G20 सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रंप के विरोध में उतरे लोग

हैम्बर्ग। अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहली बार जी20 सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं लेकिन उनके आने से पहले ही उनके खिलाफ बिगुल बज गया. ट्रंप के खिलाफ हैम्बर्ग में जबर्दस्त हिंसक प्रदर्शन हुआ. असल में यह विरोध जर्मनी में हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन के विरोध है.

गुरुवार को पुलिस के साथ संघर्ष के दौरान करीब 76 प्रदर्शनकारी घायल हो गए. समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार  वैश्वीकरण-विरोधी ‘वेल्कम टू हेल’  शांतिपूर्ण रैली ने शाम होते-होते हिंसक रूप ले लिया. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को पानी की बौछारें, मिर्च स्प्रे और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा.

पुलिस ने कहा कि उसे पहले से यूरोप और अन्य क्षेत्रों से एक लाख संभावित हिंसक प्रदर्शनकारियों के यहां एकत्र होने की आशंका थी,  जिसके वजह से शहर में बीस हजार से अधिक अधिकारियों को तैनात किया गया था. पुलिस ने बार-बार पूंजीवाद-विरोधी प्रदर्शनकारियों के एक समूह को अपने चेहरों से मास्क को हटाने के लिए कहा और जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उन्हें प्रदर्शन कर रहे लोगों के समूह से अलग कर दिया गया.

काले मुखौटे पहने इन प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस वाहन पर बोतलों और ईंटों से हमला किया और उसकी खिड़की को तोड़ दिया. इस प्रर्दशन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की मुश्किलें काफी बढ़ गयी हैं जोकि पहली बार जी20 सम्मेलन में शामिल होने जा रहे है.

सुप्रीम कोर्ट ने देश में आईआईटी-जेईई की काउंसिलिंग पर रोक लगाई

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए जेईई-एडवांस्ड प्रवेश परीक्षा काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है. असल में यह फैसला 18 बोनस अंक देने के मामले का है जिस पर सुनवाई करते हुए आईआईटी, ट्रिपल आईटी और एनआईटी समेत अन्य इंजीनियरिंग कालेज की काउंसलिंग और दाखिले की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा है कि एडमिशन की इजाज़त बोनस अंक देने के मामले मे सुनवाई के बाद ही दी जा सकती है. मामले में अगली सुनवाई आगामी सोमवार को होगी.

कोर्ट के फैसले के बाद इंजीनियरिंग कालेज में काउंसलिंग और दाखिले का कार्यक्रम कानूनी अड़चनों में फंसता रहा है. ऐसे में करीब 33  हजार छात्र-छात्राओं का भविष्य बीच में ही लटक गया. कोर्ट ने कहा कि बोनस अंक देने का मामला एक परेशानी है और इसका जल्द निपटारा किया जाना जरुरी है.

बता दें की मामले की सुनवाई के दौरान आईआईटी पक्ष के वकील ने कहा था की करीब 2.5 लाख छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांचना संभव नहीं है, ऐसे में बोनस अंक देना ही प्रैक्टिकल समाधान है. कोर्ट ने इशारा किया कि वो अपने वर्ष 2005 में दिए गए फैसले को आगे बढ़ाएगा, जिसके तहत गलत सवाल पर उसे ही अंक दिया जा सकता है, जिसने सवाल को हल किया है. कोर्ट ने कहा भी कि बोनस अंक देने का मसला आईआईटी के सवालों की तरह मुश्किल से भरा हुआ है जिससे बड़ी मुश्किल काउंसिलिंग में शामिल होने वाले छात्रों को ही होगी जिसके ऊपर सैकड़ो छात्रों का भविष्य टिका हैं.