GST का देश में भारी विरोध, अब दिल्ली के व्यापारी भी सड़कों पर उतरे

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नई दिल्ली: पूरा देश में  1 जुलाई से देश में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू होने जा रहा है.लेकिन लागू होने से पहले इसका विरोध शुरू हो गया, अभी कुछ दिन पहले वाराणसी के साड़ी व्यापारियों ने विरोध प्रर्दशन किया था, उसके बाद राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश में भी इसका अच्छा खासा विरोध हुआ था. पर अब इस विरोध की रफ्तार दिल्ली तक आ पहुंची है. राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के बाद अब दिल्ली के चांदनी चौक में भी व्यापारी इसका जबदस्त विरोध कर रहे हैं.

गुरुवार की सुबह से ही दिल्ली के चांदनी चौक में व्यापारी जीएसटी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. चांदनी चौक में लाल किले के सामने व्यापारी वर्ग जीएसटी के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. व्यापारियों की भीड़ की वजह से चांदनी चौक में भारी जाम भी लग गया है.

वहीं GST को लेकर गुजरात के जामनगर में भी व्यापारी महामण्डल ने बंद का ऐलान किया था. जिसके बाद आज पूरा शहर बंद के समर्थन में खड़ा हुआ है. इतना ही व्यापारियों ने जीएसटी के विरोध में बाइक से रैलियां भी निकाली है.

वहीं राजस्थान के जयपुर में भी 30 जून से 3 जुलाई तक मंडियां भी बंद रहेंगी. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी साड़ी व्यापारियों ने जीएसटी के विरोध में प्रर्दशन किया था.

 

नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर भड़की मायावती

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने अपने पूर्व नेता और विधान परिषद सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी को लेकर उत्तर प्रदेश विधान परिषद अध्यक्ष के समक्ष एक याचिका दायर की है. जिसमें कहा गया है कि उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्यता से दिनांक 27 मई, 2017 से अयोग्य घोषित कर दिया जाए और सदस्य के रूप में मिल रही किसी भी सुविधा और भत्ता को बंद कर दिया जाए. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह सूचना दी.

सतीश चंद्र मिश्र ने बताया कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी के विरुद्ध बसपा के विधान परिषद नेता सुनील कुमार चित्तौड़ द्वारा विधान परिषद अध्यक्ष के समक्ष दल बदल कानून के तहत एक याचिका दी है. यह याचिका उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य (दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता) नियमावली, 1987 सपठित संविधान की दसवीं अनुसूची एवं अनुच्छेद 191(2), विपक्षी द्वारा स्वेच्छा से अपने मूल राजनैतिक दल की सदस्यता त्याग करने के संबंध में नियम-7 के अन्तर्गत दायर की गई है.

बहुजन समाज पार्टी कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी बहुजन समाज पार्टी की ओर से विधान परिषद के सदस्य के रूप में दिनांक 23 जनवरी, 2015 को निर्वाचित हुए थे. बहुजन समाज पार्टी उनका मूल राजनीतिक दल है. उन्होंने 27 मई 2017 को राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा नाम से अपना एक पृथक राजनीतिक दल बना लिया है.

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी का यह आचरण विधिक एवं संवैधानिक रूप से मूल राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ने की बात सिद्ध करता है. उनका यह कृत्य संविधान की दसवीं अनुसूची के विपरीत है अतः याचिका में प्रार्थना की गई है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी को संविधान की 10वीं अनुसूची सपठित 191(2) के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्यता से दिनांक 27 मई, 2017 से अयोग्य माना जाए.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार मिलने के करीब दो महीने बाद बसपा ने बड़े नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके बेटे अफजल सिद्दीकी को पार्टी से बाहर कर दिया था. बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे और उनके बेटे को बाहर करने का फैसला लिया था. इन दोनों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा था.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

यूपी: GST के फायदे बताने वाले  योगी के मंत्री, फुलफॉर्म तक नही बता पाये

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी लांच होने से पहले सभी मंत्रियों और बीजेपी सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र में जनता के बीच जाकर जीएसटी के फायदे बताने का फरमान दिया था. उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री रमापति शास्त्री जीएसटी के फायदे बताने के लिए महाराजगंज गए थे. इसके साथ ही वह यूपी सरकार के 100 दिन के काम का बखान भी करने वाले थे. लेकिन रमापति शास्त्री GST की फुल फॉर्म तक नहीं बता पाए.  गौरतलब है की जीएसटी की आसान सी फुल फॉर्म गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) है.

हाल ही में हुई कैबिनेट मीटिंग में नरेंद्र मोदी ने अपने मुख्यमंत्रियों, सांसदो से कहा था कि वह जीएसटी से जनता को टैक्स में होने वाले फायदों के बारे में बताएं. उन्होंने कहा था कि जीएसटी लागू होना एनडीए सरकार के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है.

गौरतलब है कि भाजपा की पढ़ी लिखी सांसद मीनाक्षी लेखी ढंग से स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत तक नहीं लिख पाईं. सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर खूब वायरल हो रही है जिसमें साफ दिख रहा है कि सांसद मीनाक्षी लेखी ने बोर्ड पर गलत तरीके से स्वच्छ और स्वस्थ लिखा है.

बीजेपी के मंत्री अपने हल्के ज्ञान को लेकर सोशल मीडिया पर खूब मजाक का पात्र बन रहे हैं. वे जनता को ज्ञान बांटने गये और खुद ही घिर गये.

 

दलितों के कार्यक्रम में खाना कुचलकर निकला ग्राम प्रधान

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कानपुर। संविधान में दिए गए सभी को समान अधिकार के बावजूद उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के एक गांव में दलितों पर अत्याचार का नया मामला सामने आया है, जोकि समाज में व्याप्त भेदभाव को दर्शाता है.

अत्याचार की यह घटना हमीरपुर में राठ कोतवाली के स्यावरी गांव की है. 26 जून की शाम तिजिया के घर में कुंआ पूजन का कार्यक्रम था. कार्यक्रम में सभी रिश्तेदार और गांव वाले मिलकर खुशियां मना रहे थे. उसी रात करीब 10 बजे जब सभी रिश्तेदार और ग्रामीण घर के बाहर दरवाजे पर खाने खाने बैठे, तभी ग्राम प्रधान खूबचंद्र अपने साथ बीरा गांव के निवासी गोपीचंद्र को लेकर अपनी चार पहिया वाहन से वहां आए और दरवाजे के बाहर खाना खा रहे लोगों का खाना रौंदकर चले गए. ग्राम प्रधान को इस पर भी संतुष्टि नहीं मिली, इसलिए ग्राम प्रधान 15 मिनट बाद दोबारा आया और फिर से खाना खा रहे लोगों का खाना कुचल कर निकल गया.

तिजिया और उसके पति ब्रजलाल ने जब प्रधान का विरोध किया तो वह सबके सामने उनकी बेइज्जती करते हुए उन्हें जाति सूचक गालियां देने लगा. जब दोनों ने प्रधान को गाली देने से रोकना चाहा तो प्रधान ने उनके साथ मारपीट शुरु कर दी. खाना खा रहा खूबचंद्र जब बचाने आया तो उसके ऊपर भी बंदूक तान दी और जान से मारने की धमकी देकर चले गए. पीड़िता ने बताया कि प्रधान गुंडा और आपराधिक प्रवृत्ति का है. इनके ऊपर पहले से संगीन धाराओं के मुकदमें चल रहे हैं.

नागमणि कुमार शर्मा की रिपोर्ट

जल्द आएंगें 200 के नोट, RBI ने शुरू की छपाई

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नई दिल्ली। सरकार के 1000 रुपये का नोट बंद करने के फैसले से लोगों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए अब 200 रुपये का नया नोट मार्केट में लाने की तैयारी की जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक ने 200 रुपये के नए नोटों की छपाई भी शुरू कर दी है.

200 के नए नोट को पहले जुलाई में जारी करने की बात चल रही थी. लेकिन फिलहाल इसमें कुछ देरी हो सकती है. आरबीआई ने एक अखबार को बताया कि कुछ हफ्ते पहले ही नए नोटों की छपाई शुरू करने के आदेश दे दिए गए हैं. इसके बाद सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में इन नोटों की छपाई शुरू कर दी गई है.

500 रुपये के 1650 करोड़ नोट हटाए जाने के बाद बड़ा अंतर गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल यानि 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया था. जिसके चलते 500 तथा 1000 रुपये के पुराने नोट को बंद करके 500 और 2000 के नए नोट लाए गए थे तथा 1000 रुपये के नोट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च के मुताबिक 8 नवंबर को नोटबंदी के वक्त देश में 500 रुपये के नोटों की संख्या 1,650 करोड़ थी. इन नोटों को हटाए जाने के बाद मार्केट में सर्कुलेट नोटों की संख्या में बड़ा अंतर आ गया था.

200 के नए नोट से छोटी करेंसी की समस्या होगी हल एसबीआई में ग्रुप चीफ इकॉनमिस्ट के तौर पर काम करने वाले सौम्या कांति घोष ने कहा कि ‘दैनिक लेन-देन के मकसद से 200 रुपये के नोट लाए जाने से कामकाज में आसानी होगी.’ उन्होंने कहा- ‘नोटबंदी में हटाए गए नोटों के एक हिस्से की भरपाई 2,000 रुपये के नोटों के जरिए हुई है. जबकि 500 रुपये के नोटों ने काफी हद तक इस कमी को पूरा करने का काम किया है. लेकिन यह काफी नहीं था.’ उन्होंने कहा कि 200 रुपये के नोटों को जारी किए जाने के बाद छोटी करंसी के संकट से राहत मिल सकेगी. जिसकी कमी लोग 500 रुपये के पुराने नोटों को बंद किए जाने के बाद से ही महसूस कर रहे हैं.

स्कूल ने रद्द किया 4 दलित छात्रों का दाखिला, बच्चों सहित धरने पर बैठे परिवार

Children with family on protest

मोरबी। गुजरात के मोरबी जिले में एक स्कूल ने चार दलित बच्चों को एडमिशन यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इन बच्चों का घर स्कूल से 6 किलोमीटर की दूरी पर है. स्कूल की इस मनमानी के खिलाफ इन दलित बच्चों के परिवारवाले जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर के बाहर पिछले डेढ़ महीने से धरना दे रहे हैं. बीते बुधवार (28 जून) को हाई कोर्ट ने इसे ‘कानून का मजाक’ बताते हुए मोरबी जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई और स्कूल का आदेश रद्द कर दिया.

इन बच्चों का एडमिशनसर्वोपरि स्कूल में पिछले साल शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत हुआ था. बताया जा रहा है कि स्कूल प्रशासन ने बच्चों का एडमिशन निरस्त करने के लिए उस नियम की आड़ ली जिसमें कहा गया है कि बच्चों का घर स्कूल से 3 किलोमीटर की दूरी पर होना चाहिए. लेकिन बच्चों के परिवारवालों ने बताया कि उनसे ट्रांसपॉर्टेशन फीस के नाम पर 12,000 रुपये मांगे जा रहे थे जिसे देने से इनकार करने पर बच्चों को स्कूल आने से रोक दिया गया.

इसके बाद बच्चों का स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर भेज दिया गया. विरोध में इन बच्चों के परिवारवाले पिछले डेढ़ महीने से DEO दफ्तर के बाद धरना दे रहे हैं, पर किसी ने उनकी बात नहीं सुनी. जानकारी मिलने पर राजू सोलंकी नाम के एक RTE कार्यकर्ता इस मामले को हाई कोर्ट ले गए.

हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए राज्य सरकार और मोरबी जिला प्रशासन को RTE को सही तरीके से लागू न करने के लिए कड़ी फटकार लगाई. इसे कानून का मजाक बताते हुए कोर्ट ने स्कूल के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि बच्चों को उनकी पढ़ाई जारी रखने दी जाए. कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया है. मामले की सुनवाई करने वाले जस्टिस एसजी शाह ने कहा कि इस मामले में सरकारी अधिकारी स्कूल का पक्ष ले रहे हैं जो सही नहीं है.

कांग्रेस जीएसटी समारोह का बहिष्कार करेगी

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है की जीएसटी लागू करने के लिए 30 जून की आधी रात को आयोजित किए जा रहे समारोह में हिस्सा नहीं लेगी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने आधी रात के कार्यक्रम को गरिमा के खिलाफ बताया. इसके लिए समारोह का कोई आयोजन नहीं होना चाहिए मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आजाद ने कहा कि जीडीपी गिरावट पर सरकार का कोई ध्यान नही है. सरकार बहरी हो गयी है उसे चीख पुकार सुनाई नहीं देती. कांग्रेस के साथ ही कुछ अन्य दलों ने भी इस समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि पार्टी समारोह में हिस्सा नहीं लेगी. कांग्रेस ने इससे पहले बुधवार को उन्होंने आमंत्रण पत्र को लेकर भी आपत्ति दर्ज की थी.  जिसमें कहा गया है कि देश के इतिहास के सबसे बड़े कर सुधार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लॉन्च करेंगे. देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी का कहना है कि यह उद्घाटन राष्ट्रपति को करना चाहिए. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “राष्ट्रपति की मौजूदगी में जीएसटी को प्रधानमंत्री कैसे लॉन्च कर सकते हैं. यह कतई सही नहीं है. गौरतलब है कि एक जुलाई को पूरे देश में एकीकृत टैक्‍स के रूप में लागू होने जा रहे जीएसटी के मद्देनजर 30 जून की आधी रात को संसद में खास कार्यक्रम का आयोजन होगा. इसके तहत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीएम मोदी ठीक रात के 12 बजे app के जरिये जीएसटी लांच करेंगे. यह कार्यक्रम 30 तारीख की रात 11 बजे से 12:10 बजे तक चलेगा.

अजय देवगन की वजह से सिंगल हूंः तब्बू

tabbu and Ajay Devgan

मुंबई। फिल्म डायरेक्टर रोहित शेट्टी दीवाली पर अपनी फिल्म गोलमाल का सीक्वेल पार्ट गोलमाल अगेन लेकर आ रहे हैं. 25 साल बाद इस फिल्म में एक बार फिर से अजय देवगन और तब्बू रोमांस करते नजर आएंगे. लेकिन इस फिल्म की रिलीज होने से पहले तब्बू ने अजय देवगन के साथ अपने रिलेशन को लेकर एक चौंकाने वाली खुलासा किया है.

80-90 के दशक की सफल अदाकारा तब्बू ने साल 1980 में आई फिल्म ‘बाजार’ में स्पेशल अपीयरेंस दिया था. साल 1994 में तब्बू के करियर ने तब यू-टर्न लिया जब उन्होंने अजय देवगन के साथ फिल्म विजयपथ में काम किया. इस फिल्म में लोगों को इन दोनों की जोड़ी काफी पसंद आई.

तब्बू का नाम वैसे आज तक किसी भी एक्टर के साथ नहीं जोड़ा गया लेकिन अपने सिंगल रिलेशनशिप स्टेटस पर तब्बू ने हाल ही में एक नया खुलासा करते हुए कहा कि वह आजतक सिर्फ अजय देवगन की वजह से सिंगल हैं.

स्पाइडर मैन होमकमिंग हिंदी का ट्रेलर रिलीज

‘स्पाइडर मैन: होमकमिंग’ के हिंदी वर्जन का ट्रेलर रिलीज किया गया है जिसमें टाइगर श्रॉफ की आवाज टॉम हॉलेंड के लिए डब की गई है. इस ट्रेलर में टाइगर स्पाइडर मैन के लिए आवाज देने पर करने पर बहुत खुश हैं. उनका कहना है कि यह उनके लिए सपने सच होने जैसा है.
इससे पहले इस बात की जानकारी देते हुए कहा था की मैं बचपन से ही स्पाइडर मैन का फैन रहा हूं. मैं खुद को लक्की समझता हूं कि मुझे स्पाइडर मैन हिंदी के लिए वॉइस ओवर करने का मौका मिल रहा है. वो खुश हैं कि सोनी पिक्चर्स एंटरटेंमेंट ने उन्हें इसके लिए चुना. टाइगर ने कहा कि वो आशा करते हैं कि लोगों को स्पाइडर मैन के रूप में उनकी आवाज जरूर पसंद आएगी.
गौरतलब है कि टाइगर की फिल्म ‘मुन्ना माइकल’ रिलीज होने वाली है. जिसका निर्देशन शब्बीर खान ने किया हैं. ये फिल्म टाइगर के लिए काफी खास है क्योंकि वो इसमें फेमस पॉप सिंगर और डांसर माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि देते नजर आएंगे.

कोहली के समर्थन में आए संजय मांजरेकर

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कोच के मसले को लेकर चारो तरफ कोहली की आलोचना हो रही है ऐसे में संजय मांजरेकर का बयान सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है. अनिल कुंबले द्वारा टीम इंडिया के कोच पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद से ही कोहली-कुंबले विवाद मीडिया में छाया हुआ है. कुंबले ने इस्तीफे के बाद अपने बयान में कहा था कि कोहली को उनके कोचिंग स्टाइल और पद पर बने रहने से ऐतराज है ऐसे में उनका पद छोड़ना ही सबसे बेहतर विकल्प है.

कुंबले के इस्तीफा देने के बाद अब तक इसके लिए वीरेंद्र सहवाग, टॉम मूडी, रिचर्ड पायबस, लालचंद राजपूत, डोड्डो गणेश, रवि शास्त्री और वेंकटेश प्रसाद ने आवेदन दिया है.

टीम इंडिया का अगला कोच कैसा होना चाहिए इस पर कई क्रिकटरों ने अपनी राय जाहिर दी है, जिनमें संजय मांजरेकर, टीम इंडिया के पूर्व कोच गैरी कस्टर्न और पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा शामिल हैं.

मांजरेकर ने कहा है कि कोच चुनने की प्रक्रिया में कोहली को भी भरोसे में लिया जाना चाहिए. मांजरेकर ने ट्विटर पर लिखा, ‘अब तक की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए, टीम इंडिया के नए कोच को नियुक्त करते समय विराट को भरोसे में लिया जाना चाहिए, यह भारतीय टीम के लिए समझदारी की बात होगी.

 

जांच कमेटी ने अजीत जोगी नहीं माना आदिवासी

Ajit Jogi

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के जाति मामले में छानबीन कमेटी की रिपोर्ट आ गई है. कमेटी ने अजीत जोगी को आदिवासी नहीं माना है. जोगी ने बीते बुधवार (28 जून) को इसके खिलाफ अदालत की शरण लेने की बात कही. जोगी की जाति के मामले में छानबीन कमेटी की बैठक मंगलवार को हुई, जिसमें याचिकाकर्ताओं, ग्रामीणों एवं आवेदक संतकुमार नेताम तथा नंदकुमार साय की याचिकाओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया गया. कमेटी ने तय किया है कि अजीत जोगी को अनुसूचित जनजाति के लाभ की पात्रता नहीं होगी.

संतकुमार नेताम ने पूर्व मुख्यमंत्री जोगी के मामले को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में आवेदन कर शिकायत की थी. फैसला 16 अक्टूबर, 2001 को आया था, जिस पर आयोग द्वारा कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे. अजीत जोगी ने उस दौरान बिलासपुर उच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी. उच्च न्यायालय ने भी फैसला लिया था कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग को जाति का निर्धारण करने, जांच करने और फैसला देने का अधिकार नहीं है. इस फैसले को लेकर संतकुमार नेताम सर्वोच्च न्यायालय भी गए थे, जिस पर नेताम की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाई थी.

सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अक्टूबर, 2011 को फैसला लिया था कि सरकार हाईपावर कमेटी बनाकर अजीत जोगी के जाति प्रकरण का निराकरण करे. जोगी के जाति मामले के लिए गठित कमेटी के छह सदस्यों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य सचिव रीना बाब साहब कंगाले, सदस्य जीआर चुरेंद्र, एस.आर. टंडन और जीएम झा थे. इस रिपोर्ट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में कहा, “मुझे विश्वसनीय सूत्रों से पता चला कि समिति ने मेरे खिलाफ फैसला लिया है. समिति का मानना है कि मैं आदिवासी नहीं हूं. यदि समिति का यही निर्णय है तो वे यह भी बता दें कि मैं कौन सी जाति का हूं.”

जोगी ने कहा कि वह इस मामले को लेकर न्यायालय जाएंगे. उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. इससे पहले भी उन्हें न्याय मिला था. उन्होंने कहा, “छानबीन कमेटी के पांच पदों में से तीन में एक ही अपर सचिव रैंक के अधिकारी ने हस्ताक्षर किए हैं, दो सदस्य स्वतंत्र थे, बाकी के पद रिक्त थे. सीधा-सीधा कमेटी ने नियम का पालन नहीं किया. आनन-फानन में फैसला लिया गया है, जिसे हम न्यायालय में चुनौती देंगे. मैं मुड़ी गोत्र का कंवर आदिवासी हूं.”

एंडी मरे को विंबडलन में पहली बार शीर्ष रैंकिंग

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लंदन। मौजूदा चैंपियन एंडी मरे भले ही अच्छी फॉर्म में न हों, लेकिन विंबलडन में पहली बार शीर्ष वरीयता हासिल करने में उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. पिछले सप्ताह क्वीन्स टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया के जोर्डन थाम्पसन से पहले दौर में पराजित होने वाले स्कॉटलैंड के इस स्टार को सेमीफाइनल तक शीर्ष चार में शामिल किसी अन्य खिलाड़ी का सामना नहीं करना होगा.

हाल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने वाले एक अन्य खिलाड़ी नोवाक जोकोविच, टूर्नामेंट में जीत दर्ज करने वाले रोजर फेडरर और फ्रेंच ओपन विजेता राफेल नडाल शीर्ष चार में शामिल हैं.

दो बार के विंबलडन चैंपियन जोकोविच और सात बार के विजेता फेडरर को विंबलडन के आयोजकों की पूरी तरह से विश्व रैंकिंग के आधार पर वरीयता तय नहीं करने की आदत का फायदा मिला है. जोकोविच विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर हैं लेकिन उन्हें दूसरी वरीयता दी गयी है.

इसी तरह से स्विट्जरलैंड के फेडरर को तीसरी वरीयता मिली है जबकि उनकी विश्व रैंकिंग पांच है. नडाल को इससे नुकसान हुआ, वह विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर हैं लेकिन विंबलडन में उन्हें चौथा स्थान मिला है.

झारखंडः लगभग चार गुना बढ़ी स्नातक करने वाले आदिवासी छात्रों की संख्या

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रांची। भारत में अनुसूचित जनजाति से आने वाले छात्रों के पास आम लोगों जितनी सुविधाएं नहीं होती है. इसके बावजूद भी आदिवासी बच्चों के माता-पिता उन्हें पढ़ाने के लिए स्कूल भेजते हैं. तमाम असुविधाओं के बाद भी अनुसूचित जनजाति से आने वाले छात्र अपनी मेहनत का लोहा मनवा रहे हैं. ये आदिवासी छात्र अपने आप को समाज में मजबूती के साथ स्थापित कर रहे हैं. हाल ही के वर्षों में अनुसूचित जनजाति के लोग छात्रों के शैक्षिक स्तर में बहुत ही सुधार हुआ है.

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सह कौशल विकास की ओर से जारी सरकारी आंकड़े में बताया गया है कि झारखंड में पिछले छह वर्षों के दौरान आदिवासी ग्रेजुएट छात्रों की संख्या में लगभग चार गुना बढ़ोत्तरी हुई है. मैट्रिक व इंटर के साथ-साथ स्नातक स्तर पर भी आदिवासी छात्रों की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोत्तरी हुई है. उच्च और उच्चतम शिक्षा के प्रति आदिवासी छात्रों का रूझान तेजी से बढ़ा है.

इस बढ़ोतरी में लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या अधिक है. साल 2011 में जहां स्नातक एसटी स्नातक करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 30,295 थी, वह वर्ष 2016 में बढ़कर 1,13,419 हो गयी. इस दौरान वर्ष 2013 में इस संख्या में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई. राज्य सरकार की ओर से छात्राओं के पठन-पाठन को लेकर जो योजनाएं चलायी जा रही है, उसका असर नामांकन पर दिख रहा है.

राज्य सरकार ने छात्राओं के स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई नि:शुल्क की है. इसके अलावा अनुसूचित जनजाति की छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं भी चलायी जा रही है. राज्य सरकार ने झारखंड के 203 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय को प्लस टू तक कर दिया है. इन विद्यालयों में अनुसूचित जनजाति की छात्राओं की संख्या सबसे अधिक है. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से इंटर पास छात्राओं के स्नातक में नामांकन के लिए अभियान चलाया जा रहा है.

इंटर कला संकाय में भी अनुसूचित जनजाति के बच्चों का रिजल्ट सबसे बेहतर रहा. वर्ष 2017 इंटर कला की परीक्षा में अनुसूचित जनजाति कोटि के कुल 51,225 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे. जिसमें से 37986 परीक्षार्थी सफल रहे. 22,413 छात्र व 28,812 छात्राएं परीक्षा में शामिल हुई थी. छात्रों की सफलता का प्रतिशत 72.12 व छात्राओं का 75.13 फीसदी रहा. परीक्षार्थियों की सफलता का प्रतिशत 74.16 प्रतिशत रहा. अनुसूचित जनजाति के 808 छात्र व 2080 छात्राएं प्रथम श्रेणी से परीक्षा में सफल हुई. जबकि सामान्य वर्ग के 70.33 फीसदी, अनुसूचित जाति के 72.15 फीसदी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग 72.16 व अनुसूचित जाति के 67.50 फीसदी परीक्षार्थी सफल रहे.

राज्य की पूर्व मुख्य सचिव व झारखंड एकेडमिक काउंसिल की पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मी सिंह का कहना है कि उच्च शिक्षा में राज्य के अनुसूचित जनजाति के बच्चों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी सकारात्मक संकेत है. यह इस बात का परिचायक है कि लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है. अब यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि जो छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें रोजगार उपलब्ध कराये. इसके लिए कॉलेज स्तर पर ही विद्यार्थियों के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाये, ताकि स्नातक पास करने के साथ ही छात्र को रोजगार मिल सके. कॉलेजों में कैंपस सलेक्शन की व्यवस्था हो.

आदिवासी छात्र ऐसे ही मेहनत करते रहे तो वो बहुत जल्द देश की मुख्यधारा में हो शामिल हो जाएंगे. वे अपने समाज और देश के विकास में अहम भूमिका निभाएंगे.

देश का सबसे बड़ा मुंबई बंदरगाह साइबर हमले की चपेट में

नई दिल्ली। देश का सबसे बड़ा कंटेनर बंदरगाह भी साइबर हमले की चपेट में आ ही गया. मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) का कामकाज बुधवार को ताजा साइबर हमले के कारँ प्रभावित हुआ. मुंबई स्थित जेएनपीटी के परिचालक एपी मोलर माएस्क को अपने टर्मिनल के ट्रैफिक को अन्य दो इकाइयों की ओर हस्तारिंत करने को कहा गया है. जहाजरानी मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि जेएनपीटी के एक टर्मिनल का परिचालन माएस्क हेग के कार्यालय पर हमले से प्रभावित हुआ. राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा संयोजक गुलशन राय स्थिति से निपटने के लिए मुंबई पहुंच गए हैं. बंदरगाह के एक अधिकारी के मुताबिक टर्मिनल पर परिचालन काफी धीमा हुआ है. हमने उनसे ट्रैफिक को अन्य दो टर्मिनलों पर डायवर्ट करने को कहा है. इस प्रभावित टर्मिनल पर आयात और निर्यात वाले 4,500 कंटेनर प्रतिदिन चढ़ते-उतरते हैं. गौरतलब है की कुछ महीनें पहले भी रेनवेयर नाम के एक वायरस ने भारत के तकनीकी कार्यालयों का काफी कामकाज ठप कर दिया था और अब इस वायरस ने दस्तक देकर भारत सरकार की दिक्कतें बढ़ा दी हैं.

स्वछता अभियान की धज्जियां उड़ाते मोदी के मंत्री

अभी एक दिन पहले ही बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी से स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत तक नहीं लिखा गया था तो अब एक और चौकानें वाली खबर सामने आ रही है. जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छता पर इतना जोर दे रहे हैं. हर जगह खुले में शौच मुक्त भारत, सफाई अभियान से लोगों को जागरुक कराते रहते हैं. ऐसे में पीएम के कैबिनेट मंत्री उनके इन प्रयासों का मजाक बनवा रहे हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. तस्वीर में देखा जा सकता है कि किस तरह स्वच्छ भारत अभियान का मजाक उड़ाते हुए कृषि मंत्री खुले में टॉयलेट कर रहे हैं. जबकि उनके सिक्योरिटी गार्ड्स उनकी सुरक्षा में आसपास ही खड़े हुए हैं. हालांकि ये साफ नहीं हो पा रहा है कि तस्वीर कहां और कब ली गई थी. पर यह साफ है की मंत्री राधा मोहन सिंह खुले में पेशाब करते नजर आ रहे हैं जिसका ट्विटर, फेसबुक पर खुब मजाक उड़ाया जा रहा है. लोग लिख रहे हैं की बीजेपी सिर्फ बोलने की राजनीति करती है जबकि असली हकीकत यही है. इनके मंत्री और सांसद स्वछता अभियान का खुले आम मजाक उड़ा रहे हैं तो ऐसे में आम जनता कैसे जागरूक होगी. इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.  

योगी राज में आए दिन हो रहे हैं दलित महिलाओं के साथ बलात्कार

crime against women

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगीराज आने के बाद भी दलितों पर अत्याचार कम नहीं हुए. मोदी की राह पर चलने वाले योगी आदित्यनाथ राज्य में सबका साथ सबका विकास नहीं कर पा रहे हैं. यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों में आए दिन दुर्घटनाएं और हिंसा हो रही है. महिलाओं के साथ बदसलूकी और बलात्कार जैसी दुर्घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं. लेकिन योगी सरकार इन सब को रोकने में नाकामयाब साबित हो रही है.

भदोही जिले के कोइरौना क्षेत्र के एक गांव में सात दिन पहले चार युवक घर से बाहर निकली एक दलित किशोरी को उठा ले गए और एक कमरे में रखकर उसके साथ कई दिनों तक दुष्कर्म किया. किशोरी के पिता जब थाने गए तो थाना इंचार्ज ने उन्हें भगा दिया. थाने में सुनवाई न होने पर किशोरी के पिता ने एसपी से शिकायत की.

इसके बाद 27 जून की शाम को इस मामले में केस दर्ज किशोरी का मेडिकल परीक्षण कराया गया. एसपी ने मामले में लापरवाही के आरोप में कोइरौना एसओ अजय सिंह को लाइन हाजिर कर दिया. किशोरी के पिता ने बताया कि इलाहाबाद के हंडिया थानाक्षेत्र निवासी राकेश मेरे घर आता-जाता था. 22 जून की शाम मेरी बेटी घर से बाहर गई. उसके बाद नहीं लौटी. बाद में पता चला कि राकेश, अपने दोस्त सुरेंद्र और दो अन्य लोगों के साथ उसे उठा ले गया था और चकवा महावीर के पास एक कमरे में ले जाकर तीन दिनों तक रखा इस दौरान सभी ने उसके साथ दुष्कर्म किया.

26 जून को उसका फोन आया कि तुम्हारी बेटी घर के पास सड़क पर खड़ी है, ले जाओ. पिता जब बेटी को घर लेकर आए तो उसने सामूहिक दुष्कर्म की जानकारी दी.

दूसरी घटना देवरिया जिले में हुई. जहां भौलानी इलाके में 5 लोगों ने 24 वर्षीय एक दलित महिला के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया. पुलिस सूत्रों ने बताया कि महिला शाम शौच करने के लिए खेत पर गई थी तभी वहां मोटरसाइकिल सवार 2 युवकों ने महिला को जवरन मोटरसाइकिल पर बैठा लिया और एक किलोमीटर दूर खेत में ले जाकर उसके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया तथा उसे बेहोशी की हाल में छोड़कर भाग गए.

घटना की जानकारी सुबह घरवालों को हुई जब वह बेहोशी की हालत में घर पहुंची और उसने घटना की जानकारी परिवार वालों को दी. परिवार वालों ने पुलिस को सूचना दी तो अतिरिक्त पुलिस अधिक्षक चिरंजीव नाथ मौके पर पहुंचे. नाथ ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है तथा महिला को मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया है.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

देश में बढ़े टमाटर के दाम, निशाने पर मोदी सरकार

नई दिल्ली। पिछले वर्ष की तरह टमाटर के दामों में एक बार फिर से उछाल आया है. टमाटर के दामों में आई तेजी से बीजेपी सरकार फिर से घेरे में है. दिल्ली सहित कई मंडियो से खाद्य मंत्रालय ने टमाटर की सप्लाई के आंकड़े मंगाए हैं. उत्तर भारत के कई बाजारों में टमाटर के दाम चार गुना तक बढ़ गये हैं. 15 से 20 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर अब 40 से 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है. रिटेल मार्केट में तो इसकी कीमतें 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने बताया है कि यह तेजी सिर्फ सीजनल है. कई जगहों पर फसल बर्बाद होने से दाम बढ़े हैं. अगले कुछ दिन में सब सामान्य हो जायेगा.

बता दें की दिल्ली की आजादपुर मंडी में टमाटर के भाव दो दिन पहले 10 रुपये से 15 रुपये के तक थे. लेकिन  बुधवार को ये भाव 40 रुपये से 65 रुपये पर जा पहुंचे. कारोबारियों का कहना है कि इसका अहम कारण है कि टमाटर की सप्लाई में भारी कमी. हरियाणा के अलावा उत्तर भारत और दक्षिण भारत में भी बारिश के कारण टमाटर की फसल बर्बाद हुई है. हरियाणा के अलावा अमरोहा, मुरादाबाद, बरेली आदि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी टमाटर की फसल बर्बाद होने की खबर आयी है जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. टमाटर के दाम आसमान चढ़ने से गृहणियों का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है.