बद्रीनाथ मंदिर के पूर्व पुजारी पर छेडछाड़ का मुकदमा दर्ज

उत्तराखंड। बदरीनाथ धाम के पूर्व मुख्य पुजारी रावल पर महाराष्ट्र की साध्वी द्वारा छेड़खानी का आरोप लगाया गया है. बदरीनाथ पुलिस ने पूर्व मुख्य पुजारी पर मुकदमा दर्ज कर दिया है. बीते कल बदरीनाथ पहुंची महाराष्ट्र की साध्वी (64) ने थाना बदरीनाथ थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 1980 से 1994 तक प्रतिवर्ष बदरीनाथ के दर्शन के लिए आती थीं. उस वक्त बदरीनाथ के रावल विष्णु नंबूदरी थे. उन्होंने साध्वीं के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा था, जिसे उसने इनकार कर दिया.

साध्वी ने आरोप लगाया कि तब से वह उसका पीछा करते रहे और उसके पीछे मुंबई तक आ गए. साध्वी ने दोनों उस पुजारी पर मुंबई में उसकी संपतियां हड़पने का प्रयास करने तथा पिछले कुछ सालों के दौरान उसके परिवार के पांच सदस्यों की रहस्यमय परिस्थितियों में गुमशुदगी में उनकी कथित भूमिका होने का आरोप लगाया है.

साध्वी ने पूर्व रावल पर छेड़छाड़ और अश्लील हरकत करने का आरोप भी लगाया। चमोली की पुलिस अधीक्षक तृप्ति भट्ट ने बताया कि साध्वी की लिखित तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी गयी है.

योगीराज में गुंडाराज, दरोगा की गला काटकर हत्या

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में एक दरोगा की गला काटकर हत्या कर दी गई. दरोगा सहजोर सिंह बिजनौर के थाना मंडावर स्थित बालावाली पुलिस चौकी में तैनात थे. पुलिस लूट के बाद हत्या और खनन माफियाओं से रंजिश का मामला मानते हुए केस की तहकीकात मे जुटी है.

दरोगा की हत्या से आस पास के  इलाके में हड़कंप मच गया जिसका असर पूरे उत्तर प्रदेश में देखा जा रहा है. पुलिस के मुताबिक, दारोगा की लाश एक खेत में पड़ी मिली थी, ग्रामीणों ने दरोगा की लाश देखते ही पुलिस को इसकी सूचना दी.

मौके पर पहुंचे चौकी पुलिसकर्मियों ने शव की शिनाख्त की. घटनास्थल से सहजोर सिंह की सर्विस पिस्टल गायब बताई जा रही है.

पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया. पुलिस अभी हत्या की वजह तलाश रही है. बता दे कि जिस जगह हत्या हुई वह खादर का इलाका थाने से लगभग 8 किमी दूर है. इस इलाके में अवैध खनन काफी आम बात है. आशंका है कि दरोगा की हत्या के पीछे खनन माफियाओं का भी हाथ हो सकता है. केस की जांच में पुलिस जुट गयी है जल्दी ही केस का खुलासा हो जायेगा

 

बिहार: खेत में निकले शिवलिंग को लेकर भारी तनाव, इंटरनेट सेवा ठप

बिहार के मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र में खोजपुर व बेला गांव के बीच अजीब विवाद सामने आया है. विवाद का कारण खेत में निकला शिवलिंग है. शिवलिंग का मामला  शांति से निबटाने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मधुबनी क्षेत्र में इंटरनेट सेवा को पूरी तरह बंद कर दिया है. बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी के अगले आदेश तक इंटरनेट सेवा को बंद रखा जायेगा.

बता दें की बीते पांच अप्रैल को नहर चौक के पास नवका गांव खेत से शिवलिंग मिला था. यह शिवलिंग खोजपुर गांव की एक बच्ची को मिला था, जिसके बाद वहां के लोगों ने गांव के मंदिर परिसर में शिवलिंग की स्थापना कर दी और पूजा-अर्चना करने लगे,  लेकिन बेला पंचायत के लोगों का कहना था कि शिवलिंग उनके इलाके से मिला है. इस वजह से उस पर उन लोगों का हक है.

इसी को लेकर पिछले दो माह से भारी विवाद चल रहा था. बेला पंचायत के ग्रामीण धरना, प्रदर्शन व अनशन के जरिये शिवलिंग को वापस पाना चाह रहे थे. मामला सुलझता नहीं देख पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने शिवलिंग को जब्त करने की रणनीति बनाई थी. इसी वजह से बुधवार की रात बड़ी संख्या में पुलिस जवानों के साथ अधिकारी खोजपुर गांव के शिव मंदिर पहुंचे थे.

जानकारी के मुताबिक पुलिस अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में जवान खोजपुर गांव पहुंचे थे, ये लोग शिवलिंग को उखाड़ लेना चाह रहे थे. इसी बीच शुरू हुए विवाद में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि दस से ज्यादा लोग घायल हो गये. मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों को विरोध की वजह से भागना पड़ा. इसके बाद गुस्साये ग्रामीणों ने जेसीबी समेत पुलिस की पांच गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था.

ग्रामीण के गुस्से को देखते हुये लगभग दस घंटे तक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं गए. बाद में डीएम व एसपी की मध्यस्थता के बाद स्थिति में सुधार हुआ और शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया. मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है. ग्रामीणों में आक्रोश है. बुधवार की रात विवाद के दौरान फायरिंग व जमकर पथराव हुआ था. अब इस मामले में पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है.

 

JPSC में निकली बंपर भर्तियां, जल्द करें आवेदन

झारखंड में सरकारी नौकरी की चाह रखने वालों के लिए सुनहरा अवसर है. झारखंड लोक सेवा आयोग  में इस बार अच्छी खासी भर्तियां  निकली हैं. बता दें की जेपीएससी ने 396 नॉन टीचिंग स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर पदों की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है.

इस भर्ती के लिए योग्‍य उम्‍मीदवार 3 जुलाई 2017 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते है. अधिक जानकारी के लिए नीचे जानकारी और जेपीएससी का लिंक दिया गया है उस पर क्लिक कर पूरी जानकारी पढ़ लें।

कुल पद- 396 पद

पद का नाम- नॉन टीचिंग स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर

इस पदों पर भर्ती निकली है.

1- मनोचिकित्सक – 06 पद

2- ऑपथलमोलोजिस्‍ट – 22 पद

3- बाल रोग विशेषज्ञ – 230 पद

4- आर्थोपीडिशियन – 18 पद

5- ई.एन.टी विशेषज्ञ – 20 पद

6- रेडियोलॉजिस्ट – 32 पद

7- फोरेंसिक विशेषज्ञ – 22 पद

8- त्वचा विशेषज्ञ – 23 पद

9- रोग विज्ञानी – 23 पद

योग्‍यता – पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री प्रासंगिक अनुशासन में या डिप्लोमा एमडी / एमएस / डीएनबी या समकक्ष डिग्री एमसीएस/डीएम के साथ.

आयु सीमा – 25 से 40 साल रखी गई है.

वेतन – 9300-34,800 रूपये प्रति माह व ग्रेड पे 4200

चयन प्रक्रिया – चयन लिखित परीक्षा और पर्सनल इंटरव्‍यू के आधार पर होगा.

ऐसे करें आवेदन – उम्मीदवार अपना ऑनलाइन आवेदन 23 जून 2017 से 13 जुलाई 2017 तक वेबसाइट http://www.jpsc.gov.in  से कर सकते हैं.

 

तैयार है ‘दबंग 3’ की स्क्रिप्टः सलमान

Dabang मुंबई। सलमान खान अगले कई सालों तक फिल्मों में व्यस्त हैं. ऐसी रिपोर्ट्स आरही है कि वह साल 2019 के बाद ही कोई नई फिल्म साइन करेंगे. उनकी आने वाली फिल्मों में ‘टाइगर ज़िंदा है’, बहन अलवीरा और अतुल अग्निहोत्री की ‘भारत”दबंग 3’ और रेमो डिसूजा की एक अनाम फिल्म शामिल है. हाल ही में मीडिया से बात करते हुए सलमान ने कहा है की ‘दबंग 3’ की स्क्रिप्ट तैयार है. अतुल और अलवीरा की फिल्म ‘भारत’ की शूटिंग के दौरान ही कभी भी इसकी शूटिंग शुरू की जा सकती है भारत का डायरेक्शन अली अब्बास ज़फर कर रहे हैं. इस फिल्म की शूटिंग रेमो की फिल्म के बाद शुरू होगी.इस दौरान अतुल की फिल्म को अभी कुछ और समय की जरूरत है. इसलिए इसी बीच में ‘दबंग 3’ की शूटिंग पूरी कर लूंगा. फिल्म की स्टोरी के बारे में बात करते हुए सलमान ने कहा, ‘इस फिल्म में पहलेऔर दूसरे पार्ट से पहले चुलबुल पांडे की ज़िंदगी के बारे में बताया जाएगा. दबंग 3 में बताया जाएगा कि कैसे चुलबुल पांडे वास्तव में चुलबुल पांडे बना. बाकी का भाग चुलबुल पांडे की अभी की ज़िंदगी के बारे में होगा.’ हालांकि सलमान ने यह साफ किया कि ‘दबंग 3’ का डायरेक्शन अरबाज़ नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, ‘इससे उनके ऊपर काफी भार आ जाता है. इसलिए इस बार वह फिल्म को प्रड्यूस करेंगे.’ गौरतलब है कि सलमान की हालिया रिलीज़ फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ उनकी पहले की फिल्मों की तरह दर्शकों पर जादू नहीं चला सकी है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि कटरीना के साथ उनकी अगली फिल्म ‘टाइगर ज़िंदा है’ एक बार फिर सलमान की एक सुपरहिट फिल्म साबित होगी.

17 साल बाद परदे पर अनिल-ऐश्वर्या की जोड़ी

मुम्बई। बॉलीवुड की खूबसूरत हीरोइन ऐश्वर्या राय बच्चन परदे पर फिर से छाने के लिए तैयार हैं. करण जौहर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में ऐश्वर्या ने बोल्ड किरदार निभाकर जता दिया है कि उनका जमाना अभी तक खत्म नहीं हुआ है.

इस बार उनकी वापसी हो रही है मशहूर अभिनेता अनिल कपूर के साथ. यह वापसी एक लंबे अरसे के बाद हो रही है. इसलिए लोगों की नजर आने वाली फिल्म पर जरुर रहेगी. ऐश्वर्या फिल्म ‘ताल’ और हमारा ‘दिल आपके पास है’ में अनिल कपूर के साथ काम कर चुकी हैं. अब यह जोड़ी फिल्म ‘फन्ने खां’ में दिखाई देगी.

ऐश्वर्या इस फिल्म में एक नए लुक में नजर आएंगी. वह एक सिंगर का किरदार निभाएंगी और बेहद स्टाइलिश रेट्रो लुक में नजर आएंगी. इस फिल्म से ऐश अपना सिंगिंग डेब्यू भी कर सकती हैं. खबरों के मुताबित इस फिल्म में ऐश्वर्या अपनी आवाज में भी गा सकती हैं.

इस म्यूजिकल ड्रामा में ऐश्वर्या एक बार फिर अपने डेढ़ दशक पुराने को-स्टार अनिल कपूर के साथ नजर आएंगी. अनिल और ऐश ने 17 साल पहले सतीश कौशिक की फिल्म ‘हमारा दिल आपके पास है’  में पहली बार एक-दूसरे के साथ काम किया था और उसके बाद ये दोनों सुभाष घई की रोमांटिक ट्राएंगल वाली हिट म्यूजिकल फिल्म ‘ताल’ में फिर से साथ नजर आए थे. इन दोनों के साथ आने वाली फिल्म ‘फन्ने खां’ को फिल्मकार ‘राकेश ओमप्रकाश मेहरा’ प्रोड्यूस कर रहे हैं.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

3ODI: भारत ने वेस्टइंडीज को 93 रन से हराया

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टीम इंडिया के तूफानी बल्लेबाज महेन्द्र सिंह धोनी और गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत  भारत ने शुक्रवार को खेले गए तीसरे वनडे में वेस्टइंडीज को 93 रन से हराकर पांच मैचों की वनडे सीरीज में 2-0 की बढ़त हासिल कर ली है.

भारत ने पहले बैटिंग करते हुए 50 ओवर में 4 विकेट पर 251 रन बनाए. जिनमें भारत के लिए धोनी (79 गेंदों में 78 रन) और रहाणे (112 गेंदों में 72 रन) ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं, जबकि केदार जाधव ने 26 गेंदों में 40 रन की तेज पारी खेली. इसके जवाब में वेस्टइंडीज की पूरी टीम 38.1 ओवरों में ही 158 रन पर सिमट गई और भारत ने 93 रन से बड़ी जीत दर्ज की. भारत के लिए कुलदीप यादव और अश्विन ने 3-3 और हार्दिक पंड्या ने 2 विकेट लिए.

बता दें की पांचवें विकेट के लिए धोनी और जाधव ने धुआंधर साझेदारी की और महज 46 गेंदों में 81 रन जोड़ दिए. धोनी ने 79 गेंदों में 4 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 78 रन और जाधव ने 26 गेंदों में 4 चौकों और 1 छक्के की मदद से 40 रन की नाबाद पारी खेली.

इसके जवाब में कुलदीप यादव (41/3) , अश्विन (28/3) और पंड्या (32/2) की शानदार गेंदबाजी से वेस्टइंडीज की टीम 38.1 ओवरों में 158 रन पर सिमट गई. वेस्टइंडीज के लिए जेसन मोहम्मद ने सबसे अधिक 40 रन, कीरोन पावेल ने 30 रन और साई होप ने 24 रन की पारी खेली. लेकिन इनके अलावा और कोई भी बल्लेबाज टिक नहीं सका और पूरी टीम 158 रन पर सिमट गई और भारत ने 93 रन से मैच जीतते हुए सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली. लगातार दो मैच जीतने के बाद भारत के सीरीज जीतने के चांस काफी प्रबल हो गये हैं.

 

कोलकाता प्रेसिडेंसी में अध्यापक ने लगाया जातीय शोषण का आरोप

presidency college

अनिल पुष्कर कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में पढ़ाते हैं. पुष्कर पर वहां के छात्रों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी थी, लेकिन वहां उन्हीं का भविष्य खतरे में पड़ गया है. अनिल पुष्कर का आरोप है कि कोलकाता प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय में चयन के बाद से ही उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा जा रहा है. कारण यह रहा कि हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्षा अपने जानकार को नियुक्त कराना चाहती थीं, परन्तु सेलेक्शन बोर्ड द्वारा अनिल पुष्कर का चयन हुआ. आऱोप है कि तब से ही विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर मजूमदार जो सामाजिक विज्ञान फैकल्टी की डीन भी हैं अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान करने लगी.

आखिरकार अनिल और उनके साथ के और असिस्टेंट प्रोफेसर को विश्वविद्यालय की ओर से 21 अप्रैल 2017 को डिस्चार्ज लैटर ‘अनसैटिसफाइड परफार्मेंस’ टिप्पणी के साथ थमा दिया गया. उससे पूर्व उन्हें नियनानुसार कोई नोटिस नहीं दिया गया. स्थिति इससे और स्पष्ट हो जाती है, जब उनकी नियुक्ति को लेकर फर्जी केस भी सामने आया. कोई आधारभूत तथ्य न होने पर वह कोर्ट द्वारा ख़ारिज कर दिया गया. उसके बाद प्रशासन द्वारा SC और OBC शिक्षकों के निष्कासन के में अपनाई गई अलोकतांत्रिक प्रक्रिया कई प्रश्न खड़े करती है.

प्रथम दृष्टया यह जातिवादी मामला है. हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्षा तथा अन्य जातिवादी शिक्षकों द्वारा अनिल पुष्कर पर जातिवादी हमले होते रहे थे. शुरुआती दिनों में जब अनिल ने जॉब ज्वाइन किया तो उन्होंने घर जाने के लिए प्रार्थना पत्र लिखित रूप में दिया, ताकि वह घर जाकर अपना सामान ला सकें. विभाग में छुट्टी देते हुए यह विश्वास दिलाया गया कि अगर वीसी के कुछ कहने पर विभागध्यक्ष देख लेंगी, परन्तु जब वे एक सप्ताह बाद लौटकर आये तो पता चला कि वीसी नाराज इस बात पर थी कि न्यू फैकल्टी छुट्टी पर कैसे चला गया. उसके बाद ऑनलाइन लीव एप्लीकेशन सिखाने के नाम पर उनकी छुट्टियां काट ली गईं, जबकि अन्य लोगों की छुट्टियां मैनेज हो रही थीं.

अनिल कहते हैं कि प्रताड़ना के कई तरीके थे. मसलन विभागीय बैठकों की सूचनाएं नहीं देना. हर वक्त मानसिक रूप से प्रताड़ित करना. विभागीय साप्ताहिक सेमिनारों में भी ज्ञान के वर्चस्व तथा जाति से अनिल को दो-चार होना पड़ा. सवाल न करने देना. उदहारण के लिए एक ‘समकालीन मणिपुरी कविता’ पर एक सेमीनार में विभागाध्यक्षा के लेक्चर के बाद उनके ही आग्रह पर अनिल ने जब टिप्पणी की तो उन्हें आन्दोलनकारी बताते हुए अपमानित किया गया. ऐसे अनेक उदाहरण हैं. अनिल कहते हैं, ‘मुझे यह अहसास होने लगा था कि अनुसूचित जाति से आने के कारण मेरी प्रतिभा इनके जाति- अभिजात्यपन पर भारी पड़ रही रही थी.’ प्रेसीडेंसी कॉलेज के हिन्दी विभाग के भीतर जाति का सवाल बहुत बड़ा है. अनिल के उच्च शिक्षित होने के बावजूद हिन्दी विभाग का ब्राह्मण समूह उन्हें निचले दर्जे का समझता रहा. अतः ऐसे कई मौके आये जब अनिल प्रताड़ित हुए. अनिल बताते हैं कि ‘हद तो तब हो गयी जब विभागाध्यक्षा द्वारा कहा गया कि दलितों की पैदाइश तो शायद उन नाजायज संबंधों से हुई हैं जब उच्च कुल के पुरूषों द्वारा निचली जाति की महिलाओं के साथ जबरन शारीरिक संबंध कायम किये गये. तब मैं इनकी समझ और सोच पर आश्चर्यचकित था.’

अनिल के अकादमिक क्रेडिट को भी विभाग में नकारा जाने लगा. नैक के समक्ष उनके अकादमिक काम को मानने से इनकार कर दिया गया. अनिल के ऑनलाइन और प्रिंट मिडिया में छपे हुए कई लेखों को उन्होंने यह कहते हुए खारिज किया कि इनमें से एक भी आर्टिकल लिटररी और रिसर्च आर्टिकल नहीं है जबकि उसके ही समक्ष सीनियर शिक्षकों के सामान्य से लेखों को नैक में शामिल किया गया था. इसके साथ ही परीक्षा के समय अनिल पुष्कर द्वारा बनाये गए प्रश्न पत्र को पूरी तरह से बदल देना जो केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है, या उन्हें परेशान करने के नित्य नये तरीके इजाद करना, तथा बच्चों को लिखित शिकायत करनी के लिए मानसिक दबाव बनाना आदि प्रताड़ना की लम्बी फेहरिश्त है.

अनिल कहते हैं, ‘2016 की तमाम घटनाओं के बाद 2017 की जितनी भी कक्षाएं ली हैं, उनमें से अधिकांश के रिकार्डिंग्स मौजूद हैं, जबकि अन्य सीनियर अध्यापकों से पूछा जाना चाहिए कि उनकी कितनी कक्षाओं की रिकार्डिंग मौजूद हैं.’ वे यह भी कहते हैं कि ‘छात्रों में भी यह सन्देश आ चुका था कि विभागाध्यक्ष मेरे खिलाफ कोई साजिश कर रही हैं इसलिए वे अनिल की हर क्लास की रिकार्डिंग करने लगे थे.

विभागध्यक्ष के कारनामे कई हैं. मसलन, कई बार अनिल को बुलाकर कहना कि लेक्चर अच्छा देते हो लेकिन केवल लेक्चर देने से काम नहीं चलेगा तुम नोट्स भी लिखवाओ जबकि छात्रों के पास पहले ही हैण्डराइटिंग में नोट्स मौजूद होते थे. अनिल पुष्कर द्वारा लिए गये असाइनमेंट को खारिज करना और छात्रों को टॉर्चर करने के लिए दुबारा लिखित परीक्षा लेना. या विद्यार्थियों पर दवाब बनाना कि अनिल के खिलाफ शिकायत करें. लेकिन विद्यार्थियों ने अनिल और उनके साथ निष्कासित अन्य शिक्षकों का साथ दिया. विश्वविद्यालय से निष्कासन के बाद छात्र आशंकित और आक्रोश में थे, उन्होंने एकजुट होकर प्रशासन के सामने इस फैसले का विरोध किया, जिसकी ख़बरें अखबारों में दर्ज हैं. अनिल और उनके साथी प्राध्यापक का एक महिला विभागाध्यक्ष द्वारा जाति-उत्पीड़न सवाल खड़ा करता है कि आखिर एक शोषित समूह को दूसरे शोषित समूह का उत्पीड़न करने में आखिर क्या सुख मिलता है. अंततः शोषण की संस्कृति ही पुष्ट होती है.

लेखिका सामाजिक कार्यकर्ता हैं. संपर्क: dimpledu1988@gmail.com

बहुजन छात्र को सशक्त करने के लिए होगा बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर सम्मेलन

 Programme on Ambedkar

मऊ। डॉ. भीमराव अम्बेडकर युवा कल्याण समिति के द्वारा बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर युवा छात्र सम्मेलन एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. यह आयोजन दो जुलाई को मऊ नगर पालिका कम्यूनिटी हॉल में सुबह 10 बजे किया जाएगा. सम्मेलन एवं संगोष्ठी का विषय ‘वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में युवाओं की भूमिका’ है.

इस कार्यक्रम में यूपी के पूर्व केबिनेट मंत्री दद्दू प्रसाद, विशिष्ट अतिथि एमपी अहिरवार समेत कई अन्य वक्ता भाग लेंगे, इसमें कई मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी. इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में समता सैनिक दल के अध्यक्ष बी.डी. सुजात और वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसर अपना वक्तव्य देंगे. कार्यक्रम के संयोजक प्रवीण कुमार एडवोकेट है.

संयोजक प्रवीण कुमार एडवोकेट ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन देश के विभिन्न शहरो के विश्वविद्यालय और कॉलेजों में आयोजित कराए जाएंगे. बहुजन समाज के छात्रों की ये पहल राष्ट्रीय स्तर पर बहुजन छात्रों को सशक्त करना है. इसमें बहुजन छात्रों के राजनितिक सूझ-बुझ व रणनीति के साथ ही भविष्य की योजनाओं पर मंथन कर आगे की दिशा और दशा तय की जायेगी.

गाय की खाल निकालना सही तो गोमांस खाना गलत कैसे :चेतन भगत

मुबंई। झारखंड में 29 जून को गौ मांस ले जाने के शक में एक मुस्लिम शख्स की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. लगातार हो रही घटना से आहत हो कर मशहूर लेखक चेतन भगत ने तथाकथित गोरक्षकों पर अपनी बात रखी है और सवाल उठाया है. चेतन भगत ने उन लोगों से पूछा है कि क्या वे लोग अपनी जान भी लेंगे, क्योंकि वे भी तो गाय के चमड़े से बने जूते पहनते हैं.

दरअसल गुरुवार को प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से कहा कि गोरक्षा के नाम पर जो हिंसा हो रही है वह पूर्णत गलत है और ऐसा करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा. प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कुछ घंटों के अंदर ही झारखंड के रामगढ़ जिले में अलीमुद्दीन नाम के व्यक्ति को अपनी मारुती वैन में बीफ ले जाने के शक में भीड़ी ने पीट-पीट कर मार डाला.

पुलिस के मुताबिक अलीमुद्दीन उर्फ असगर अंसारी एक मारुति वैन में ‘प्रतिबंधित मांस’ ले जा रहा था. सूत्रों ने कहा कि लोगों के एक समूह ने बाजरटांड गांव में उसे रोका और उस पर बेरहमी से हमला किया. उसकी वैन को आग के हवाले कर दिया गया. पुलिसकर्मियों ने उसे भीड़ से बचाया और अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

इस घटना पर चेतन भगत ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया. चेतन भगत ने अपने ट्वीट में लिखा- क्या बीफ के नाम पर किसी की भी जान ले लेने वाले खुद की भी जान लेंगे, क्योंकि वो भी तो गाय के चमड़े के बने जूते पहनते हैं. या ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि गाय की खाल उधेड़ना तो ठीक है लेकिन उसका मांस खाना गलत.

आपको बता दें कि झारखंड की इस घटना से पूरे देश में आक्रोश का माहौल है. गौ रक्षा के नाम पर बार-बार हो रही घटनाओं से देश का बड़ा तबका आहत है जो देश में असुरक्षा को माहौल महसूस कर रहा है. विपक्षी पार्टियों का कहना है की भाजपा सरकार जब से बनी है तब से देश में अराजकता का माहौल है.

 इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

…वहां भी तुम पहचानोगे मुझे मेरी जाति से ही

Om Parakash Valmiki दलित साहित्यकारों के प्रतिनिधि सरोकारों में से एक रहे ओमप्रकाश वाल्मीकि की आज जंयती (30 जून 1950) है. ओमप्रकाश वाल्मीकि की दलित साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ओमप्रकाश वाल्मीकि का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बरला गांव में एक अछूत वाल्‍मीकि परिवार में हुआ था. जिसके बाद उन्होंने अपनी शिक्षा अपने मूल गांव और देहरादून (अब उत्तराखंड) से प्राप्त की. वाल्मीकि का बचपन कठिन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के बीच गुजरा. आरंभिक जीवन में उन्हें जो आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कष्ट झेलने पड़े उसकी उनके साहित्य में मुखर अभिव्यक्ति हुई है. वाल्मीकि कुछ समय तक महाराष्ट्र में रहे जहां वे दलित लेखकों के संपर्क में आए और उनकी प्रेरणा से डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर की रचनाओं का अध्ययन करने लगे. बाबा साहेब की रचनाओं का अध्ययन करने से उनकी रचना-दृष्टि में बुनियादी परिवर्तन हुआ. वे देहरादून स्थित आर्डिनेंस फॅक्टरी में एक अधिकारी के रूप में काम करते हुए अपने पद से सेवानिवृत्‍त हो गए. वाल्मीकि के अनुसार दलितों द्वारा लिखा जाने वाला साहित्य ही दलित साहित्य है. उनकी मान्यतानुसार दलित ही दलित की पीडा़ को बेहतर ढंग से समझ सकता है और वही उस अनुभव की प्रामाणिक अभिव्यक्ति कर सकता है. इस आशय की पुष्टि के तौर पर रचित अपनी आत्मकथा ”जूठन” में उन्होंने वंचित वर्ग की समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट किया है. ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अस्सी के दशक से लिखना शुरू किया, लेकिन साहित्य के क्षेत्र में वे चर्चित और स्थापित हुए 1997 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा “जूठन” से. इस आत्मकथा से पता चलता है कि किस तरह वीभत्स उत्पीड़न के बीच एक दलित रचनाकार की चेतना का निर्माण और विकास होता है. किस तरह लंबे समय से भारतीय समाज-व्यवस्था में सबसे निचले पायदान पर खड़ी “चूहड़ा” जाति का एक बालक ओमप्रकाश सवर्णों से मिली चोटों-कचोटों के बीच परिस्थितियों से संघर्ष करता हुआ दलित आंदोलन का क्रांतिकारी योद्धा ओमप्रकाश वाल्मीकि बनता है. दरअसल, यह दलित चेतना के निर्माण का दहकता हुआ दस्तावेज है.

सदियों का संताप —————- दोस्तो, बिता दिए हमने हजारों वर्ष इस इंतजार में कि भयानक त्रासदी का युग अधबनी इमारत के मलबे में दबा दिया जाएगा किसी दिन जहरीले पंजों समेत फिर हम सब एक जगह खड़े होकर हथेलियों पर उतार सकेंगे एक-एक सूर्य जो हमारी रक्‍त शिराओं में हजारों परमाणु क्षमताओं की ऊर्जा समाहित करके धरती को अभिशाप से मुक्‍त कराएगा!

इसीलिए, हमने अपनी समूची घृणा को पारदर्शी पत्‍तों में लपेटकर ठूंठे वृक्ष की नंगी टहनियों पर टांग दिया है ताकि आने वाले समय में ताजे लहू से महकती सड़कों पर नंगे पांव दौडते सख्‍त चेहरों वाले सांवले बच्चे देख सकें कर सकें प्यार दुश्मनों के बच्चों से अतीत की गहनतम पीड़ा को भूलकर

हमने अपनी उंगलियों के किनारों पर दुःस्वप्न की आंच को असंख्य बार सहा है ताजा चुभी फांस की तरह और अपने ही घरों में संकीर्ण पतली गलियों में कुनमुनाती गंदगी से टखनों तक सने पांव में सुना है दहाड़ती आवाजों को किसी चीख की मानिंद जो हमारे हृदय से मस्तिष्‍क तक का सफर तय करने में थक कर सो गई है

दोस्तो, इस चीख को जगाकर पूछो कि अभी और कितने दिन इसी तरह गुमसुम रहकर सदियों का संताप सहना है

वाल्मीकि विभिन्न विधाओं में अपना लेखन कार्य किया जिसमें कविता, कहानी, आत्मकथा, आलोचना, दलित साहित्य, नाटक, अनुवाद आदि शामिल हैं. उनका कविता संग्रह ”सदियों के संताप, बस बहुत हो चुका, अब और नहीं, शब्द झूठ नहीं बोलते काफी चर्चित हैं. जबकि उनके कहानी संग्रह सलाम, घुसपैठिए, अम्मा एंड अदर स्टोरीज, छतरी काफी प्रसिद्ध हैं. उनका आत्मकथा लेखन ”जूठन” भी काफी पढ़ा जाता है. यह अनेक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है. जबकि आलोचनात्मक लेखन की ओर देखें तो दलित साहित्य का सौंदर्य शास्त्र, मुख्यधारा और दलित साहित्य, सफाई देवता काफी चर्चित हैं. उनकी पुस्तक दलित साहित्य: अनुभव, संघर्ष एवं यथार्थ (2013) राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित हुई है. जबकि नाटक दो चेहरे काफी पढ़ी जाती है. इसके अलावा ओमप्रकाश वाल्मीकि ने 60 से अधिक नाटकों में अभिनय, मंचन एवं निर्देशन, अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सेमीनारों में भागीदारी भी निभाई. ओमप्रकाश वाल्मीकि ने कई पुस्तकों का कई भाषाओं में भी अनुवाद किया जिनमें अरुण काले की सायरन का शहर कविता संग्रह का मराठी से हिंदी में अनुवाद, कांचा एलैया की पुस्तक (मैं हिंदू क्यों नहीं) का अनुवाद, लोकनाथ यशवंत की मराठी कविताओं का हिंदी अनुवाद आदि शामिल हैं. ओमप्रकाश वाल्मीकि अपनी जीवन यात्रा के दौरान कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित भी हुए. साल 1993 में डॉ॰ अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार, 1995 में परिवेश सम्मान, 2004 में न्यू इंडिया बुक पुरस्कार, 2001 में कथाक्रम सम्मान, 8वां विश्व हिंदी सम्मलेन 2006 न्यूयोर्क, अमेरिका सम्मान और साहित्यभूषण पुरस्कार (2008-2009) आदि शामिल हैं.

ठाकुर का कुआं ————– चूल्‍हा मिट्टी का मिट्टी तालाब की तालाब ठाकुर का । भूख रोटी की रोटी बाजरे की बाजरा खेत का खेत ठाकुर का । बैल ठाकुर का हल ठाकुर का हल की मूठ पर हथेली अपनी फ़सल ठाकुर की । कुआँ ठाकुर का पानी ठाकुर का खेत-खलिहान ठाकुर के गली-मुहल्‍ले ठाकुर के फिर अपना क्‍या ? गाँव ? शहर ? देश ?

दलित साहित्य में ओमप्रकाश वाल्मीकि का स्थान सबसे ऊपर है. उनके लेखन में उनके जीवन का तीखापन और संघर्ष हमारे सामने साहित्य के रूप में उपस्थित है. उन्होंने अपनी कहानियों में एक ओर जहां ज्ञान और सत्ता के प्रतीक ब्राह्मणवाद और सामंतवाद पर आक्रमण करते हुए दलितों पर हो रहे शोषण, दमन और तिरस्कार का मार्मिक चित्रण किया है, वहीं दूसरी ओर कविताओं में वर्ण और जाति व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए परंपरागत मायाजाल को तोड़ने की कोशिश की है.

आज व हमारे बीच में भौतिक रूप से भले ही न रहे हो लेकिन वैचारिक रूप से वे साहित्य जगत में अमर हैं. उनकी कविता हिंदू धर्म की वर्ण-व्यवस्था के प्रति विरोध की भावना को व्यक्त करती है, जिसके अंतर्गत वे परंपरागत जातीय रूढ़ियों को तोड़ना चाहते हैं. ‘जाति’ नामक कविता की ये पंक्तियां आज भी प्रासंगिक है-

जाति —— स्वीकार्य नहीं मुझे जाना, मृत्यु के बाद तुम्हारे स्वर्ग में। वहां भी तुम पहचानोगे मुझे मेरी जाति से ही!

इस कविता के माध्यम से वे उन तमाम बंधनों से मुक्त होने की जिस आकांक्षा को रखते हैं, उससे सच में एक क्रांति की लहर फूटने वाली लगती है.

चंद्रेशखर की रिहाई के लिए भीम आर्मी महिला विंग ने किया भूख हड़ताल का ऐलान

सहारनपुर: भीम आर्मी अध्यक्ष चंद्रशेखर की रिहाई के लिए भीम आर्मी महिला विंग ने भूख हड़ताल का ऐलान कर दिया है. उन्होनें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर दलित समाज का उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए रावण और दलित समाज के अन्य युवकों की रिहाई की मांग को लेकर 5 जुलाई से भूख हड़ताल और जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी है.

भीम आर्मी की महिला विंग की सदस्या बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट पहुंचीं और मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन डीएम को सौंपा. पत्र में उन्होनें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर पक्षपात एवं दलितों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि सड़क दूधली में भाजपा नेताओं ने बिना अनुमति के बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की शोभायात्रा निकालकर दलितों और मुस्लिमों का टकराव कराया. इस मामले में नेताओं पर भी गैर जमानती वारंट जारी हुए, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाबद्ध तरीके से एक पक्षीय कार्रवाई की जा रही है. प्रशासन का दलितों के प्रति यही रवैया रहा और बेगुनाह पढ़े लिखे युवाओं को जल्द रिहा नहीं किया गया तो 5 जुलाई से दलित समाज भूख हड़ताल एवं जेल भरो आंदोलन करेगा.

 

भाई के कंधे पर बहन ने दम तोड़ा, चार बार फोन पर भी नहीं पंहुची एंबुलेंस  

मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं की सहायता के लिए दिन प्रतिदिन नई सेवाएं लागू तो करती है, लेकिन असल मायने में उसका फायदा महिलाओं को नहीं मिल पाता है. कल एक दर्दनाक घटना यूपी के मिर्जापुर जिले में हुई जहां 108  एंबुलेंस के समय से न पहुंचने की वजह से मिर्जापुर के मड़िहान सीएचसी के बाहर एक घंटे तक इंतजार के बाद महिला की मौत हो गई. जिसे लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है.

मिर्जापुर क्षेत्र के जुड़िया गांव निवासी मजदूर शिवकुमार की 23 वर्षीय पत्नी सबीतर की दोपहर तीन बजे अचानक तबीयत खराब हो गई थी. जिसके बाद उसे प्राथमिक उपचार केंद्र में भर्ती कराया गया. तबियत ज्यादा बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पातल रेफर कर दिया.

इस दौरान परिजनों ने महिला को जिला अस्पताल ले जाने के लिए लगभग चार बजे 108 एंबुलेंस पर फोन किया. लेकिन एंबुलेंस नहीं आई. अंत में सुविधा नहीं मिलने पर भाई अपनी बीमार बहन को पीठ पर बिठाकर अस्पताल के लिए रवाना हो गया. जहां आधे रास्ते में ही महिला की मौत हो गई.

   

अर्णव शर्मा बनें आईक्यू टेस्ट में नंबर वन, आइंस्टीन और हॉकिंग को छोड़ा पीछा

Arnav Sharma

लंदन। ब्रिटेन में 11 साल के भारतीय मूल के बच्‍चे ने मेन्सा आईक्यू टेस्ट में सर्वाधिक यानि 162 अंक प्राप्त किए हैं. विशेष बात यह है कि इस बच्चे ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग से भी दो अंक ज्‍यादा हासिल किए हैं.

दक्षिण इंग्लैंड में रीडिंग टाउन के अर्णव शर्मा ने बिना किसी खास तैयारी के ये कारनामा कर दिखाया है. उसने इससे पहले कभी ये टेस्ट नहीं दिया था.

द इंडिपेंडेंट की खबर के अनुसार टेस्ट में उसके अंकों ने उसे आईक्यू स्तर पर देश में अव्वल स्थान पर ला दिया है. इस पर अर्णव शर्मा का कहना है कि , ‘मेन्सा टेस्ट मुश्किल होता है और हर कोई इसे पास नहीं कर पाता. मुझे तो इसे पास करने की उम्मीद ही नहीं थी. मैंने ये टेस्ट दिया और इसमें करीब ढाई घंटे लगे. मैंने टेस्ट के लिए कोई तैयारी भी नहीं की थी लेकिन मैं घबरा नहीं रहा था. मेरा परिवार हैरान था, लेकिन वे बहुत खुश हुए जब मैंने उन्हें परिणाम के बारे में बताया’.

इस मौके पर अर्णव की मां मीशा धमिजा शर्मा ने कहा, ‘मैं सोच रही थी कि क्या चल रहा होगा क्योंकि उसने कभी देखा नहीं था कि यह पेपर कैसा होता है’.

अर्णव की मां ने ये भी बताया कि वो जब ढाई साल का था तो ही मैथ्स का कौशल उसमें दिखने लगा था. गौरतलब है कि अर्णव को गाने और डांस करने का भी शौक है.

बता दें कि मेन्सा को दुनिया की सबसे बड़ी और पुरानी उच्च आईक्यू सोसायटी माना जाता है. वैज्ञानिक एवं वकील लांसलॉट लियोनेल वेयर और ऑस्ट्रेलियाई बैरिस्टर रोलैंड बेरिल ने 1946 में ऑक्सफोर्ड में इसकी स्थापना की थी.

उत्तराखंडः सरकारी स्कूल भी होंगे ‘इंग्लिश मीडियम’

Representative School

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक बहुत ही अहम योजना बनाई है. इस योजना के अनुसार राज्य के करीब 18,000 सरकारी स्कूलों के बच्चे अब हिंदी की जगह इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई करेंगे. राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के अनुसार इस परियोजना को कई चरणों में लागू किया जाएगा. इसकी शुरुआत साल 2018-19 शिक्षा सत्र से होगी, जिसमें सबसे पहले क्लास 1 के बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाया जाएगा.

उन्होंने बताया कि अगले साल से क्लास 1 के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाया जाएगा. जिसके बाद धीर-धीरे सभी कक्षाओं में इंग्लिश मीडियम की शुरुआत की जाएगी. सरकारी स्कूलों में इंग्लिश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.

पांडे ने बताया कि सरकारी स्कूलों को हाल ही में अंग्रेजी के 75 सामान्य वाक्य भेजे गए हैं, जिसे उन्हें रोजाना की क्लास रूटीन में शामिल करना अनिवार्य होगा. उनका कहना है कि जब बच्चे छोटे वाक्य और शब्द बोलना सीख जाएंगे तो उनके लिए कठिन वाक्य समझना भी आसान हो जाएगा. इस तरह से बाद में पढ़ाई का माध्यम आसानी से बदला जा सकेगा. इस पहल को लेकर स्कूलों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है.

साउथ अफ्रीका दौरे के लिए भारतीय A टीम की घोषणा

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नई दिल्ली। BCCI ने साउथ अफ्रीका दौरे के लिए भारतीय A टीम की घोषणा कर दी. दौरे की शुरुआत भारतीय टीम वनडे ट्रायंग्युलर सीरीज से करेगी जिसमें तीसरी टीम ऑस्ट्रेलिया की होगी. इसके बाद टीम साउथ अफ्रीका के खिलाफ दो चार दिवसीय मुकाबले खेलेगी. वनडे टीम का कैप्टन मनीष पांडे को बनाया गया है जबकि टेस्ट टीम की अगुआई करुण नायर करेंगे. 26 जुलाई को ग्रोनक्लोफ पर ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ वनडे मैच से भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत करेगी.

सिलेक्टर्स ने वनडे टीम का सिलेक्शन IPL और विजय हजारे ट्रोफी में प्लेयर्स के परफॉर्मेंस को ध्यान में रखते हुए किया है. सिद्धार्थ कौल, क्रुणाल पंड्या, ऋषभ पंत, बासिल थम्पी और मोहम्मद शिराज को IPL के अपने परफॉर्मेंस का इनाम मिला है. इसी तरह टेस्ट टीम के लिए रणजी ट्राफी को आधार बनाया गया है. हालांकि ऋषभ पंत के लिए यह रणजी सीजन भी शानदार रहा था लेकिन उन्हें केवल वनडे टीम में जगह दी गई है.

वनडे टीम: मनदीप सिंह, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन, मनीष पांडे (कैप्टन), दीपक हुड्डा, करुण नायर, क्रुणाल पंड्या, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), विजय शंकर, अक्षर पटेल, युजवेंद्र चहल, जयंत यादव, बासिल थम्पी, मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर और सिद्धार्थ कौल

टेस्ट टीम: प्रियांक पंचाल, अभिनव मुकुंद, श्रेयस अय्यर, अंकित बावने, करुण नायर (कैप्टन), सुदीप चटर्जी, ईशान किशन (विकेटकीपर), हनुमा विहारी, जयंत यादव, शाहबाज नदीम, नवदीप सैनी, मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर, अनिकेत चौधरी और अंकित राजपूत.

 

करीबी रिश्तेदारों के होने पर ही मिलेगी अमेरिका में एंट्री

Donald Trump

वॉशिंगटन। अमेरिका ने 6 मुस्लिम देशों के लोगों और शरणार्थियों को वीजा देने के लिए नए नियम बना दिए हैं. नई नियमों के अनुसार इन देशों के वीजा आवेदक या शरणार्थियों का अमेरिका में पारिवारिक और व्यावसायिक संबंध होना अनिवार्य है. ये शर्त पूरी होने पर ही उन्हें वीजा जारी किया जा सकेगा. ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने रियायत तब दी है, जब सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक तौर पर ट्रम्प के ट्रैवल बैन के आदेश को बहाल कर दिया है.

अमेरिकी एम्बेसी और कॉन्सुलेट को भेजे गए नए नियमों के अनुसार ट्रैवल बैन के दायरे में आने वाले 6 मुस्लिम देशों के लोगों को अमेरिका में पहले से रह रहे अपने रिश्तेदारों के साथ संबंध के सबूत देने अनिवार्य होंगे. वीजा के लिए वो अमेरिका में रह रहे अपने माता-पिता, बच्चों, पति, दामाद, बहू या भाई-बहन जैसे करीबी रिश्तेदारों के साथ ही संबंधों का सबूत दे सकते हैं. नए मानदंडों में ग्रैंड पेरेंट्स, पोते-पोती, चाचा-चाची, भतीजा-भतीजी, ननद, देवर और मंगेतर जैसे अन्य परिवार के सदस्यों को करीबी रिश्तेदार में शामिल नहीं किया गया है.

गौरतलब है कि ट्रम्प के 6 मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक तौर पर बहाल कर दिया था. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में तय की है. कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को पलटते हुए कहा था कि यह आदेश 6 देशों को उन नागरिकों पर लागू होगा, जिनका अमेरिका में किसी शख्स से कोई संबंध नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि इस प्रतिबंध का जिनके करीबी रिश्तेदार अमेरिका में रह रहे हैं, उन पर या फिर अमेरिकी संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर कोई असर नहीं होगा.

ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद चुनावी वादे के मुताबिक 27 जनवरी को 7 मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन लगाने वाला एग्जीक्यूटिव ऑर्डर सामने आया था ऑर्डर के तहत इराक, लीबिया, ईरान, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के लोगों समेत सभी शरणार्थियों का अमेरिका में प्रवेश रोक दिया गया था. ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का कहना था कि इससे अमेरिका सुरक्षित बनेगा और देश में आतंकी हमलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. निचली अदालत और उसके बाद दो अपीलीय अदालत ने ट्रम्प के ट्रैवल बैन के इस आदेश को गैरसंवैधानिक करार देते हुए इस पर रोक लगा दी थी.

6 मार्च को ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें 7 की जगह 6 देश लीबिया, ईरान, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन को इस दायरे में लाया गया. इन देशों के लोगों पर 90 दिन तक यूएस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था. इसके अलावा 120 दिन तक शरणार्थियों के आने पर भी पाबंदी लगाई गई थी.

लखनऊ में खुला पहला ‘फूड एटीएम’, रोज मुफ्त मिलेगा खाना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ‘फूड एटीएम’ नाम की शानदार पहल शुरू हुई है. यह एटीएम आम जनता के लिए फ्री में खाना उपलब्ध कराऐगा. इसकी शुरूआत लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र में रिट्ज् रेस्तरां के पास से की गयी है. इस एटीएम से कोई भी फ्री में खाना ले सकता है और कोई भी खाना दे सकता है. शहर की संस्था ‘राउंड टेबल इंडिया’ की ओर से बचे खाने को जरूरतमंदों को देने के लिए इसकी शुरुआत की गई है.

एक सप्ताह से ट्रायल के तौर पर चल रहे इस फूड एटीएम से रोजाना 30-40 लोग भूख मिटा रहे हैं. इस एटीएम को गुरुवार को स्थायी तौर पर खोल दिया गया. संस्था की योजना अगले एक महीने में 15 और ऐसे फूड एटीएम शुरू करने की है. इसके लिए कुछ और होटल और रेस्तरां से बात चल रही है.

फीडिंग लखनऊ कैंपेन चला रहे ‘राउंड टेबल इंडिया’ लखनऊ चैप्टर के कोषाध्यक्ष पीयूष अग्रवाल ने बताया की कई बार बड़े आयोजनों में बचे खाने की बर्बादी को देखकर मन में कुछ नया करने का विचार आया. हमने रिट्ज प्रबंधन से इस बारे में बात की तो वे हमारे प्रस्ताव पर राजी हो गए. गोमतीनगर स्थित रेस्त्ररां पर ट्रायल के लिए फूड एटीएम लगाया गया. जिसके ट्रांसपैरंट फ्रीजर में रेस्तरां का बचा खाना पैक करके रखा जायेगा. जल्द ही दूसरा एटीएम भी महानगर में लगाया जाएगा. इसमें रखे ट्रांसपैरंट पैकेटों पर एक्सपायरी डेट भी होगी. गौरतलब है की यह योजना सभी के लिए है इसलिए इसमें सभी का सहयोग बेहद जरूरी है इसके लिए कोई भी सहयोग कर सकता हैं.

सहयोग ‘राउंड टेबल इंडिया’ लखनऊ चैप्टर के कोषाध्यक्ष पीयूष अग्रवाल ने बताया कि इस अभियान में कोई भी शामिल हो सकता है. इस फूड एटीएम के पास 24 घंटे एक सुरक्षाकर्मी तैनात रहेगा. मदद के इच्छुक लोग उसे बचा खाना दे सकते हैं. इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि यह खाना बचा हुआ हो, न कि जूठा. रेस्तरां के किचेन में चेक किए जाने के बाद इसे एटीएम में रख दिया जाएगा. यही सुरक्षाकर्मी जरूरतमंदों को खाना भी देगा.

बता दें की विश्व खाद्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का हर सातवां व्यक्ति भूखा सोता है. विश्व भूख सूचकांक में भारत का 67वां स्थान है. देश में हर साल 25.1 करोड़ टन अनाज का उत्पादन होता है लेकिन हर चौथा भारतीय भूखा सोता है. ऐसे में आम लोगों द्वारा यह पहल बेहद सराहनीय है जिसका रिजल्ट सकारात्मक रहा तो इससे अन्य शहर और राज्य भी जरूर जुड़ेगें.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.