लालू यादव के कारण जदयू से निकाले जाएंगे शरद यादव!
पटना। 27 अगस्त यानि कल शरद यादव और नीतीश कुमार का 14 साल पुराना रिश्ता टूट सकता है. बिहार की हालिया राजनैतिक घटना के बाद दोनों की राह अलग हो चुकी है, हालांकि शरद यादव अभी भी जदयू के सदस्य हैं. लेकिन संभव है कि लालू प्रसाद यादव की रैली में शामिल होने के बाद उनकी सदस्यता खत्म हो जाए.
जदयू के नीतीश खेमे ने शरद यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की विधिवत तैयारी भी कर ली है. लालू की रैली में जाने को तैयार दिख रहे शरद यादव को पार्टी के महासचिव के.सी त्यागी ने चिट्ठी लिखी है. इसमें त्यागी ने शरद यादव को 27 अगस्त को लालू यादव की रैली में शामिल होने से मना किया है.
पत्र में यह भी कहा गया था कि यदि वह इसमें शामिल होते हैं तो वह ”पार्टी के सिद्धांतों” के खिलाफ काम करेंगे. नीतीश ने अपने महासचिव त्यागी द्वारा यादव को भेजे एक राजनीतिक संदेश में कहा है कि लालू यादव की रैली में शामिल होने का मतलब यह होगा कि वह स्वेच्छा से पार्टी छोड़ रहे हैं.
हालांकि शरद यादव ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह राजद की रैली में शामिल होंगे और शनिवार को पटना के लिए रवाना होंगे.
शरद यादव के पार्टी से अलग होने के बाद उनकी राज्यसभा सदस्यता भी जा सकती है. जदयू सूत्रों के मुताबिक जदयू इसके लिए जरूरी कार्रवाई करने को तैयार है.
चुनाव आयोग पहुंचा नीतीश-शरद का झगड़ा
नई दिल्ली। जनता दल यूनाइटेड में मचा घमासान दिल्ली पहुंच गया है. शरद यादव और नीतीश कुमार के बीच पार्टी पर हक को लेकर छिड़ी जंग के बीच शरद यादव शुक्रवार को चुनाव आयोग पहुंच गए. यहां शरद यादव ने दावा किया कि वो “असली” पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं और राष्ट्रीय परिषद के ज्यादातर सदस्य उनके साथ हैं.
शरद यादव के वकीलों ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर दावा किया कि वह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. लिहाजा पार्टी के सिंबल पर उनका हक है. शरद खेमे की ओर से चुनाव आयोग के सामने 14 राज्य यूनिटें के साथ होने का दावा किया गया है. शरद गुट का कहना है कि नीतीश कुमार के साथ सिर्फ बिहार की इकाई है. ज्यादातर राज्यों के अध्यक्ष हमारे साथ हैं इसलिए जदयू हमारी है, हमारी ही रहेगी.”
जबकि दूसरी ओर नीतीश खेमा भी इस मामले से निपटने को तैयार है. जनता दल यू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने शरद यादव की इस बात को खारिज किया कि उनके साथ सिर्फ बिहार इकाई है. पूर्व मंत्री ने “दलित दस्तक” को बताया- “शरद जी के साथ सिर्फ दो या तीन राज्य के लोग हैं. 14 राज्यों की बात गलत है. बाकी सभी एमएलए और एमएलसी भी हमारे साथ हैं, इसलिए हमें कोई चिंता नहीं है. फिर भी अगर चुनाव आयोग हमसे कुछ मांगेगा तो हम सारे कागजात देने को तैयार हैं.”
शरद खेमें द्वारा चुनाव आयोग में पार्टी और चुनाव चिन्ह पर दावा करने के बाद देखना यह दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग का रुख क्या होता है और वह किसके पक्ष में फैसला सुनाता है.
बलात्कारी बाबा की सजा हज्म नहीं कर पा रही भाजपा, अब सुब्रमण्यम ने किया समर्थन
नई दिल्ली। बलात्कारी राम रहीम का समर्थन करने वालों में भाजपा के दो नेता शामिल हो गए है. पहले साक्षी महाराज और अब सुब्रमण्यम स्वामी. साक्षी महराज ने मीडिया के सामने ही राम रहीम को सीधा सादा और भक्तों के लिए भगवान बताया था. लेकिन अब सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर के माध्यम से राम रहीम का समर्थन किया है.
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राम रहीम का समर्थन करते हुए कहा कि मीडिया द्वारा हिंदू विराट लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. स्वामी का कहना है कि केवल विराट हिंदुओं को खतरा बताया जाता है. अपने इस ट्वीट में स्वामी ने कांची शंकराचार्य मर्डर केस, योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ झूठा आरोप, श्री-श्री के खिलाफ दर्ज हुए केस का जिक्र भी किया. स्वामी के इस ट्वीट पर कई लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
इस पर बिनोद कुमार सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देत हुए लिखा, ‘क्या राम रहीम इतने कमजोर और लाचार थे?कल के हादसे से लगता तो नहीं हैं?’ जवाहर जैन ने स्वामी पर ही सवाल दागे, आप सही हो लेकिन राम रहीम का क्या? उस पर लगे आरोप क्या झूठे हैं? क्या हिंदूत्व का सच्चा चेहरा है? क्या आप उस बलात्कारी को समर्थन करते हैं?
आशू रमीज ने लिखा कि भाजपा वालों के बलात्कारी राम रहीम से मजबूत सम्बंध है इसलिए इन्हें सजा हज़म नहीं हो रही. एक ने लिखा व्यक्ति लिखा कि आपके कहने का मतलब बलात्कारी राम रहीम को फंसा के दोषी करार दिया गया न्यायालय में? आप बलात्कारी का समर्थन कर रहे हैं? एक ने लिखा भाजपा संतो को हिंदू नाम पर इस्तेमाल कर रही है. उन्हें इस्तेमाल कर टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया जाता है. हिंदुओं को जागरुक होना होगा. भाजपा 51 हजार मुस्लिम लड़कियों को दे रही हैं लेकिन हिंदू लड़कियों को नहीं.
एक ने लिखा बलात्कारी बाबाओं के भक्त स्वामी, भोगवादी संस्कृति के तनचले बाबाओं से और अपेक्षा भी क्या की जा सकती है. इस प्रकार कई लोगों ने स्वामी और भाजपा की जमकर खिंचाई की.
सतीश खंडेलवाल ने तो रामरहीम के वकील पर भी तंज कस दिया. उन्होंने लिखा ना आसाराम का, ना रामपाल का, और ना राम रहीम का, वकील तो सलमान खान का ही बढ़िया है,
धोनी के करिश्माई बोल ने दिलाई भारत को जीत
नई दिल्ली। पाल्लेकेले में टीम इंडिया की 100 रनों से बड़ी साझेदारी के बाद सिर्फ़ अपना चौथा वनडे खेल रहे श्रीलंका के ऑफ़ स्पिनर अकिला धनंजय ने अपने तीन ओवरों में मैच का रुख़ बदल दिया. भारत का पहला विकेट 109 के स्कोर पर गिरा और फिर 131 के स्कोर पर 16वें से 22वें ओवर के बीच भारत ने अपने 7 विकेट गंवा दिए.
एक सिरे पर खड़े पूर्व कप्तान एमएस धोनी का साथ निभाने आये भुवनेश्वर के साथ अगले 100 रनों का सफ़र टीम इंडिया के लिए लंबा हो सकता था. लेकिन धोनी ने एक बार फिर क्रिकेट मैदान पर अपना करिश्मा दिखाया, ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी के ज़रिये नहीं, बल्कि समझदारी के साथ पार्टनरशिप निभाते हुए मैच में बल्ले से कमाल करने वाले भुवनेश्वर कुमार (80 गेंद, नाबाद 53 रन, 4 चौके, 1 छक्का) कहते हैं, “थोड़ा हैरान करने वाली बात ज़रूर थी. अच्छी पार्टनरशिप हो रही थी और अचानक 3-4 विकेट गिर गए. मैं बैटिंग करने गया तो एमएस ने कहा कि अपना नेचुरल गेम खेलो. जैसा टेस्ट में खेलते हो वैसा ही खेला. मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं था. 7 विकेट गिर चुके थे और हमारे पास खोने को कुछ नहीं था.
ख़ास बात ये है कि इस पूरी पारी में धोनी ने क़रीब 25 ओवर पिच पर रहते हुए सिर्फ़ एक चौका लगाया और मैच को मुक्कमल अंजाम पर पहुंचा दिया. वनडे में पहली बार अर्द्धशतक लगाने वाले भुवी कहते हैं कि दूसरे सिरे पर माही के होते हुए उनपर कोई दबाव नहीं था. भुवी ने कहा, ‘उनके दूसरे सिरे पर होने से अफ़रातफ़री और दबाव तो नहीं होता. मुझे पता था कि उनके होते हुए आख़िर में 7-8 के रेट से रन बनाना भी मुश्किल नहीं..इसलिए मैं ज़रा भी फ़िक्रमंद नहीं था.’ दरअसल लक्ष्य का पीछा करने में माही का कोई सानी नहीं. लक्ष्य का पीछा करते हुए धोनी पाल्लेकेले में 39 वीं बार नॉटआउट रहे.
बिहार में बाढ़ से 418 लोगों की मौत, डेढ़ करोड़ से ज्यादा प्रभावित
पटना। बिहार में बाढ़ से प्रभावित जिलों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है. बाढ़ से बिहार के 19 जिले किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढी, शिवहर, समस्तीपुर, गोपालगंज, सारण, सीवान, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया प्रभावित हैं. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार शुक्रवार तक बाढ़ की वजह से मृतकों का आंकड़ा 418 पहुंच गया है. 19 जिलों में लगभग 1.67 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.
जिलों से आई रिपोर्ट के आधार पर आपदा प्रबंधन विभाग ने शुक्रवार को 418 लोगों के मरने की पुष्टि की है, जबकि बाढ़ से प्रभावितों की संख्या एक करोड़ 67 लाख से अधिक हो गई है.
सहरसा और मुजफ्फरपुर के अलावा अन्य जिलों में भी लोगों की मौत की खबर है. सिवान जिले से बाढ़ के चलते किसी की मौत की सूचना नहीं है. विभाग की रिलीज में बताया गया है कि कुल 1403 सामूहिक रसोइयों में 3.54 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.
बाढ़ से राहत बचाव के काम में एनडीआरएफ की 28 टीमों को लगाया गया है. इसके अलावा एसडीआरएफ की 16 टीमें भी राहत बचाव के काम में लगी हैं. सेना के 630 जवान बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं. कुछ जगहों पर बाढ़ का पानी घटा है जिससे लोग अपने घर लौट रहे हैं लेकिन इन जगहों पर बीमारी फैलने का डर बना हुआ है.
बिहार में राहत शिविरों में कमी की गई है. पहले 624 शिविर बनाए गए थे जो अब घटकर 368 हो गए हैं. इनमें लगभग 1.59 लाख लोग आश्रय ले रहे हैं. यह जानकारी आपदा प्रबंधन विभाग ने दी है. अकेले अररिया जिले में ही बाढ़ के चलते 87 लोगों की मौत हुई है.
इसके अलावा सीतामढ़ी में 43, कटिहार में 40, पश्चिमी चंपारण में 36, पूर्वी चंपारण में 32, मधुबनी में 28, दरभंगा में 26, किशनगंज में 24, माधेपुरा में 22, गोपालगंज में 20, सुपौल में 16 और पूर्णिया में 9 लोगों की मौत हुई है.
बाढ़ के कारण अब तक जिलों से 24 हजार 350 झोपड़ियां ध्वस्त हुई हैं. एक हजार से अधिक मकानों को आंशिक क्षति हुई है. कच्चा-पक्का मकानों के क्षति का आकलन किया जा रहा है. सात लाख हेक्टेयर से अधिक खेतों में लगी फसल नष्ट हो चुकी है. बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का काम चल रहा है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व सेना के जवान राहत बचाव अभियान में लगे हुए हैं.
तीनों बलों की 51 टीम के 2248 जवान और 280 मोटरबोट के माध्यम से राहत अभियान में लगे हैं. प्रभावितों के लिए राहत शिविर, सामुदायिक किचेन चलाया जा रहा है. जो लोग अपने घरों की ओर लौट रहे हैं, उन्हें चूड़ा, चावल, आलू, दाल आदि खाद्य सामग्री का फूड पैकेट दिया जा रहा है.
राम रहीम के समर्थन में आए भाजपा सांसद साक्षी महाराज
नई दिल्ली। साध्वी यौन शोषण मामले में सीबीआई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया. जिसके बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़की हुई है. ऐसे में जहां सभी राजनीतिक दल लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भाजपा सांसद साक्षी महाराज के राम रहीम के समर्थन में बयान दे रहे हैं.
साक्षी महाराज ने कहा कि गुरमीत राम रहीम सीधे सादे आदमी हैं और यह आरोप भारतीय संस्कृति के खिलाफ साजिश है. एक महिला ने उनके खिलाफ आरोप लगाए, लेकिन करोड़ों लोग उन्हें भगवान मानते हैं. मैं कोर्ट का सम्मान करता हूं, लेकिन अब अगर कोई बड़ी घटना होती है तो इसके लिए कोर्ट जिम्मेदार रहेगा.
साक्षी महाराज ने कहा कि पिछले कुछ समय से योजनाबद्ध तरीके से सिर्फ साधु संन्यासी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षडयंत्र किया जा रहा है. यदि करोड़ों लोग किसी को भगवान मानते हैं तो कोर्ट को इस बात को भी ध्यान रखना चाहिए था.
साक्षी महाराज के इस बयान से भाजपा हाईकमान अवश्य नाराज होगा. अब देखना होगा कि पार्टी अपने इस सांसद के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है.
गौरतलब है कि शुक्रवार को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को दुष्कर्म के एक मामले में दोषी करार दिया है. कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में डेरा समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया. इन जगहों हुए हिंसक प्रदर्शन में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन घायल हुए हैं. डेरा समर्थकों ने करोड़ों रुपये की निजी तथा सरकारी संपत्ति को भी आग के हवाले कर दिया है.
नरायणा गुरुः दक्षिण में ब्राह्मणवाद पर प्रहार करने वाले नायक
लगभग सौ वर्ष पहले ट्रावनकोर और कोचीन (वर्तमान केरल राज्य) ऐसा क्षेत्र था जहां निम्न जाति वालों के लिये मंदिर, विद्यालय और सार्वजनिक स्थलों में प्रवेश वर्जित था. कुंओं का इस्तेमाल वे कर नहीं सकते थे. इस जाति के मर्द और औरतों के लिये कमर से ऊपर कपड़े पहनना तक बड़ा गुनाह था. गहने पहनने का तो सवाल ही नहीं था. इन्हें अछूत तो समझा जाता ही था, उनकी परछाइयों से भी लोग दूर रहते थे.
तथाकथित बड़े लोगों से कितनी दूर खड़े होना है वह दूरी भी जातियों के आधार पर निर्धारित थी. यह 5 फुट से 30 फुट तक था. कुछ जातियों के लोगों को तो देख भर लेने से छूत लग जाती थी. उन्हें चलते समय दूर से ही अपने आने की सूचना देनी पड़ती थी, वे लोग जोर – जोर से चिल्लाते जाते थे –“ मेरे मालिकों, मै इधर ही आ रहा हूं, कृपया अपनी नजरें घुमा लें.” ये लोग अपने बच्चों के सुन्दर और सार्थक नाम भी नहीं रख सकते थे. नाम ऐसे होते थे जिनसे दासता और हीनता का बोध हो.
यहां क्लिक कर देखिए नारायण गुरू से संबंधित वीडियो ऐसे किसी भी सामाजिक नियम का उल्लंघन करने पर मौत की सजा निर्धारित थी. भले ही उल्लंघन गलती से हो गया हो. इन सारे अत्याचारों के बीच एक शख्स ने ऐसा चमत्कार कर दिखाया था, जिसने पूरे समाज को ही बदल दिया. इस स्थिति के खिलाफ संघर्ष करने वाले और दलितों को इस गुलामी से बाहर निकालने वाले महापुरुष का नाम था नरायणा गुरू. उनका जन्म इसी केरल में 26 अगस्त 1854 को हुआ, जिन्होंने अपने अटल निश्चय से समाज की सूरत बदल दी और मनुवादी व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी. नरायणा गुरु का जन्म दक्षिण (केरल) के एक साधारण परिवार में हुआ था. समाज की दशा को देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ. केरल में नैयर नदीं के किनारे एक जगह है अरुविप्पुरम. तब यहां घना जंगल था. नरायणा गुरु यहीं एकांतवास में आकर रहने लगे. उसी दौरान गुरुजी को एक मंदिर बनाने का विचार आया. नारायण गुरु एक ऐसा मंदिर बनाना चाहते थे जिसमें किसी किस्म का कोई भेदभाव न हो. जाति, धर्म, मर्द और औरत का कोई बंधन न हो. अरुविप्पुरम में उन्होंने एक मंदिर बनाकर एक इतिहास रचा. अरुविप्पुरम का मंदिर इस देश का शायद पहला मंदिर है, जहां बिना किसी जातिभेद के कोई भी पूजा कर सकता था. नरायणा गुरु के इस क्रांतिकारी कदम से उस समय जाति के बंधनों में जकड़े समाज में हंगामा खड़ा हो गया था. वहां के ब्राह्माणों ने इसे महापाप करार दिया था. दरअसल वह एक ऐसे धर्म की खोज में थे जहां समाज का हर आदमी एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस कर सके. वह एक ऐसे ‘बुद्ध’ की खोज में थे जो सभी मनुष्यों को समान दृष्टि से देखे.लोगों ने शिकायत की कि उनके बच्चों को स्कूलों में नहीं जाने दिया जाता, उन्होंने कहा कि अपने बच्चों के लिये स्कूल स्वयं बना लो और इतनी अच्छी तरह चलाओ कि वे भी तुम्हारे स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने को इच्छुक हो जाएं. लोगों ने कहा कि उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता, उन्होंने कहा कि न तो जबरदस्ती प्रवेश करने की जरूरत है और न प्रवेश की अनुमति के लिये गिड़गिड़ाने की आवश्यकता है.
गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उनसे मिलने के बाद कहा था- ‘मैंने लगभग पूरी दुनिया का भ्रमण किया है और मुझे अनेक संतों और महर्षियों से मिलने का सौभाग्य मिला है. लेकिन मैं खुलकर स्वीकार करता हूं कि मुझे आजतक ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं मिला जिसकी आध्यात्मिक उपलब्धियां स्वामी श्री नरायणा गुरु से अधिक हों, बल्कि बराबर भी हो.’ नारायण गुरु के कार्यों की सफलता से प्रभावित महात्मा गांधी उनसे मिलकर बातचीत करने को बहुत इच्छुक हुए और उन्होंने पूछा कि क्या गुरुजी अंग्रेजी जानते हैं, गुरुजी ने पलटकर पूछा कि क्या गांधीजी संस्कृत में बातचीत करेंगे? श्री नारायण गुरु ने जो रास्ता दिखाया उसपर चलकर केरल की पूरी सामाजिक संरचना ही बदल गयी. केरल की तरक्की के रूप में नतीजा भी सामने है.राम रहीम केसः पंचकूला में हुई हिंसा से 30 लोगों की मौत और 250 घायल
पंचकूला। पंचकूला की सीबीआई कोर्ट द्वारा बाबा राम रहीम को बलात्कारी करार देने के बाद उनके लाखों समर्थक सड़कों पर उतरे थे. पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों सहित दिल्ली और यूपी में हिंसा और आगजनी की खबरें आई है. पंचकूला में दो दिन से जमा डेरा समर्थक गुंडागर्दी और हिंसा पर उतारू हुए. जगह-जगह गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई.
पुलिस ने उपद्रवियों को काबू में करने के लिए फायरिंग की. इस हिंसा में पंचकूला में अब तक 30 लोगों की मौत और 250 लोगों के घायल होने की खबर है. पंचकूला में कर्फ्यू लगा दिया गया है, कोर्ट के आसपास के इलाके को खाली करा लिया गया है. शहर में सेना की 6 टुकड़ियां तैनात की गई हैं. इस बीच राज्य में बिगड़ते हालात के मद्देनजर मनोहर लाल खट्टर कैबिनेट ने आपात बैठक की है.
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बीएस संधु ने शुक्रवार को रात में कहा कि बलात्कार के एक मामले में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में भड़की हिंसा के बाद करीब 550 लोगों को हिरासत में लिया गया है और कुछ हथियार एवं गोला-बारूद बरामद किए गए हैं.
डेरा समर्थकों ने निजी टीवी चैनल एनडीटीवी के ओबी बैन को आग के हवाले कर दिया है. इसके अलावा टाइम्स नाऊ और आज तक के ओबी बैन को तोड़ा गया है. बाबा के समर्थकों ने मीडिया को निशाना बनाने के साथ-साथ चंडीगढ़-शिमला हाई वे पर आम लोगों को भी निशाना बनाया है. पंचकूला में जीवन बीमा बिल्डिंग के पास 100 गाड़ियों को फूंक दिया गया है. पुलिस पर भी नाराज समर्थक पत्थर फेंक रहे हैं. पंजाब में भी उग्र डेरा समर्थकों ने दो रेलवे स्टेशन में आग लगा दिया है. पंजाब के बरनाला में टेलिफोन एक्सचेंज फूंक दिया गया है.
आज़ादी और ख्वाइशों की फीकी कहानी है ‘कैदी बैंड’

फिल्म की कहानी एक सच्ची घटना से प्रेरित बताई जा रही है. कहानी है एक जेल के कैदियों की. सात कैदी जेल में बंद हैं, जिनपर अंडर ट्रायल का मुकदमा चल रहा है. बिंदू (आन्या सिंह), संजू (आदर जैन) पर छोटे मोटे जुर्म का केस चल रहा है. कैदी बैंड की शुरुआत मचल लालंग के परिचय से होती है, जो बिना किसी कुसूर के 54 सालों तक जेल में रहा.
एक राजनेता जेलर दविंदर धुलिया से जेल के अंदर कैदी बैंड बनाने की बात कहते हैं. इस कैदी बैंड में केवल अंडर ट्रायल कैदियों को शामिल किया जाता है और जेल के अंदर स्वतंत्रता दिवस पर एक प्रोग्राम होता है, जहां यह कैदी अपनी प्रस्तुति देते हैं.
वहीं जिस बात का पता है वही होता है..इसी बीच हीरो हिरोइन की प्रेम कहानी भी शुरू होती है और साथ ही ये जेल से भागने का प्लान भी बनाया जाता है ताकि वो अंडर ट्रायल की समस्या से दुनिया को रू-ब-रू करा सकें. इसमें वह सफल होते हैं या नहीं इसी कहानी पर बनी है कैदी बैंड.
एक इंटरव्यू में हबीब फैज़ल ने बताया था कि फिल्म के लिए आइडिया उन्हें तब आया जब वो एक बार तिहाड़ जेल के बारे में कुछ पढ़ रहे थे. ये फिल्म सामाजिक मद्दों (अंडरट्रायल के हालातों) को उजागर करती है. फिल्म फर्स्ट हाफ में तो कुछ कुछ आपको बांधे रखेगी लेकिन सेकेंड हाफ को हज्म करने में थोड़ी कठिनाई होगी. बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जो आपको अवास्तविक लगेंगी. ऐसा लगता है कि निर्देशक को थोड़ा और काम करना चाहिए था. कमज़ोर निर्देशन की वजह से आपका फिल्म से इंट्रस्ट कम हो सकता है.
रणबीर कपूर के कज़िन आदर जैन की ये डेब्यू फिल्म है और पहली ही फिल्म में उनकी शानदार एक्टिंग आपका दिल जीत लेगी. उनकी आवाज़ आपको कहीं ना कहीं रणधीर कपूर की याद ज़रूर दिलाएगी. कैमरा के आगे वो काफी शानदार लगे हैं. वहीं बात की जाए आन्या की तो उनकी परफॉर्मेंस भी ज़बरदस्त है. वहीं बाकी की स्टार कास्ट ने भी काफी अच्छी कोशिश की है.
निर्देशक : हबीब फैसल प्रोड्यूसर : आदित्य चोपड़ा लेखक : हबीब फैसल
म्यांमार में सेना और रोहिंग्या विद्रोहियों में झड़प, 32 की मौत
यंगून। म्यांमार के राखिन प्रांत में सुदूरवर्ती सीमा चौकियों पर कथित रोहिंग्या उग्रवादियों के हमले में म्यांमार सुरक्षा बलों के 11 कर्मियों समेत कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई. सेना के कमांडर इन चीफ ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.
कमांडर इन चीफ मिन आंग हलांग ने फेसबुक पर कहा कि एक सैनिक और 10 पुलिसकर्मियों ने देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया.
उन्होंने बताया कि लड़ाई अब भी जारी है जिसमें 21 उग्रवादी भी मारे गए हैं. वहीं, स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शुक्रवार तड़के करीब 150 उग्रवादियों ने 20 से अधिक पुलिस चौकियों पर हमला किया. सैनिकों ने भी जवाबी कार्रवाई की. धार्मिक घृणा के चलते बंटे तटीय देश में पिछले साल अक्टूबर से चल रही हिंसा में यह सबसे भीषण हमला बताया जा रहा है.
कोफी अन्नान की अगुआई वाली समिति ने गुरुवार को आंग सांग सू की को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें रोहिंग्या संकट के समाधान के लिए अत्यधिक बल प्रयोग से बचने की सलाह दी गई है. इसके कुछ घंटों बाद ही विद्रोहियों ने सुनियोजित तरीके से सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया. म्यांमार की सेना ने कुछ इलाकों में मुठभेड़ जारी होने की बात कही है.
पिछले साल अक्टूबर के बाद यह दोनों पक्षों के बीच सबसे भीषण मुठभेड़ है. विद्रोही संगठन ने ऐसे और हमले की धमकी दी है. इस हमले में तकरीबन डेढ़ सौ लड़ाकों के शामिल होने की बात कही जा रही है. हालांकि, अपुष्ट सूत्रों की मानें तो इसमें एक हजार विद्रोही शामिल हैं.
वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में दलित छात्र को दी जातिसूचक गालियां
वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में एक बार फिर जातीय भेदभाव की घटना सामने आई है. मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्लू) के तीसरे सेमेस्टर के जातिवादी मानसिकता वाले छात्र ने बौद्ध अध्ययन में पढ़ने वाले एमए के छात्र का चीवर(चोला) पकड़ कर खींचा और जातिसूचक गालियां दी.
दरअसल, बौद्ध अध्ययन में एमए के तीसरे सेमेस्टर का दलित छात्र धम्मवीर बौद्ध बिरसा मुंडा हॉस्टल के मेस में डिनर करने के बाद वापस छात्रावास में आया तो गेट पर एमएसडब्लू के छात्र चंद्रभूषण सिंह ने उस पर हमला कर दिया. चंद्रभूषण ने धम्मवीर का चीवर पकड़कर खींचा और जातिसूचक गाली देने लगा. जब दलित छात्र ने विरोध किया तो उसने गाली देते हुए कहा कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.
इस घटना का जब धम्मवीर के दोस्तों को पता चला तो वह चंद्रभूषण से बातचीत करने गए लेकिन उसने उनको भी धमकाया और कहा कि वह धम्मवीर को जान से मार देगा. उस समय चंद्रभूषण ने शराब पी रखी थी. ऐसा यह आए दिन करता रहता है और अन्य छात्रों से भी गाली गलौज करता रहता है. चंद्रभूषण को हॉस्टल में कोई रूम अलोट नहीं हुआ है. इसके बावजूद भी वह हॉस्टल में ही रहता है.
धम्मवीर बौद्ध ने इस मामले में वर्धा के रामनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत पत्र में धम्मवीर ने लिखा है कि इस घटना से मेरे चीवर की छवि धूमिल हुई है और मैं काफी अपमानित महसूस कर रहा हूं. धम्मवीर ने उचित कार्रवाई की मांग की है.
राम रहीम केस में हरियाणा और पंजाब के बाद अब दिल्ली में भी हिंसा
नई दिल्ली। साध्वी के यौनशोषण के मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत द्वारा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद उनके समर्थक उत्पात मचा रहे हैं. पंजाब और हरियाणा में हिंसा की आग दिल्ली-एनसीआर भी पहुंच चुकी है. दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर गुरमीत के समर्थकों ने रीवा एक्सप्रेस के 2 डिब्बों को आग के हवाले कर दी. इसके अलावा शाहदरा में डेरा समर्थक गुंडों ने डीटीसी की बस को आग के हवाले कर दिया. दिल्ली में कुल 7 जगहों पर डेरा समर्थकों द्वारा हिंसा और आगजनी की खबर है.
यूपी के गाजियाबाद में भी डेरा समर्थकों ने गुंडागर्दी की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोनी में गुरमीत समर्थकों ने 2 बसों में आग लगा दी. लोनी में गोलचक्कर के पास यूपी की एक बस में आगजनी हुई है. बताया जा रहा है कि 2 लोगों ने बस को आग के हवाले कर दिया. मौके पर दमकल की गाड़ियां मौजूद हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद करेजरीवाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
बता दें कि पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत ने साध्वी के यौनशोषण मामले में गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराया है. सजा का ऐलान सोमवार को होगा. गुरमीत को दोषी ठहराए जाने के बाद उनके समर्थक पंचकूला में उत्पात मचाने लगे. पंजाब के कुछ जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है जबकि पंचकूला में सेना की 6 टुकड़ियों को तैनात किया गया है. अब तक हिंसा में 12 लोगों की मौत हो चुकी है.
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने रोकी 211 दलित शिक्षकों की सैलरी
मुजफ्फरनगर। योगी राज में दलितों का शोषण बढ़ता ही जा रहा है. इस बात का अंदाजा आप इस बात से भी लगाया सकता है मुजफ्फरनगर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दलित शिक्षकों का वेतन मनमाने तरीके से रोक दिया है.
दरअसल, मुजफ्फरनगर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे 211 दलित शिक्षकों का मासिक वेतन गलत तरीके से रोक दिया गया है. यह दलित समुदाय के उत्पीड़न की बहुत बड़ी घटना है. इतना ही नहीं, वेतन रोकने के साथ-साथ मुजफ्फरनगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अनुसूचित जाति के शिक्षकों को जातिसूचक अपशब्द भी कहे. जब दलित शिक्षक अपनी बात रख रहे थे तो शिक्षा अधिकारी उन्हें कहा, “अब मुझे नीच जाति के लोगों की भी बात सुननी पड़ेगी”. अनुसूचित जाति के शिक्षकों ने शिक्षा अधिकारी की इस बात को घोर जातिवादी और संकीर्ण मानसिकता वाला बताया.
दलित शिक्षकों और मुजफ्फरनगर की एससी/एसटी बेसिक टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन की शाखा ने कहा है कि मुजफ्फनगर शिक्षा अधिकारी द्वारा अनुसूचित जाति के शिक्षकों का मानसिक और जातीय उत्पीड़न किया जा रहा है. हम इसकी निंदा करते है.
दलित शिक्षक और एसोसिएशन इस मामले में 28 अगस्त 2017 को लखनऊ में बेसिक शिक्षा निदेशक से मुलाकात कर ज्ञापन देगा. साथ ही यह भी मांग की जाएगी कि दलित विरोधी मानसिकता वाले बेसिक शिक्षा अधिकारी को तत्काल निलंबित कर जेल भेजा जाए.
एसोसिएशन ने कहा है कि अगर निदेशक हमारी मांग नहीं मानते है तो हम लोग एक बड़ा आंदोलन करेंगे.
अब मुंबई में ट्रेन के 4 डब्बे पटरी से उतरे, 5 घायल
मुंबई। मुंबई में अंधेरी-सीएसटी हार्बर लोकल ट्रेन के 4 डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसमें 5 लोगों के घायल होने की खबर है. माहिम दक्षिण के नजदीक 9.55 पर यह हादसा हुआ. वडाला और अंधेरी के बीच ट्रेनें प्रभावित हुई हैं. दफ्तर जाने का समय होने की वजह से वहां लोगों की भीड़ काफी बढ़ गई थी.
यह लोकल ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से चली थी और अंधेरी स्टेशन की ओर जा रही थी. माहिम स्टेशन के पास इसके ऊपर लगे उपकरण (ट्रेन की गति के लिए बिजली उपलब्ध करवाने वाला उपकरण) में खराबी का पता चला. पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंदर भाटकर ने कहा कि इस समस्या के कारण ट्रेन को दूसरी पटरी पर भेजा जाना था. 9 बजकर 55 मिनट पर जब ट्रेन प्लेटफॉर्म से पीछे की ओर बढ़ रही थी, तभी सामने के चार डिब्बे पटरी से उतर गए. उन्होंने कहा कि डिब्बों को जल्दी से जल्दी वापस पटरी पर लाने की कोशिशें हो रही हैं.
पश्चिमी रेलवे ने एक ट्वीट में कहा, सीएसएमटी-अंधेरी हार्बर लोकल के चार डिब्बों को लगभग तीन घंटे में वापस पटरी पर लाए जाने की संभावना है. हल्की चोटों का शिकार हुए पांच यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा दी गई है. भाटकर ने कहा कि ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण वडाला-अंधेरी प्रखंड पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है, हालांकि चर्चगेट-विरार प्रखंड की सभी पश्चिमी मुख्य लाइनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. उन्होंने कहा कि घटना की वजह का पता लगाने के लिए एक जांच गठित की जाएगी.
गौरतलब है कि हाल ही में यूपी के मुज्जफरनगर और ओरैया में दो ट्रेन हादसे हुए हैं. मुज्जफरनगर हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि ओरैया में करीब 100 से अधिक लोग जख्मी हो गए थे. मुंबई की लोकल में रोज लाखों लोग सफर करते हैं.
देश में लगातार बढ़ रहे ट्रेन हादसों की वजह से रेल मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इशारों में पीएम मोदी से इस्तीफे की पेशकश की थी, जिसके बाद पीएम मोदी ने उन्हें इंतजार करने को कहा था. सूत्रों के मुताबिक- 27 अगस्त को कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है और उनकी जगह किसी और को रेलमंत्री बनाया जा सकता है.
तीन तलाक पर अब केंद्र सरकार दिखाए अपनी नियति!

21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में मुस्लिम समुदाय का एक प्रथा जो सदियों चली आ रही थी, उसका अंत हुआ. इस प्रथा को तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत कहते हैं. अगर किसी मुस्लिम पुरूष के मुंह से 3 बार तलाक शब्द निकल जाए तो उसे तलाक मान लिया जाता है. कुरान मैं इसका कोई ज़िक्र नहीं है, यह बस एक कुप्रथा है. दुनिया में ऐसे बहुत से मुस्लिम देश हैं जहां 3 तलाक पर कानूनी रूप से रोक लगा दी गई है, लेकिन भारत मे यह प्रथा पिछले 1400 वर्षों से चली आ रही है.
भारत में तीन तलाक का मुद्दा 1978 से शुरू हुआ. इंदौर की रहने वाली शाहबानो को उनके पति मोहम्मद एहमद खान ने 1975 में घर से निकाल दिया था. लेकिन शाहबानो के 5 बच्चे थे. घर से बाहर निकालने से पहले एहमद खान दूसरी शादी कर ली थी और दोनों पत्नियों के साथ रहने लगे. एहमद खान ने शाहबानों के साथ जो 14 साथ साल बिताए थे उसने मात्र तीन बार तलाक बोल कर खत्म कर दिया और शाहबानो को बच्चों सहित घर से बाहर निकाल दिया. प्रथा के अनुसार जो मेहर होती है वह भीं देने से इंकार कर दिया.
उसके बाद शाहबानो अदालत मैं गई, फैसला भी आया लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने कानून में बदलाव कर दिया. इसे अभी तक एक गलती मानी जाती है. इसका जिक्र पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्तक में किया है. शाहबानो के केस से शुरू हुआ ये मामला 2015 तक आया. इसके बाद 7 और मामले प्रकाश में आए जो शायरा बानो, आफरीन रेहमान, गुलशन परवीन और अतिया साबरी ने दायर किए थे. सुप्रीम कोर्ट में ऐसे और भी कई मामले थे जिन्हे देखते हुए इन पर सुनवाई शुरू की गई और तुरंत फैसला सुनाया गया.
पांच जजों की बेंच ने 3-2 के बहुमत से यह फैसला सुनाया की तलाक असंवैधानिक हैं, रीति रही हो या फिर परंपरा, लेकिन ये कानून की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है, न्यायाधीशों के बेंच में चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर, जस्टिस कूरियन जोसेफ, जस्टिस रोहिंताम फालिमिस्ट्री, जस्टिस उदय प्रकाश ललित और जस्टिस अब्दुल नाज़ी शामिल थे. यह सभी अलग-अलग धर्म के हैं.
2011 जनगणना के अनुसार करीब 20,30,000 महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें बिना तलाक दिए घर से बाहर निकाल दिया गया. इनके सामने एक नहीं बल्कि कई सारी समस्याएं हैं, एक तो पति ने घर से निकाल दिया और अब वह अपने मां-बाप के पास भी चली जाती हैं तो वहां लावारिस बन कर रह जाएंगी. पारम्परिक रूप से लड़कियों को पराया धन माना जाता है. ये अब दूसरी शादी भी नहीं कर सकती क्योंकि यह तलाकशुदा नहीं हैं.
वृन्दावन हो, बनारस हो या फिर हरिद्वार, यहां ऐसी विधवाएं हैं जिन्हें उनके घर वालो ने भी छोड़ दिया है, क्योंकि भारत में आज भी विधवाओं को बोझ माना जाता है. अकेले वृन्दावन मैं ऐसे 4 आश्रम है जहां इन्होंने पनाह ली है और भीख मांगने को मजबूर हैं. हम सरकार से यह उम्मीद करते हैं कि जब भी वह तीन तलाक के ऊपर कानून बनाएं तो इन सभी महिलाओ के बारे में भी सोचें जिन्हे उनके पतियों ने छोड़ दिया है.
अब देखना होगा कि न्यायपालिका के फैसले के बाद केंद्र सरकार तीन तलाक पर कैसा कानून बनाती है? तीन तलाक पर सरकार द्वारा कानून बनाना एक चुनौती पूर्ण काम होगा. सरकार के तीन तलाक को कानूनी अमलीजामा पहनाया जाएगा तो सरकार के पक्ष और विपक्ष दोनों में मुस्लिम लोग और संस्थाए शामिल होगी. हालाकिं कुछ मुस्लिम संस्थाएं और धर्मगुरू न्यायपालिका के इस आदेश का विरोध कर रहे हैं. केंद्र सरकार का तीन तलाक मुद्दे पर कानून बनाना उनकी राजनीति को प्रभावित करेगा.
लेखक पत्रकार हैं

