अनिता की आत्महत्या के बाद NEET के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

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त्रिची। तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलने की वजह से अनिता ने आत्महत्या कर ली. इसके बाद से ही मेडिकल एंट्रेस परीक्षा NEET को लेकर जोरदार प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. इतना ही नहीं लगभग 14 छात्र इसके विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठ गए हैं।

खबरों के अनुसार तमिल राष्ट्रवादी संगठन नाम तालीमार काट्ची और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे संगठन नीट के खिलाफ चेन्नई और त्रिची की सड़कों पर उतर आए हैं. चेन्नई के माउंट रोड पर एसएफआई के प्रदर्शनकारियों रोड जाम कर दिया है. साथ ही अन्नासलाई को जाने वाला रास्ता भी बंद कर दिया है. प्रदर्शनकारियों ने पुतले जलाए हैं और मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की है. प्रदर्शन कर रहे तमिल संगठन नाम तामीलार काटची का कहना है कि मेडिकल एडमिशन के लिए नीट को ही एकमात्र क्राइटेरिया (पैमाना) बना देना गलत है. छात्रों को छूट मिलनी चाहिए ताकि स्टेट बोर्ड के छात्रों को भी बेहतर मौके मिल सके.

इसी बीच एआईएडीएमके नेती टीटीवी दिनाकरन ने अनिता की मौत पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “मैं हैरान हूं कि हम सबकी प्यारी बेटी ने नीट के खिलाफ संघर्ष करते हुए आत्महत्या कर ली.”

इसके बाद दक्षिण के सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हसन ने भी अनिता की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया. रजनीकांत ने फेसबुक पर पोस्ट किया, “अनिता के साथ जो भी हुआ वो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. इस कदम को उठाने के पहले उस पर क्या बीत रही होगी मैं उस दर्द को समझ पा रहा हूं. मेरी संवेदनाएं उसके परिवार के साथ है.”

जबकि कमल हसन ने लिखा, “वे अनिता को अपनी बेटी समान मानते हैं और वे उसके लिए अपनी आवाज उठायेंगे.” उन्होंने इसके पीछे राज्य सरकार और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया.

दलित बोर्ड की स्टूडेंट अनिता ने मेडिकल में दाखिले के लिए नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था. इसमें असफल होने पर उसने अपने घर पर परिजनों की अनुपस्थिति में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

बताया जाता है कि दाखिला ना मिलने पर वह अवसाद में जी रही थी. अनिता ने तमिलनाडु स्टेट बोर्ड से बारहवीं में 1,200 में से 1,176 नंबर लाए थे. हालांकि मेडिकल के लिए होने वाली नीट की परीक्षा में उसने 86 नंबर ही लाए थे. इधर अनिता के परिजन, रिश्तेदार और गांव वालों ने राज्य और केंद्र को उसकी मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरु किया है.

…तो इसलिए बंद होंगे देशभर के 800 इंजीनियरिंग कॉलेज

नई दिल्ली। कभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन लेने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती और दाखिला न मिलने पर लोग आत्महत्या भी कर लेते थे. लेकिन अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्रों को निराश होंगे यह जानकार की देश के 800 इंजीनियरिंग कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया गया है. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने इन कॉलेजों को बंद करने की मंजूरी दे दी है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन कॉलेजों के बंद करने के पीछे एआईसीटीई के रूल है. जिनकी वजह से इन इंजीनियरिंग के कॉलेजों को बंद करने का फैसला लिया गया है. एआईसीटीई के अध्यक्ष अनिल दत्तात्रेय सहस्रबुद्धे ने कहा कि इन कॉलेजों में न तो मूलभूत ढांचा बेहतर है न इनकी सीटें ही पूरी तरह भर पा रही हैं.

उन्होंने आगे कहा कि एआईसीटीई के नियमों के मुताबिक, अगर किसी कॉलेज में जरूरी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं और लगातार पांच साल तक उसमें 30 फीसदी या इससे कम सीटें भरती हैं तो उसे बंद कर दिया जाता है.

इन्हीं सख्त नियमों की वजह से हर साल 150 से ज्यादा इंजीनियरिंग के कॉलेज बंद हो रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2014-15 से 2017-18 तक देश में 410 से ज्यादा इंजीनिरिंग कॉलेजों बंद किया गया.

वेबसाइट के अनुसार, एआईसीटीई ने 2014-15 से 2017-18 तक पूरे भारत में 410 से अधिक कॉलेजों को बंद करने को मंजूरी दी है. इनमें से 20 संस्थान कर्नाटक में हैं. 2016-17 में सबसे ज्यादा संख्या में संस्थाओं को बंद करने की मंजूरी दी गई थी. तेलंगाना (64), उत्तर प्रदेश (47), महाराष्ट्र(59), आंध्र प्रदेश(29), राजस्थान(30), तमिलनाडु और हरियाणा (31), गुजरात(29), पंजाब(19), कर्नाटक और मध्य प्रदेश(21) में सबसे ज्यादा कॉलेज ऐसे हैं, जो एआईसीटीई के मानकों के हिसाब से बंद होने हैं.

सुशील मोदी की चचेरी बहन भी सृजन घोटाले में शामिल

पटना। बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में एक नया खुलासा सामने आया है. सृजन घोटाले के तार बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की चचेरी बहन रेखा मोदी से जुड़ गए हैं. उन पर करोड़ों रुपये का भुगतान सृजन के खाते से लेने के आरोप लगे हैं. जानकार कहते हैं कि इस घोटाले में अभी और कई बड़ी मछलियों का नाम उजागर होना बाकी है.

जांच एजेंसियों को पता लगा है कि सृजन के कर्ता-धर्ता अफसरों और राजनेताओं को खुश करने के लिए उनके परिजनों को बड़ी मात्रा में गिफ्ट दिया करते थे. इनमें से अधिकांश हीरे की ज्वेलरी होती थी. इन ज्वेलरी की खरीद के लिए सृजन के खाते से रेखा मोदी को भुगतान होता था, फिर रेखा मोदी उन्हें अपनी कंपनी के जरिए या नकद हीरे व्यापारी को देती थीं. पटना के जालान जेम्स के मालिक रवि जालान ने कबूल किया है कि रेखा मोदी ने उन्हें हीरों की खरीद के बदले कई बार भुगतान किया है.

फिलहाल रेखा मोदी पटना से फरार हैं. उनके घर पर कोई यह बताने में सक्षम नहीं है कि वो कहां हैं. रेखा मोदी और सृजन की सचिव मनोरमा देवी के बीच रिश्ते काफी मधुर थे. यह बात भी सबको पता है मगर उनके रिश्ते सुशील मोदी से अच्छे नहीं हैं. साल 2005 में भी सुशील मोदी को रेखा मोदी की वजह से बदनामी झेलनी पड़ी थी. रेखा मोदी ने एक बार अपने ही भाइयों पर कपड़े फाड़ने के आरोप लगाए थे.

इस घोटाले में अभी तक केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, पूर्व सांसद शाहनवाज़ हुसैन, झारखंड के सांसद निशिकांत दुबे, भाजपा से अब निलंबित किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष विपिन शर्मा, उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के दीपक वर्मा के नाम भी सामने आए हैं और अब इस मामले में एक नया नाम रेखा मोदी का जुड़ गया है. इन लोगों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से सृजन की दिवंगत सचिव मनोरमा देवी या उनके बेटे अमित कुमार या बहू प्रिया से संबंध रहे हैं.

गौरतलब है कि सृजन घोटाले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली है और इस सिलसिले में दर्ज एफआईआर और दूसरे जरूरी कागजातों का बारीकी से अध्ययन कर रही है. साथ ही घोटाले से जुड़े सरकारी व बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के पदधारकों और फायदा लेने वाले लोगों की सूची बनाकर इनकी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा जुटाने में लगी है. मामले की जांच एएसपी सुरेंद्र मल्लिक की अगुआई में 15 सदस्यीय सीबीआई टीम कर रही है. पहले इस मामले की जांच बिहार एसआईटी और आर्थिक अपराध की ईकाई कर रही थी.

सेना ने जलाए 2500 से ज्यादा मुसलमानों के घर

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राखिन। म्यांमार के रोहिंग्या बहुल इलाके में पिछले हफ्ते 2,600 से अधिक घर जलाए गए. सरकार ने शनिवार को बताया कि यह दशकों में मुस्लिम अल्पसंख्यक से जुड़े हिंसा मामलों में सबसे घातक है. संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचआरसी) के अनुसार, करीब 58,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से जान बचाकर पड़ोसी देश बांग्लादेश चले गए.

म्यांमार अधिकारियों ने अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (आरसा) पर घर जलाने का आरोप लगाया. ग्रुप ने दावा किया कि पिछले हफ्ते सुरक्षा चौकियों पर हुए हमले के कारण यह सब हुआ. म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर कई तरह के प्रतिबंध हैं. कई हजार रोहिंग्या जान बचाकर बांग्लादेश भाग चुके हैं. रोहिंग्या लोग म्यांमार सरकार पर नस्लीय हिंसा का आरोप लगाते रहे हैं.

म्यांमार का कहना है कि कोतांकुक, माइनलुट और काइकानपिन गांवों के कुल 2,625 घरों को आरसा ने जला दिया है. म्यांमार सरकार द्वारा आरसा समूह को आतंकी घोषित कर दिया गया है लेकिन न्‍यूयार्क की ह्यूमन राइट्स वॉच ने इमेजरी सैटेलाइट शोज के जरिए पूरे मामले को देखते हुए कहा म्यांमार के सिक्योरिटी फोर्सेज ने जान बूझकर आग लगायी है.

म्यांमार और बांग्लादेश को अलग करने वाली नाफ नदी के पास पहुंचने वाले रिफ्यूजी साथ में बोरियों में अपना सामान लेकर आए हैं वे वहीं पर झुग्‍गी बना रहे हैं या फिर स्‍थानीय निवासियों के घर में पनाह ले रहे हैं. रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार में नागरिकता से इंकार कर दिया गया और अवैध प्रवासी करार दिया गया. जबकि उन्होंने दावा किया था कि उनके पूर्वज यहीं के थे.

बलात्कारी बाबा के कारण परेशान कैदियों ने जेल में की हड़ताल

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नई दिल्ली। बलात्कारी बाबा राम रहीम से जेल के बाहर ही नहीं बल्कि जेल के अंदर रहने वाले कैदी भी परेशान है. दरअसल, बलात्कारी बाबा को रोहतक के जिस सुनारिया जेल में रखा गया है वहां के कैदियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

राम रहीम के जेल में होने से सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है. अन्य कैदियों को किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है. जेल प्रशासन की इस सख्ती से खफा कैदियों ने हड़ताल कर दी है.

सुनारिया जेल के इन हालात का खुलासा पेशी के लिए बाहर आए एक कैदी ने किया. बताया जाता है कि कारौर ग्राम का निवासी अनिल रोहतक की सुनारिया जेल में हत्या के प्रकरण में बंद है. इस मामले की सुनवाई अदालत में चल रही है. दो दिन पहले अनिल को पेशी के लिए कोर्ट में लाया गया. इस दौरान उसने अपने वकील को बताया कि 26 अगस्त को राम रहीम को जेल में लाने पर जेल प्रशासन ने एक बैरक खाली करा दिया. उस बैरक में रह रहे 13 कैदियों को दूसरे बैरक में भेज दिया.

राम रहीम की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन किसी भी कैदी को उसके परिजन से नहीं मिलने दे रहा है. इस जेल की क्षमता करीब 1300 कैदियों की है जबकि इसमें करीब डेढ़ हजार कैदी बंद हैं. बताया जाता है कि कैदियों को चादर और कंबल नहीं दिए जा रहे हैं. राम रहीम की वजह से कैदी परेशान हैं. इस मामले में कई बार जेल प्रशासन से कहने के बाद भी जब समस्या नहीं सुलझी तो कैदियों ने आंदोलन शुरू कर दिया है.

फोर्ब्स ल‍िस्ट में भारत सबसे भ्रष्ट देश

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नई दिल्ली। फोर्ब्स ने एशिया के सबसे भ्रष्ट देशों की एक सूची जारी की जो सोशल मीडिया पर बहस की वजह बनी हुई है. हालांकि जो स्टोरी फोर्ब्स ने शेयर की है वह मार्च 2017 की है. इसमें भारत को सबसे भ्रष्ट देश बताया गया है और पाकिस्तान इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है. इस लिस्ट में पहले नंबर पर भारत, दूसरे पर वियतनाम, तीसरे पर थाईलैंड, चौथे पर पाकिस्तान और पांचवें नंबर पर म्यांमार है.

इसमें लिखा गया है कि ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल के 18 महीने के सर्वेक्षण से पता चलता है कि अभी बहुत काम होना बाकी है. फोर्ब्स ने अपनी सूची पर भारत के बारे में कहा है कि यहां छह सार्वजनिक सेवाओं में से पांच- स्कूलों, अस्पतालों, आईडी दस्तावेज, पुलिस और उपयोगिता सेवाएं- आधे से ज्यादा उत्तरदाताओं को रिश्वत का भुगतान करना पड़ा है हालांकि भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लड़ाई ने एक जगह जरूर बनाई है, 53% लोगों का मानना है कि वो काफी अच्छी तरह आगे से जा रहे हैं.

फोर्ब्स के ट्वीट को कुमार विश्वास ने भी ट्वीट किया है. कुमार विश्वास ने लिखा है कि पहले ही कहा था कि नंबर वन बना दूंगा, बना दिया. इसे पीएम नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष माना जा रहा है.बहुत से लोगों ने कुमार विश्वास के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी है. एक ने लिखा है कि पीएम मोदी के कार्यकाल में हम किसी चीज में तो नंबर वन आए. एक ने लिखा है कि हां मोदी जी से पहले तो सारे अन्ना हजारे थे, कोई रिश्वत नहीं लेता था. एक ने लिखा है कि 2 साल बाकी हैं सोमालिया की बराबरी में लाने के प्रयास चल रहे हैं.

हालांकि सवाल यह भी है कि फोर्ब्स ने अपनी पुरानी स्टोरी को आज ट्वीट क्यों किया. एक तरफ जहां नोटबंदी को लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे हैं ऐसे में इस लिस्ट का दोबारा जारी होना भी चर्चा का विषय है.

गोरखपुर कांडः क्लीनिक के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर चुराने के आरोप में डॉ. कफील गिरफ्तार

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गोरखपुर।बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफलाइटिस वॉर्ड के इंचार्ज रहे डॉक्टर कफील खान को यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है. एसटीएफ अब उन्हें गोरखपुर पुलिस को सौंपेगी. बीआरडी मेडिकल कॉलेज मामले में अब तक कुल 9 लोग आरोपी बनाए गए हैं.

डॉ. कफील खान को लखनऊ से पकड़ा गया है. कफील को यूपीएसटीएफ ने एक सूचना के आधार पर धर दबोचा. वो पिछले पंद्रह दिनों से फरार चल रहे थे. वह मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग के अध्यक्ष थे. बीआरडी अस्पताल में 10 अगस्त की रात 30 अधिक बच्चों की मौत मामले में डॉक्टर कफील पर यह कार्रवाई की गई है. आरोप है कि ऑक्सिजन की कमी से इन बच्चों की मौत हुई, हालांकि अस्पताल प्रशासन और राज्य सरकार इस बात से इनकार करता रहा है.

DIG एसटीएफ मनोज तिवारी ने कहा कि कफील के लखनऊ और गोरखपुर स्थित घर से कुछ ऐसी बातें पता चलीं, जिनसे लगता है कि अन्य आरोपों के अलावा बच्चों की मौत में भी वह दोषी हैं.

गौरतलब है कि डॉ. कफील उस समय सुर्खियों में आए थे जब मीडिया में इस तरह की खबरें आई थीं कि ऑक्सिजन की कमी के वक्त वह खुद अपनी गाड़ी से अपने दोस्तों और निजी अस्पतालों से ऑक्सिजन सिलिंडर लेकर बीआरडी अस्पताल पहुंचे थे. उस वक्त कफील की छवि एक ‘मसीहा’ के तौर पर सामने आई. हालांकि, बाद में कफील पर प्राइवेट अस्पताल चलाने सहित कई गंभीर आरोप लगे.

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत का तांडव जारी है. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 29 अगस्त की रात 12 बजे से 30 अगस्त की रात 12 बजे तक 24 घंटे में 13 बच्चों की मौत हुई है. इनमें एनआईसीयू में 08 और पीआईसीयू में अलग-अलग बीमारियों से 5 बच्चों की मौत हुई है. बता दें कि एनआईसीयू में कुल 114 और पीआईसीयू में 240 मरीज भर्ती हैं. अगस्त महीने में अब तक 399 बच्चों की मौत हुई है.

NEET के खिलाफ लड़ने वाली दलित छात्रा ने किया सुसाइड

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नई दिल्ली। नेशनल एलिजिबिलिटी एंड एंट्रेस टेस्ट (NEET) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ने वाली दलित स्टूडेंट अनिता ने शुक्रवार(1 सितंबर) को सुसाइड कर लिया. ये घटना तब हुई जब 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को कहा कि मेडिकल में दाखिले की प्रक्रिया के लिए सभी राज्यों को नीट यानी की NEET का ही पालन करना होगा.

अनिता ने कुझुमुर गांव स्थित अपने ही घर में रस्सी से फांसी लगा ली. वह बहुत ही गरीब परिवार से थी. उसके पिता मजदूरी कर परिवार का पेट भरते हैं. तमिलनाडु सरकार ने अनिता के परिवार वालों को 7 लाख की मदद देने का एलान किया है.

अनिता को राज्य सरकार के एडमिशन के नियम के मुताबिक निश्चित ही मेडिकल सीट मिलती, क्योंकि उसे कट ऑफ मार्क्स से दो नंबर ज्यादा मिले थे. NEET लागू होने के बाद उसका स्कोर कम हो गया था और मेडिकल का उसका सपना टूट गया.

गौरतलब है कि तमिलनाडु ने इस साल राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा से राज्य को बाहर रखने के लिए अधिसूचना जारी की थी. इसके बाद केन्द्र ने भी कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु को छूट नहीं दी जा सकती है. दलित छात्रा एस अनीता ने नरेन्द्र मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया था और अदालत में इसे चुनौती दी थी.

इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 6 छात्रों ने याचिका दायर की थी. छात्रों ने राज्य सरकार को NEET में मिले अंकों के आधार पर तैयार मेधा सूची के अनुसार काउंसिलिंग शुरू करने का निर्देश देने की मांग की थी. इसके बाद 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तमिलनाडु सरकार से राज्य में एमबीबीएस और बीडीएस की सीटों पर नामांकन के लिए नीट मेधा सूची के आधार पर काउंसिलिंग शुरू करने को कहा था. कोर्ट ने राज्य सरकार से चार सितंबर तक प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी कहा था.

मायावती ने देशवासियों को दी ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने देशवासियों और मुस्लिम समाज के लोगों को ईद-उल-अज़हा (बकरईद) मुबारकवाद और शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा कि ईद-उल-अज़हा का त्यौहार अल्लाह की राह में कुर्बानी के जज़्बे का वह त्यौहार है जिसकी बुनियाद हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने सैकड़ों वर्ष पहले रखी थी.

मायावती ने कहा है कि यह सर्वविदित है कि भारतीय मुसलमानों का मुख्य रूप से दो त्यौहार ईद-उल-फितर और ईद-उल-अज़हा-समृद्ध भारतीय संस्कृति के सदियों से अभिन्न हिस्सा है. हर वर्ष में एक बार आने वाली ऐसी ईद-उल-अज़हा के लिये तमाम सभी उम्र के मुस्लिम भाईयों-बहनों एवं बच्चों-बच्चियों को तहेदिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद

बसपा सुप्रीमो ने कहा की बसपा का यह प्रयास सतत जारी रहेगा कि भारतीय समाज के अन्य लोगों के साथ-साथ उनका भी जान-माल व मज़हब पूरी तरह से सुरक्षित रहे. भारतीय संविधान के प्रावधानों और उसकी सही मंशा के मुताबिक उनका जीवन भी ख़ुशहाल बने और वे अमन-चैन के साथ अपना जीवन व्यतीत कर सकें. इस मौके पर सरकारों की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि देश के वर्तमान हालात के मद्देनज़र सभी जगह शान्ति-व्यवस्था व आपसी भाईचारा एवं सद्भावना का माहौल बिगड़ने नहीं दे.

मायावती ने कहा कि ईद का पवित्र त्यौहार कौमी एकता को मज़बूत करने के साथ ही गरीबों की मदद, समाज में सामाजिक सद्भाव तथा सह-अस्तित्व की भावना को भी बढ़ायेगा, ऐसी मेरी कामना है.

दिल्ली के गाजीपुर में कूड़े का पहाड़ धंसा, कई गाड़ियां चपेट में

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शुक्रवार शाम अचानक पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर डंपिंग यार्ड का एक हिस्सा कोंडली नहर में जा गिरा. जिसके चलते कई बाइक और स्कूटी सवार महिला नहर में डूब गए. आपको बता दें कि यह इलाका दिल्ली और गाजियाबाद का बॉर्डर है और सुबह-शाम भारी संख्या में लोग इस कूड़े के ढ़ेर के किनारे से निकलते थे. दमकल की 6 गाड़ियां मौके पर मौजूद हैं और लोगों को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन चलाया जा रहा है. हादसे में एक बच्चे की मौत की खबर है. जबकि 4 लोगों को अब तक मलबे से बाहर निकाला जा चुका है.

बताया जा रहा है कि हादसा इतना भयानक था कि नहर के रास्ते जाने वाले बाइक, कार और जेसीबी मशीन के साथ कई महिला और लोग भी इस नहर में डूब गए. आप तस्वीर देख सकते हैं कि हादसा कितना भयानक है. नहर के किनारे लगी जाली तक टूट गई है. फिलहाल मौके पर पुलिस पहुंच चुकी है और जांच में जुट गई है.

चश्मदीदों के मुताबिक ऐसा लग रहा था जैसे कूड़े के अंदर कोई गैस बन गई थी. जिस वजह से कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा लोगों पर गिर गया. हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने नहर में कूदकर कुछ लोगों को बचाया तो कुछ लोगों ने कूड़े में दबे लोगों को बाहर निकाल लिया.

घटना के वक्त कूड़े के ढेर के नजदीक के एक चश्मदीद ने ‘आज तक’ को बताया कि ऐसा लग रहा था जैसे कोई बम फटा हो और अचानक भरभरा कर कूड़े के पहाड़ का एक हिस्सा नहर और उसके बगल की सड़क पर आ गिरा. उसके मुताबिक पूरी दिल्ली का कूड़ा ला-ला कर इसी डंपिंग यॉर्ड में फेंका जाता है इसी वजह से यह ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है.

14 हजार आदिवासी लड़कियों ने पढाई छोड़ कर रही हैं झाड़ू-पोछा

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रायपुर। सर्व शिक्षा अभियान और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना की सफलता हम आए दिन सरकार से सुनते रहते हैं. लेकिन सिर्फ सरकार के बयानों और दस्तावेजों में है. वास्तविक रूप ये योजना विफल है. इसकी विफलता का सबूत छत्तीसगढ़ के बस्तर से आया है.

बस्तर छत्तीसगढ़ का आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है. यहां चौदह हजार से ज्यादा लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुकी हैं. जिले में ग्याहर से अठारह साल आयु वर्ग की बालिकाओं में अधिकांश ने प्राइमरी और मिडिल स्कूल स्तर में जाकर बीच में ही पढ़ाई छोड़ी है. वहीं, शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी महिला बाल विकास विभाग की रिपोर्ट मानने को तैयार नहीं है.

जानकारी के मुताबिक, यह संख्या और अधिक हो सकती है क्योंकि इसमें छह से ग्यारह साल आयु वर्ग लड़कियों को शामिल नहीं किया गया है. महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सबला योजना के तहत हर साल स्कूल जाने वाली और स्कल छोड़ने वाली बालिकाओं की सूची तैयार की जाती है. ये आंकड़े इस साल तैयार में दर्शाएं गए हैं.

हाल में जिले के प्रभारी मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे ने यहां कलेक्टोरेट में ली गई विभागीय समीक्षा बैठक में आईसीडीएस द्वारा दी गई जानकारी में स्कूल छोड़ी बालिकाओं की संख्या 13 हजार 963 बताई गई है. इनमें 4467 बालिकाएं 11 से 14 साल और 9496 बालिकाएं 14 से 18 साल आयु वर्ग की बताई जाती हैं.

11 से 18 साल आयु वर्ग में जगदलपुर ब्लाक में 2259, बस्तर में 2134, बकावंड में 2665, बास्तानार 1675, दरभा 2481, तोकापाल 999 और लोहंडीगुड़ा में 1749 लड़कियां स्कल छोड़ चुकी हैं. वहीं, 100 से 200 के बीच ऐसी भी कन्याएं हैं, जिन्होंने हाईस्कूल में दाखिला तो लेकर पढ़ाई अधूरी छोड़ दी.

पिछड़ों को जोड़ने के लिए बसपा ने बनाया अलग विंग

लखनऊ। अपने गठन के समय बहुजन समाज पार्टी की पहचान दलित, पिछड़े और मुस्लिम वर्ग यानि बहुजन समाज के लिए राजनीति करने वाली पार्टी की थी. बाद में बसपा ने खुद को सर्वजन की पार्टी घोषित कर दिया. ऐसे में जहां पार्टी से दलित समाज की कुछ उपजातियां अलग हो गईं तो वहीं पिछड़ा वर्ग भी पार्टी से दूर होने लगा. नतीजा 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी एक भी सीट न जीत सकी तो 2017 में विधानसभा चुनाव में भी पार्टी महज 19 सीटों पर सीमट गई.

एक के बाद एक इन दो सियासी हारों से सबक लेते हुए बसपा अब पिछड़े समाज को पार्टी से जोड़ने की कवायद में जुट गई है. बसपा प्रमुख मायावती ने 31 अगस्त को पिछड़े समाज के लिए एक अलग विंग बनाया है. ‘भाईचारा बनाओ’ संगठन के नाम से बने इस विंग की कमान बसपा प्रमुख ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछड़ों और अतिपिछड़ों को सौंप दिया है.

2007 में यूपी की सत्ता हासिल करने वाली बीएसपी का साथ तब दलित मुस्लिम, पिछड़ों और अति पिछड़ों ने दिया था. लेकिन 2012 विधान सभा, 2014 के लोकसभा और फिर 2017 के विधानसभा में भी पिछड़ों, अतिपिछड़ों और मुस्लिमों ने बीएसपी से दूरी बनाए रखी. इसका नतीजा यह हुआ कि बसपा को लगातार तीन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा.

पार्टी की हार की समीक्षा में यह सामने आया था कि मुस्लिम, पिछड़े और अतिपिछड़ों के बसपा से दूर होने से हार मिली है. इसके बाद पार्टी इन वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कवायद में जुट गई है.