अब दिल्ली सरकार अपने खर्चे पर कराएगी प्राइवेट अस्पताल में इलाज

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नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली वालों को एक और सौगात दी है. दिल्ली वासियों के लिए शनिवार 8 जुलाई से एक राहत भरी योजना शुरू होने जा रही है. इस योजना के तहत केजरीवाल सरकार एक बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत करेगी. गौरतलब है कि सरकारी अस्पताल जो दिल्ली सरकार के अंतर्गत आते हैं उनमें मरीजों को ऑपरेशन के लिए 30 दिन से ज्यादा का इंतज़ार करना पड़ता है तो ऐसे में मरीजों का इलाज दिल्ली सरकार अपने खर्चे पर निजी अस्पताल में करवाएगी.

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज इस मेगा स्वास्थ्य योजना को हरी झंडी देंगे. इसके अतिरिक्त अब मरीज एमआरआई सीटी स्कैन और पीटी सिटी स्कैन जैसे महंगे रेडियो थैरेपी टेस्ट भी फ्री में करा पाएंगे.अपनी इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए दिल्ली सरकार ने कई मशहूर निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल किया है. बता दें कि, दिल्ली सरकार के अंतर्गत 30 से ज्यादा सरकारी अस्पताल आते हैं.

अब दिल्ली के सरकारी अस्पताल के डाक्टर यदि मरीजों के बेहतर इलाज के लिए उन्हें कहीं और रेफर करेंगे तो मरीजों को सभी महंगे रेडियो टेस्ट निजी संस्थानों में मुफ्त कराने की सुविधा मिलेगी. इस सभी महंगी जांचों का खर्च सरकार उठाएगी, जिससे आम जनता को बड़ा फायदा होने जा रहा है

 

गणतंत्र दिवस पर 10 आसियान देशों के प्रमुख होंगे चीफ गेस्ट

नई दिल्ली। चीन को घेरने के लिए भारत ने एक्ट ईस्ट नीति को हथियार बनाया है. भारत पहली बार गणतंत्र दिवस 2018 के मौके पर 10 आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस) देशों के राष्ट्राध्यक्षों को बुलाने जा रहा है. इन आसियान देशों में ब्रूनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं.

यह पहली बार होगा कि गणतंत्र दिवस के मौके पर एक साथ इतने सारे नेता मुख्य अतिथि के तौर पर परेड समारोह के मेहमान होंगे. गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर होने वाला परेड भारत की सैन्य क्षमता को दर्शाता है.

2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने लुक ईस्ट नीति को एक्ट ईस्ट नीति में तब्दील कर दिया. एनडीए सरकार का जोर था कि भारत की नीति ज्यादा गतिशील होनी चाहिए और न केवल आसियान बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत को लेकर होनी चाहिए.

सरकार का कहना था कि जापान पर जोर देते हुए आसियान देशों को एक्ट ईस्ट नीति की रीढ़ बनाया जा सकता है. गणतंत्र दिवस पर आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों को बुलाना एनडीए सरकार की सोच को और ज्यादा मजबूत करेगा.

विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत और आसियान देशों के संबंधों को 25 साल पूरे होने जा रहे हैं. 15 साल आसियान देशों के समिट लेवल के संबंधों को हो रहे हैं, जबकि पांच साल स्ट्रेटजिक रिलेशनशिप के पूरे हो रहे हैं. इस मौके पर भारत में और आसियान देशों में स्थित उच्चायोग में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों की थीम ‘शेयर्ड वैल्यूज, साझा लक्ष्य (साझा मूल्य, साझा लक्ष्य)’ होगा.

हालांकि ध्यान देने वाली बात ये है कि सिंगापुर और वियतनाम भारत से क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने की बात कहते रहे हैं. चीन क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ा रहा है और जिस तरह से ड्रैगन ने विवादित दक्षिण चीन सागर मामले को हैंडल किया है उससे इलाके में भय का माहौल बना है. कम से कम 4 आसियान देशों वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया और ब्रूनेई दक्षिण चीन सागर विवाद में सीधे तौर पर पार्टी हैं. सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली लूंग के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लेने की पूरी उम्मीद है.

पुराने स्टॉक पर नई MRP का स्टीकर नहीं लगाने पर हो सकती है जेल

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नई दिल्ली। अब अगर बचे हुए पुराने माल पर जीएसटी लागू होने के बाद नए न्यूनतम समर्थन मूल्य का स्टिकर नहीं लगाया, तो जेल की सजा समेत 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. 7 जुलाई को उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने उत्पादकों को यह चेतावनी दी. पुराने स्टॉक पर संशोधित एमआरपी लिखने के संबंध में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नए नियम जारी किए हैं.

मंत्रालय ने कहा कि 1 जुलाई से पहले तैयार किए गए माल पर संशोधित एमआरपी लिखनी अनिवार्य होगी. सरकार ने पुराने स्टॉक को निकालने के लिए कंपनियों को 30 सितंबर तक का वक्त दिया है. कंपनियों से कहा गया है कि वे बचे हुए माल पर पुरानी कीमत के बराबर में ही संशोधित एमआरपी के स्टिकर लगाएं. इससे ग्राहक जीएसटी के बाद कीमतों में आए बदलावों को जान सकेंगे. पासवान ने कहा कि यदि कोई इन नियमों का पालन नहीं करता है तो उस पर पहली बार 25,000 रुपये, दूसरी बार 50,000 रुपये और तीसरी बार एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा. इसके अलावा एक साल तक जेल भी हो सकती है.

मंत्रालय ने उपभोक्ताओं की शिकायतों को हल करने के लिए एक समिति बनाई है. साथ ही हेल्पलाइन की संख्या को 14 से बढ़ाकर 60 कर दिया गया है. पासवान ने कहा कि जीएसटी लागू करने को लेकर शुरुआती अड़चनें आ रही हैं. जल्द ही उनका समाधान हो जाएगा. उपभोक्ता हेल्पलाइन के जरिए 700 से अधिक सवाल प्राप्त हुए हैं और मंत्रालय ने वित्त विभाग से इसके समाधान के लिए विशेषज्ञों की मदद मांगी है.

जम्मू-कश्मीर में भी जीएसटी लागू

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श्रीनगर: भाजपा सरकार जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में जीएसटी पहले ही लागू कर चुकी है लेकिन अब लंबी जद्दोजहद के बाद शुक्रवार की आधी रात से पूरे जम्मू-कश्मीर में भी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम लागू हो गया. शुक्रवार को विपक्ष के बायकाट के बावजूद जीएसटी अधिनियम 2017 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. इसके साथ ही विधानमंडल के दोनों सदनों का सत्र भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया.

पूरे देश में यह कर व्यवस्था पहली जुलाई 2017 से ही लागू है. जम्मू-कश्मीर इस व्यवस्था को अपनाने वाला देश का अंतिम राज्य है, क्योंकि धारा 370 के कारण यहां कोई भी केंद्रीय कानून राज्य विधानसभा की अनुमति और बिना राष्ट्रपति के आदेश के लागू नहीं हो सकता. विधानमंडल के दोनों सदनों विधानसभा और विधानपरिषद में वित्त मंत्री डॉ. हसीब द्राबू ने जम्मू-कश्मीर वस्तु एवं सेवा कर बिल 2017 को पेश किया. विपक्ष की गैर हाजिरी में सत्तापक्ष ने इसे ध्वनिमत से पारित किया. जिसके बाद जम्मू कश्मीर भी वस्तु एंव सेवा कर अधिनियम के दायरे में शामिल हो गया.

शहीद के घर में योगी के लिए लगाए सोफा-कूलर

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गोरखपुर। श्रीनगर में शहीद सब-इंस्पेक्टर के घर पहुंचे CM योगी, प्रशासन ने पहले से सोफा-कूलर मंगा रखे थे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को गोरखपुर दौरे पर हैं. सीएम योगी कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के सब इंस्पेक्टर साहब शुक्ला के घर पहुंचे और परिवारवालों से मिलकर संवेदना जताई. योगी ने परिवार को 6 लाख का चेक भी सौंपा. हालांकि, सीएम के दौरे को लेकर प्रसाशन की तैयारियों पर फिर विवाद उठ खड़ा हुआ.

योगी आदित्यनाथ के दौरे को लेकर प्रशासन ने सीएम के स्वागत में रेप कार्पेट बिछाया था. खास सोफा भी मंगाया गया था. और तो और कूलर का भी विशेष इंतजाम किया गया. शहीद के घर सीएम के दौरे के लिए इन तैयारियों पर फिर सवाल खड़े हो गए. गोरखपुर के बेलीपार थानाक्षेत्र के मंझगांवा के रहने वाले 50 वर्षीय साहब शुक्ला 24 जून को श्रीनगर के पंथा चौक पर हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे.

शहीद साहब 16 जून को दूसरे बेटे देवाशीष की शादी के बाद वापस ड्यूटी पर लौटे थे. वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे. वह 1885 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे. उनके परिवार में पत्नी शुभा शुक्ला के अलावा चार बेटे और दो बहुओं का भरा-पूरा परिवार है. सीएम योगी शोकसंतप्त परिवार को सांत्वना देने गए थे.

इससे पहले मई महीने में भी बीएसएफ के शहीद हेडकॉन्स्टेबल प्रेम सागर के देवरिया स्थित घर पर योगी के दौरे से पहले प्रशासन ने घर में विंडो एसी, सोफा और कालीन लगवाया था. सीएम के जाते ही सब खोल कर ले जाया गया. इसपर विवाद हुआ था. तब योगी ने प्रसाशन ने सख्त लहजे में कहा था कि उनके दौरे पर ऐसी तैयारियां नहीं की जाए.

एशियन एथलेटिक्स में निर्मला व अनस ने जीता स्वर्ण

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भुवनेश्वर. भारतीय धावकों ने एशियन एथलेटिक्स के 22वीं चैंपियनशिप के बारिश से प्रभावित दूसरे दिन शुक्रवार को चार पदक अपने नाम किए. हरियाणा की निर्मला श्योराण ने महिलाओं की 400 मीटर की दौड़ जीत कर भारत के लिए दूसरे दिन स्वर्ण पदक जीतने की शुरुआत की. जिसके कुछ देर बाद मुहम्मद अनस ने पुरुषों की 400 मीटर में सोने का तमगा हासिल किया. राजीव अरोकिया दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें रजत पदक मिला जबकि महिला 400 मीटर में जिस्ना मैथ्यू ने कांस्य पदक हासिल किया. भारत का दबदबा यहीं पर नहीं थमा. पीयू चित्र और अजय कुमार सरोज ने क्रमश: महिलाओं और पुरुषों की 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीते.

महिला फर्राटा धाविका दुती चंद ने 100 मीटर में कांस्य पदक हासिल किया. तेजेंदर पाल सिंह तूर ने पुरुष शॉटपुट में 19.77 मी. से रजत पदक जीता. भारत ने इस तरह शुक्रवार को चार स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य सहित कुल आठ पदक अपनी झोली में डाले. भारत कुल 15 पदकों (छह स्वर्ण, तीन रजत और छह कांस्य) के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर विराजमान है. चीन चार स्वर्ण, तीन रजत और दो कांस्य लेकर दूसरे स्थान पर है.

जनजाति जीवन दुनिया को दिखाया तो होगी कड़ी कार्रवाई

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नई दिल्ली। संरक्षित जनजातियों का प्रचार प्रसार और उनकी जीवन शैली को अब आपत्तिजनक वीडियो फिल्मों और यूट्यूब चैनलों पर दिखाना महंगा पड़ सकता है. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने संरक्षित जारवा और अंडमान के अन्य जनजातीय समुदायों की तस्वीरों को प्रचार -प्रसार के रूप में प्रयोग करने पर कार्रवाई शुरू कर दी है. बता दे कि आदिम जनजाति शैली से रहने वाले संरक्षण प्राप्त देश के कुछ जनजातियों की गिनती और उनकी बेहतरी के लिए केंद्र सरकार ने पहले भी संबंधित राज्य सरकारों को गौर देने की पहल थी.

बता दें कि लोगों द्वारा सोशल मीडिया समेत कई चैनलों पर आदिम तरीके से जनजातियों के रहन-सहन पर सवाल उठाए जाने और उन्हें विवादित करार दिए जाने के बाद यह पहली दफा है जब जनजाति आयोग ने कड़े रूप से संज्ञान लिया है. इन जनजातियों को मिला संरक्षण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में जनजातियों की जनसंख्या 28077  है जिसमें से संरक्षित जारवा जनजातियों की संख्या पांच सौ से भी कम है. जिसे संरक्षित करने के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप (एबोरिजिनल जनजाति के संरक्षण) विनियमन, 1956 (पीएटी) जून 1956, को लागू किया गया है. जरावास, ऑनेज, सेंटिनेलीज़, निकोबारेसी को आदिवासी जनजाति के रूप में पहचान की गई है.

आयोग ने समुदायों को बाहरी हस्तक्षेप से बचाने का भी प्रावधान इसमें शामिल किया हैं. कानूनी तौर पर फोटो लेना वर्जित है आदिवासी जनजातियों से संबंधित विज्ञापन के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देना या किसी भी प्रकार का इन संबंधित फोटो प्रयोग करना वर्जित है. 2012 के प्रावधान में किए गये परिवर्तन के हिसाब से इन क्षेत्रों में धारा 7 लागू है (जो रिज़र्व क्षेत्रों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाता है) इसमें किसी भी तरीके के फोटो लेना या वीडियो बनाना अधिसूचना के उल्लंघन में आता है. इन क्षेत्रों में प्रवेश करना भी दंडनीय अपराध है. इस कानून के तहत तीन साल तक कारावास का भी प्रावधान है और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की धारा 3 (अ) (आर) भी यहाँ लागू होता है. जिसका पालन सभी को करना जरुरी है.

दलित पार्षद के वार्ड में काम नहीं होने दे रहे सवर्ण अधिकारी

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मुलताई। मध्यप्रदेश के मुलताई के भगतसिंह वार्ड में दलित पार्षद को अपने क्षेत्र में सवर्ण अधिकारी काम करने नहीं दे रहे हैं. पार्षद द्वारा प्रस्तावित विकास के प्रोजेक्ट को सीनियर अधिकारी पास नहीं होने दे रहे हैं. अगर प्रोजेक्ट पास भी होता है तो वह तमाम तरह के अड़ंगे डालते हैं.

दलित पार्षद उमेश झलिए ने आरोप लगाया कि दलित होने के कारण उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है, कुछ सवर्ण अधिकारी उनसे कमीशन मांगते हैं और कमीशन नहीं देने पर काम नहीं होने देते. इसलिए वह परेशान होकर इस्तीफा दे रहे हैं. हालांकि सीएमओ नहीं होने के कारण पार्षद इस्तीफा नहीं सौंप पाए.

झलिए ने कहा कि पार्षद बनने के दो वर्ष से ऊपर होने के बावजूद वार्ड में विकास कार्य के नाम पर सिर्फ एक सड़क बनी है बाकि कोई भी कार्य नहीं हो पाया है, जबकि अन्य पार्षदों तथा सवर्ण अधिकारियों के वार्डों में करोड़ों के कार्य हो गए हैं. ऐसी स्थिति में वार्डवासियों को जवाब देते नहीं बन रहा है.

वार्ड में काम नहीं होने से आहत पार्षद उमेश झलिए ने इसका कारण उनका दलित होना बताया है. उन्होंने कहा कि वे दलित समाज से हैं इसलिए उनके साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नगर पालिका में सिर्फ सभापतियों की ही चलती है तथा अधिकारी भी उन्हीं की सुनते हैं. पार्षदों की कोई नही सुनता. उन्होंने कहा कि वो वार्ड में काम कराने की गुहार लगा-लगा कर थक चुके हैं. ऐसी स्थिति में अब उनके पास सिवाय इस्तीफा देने के कोई और चारा नहीं है.

गंगा, यमुना को नहीं मिलेगा जीवित व्यक्ति का दर्जा

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गंगा, यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. नदियों को जीवित व्यक्ति की तरह मानने के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है. राज्य सरकार ने नैनीताल हाई कोर्ट के 20 मार्च के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी. इस संबंध में उत्तराखंड सरकार ने दलील दी थी कि गंगा-यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने के फैसले में हाईकोर्ट ने गंभीर चूक की है. इस बारे में हाईकोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका में दुबारा सुधार होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की यह याचिका अतिक्रमण और दो राज्यों में बंटवारे को लेकर दाखिल हुई थी. नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले से कई बड़े संवैधानिक सवाल खड़े हो गए हैं. गंगा और यमुना सिर्फ उत्तराखंड में नहीं बल्कि कई राज्यों में बहती हैं. ऐसे में दूसरे राज्यों में इन नदियों की जिम्मेदारी उत्तराखंड को नहीं दी जा सकती. कई राज्यों में बहने वाली नदियों को लेकर कदम उठाना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है.

बता दें की राज्य सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के इस फैसले पर आपत्ति जताई औऱ कहा कि गंगा की सफाई का मसला उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैला है इसलिए उत्तराखंड के मुख्य सचिव या फिर महाधिवक्ता ऐसे मामलों में अकेले जिम्मेदार कैसे हो सकते हैं इसलिए उत्तराखंड सरकार इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट गई है.

 

सरकारी गोशाला में 6 माह में 150 गायों की मौत

जयपुर। राजस्थान के उदयपुर स्थित सरकारी गौशाला में पिछले छह माह से गायों की मौते हो रही है अब जाकर गायों की मौत का मामला संज्ञान में आया है. उदयपुर नगर निगम की ओर से संचालित तितरडी गौशाला में सरकार द्वारा ध्यान ऱखा जाता है पर अब जानकारी में सामने आया है की पिछले छह माह में 150 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है.

उदयपुर नगर निगम प्रशासन की अनदेखी के चलते गायों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है. असल मे यह हालत गायों की देखभाल नहीं होने और समय पर चारा-पानी नहीं देने के कारण हुई है. गायों की मौत का सिलसिला पिछले छह माह पहले प्रारम्भ हुआ जो अब भी जारी है. यहां प्रतिदिन दो से तीन गायों की मौत हो रही है. बीमार गायों का इलाज नहीं होने की बात भी सामने आई है.

बता दें की इस गौशाला में 250 गायें रखने की क्षमता है, लेकिन यहां क्षमता से अधिक 350 गायें रखी गई है. गौशाला में गायों की देखभाल के लिए एक करोड़ रूपए प्रति माह खर्च होता है, वहीं एक दर्जन कर्मचारी तैनात है, लेकिन फिर भी सुध नहीं ले पाने के कारण गायों की मौत का सिलसिला जारी है.

उदयपुर नगर निगम के महापोर चन्द्र सिंह कोठारी का कहना है कि मृतक गायों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और फिर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने गायों की मौत पर चिंता जताते हुए कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि कहां लापरवाही रही.

गौरतलब है की वर्तमान भाजपा सरकार गायों के ऊपर लगातार राजनीति कर रही है ऐसे में सरकारी कर्मचारियों की अनदेखी से गायों की मौत सरकार के ऊपर सवालिया निशान छोड़ खड़े करती है.

एक पुल का दो बार शिलान्यास, भाजपा-सपा में श्रेय लेने की होड़

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बाराबंकी। देश की राजनीति में ऐसा दौर चल निकला है, जिसमें काम के इतर उसके प्रचार पर ज्यादा जोर दिया जाता है. ऐसा ही एक वाक्या यूपी के बाराबंकी जिले में हुआ. जहां, जिले के डिघावां गांव में एक पुल का शिलान्यास दो बार किया गया. दरअसल पहली बार सपा सरकार के अंतिम दिनों में इस पुल का शिलान्यास किया गया. हालांकि चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से पुल का निर्माण कार्य तो शुरु नहीं हो सका. लेकिन सपा सरकार ने इसे लेकर वाहवाही जरुर लूटी. सपा को उम्मीद थी कि इसके बदले उन्हें भारी वोट मिलेंगे. लेकिन ऐसा हो नहीं सका और जिले की छह विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा का कब्जा हो गया और इस तरह राजनीतिक उठापटक में पुल का निर्माण शुरु होने से पहले बंद हो गया.

हालांकि क्षेत्र के नए विधायक उपेंद्र रावत ने मौके की नज़ाकत को समझा और जिले की सांसद प्रियंका रावत के हाथों पुल का दोबारा शिलान्यास कराकर निर्माण कार्य शुरु करा दिया. वैसे तो सांसद प्रियंका रावत के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे हो चुके हैं. ऐसे में उन्हें पुल का शिलान्यास नहीं बल्कि उद्घाटन करना चाहिए था. इसी को मुद्दे बनाकर पूर्व सपा विधायक राम गोपाल रावत ने भाजपा पर फर्जी वाहवाही लूटने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा की न कोई नीति है और न कोई नीयत. इन्हें केवल राम-राम जपना, पराया माल अपना करना आता है. सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर मामले पर बयानबाजी का दौर शुरु हो चुका है.

राजनीतिक झगड़े से अलग सच्चाई यह है कि सपा और भाजपा किसी ने भी क्षेत्र की जनता की सहूलियत के लिए कार्य नहीं किया. दोनों पार्टी की ओर से सारा खेल श्रेय लेने का है. वाजिब है कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में बाराबंकी जिले की सभी छह सीटें सपा को मिली. जिले के तीन विधायकों को मंत्रीमंडल में जगह मिली. इसके बावजूद सपा की ओर से बाराबंकी जिले के विकास को लेकर कोई खास काम नहीं किया गया. सपा सरकार के अंतिम दिनों में पुल के निर्माण की जद्दोजहद शुरु की गई, जिसका सीधा मतलब विधानसभा चुनाव में वोट बैंक हासिल करना था. दूसरी सच्चाई यह है कि भाजपा सांसद प्रियंका रावत की इन तीन वर्षों में जिले में कुछ खास काम नहीं किया गया.

‘बेशर्म भक्त’ मोदी को इंदिरा गांधी की तरह ले डूबेंगे: शिवसेना

मुंबई. शिवसेना ने भाजपा को अपने मुखपत्र सामना के जरिये आड़े हाथो लिया है. शिवसेना के गठबंधन की सहयोगी पार्टी भाजपा को कड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि भाजपा के कार्यकर्ता मोदी-मोदी के नारे लगाने से बाज आएं नहीं तो ये बेशर्म भक्त प्रधानमंत्री को ले डूबेंगे. शिवसेना ने कहा कि आज देश को इन मोदी-मोदी के नारे लगाने वालों से सबसे ज्यादा खतरा है.

शिवसेना ने अपने मुखपत्र दोपहर का सामना के संपादकीय में कहा कि हमेशा यह नारे लगाना प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ जा सकता है. संपादकीय में दो दिन पहले बृहन्मुंबई नगर पालिका (बीएमसी) में दो दिन पहले हुई घटना के हवाले से कहा गया कि जब भाजपा के पार्षद “मोदी-मोदी” के नारे लगाने लगे तो शिवसेना के पार्षदों ने “चोर है-चोर है” के नारे लगाए.

शिवसेना ने कहा कि जो शिवसेना के टाइगरों को चुनौती देगा उन्हें “कान के नीचे” करारा जवाब ही मिलेगा. संपादकीय में कहा गया है कि हमने हमेशा मोदी का प्रधानमंत्री बतौर सम्मान किया है. लोगों के बीच में उनका नाम गरिमा के साथ लिया जाना चाहिए न कि सनक के रूप में. गौरतलब है कि मोदी भक्तों की गुंडागर्दी की खबरें लगातार चर्चा में रहतीं हैं अब इस बाबत शिवसेना का बड़ा बयान भी सामने आ गया है.

 

जातिवादी गुंडों ने दलित का घर किया आग के हवाले

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अमेठी। अमेठी के पूरे जोरई गांव में ग्राम प्रधान ने एक दलित परिवार का घर जला दिया. दलित परिवार को सरकारी जमीन मिलना प्रधान को नागवार गुजरा. जिसके कारण उसने दलित का घर आग के हवाले कर दिया. पीड़ित दलित की शिकायत पर पुलिस ने ग्राम प्रधान व उसके भाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. चौकी प्रभारी बृजभूषण पाठक ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि करते हुए बताया कि विवेचना क्षेत्राधिकारी के सुपुर्द कर दी गयी है.

थाना शिवरतनगंज के पूरे जोरई निवासी शिव प्रसाद को गांव में स्थित सरकारी जमीन आबंटित हुई. जिसे खाली कराने के लिए ग्राम प्रधान सतीश यादव ने पैरवी की. सरकारी प्रशासन ने प्रधान की पैरवी में कोई रूचि नहीं दिखाई जोकि ग्राम प्रधान को रास नहीं आया. आरोप है कि प्रधान ने अपने भाई राकेश यादव के साथ मिलकर उसका घरसुपुर्दे खाक कर दिया. गरीब दलित परिवार का घर धू-धू कर जल उठा.

दैनिक जागरण के मुताबिक पीड़ित का आरोप है कि प्रधान के प्रभाव में किसी ने उसके घर में लगी आग को बुझाने तक का साहस नहीं किया. छह जून की शाम हुयी इस घटना की पुलिस ने अब तक रिपोर्ट तक दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा. जबकि पीड़ित परिवार लगातार थाने के चक्कर काटता रहा. पीड़ित परिवार ने पुलिस पर अनसुनी का आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई. जिसका नतीजा रहा कि एक महीने बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिल सका. पुलिस ने पीड़ित शिव प्रसाद की पत्‍‌नी मातादेई की तहरीर पर प्रधान व उसके भाई को नामजद कर पड़ताल शुरू कर दी है. चौकी प्रभारी ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जांच क्षेत्राधिकारी को सौप दी गई है.

अनुराग बासू ने अपनाया है ‘बर्फी’ वाला ही फॉर्मुला

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नई दिल्ली। फिल्म जग्गा जासूस से पहली बार प्रोड्यूसर बन रहे रणबीर कपूर का कहना है कि उनकी फिल्म ‘जग्गा जासूस’, निर्देशक अनुराग बासु की बनाई फिल्म ‘बर्फी’ से ज्‍यादा अच्‍छी होगी. अनुराग बासु को ‘बर्फी’ के लिए खूब बधाइयां मिली थीं और इस फिल्म में नजर आए रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा को उनके किरदारों के लिए काफी सराहा गया था. न्‍यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार ‘बर्फी’ के बाद अब ‘जग्‍गा जासूस’ का हिस्‍सा बने रणबीर ने एक निजी चैनल के एक शो में कहा, ‘मैं इसे (जग्गा जासूस) लेकर अच्छा महसूस कर रहा हूं. मेरा मानना है कि उन्होंने ‘बर्फी’ से बेहतर फिल्म बनाई है.’ हालांकि निर्देशक अनुराग बासू का कहना है कि उनकी इस नई फिल्म में भी ‘बर्फी’ की तरह ही संगीत का इस्‍तेमाल किया गया है जो खुशी का अहसास कराने वाला है.

फिल्म ‘जग्गा जासूस’ में रणबीर कपूर और कटरीना कैफ की जोड़ी है, जो जग्गा यानी रणबीर के पिता की तलाश में निकलते हैं. फिल्में कटरीना के किरदार का नाम श्रुति है. फिल्म ‘जग्गा जासूस’ से रणबीर बतौर निर्माता भी शुरुआत कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि निर्माता का काम उनके लिए नहीं बना है. उन्होंने कहा कि उन्हें अभिनय करना पसंद है और वह निर्देशन करना चाहेंगे, लेकिन निर्माता का काम उनके बस की बात नहीं है.

याद दिला दें कि फिल्म ‘बर्फी’ में रणबीर ने गूंगे-बहरे शख्स का किरदार निभाया था, जबकि प्रियंका ने ऑटिस्टक लड़की का किरदार निभाया था. यह एक सच्चे प्रेम की तलाश की कहानी थी. बसु ने कहा कि दोनों फिल्मों की कहानी में काफी समानता है. आईएएनएस के अनुसार अनुराग ने अपने बयान में कहा, ‘यह एक खुशी का अहसास कराने वाली फिल्म है. हमने इसे ‘बर्फी’ की तर्ज पर बनाया. मेरी पूरी टीम भी वही है. मैं फिल्म में अपनी शैली तक में कोई बदलाव नहीं करना चाहता था. मैंने वहीं शैली अपनाने की कोशिश की, जो ‘बर्फी’ में इस्तेमाल किया था, इसलिए आपको फिल्म देखने पर समानता महसूस होगी. हालांकि दोनों की कहानी अलग है.’

मेरठ के वाल्मीकि आश्रम में लूट

मेरठ। मेरठ मे दलित हिंसा रूकने का नाम ही नहीं ले रही है. अब एक नया मामला सामने आया है जोकि मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र का है. वहां के सरस्वती लोक के समीप वाल्मीकि आश्रम में गुरुवार सुबह तीन बदमाशों ने धावा बोल दिया। आश्रम की महिला महंत और उनके पुत्र सहित तीन को बंधक बनाकर कई घंटो तक लूटपाट की गयी. लूट सूचना पर पहुंचे कुछ नेताओं ने घटना पर आक्रोश जताया और बदमाशों को पकड़ने की मांग पुलिस से की गयी.

बता दें की नूरनगर रोड पर सरस्वती लोक के निकट एक महर्षि वाल्मीकि आश्रम है. आश्रम की महंत शारदा देवी  ने बताया की गुरुवार की सुबह करीब पांच बजे दो बदमाश आश्रम में घुसे और आंगन में सो रही शारदा को चाकू दिखाते हुए कुछ खाने को मांगने लगे. शारदा रसोई में गईं तो दूसरे बदमाश ने आंगन में सो रहे उनके पुत्र मोनू और रिक्शा चालक राकेश को गन प्वाइंट पर ले लिया। इसके बाद महंत शारदा को भी गन प्वाइंट पर लेते हुए दो बदमाशों ने पूरे आश्रम को खंगालते हुए बक्से में रखी दस हजार की नकदी, सोने की अंगूठी और दो पाजेब लूट लीं।

जाते समय बदमाश सभी को एक कमरे में बंद करते हुए किसी को कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी देकर दानपात्र में रखी नगदी भी लूटकर फरार हो गए।

इस घटना पर कुछ समय बाद ही राजनीति शुरू हो गयी जिसमें भाजपा नेता कमलदत्त शर्मा और तुषार गुप्ता के साथ महंत शारदा देवी ने थाने में तहरीर दी और बताया कि वह करीब बीस सालों से आश्रम में रह रही हैं। 3 वर्ष पहले भी बदमाशों ने उनके आश्रम से गाय और दो बछड़े लूट लिए थे, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई थी.