मायावती ने की खट्टर सरकार की बर्खास्तगी की मांग
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने राम रहीम के दोषी करार होने के बाद हुई हिंसा पर दुख व्यक्त किया है. उन्होंने खट्टर सरकार पर भी हमला किया. उन्होंने हरियाणा में भड़की हिंसा का जिम्मेदार खट्टर सरकार को माना और मनोहर लाल खट्टर की बर्खास्तगी की मांग की है.
मायावती ने कहा कि हरियाणा सरकार की लापरवाही और लिप्तता के कारण पंचकूला, सिरसा सहित अन्य राज्यों में हिंसा भड़की. हरियाणा सरकार के इस शर्मनाक प्रदर्शन की जितनी निंदा की जाए कम है.,
मायावती ने 30 लोगों के मारे जाने पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे हरियाणा में जो हिंसा हुई उसके लिए भाजपा की वोट बैंक राजनीति और मनोहर लाल खट्टर की लापरवाही है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के सख्त व स्पष्ट निर्देश के बावजूद कानून व संविधान की जिम्मेंदारी निभाने में विफल रहने वाली ऐसी सरकार को तुरन्त बर्खास्त कर देना चाहिये. लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि केंद्र सरकार के साथ-साथ भाजपा के शीर्ष नेता भी इस प्रकार के गंभीर मामले में गैर-जवाबदेह और लापरवाह बने हुए है.
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इस तरह की हिंसा पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में भी भाजपा ने संविधान की धज्जियां उड़ाई थी. कानून, कोर्ट और संविधान को भाजपा की वोट बैंक की राजनीति को इजाजत नहीं देनी चाहिए. जनहित और देशहित को ध्यान में रखते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए.बामसेफ करेगा ‘भारत निर्माण में बहुजन आंदोलन का योगदान’ पर सम्मेलन
नई दिल्ली। बामसेफ (पे बैक टू सोसाइटी) 10 सितंबर 2017 तो एक सम्मेलन का आयोजन करेगा. यह सम्मेलन ‘भारत निर्माण में बहुजन आंदोलन का योगदान’ के नाम से हो रहा है. यह सम्मेलन दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब के मावंलकर हॉल में दोपहर 2.30 से 6.00 बजे शाम तक चलेगा.
बामसेफ (पे बैक टू सोसाइटी) के इस सम्मेलन में डॉक्टर्स, वरिष्ठ नौकरशाह, प्रख्यात व्यक्ति और सामाजिक कार्यकर्ता आदि शामिल होंगे. कुल मिलाकर सम्मेलन में ऐसे 650 लोग आएंगे और बाबासाहेब की विचारधारा को मजबूत बनाएंगे.
कार्यक्रम में दलित चिंतक और जेएनयू के प्रोफेसर विवेक कुमार और डॉ. धर्मवीर अशोक मुख्य अतिथि होंगे और सभा को संबंधित करेंगे.
कार्यक्रम स्थलः मावलंकर हॉल, कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब, रफी मार्ग, दिल्ली कार्यक्रम का दिनांकः 10 सितंबर 2017 (रविवार), समयः दोपहर 2.30 से शाम 6.00 बजे तक
400 बच्चों की जान बचाने के लिए 10 किलो बम लेकर 1KM तक भागा पुलिसवाला
भोपाल। एक पुलिसवाले ने अपनी जान की बाजी लगाकर 400 स्कूली बच्चों की जान बचाई. हेड कांस्टेबल अभिषेक पटेल अपने हाथों में करीब 10 किलो का बम उठाकर बच्चों से दूर ले गए. अभिषेक बम को बच्चों से करीब 1 किमी. दूर लेकर भागे.
एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट के अनुसार यह मामला मध्यप्रदेश का है. अभिषेक ने बताया कि मेरा लक्ष्य सभी बच्चों को सुरक्षित करना था. बम ले जाते समय थोड़ा डर भी लगा लेकिन फिर भी मन में एक खुशी थी कि अगर मुझे कुछ होता है तो मैं इतने लोगों की जान बचा लूंगा.
अभिषेक ने बताया कि सूचना मिलते ही वह 10 मिनट बाद ही मौके पर पहुंच गए और स्कूल को खाली कराया. लेकिन जैसे ही बम की सूचना इलाके के लोगों को लगी तो वह भी आस-पास इकट्टठे हो गई. उन्होंने कहा कि मैं बम को रिहायशी इलाके से लेकर दूर भागा. बम को हाथ में लेकर भागते हुए उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहा है.
आपको बता दें कि भोपाल के एक स्कूल में शुक्रवार को बम की खबर आई थी. जिसके बाद 100 नंबर पर शिकायत की गई. जब वहां पर पुलिस आई तो उन्होंने बम देखा और स्कूल को खाली करने को कहा. सभी बच्चों को स्कूल से बाहर जाने को कहा. स्कूल के एक छात्र ने बताया कि जैसे ही स्कूल में बम की खबर आई, टीचर्स ने बच्चों की छुट्टी कर दी. हालांकि बाद में हालात को काबू में पा लिया गया.
जातिवादियों ने दलित किशोर की हत्या कर नहर के पास शव फेंका
भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. घटना भोजपुर जिले के धनगाई थाना क्षेत्र के दीघा गांव की है. जहां एक 14 वर्षीय किशोर को मजाक और चिढ़ाने को लेकर लात-घूसे से जातिवादी किशोरों ने पिटाई कर हत्या कर दी. दलित किशोर युवक का शव गांव के नहर के पास पड़ा मिला.
जानकारी के मुताबिक यह घटना शुक्रवार (25 अगस्त) की है. मृत किशोर का नाम रोहित कुमार था और वह गांव के गणेश गोंड का बेटा है. हत्या के पीछे मजाक और चिढ़ाने की बात सामने आ रही है.
दलित किशोर का शव मिलते ही ग्रामीणों का गुस्सा पूरी तरह भड़क उठा. ग्रामीणों ने आपस में सलाह मशविरा कर युवक के शव के साथ जगदीशपुर थाना क्षेत्र के बिहिया-जगदीशपुर मार्ग को जाम कर दिया. ग्रामीण के साथ किशोर के परिजन दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे. बाद में सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझा-बूझाकर जाम हटवाया. बाद में पुलिस के प्रयास से युवक के शव का पोस्टमार्टम हो सका.
रोहित नजदीक के चकवा गांव के उत्क्रमित मिडिल स्कूल में 7 वीं कक्षा में पढ़ता था. वह पढ़ने में काफी तेज था. परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं. मृत दलित किशोर के चाचा सनोज कुमार ने गांव के सवर्णों श्रीभगवान यादव के बेटे समरेश कुमार और अमरेश कुमार, रामजी यादव के पुत्र रजनीश कुमार, शिवबचन सिंह के पुत्र विजय कुमार और रामजी सिंह पर प्राथमिकी दर्ज कराई है. प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सभी आरोपी फरार हैं. जानकारी के मुताबिक गांव के ही उच्च जाति के लोगों की ने दलित किशोर की हत्या की है. वे लोग गांव के दलितों को जानवर से भी गया गुजरा समझते हैं. रोहित का परिवार भी इसी जातिवादी मानसिकता से काफी परेशान था. घटना के बाद गांव के दलितों में दहशत है. हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच करने की बात कह रही है.
ग्रामीणों ने बताया कि रोहित जिन लड़कों के साथ रोजाना खेलता था, उन्हीं लड़कों ने उसे मार डाला है. बताया जा रहा है कि सवर्णों के लड़के रोहित को रोज चिढ़ाते थे. जिससे वह गुस्से में आकर गांव के रसूखदारों के बच्चों से उलझ गया. गुरुवार को रोहित ने चिढ़ाने वाले लड़कों को जवाब दे दिया, उसके बाद वह गुस्से में आ गये और शुक्रवार को जैसे ही वह शौच करने निकला, उनलोगों ने उसे पीटकर मार डाला.
लालू यादव के कारण जदयू से निकाले जाएंगे शरद यादव!
पटना। 27 अगस्त यानि कल शरद यादव और नीतीश कुमार का 14 साल पुराना रिश्ता टूट सकता है. बिहार की हालिया राजनैतिक घटना के बाद दोनों की राह अलग हो चुकी है, हालांकि शरद यादव अभी भी जदयू के सदस्य हैं. लेकिन संभव है कि लालू प्रसाद यादव की रैली में शामिल होने के बाद उनकी सदस्यता खत्म हो जाए.
जदयू के नीतीश खेमे ने शरद यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने की विधिवत तैयारी भी कर ली है. लालू की रैली में जाने को तैयार दिख रहे शरद यादव को पार्टी के महासचिव के.सी त्यागी ने चिट्ठी लिखी है. इसमें त्यागी ने शरद यादव को 27 अगस्त को लालू यादव की रैली में शामिल होने से मना किया है.
पत्र में यह भी कहा गया था कि यदि वह इसमें शामिल होते हैं तो वह ”पार्टी के सिद्धांतों” के खिलाफ काम करेंगे. नीतीश ने अपने महासचिव त्यागी द्वारा यादव को भेजे एक राजनीतिक संदेश में कहा है कि लालू यादव की रैली में शामिल होने का मतलब यह होगा कि वह स्वेच्छा से पार्टी छोड़ रहे हैं.
हालांकि शरद यादव ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह राजद की रैली में शामिल होंगे और शनिवार को पटना के लिए रवाना होंगे.
शरद यादव के पार्टी से अलग होने के बाद उनकी राज्यसभा सदस्यता भी जा सकती है. जदयू सूत्रों के मुताबिक जदयू इसके लिए जरूरी कार्रवाई करने को तैयार है.
चुनाव आयोग पहुंचा नीतीश-शरद का झगड़ा
नई दिल्ली। जनता दल यूनाइटेड में मचा घमासान दिल्ली पहुंच गया है. शरद यादव और नीतीश कुमार के बीच पार्टी पर हक को लेकर छिड़ी जंग के बीच शरद यादव शुक्रवार को चुनाव आयोग पहुंच गए. यहां शरद यादव ने दावा किया कि वो “असली” पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं और राष्ट्रीय परिषद के ज्यादातर सदस्य उनके साथ हैं.
शरद यादव के वकीलों ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर दावा किया कि वह पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. लिहाजा पार्टी के सिंबल पर उनका हक है. शरद खेमे की ओर से चुनाव आयोग के सामने 14 राज्य यूनिटें के साथ होने का दावा किया गया है. शरद गुट का कहना है कि नीतीश कुमार के साथ सिर्फ बिहार की इकाई है. ज्यादातर राज्यों के अध्यक्ष हमारे साथ हैं इसलिए जदयू हमारी है, हमारी ही रहेगी.”
जबकि दूसरी ओर नीतीश खेमा भी इस मामले से निपटने को तैयार है. जनता दल यू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने शरद यादव की इस बात को खारिज किया कि उनके साथ सिर्फ बिहार इकाई है. पूर्व मंत्री ने “दलित दस्तक” को बताया- “शरद जी के साथ सिर्फ दो या तीन राज्य के लोग हैं. 14 राज्यों की बात गलत है. बाकी सभी एमएलए और एमएलसी भी हमारे साथ हैं, इसलिए हमें कोई चिंता नहीं है. फिर भी अगर चुनाव आयोग हमसे कुछ मांगेगा तो हम सारे कागजात देने को तैयार हैं.”
शरद खेमें द्वारा चुनाव आयोग में पार्टी और चुनाव चिन्ह पर दावा करने के बाद देखना यह दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग का रुख क्या होता है और वह किसके पक्ष में फैसला सुनाता है.
बलात्कारी बाबा की सजा हज्म नहीं कर पा रही भाजपा, अब सुब्रमण्यम ने किया समर्थन
नई दिल्ली। बलात्कारी राम रहीम का समर्थन करने वालों में भाजपा के दो नेता शामिल हो गए है. पहले साक्षी महाराज और अब सुब्रमण्यम स्वामी. साक्षी महराज ने मीडिया के सामने ही राम रहीम को सीधा सादा और भक्तों के लिए भगवान बताया था. लेकिन अब सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर के माध्यम से राम रहीम का समर्थन किया है.
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राम रहीम का समर्थन करते हुए कहा कि मीडिया द्वारा हिंदू विराट लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. स्वामी का कहना है कि केवल विराट हिंदुओं को खतरा बताया जाता है. अपने इस ट्वीट में स्वामी ने कांची शंकराचार्य मर्डर केस, योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ झूठा आरोप, श्री-श्री के खिलाफ दर्ज हुए केस का जिक्र भी किया. स्वामी के इस ट्वीट पर कई लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
इस पर बिनोद कुमार सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देत हुए लिखा, ‘क्या राम रहीम इतने कमजोर और लाचार थे?कल के हादसे से लगता तो नहीं हैं?’ जवाहर जैन ने स्वामी पर ही सवाल दागे, आप सही हो लेकिन राम रहीम का क्या? उस पर लगे आरोप क्या झूठे हैं? क्या हिंदूत्व का सच्चा चेहरा है? क्या आप उस बलात्कारी को समर्थन करते हैं?
आशू रमीज ने लिखा कि भाजपा वालों के बलात्कारी राम रहीम से मजबूत सम्बंध है इसलिए इन्हें सजा हज़म नहीं हो रही. एक ने लिखा व्यक्ति लिखा कि आपके कहने का मतलब बलात्कारी राम रहीम को फंसा के दोषी करार दिया गया न्यायालय में? आप बलात्कारी का समर्थन कर रहे हैं? एक ने लिखा भाजपा संतो को हिंदू नाम पर इस्तेमाल कर रही है. उन्हें इस्तेमाल कर टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया जाता है. हिंदुओं को जागरुक होना होगा. भाजपा 51 हजार मुस्लिम लड़कियों को दे रही हैं लेकिन हिंदू लड़कियों को नहीं.
एक ने लिखा बलात्कारी बाबाओं के भक्त स्वामी, भोगवादी संस्कृति के तनचले बाबाओं से और अपेक्षा भी क्या की जा सकती है. इस प्रकार कई लोगों ने स्वामी और भाजपा की जमकर खिंचाई की.
सतीश खंडेलवाल ने तो रामरहीम के वकील पर भी तंज कस दिया. उन्होंने लिखा ना आसाराम का, ना रामपाल का, और ना राम रहीम का, वकील तो सलमान खान का ही बढ़िया है,
धोनी के करिश्माई बोल ने दिलाई भारत को जीत
नई दिल्ली। पाल्लेकेले में टीम इंडिया की 100 रनों से बड़ी साझेदारी के बाद सिर्फ़ अपना चौथा वनडे खेल रहे श्रीलंका के ऑफ़ स्पिनर अकिला धनंजय ने अपने तीन ओवरों में मैच का रुख़ बदल दिया. भारत का पहला विकेट 109 के स्कोर पर गिरा और फिर 131 के स्कोर पर 16वें से 22वें ओवर के बीच भारत ने अपने 7 विकेट गंवा दिए.
एक सिरे पर खड़े पूर्व कप्तान एमएस धोनी का साथ निभाने आये भुवनेश्वर के साथ अगले 100 रनों का सफ़र टीम इंडिया के लिए लंबा हो सकता था. लेकिन धोनी ने एक बार फिर क्रिकेट मैदान पर अपना करिश्मा दिखाया, ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी के ज़रिये नहीं, बल्कि समझदारी के साथ पार्टनरशिप निभाते हुए मैच में बल्ले से कमाल करने वाले भुवनेश्वर कुमार (80 गेंद, नाबाद 53 रन, 4 चौके, 1 छक्का) कहते हैं, “थोड़ा हैरान करने वाली बात ज़रूर थी. अच्छी पार्टनरशिप हो रही थी और अचानक 3-4 विकेट गिर गए. मैं बैटिंग करने गया तो एमएस ने कहा कि अपना नेचुरल गेम खेलो. जैसा टेस्ट में खेलते हो वैसा ही खेला. मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं था. 7 विकेट गिर चुके थे और हमारे पास खोने को कुछ नहीं था.
ख़ास बात ये है कि इस पूरी पारी में धोनी ने क़रीब 25 ओवर पिच पर रहते हुए सिर्फ़ एक चौका लगाया और मैच को मुक्कमल अंजाम पर पहुंचा दिया. वनडे में पहली बार अर्द्धशतक लगाने वाले भुवी कहते हैं कि दूसरे सिरे पर माही के होते हुए उनपर कोई दबाव नहीं था. भुवी ने कहा, ‘उनके दूसरे सिरे पर होने से अफ़रातफ़री और दबाव तो नहीं होता. मुझे पता था कि उनके होते हुए आख़िर में 7-8 के रेट से रन बनाना भी मुश्किल नहीं..इसलिए मैं ज़रा भी फ़िक्रमंद नहीं था.’ दरअसल लक्ष्य का पीछा करने में माही का कोई सानी नहीं. लक्ष्य का पीछा करते हुए धोनी पाल्लेकेले में 39 वीं बार नॉटआउट रहे.
बिहार में बाढ़ से 418 लोगों की मौत, डेढ़ करोड़ से ज्यादा प्रभावित
पटना। बिहार में बाढ़ से प्रभावित जिलों की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है. बाढ़ से बिहार के 19 जिले किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढी, शिवहर, समस्तीपुर, गोपालगंज, सारण, सीवान, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया प्रभावित हैं. आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार शुक्रवार तक बाढ़ की वजह से मृतकों का आंकड़ा 418 पहुंच गया है. 19 जिलों में लगभग 1.67 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.
जिलों से आई रिपोर्ट के आधार पर आपदा प्रबंधन विभाग ने शुक्रवार को 418 लोगों के मरने की पुष्टि की है, जबकि बाढ़ से प्रभावितों की संख्या एक करोड़ 67 लाख से अधिक हो गई है.
सहरसा और मुजफ्फरपुर के अलावा अन्य जिलों में भी लोगों की मौत की खबर है. सिवान जिले से बाढ़ के चलते किसी की मौत की सूचना नहीं है. विभाग की रिलीज में बताया गया है कि कुल 1403 सामूहिक रसोइयों में 3.54 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.
बाढ़ से राहत बचाव के काम में एनडीआरएफ की 28 टीमों को लगाया गया है. इसके अलावा एसडीआरएफ की 16 टीमें भी राहत बचाव के काम में लगी हैं. सेना के 630 जवान बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रहे हैं. कुछ जगहों पर बाढ़ का पानी घटा है जिससे लोग अपने घर लौट रहे हैं लेकिन इन जगहों पर बीमारी फैलने का डर बना हुआ है.
बिहार में राहत शिविरों में कमी की गई है. पहले 624 शिविर बनाए गए थे जो अब घटकर 368 हो गए हैं. इनमें लगभग 1.59 लाख लोग आश्रय ले रहे हैं. यह जानकारी आपदा प्रबंधन विभाग ने दी है. अकेले अररिया जिले में ही बाढ़ के चलते 87 लोगों की मौत हुई है.
इसके अलावा सीतामढ़ी में 43, कटिहार में 40, पश्चिमी चंपारण में 36, पूर्वी चंपारण में 32, मधुबनी में 28, दरभंगा में 26, किशनगंज में 24, माधेपुरा में 22, गोपालगंज में 20, सुपौल में 16 और पूर्णिया में 9 लोगों की मौत हुई है.
बाढ़ के कारण अब तक जिलों से 24 हजार 350 झोपड़ियां ध्वस्त हुई हैं. एक हजार से अधिक मकानों को आंशिक क्षति हुई है. कच्चा-पक्का मकानों के क्षति का आकलन किया जा रहा है. सात लाख हेक्टेयर से अधिक खेतों में लगी फसल नष्ट हो चुकी है. बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का काम चल रहा है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व सेना के जवान राहत बचाव अभियान में लगे हुए हैं.
तीनों बलों की 51 टीम के 2248 जवान और 280 मोटरबोट के माध्यम से राहत अभियान में लगे हैं. प्रभावितों के लिए राहत शिविर, सामुदायिक किचेन चलाया जा रहा है. जो लोग अपने घरों की ओर लौट रहे हैं, उन्हें चूड़ा, चावल, आलू, दाल आदि खाद्य सामग्री का फूड पैकेट दिया जा रहा है.
राम रहीम के समर्थन में आए भाजपा सांसद साक्षी महाराज
नई दिल्ली। साध्वी यौन शोषण मामले में सीबीआई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया. जिसके बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़की हुई है. ऐसे में जहां सभी राजनीतिक दल लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन उन्हें भाजपा सांसद साक्षी महाराज के राम रहीम के समर्थन में बयान दे रहे हैं.
साक्षी महाराज ने कहा कि गुरमीत राम रहीम सीधे सादे आदमी हैं और यह आरोप भारतीय संस्कृति के खिलाफ साजिश है. एक महिला ने उनके खिलाफ आरोप लगाए, लेकिन करोड़ों लोग उन्हें भगवान मानते हैं. मैं कोर्ट का सम्मान करता हूं, लेकिन अब अगर कोई बड़ी घटना होती है तो इसके लिए कोर्ट जिम्मेदार रहेगा.
साक्षी महाराज ने कहा कि पिछले कुछ समय से योजनाबद्ध तरीके से सिर्फ साधु संन्यासी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षडयंत्र किया जा रहा है. यदि करोड़ों लोग किसी को भगवान मानते हैं तो कोर्ट को इस बात को भी ध्यान रखना चाहिए था.
साक्षी महाराज के इस बयान से भाजपा हाईकमान अवश्य नाराज होगा. अब देखना होगा कि पार्टी अपने इस सांसद के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है.
गौरतलब है कि शुक्रवार को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को दुष्कर्म के एक मामले में दोषी करार दिया है. कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में डेरा समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया. इन जगहों हुए हिंसक प्रदर्शन में 30 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन घायल हुए हैं. डेरा समर्थकों ने करोड़ों रुपये की निजी तथा सरकारी संपत्ति को भी आग के हवाले कर दिया है.
नरायणा गुरुः दक्षिण में ब्राह्मणवाद पर प्रहार करने वाले नायक
लगभग सौ वर्ष पहले ट्रावनकोर और कोचीन (वर्तमान केरल राज्य) ऐसा क्षेत्र था जहां निम्न जाति वालों के लिये मंदिर, विद्यालय और सार्वजनिक स्थलों में प्रवेश वर्जित था. कुंओं का इस्तेमाल वे कर नहीं सकते थे. इस जाति के मर्द और औरतों के लिये कमर से ऊपर कपड़े पहनना तक बड़ा गुनाह था. गहने पहनने का तो सवाल ही नहीं था. इन्हें अछूत तो समझा जाता ही था, उनकी परछाइयों से भी लोग दूर रहते थे.
तथाकथित बड़े लोगों से कितनी दूर खड़े होना है वह दूरी भी जातियों के आधार पर निर्धारित थी. यह 5 फुट से 30 फुट तक था. कुछ जातियों के लोगों को तो देख भर लेने से छूत लग जाती थी. उन्हें चलते समय दूर से ही अपने आने की सूचना देनी पड़ती थी, वे लोग जोर – जोर से चिल्लाते जाते थे –“ मेरे मालिकों, मै इधर ही आ रहा हूं, कृपया अपनी नजरें घुमा लें.” ये लोग अपने बच्चों के सुन्दर और सार्थक नाम भी नहीं रख सकते थे. नाम ऐसे होते थे जिनसे दासता और हीनता का बोध हो.
यहां क्लिक कर देखिए नारायण गुरू से संबंधित वीडियो ऐसे किसी भी सामाजिक नियम का उल्लंघन करने पर मौत की सजा निर्धारित थी. भले ही उल्लंघन गलती से हो गया हो. इन सारे अत्याचारों के बीच एक शख्स ने ऐसा चमत्कार कर दिखाया था, जिसने पूरे समाज को ही बदल दिया. इस स्थिति के खिलाफ संघर्ष करने वाले और दलितों को इस गुलामी से बाहर निकालने वाले महापुरुष का नाम था नरायणा गुरू. उनका जन्म इसी केरल में 26 अगस्त 1854 को हुआ, जिन्होंने अपने अटल निश्चय से समाज की सूरत बदल दी और मनुवादी व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी. नरायणा गुरु का जन्म दक्षिण (केरल) के एक साधारण परिवार में हुआ था. समाज की दशा को देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ. केरल में नैयर नदीं के किनारे एक जगह है अरुविप्पुरम. तब यहां घना जंगल था. नरायणा गुरु यहीं एकांतवास में आकर रहने लगे. उसी दौरान गुरुजी को एक मंदिर बनाने का विचार आया. नारायण गुरु एक ऐसा मंदिर बनाना चाहते थे जिसमें किसी किस्म का कोई भेदभाव न हो. जाति, धर्म, मर्द और औरत का कोई बंधन न हो. अरुविप्पुरम में उन्होंने एक मंदिर बनाकर एक इतिहास रचा. अरुविप्पुरम का मंदिर इस देश का शायद पहला मंदिर है, जहां बिना किसी जातिभेद के कोई भी पूजा कर सकता था. नरायणा गुरु के इस क्रांतिकारी कदम से उस समय जाति के बंधनों में जकड़े समाज में हंगामा खड़ा हो गया था. वहां के ब्राह्माणों ने इसे महापाप करार दिया था. दरअसल वह एक ऐसे धर्म की खोज में थे जहां समाज का हर आदमी एक-दूसरे से जुड़ाव महसूस कर सके. वह एक ऐसे ‘बुद्ध’ की खोज में थे जो सभी मनुष्यों को समान दृष्टि से देखे.लोगों ने शिकायत की कि उनके बच्चों को स्कूलों में नहीं जाने दिया जाता, उन्होंने कहा कि अपने बच्चों के लिये स्कूल स्वयं बना लो और इतनी अच्छी तरह चलाओ कि वे भी तुम्हारे स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने को इच्छुक हो जाएं. लोगों ने कहा कि उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता, उन्होंने कहा कि न तो जबरदस्ती प्रवेश करने की जरूरत है और न प्रवेश की अनुमति के लिये गिड़गिड़ाने की आवश्यकता है.
गुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उनसे मिलने के बाद कहा था- ‘मैंने लगभग पूरी दुनिया का भ्रमण किया है और मुझे अनेक संतों और महर्षियों से मिलने का सौभाग्य मिला है. लेकिन मैं खुलकर स्वीकार करता हूं कि मुझे आजतक ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं मिला जिसकी आध्यात्मिक उपलब्धियां स्वामी श्री नरायणा गुरु से अधिक हों, बल्कि बराबर भी हो.’ नारायण गुरु के कार्यों की सफलता से प्रभावित महात्मा गांधी उनसे मिलकर बातचीत करने को बहुत इच्छुक हुए और उन्होंने पूछा कि क्या गुरुजी अंग्रेजी जानते हैं, गुरुजी ने पलटकर पूछा कि क्या गांधीजी संस्कृत में बातचीत करेंगे? श्री नारायण गुरु ने जो रास्ता दिखाया उसपर चलकर केरल की पूरी सामाजिक संरचना ही बदल गयी. केरल की तरक्की के रूप में नतीजा भी सामने है.राम रहीम केसः पंचकूला में हुई हिंसा से 30 लोगों की मौत और 250 घायल
पंचकूला। पंचकूला की सीबीआई कोर्ट द्वारा बाबा राम रहीम को बलात्कारी करार देने के बाद उनके लाखों समर्थक सड़कों पर उतरे थे. पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों सहित दिल्ली और यूपी में हिंसा और आगजनी की खबरें आई है. पंचकूला में दो दिन से जमा डेरा समर्थक गुंडागर्दी और हिंसा पर उतारू हुए. जगह-जगह गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई.
पुलिस ने उपद्रवियों को काबू में करने के लिए फायरिंग की. इस हिंसा में पंचकूला में अब तक 30 लोगों की मौत और 250 लोगों के घायल होने की खबर है. पंचकूला में कर्फ्यू लगा दिया गया है, कोर्ट के आसपास के इलाके को खाली करा लिया गया है. शहर में सेना की 6 टुकड़ियां तैनात की गई हैं. इस बीच राज्य में बिगड़ते हालात के मद्देनजर मनोहर लाल खट्टर कैबिनेट ने आपात बैठक की है.
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बीएस संधु ने शुक्रवार को रात में कहा कि बलात्कार के एक मामले में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में भड़की हिंसा के बाद करीब 550 लोगों को हिरासत में लिया गया है और कुछ हथियार एवं गोला-बारूद बरामद किए गए हैं.
डेरा समर्थकों ने निजी टीवी चैनल एनडीटीवी के ओबी बैन को आग के हवाले कर दिया है. इसके अलावा टाइम्स नाऊ और आज तक के ओबी बैन को तोड़ा गया है. बाबा के समर्थकों ने मीडिया को निशाना बनाने के साथ-साथ चंडीगढ़-शिमला हाई वे पर आम लोगों को भी निशाना बनाया है. पंचकूला में जीवन बीमा बिल्डिंग के पास 100 गाड़ियों को फूंक दिया गया है. पुलिस पर भी नाराज समर्थक पत्थर फेंक रहे हैं. पंजाब में भी उग्र डेरा समर्थकों ने दो रेलवे स्टेशन में आग लगा दिया है. पंजाब के बरनाला में टेलिफोन एक्सचेंज फूंक दिया गया है.

