हूल दिवसः इन दो वीर मूल निवासियों ने दी थी अंग्रेजों को टक्कर

sidho kanhu

भारत के इतिहास में 30 जून का दिन हूल दिवस के नाम से जाना जाता है. इस दिन की कहानी आदिवासी वीर सिदो-कान्हू और चांद-भैरव से जुड़ी हुई है. क्या आप सिदो-कान्हू और चांद-भैरव को जानते हैं. नहीं, तो हम बताते हैं. सिदो-कान्हू और चांद-भैरव झारखंड के संथाल आदिवासी थे. देश को आजादी दिलाने में इनकी अहम भूमिका थी. लेकिन इन्हें पूरा भारत वर्ष नहीं जान पाया. भारत की आजादी के बारे में जब भी कोई बात होती है तो 1857 के विद्रोह को अंग्रेजो के खिलाफ पहला विद्रोह बताया जाता है. लेकिन इससे पहले 1855 में आज ही के दिन सिदो- कान्हू ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह शुरू किया. इसी दिन को बहुजन आंदोलन में हूल दिवस कहा जाता है.

जी हां, 30 जून सन् 1855 में सिदो-कान्हू और चांद-भैरव ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारी बिगुल फूंका था. इन्होंने संथाल परगना के भगनाडीह में लगभग 50 हजार आदिवासियों को इकट्ठा करके अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी थी, जिसमें 20 हजार आदिवासी शहीद हुए. शुरूआत में संथालों को सफलता तो मिली लेकिन बाद में अंग्रेजों ने इन पर काबू पा लिया.

अंग्रेज आदिवासियों को जंगल से बाहर निकालने के लिए दबाव बनाने लगे. अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार थे, हाथी थे. उन्होंने पहाड़ पर चढ़ कर मोर्चा संभाल लिया. जब दोनों ओर से युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेज आदिवासियों पर गोलियों की बौछार करने लगे. जाहिर है, परंपरागत हथियारों से लैस आदिवासी वीर इसका मुकाबला नहीं कर सके. आदिवासी वीर संभल पाते उससे पहले ही अंग्रेजों के बंदूक से निकली गोलियां उन्हे छलनी करने लगी. इस तरह हजारों संथाल आदिवासी मारे गए.

इसके बाद अंग्रेजों ने संथालों के हर गांव पर हमला किया. अंग्रेज यह सुनिश्चित कर लेना चाहते थे कि एक भी विद्रोही संथाल आदिवासी नहीं बचना चाहिए. ये आंदोलन निर्दयी तरीके से दबा दिया गया. इसके बाद सिदो-कान्हू को 26 जुलाई 1855 को ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी. लेकिन इस आंदोलन ने औपनिवेशिक शासन को नीति में बड़ा बदलाव करने को मजबूर कर दिया.

जिस दिन मूलनिवासी आदिवासियों ने अंग्रेजों की सत्ता को मानने से इंकार कर खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया था, बहुजन इतिहास में यही 30 जून का दिन “हूल दिवस” यानी क्रांति दिवस के रूप में दर्ज हो गया. इस दिन को आदिवासी समाज पूरे उल्लास से मनाता है और अपने वीर सिदो-कान्हू और चांद-भैरव को याद करता है. सिदो-कान्हू के नाम से झारखंड में एक विश्वविद्यालय भी 1996 में खोला गया. इस वीर के सम्मान में 2002 में भारतीय डाक ने डाक टिकट भी जारी किया. जय भीम-हूल जोहार का नारा शायद यहीं से निकला होगा.

IAS अफसर राजीव कुमार बने यूपी के मुख्य सचिव

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उत्तर प्रदेश के नए सचिव का भार 1981 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव कुमार को दिया  गया है. गुरुवार को लखनऊ में उन्होंने चार्ज संभाल लिया है. अपना कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ही उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी, नियमों में रहकर कार्य किये जायेगें.

मीडिया से बातचीत में उन्होने कहा कि मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि जो कार्य नियमानुसार और नियमानुकूल है उसे करने में किसी भी अफसर या सरकारी कर्मी को परेशानी नहीं होनी होती. लेकिन जो नियम के अनुसार नहीं हो रहे हैं. उसके लिए सामने वाले को विनम्रता के साथ साथ वास्तविक व सही बातें बताकर मॉफी मांगने में भी कोई गुरेज नहीं होना चाहिए. मुझे उम्मीद है लोग परेशानियों को जरूर समझेंगे.

उन्होने कहा प्रदेश बड़ा है चुनौतियां भी उसी हिसाब से बड़ी है लेकिन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में टीम भावना के साथ सभी चुनौतियों का सामना किया जायेगा. राजनीतिक दबावों से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुनकर भेजे गए जनप्रतिनिधियों से काफी अपेक्षाएं रहती हैं इसलिए नियमों के दायरे मे रहकर उनकी समस्याओं को दूर करना हमारी पहली जिम्मेदारी होती है.

 

यूपी: दलित बहनों से रेप की कोशिश, विरोध पर पीटा

अमरोहा। अमरोहा जिले के डिडौली कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में दलित बहनों से दुष्कर्म की कोशिश की, उनके कपड़े फाड़ दिये गये. कुछ ही समय यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गयी, आरोपियों का विरोध करने पर बहनों व पिता को बेरहमी से पीटकर घायल कर दिया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है.मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

बता दें की कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी दलित परिवार की दो बहने सोमवार की शाम खेत पर जा रही थी. इसी बीच चार पांच युवकों ने उन्हें दबोच लिया और खींचकर पास के चरई के खेत में ले गए. आरोप ने युवकों ने बहनों से दुष्कर्म की कोशिश की, जिसमें लड़कियों ने शोर मचा दिया. इसी बीच पीछे से किशोरियों का पिता आ गया. उसने आरोपियों का विरोध किया, तो युवकों ने बहनों व पिता को बेरहमी से पीटकर घायल कर दिया और धमकाते हुए भाग गए.

शोर शराबा सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे लोग जमा हो गए. सूचना पर पुलिस पहुंची और घटना की जानकारी ली. रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दे दी है. जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है.जांच में पुलिस ने बताया है की दुष्कर्म की कोशिश जैसी कोई बात नहीं हुई है. पर आरोपी रेप की मंशा से ही लड़कियों को खींचकर ले गये थे.

गौरतलब है की दलित लड़कियों, महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाऐँ तेजी से बढ़ी हैं जिनका ग्राफ उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक है.

 

लखनऊ: GST के कारण कल से एसी बसों का सफर महंगा

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लखनऊ: जिस बात का लोगों को डर था, वह डर अब धीरे-धीरे लोगों के सामने आ रहा है। कल से जीएसटी का असर रोडवेज बसों की एसी बस सेवाओं पर भी पड़ेगा. ऐसे में सरकारी परिवहन निगम के एसी बसों का सफर आज आधी रात से महंगा हो जाएगा.

एसी बसों की सभी सेवाओं में पांच फीसदी अतिरिक्त जीएसटी का चार्ज लगेगा. एसी बसों में जनरथ, शताब्दी, वोल्वो, स्कैनिया, महिला स्पेशल बसें शामिल होंगी, जिन पर नया कर लगना तय है. यह पांच फीसदी बढ़ा हुआ किराया 30 जून की आधी रात यानि एक जुलाई से लागू हो जाएगा.

शुक्रवार को एसी बसों के एटीएम में नए किराए के दरों की फिड़िग की जाएगी. मीडिया को यह जानकारी उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के जनसंपर्क अधिकारी अनवर अंजार ने दी.

बता दें की लखनऊ दिल्ली जाने के लिए पहले 1497 रूपये लगते थे तो अब यह किराया बढ़कर 1572 हो गया है वहीं गोरखपुर का किराया 785 से 820,जयपुर का किराया 1613 से 1695, देहरादून का किराय 1660 से 1749, आगरा का किराया 1004 से 1054, वाराणसी का किराया 802 से 842 तथा इलाहाबाद का किराया 526 से बढ़कर 551 हो गया है.

गौरतलब है की रोडवेज का बढ़ा किराया तो शुरूआत मात्र है इसके बाद जीएसटी की मार अन्य क्षेत्रों पर भी पड़नी शुरु हो जायेगी.

दिल्लीः बंद हुए MacDonald’s के 50 में से 43 रेस्तरां, 1700 कर्मचारी हुए बेरोजगार

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नई दिल्ली। लोगों का पसंदीदा बर्गर आउटलेट मैक्डॉनल्ड्स के दिल्ली में मौजूद 50 में से 43 रेस्तरां आज से बंद हो गए है. कनॉट प्लाजा रेस्ट्रान्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बोर्ड (सीपीआरएल) ने इसका फैसला बोर्ड मीटिंग में लिया. इस फैसले के बाद मैक्डी में काम कर रहे 1700 कर्मचारियों के सामने बेरोजगारी की संकट मंडराने लगा है. सूत्रों की माने तो इस फैसले का मुख्य कारण सीपीआरएल बोर्ड के पूर्व प्रबंध निर्देशव विक्रम बख्शी और मैक्डॉनल्ड्स के प्रबंधक के बीच चल रहे विवाद है.

बता दें कि सीपीआरएल, विक्रम बक्शी और अमेरिकी मैकडोनाल्ड के बीच 50-50 फीसद साझेदारी का ज्वाइंट वेंचर है. जो उत्तर और पश्चिम भारत में फास्ट फूड चेन का संचालन करते हैं. सीपीआरएल के पूर्व प्रबंध निदेशक विक्रम बक्शी 168 रेस्त्रां का संचालन करते हैं. बक्शी ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है. लेकिन 43 रेस्त्रां का संचालन अस्थायी रूप से बंद किया जा रहा है. विक्रम बक्शी अपनी पत्नी सहित सीपीआरएल बोर्ड में है और बोर्ड पर वर्चस्व रखते हैं.

ये है मैक्डी के बंद होने की वजह मैक्डी आउटलेट्स को बंद करने का एलान स्काइप के जरिए हुई बोर्ड बैठक के दौरान लिया गया. रेस्तरां को अस्थायी तौर पर बंद की वजह बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच चल रही लड़ाई को माना जा रहा है. जिसकी वजह से सीपीआरएल आवश्यक स्वास्थ्य लाइसेंस रिन्यू कराने में असफल हो गई है. बख्शी को सीपीआरएल के प्रबंध निदेशक पद से अगस्त 2013 में हटा दिया गया था. इसके बाद बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच लंबी कानूनी लड़ाई चल रही है, जिसमें उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी फास्ट फूड चेन को कंपनी लॉ बोर्ड में घसीट लिया था. फिलहाल इस मामले में बोर्ड का फैसला नहीं आया है. मैकडॉनल्ड्स लंदन कोर्ट ऑफ इंटरनैशनल आर्बिट्रेशन में बख्शी के खिलाफ मुकदमा लड़ रही है.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

दो दलित भाइयों को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला

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रोहताश। बिहार के रोहताश जिले में दो भाईयों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी. इन दोनों को बीते बुधवार(28 जून) रात चोरी के शक में पीटा गया था. इस मामले में करीब दो दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. घटना रात करीब 12.30 बजे हुई जब राहू मुसहर और उसका भाई बब्बन मुसहर कोचस पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले गांव परसिया में एक किसान शौकत अली के घर में कथित तौर पर घुसते पकड़े गए. शौकत अली के शोर मचाने पर गांव के दूसरे लोग भी इक्ट्ठा हो गए और दोनों की जमकर पिटाई की. राहू की उम्र 33 साल और बब्बन की उम्र 31 साल थी, जो परसिया गांव से 20 किमी दूर पगरी गांव के रहने वाले थे.

आरोप है कि गांव वालों ने दोनों भाईयों को हाथों और डंडों से पीटा. पुलिस रात को एक बजे गांव पहुंची और दोनों घायल भाईयों को कोचस के हेल्थकेयर सेंटर ले गई. यहां बुधवार देर रात बब्बन ने दम तोड़ दिया. राहू की मौत रोहताश स्थित सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई.

कोचस पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सतीश कुमार ने कहा, “यह साफ नहीं हो सका कि ये दोनों भाई परसिया में किस काम से आए थे. हमने गांव के दो दर्जन से ज्यादा लोगों पर मामला दर्ज किया है. गांव वालों से पूछताछ की जा रही है. दोनों ही पीड़ितों के खिलाफ पहले का कोई आपराधिक मामला नहीं है.” थाना इंचार्ज ने बताया कि मृतकों के परिवार से अभी तक कोई भी नहीं आया है और बताया जा रहा है कि घटना के बाद वो गांव छोड़कर भाग गए हैं.

JNU: नजीब के बारे में सूचना देने वाले को 10 लाख रूपये का इनाम

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नयी दिल्ली। जेएनयू छात्र नजीब अहमद को लापता हुए आठ माह से अधिक हो गये हैं. सीबीआई ने बयान दिया है कि जेएनयू के लापता छात्र नजीब का पता बताने वाले को 10 लाख रूपये का इनाम दिया जायेगा. एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि नजीब के बारे में सूचना देने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति इन नम्बरों 011- 24368641, 24368634, 24368638 और 9650394796 पर संपर्क कर सकते हैं.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में रहस्यमय तरीके से लापता हुए नजीब के मामले की जांच कर रही सीबीआई हाल ही में विश्वविद्यालय परिसर में स्थित छात्रावास गयी थी. नजीब इसी छात्रावास से लापता हुआ था. नजीब की मां फातिमा नफीस ने हाल ही में मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारियों से भेंट कर छात्र के लापता होने से पहले के घटनाक्रम की जानकारी उन्हें दी थी.

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नजीब छुट्टियों के बाद 13 अक्तूबर 2016  को विश्वविद्यालय लौटा था. फातिमा ने कहा था, 15-16 अक्तूबर की रात नजीब ने उनसे बात कर कहा था कि कुछ गड़बड़ है। नजीब के रूममेट ने बाद में उन्हें बताया कि उसे किसी झगड़े में चोट आयी थी.

उनका कहना है बातचीत के बाद वह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से बस से दिल्ली रवाना हो गयीं. आनंद विहार पहुंचने के बाद उन्होंने फोन पर नजीब से बात की और उससे होटल में मिलने को कहा, जहां वह रूकी हुई थीं. फातिमा ने अपनी शिकायत में कहा है, वहां नजीब का कुछ पता नहीं था. फिर जब वह माही-मांडवी छात्रावास के रूम नंबर-16 पहुंची तो नजीब का कोई अता-पता नहीं था.

दिल्ली पुलिस जब नजीब को नहीं खोज सकी तो वह सीबीआई जांच की मांग लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचीं. अदालत ने 16 मई को जांच सीबीआई को सौंप दी. मामले पर अगली सुनवायी 17 जुलाई को होनी है. उम्मीद है सीबीआई नजीब अहमद के लापता होने के मामले में बड़ा खुलासा जल्द करेगी.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.  

उना दलित कांड के पीड़ित परिवार ने कहा- राष्ट्रपति कोई बने, हमारा दर्द नहीं मिटेगा

Babu Sarviyya

अहमदाबाद। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रामनाथ कोविंद को एनडीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित करते हुए उन्हें “गरीब दलित परिवार में जन्मा पार्टी का वरिष्ठ नेता बताया.” कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मीरा कुमार को यूपीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित करते हुए कहा कि उन्हें “गर्व” है कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर विपक्ष की पसंद “दलित” नेता हैं. लेकिन बालू सरवैया दोनों ही उम्मीदवारों को दलितों का प्रतिनिधि नहीं मानते.

पिछले साल 11 जुलाई को गुजरात के उना में बालू के दो बेटों और दो भतीजों की कथित गौरक्षकों ने पिटाई कर दी थी. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि गाय को एक शेर ने मारा था. गुजरात में दलितों ने इस पिटाई के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए. 47 वर्षीय बालू सरवैया बुद्ध, बाबासाहेब अंबेडकर और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती की तस्वीर की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं, “वो जैसी भी हों हम मायावती के साथ हैं.”

बालू सरवैया अन्य 50 दलितों के साथ अपने गांव से 30 किलोमीटर दूर एक बसपा से हुई एक बैठक के लिए आए थे. इस बैठक में एक वक्ता गौतम जादव ने कहा, “हम जल्द ही राष्ट्रपति चुनाव के साक्षी बनेंगे. रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दो उम्मीदवार हैं. आज तक हमें पता चला कि प्रतिभा पाटिल की जाति क्या थी? या प्रणब मुखर्जी की? अबकी बार ये कहा जा रहा है कि इस बार दलित राष्ट्रपति होगा और वो हमारा होगा. हम सबको पता है कि केंद्र हमसे कितना प्यार करता है. हमने पिछले 65 में ये देखा है.”

इस बैठक में बालू के भतीजे बेचर (30) और अशोक (20) भी शामिल थे. बालू के बेटों रमेश (23) और वशराम (25) के साथ अशोक और बेचर की कथित गौरक्षकों ने पिटाई की थी. बालू के परिवार में अगर कोविंद और मीरा कुमार के नाम का कोई महत्व है तो वो उनके भतीजे जीतू हैं. जीतू ने हाल ही में भावनगर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है. बालू कहते हैं कि उनका परिवार बौद्ध धर्म ग्रहण करना चाहता है लेकिन उन्हें डर है कि उन लोगों पर फिर से हमला हो सकता है.

Una Dalit Victim

बालू के परिवार ने गाय का चमड़ा उतारने का काम छोड़ दिया है. बालू कहते हैं, “हमारे परिवार ने गाय का चमड़ा उतारने का काम छोड़ दिया है लेकिन गौरक्षकों का डर बना हुआ है. हम चाहते हैं कि हमारे बेटे अहमदाबाद में बस जाएं.” बालू कहते हैं, “मैं गांव में रहूंगा. अगर वो मुझे मार देते हैं तो कोई बात नहीं. वो गुस्सा हैं और कभी भी बदला ले सकते हैं. अगर मेरे बेटे को जेल हुई होती तो मुझे भी ऐसा ही लगता. इस बार उन लोगों ने हम पर हमला किया तो कोई वीडिया वायरल नहीं होगा, लेकिन वो देखने लायक मंजर होगा.”

बालू करीब 20 साल तक भाजपा से जुड़े रहे. बालू के अनुसार वो हर चुनाव में भाजपा के लिए प्रचार करते थे. लेकिन अब उनका भाजपा से मोहभंग हो चुका है. गुजरात पुलिस की सीआईडी ने दलितों की पिटाई मामले में अब तक 43 लोगों को गिरफ्तार किया था जिनमें चार पुलिसवाले भी हैं. पुलिसवालों पर मामले की चार्जशीट में गड़बड़ी करने का आरोप है. मामले के मुख्य आरोपी शांति मोनपारा और पुलिसवालों समेत 20 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है.

ओवैसी: सिर्फ बातें करना जानते हैं पीएम मोदी, कार्रवाई नहीं

नई दिल्ली: महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम की स्थापना के 100 साल पूरे होने का मौका था. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी शताब्दी समारोह में कह रहे थे कि गौरक्षा के नाम पर किसी इंसान को मारना गौसेवा नहीं है.  हिंसा से आज तक कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हुआ और ना ही आगे होगा. गाय सेवा के नाम पर इंसानो की हत्या निंदनीय है. इस बयान के आने के बाद पीएम मोदी विपक्षी नेताओं के निशाने पर आ गए हैं.

ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहदुल मुसलमीन (AIMIM) पार्टी के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए पीएम के बयान को केवल जुबानी कार्रवाई बताया. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ बातें करना जानते हैं. इससे पहले भी पीएम मोदी गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा पर बयान दे चुके हैं लेकिन हालात वैसे ही हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन लोगों को बीजेपी, आरएसएस की तरफ से लगातार समर्थन मिलता रहा है.

ओवैसी ने आगे ट्वीट करते हुए लिखा कि बस बातें करने से कुछ नहीं होगा. गौरक्षा स्वीकार नहीं है तो पहलू खान के 3 हत्यारों को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया है?  जबकि राजस्थान में बीजेपी की सरकार है.

पीएम मोदी के इस भाषण को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. किसी ने कहा है कि पीएम मोदी ने ये बयान देने में काफी देर कर दी है.  जब उन्हें लग रहा है कि जनता में गौरक्षा के हिंसात्मक रवैया की वजह से आक्रोश बढ़ रहा है और वो सड़कों पर उतर रहे हैं, तब उन्हें इसकी याद आई है.

गौरतलब है की देश भर में गौ-रक्षा के नाम पर लगातार हत्याऐँ हो रही हैं जिसकी खबरें आये दिन लोगों में डर पैदा कर रही है.

 

SSC स्टेनोग्राफर पद पर वैकेंसी, जल्दी करें आवेदन

नई दिल्ली : स्टॉफ सलेक्शन कमिशन (SSC)  ने स्टेनोग्राफर ग्रेड के C और D रिक्ति पद के लिए घोषणा की है. आप भी अगर सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं तो जल्द ही आवेदन करें.

योग्यता –

इच्छुक उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास या समकक्ष योग्यता प्राप्त होनी चाहिए.

उम्र सीमा-

इस पोस्ट के लिए 18 से 27 साल की उम्र के उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते हैं. एसएसी/ एसटी/ ओबीसी और दिव्यांगों को सरकार के नियमानुसार छूट दी जाएगी.

चयन प्रक्रिया-

इस पोस्ट के लिए उम्मीदवार का चयन लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा.

शुल्क-

इस पोस्ट के लिए अप्लाई करने के लिए 10 रुपए का शुल्क लिया जाएगा.

ऐसे करें आवेदन-

उम्मीदवार www.ssconline.nic.in पर जाकर ‘रिक्रूटमेंट फॉर स्टेनोग्राफर ग्रेड ‘सी’ और ‘डी’ एग्जामिनेशन 2017’ ऑप्शन पर क्लिक करें, इसके बाद क्लिक टू अप्लाई लिंक पर क्लिक करें.

कंप्यूटर परीक्षा-

4 से 7 सितंबर के बीच होगी परीक्षा

आवेदन की अंतिम तारीख-

उम्मीदवार इस पोस्ट के लिए 15 जुलाई शाम 5 बजे तक ही आवेदन कर सकते हैं, चालान से शुल्क के भुगतान की अंतिम तारीख 18 जुलाई शाम 5 बजे तक है.

 

GST का देश में भारी विरोध, अब दिल्ली के व्यापारी भी सड़कों पर उतरे

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नई दिल्ली: पूरा देश में  1 जुलाई से देश में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने जा रहा है.लेकिन लागू होने से पहले इसका विरोध शुरू हो गया, अभी कुछ दिन पहले वाराणसी के साड़ी व्यापारियों ने विरोध प्रर्दशन किया था, उसके बाद राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश में भी इसका अच्छा खासा विरोध हुआ था. पर अब इस विरोध की रफ्तार दिल्ली तक आ पहुंची है. राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के बाद अब दिल्ली के चांदनी चौक में भी व्यापारी इसका जबदस्त विरोध कर रहे हैं.

गुरुवार की सुबह से ही दिल्ली के चांदनी चौक में व्यापारी जीएसटी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. चांदनी चौक में लाल किले के सामने व्यापारी वर्ग जीएसटी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. व्यापारियों की भीड़ की वजह से चांदनी चौक में भारी जाम भी लग गया है.

वहीं GST को लेकर गुजरात के जामनगर में भी व्यापारी महामण्डल ने बंद का ऐलान किया था. जिसके बाद आज पूरा शहर बंद के समर्थन में खड़ा हुआ है. इतना ही व्यापारियों ने जीएसटी के विरोध में बाइक से रैलियां भी निकाली है.

वहीं राजस्थान के जयपुर में भी 30 जून से 3 जुलाई तक मंडियां भी बंद रहेंगी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी साड़ी व्यापारियों ने जीएसटी के विरोध में प्रर्दशन किया था.

 

नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर भड़की मायावती

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने अपने पूर्व नेता और विधान परिषद सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी को लेकर उत्तर प्रदेश विधान परिषद अध्यक्ष के समक्ष एक याचिका दायर की है. जिसमें कहा गया है कि उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्यता से दिनांक 27 मई, 2017 से अयोग्य घोषित कर दिया जाए और सदस्य के रूप में मिल रही किसी भी सुविधा और भत्ता को बंद कर दिया जाए. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह सूचना दी.

सतीश चंद्र मिश्र ने बताया कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के विरुद्ध बसपा के विधान परिषद नेता सुनील कुमार चित्तौड़ द्वारा विधान परिषद अध्यक्ष के समक्ष दल बदल कानून के तहत एक याचिका दी है. यह याचिका उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली, 1987 सपठित संविधान की दसवीं अनुसूची एवं अनुच्छेद 191(2), विपक्षी द्वारा स्वेच्छा से अपने मूल राजनैतिक दल की सदस्यता त्याग करने के संबंध में नियम-7 के अन्तर्गत दायर की गई है.

बहुजन समाज पार्टी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी बहुजन समाज पार्टी की ओर से विधान परिषद के सदस्य के रूप में दिनांक 23 जनवरी, 2015 को निर्वाचित हुए थे. बहुजन समाज पार्टी उनका मूल राजनीतिक दल है. उन्होंने 27 मई 2017 को राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा नाम से अपना एक पृथक राजनीतिक दल बना लिया है.

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी का यह आचरण विधिक एवं संवैधानिक रूप से मूल राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ने की बात सिद्ध करता है. उनका यह कृत्य संविधान की दसवीं अनुसूची के विपरीत है अतः याचिका में प्रार्थना की गई है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी को संविधान की 10वीं अनुसूची सपठित 191(2) के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्यता से दिनांक 27 मई, 2017 से अयोग्य माना जाए.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार मिलने के करीब दो महीने बाद बसपा ने बड़े नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे अफजल सिद्दीकी को पार्टी से बाहर कर दिया था. बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे और उनके बेटे को बाहर करने का फैसला लिया था. इन दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा था.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

यूपी: GST के फायदे बताने वाले  योगी के मंत्री, फुलफॉर्म तक नही बता पाये

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी लांच होने से पहले सभी मंत्रियों और बीजेपी सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र में जनता के बीच जाकर जीएसटी के फायदे बताने का फरमान दिया था. उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री जीएसटी के फायदे बताने के लिए महाराजगंज गए थे. इसके साथ ही वह यूपी सरकार के 100 दिन के काम का बखान भी करने वाले थे. लेकिन रमापति शास्त्री GST की फुल फॉर्म तक नहीं बता पाए.  गौरतलब है की जीएसटी की आसान सी फुल फॉर्म गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) है.

हाल ही में हुई कैबिनेट मीटिंग में नरेंद्र मोदी ने अपने मुख्यमंत्रियों, सांसदो से कहा था कि वह जीएसटी से जनता को टैक्स में होने वाले फायदों के बारे में बताएं. उन्होंने कहा था कि जीएसटी लागू होना एनडीए सरकार के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.

गौरतलब है कि भाजपा की पढ़ी लिखी सांसद मीनाक्षी लेखी ढंग से स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत तक नहीं लिख पाईं. सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर खूब वायरल हो रही है जिसमें साफ दिख रहा है कि सांसद मीनाक्षी लेखी ने बोर्ड पर गलत तरीके से स्वच्छ और स्वस्थ लिखा है.

बीजेपी के मंत्री अपने हल्के ज्ञान को लेकर सोशल मीडिया पर खूब मजाक का पात्र बन रहे हैं. वे जनता को ज्ञान बांटने गये और खुद ही घिर गये.

 

दलितों के कार्यक्रम में खाना कुचलकर निकला ग्राम प्रधान

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कानपुर। संविधान में दिए गए सभी को समान अधिकार के बावजूद उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक गांव में दलितों पर अत्याचार का नया मामला सामने आया है, जोकि समाज में व्याप्त भेदभाव को दर्शाता है.

अत्याचार की यह घटना हमीरपुर में राठ कोतवाली के स्यावरी गांव की है. 26 जून की शाम तिजिया के घर में कुंआ पूजन का कार्यक्रम था. कार्यक्रम में सभी रिश्तेदार और गांव वाले मिलकर खुशियां मना रहे थे. उसी रात करीब 10 बजे जब सभी रिश्तेदार और ग्रामीण घर के बाहर दरवाजे पर खाने खाने बैठे, तभी ग्राम प्रधान खूबचंद्र अपने साथ बीरा गांव के निवासी गोपीचंद्र को लेकर अपनी चार पहिया वाहन से वहां आए और दरवाजे के बाहर खाना खा रहे लोगों का खाना रौंदकर चले गए. ग्राम प्रधान को इस पर भी संतुष्टि नहीं मिली, इसलिए ग्राम प्रधान 15 मिनट बाद दोबारा आया और फिर से खाना खा रहे लोगों का खाना कुचल कर निकल गया.

तिजिया और उसके पति ब्रजलाल ने जब प्रधान का विरोध किया तो वह सबके सामने उनकी बेइज्जती करते हुए उन्हें जाति सूचक गालियां देने लगा. जब दोनों ने प्रधान को गाली देने से रोकना चाहा तो प्रधान ने उनके साथ मारपीट शुरु कर दी. खाना खा रहा खूबचंद्र जब बचाने आया तो उसके ऊपर भी बंदूक तान दी और जान से मारने की धमकी देकर चले गए. पीड़िता ने बताया कि प्रधान गुंडा और आपराधिक प्रवृत्ति का है. इनके ऊपर पहले से संगीन धाराओं के मुकदमें चल रहे हैं.

नागमणि कुमार शर्मा की रिपोर्ट

जल्द आएंगें 200 के नोट, RBI ने शुरू की छपाई

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नई दिल्ली। सरकार के 1000 रुपये का नोट बंद करने के फैसले से लोगों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए अब 200 रुपये का नया नोट मार्केट में लाने की तैयारी की जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक ने 200 रुपये के नए नोटों की छपाई भी शुरू कर दी है.

200 के नए नोट को पहले जुलाई में जारी करने की बात चल रही थी. लेकिन फिलहाल इसमें कुछ देरी हो सकती है. आरबीआई ने एक अखबार को बताया कि कुछ हफ्ते पहले ही नए नोटों की छपाई शुरू करने के आदेश दे दिए गए हैं. इसके बाद सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में इन नोटों की छपाई शुरू कर दी गई है.

500 रुपये के 1650 करोड़ नोट हटाए जाने के बाद बड़ा अंतर गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल यानि 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया था. जिसके चलते 500 तथा 1000 रुपये के पुराने नोट को बंद करके 500 और 2000 के नए नोट लाए गए थे तथा 1000 रुपये के नोट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च के मुताबिक 8 नवंबर को नोटबंदी के वक्त देश में 500 रुपये के नोटों की संख्या 1,650 करोड़ थी. इन नोटों को हटाए जाने के बाद मार्केट में सर्कुलेट नोटों की संख्या में बड़ा अंतर आ गया था.

200 के नए नोट से छोटी करेंसी की समस्या होगी हल एसबीआई में ग्रुप चीफ इकॉनमिस्ट के तौर पर काम करने वाले सौम्या कांति घोष ने कहा कि ‘दैनिक लेन-देन के मकसद से 200 रुपये के नोट लाए जाने से कामकाज में आसानी होगी.’ उन्होंने कहा- ‘नोटबंदी में हटाए गए नोटों के एक हिस्से की भरपाई 2,000 रुपये के नोटों के जरिए हुई है. जबकि 500 रुपये के नोटों ने काफी हद तक इस कमी को पूरा करने का काम किया है. लेकिन यह काफी नहीं था.’ उन्होंने कहा कि 200 रुपये के नोटों को जारी किए जाने के बाद छोटी करंसी के संकट से राहत मिल सकेगी. जिसकी कमी लोग 500 रुपये के पुराने नोटों को बंद किए जाने के बाद से ही महसूस कर रहे हैं.

स्कूल ने रद्द किया 4 दलित छात्रों का दाखिला, बच्चों सहित धरने पर बैठे परिवार

Children with family on protest

मोरबी। गुजरात के मोरबी जिले में एक स्कूल ने चार दलित बच्चों को एडमिशन यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इन बच्चों का घर स्कूल से 6 किलोमीटर की दूरी पर है. स्कूल की इस मनमानी के खिलाफ इन दलित बच्चों के परिवारवाले जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर के बाहर पिछले डेढ़ महीने से धरना दे रहे हैं. बीते बुधवार (28 जून) को हाई कोर्ट ने इसे ‘कानून का मजाक’ बताते हुए मोरबी जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई और स्कूल का आदेश रद्द कर दिया.

इन बच्चों का एडमिशनसर्वोपरि स्कूल में पिछले साल शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत हुआ था. बताया जा रहा है कि स्कूल प्रशासन ने बच्चों का एडमिशन निरस्त करने के लिए उस नियम की आड़ ली जिसमें कहा गया है कि बच्चों का घर स्कूल से 3 किलोमीटर की दूरी पर होना चाहिए. लेकिन बच्चों के परिवारवालों ने बताया कि उनसे ट्रांसपॉर्टेशन फीस के नाम पर 12,000 रुपये मांगे जा रहे थे जिसे देने से इनकार करने पर बच्चों को स्कूल आने से रोक दिया गया.

इसके बाद बच्चों का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर भेज दिया गया. विरोध में इन बच्चों के परिवारवाले पिछले डेढ़ महीने से DEO दफ्तर के बाद धरना दे रहे हैं, पर किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. जानकारी मिलने पर राजू सोलंकी नाम के एक RTE कार्यकर्ता इस मामले को हाई कोर्ट ले गए.

हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए राज्य सरकार और मोरबी जिला प्रशासन को RTE को सही तरीके से लागू न करने के लिए कड़ी फटकार लगाई. इसे कानून का मजाक बताते हुए कोर्ट ने स्कूल के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि बच्चों को उनकी पढ़ाई जारी रखने दी जाए. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया है. मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस एसजी शाह ने कहा कि इस मामले में सरकारी अधिकारी स्कूल का पक्ष ले रहे हैं जो सही नहीं है.

कांग्रेस जीएसटी समारोह का बहिष्कार करेगी

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है की जीएसटी लागू करने के लिए 30 जून की आधी रात को आयोजित किए जा रहे समारोह में हिस्सा नहीं लेगी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने आधी रात के कार्यक्रम को गरिमा के खिलाफ बताया. इसके लिए समारोह का कोई आयोजन नहीं होना चाहिए मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आजाद ने कहा कि जीडीपी गिरावट पर सरकार का कोई ध्यान नही है. सरकार बहरी हो गयी है उसे चीख पुकार सुनाई नहीं देती. कांग्रेस के साथ ही कुछ अन्य दलों ने भी इस समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि पार्टी समारोह में हिस्सा नहीं लेगी. कांग्रेस ने इससे पहले बुधवार को उन्होंने आमंत्रण पत्र को लेकर भी आपत्ति दर्ज की थी.  जिसमें कहा गया है कि देश के इतिहास के सबसे बड़े कर सुधार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लॉन्च करेंगे. देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी का कहना है कि यह उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “राष्ट्रपति की मौजूदगी में जीएसटी को प्रधानमंत्री कैसे लॉन्च कर सकते हैं. यह कतई सही नहीं है. गौरतलब है कि एक जुलाई को पूरे देश में एकीकृत टैक्‍स के रूप में लागू होने जा रहे जीएसटी के मद्देनजर 30 जून की आधी रात को संसद में खास कार्यक्रम का आयोजन होगा. इसके तहत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीएम मोदी ठीक रात के 12 बजे app के जरिये जीएसटी लांच करेंगे. यह कार्यक्रम 30 तारीख की रात 11 बजे से 12:10 बजे तक चलेगा.