जनसंख्या नियंत्रण अभियान की रोल मॉडल होंगी गीता फोगाट

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नई दिल्ली। बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए सरकार अब सितारों का सहारा लेने जा रही है. दंगल गर्ल गीता फोगाट अब करोड़ों देशवासियों का रोल मॉडल बनेगीं. 10 जुलाई सोमवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में दो बच्चे को जन्म देने की शपथ लेकर देश में जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के अभियान की शुरुआत करेंगी.

वर्ष 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की पहलवान एमिली को पटखनी दे पहला स्वर्ण पदक अपने नाम कर इतिहास रच दिया था. फोगाट बहनों पर बनी आमिर खान की फिल्म दंगल ने भी कमाई के सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे. गीता के अलावा जनसंख्या नियंत्रण अभियान को अभिनेता अजय देवगन, अक्षय कुमार, पाश्र्व गायक शान व कैलाश खेर भी आगे बढ़ायेंगे. कांस्टीट्यूशन क्लब में टैक्सपेयर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा अभियान की शुरुआत मैं भारत बोल रहा हूं थीम गाने से होगी. इसमें पाश्र्व गायक शान, सुरेश वाडेकर, कैलाश खेर, अंकित तिवारी, रवि के त्रिपाठी समेत अन्य ने आवाज दी है.

बताया गया है कि कार्यक्रम में पद्म विभूषण एमएस स्वामीनाथन, ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त, गायक सुरेश वाडेकर, रवि के त्रिपाठी और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अरुण साहनी उपस्थित रहेंगे. हरियाणा के भिवानी के छोटे से गांव से लेकर पूरे विश्व में रेसलिंग में पताका फहराने वाली गीता फोगाट की कामयाबी में उनके पिता महावीर फोगाट का विशेष योगदान रहा है.

 

नाबलिग छात्रा से बलात्कार के बाद हाथ-पैर तोड़ कर गला दबाया

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Crime against woman

शिमला। शिमला के कोटखाई तहसील में 15 साल की छात्रा के बलात्कार के बाद हत्या करने का मामला सामने आया है. छात्रा कोटखाई के महासू स्कूल में 10वी कक्षा में पढ़ती थी. आरोपियों ने छात्रा का अपहरण करने के बाद लगभग 36 घंटे कब्जे में रखा और उसके साथ बलात्कार किया.

घटनास्थल पर शराब की खाली बोतले भी मिली हैं. उनसे भी फिंगर प्रिंटस लिए गए हैं. हैवानियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरोपियों ने उसके हाथ और पैर भी तोड़ दिए. सूत्रों से पता चला है कि पोस्टमॉर्टम में खुलासा हुआ है कि पहले छात्रा से रेप हुआ है फिर उसका गला घोंटा गया है.

15 वर्षीय छात्रा शिलगिरी लौटते समय अचानक 4 जुलाई की शाम को गायब हो गई. 5 जुलाई की शाम को जब मृतका का छोटा भाई स्कूल से घर पंहुचा तो उसने मां-बाप को बताया कि दीदी 4 जुलाई को घर आई थी लेकिन अभी तक घर नहीं लौटी. बेटे का जबाव सुनकर मां-बाप के होश उड़ गए और खौज खबर में जुट गए. घर न पंहुचने पर 6 जुलाई को माता-पिता और परिजनों ने खोज खबर लेनी शुरू की. 6 जुलाई की सुबह 9 बजे छात्रा की लाश नग्न अवस्था में स्कूल से 4 किलोमीटर दूर घने जंगल में मिली.

परिजनों ने बेटी की खोज के लिए रिश्तेदारों के साथ जंगलों में भी तलाश की थी. उन्होंने सोचा कि कहीं उनकी बेटी जंगली जानवरों का शिकार तो नहीं बन गई. लेकिन जब वास्तविकता सामने आई तो सबके होश उड़ गए. स्कूल से महज 4 किलोमीटर दूर जंगल में नाबालिग की लाश को गड्ढे में फेंका गया था.

शिमला पुलिस के मुताबिक, छात्रा से पहले रेप और फिर हत्या की गई. शक है कि बेटी के साथ गैंगरेप हुआ है. एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी महासू में डेरा डाले बैठे हैं लेकिन पांच दिन से ज्यादा के बाद भी कोई सुराग हाथ नहीं लगा और पुलिस खाक छान रही है. एक बात तो तय है कि गुनाहगार शातिर हैं. उन्होंने कोई भी सुराग नहीं छोड़ा है. शिमला के एसपी डी डब्लयू नेगी ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है और जल्द ही दोषियों को सलाखों के पीछे खड़ा करेगी.

गुनाहगारों को गिरफ्तार करने में हो रही देरी से स्थानीय लोंगो में भारी आक्रोश है. लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हो चुके हैं. स्थानीय जनता में अपने बच्चों को लेकर असुरक्षा की भावना पनप रही है. लोग बच्चों को घर से बाहर भेजने से भी डर रहे है. सरोज कंवर, महासू पंचायत प्रधान ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. उन्हें मौत से कम सजा न हो. शिमला से लेकर कोटखाई तक लोगों में उबाल है. सोशल मीडिया पर भी प्रदेश से लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं. सोमवार (10 जुलाई) को कोटखाई में बंद का ऐलान किया गया है.

घर से सात किलोमीटर दूर है स्कूल नाबालिग को भी घर से करीब 7 किलोमीटर घने जंगलों से होकर स्कूल जाना पड़ता था और डेढ़ घंटे का सफर कर स्कूल पहुंचते थे. प्रदेश में कानून व्यवस्था पर भी ऐसी घटना ने सवाली निशान खड़े कर दिए है. शिक्षा विभाग से लेकर शासन-प्रशासन भी सवालों के घेरे में है.

एसपी शिमला और ठियोग के डीएसपी टीम के साथ मौके पर छानबीन में जुटे हुए हैं. मामले की तह तक जाने के लिए कुछ फोन सर्विलांस पर लगाए गए हैं. जुन्गा लैब के विशेषज्ञों से मदद ली जा रही है. बिसरा भी लैब भेजा गया है. घटनास्थल से बरामद शराब की खाली बोतलों से फिंगर प्रिंट लिए गए हैं. अभी तक करीब 15 लोगों से पुलिस पूछताछ की जा चुकी है.

दंगे की झूठी तस्वीर पोस्ट कर भाजपा नेता ने फैलायी अफवाह  

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की घटना पर इस समय देश में चौतरफा राजनीति जारी है ऐसे में कुछ नेता आग मे घी का काम कर रहे हैं जिसमें बीजेपी नेता नूपुर शर्मा का नाम भी जुड़ गया है. पश्चिमी बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में करीब एक हफ्ते से सांप्रदायिक तनाव जारी है. ऐसे में बीजेपी जहां ममता सरकार पर हिंसा रोकने में नाकामी का आरोप लगा रही है. इस बीच बीजेपी की एक नेता पर किसी दूसरे जगह की तस्वीर को पश्चिम बंगाल की बताकर सोशल मीडिया पर शेयर करने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने का मामला सामना आया है.

बता दें की बीजेपी नेता नूपुर शर्मा ने शनिवार को ट्विटर पर एक तस्वीर पोस्ट कर लोगों से पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में भाग लेने की अपील की थी. जिस तस्वीर को पोस्ट किया गया था उस पर लिखा था कि पश्चिम बंगाल में शांति और गरिमा का हर मोर्चे पर बुरा हाल हुआ है. तस्वीर में एक गाड़ी को जलते हुए दिखाया गया है और उसके आस-पास दंगाइयों की भीड़ दिख रही है. शर्मा के ट्वीट के बाद बड़ी संख्या में ट्विटर यूजर्स ने उन पर गलत तस्वीर के माध्यम से नफरत भड़काने का आरोप लगाया.

संगीतकार विशाल डडलानी ने भी नूपुर शर्मा के ट्वीट पर तीखा जवाब दिया. उन्होंने लिखा, ‘2002 के गुजरात दंगे की तस्वीरों का इस्तेमाल बंगाल में सांप्रदायिक नफरत फैलाने के लिए हो रहा है. इस अकाउंट की रिपोर्ट क्यों नहीं की गई है उनके अकाउंट को बंद क्यों नहीं किया गया है जब नेता ही अफवाह फैला रहे हैं तो शांति की उम्मीद किस से की जायेगी.

 

रायबरेली नरसंहार मामले में योगी के दो मंत्री आमने-सामने

लखनऊ। रायबरेली नरसंहार मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दो मंत्री एक दूसरे के लिए खुलकर बयानबाजी कर रहे हैं. गौरतलब है की ऊंचाहार में जमीन विवाद में पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में अब योगी सरकार के मंत्री बृजेश पाठक ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर निशाना साधा है. असल में बृजेश पाठक ने स्वामी प्रसाद मौर्य को ऊंचाहार में पांच लोगों की हत्या के मामले में हत्यारों का संरक्षक बताया है. पाठक ने मौर्य के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि अपराधियों को सरंक्षण देने वाले बख्शे नहीं जाएंगे. उन्होंने कहा कि अपराधियों को संरक्षण देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी.

बता दें की नरसंहार मामले पर कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि जो लोग मारे गए हैं, वो किराए के गुंड़े थे. उन पर अलग-अलग थानों में केस दर्ज है. घटना में मारे गए सभी पांचों शातिर अपराधी थे. वे प्रधान की हत्या के उद्देश्य से गांव में गए थे, जहां ग्रामीणों के कोपभाजन का शिकार हुए. मौर्य ने आगे कहा कि कुछ जातिवादी सोच वाले लोग इसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मारे गए लोग ब्राह्मण नहीं थे, बल्कि अपराधी थे.

रायबरेली की ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र में हुए वीभत्स सामूहिक हत्याकांड की लगातार निंदा की जा रही है. रविवार को हत्याकांड के विरोध में सैकड़ों ब्राह्मणों ने प्रदर्शन किया. हत्याकांड में तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी और दो लोगों को गाड़ी में जिंदा जला दिया गया था.

 

बिहार में बिजली गिरने से 19 की मौत, असम बाढ़ से बेहाल

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पटना। बिहार में अलग-अलग प्राकृतिक घटनाओं से गंभीर जनहानि हुई है वहां आकाशीय बिजली गिरने से 19 लोगो के मारे जाने की खबर है. वहीं असम राज्य में बाढ़ की स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर हो गई है. वहां बाढ़ से अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिहार के सात जिलों में बिजली गिरने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए .जहां कुछ इलाके में हल्की और पूर्वोत्तर में एक -दो स्थानों पर भारी बारिश हुई. एक अधिकारी के अनुसार बिजली गिरने से वैशाली जिले में पांच लोगों की, पटना और भोजपुर में तीन-तीन लोगों की, सारण में दो लोगों की और रोहतास, नालंदा और अररिया जिले में एक-एक व्यक्ति की मौत हो गई. वहीं दुसरी और असम राज्य का बुरा हाल है, बता दें कि असम के करीमगंज जिले में बाढ़ से एक और व्यक्ति की मौत होने के साथ ही राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 26 हो गई है, जबकि 15 जिले में करीब पांच लाख लोग प्रभावित हुए हैं. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 1096 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं और करीब 41 हजार 200 हेक्टेयर क्षेत्र की फसल क्षतिग्रस्त हुई है. इस मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से बात की और उन्हें हरसंभव केंद्रीय सहायता देने का आश्वासन दिया. एक सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि राज्य सरकार ने 128 राहत शिविर बनाए हैं. असम में इस समय ब्रहमपुत्र, दिखो धनसिरी, जिया भरली, बेकी और कुशीयार नदियां उफान पर हैं जिन से हुआ नुकसान अरबों रुपये में है.      

ट्रेन में महिलाओं के साथ हुई ‘गंदी हरकत’, हेल्पलाइन से मदद मांगी तो हंसने लगे अफसर

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pooja nair post

मुंबई। मुंबई की लोकल ट्रेन में एक शर्मनाक घटना का मामला सामने आया है. अपने साथ घटी इस घटना को एक 22 साल की लड़की फेसबुक पर लिखा. 22 साल की पूजा नायर ने अपने फेसबुक पर ट्रेन में घटी शर्मनाक घटना को साझा किया.

पूजा नायर ने फेसबुक पर लिखा कि वह अपनी दोस्त के साथ दोपहर में वोरिवली से दादर जा रही थी. लोकल ट्रेन के लेडीज़ कम्पार्टमेंट में वह बैठी थी. वहां पर उनके अलावा 6 महिलाएं और बैठी थीं, वहीं उसके पास ही हैंडीकैप्ड एरिये के पास एक लड़का खड़ा था. वह वहां से एक लड़की की ओर इशारा कर रहा था, तभी उसने लड़की की तरफ देखकर इशारा किया और गाली देना शुरू कर दिया. उसने 30 सेकंड में 6 बार गाली दी.

पूजा ने लिखा कि जिसके बाद वो सीधा मेरी ओर आ गया, मैंने अपना मुंह नीचे कर लिया. लेकिन वो मेरे पास आया और गाली देना शुरू कर दिया. मेरी तरफ देखते हुए उसने अपना हाथ नीचे किया, अपनी पैंट खोली और गंदी हरकत करने लगा. जिसके बाद मैंने मदद के लिए साथ बैठी महिला से कहा कि वो महिला हेल्पलाइन को फोन करे, उसके बाद हमने महिला हेल्पलाइन को फोन किया.

महिला ने आगे लिखा कि जब मैंने हेल्पलाइन में फोन किया, तो उन्हें फोन पर सारी बात बताई. लेकिन सभी बात सुनकर वह हंसने लगा और फटाफट फोन काट दिया. जैसे ही अगला स्टेशन कांदिवली आया, तो वह आदमी वहां से जाने लगा. हम उस कम्पार्टमेंट में 6 महिलाएं थी, अगर सभी चाहती तो उस व्यक्ति को आसानी से सबक सिखा सकती थीं. जैसे ही मैं उस आदमी की ओर बढ़ी, उसने मुझे कहा कि वह उसका रेप कर देगा. मैंने उसे कहा कि हिम्मत है तो करो.

अपनी फेसबुक पोस्ट पर उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल उठाया. पूजा ने लिखा कि हेल्पाइन्स नंबर क्या हमारी मदद करते हैं? या महिलाओं की समानता का दिखावा किया जाता है?

आपको बता दें कि इससे पहले भी इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें किसी ट्रेन या फ्लाइट में इस तरह की गंदी हरकतें महिलाओं के साथ हुई हैं. उदाहरण के तौर पर पिछले हफ्ते ही बंगलुरु से मुंबई जा रही एक फ्लाइट में एक व्यक्ति को महिला के साथ अश्लील हरकत करते हुए पकड़ा गया था. आरोपी महिला को अपना प्राइवेट पार्ट दिखा रहा था. 31 वर्षीय आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. कुछ दिनों पहले ऐसा ही एक मामला दिल्ली एयरपोर्ट पर सामने आया था.

भगोड़े माल्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

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नई दिल्ली। भारत के भगौड़ो बिजनेसमैन विजय माल्या पर सुप्रीम कोर्ट आज यानि सोमवार को फैसला सुनाएगा. यह फैसला कोर्ट की अवमानना मामले में सुनाया जायेगा जिसमें 9 मई को माल्या को कोर्ट की आज्ञा की अवमानना का दोषी माना गया था बता दें की माल्या ने कोर्ट के आदेश के विरुद्ध जाकर अपने बच्चों के अकाउंट में 40 मिलियन डॉलर ट्रांसफर किए थे. इस मामले में कोर्ट ने माल्या को आदेश दिया था कि वह 10 जुलाई को कोर्ट में पेश हों. माल्या एक साल से यूके में है, वहां लंदन की अदालत में उसके प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई चल रही है. भारत ने ब्रिटेन से निवेदन किया है कि माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाए. पिछले दिनों जी 20 सम्मेलन के दौरान  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन की पीएम टेरीज से इस संबंध में बात भी की थी. बता दें की विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइन भारत के 13 बैंकों की 9000 करोड़ रुपये की लोन डिफॉल्टर घोषित हो चुकी है. 31 जनवरी 2014 तक किंगफिशर एयरलाइन्स पर बैंकों का 6963 करोड़ रुपए बकाया था. इस कर्ज पर ब्याज के बाद माल्या पर कुल कर्ज 9432 करोड़ रुपए हो चुका है. किंगफिशर एयरलाइन्स अक्टूबर 2012 में बंद हो गई थी. दिसंबर 2014 में इसका फ्लाइंग परमिट भी कैंसल कर दिया गया है.

जातिवादी गुंडे ने दलित किशोरी के हाथों से उठवाया मल

उत्तर प्रदेश। भाजपा सरकार में दलित उत्पीड़न की घटनाऐँ जितनी तेजी से बढ़ रही हैं उस तरह का उत्पीड़न अन्य किसी सरकार में नहीं हुआ. एक ओर जहां सरकार स्वच्छता अभियान का खूब जमकर प्रचार कर रही है वहीं हाथ से मल उठवाने जैसी घटनाऐं सामने आ रही हैं.

अब वर्तमान घटना बुलंदशहर स्थित औरंगाबाद क्षेत्र के गांव बकौरा की है जहां  शनिवार 8 जुलाई को दलित किशोरी को एक ठाकुर किसान के खेत में शौच जाना बहुत भारी पड़ गया. उस किसान ने किशोरी के हाथों से  मल उठवाकर खेत से बाहर फिंकवाया और गंदी गंदी गालियां देकर डराया धमकाया.ड़की ने उसका विरोध किया तो उसकी पिटाई की गई, जिसमें किशोरी के कपड़े फट गए और कई  जगह खरोंचे भी आयी  .

पुलिस ने युवती और उसके परिजनों की  शिकायत के पर उस युवक को हिरासत में ले लिया है. घटना के बाद से गांव की दोनों बिरादरियों में तनाव का माहौल है.

जानकारी के मुताबिक 16 वर्षीय दलित किशोरी सुबह करीब पांच बजे किसान के खेत में खुले में शौच गई थी. शौच करके वह ठाकुर किसान के खेत से बाहर निकल रही थी. तभी किसान ने उसको रोक लिया.

उसने किशोरी को डांट-फटकार लगाई और खेत से मल उठाकर बाहर फेंकने को कहा. मल उठाने से इंकार करने पर किसान का पारा चढ़ गया.  पीड़ित किशोरी ने घर पहुंचकर परिजनों को जानकारी दी. इसकी सूचना यूपी-100 पर पुलिस को दी गई. पुलिस ने आरोपी किसान को हिरासत में ले लिया.  पीड़िता ने आरोपी को नामजद कर तहरीर दी है. उधर, मामला पुलिस तक पहुंचने पर आरोपी पक्ष परिजनों पर फैसले को दबाव बनाने में जुटा है पर सवाल अब भी यही उठता है कि इस तरह के दलित उत्पीड़न की घटनाऐँ कब जाकर खत्म होंगी.      

सरकार का भोंपू बन गया है मीडिया

not in my name

“Not In My Name” जून के अंतिम सप्ताह में दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के बुद्धजीवियों का जमावड़ा हुआ जिसको किसी मीडिया चैनल पर प्रसारित होते आपने नहीं देखा होगा. केवल एक चैनल जिसपर पिछले दिनों सीबीआई की रेड पड़ी थी उसने अपने प्राइम टाइम में छोटी सी झलक दिखाई. बाकी चैनल GST को लेकर कांग्रेस को कोस रहे थे, केंद्रीय मंत्रियों का GST के समर्थन में इंटरव्यू दिखा रहे थे, कुछ नीतीश कुमार की तारीफ इसलिए कर रहे थे कि उन्होंने GST और राष्ट्रपति चुनाव में अपने गठबंधन के विरोध में जाकर NDA का समर्थन किया. लेकिन आज की सबसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित इस प्रदर्शन पर भारतीय मीडिया का उपेक्षापूर्ण व्यवहार वास्तव में चिंता का विषय है.

हमारे देश के कुछ संगठन और पोलिटिकल पार्टी इस बात से अपनी नाराजगी जताती हैं कि ऐसे आयोजन केवल यह साबित करने की कोशिश करते हैं कि ऐसा केवल विगत तीन सालों से ही हो रहा है. उनको आज के माहौल को अघोषित आपातकाल की संज्ञा पर भी एतराज़ है. बार-बार वे 84 के सिक्ख दंगों की याद दिलाकर ऐसे आंदोलन को गलत साबित करने की असफल चेष्टा करते हैं.

लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि आपातकाल का भी विरोध हुआ था और 84 के दंगों का भी विरोध हुआ था. और उस विरोध का निशाना केवल सत्तापक्ष था. पूरी जनता ऐसे आंदोलनों के साथ थी. पूरा समाज एक तरफ और सरकार एकतरफ. लेकिन आज की स्थिति दूसरी है. सत्तापक्ष जिससे वर्तमान उन्माद को रोकने की जिम्मेवारी है वह चुप्पी साधे हुए है और उससे जुड़े संगठन समाज में द्वेष और घृणा का उन्माद पैदा करने में जुटे हैं. सत्ता से तो कभी भी लड़ा जा सकता है और इतिहास भी गवाह है कि सत्ता के खिलाफ लड़ाई देर-सबेर जीती गई है. लेकिन समाज में जो मेरा और तेरा की लड़ाई है उससे कैसे लड़ा जाए? यह मुख्य प्रश्न है.

आज समाज का एक छोटा सा वर्ग अपनी आइडियोलॉजी दूसरों पर थोपने पर आमादा है और सरकार की चुप्पी और इससे जुड़े संगठन का सहयोग इसमें खाद्य पानी देने का काम कर रहा है. मीडिया का क्या कहना. यह तो पूरी तरह से सरकार का भोंपू बन गया है. ऐसे में एक सोशल मीडिया ही एक आशा की किरण है जो अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. हम तो बुद्ध के अनुयायी हैं. और उनके अनुसार कोई चीज स्थायी नहीं होती. आज का जो माहौल है वह भी स्थायी नहीं है. इसका भी अंत होना ही है. देखना यह है कि वह शुभ घड़ी कब आती है.

लेखक पी एन राम पासवान हैं.

दलित युवती के अपहरण के बाद 8 लोगों ने किया गैंगरेप

राजस्थान। राजस्थान के सीकर के अजीतगढ़ थाना क्षेत्र में एक दलित युवती के साथ आठ लोगों ने गैंगरेप किया जिसमें युवती ने मामला दर्ज कराया है.

वहां के थाना प्रभारी मंगलाराम ने  बताया कि 19 वर्षीय दलित युवती ने गढ़तकनेत निवासी गिरिराज वर्मा और संदीप योगी सहित आठ लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज करायी है. उन्होंने बताया कि पीड़िता के परिजन की ओर से दर्ज करायी गयी शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने युवती का अपहरण कर लिया और जयपुर एवं अहमदाबाद सहित कई शहरों में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. इसके बाद आरोपी उसे जयपुर के सिंधी कैम्प बस स्टैंड पर छोड़ कर फरार हो गए. जिसके बाद लड़की की हालत बेहद खराब हो गयी.

जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धारा 376 (डी) सहित कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और उसके बाद आरोपियों की तलाश जारी है.

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक 6 जुलाई शाम को आरोपित हरि योगी और उसके साथी उसे जयपुर सिंधी कैंप छोड़कर फरार हो गये. जयपुर आने पर उसने परिजनों को घटना से अवगत कराया जिसके बाद आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया. पीड़िता की मेडिकल जांच करायी गयी है.

गौरतलब है कि गढ़टकनेत निवासी युवती 29 मई को घर से खेत में जा रही थी कि अचानक उसके पास एक कार आकर रुकी. कार में सवार गढ़टकनेत निवासी गिरिराज वर्मा, संदीप योगी ने जबरन उसे कार में डालकर कर अपहरण कर ले गए. आगे जाकर उसे वहां से शाहपुरा ले गए, जहां पांच व्यक्ति और कार में सवार हो गए थे.

   

दलित लड़कियों को पुजारी ने दिया मंदिर से बाहर धक्का

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वड़ोदरा। गोधरा के पास मोहलोल गांव के मंदिर में लड़कियां गौरी-व्रत की पूजा करने के लिए जाना चाहती थीं, लेकिन दलित समुदाय से होने के चलते पुजारियों ने उन्हें मंदिर में घुसने से मना कर दिया. लड़कियों ने आरोप लगाया कि मंदिर के पुजारी ने वहां उन्हें मंदिर के बाहर भी पूजा करने से रोका क्योंकि वह दलित समाज से हैं. यह मामला 8 जुलाई को उस वक्त सामने आया, जब मंदिर के पुजारी बाबू भट्ट ने लड़की को मंदिर से बाहर धक्का दे दिया. लड़कियों के पिता गोपाल मोची ने अपनी ओर से दर्ज शिकायत में पुलिस को बताया कि व्रत की शुरुआत से ही पुजारी उन्हें मंदिर में नहीं जाने दे रहा था क्योंकि वे वाल्मीकि समुदाय से हैं.

मोची ने कहा कि पुजारी लड़कियों को बीते दो दिनों से मंदिर जाने से रोक रहा है, लेकिन लड़कियां हमें बता नहीं रही थीं. लेकिन, शनिवार को जब स्थिति ज्यादा बिगड़ तब उन्होंने हमें इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस मामले को निपटाने के लिए पुजारी से मिलने गया. लेकिन, उनके बेटे नीलेश ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है और वह चाहें तो पुलिस के पास भी जा सकते हैं.

मोची ने कहा कि नीलेश ने मुझे गालियां देते हुए कहा कि यदि लड़कियां मंदिर में प्रवेश करती हैं तो परिसर अशुद्ध हो जाएगा. मोची ने कहा कि हम लोग उस मंदिर में नहीं जाते हैं क्योंकि हमारे समुदाय का दूसरा मंदिर है, लेकिन उसके बंद होने के चलते लड़कियां उस मंदिर में चली गई थीं. जब मामला बातचीत से नहीं निपटा, तब मोची ने पुलिस में धमकी और एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज कराया. मोची ने पुजारी, उसके बेटे और एक अन्य व्यक्ति मधु मेहता के खिलाफ केस दर्ज कराया. हालांकि पुलिस अब तक किसी को अरेस्ट नहीं कर पाई.

धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस: गृह त्याग कर सत्य की खोज में निकल पड़े थे तथागत बौद्ध

  buddha

9 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है. इसे गुरु पूर्णिमा और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस भी कहा जाता है. बोधिसत्व राजकुमार सिद्धार्थ ने 29 वर्ष की आयु में इसी दिन अपना गृह त्याग किया था और सत्य की खोज में निकल पड़े थे. 6 साल की कठिन तपस्या के बाद उनको वैसाख पूर्णिमा के दिन ज्ञान प्राप्त हुआ. 49 दिनों तक निर्वाण सुख में डूबे रहने के बाद सिद्धार्थ गौतम ने यह तय किया कि उन्होंने जो ज्ञान हासिल किया है, उसे लोगों तक पहुंचाना है. लोगों को धम्म सिखाना है.

भगवान बुद्ध महाकारुणिक थे और करुणा से ओत प्रोत होकर उन्होंने निर्णय लिया कि सबसे पहले मुझे अपने पुराने साथियों को उपदेश देना है. इसके बाद वह बोधगया से निकल कर सारनाथ के ऋषिपत्तन मृगदाय वन में पहुंचे जहां उनके पांच पुराने साथी थे, जिन्होंने लगभग छह वर्षों तक उनके साथ कठोर तप किया था और उस दौरान बोधिसत्व सिद्धार्थ गौतम की सेवा करते थे.

हालांकि तथागत बुद्ध उन पांचों को नहीं भूले थे. वैसाख पूर्णिमा को ज्ञान प्राप्ति के बाद और निर्वाण सुख पूरा करने के बाद 11 दिनों में लगातार पैदल चल कर वह वाराणसी के ऋषिपत्तन मृगदाय वन में पहुंचे. और अपने पुराने पांचों साथियों को धम्म उपदेश दिया. तथागत बुद्ध का उपदेश प्राप्त करने के बाद वो पांचों शिष्य अर्हत हो गए. वहीं ऋषिपत्तन मृगदाय वन में वह बुद्ध की सेवा करने लगे. इसी वन में तथागत बुद्ध ने अपने पांचों शिष्यों के साथ अपना पहला वर्षावास किया.

यहीं पर वाराणसी के बहुत बड़े व्यापारी का पुत्र यशकुलपुत्त भी बुद्ध से प्रभावित होकर उनका शिष्य बन गया. यशकुलपुत्त के चार अन्य धनाढ्यों ने जब यह सुना कि हमारा मित्र बुद्ध के शरणागत हो गया है तो कहीं ऐसा तो नहीं है कि वहां कोई बड़े व्यवसायिक गतिविधि को अंजाम दे रहा है? यदि हम वहां नहीं गए तो हम पीछे रह जाएंगे. तब वो चारो मित्र भी वहां पहुंचें, और बुद्ध का उपदेश सुनने के बाद वे भी प्रव्रजित हो गए यानि बुद्ध के शिष्य बन गए. यहीं पर इनके पचास अन्य मित्र भी आएं और बुद्ध का उपदेश सुनने के बाद भिक्षु बन गए.

इस वर्षावास के समाप्ति पर जब बुद्ध के ये साठों शिष्य अर्हत हो गए तब बुद्ध ने उन्हें बहुजन हिताय बहुजन सुखाय का उपदेश दिया. जिस दिन तथागत बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे धम्म चक्क पवत्तन सुत्त कहते हैं. चूंकि भगवान बुद्ध गुरुओं के भी गुरु थे, इसलिए हमारे देश में इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. पूर्णिमा का दिन भगवान बुद्ध के जीवन में विशेष महत्व रखता है.

केंद्र की तरह यूपी में भी दिखावे कर रही है भाजपा सरकार: मायावती

लखनऊ. शनिवार को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती उत्तर प्रदेश इकाई के वरिष्ठ पदाधिकारियों को एक बैठक में सम्बोधित कर रहीं थीं जिसमें उन्होंने कहा कि बीजेपी एण्ड कम्पनी और आरएसएस के लोग बसपा को ही असल खतरा व चैलेन्ज मानते हैं और हमारे लोगो को गुमराह करने में लगे हैं. सब जानते है कि वह बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर को भी अपने रास्ते की रूकावट मानते थे. उन्होंने कहा कि इसके साथ ही बीजेपी सरकार अपनी घोर विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए पहले गोरक्षा, आतंकवाद, कश्मीर, सीमा पर तनाव और नोटबन्दी जैसा विफल कदम उठाया और अब बिना पूरी तैयारी के ही जीएसटी जैसी जटिल नई कर व्यवस्था लागू की है.

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इसी प्रकार उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार भी अब तक के अपने कार्यकाल में जनहित व विकास एवं अपराध-नियंत्रण व कानून-व्यवस्था के मामले में बुरी तरह से विफल साबित होती हुई नजर आ रही है. हर तरफ असुरक्षा के भयभीत करने वाले माहौल के साथ-साथ प्रदेश में सड़क, पानी, बिजली, अस्पताल, शिक्षा आदि की आवश्यक सरकारी सेवाओें का भी काफी ज्यादा बुरा हाल बना हुआ है. उन्होंने कहा कि यह सब तब हो रहा है जब केन्द्र व प्रदेश में दोनों ही जगह बीजेपी की ऐसी सरकार है जिसने उत्तर प्रदेश के लगभग 22 करोड़ लोगों से काफी बड़े-बड़े वायदे किये हुये हैं और ऐसे हसीन व रंगीन सपने दिखाये हैं कि लोग बड़ी आसानी से इनके बहकावे में भी आ गये.

उन्होंने कहा कि केन्द्र में बीजेपी की मोदी सरकार की तरह ही प्रदेश की योगी सरकार भी जुमले व दिखावे की सरकार साबित हो रही है. हमारी पार्टी बी.एस.पी का मिशनरी मूवमेन्ट खासकर उत्तर प्रदेश में पहले की तरह ही काफी मजबूती से जड़ पकड़े हुये है, जबकि बीजेपी एण्ड कम्पनी और आर.एस.एस. केवल लोगों को गुमराह करने के लिये अनेक प्रकार की ग़लत अफवाहें फैलाने का काम करते रहते हैं.

मायावती ने आरोप लगाया कि आर.एस.एस. पिछले चुनावों के साथ-साथ अपने जातिवादी, साम्प्रदायिक व हिंसक राजनीतिक एजेण्डे को लागू करने में आजकल सरकारी धन, सुविधा व शक्ति का भी खुलकर उपयोग कर रहा है. उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में खासकर उनकी पार्टी बसपा को निशाना बनाने का काम किया जा रहा है और दलितों को गुमराह करने का प्रयास भी किया जा रहा है लेकिन इस मंशा में वे कभी सफल नहीं होंगे.

 

Review: ‘मॉम’ जो अपने बच्चों के लिए ‘कुछ भी’ कर सकती है

 

भगवान हर जगह नहीं हो सकता था, इसलिए उसने मां बनाई. ये लाइन सुनकर वाकई मां के लिए अपार स्नेह उमड़ पड़ता है और लगता है कि उसके आंचल में जाकर बैठ जाएं. ममतामयी मां मां अगर ठान ले तो अपने बच्चों की खातिर वह कुछ भी कर गुजर सकती है. यही, रवि उदयवार की फिल्म का थीम है.

ऐसा बहुत ही कम मौकों पर होता है जब बॉलीवुड कहानी से लेकर कैरेक्टराइजेशन तक पर अपना दिमाग लगाता है. फिल्म में डायरेक्टर ने मेहनत की है. इस बात को इससे समझा जा सकता है कि कहानी काफी स्वाभाविक होते हुए भी, बांधे रखती है. श्रीदेवी की यह 300वीं फिल्म है और उन्होंने एक और शानदार फिल्म अपने नाम दर्ज कर ली है.

कहानी स्कूल टीचर श्रीदेवी की है. जो अपने पति और बेटियों के साथ शांति भरा जीवन जी रही होती है. लेकिन क्लास में एक स्टुडेंट टीचर की बेटी को गंदा क्लिप भेज देता है और टीचर उसके मोबाइल को खिड़की से बाहर फेंक देती है. बस इसके बाद उस लड़के को बात चुभ जाती है. टीचर की बड़ी बेटी उसके पति की पहली पत्नी की है तो वह खिंचाव मां-बेटी के रिश्ते में दिखता है. लेकिन वैलेंटाइंस डे पर जब वह बेटी पार्टी में जाती है तो उसके साथ कुछ ऐसा होता है कि सब की जिंदगी में तूफान आ जाता है. फिर एक मां अपनी बेटी का बदला लेने के लिए निकलती है और उस हद तक गुजर जाती है जिसके बारे में पुलिस अधिकारी से लेकर बड़े-बड़े अफसर तक सोच नहीं पाते. फिल्म की कहानी पहले ही सीन के साथ इंट्रस्ट जगाने लगती है. कहानी की पृष्ठभूमि दिल्ली की है. नाइट पार्टी से लेकर यंगस्टर्स की लाइफ को इसमें केंद्र में रखा गया है. फिल्म की कहानी निर्भया कांड की यादें ताजा करा देती हैं, और रौंगटे खड़ा करने का काम करती है.

श्रीदेवी ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि वे एक जानदार अभिनेत्री हैं. फिल्म में अगर कुछ मौकों पर उनकी कंपकंपाती आवाज और उच्चारण को छोड़ दें और सिर्फ उनकी एक्टिंग को देखें तो वे कमाल हैं. उन्होंने टीचर और एक मां के कैरेक्टर को इतने मंजे हुए अंदाज में निभाया है कि वह दिल को छू जाता है. स्क्रीन पर उनकी मजबूत मौजूदगी देखकर अच्छा लगता है. नवाजुद्दीन सिद्दीकी का रोल छोटा लेकिन काफी महत्वपूर्ण है, और उनकी यह खासियत है कि वह अपनी छाप अच्छे से छोड़ जाते हैं. वे फिल्म में दरियागंज के लोकल डिटेक्टिव बने हैं, जिसे बूंदी का रायता पसंद है. कम समय की स्क्रीन प्रेजेंस के बावजूद डीके का उनका कैरेक्टर लंबे समय दर्शकों के जेहन में रहने वाला है. अक्षय खन्ना का पुलिस अधिकारी का कैरेक्टर ठीक-ठाक है. अदनान और सजल का काम भी अच्छा है.

फिल्म विषय आधारित होने के बावजूद कहीं बोर नहीं होती है और कोई सिर दुखाऊ संदेश नहीं देती है. यहां मां का महिमामंडन नहीं है, मां यहां एक्शन में है. फिल्म को मस्ट वॉच कहा जा सकता है

फिल्म: मॉम

रेटिंगः 4 स्टार

डायरेक्टरः रवि उदयवार

कलाकारः श्रीदेवी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अक्षय खन्ना, अदनान सिद्दीकी और सजल अली

मोदी और शाह के इशारे पर छापे मार रही है सीबीआईः लालू

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पटना। भ्रष्टाचार के मामले में 7 जुलाई को लालू यादव के 12 ठिकानों पर सीबीआई ने छापे मारे थे. छापों के बाद राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव मीडिया के सामने आए. लालू पर आरोप है कि 2006 में उन्होंने रेल मंत्री रहते हुए BNR ग्रुप के होटलों के रखरखाव का ज़िम्मा एक प्राइवेट फ़र्म को दे दिया और बदले में ज़मीन ले ली. लालू ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के इशारे पर सीबीआई उनके परिवार को परेशान कर रही है.

लालू यादव ने बड़े ही रुखे स्वर में कहा कि इस मामले में सीबीआई का कोई दोष नहीं, बल्कि दोष तो मोदी और अमित शाह का है. RJD प्रमुख ने कहा, ‘मैं चारा घोटाले के मामले की सुनवाई के लिए रांची में था. वहीं सुबह मुझे पता चला कि सीबीआई के 17 अधिकारी मेरे घर छापे के लिए आए हैं. सीबीआई के लोगों ने ऊपर से ऑर्डर की बात कही. मैंने परिवार के लोगों से सीबीआCBI is raiding Modi and Shah’s gestureई के साथ सहयोग करने को कहा. अब सीबीआई जवाब दे कि उनको मेरे घर से क्या मिला.’

उन्होंने सवाल किया कि इस कथित घोटाले के समय तेजस्वी तो नाबालिग था, तो ऐसे में उसके खिलाफ केस कैसे दर्ज कर लिया गया. लालू यादव ने कहा, ‘मैं 31 मई 2004 में रेलमंत्री बना था, जबकि होटल का लीज 2003 में दिया गया.’ उन्होंने यह भी कहा, कि अटल जी की सरकार में लिए गए फैसले के तहत ही 2006 में टेंडर दिया गया था. इसकी कीमत 1 करोड़ 15 लाख थी और यह टेंडर अधिक बोली के हिसाब से दिया गया है. इसमें कह रहे हैं कि होटल के बदले जमीन मिल गई.

पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, सीबीआई प्रधानमंत्री के अधीन है. राज उनका है, सीबीआई उनकी है. ये हमको डीमोरलाइज करना चाहते हैं, हम डीमोरलाइज होने वाले नहीं है. इनकी घुड़की से हम डरने वाले नहीं है. 27 अगस्त को होने वाली ‘भाजपा भगाओ-देश बचाओ’ रैली फेल करने के लिए ही ये सब किया जा रहा है.

मोदी और बीजेपी सरकार के मुखर विरोधी रहे लालू ने कहा, ‘वे मुझे खत्म करना चाहते हैं. सुनो मोदी, अमित शाह, हम फांसी के फंदे पर लटक जाएंगे, लेकिन उससे पहले तुम्हारा अहंकार और बुनियाद चूर-चूर कर देंगे.’ उन्होंने पीएम मोदी और शाह पर महागठबंधन में दरार डालने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘चिल्लर और खटमल उनकी दवाई से खत्म हो जाएंगे.’ लालू ने कहा कि वो बीजेपी सरकार को उखाड़ फेकेंगे.

लालू यादव के समर्थन ममता

इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लालू यादव का समर्थन करते हुए सीबीआई की छापेमारी को ‘राजनीतिक बदले’ के तहत की गई कार्रवाई करार दिया है. ममता ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह भाजपा के नेतृत्व में केंद्र सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई के अलावा और कुछ नहीं है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी दलों को परेशान करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. ममता ने कहा, ‘बीजेपी के पास दो काम हैं. एक, विपक्षी दलों को परेशान करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करना और दूसरा, बाहरी लोगों को लाकर उन्हें दंगे शुरू करने के काम में लगाना.’ उन्होंने कहा, ‘ साल 2019 में भाजपा की केंद्र में सत्ता से छुट्टी हो जाएगी.’