अमेरिका के इस अखबार की नजर में आतंकी हैं सीएम योगी

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Newyorks Times

हाल ही में एक अमेरिकी अखबार में काम करने वाले कार्टूनिस्ट बेन गैरिसन ने अपने एक कार्टून के जरिए भारतीय मीडिया पर हमला बोल दिया है. इस कार्टून में गैरिसन ने ज्यादातर भारतीय मीडिया घरानों खासकर टीवी चैनलों को मोदी के इशारे पर चलने वाला दिखाया है. कार्टून में गैरिसन ने मोदी को लेटे हुए दिखाया है, जबकि अन्य मीडिया हाउसों को उनका दूध पीते हुए दिखाया है.

मोदी और भारतीय मीडिया पर इस हमले के बाद अमेरिका के एक मशहूर अखबार के निशाने पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं. हम बात कर रहे है अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की. अखबार ने नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला बोला है. अखबार ने लिखा है कि विकास की बात कहकर तीन साल पहले केंद्र की सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार के विकास एजेंडे की जगह हिंदुत्व ने ले ली है.

अखबार ने ये भी दावा किया कि मोदी सरकार के शासन में देश के करीब 17 करोड़ मुसलमान आर्थिक और समाजिक तौर पर हाशिए पर आ गए हैं. इसके साथ ही अखबार ने योगी आदित्यनाथ के संगठन हिंदू युवा वाहिनी को आतंकी संगठन बताया है और योगी आदित्यनाथ को आतंकी संगठन का सरगना बताया है.

अखबार ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश में एक ऐसे महंत को शासन करने के लिए चुना गया है जो कि पहले से ही नफरत भरे बोल बोलता रहा है. न्यूयार्क टाईम्स ने योगी के उस बयान को कोट किया है, जिसमें योगी ने मुसलमान शासकों द्वारा ऐतिहासिक गलतियों का बदला लेने के लिए हिन्दू युवा वाहिनी बनाने की बात कही थी. एक चुनावी रैली में योगी ने चिल्लाकर कहा था, “हम सभी धार्मिक युद्ध की तैयारी कर रहे हैं.”

नदी के तेज बहाव में वाहन सहित बह गए SDM

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जयपुर। भारी बारिश के कारण राजस्थान की नदियां उफान पर हैं. कुछ नदियों में अचानक पानी छोड़े जाने से रास्तो का कटान हो गया है. बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उपखण्ड अधिकारी रामेश्वरदयाल मीणा शुक्रवार सुबह बांसवाड़ा से कुशलगढ़ जा रहे थे. इस दौरान वे बिलड़ी के पास ढेबरी नदी पुल को पार कर रहे थे कि नदी का बहाव अचानक तेज हो गया, जिससे उनकी गाड़ी पानी में बह गई.

इस घटना को देखने वाले कुछ लोगों ने बताया की एसडीएम मीणा और वाहन चालक दोनों गाड़ी में से कूद गए थे. जिसमें चालक करीब दो किलोमीटर की दूरी पर तैर कर बाहर निकला. एसडीएम मीणा के नदी में बहने की घटना से जिला प्रशासन में हलकान मच गया. घटना की सूचना मिलने के बाद जिला अधिकारी, एसपी सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे. एसडीएम को तलाशने के लिए आसपास के गोताखरों को लगाया गया है. साथ ही ग्रामीण भी उन्हें तलाशने में जुटे हैं.

जानकारी देते हुए एसपी कालूराम रावत ने बताया कि एसडीएम कुशलगढ़ लौट रहे थे. तभी रास्ते मे बागीदौरा और कुशलगढ़ के बीच एक रपट पर करीब पांच से सात फीट पानी चल रहा था. जिसकी अनदेखी कर एसडीएम के चालक ने वाहन पानी मे उतार दिया थोड़ा आगे चलते ही तेज बहाव में वाहन बह गया. इससे करीब दो किलोमीटर दूर चालक किसी पेड़ के सहारे से अटक गया लेकिन एसडीएम का कहीं पता नही चला.

बता दे की बांसवाड़ा में गुरुवार शाम से ही बारिश हो रही है. बारिश का दौर जारी होने से जहां सुरवानिया बांध और हेरो डेम में पानी की आवक तेज हो गई है, वहीं कुछ गांवों में दुकानों में पानी घुस गया है. उदयपुर मार्ग पर नीलगिरी के पेड़ गिर गए जिससे रास्ता जाम हो गया. कुछ गांवों में रात से ही बिजली गुल है तो कुछ जगह के रास्ते बिल्कुल बंद हो गये हैं.

     

जेल में बंद नोबेल विजेता शाओबो का निधन, 8 साल से थे जेल में बंद

शेनयांग। नोबल पुरस्कार विजेता ली शाओबो का 61 साल की उम्र में चीन की जेल में निधन हो गया है. उन्होंने देश की साम्यवादी रूढ़ियों से परे जाकर लोकतांत्रिक खुलेपन का सपना देखा था. उनके संघर्ष को सम्मानित करते हुए 2010 में उन्हें नोबल पुरस्कार दिया गया था. उनके निधन के बाद नोबेल कमेटी ने चीन को उनकी मौत का जिम्मेदार ठहराया है वहीं मानव अधिकार वाले ली की पत्नी को आजाद करने का दबाव बना रहे हैं.

शाओबो ने थ्येनआनमेन चौक पर प्रज्ज्वलित हुई संघर्ष की मशाल निरंतर जलाए रखी. 2008 से वह जेल में थे लेकिन मान्यताओं से समझौता कभी नहीं किया. वह दुश्मन भी किसी को नहीं मानते थे, यह उन्होंने अपनी पहली पुस्तक ‘नो एनीमीज’ लिखकर साफ कर दिया था. किसी के प्रति घृणा का भाव भी नहीं था, यहां तक कि कम्युनिस्टों के प्रति भी नहीं. इसका सुबूत उनकी किताब ‘नो हेटर्ड’ देती है.

शेनयांग मेडिकल यूनिवर्सिटी ने गुरुवार को बयान जारी करके शाओबो की मृत्यु की घोषणा की. उन्हें लिवर का कैंसर था जो जेल में रहते हुए ही बढ़कर अंतिम चरण में पहुंच गया था. जब हालत खराब हुई तब महीने भर पहले उन्हें जेल से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया.

शाओबो के इलाज के तरीके और स्तर को लेकर भी विवाद था. काफी कोशिश के बाद शाओबो तक पहुंचे अमेरिका और जर्मनी के डॉक्टरों ने उन्हें अविलंब विदेश के किसी अच्छे अस्पताल में पहुंचाने की आवश्यकता जताई थी लेकिन चीन सरकार उस पर तत्काल कुछ करने के लिए तैयार नहीं हुई. नतीजतन, गुरुवार को शाओबो चीन की बंदिशें तोड़कर दुनिया से विदा हो गए.

शाओबो को 2008 में चीन सरकार को राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव और मानवाधिकारों की मांग वाली याचिका देने के बाद गिरफ्तार किया गया था. यह याचिका चार्टर 08 के नाम से चर्चा में आई थी. अगले साल ही उन पर मुकदमा चलाकर 11 साल की सजा सुनाई गई. तभी से वह जेल में थे. इस दौरान उनकी पत्नी को नजरबंद कर दिया गया. लगातार तन्हाई में रहने की वजह से उनकी दशा विक्षिप्तों जैसी हो गई थी. उन्हें अपने पति से जेल में मिलने की इजाजत भी पूरे महीने में सिर्फ कुछ मिनटों के लिये थी.

बुधवार को शाओबो की दशा और बिगड़ गई थी जब उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया और उन्हें सांस लेने में भी कठिनाई होने लगी थी. बावजूद इसके उन्हें वेंटीलेटर सुविधा नहीं दी गई. मानवाधिकार संगठनों ने शाओबो के स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी न दिये जाने का आरोप लगाया था. कहा है कि भारी सुरक्षा वाले अस्पताल से गलत जानकारियां दी जा रही हैं.

नार्वेजियन नोबेल कमेटी के प्रमुख बेरिट रेज एंडरसन ने शाओबो की मौत के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि विश्व के कई देश उनका उपचार करने के लिए तैयार थे पर चीन नहीं माना. एंडरसन ने कहा कि 2010 में शाओबो जेल में थे जब उन्हें नोबेल मिला. तब खाली कुर्सी पर सम्मान को रखा गया था. उनका कहना है कि अब उनके सम्मान में इसे हमेशा खाली रखा जाएगा. अमेरिकी मंत्री रेक्स टिलरसन ने चीन से कहा है कि वह अब शाओबो की पत्नी को रिहा करके देश छोड़ने की अनुमति दे. जर्मनी के मंत्री हीको मास ने उन्हें हीरो करार दिया है. चांसलर एंजिला मर्केल के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी मौत ने सवाल खड़ा किया है कि चीन सरकार ने उनका इलाज जल्द शुरू क्यों नहीं कराया.

उधर, चीन की सरकारी वेबसाइट पर शाओबो को लेकर सवाल हटा दिए गए हैं. इसके जरिये मीडिया को रोजाना ब्रीफ करने की व्यवस्था थी. चीन के मानवाधिकार कार्यकर्ता ए वेईवीई ने बर्लिन में कहा कि नोबेल विजेता की मौत चीन के क्रूर चेहरे का रूप है. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि चीन का रवैया उसके अभिमान को दर्शाता है.

अवांछित फोन कॉल से परेशानी में भारत पहले स्थान पर

नई दिल्ली। सर्वे के अनुसार अवांछित फोन कॉल से होने वाली परेशानी के मामले में भारत अन्य देशों की श्रेणी में पहले स्थान पर है. टेलिकॉम कंपनी के लुभावने वादों औऱ बैंकों से कर्ज, कार्ड की पेशकश से लेकर ग्राहकों को फोन कनेक्शन बदलने के लिये सस्ते डेटा की जानकारी देने वाली फोन कालों से आम भारतीय दूरसंचार ग्राहक परेशान हैं। इस तरह की कॉल से परेशान देशों की सूची में भारत पहले स्थान पर है। एक सर्वे में यह निष्कर्ष निकाला गया है।

फोन डायरेक्टरी एप ट्रयूकॉलर ने अपने एक सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला है, इसके अनुसार भारत में औसतन हर मोबाइल धारक को महीने में 22 से अधिक अवांछित कॉल मिलती हैं।

इस मामले में भारत का स्थान अमेरिका, ब्राजील, चिली व दक्षिण अफ्रीका आदि देशों से उपर है। अमेरिका व ब्राजील में दूरसंचार ग्राहक को औसतन हर महीने इस तरह की 20 फोन काल आती हैं जिनमें बैंकों की ओर से कार्ड या कर्ज की पेशकश की जाती है या दूसरी दूरसंचार कंपनियों के प्रतिनिधि सस्ती काल दरों की पेशकश करते हुए लुभाते हैं।

अल्पसंख्यक परिवार पर भीड़ का ट्रेन में हमला

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आगरा। कुछ दिन पहले रेल में यात्रा करते हुए हरियाणा के एक अल्पसंख्यक की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था की अब उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के पास ट्रेन में फिर से शर्मनाक घटना हुई है.

यह घटना शिकोहाबाद-कासगंज पैसेंजर ट्रेन की है जिसमें सफर कर रहे 10 सदस्यों वाले एक अल्पसंख्यक परिवार को भीड़ ने निशाना बनाकर मार पिटाई शुरू कर दी. इस परिवार में महिलाओं और बुजुर्गों के साथ ही एक दिव्यांग शख्स भी परिवार के साथ सफर कर रहा था पर गुंडो की भीड़ ने किसी को नहीं छोड़ा, सभी के साथ मार पिटाई की गयी.

घटना की जानकारी देते हुए अस्पताल में भर्ती परिवार के एक सख्स ने बताया की हम पर इसलिए हमला हुआ क्योंकि हमारे कपड़े और पहचान उनसे अलग नजर आ रही थी. पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है.

50 साल के पीड़ित मोहम्मद शाकिर ने बताया, ‘भोगांव के पास हम ट्रेन में चढ़े.  ट्रेन ने सिर्फ 4 किमी. तक की ही दूरी तय की होगी जब एक शख्स ने मेरे बेटे दिव्यांग बेटे फैजान का फोन छीन लिया.’ शाकिर ने बताया, ‘फोन छीनने का फैजान ने विरोध किया तो उन लोगों ने मारपीट शुरू कर दी. परिवार की महिलाओं और फैजान को गालियां देने लगे.’ 10 लोगों में से 4 को फ्रैक्चर हुआ है वहीं लगभग सभी सदस्यों को सिर और पेट में चोट लगी है. शाकिर कहते हैं, ‘निबाकरोरी स्टेशन पर जब ट्रेन रुकने वाली थी उससे कुछ पहले इन लोगों ने चेन खींच दी. इसके बाद कुछ और लड़के रॉड लेकर घुस गए और एक साथ हम पर हमला कर दिया.’

मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘ऐसा लग रहा है कि पीड़ित महिलाओं को प्रताड़ित किया गया है. उनके शरीर पर चोट के निशान हैं और साथ ही कपड़े भी फटे हुए हैं. फिलहाल वो लोग ज्यादा कुछ कहने की हालत में नहीं है. हमने मामले की जांच शुरू कर दी है. दोषियों को पकड़ लिया जाएगा. गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में अल्पसंख्यको पर यह दूसरी बड़ी घटना है.

मीरा कुमार ने की मायावती से मुलाकात, मांगा राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन

Meira kumar meet Mayawati

लखनऊ। राष्ट्रपति पद के चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे-वैसे उम्मीदवार अपने लिए समर्थन जुटाने में तेजी से जुट गए हैं. इसी सिलसिले में विपक्ष की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार आज लखनऊ पहुंची. आज पहले वह बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती से बसपा ऑफिस में मिली. उनके साथ कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी व राजबब्बर भी थे. मायावती ने मीरा कुमार का ज़ोरदार स्वागत किया. मायावती के साथ बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा भी मौजूद थे.

इस मुलाकात के ज़रिए मीरा कुमार ने मायावती से अपने लिए समर्थन की अपील की. बता दें, मायावती पहले ही मीरा को इस पद के लिए सही उम्मीदवार मान चुकी हैं. मीरा कुमार अब राष्ट्रपति चुनाव के लिए समाजवादी विधायकों से मतों की अपील करेंगी. मीरा लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी मिलेंगी. साथ ही वो कांग्रेस समेत रालोद और दूसरे सहयोगी दलों के नेताओं से भी मुलाकात कर समर्थन जुटाएंगी.

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. मायावती ने कहा कि बसपा देश के राष्ट्रपति पद के चुनाव में रामनाथ कोविंद को समर्थन नहीं देगी. बसपा मीरा कुमार का साथ देगी. बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने कहा कि बसपा सुप्रीमो ने निर्देश दिया है कि पार्टी की तरफ से मीरा कुमार का समर्थन किया जाए.

राष्ट्रपति पद के राजग प्रत्याशी राम नाथ कोविंद यहां पहले ही आकर अपने लिए वोटों की लाबिंग कर चुके हैं. उन्होंने अपने प्रचार अभियान की शुरुआत ही लखनऊ से की थी, जबकि लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीराकुमार यहां उत्तराखंड के बाद आई हैं. मीराकुमार का इस प्रदेश से राजनीतिक जुड़ाव भी रहा है. पूर्व में वह बिजनौर से चुनाव लड़ चुकी हैं, जिसमें उन्होंने मायावती और राम विलास पासवान को हराया था.

गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के विधानसभा में 47 विधायक हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी के 19 विधायक हैं. कांग्रेस के सात विधायकों का मत उन्हें हासिल हो सकता है. देश में 17 जुलाई को नए राष्ट्रपति के के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, जिसके तहत केंद्र की सत्ता पर काबिज एनडीए के रामनाथ कोविंद के मुकाबले में विपक्ष की ओर से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार उम्मीदवार हैं. लखनऊ में विधानभवन के तिलक हॉल में 17 जुलाई को दस बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा. वोटिंग तिलक हॉल के चार टेबल पर होगी.

खुशखबरीः रेलवे में जल्द होगी 1 लाख पदों पर भर्ती

नई दिल्लीभारतीय  रेलवे ने खाली पड़े पदों पर भर्तियों को जल्द ही भरने का निर्णय लिया है. रेलवे ने  करीब 1 लाख पदों के लिए भर्ती करने की तैयारी शुरू कर दी हैं. वर्तमान सरकार जल्द ही बेरोजगारों को राहत देने के लिए रेलवे में भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. बताया जा रहा है कि इसमें ज्यादातर पद सेफ्टी से जुड़े होंगे. सरकार के इस कदम से बेरोजगारों को काफी रहत मिलेगी.

असल में यह भर्तियां रेलवे के अलग-अलग रिजन में निकाली जाएगी जिसमें वेस्टर्न, सेंट्रल, हार्बर नॉर्थ सेंट्रल रेलवे, ईस्टर्न रेलवे आदि शामिल है. सभी भर्तियों में पदों के काम अनुसार उम्मीदवारों की योग्यता आदि तय की जाएगी और आरक्षण संबंधी नियमों के आधार पर उम्मीदवारों को कई वर्ग में छूट भी मिलेगी. पिछले कुछ सालों में इतने बड़े पैमाने में भर्ती नहीं हुई है.

बताया जा रहा है कि सभी भर्तियां अलग-अलग चरणों में होगी. अलग-अलग कैटिगरी के लिए अलग समय पर भर्ती हो सकती है. इस समय रेलवे में सेफ्टी से जुड़े 2.5 लाख पद खली है. रेलवे की यूनियन भी सरकार से इन पदों को भरने की मांग कर रही है जिसके लिये अंतिम प्रक्रिया शुरु हो चुकी है.

भड़काऊ बयानः ‘अगर राम मंदिर नहीं बना तो रोक दी जाएगी हज यात्रा’

brijbhushan

बुंदेलखंड। यूपी के चरखारी बीजेपी विधायक बृजभूषण सिंह राजपूत ने फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें भड़काऊ बोल बोले हैं. बृजभूषण ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर राम मंदिर निर्माण रोका गया तो हज यात्रा ही रोक दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि अगर हमारे भगवान राम के मंदिर को बनने में वो व्यवधान पहुंचाएंगे तो हम भी उनकी हज यात्रा में व्यवधान पहुंचाएंगे. वीडियो संदेश में राजपूत ने अमरनाथ यात्रियों के हत्यारों को घर में घुसकर सबक सिखाने की बात कही है. इसके साथ ही उन्होंने हिंदुस्तान के अल्पसंख्यकों को भी चेतावनी दे डाली कि वह मंदिर निर्माण का विरोध करना छोड़ दें.

बृजभूषण ने वीडियो में कहा कि ‘हम सब 100 करोड़ हिंदू सोचें अगर हमारे भगवान राम का मंदिर नहीं बन सकता तो इन्हें हज यात्रा पर क्यों भेजा जाए, इनकी हज सब्सिडी रोकी जाए. देश में 20 करोड़ मुस्लिम हैं, इनका आरक्षण खत्म करना चाहिए. 20 करोड़ पाकिस्तान की भी जनसंख्या नहीं है, मैं पूछता हूं ये अल्पसंख्यक कहां से हैं… इन्हें आरक्षण, नौकरी, धन प्राप्ति का लाभ प्राप्त हो रहा है.’

बीजेपी विधायक ने देश की आजादी के वक्त को याद करते हुए कहा कि यह हिंदुओं का देश है अल्पसंख्यकों का देश नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि अगर इस देश के 100 करोड़ हिंदुओं ने उदारवादी हृदय नहीं दिखाया तो मुस्लिम रह भी नहीं पाएंगे. उन्होंने कहा कि हमारे देश की सरकारें हजयात्रा के लिए सब्सिडी देती हैं लेकिन हम इसका विरोध नहीं करते. इसी तरह मुस्लिमों को भी सोचना चाहिए कि इस देश में भगवान राम का मंदिर बने.

उन्होंने आगे कहा कि अगर हिंदू मुसलमानों को भगाने की बात करने लगे तो भारत में एक भी मुस्लिम रहने नहीं पाएगा. देश आजाद हुआ तो मुसलमानों को पाकिस्तान और हिंदुओं को हिंदुस्तान दिया गया, यह हिंदुओं का देश है, अल्पसंख्यकों का नहीं है. मुसलमान कहते हैं कि वे यहां पैदा हुए हैं, इस मुल्क के हैं और उन्हें इस देश से कोई भगा नहीं सकता. हमने भगाने की तो बात अभी तक की ही नहीं, अगर हिंदू भगाने की बात करने लगे तो तुम यहां रह ही नहीं पाओगे.

उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि अगर राम मंदिर में रुकावट पैदा की गई तो मक्का मदीना यात्रा को वो खुद रोकेंगे. विधायक ने बार-बार 100 करोड़ हिंदू और 20 करोड़ मुस्लिम के अनुपात को दोहराया. अल्पसंख्यकों को मिलने वाले आरक्षण पर भी सवाल उठाए और इसके लिए सरकारों को जिम्मेदार ठहराया.

अपराधी नेताओं पर चुनाव आयोग की कार्रवाई क्यों नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है. बता दें की संसद और विधानसभाओं को अपराधियों से मुक्त कराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की खिंचाई की है. वर्तमान व्यवस्था के अनुसार 2 साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधी व्यक्ति जेल से छूटने के 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते. सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल में यह मांग की गई है, कि 2 साल से अधिक सजा पाने वाले नेताओं को चुनाव लड़ने से आजीवन प्रतिबंधित किया जाए.

शीर्ष अदालत ने इस मसले पर चुप्पी के लिए आयोग के रवैये पर नाराजगी जताई. अदालत ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या उसका यह स्टैंड केंद्र सरकार के दबाव के चलते है. सरकार ने दोषी ठहराए गए नेताओं को चुनाव लड़ने से आजीवन प्रतिबंधित करने का विरोध किया है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग के स्वायत्त संस्था होने के दावे पर भी सवाल खड़ा किया.

जस्टिस रंजन गोगोई और नवीन सिन्हा की पीठ ने चुनाव आयोग की ओर से जमा कराए गए ऐफिडेविट को पढ़ते हुए कहा कि उसका यह शपथपत्र याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्यय की चिंता को ही उजागर करता है. अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे नेताओं के केसों की तेज सुनवाई के लिए स्पेशल अदालतें गठित करने की मांग की है. उपाध्याय की याचिका के मुताबिक, ‘अपराधी साबित हुए नेताओं को विधायिका, कार्यपालिका के अलावा न्यायिक क्षेत्र से भी पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए.’ जिसके लिये कड़ा कदम चुनाव आयोग को उठाना जरूरी है.

योगी सरकार ने छोटा किया मुलायम-अखिलेश का काफिला

Mulayam Singh

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार ने समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के काफिले में शामिल 3-3 स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) को वापस लेने का निर्णय लिया है. दरअसल, एसयूवी की मांग अधिक होने की वजह से यह फैसला लिया गया है. वर्तमान में पूर्व मंत्री की हैसियत से इन दोनों नेताओं के काफिले में वन प्लस फाइव एसयूवी है.

राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश शुक्ला ने बताया कि अखिलेश और मुलायम के काफिले में तीन-तीन एसयूवी अधिक थी. ये गाड़ियां पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले में एस्कॉर्ट के रूप में चलती हैं. मुख्य गाड़ी जिनमें अखिलेश और मुलायम चलते हैं, उसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. जो एसयूवी उनके काफिले से ली जा रही है, उनके स्थान पर एम्बेसडर गाड़ियां दी जाएंगी.

शुक्ला ने बताया कि अब सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के काफिले में एक सामान गाड़ियां रहेंगी. इनमें वन प्लस टू एसयूवी और तीन एम्बेसडर होगी. राज्य संपत्ति विभाग के अधिकारी का कहना है कि एसयूवी की डिमांड ज्यादा है और विभाग के पास एसयूवी कम है. लिहाजा ये कटौती करनी पड़ रही है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा नेता मुलायम सिंह पर मेहरबानी दिखाते हुए उन्हें अपनी पसंदीदा मर्सिडीज रखने की छूट दी है. योगी ने पहले ही मुलायम सिंह यादव की मर्सिडीज हटाने से मना कर दिया था कि नेताजी की इच्छा के बगैर उसे नहीं हटाया जाए.

सिर्फ अखिलेश और मुलायम ही नहीं बल्कि मायावती और राजनाथ सिंह के सरकारी काफिले को भी छोटा किया गया है और अब सभी सरकारी काफिलों में 5 एसयूवी की जगह दो एसयूवी और तीन एंबेसडर चलेंगे.

यूपी विधानसभा की सुरक्षा में चूक, बाल-बाल बचे विधायक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा सदन में बड़ी चूक का मामला सामने आया है सदन के अंदर विस्फोटक सामग्री मिलने से हडकंप मच गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठक बुलाने के साथ ही मामले की जांच के सख्त आदेश दे दिये हैं.

राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक आनन्द कुमार ने यूनीवार्ता को बताया कि पीईटीएन नामक विस्फोटक विरोधी नेती रामगोविंद चौधरी की कुर्सी के आसपास मिला है जिसकी मात्रा सात ग्राम है. फारेंसिक जांच में इसकी पुष्टि हुई है.

जानकारी के अनुसार बताया गया है की इस विस्फोटक के लिए डेटोनेटर की जरुरत होती है लेकिन डेटोनेटर नहीं मिले हैं. यह सुरक्षा में बहुत बड़ी चूक है लेकिन पूरी जांच के बगैर कुछ कहा जा सकता. कल शाम विस्फोटक मिलने के बाद तत्काल इसे जांच के लिए भेज दिया गया था.

विस्फोटक मिलने के बाद यूपी विधानभवन की सुरक्षा और बढा दी गई है. जगह जगह कमाण्डों तैनात कर दिए गए हैं. चप्पे-चप्पे पर चौकसी बरती जा रही है. विशेषज्ञों की माने तो विस्फोटक काफी शक्तिशाली है. विधानभवन में गृह विभाग और पुलिस विभाग के बडे अधिकारी भी मौजूद हैं लेकिन सभी के जहन में सवाल यही आ रहा है कि विस्फोटक अंदर पंहुचा तो कैसे, आखिर सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कहां हुई.

 

पढ़िए कैसे, दलितों के आगे झुके प्रशासन और सवर्ण

हिसार। हिसार के सब डिवीजन हांसी के गांव भाटला में 15 जून को सार्वजनिक हैंडपंप से पानी भरने को लेकर दलित और ब्राह्मण लड़कों के बीच झगड़ा हुआ. दलित समुदाय ने जब मारपीट और झगड़े की शिकायत पुलिस थाने में की तो ब्राह्मणों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया. ब्राह्माणों ने दलितों के गली में चलने से, पशुओं को खेत में चराने से, तालाब में पशुओं को पानी पीने से रोक दिया. एक तरह से दलित समुदाय के लोगों का किसी भी सार्वजनिक जगह पर जाने से प्रतिबंध लगा दिया.

इस सामाजिक बहिष्कार का दलित समुदाय ने हांसी के अम्बेडकर चौक पर विरोध प्रदर्शन किया. दलित समाज के लोग और संगठन आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज करके सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए. उस पर भी न तो कोई पुलिस आई और न ही कोई अधिकारी. इसी मांग को लेकर अब दलित समाज के लोगों ने हांसी में भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है.

डॉ. अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया(डीएसएफआई) के छात्र मनोज अठवाल ने दलित दस्तक को घटना के बारे बताया. मनोज ने कहा कि ब्राह्मण और जाट समुदाय के लड़कों ने दलित लड़कों से मारपीट की. यह मारपीट सार्वजनिक हैंडपंप से पानी भरने के लिए हुई. ब्राह्मण और जाट लड़कों ने दलितों को पानी भरने नहीं दे रहे थे. दलित लड़कों ने जब इसका विरोध किया तो ब्राह्माण और जाट लड़के दलित लड़कों से मारपीट करने लगे.

अठवाल ने कहा कि जब दलित समुदाय के लोग घायल लड़कों को अस्पताल लेकर जा रहे थे तो सरपंच प्रतिनिधि ने उन्हें अस्पताल जाने से भी रोका. वैसे तो गांव की सरपंच सुदेश देवी हैं, लेकिन उनका पति पुनीत प्रतिनिधि की भूमिका निभाता है. पुनीत ने दलित समुदाय पर समझौता करने का दबाव भी बनाया. जब दलितों ने समझौता करने से मना कर दिया तो पुनीत ने गांव से उनकार सामाजिक बहिष्कार कर दिया.

दलितों ने इसके खिलाफ पुलिस को एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने को लेकिन पुलिस अधिकारी ने कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया. फिर दलित समुदाय ने नेशनल अलायन्स फॉर दलित ह्यूमन राइट्स के संयोजक रजत कल्सन के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन शुरू किया. दो दिन तक अम्बेडकर चौक पर धरना दिया कोई भी पुलिस अधिकारी नहीं आया.

रजत कल्सन के अलावा डीएसएफआई के मनोज अठवाल, चौ. देवीलाल चौधरी के डीएसएफआई के अध्यक्ष विक्रम अटल और गांव के तीन दलित लड़के भूख हड़ताल पर बैठ गए. शुरूआत में प्रशासन ने विरोध कर रहे दलितों को कोई सुरक्षा और एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई. भूख हड़ताल के चौथे दिन पुलिस प्रशासन दलितों को कथित तौर से मनाने के लिए आया. दलितों का विरोध प्रदर्शन खत्म करने और समझौता करने के लिए ब्राह्मणों और जाटों ने गैर कानूनी तरीके से धरने पर भी बैठे. लेकिन दलितों ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी तब तक भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. पांचवे दिन पुलिस प्रशासन और ग्राम प्रधान ने दलितों की मांगों का मान लिया और दलितों ने विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया.

दलित समुदाय ने मांग की थी कि एससी-एसटी एक्ट के तहत आरोपियों पर मुकदमा दर्ज हो. प्रशासन ने प्रधान सहित 7 लोगों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है. एक्ट के तहत पीड़ितों को 25-25 हजार की राशि देने का वायदा किया. प्रशासन ने उनकी बात को मानते हुए 60 ब्राह्मण और 1 जाट को गिरफ्तार किया है.

बाबा रामदेव ने खोली प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी

हरिद्वार। पंतजलि की सफलता के बाद अब बाबा रामदेव ने एक और बिजनेस की नींव डाल दी है. पतंजलि के संस्थापक बाबा रामदेव ने हरिद्वार में अपनी प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी ‘पराक्रम सुरक्षा प्राइवेट लिमिटेड’ का उद्घाटन किया. इस सेक्टर में अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए चुनौती बनने के बाद बाबा रामदेव ने प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में कई करोड़ रुपए का निवेश किया है.

सूत्रों के मुताबिक बाबा रामदेव की प्राइवेट सिक्योरिटी में आर्मी और पुलिस के रिटायर्ड कर्मियों को प्रशिक्षक के रूप में बहाल किया है. योग गुरु बाब रामदेव ने प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी के उद्घाटन के मौके पर ‘पराक्रम सुरक्षा, आपकी रक्षा’ का नारा दिया और कहा कि यह सुरक्षा एजेंसी देश के जन-जन में सैन्य भाव जगाने का काम करेगी.

उन्होंने कहा, ‘पतंजलि के प्रयास से योग, आयुर्वेद और स्वदेशी अभियान से देश में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं सशक्त राष्ट्रीय चेतना पैदा हुई है. पराक्रम सुरक्षा एजेंसी देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में आत्मसुरक्षा एवं राष्ट्रसुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम करेगी. पहले बैच के 100 कर्मचारियों को पिछले एक महीने से ट्रेनिंग दी जा रही है. इस साल के आखिर तक कंपनी की देशभर में शाखाएं होंगी जिनके लिए अलग अलग स्तर पर लड़को का चुनाव किया जायेगा. जिसके चयन के लिये लिखित या शारीरिक परीक्षा आयोजित करायी जायेगी.

 

गोल्ड के लिए फ्री लॉकर सुविधा देगा पेटीएम

नई दिल्ली।  अगर सोना घर में पड़ा है तो उसके लिए पेटीएम फ्री लॉकर सुविधा देने जा रहा है. इस समाधान के लिए पेटीएम ने पेटीएम गोल्ड लांच किया है जो अब समूचे भारत में उपलब्ध है. कंपनी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि शुद्धता, सुरक्षा, रखरखाव के ज्यादा खर्च और लॉकर्स के लिए लंबी वेटिंग अवधि से जुड़ी चिंताओं की वजह से ज्यादा से ज्यादा ग्राहक अब पेटीएम गोल्ड की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. यह प्रोडक्ट एमएमटीसी-पीएएमपी की ओर से उपलब्ध कराया जाता है. पेटीएम गोल्ड भारत के पसंदीदा वेल्थ मैनेजमेंट असेट को किफायती बना रहा है.

पेटीएम गोल्ड को एमएमटीसी-पीएएमपी से भी खरीदा जा सकता है. इसे एमएमटीसी-पीएएमपी के फ्री और 100 प्रतिशत बीमित सुरक्षित लॉकर्स में रखा जा सकता है. यदि सोने को लॉकर्स में रखा जाता है तो उसके लिए पेटीएम गोल्ड के ग्राहकों को इसके लिए कोई शुल्क नहीं चुकाना पड़ता है. ग्राहक कीमतों के अपडेट्स देख सकते हैं और उनके पास यह विकल्प भी है कि वे एमएमटीसी-पीएएमपी को अपना संग्रहित सोना ऑनलाइन भी बेच सकते हैं. इसके लिए कंपनी बड़े पैमाने पर प्रचार कर रही है.

 

ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति को भ्रष्टाचार में नौ साल की सजा

ब्राजील। ब्राजील के एक बड़े मामले में पूर्व राष्ट्रपति लुइज इनेशियो लूला डी सिल्वा को भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग के आरोप में बुधवार को साढ़े नौ साल जेल की सजा सुनाई गई है. लूला को यह सजा सरकारी तेल कंपनी पेट्रोब्रास में भारी गबन और घूस लेने को लेकर दी गई है. कोर्ट ने कहा कि वह सजा के खिलाफ अपील कर जेल से बाहर रह सकते हैं. बता दें की वामपंथी राजनेता लूला 2003 से 2010 ब्राजील के राष्ट्रपति रहे जिन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं.

कोर्ट के इस फैसले से उनका राजनीति कैरियर खत्म होने की संभावना है. करीब सात साल पहले कुर्सी से हटे लूला को उनके सामाजिक और आर्थिक सुधारों के लिए दुनिया भर में प्रशंसा मिली थी. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें धरती का सबसे लोकप्रिय राजनेता बताया था. इस हाई प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामले ने तीन वर्षों से ब्राजील को बेचैन कर रखा था जिसके बाद उनके राजनीतिक करियर के खत्म होने के पूरे कयास लगाये जा रहे हैं.

गंगा के पास कचरा फैलाया तो 50 हजार का जुर्माना

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नई दिल्ली। गंगा नदी के लिए सरकार सख्त होती जा रही है सरकार ने इसके लिये नये नियम बनाये हैं. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने गुरुवार को गंगा नदी और इसके आस-पास होने वाले प्रदूषण को लेकिर सख्ती बरतते हुए हरिद्वार से उन्नाव के बीच आने वाला गंगा नदी के पास 100 मीटर का क्षेत्र ‘नो डेवलपमेंट जोन’ के तौर पर घोषित कर दिया है साथ ही गंदगी फैलाने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाने का निर्देश दिया है.

NGT के अनुसार, करीब 7,304 करोड़ रुपये इन क्षेत्रों पर खर्च किया गया है लेकिन यह भी व्यर्थ चला गया. एनजीटी ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि नियोजन व नियमन में मौलिक त्रुटियां रहीं जिसके कारण गंगा की सफाई नहीं हो पायी.

ट्रिब्यूनल ने निर्णय लिया था कि गंगा के सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों उत्तराखंड के हरिद्वार से उत्तरप्रदेश के कानपुर के बीच की जांच की जाएगी ताकि स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आए. सुप्रीम कोर्ट से भेजे गए 32 वर्ष पुराने नदी प्रदूषण के एक मामले पर ग्रीन ट्रिब्यूनल में 6 फरवरी से सुनवाई की जा रही है.

भारतीय प्रजातंत्र का खेल

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भारतीय प्रजातंत्र का यह अजब खेल है कि एनडीए एवं यूपीए दोनों ने ही दलित समाज के व्यक्ति को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है. एनडीए ने भाजपा के वरिष्ठ नेता/कार्यकर्ता, दो बार के राज्यसभा सांसद एवं बिहार के वर्तमान गवर्नर रामनाथ कोविंद को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. दूसरी ओर यूपीए ने कांग्रेस की चार बार की लोकसभा सांसद एवं लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया है. याद रहे कि मीरा कुमार बाबू जगजीवन राम की पुत्री हैं, वही बाबू जगजीवन राम जिन्होंने सन् 1977 में कांग्रेस से त्यागपत्र दे दिया था.

वर्तमान समय में दो बड़े गठबंधन आखिर किसी दलित को राष्ट्रपति का उम्मीदवार क्यों बना रहे हैं, यह समझना बहुत कठिन है. हमें यह भी जान लेना चाहिए कि यूपीए की उम्मीदवार मीरा कुमार को बसपा की अध्यक्ष एवं वर्तमान में बहुजन समाज की मुख्य नेता मायावती का भी समर्थन मिल रहा है.

भाजपा ने दलित समाज के व्यक्ति को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार क्यों बनाया है, यह समझना ज्यादा मुश्किल नहीं लगता. हम सभी जानते हैं कि भाजपा भरसक प्रयास कर रही है कि किसी तरह से 2019 तक दलितों को बड़ी संख्या में अपनी ओर कर लिया जाए. विशेष कर उत्तर प्रदेश में. उसके लाख चाहने और दिखावा करने के बाद भी दलित उससे जुड़ नहीं रहा है. दूसरा, एक दलित को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बना कर भाजपा विपक्षियों एवं दलितों का मुंह बंद करना चाहती है ताकि उसे कोई दलित विरोधी न कह सके. तीसरी ओर, भाजपा उन दलितों का भी मुंह बंद करना चाहती है जो वर्तमान भाजपा की केंद्र एवं राज्यों की सरकारों में प्रभावी भागेदारी मांग रहे हैं. आज का दलित दिखावे के प्रतिनिधित्व से संतुष्ट नहीं है. वह चाहता है कि वह भी मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, केंद्र में रेलवे, वित्त, उद्योग आदि मंत्रालाय का मंत्री बने ताकि देश की नीति का निर्धारण कर सके.

भाजपा द्वारा एक दलित को अपनी ओर से राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाने की जो सबसे बड़ी वजह जानकार बताते हैं, वह है वर्तमान समय में दलितों में भाजपा की केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रति आक्रोश को शांत करना. कहीं न कहीं भाजपा को यह अहसास हो गया है कि दलित भाजपा एवं उसकी सरकारों के काम-काज से विरक्त हो रहे हैं. टूट रहे हैं. दलितों पर अत्याचार की बढ़ती घटनाओं ने उनके युवाओं को ज्यादा नाराज किया है. यह गुस्सा सोशल मीडिया पर ज्यादा दिखाई देता है. और साथ ही साथ सड़कों पर भी. इस दौरान भाजपा की सरकारों एवं दल ने दलितों को प्रताड़ित ही नहीं किया, बल्कि लज्जित भी किया है. सभी जानते है कि हैदराबाद में रोहित वेमुला के साथ क्या हुआ. जब उसकी मां ने न्याय के लिए गुहार लगाई तो भाजपा की केंद्र सरकार ने उन्हें उनकी जाति और पति को लेकर और भी लज्जित किया. ऊना में सरेआम गौ रक्षकों ने जिस प्रकार दलितों को रस्सी से बांधकर पीटा वह किसी भी प्रजातंत्र के लिए शर्मनाक वाक्या है, पर गुजरात की सरकार ने मुजलिमों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की, जब बसपा अध्यक्ष मायावती ने संसद में और ऊना के दलितों ने सड़क पर हंगामा किया तब कहीं जाकर सरकार जागी, परंतु आज भी उन दलितों को न्याय नहीं मिला. इसके बाद भाजपा के लीडरों की दलितों के प्रति वैमनस्यता तब सामने आई, जब उत्तर प्रदेश में उनके दल के लीडर ने बहुजन समाज की शीर्ष नेता मायावती पर ही अपशब्दों से हमला कर दिया. जब एक बार फिर दलितों ने संसद से सड़क तक हंगामा किया तो भाजपा ने दिखाने भर के लिए उस नेता को अपनी पार्टी से निकाला परंतु दूसरे ही क्षण उसकी पत्नी को दल में पद देकर एवं उत्तर प्रदेश विधानसभा में टिकट एवं मंत्रीपद देकर दलितों को लज्जित किया. उधर भाजपा के अध्यक्ष ने दलितों के साथ स्नान कर और कुछ दलितों के साथ खाना खाकर दलितों को कैमरे पर यह बताने की कोशिश की कि देखो आप कितने ‘निम्न’ हो फिर भी हम आपके साथ स्नान एवं खान-पान कर रहे हैं. ऊधर भाजपा के एक शीर्ष कैबिनेट मंत्री ने दलितों की तुलना कुत्ते से कर दी और उस पर कोई भी कार्यवाही नहीं हुई.

सर्वोपरि दलितों पर अत्याचार और लज्जित करने की घटना, एक बार पुनः उत्तर प्रदेश में हुई, जहां पर सहारनपुर में दलितों पर खुलेआम अत्याचार हुए और जब वहां के युवाओं ने उसके खिलाफ गुहार लगाई तो उनके ही खिलाफ केस दर्ज कर उनको जेल भेज दिया गया. इसी कड़ी में बांदा में जब दलितों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मिलने वाले थे तो वहां के दलितों को शैम्पू और साबुन देकर और नहाकर आने के लिए कहा गया. उपरोक्त सभी घटनाएं दलितों को एक ओर प्रताड़ित करती है और दूसरी ओर लज्जित. ऐसी स्थिति में आज का दलित यह सोच रहा है कि वो जाए तो जाए कहां. शायद इस गुस्से और विरक्ति का भान प्रधानमंत्री को भी है, और इसीलिए उन्होंने कहा कि आप मेरे दलित भाईयों को मत मारिए, मुझे मार लिजिए. पर दलित इस बयान से नाखुश है, क्योंकि उसको यह लगता है कि जब देश का प्रधानमंत्री विवश हो कर के न्याय दिलाने की जगह अपने ऊपर हमले को आमंत्रित करे तो दलितों के लिए क्या न्याय बचता है? इस सामाजिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में रामनाथ कोविंद को प्रत्याशी बनाकर भाजपा यह जताना चाहती है कि देखो, हम दलितों का कितना ख्याल रखते हैं. हम उन्हें राष्ट्रपति तक बना रहे हैं. परंतु शायद भाजपा यह भूल रही है कि आज का दलित समाज उसकी चालों को भली भांति समझ रहा है. आज का दलित यह जानता है कि यद्यपि राष्ट्रपति का पद बहुत बड़ा है लेकिन वह दलितों के लिए कुछ नहीं कर सकता. उसे तो कैबिनेट की सलाह पर ही काम करना होता है. और वह यह जानता है कि कैबिनेट में दलितों की भागेदारी न के बराबर है. दलितों के पक्ष में निर्णय कैसे लिए जाएंगे आने वाले राष्ट्रपति के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती होगी.