूली किताब में राजीव गांधी को बताया भ्रष्टाचारी

मुंबई। महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने स्कूली छात्रो को किताबों में इतिहास तोड़ मरोड़कर पढ़ाना शुरू कर दिया है. एक स्कूल की किताब में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भ्रष्टाचार में लिप्त बताया गया है. इस किताब के सामने आने के बाद कड़ा विरोध किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कहा कि आरएसएस अपने एजेंडे को सही ठहराने के लिए देश के पूर्व पीएम की छवि को बिगाड़ रही है. वह हिंदू राष्ट्र की धुन में इतना डूब गयी है की गलत इतिहास को छात्रों के सामने प्रस्तुत करा रही है.

बता दें की महाराष्ट्र के एक स्कूल की 11वीं क्लास की राजनीति की किताब में बोफोर्स घोटाले का जिक्र किया गया है. इसमें बताया गया कि बोफोर्स डील में पूर्व पीएम को भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ा था. इतना ही नहीं ये घोटाले की वजह से कांग्रेस को चुनाव में हार का सामना भी करना पड़ा था.

वहीं कांग्रेस के स्टूडेंट्स की विंग नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के प्रेसिडेंट का कहना है कि राजीव गांधी की छवि बिगाड़े जाना संघ परिवार की राजनीति का ही हिस्सा है, लेकिन वे ऐसा होने नहीं देंगे. प्रेसिडेंट ने बीजेपी पर भी आरोप लगाया और कहा कि वो आरएसएस के साथ मिलकर अपनी विचारधारा को लोगों पर हावी करना चाहती है.

कार्यकर्ताओं ने धमकी दी है कि जल्द से जल्द इन किताबों को वापस लिया जाए और नए रुप में छापा जाए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसका विरोध विशाल रुप ले सकता है. साथ ही कांग्रेस ने महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री तावडे़ के पुतले जलाकर इस्तीफे की मांग की है.

अमेरिका में जातिवाद पर लिखी दलित लड़की की पुस्तक चर्चा में

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भारत में जातिवाद के ऊपर लिखी गई एक बहुत ही मार्मिक कहानी इन दिनों अमेरिका में चर्चा में है. इस कहानी की लेखक भारतीय मूल की एक 26 वर्षीय दलित छात्रा है, जिनका नाम सुजाता गिड़ला है. सुजाता का जन्म भारत के आंध्र प्रदेश में हुआ. इस वक़्त वह न्यूयॉर्क सब-वे में एक कंडक्टर के रूप में कार्यरत हैं. किताब का नाम “Ants Among Elephants” है . इस पुस्तक में कई जगह उन्होंने ने ऐसी घटनाओं का जिक्र किया है जहां दलितों को जातिवाद भेदभाव और निरादर सहना पड़ा हो.

सुजाता खुद भारत के एक बहुत ही प्रतिष्ठित संस्थान IIT मद्रास की छात्रा रह चुकी हैं, उन्होंने अपने किताब के परिचय में यह उल्लेख किया है कि उनका जन्म मद्रास के एक शहर काजीपेट में हुआ था जो उस वक़्त आंध्र प्रदेश का हिस्सा था. उनके माता एवं पिता दोनों शिक्षक थे, लेकिन दलित होने वजह से उन्हें गांव के बाहर एक अलग स्थान पर बसी जगह में रहना पड़ता था. इस पुस्तक में उन्होंने दलितों की इस स्थिति को अमेरिका में रह रहे काले लोगों की स्थिति से तुलना की है, जिनके साथ रंग के आधार पर भेदभाव किया जाता है.

उन्होंने बताया कि “एक दलित, जिनकी एक अहम भूमिका… जिनका एक मूल धर्म… या तो दूसरों के खेतो में काम करना है या फिर ऐसे काम करना है जिन्हें हिन्दू गन्दा समझते हों. इन दलितों को गांव के अंदर रहने या फिर मंदिरो में प्रवेश करने की भी अनुमति नहीं है. न तो ये दूसरे जाति के लोगों के साथ बैठ कर खा सकते हैं, ना ही उस जगह से पानी पी सकते हैं जहां अन्य जाति के लोग पानी पीते हों.” ऐसे ही हज़ारों पाबंदियों का उल्लेख सुजाता ने अपनी इस पुस्तक में किया है. वह कहती हैं कि हर दिन एक भारतीय मीडिया में दलितों के प्रति हो रहे अन्याय जैसे कि उन्हें मारना पीटना और सैंडल पहनने या साईकल चलाने पर उनकी हत्या कर देने जैसी घटनाओं की खबर देखी जा सकती है.

अमेरिका के बड़े प्रकाशन जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस पुस्तक की समीक्षा करते हुए इसे भारत के व्यावहारिक समझ का एक बहुत बड़ा उदाहरण बताया है. अमेरिका में इसका संस्करण आ चुका है और बहुत जल्द भारत में भी आने वाला है.

शराब का नशा करते थे ये देवी-देवता…

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नई दिल्ली। राज्यसभा में इन दिनों हिन्दू देवी-देवताओं को शराब से जोड़ा जा रहा है. इस पर राज्यसभा में बहस भी हो रही है. इस बयान ने राज्यसभा में हंगामा कर दिया है. हमारे नेता प्राचीन विद्या से अच्छी तरह से वाकिफ़ न हो, लेकिन कम से कम उन्हें इनका मूल ज्ञान तो होना ही चाहिए जिनकी वो पूजा करते है. इस तरह की बातें राज्य सभा में हुई है तो हम आपको उन देवी-देवताओं के बारे में बताते हैं जोकि शराब का सेवन किया करते थे.

वेद में सोम, एक भगवान का नाम था, इसी नाम से प्रख्यात एक पौधा भी था जिससे एक मादक रस निकलता था. इसे सोमरस के नाम से भी जाना जाता है. यह रस देवताओं को पश्चाताप के लिए पिलाया जाता था. सोमरस आम तौर पर दूसरे ज़हरीले पदार्थ, जैसे सूरा से काफी अलग होता था. माना जाता था कि सूरा सामान्य लोगों के लिए होता है और सोमरस वैदिक देवताओं लिए. सोमरस देवी-देवताओं के बीच काफी प्रिय था. इसका प्रयोग इंद्र, अग्नि, वरुण और मारुतः जैसे भगवान को खुश करने के लिए किए गए रस्म रिवाज़ में किया जाता था. इनमें इंद्र के बारे में यह कहा जाता है की उन्होंने वृत्र राक्षस से युद्ध से पहले सोमरास से भरे तीन तालाब को पी कर खत्म कर दिया था.

शराब का प्रयोग सिर्फ इन्ही पौराणिक कथाओ में ही नहीं बल्कि महाभारत और रामायण में भी इसका उल्लेख किया गया है. महाभारत में कृष्णा और अर्जुन अपनी-अपनी पत्नियों सत्यभामा और द्रौपदी के साथ मिलकर ‘बस्सिया शराब’ का आनंद लेते थे. बलराम को अपनी पत्नी के साथ मदिरापान के पश्चात नृत्य करते बताया गया है. रामायण में सीता को यह कहते बताया गया की अगर राम इस युद्ध को विजय कर लेते हैं तो मै यमुना नदी की हज़ारो गायों और मदिरा के साथ पूजन करुंगी. गंगा नदी को पार करते समय सीता ने गंगा को वचन दिया कि नदी पार होने पर वह मांस के साथ चावल (बिरयानी) और हजारों लीटर शराब गंगा को भेंट चढ़ाएंगी.

तांत्रिक धर्म को पांच अहम मकर में बांटा गया है- मद्य यानि शराब, ममसा यानि मांस, मतस्य यानि मछ्ली, मुद्रा यानि भाव और मैथुन यानि शारिरिक संबंध. ये पांचों मकर उन देवताओं को प्राप्त होते थे जो वामचर का पालन करते थे. मदिरा को हमेशा से शक्ति और शिव का प्रतीक बताया गया है. ऐसा कहा जाता है कि मां काली कंकाल के सर का प्रयोग मदिरापान के लिए किया करती थी. इन तथ्यों से यह साफ तौर पर जाहिर होता है की कुछ देवी-देवताओं को मदिरा ख़ास तौर पर पसंद थी और आज भी उनके सेवन के बिना उनकी पूजा को अधूरी मानी जाती है. इसका एक मुख्य उदाहरण दिल्ली के भैरव मंदिर और उज्जैन के काल भैरव मंदिर की है. यहां आज भी मदिरा को पूजा की एक मुख्य सामग्री के तौर पर प्रयोग में लाया जाता है.

 

गंठबंधन टूटने के बाद राजद नेता की गोली मारकर हत्या

पटना। राजद और जदयू के अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी से मिलकर सरकार बना ली है जिसके बाद राजद नेताओं पर बड़े हमले होने शुरू हो गये हैं. बिहार के पूर्व सांसद व बाहुबली शहाबुद्दीन के सबसे खास कहे जाने वाले राजद के युवा मोर्चा महासचिव की देर रात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. घटना तब की है जब सिवान जिले के राजद जिला महासचिव मिन्हाज खान अपने घर पर सोए हुए थे. तभी अचानक कुछ अपराधी वहां पहुंचे और गहरी नींद में सोए हुए खान की गोली मारकर हत्या कर दी. अपराधियों द्वारा उनके सर में गोली मारी गई जिसके बाद सभी फरार हो गए.

घर के बाहर दरवाजे पर सोए हुए खान पर गोली चलने की आवाज जब उनके परिवार वाले ने सुनी तो बाहर निकलकर देखा और घायल अवस्था में उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की कोशिश की जा रही थी लेकिन तब तक मिन्हाज की मौत हो चुकी थी. फिर मामले की जानकारी नजदीकी थाने को दी गई और मौके पर पहुंची पुलिस ने लाश को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और घटनास्थल से जिंदा बम और पेट्रोल भरा गैलन भी बरामद किया.

फिलहाल पुलिस इस मामले में अज्ञात अपराधियों पर मामला दर्ज कर जांच पड़ताल कर रही है. वहीं घटना की जानकारी मिलते ही सैकड़ों लोग राजद नेता के घर पहुंचकर हंगामा करते हुए प्रदर्शन करने लगे. फिर आक्रोशित लोगों को समझाने के लिए मौके पर पहुंची पुलिस को भी उनके आक्रोश का सामना करना पड़ा. हालांकि मौके पर पहुंचे एसडीपीओ सहित कई थाने की पुलिस ने किसी तरह से समझा बुझाकर मामला शांत करवाया और जल्द ही अपराधियों की गिरफ्तारी की बात कही जिसके बाद राजद नेताओं ने हत्या पर कड़ा रोष जाहिर किया.