Whatsapp पर भेजा इस्लाम के खिलाफ मैसेज, कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

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लाहौर। पाकिस्तान में अपने दोस्त को व्हाट्सअप पर इस्लाम के लिए अपमानजनक संदेश भेजने पर एक व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई. बताया जा रहा है कि मैसेज सामने आने के बाद उग्र भीड़ ने उसे घेर लिया था हालांकि, वो बच निकला और बाद में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. दोषी करार दिए गए शख्स के वकील का कहना है कि उसका मुवक्किल बेगुनाह है. उन्होंने कहा कि युवक को जानबूझकर मामले में फंसाया जा रहा है. वो कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे.

जानकारी के मुताबिक, जेम्स मसीह नाम के शख्स के दोस्त ने पुलिस में शिकायत की थी कि उसने व्हाट्सऐप पर एक कविता भेजी थी जो इस्लाम का अपमान कर रह रही थी. इस पर जेम्स से खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था. वहीं मामला सामने आने के बाद नाराज लोगों ने उसका घर घेर लिया.

भीड़ से बचने के लिए जेम्स पंजाब प्रांत के सारा ए आलमगीर कस्बे से भाग गया. बाद में उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. उसकी सुनवाई सुरक्षा कारणों से जेल में एक साल से अधिक समय तक चली. यह जेल लाहौर से करीब 200 किलोमीटर दूर है.

अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि जेम्स मसीह को मृत्युदंड के साथ ही 3,00000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. वहीं जेम्स के वकील अंजुम वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल बेगुनाह है. उन्होंने कहा, ”मेरा मुवक्किल लाहौर उच्च न्यायालय में अपील करेगा क्योंकि एक मुस्लिम लड़की से प्रेमप्रसंग के चलते उसे फंसाया गया है.” अंजुम वकील के अनुसार सुरक्षा कारणों से जेल के अंदर सुनवाई हुई.

भारत सरकार नहीं जानती कब और कैसे हुई बाबासाहेब की मृत्यु?

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नई दिल्ली। दलित हितैषी होने का दावा करने वाली भारत सरकार एक बार फिर विवादों में फंस सकती है. क्योंकि भारत सरकार को बाबासाहेब अम्बेडकर बारे में कोई जानकारी नहीं है. सरकार को नहीं पता कि संविधान निर्माता बाबासाहेब अम्बेडकर की मृत्यु कब और कैसे हुई थी? सरकार की इस नासमझी का खुलासा एक आरटीआई के माध्यम से हुआ है.

अलीगढ़ के चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रतीक चौधरी एडवोकेट ने दिनांक 29 मई 2017 को जनसूचना अधिकारी गृह मंत्रालय, भारत सरकार से सूचना के अधिकार के तहत तीन बिंदुओं पर सूचना मांगी थी कि डा. भीमराव अम्बेडकर की मृत्यु कब हुई?, किन हालात में हुई?, स्वाभाविक हुई या हत्या की गई?. अगर हत्या की गई तो हत्यारोपी का नाम, पद, एफआईआर और पोस्टमॉर्टम की कॉपी भी मांगी गई. इस पर भारत सरकार ने क्या कार्यवाई की.

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डा. अम्बेडकर प्रतिष्ठान, भारत सरकार ने इसका हास्यास्पद जबाव दिया. सरकार ने 14 जुलाई 2017 को भेजे गए पत्र में लिखा कि डा. अम्बेडकर प्रतिष्ठान, भारत सरकार के पास डा. भीमराव अम्बेडकर की मृत्यु के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

इस उत्तर के खिलाफ प्रतीक चौधरी एड्वोकेट ने अपीलीय अधिकारी ग्रह मंत्रालय, भारत सरकार को दिनांक 14 अगस्त 2017 को अपील भेजी है और अब वह केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि प्रतीक को यकीन है कि भारत सरकार इस बार भी सूचना नहीं देगी.

प्रतीक चौधरी का कहना कि आज बाबासाहेब की मृत्यु के बारे में तमाम तरह की अफवाहें समाज मे फैली हुई हैं. संसद भवन के अंदर भरतपुर के सांसद जाट राजा बच्चू सिंह के द्वारा डा. अम्बेडकर की हत्या की बात कही जाती है. जबकि डा. अंबेडकर की मृत्यु स्वाभाविक थी और केवल राजनीतिक हितों की पूर्ति हेतु ये अफवाह फैलाई गई. जिसके आधार पर आज जातिवाद की राजनीति हो रही है.

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प्रतीक ने कहा कि भारत सरकार को भारत के महापुरुषों के जीवन चक्र के बारे में आमजन को जनजागरण द्वारा अवगत कराया जाना चाहिए. भारतीय नागरिक होने के नाते ये मेरा अधिकार है कि मैं जान सकूं की मेरे देश के संविधान निर्माता की मृत्यु किस तारीख को किस वजह से हुई. सरकार को ये सारी चीजें स्वयं ही सार्वजनिक कर देनी चाहिए परन्तु सरकार तो कानूनी तरीक़े से पूछने पर भी नहीं बता रही है.

प्रतीक ने आगे कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग इस देश की बुनियाद हैं. इस बुनियाद में जो दरार राजनीति ने डाली है, मैं इस दरार को भर कर और दिलों को जोड़कर ही दम लूंगा. इसके लिए मुझे किसी भी न्यायालय या उच्चतम न्यायालय ही क्यों ना जाना पड़े.

भारत में चल रहा है कंपनी राज!

डिजिटल इंडिया से न्यू इंडिया की संकल्पना आजकल सरकार की प्रमुखता में है. इसके प्रचार-प्रसार के लिए काफी धनराशि खर्च की जा रही है. हालांकि अभी भी हमारा देश कई चुनौतियों से जूझ रहा है जिनमें आतंकवाद, नक्सलवाद तो गंभीर समस्यायें हैं ही, इसके अतिरिक्त भी भारतीय नागरिक कई प्रकार के विषम और कठिन दौर का सामना कर रहे है.

देश में आजादी से पहले और आजादी के बाद कुछ कार्य ऐसे हैं जिनको हमारी सरकारें अभी तक पूर्ण रुप से संपन्न नहीं कर पायी हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य जो किसी भी राष्ट्र की मूल समस्या तो होती है. एक समृद्ध राष्ट्र की पहचान देश की बेहतर शिक्षा प्रणाली और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से भी आंकी जाती है. आज का बच्चा कल का नागरिक होता है. कल देश को संभालने की जिम्मेदारी भी आज के नौनिहालों के हाथ में ही होती है.

देश का भविष्य वर्तमान में गहरे संकट में नजर आ रहा है. कुपोषण और इलाज के अभाव में हर साल लाखों बच्चे मौत के मुंह में समा जाते है. और इन मौतों को अगस्त महीने की पारंपरिक मौत कह कर देश के राजनेता क्रूर मजाक करने से बाज नहीं आते है. देश का हर क्षेत्र अमीर-गरीब, ऊंच-नींच और असमानता की खाइयों से भरा नजर आता है. गरीब का वोट तो कीमती होता है मगर गरीब की और उनके बच्चों की कोई कीमत नहीं होती है. अगर होती तो गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज और सैफई का मेडिकल कालेज गरीब बच्चों की कब्रगाह नहीं बनता. जहां आक्सीजन की कमी से सैकड़ों बच्चे अकाल मौत के मुँह में समा जाते हैं और संवेदना व्यक्त कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से विमुख हो जाती है.

किसके सपनों का भारत बनाना चाहते हैं हम? खून-पसीने से देश को सींचने वालों का या खून चूसने वालों का? आंकडों पर नजर डाली जाये तो सरकार स्कूलों में पढ़ने वाले और सरकारी अस्पतालों में मरने वाले अधिकांश गरीब और वंचित तबके के ही लोग होते है. ऐसा लगता है देश का गरीब राम भरोसे और देश का अमीर सरकार भरोसे है. ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह भारत में इस वक्त कंपनी का ही राज चल रहा है. निजीकरण के नाम पर उद्योगपतियों को सरकार निरंतर मजबूत कर रही हैं. पर गरीबी हटाने में हम सफल तो नही हुए हैं मगर गरीब को ही हटाने का अच्छा तरीका भारत के स्वास्थ्य महकमें और खाद्य महकमें ने इजाद कर लिया है!

राष्ट्र भक्ति और देश प्रेम के नारे तो लगवाये जाते हैं मगर भूखे पेट कोई देश भक्त नहीं हो सकता, ये सच्चाई भी स्वीकार करनी पड़ेगी. वोट की कीमत अगर बराबर होती तो गरीब और अमीर के बीच प्रथम चुनाव से लेकर अब तक अमीर और गरीब के बीच धरती और आसमान का फर्क नहीं होता. एक ओर बुलेट ट्रेन की सौगात और दूसरी तरफ कहीं एक साइकिल चलाने का भी रास्ता नहीं है. जबकि ये हकीकत है कि भारत गांव का देश है और 70 प्रतिशत जनता कृषि पर निर्भर है. लेकिन किसान आत्म हत्या कर रहा है. अमीर के लिए बुलेट ट्रेन लाई जा रही है. क्या इस बुलेट ट्रेन में देश का वो गरीब मजदूर और किसान भी सफर कर पायेगा जिसने सरकारों से अपने लिए भी कुछ सपने देख कर बढ़चढ़ कर वोट किया था.

मेरा मकसद विकास को कोसना नहीं है मगर असमानता की खाई भी विकास के साथ-साथ कम होनी चाहिए. संचार क्रांति और सोशल मीडिया से जहां समाज की मीडिया से निर्भरता कम हुई है. वहीं डाटा और आटा में भी संतुलन बनाने की जरूरत है. डाटा निरंतर सस्ते पे सस्ता होता जा रहा है और वहीं गरीब मजदूर आटे-दाल के भाव देखकर चिंतित है. संतुलित आहार जिस प्रकार शरीर के लिए आवश्यक है उसी प्रकार संतुलित विकास भी देश के चहुमुखी विकास के लिए भी आवश्यक है.

यह लेख आईपी हृयूमन ने लिखा है.

दलित महिला सरपंच पर जातिवादी गुंड़ों ने किया जानलेवा हमला

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फिरोजपुर। पंजाब के फिरोजपुर में सवर्णों ने दलित सरपंच के घर में घुसकर जानलेवा हमला किया. हमले में सरपंच सहित उसकी मां, पिता और भाई भी गंभीर रूप से घायल हो गए. तीनों घायलों को रात में ही उपचार के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

फिरोजपुर के रंगाला-राजपुर, धमाला एवं चकरंगाला गांव की धमाला ग्राम पंचायत है. धमाला ग्राम पंचायत की दलित सरपंच सीमा रानी है. बताया जा रहा है कि रंगाला राजपुर गांव में उसके परिवार के बच्चों एवं गांव के कुछ उच्च जाति के बच्चों के बीच मंगलवार (12 सितंबर) की शाम को कहासुनी हो गई थी.

जिसके बाद उच्च जाति के लोगों ने दलित सरपंच के घर पर जानलेवा हमला कर दिया. सरपंच के परिजनों का आरोप है कि जातिसूचक शब्दों का उपयोग कर उन्हें गालियां देने के साथ-साथ जान से मारने की धमकी भी दी गई. जानलेवा हमले में सरपंच का पिता, मां व भाई राकेश गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों को उपचार के लिए सिविल अस्पताल ले जा गया गया है.

आरोप है कि कहासुनी के बाद उच्च जाति के लोगों ने सरपंच सीमा रानी के घर पर रात करीब आठ बजे लाठी डंडों से जानलेवा हमला बोल दिया. इस जानवेला हमले में सरपंच का पिता रामफल, मां मूर्ति देवी तथा भाई राकेश गंभीर रूप से घायल हो गए. तीनों घायलों को रात में ही उपचार के लिए सिविल अस्पताल लाया गया.

डा. नीतीश अग्रवाल ने घायलों का प्राथमिक उपचार किया. उच्च जाति के द्वारा किए गए जानलेवा हमले के बाद से सरपंच का परिवार दहशत में है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

बाढ़ पीड़ित दलितों को अनुदान देने में भेदभाव कर रहे हैं सवर्ण अधिकारी-सरपंच

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छपरा। इस साल लगभग पूरा देश बाढ़ से प्रभावित रहा. जिनमें बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, गुजरात, मुंबई, असम बाढ़ से अधिका प्रभावित हुए. बिहार में स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय रही. जहां करोड़ों लोगो प्रभावित हुए. सैकड़ों लोगा मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए.

बाढ़ के बाद बिहार के कई जिलों और सैकड़ों गांव के हालात सुधरने में न जाने कितना वक्त लगेगा. एक तो लचर सरकारी व्यवस्था उसमें भी जातिवाद का दंश. सरकार द्वारा दी जा रही खाने-पीने वस्तुएं और अनुदान को भी अधिकारी और सरपंच जाति के आधार पर बांटी जा रही है.

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बिहार के सारण जिले के अमनौर प्रखंड में बाढ़ पीड़ित परिवारों को सरकारी अनुदान देने के लिए हो रहे सर्वे में दर्जनों दलित परिवारों के नाम जोड़े नहीं गए. इसको लेकर शेखपुरा पंचायत के वार्ड संख्या एक के दर्जनों दलित परिवार प्रखंड कार्यालय गए. लेकिन अंचलाधिकारी ने आवेदन लेने से इंकार कर दिया.

इसके बाद दलितों ने जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद को आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत पत्र में दलितों ने लिखा है कि बाढ़ परिवारों को दिये जाने वाले परिवारिक अनुदान से वंचित करने को लेकर प्रगणक सहशिक्षक, वार्ड सदस्य पक्षपात कर दलित परिवारों का अनुदान से सूची से नाम हटा दिया है. वहीं वे लोगों अनुदान की राशि गबन करने के लिए अपने नाबालिक बच्चों एवं सगे-संबंधियों का नाम जोड़ दिया है.

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उन्होंने कहा है कि बाढ़ से वार्ड संख्या एक के सभी दलित परिवारों की घर-गृहस्थी पूरी तरह प्रभावित हो गई है. लेकिन स्थानीय सवर्ण जनप्रतिनिधियों और प्रगणक सहशिक्षक मिलीभगत कर बाढ़ प्रभावित दलित परिवारों को मिलने वाले सरकारी अनुदान से वंचित करने की साजिश कर रहे हैं. इस पर डीएम ने आपदा प्रबंधन विभाग के पदाधिकारियों जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

सनौता में दलितों के घरों पर हुआ हमला

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मेरठ। सनौता में दो सगे भाइयों की हत्या के बाद लोगों ने दलितों के घरों पर हमला बोल दिया था. जिससे दहशत में आए दलित परिवार अपने-अपने घरों पर ताले लगाकर बृहस्पतिवार आधी रात को गांव से चले गए. गांव की गलियों में शुक्रवार को दिनभर सन्नाटा पसरा रहा. चप्पे-चप्पे पर पुलिस व पीएसी का पहरा था. एसएसपी सनौता गांव में शुक्रवार तड़के ही पहुंच गई थीं. दोनों भाइयों के शव सुपुर्द-ए-खाक होने पर एसएसपी ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि सभी आरोपियों को जेल भेजा जाएगा. इसके बाद एसएसपी ने खुद गांव में कई लोगों से बातचीत की. जिसमें जानकारी मिली कि गांव में हिस्ट्रीशीटर परवेज और गुलफाम पक्ष में चुनाव व वर्चस्व को लेकर विवाद चल रहा है. बृहस्पतिवार को धर्मवीर के घर के सामने परवेज पक्ष के मनसाद व उसके भाई दिलशाद द्वारा कार खड़ी करने पर विवाद हुआ था.

एसएसपी ने दलित परिवारों के घरों पर ताले लटके देखे तो आसपास के लोगों से उनके बारे में पूछा. जिस पर लोगों ने बताया कि मारपीट और गोलियां सिर्फ मनसाद, दिलशाद और धर्मवीर के परिवार में चली थीं. लेकिन हिस्ट्रीशीटर परवेज और गुलफाम की रंजिश के चलते 18 लोगों को नामजद कराया गया है. दलित परिवार को धमकी दी जा रही थी. जिसके चलते आधी रात को ही वे अपने-अपने घर में ताला लगाकर चले गए.

पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर परवेज और गुलफाम शातिर अपराधी हैं. दोनों में वर्चस्व को लेकर विवाद चल रहा हैं. दोनों ने गांव में अपने-अपने गुट बनाए हैं. प्रधानी चुनाव, ब्लॉक प्रमुख या विधानसभा का चुनाव हो. हर चुनाव में इनकी गुटबाजी गांव में साफ नजर आती है है. इस डबल मर्डर के बाद भी दोनों की गुटबाजी साफ दिखाई दे रही है. हालांकि एसएसपी ने कहा कि नामजदगी के आधार पर गिरफ्तारी नहीं होगी. सही आरोपी ही जेल भेजे जाएंगे.

दलित युवक की पेड़ से बांधकर पिटाई का विडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला

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बटाला। देशभर में दलितों पर अत्याचार रूकने का नाम नहीं ले रहा है. कभी उत्तर प्रदेश में, तो कभी मध्य प्रदेश में, तो कभी राजस्थान में दलितों पर अत्याचार हो रहा है. अब पंजाब के बटाला से भी दलित शोषण की खबर आई है.

दरअसल, बटाला के भुल्लर गांव में एक मकान मालिक ने दलित किराएदार को पेड़ से बांधकर पीटा. मकान मालिक ने दलित टिक्का मसीह पर पंखा चुराने का आरोप लगाया. टिक्का मसीह ने मकान मालिक के आरोप को खारिज भी किया. इसके बावजूद मकान मालिक ने उसकी एक बात नहीं सुनी और उसे कुछ लोगों की मदद से पेड़ से बांध दिया और पीटना शुरू कर दिया.

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टिक्का मसीह की पिटाई के बाद उनके मकान मालिक देबा सिंह और उनके दोस्तों ने घटना की विडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. जिसके बाद यह घटना सबके सामने आई. टिक्का मसीह की पत्नी सुनीता के मुताबिक घटना के बाद से उनका पति गायब है. इस घटना को पांच दिन बीत चुके हैं लेकिन पुलिस इस मामले में कोई भी उचित कार्रवाई नहीं कर रही है. इसके बाद सुनीता ने मीडिया से संपर्क कर इस मामले की जामकारी दी. सुनीता ने कहा कि उसके मकान मालिक देबा ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर टिक्का की पिटाई कर उससे जबरन जुर्म कबूल करवाया.

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सुनीता ने कहा कि इस घटना की जानकारी जैसे ही मुझे मिली मैं तुरंत 1300 रुपए लेकर घटनास्थल पर पहुंची. मैंने पंखे की कीमत चुका दी फिर भी देबा मेरे पति को अपने साथ ले गया और कहने लगा कि वो टिक्का को सबक सिखाने के लिए अपने साथ लेकर जा रहा है. मेरे पति तब से ही गायब हैं और जब मैंने देबा से उनके बारे में पूछा तो वह कोई भी संतुष्ट करने वाला जवाब नहीं दे पाया.

सुनीता ने बताया कि उन्होनें इस घटना की शिकायत पुलिस में करानी चाही लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज़ करने से इनकार कर दिया और सुनीता को थाने से डांट कर भगा दिया.

लंदन मेट्रो में हुआ बम ब्लास्ट, 20 लोग घायल

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लंदन। लंदन में अंडरग्राउंड मेट्रो में धमाका हुआ है. मेट्रो में हुए भीषण विस्‍फोट में तकरीबन 20 लोग घायल हुए हैं. घटना पार्संस ग्रीन स्टेशन की है. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस व राहत दल घटनास्थल पर पहुंच गया है. स्थानीय मीडिया के अनुसार धमाका एक बाल्टी में हुआ है.

ब्‍लास्‍ट के लिए इंप्रोवाइज्‍ड एक्‍सप्‍लोसिव डिवाइस (आईईडी) का इस्‍तेमाल किया गया है. इस घटना के बाद पीएम थेरेसा ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. धमाके की सूचना मिलने के बाद मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया है. साथ ही अन्य मेट्रो सेवाओं को भी रोक दिया गया है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रेन के पीछे वाले कंपार्टमेंट में रखे एक सफेद कंटेनर में धमाका हुआ जिसके बाद ट्रेन के अंदर धुआं फैल गया. दावा है कि यह एक होम मेड छोटा विस्फोटक था जो कि मेट्रो के एक डिब्बे में था. फिलहाल इस डिब्बे की जांच की जा रही है. वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि इसी तरह का एक और एक्सप्लोसिव को निष्क्रिय किया गया है.

धमाके के बाद डर के मारे लोग जान बचाने के लिए भागने लगे. कहा जा रहा है की भगदड़ के चलते कई लोग गिर गए जिसके कारण भी उन्हें चोट आई है.

लंदन में इस तरह की यह चौथी घटना है. इससे पहले इसी साल जून में लंदन के मध्य इलाके में छुरे लिए और नकली आत्मघाती जैकेट पहने तीन हमलावरों ने एक बाजार में हमला किया जिससे कम से कम सात व्यक्तियों की मौत हो गई और 48 लोग घायल हो गए. यह हमला आठ जून को होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले हुआ था.

प्रद्युम्न हत्याकांड की जांच करेगी CBI

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गुरूग्राम। प्रद्युम्न हत्याकांड की जांच अब सीबीआई करेगी. हरियाणा के मुख्मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है. हत्या के एक हफ्ते बाद मनोहर लाल खट्टर प्रद्युम्न के घर गए. मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि परिवार की और समाज के अन्य लोगों की मांग थी इस केस की जांच सीबीआई से कराई जाए. इसी मांग को देखते हुए हम सीबीआई को यह केस दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच के अलावा गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल को अगले तीन के लिए हरियाणा सरकार टेकओवर करेगी. डिप्टी कमिश्नर इसके कामकाज को देखेंगे.

प्रद्युम्न के पिता ने कहा, ”सरकार पर हमारा पूरा भरोसा है. सीएम कह कर गए हैं कि इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कराएंगे और जांच सीबीआई को सौंपेंगे. यह बच्चों से जुड़ा हुआ मामला है इसलिए सभी इसे संवेदनशील मान रहे हैं. इसीलिए मुझे लगता है कि जांच सही से की जाएगी. मेरी बेटी को उसी स्कूल में भेजने की बात है तो यह उस बच्ची पर ही निर्भर करता हा वो जाएगी या नहीं.”

प्रद्युम्न के पिता ने कहा कि मेरी मांग पिंटो परिवार या किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है. मेरी मांग है कि ऐसी कार्रवाई हो जिससे अन्य स्कूल प्रशासन भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर सजग हों.

प्रद्युम्न की हत्या का आरोपी कंडक्टर अपने बयान से पलट गया है. आरोपी कंडक्टर अशोक के वकील ने कहा है कि पुलिस ने अशोक को मारपीट और करंट के झटके देकर जबर्दस्ती बयान दर्ज करवाया था. अशोक ने वकील को कहा कि हत्या से उसका कोई लेना देना नहीं है.

ब्लू व्हेल गेम की चपेट में 30 आदिवासी बच्चे

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दंतेवाड़ा। ब्लू व्हेल गेम देश भर में अपने पैर पसार रही है. अब तक कई बच्चे ब्लू व्हेल गेम के कारण सुसाइड कर चुके हैं. जिन बच्चों ने सुसाइड किया है, उनमें ज्यादातर शहरी इलाकों में रहने वाले हैं. लेकिन अब ये गेम देश के दूर दराज के इलाकों में भी फैल चुका है. ब्लू व्हेल गेम अब आदिवासी लड़कों को भी अपने चपेट में ले रही है. छ्त्तीसगढ़ के दंतेवाडा़ के एक सरकारी स्कूल में 30 बच्चों को ब्लू व्हेल गेम से बचाया गया. स्कूल ने पुलिस को जानकारी दी थी कि स्टूडेंट्स ने ब्लेड व अन्य धारदार चीजों का इस्तेमाल कर अपनी बांह में व्हेल की शेप के डिजाइन बनाए हैं. अस्सिटेंट सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस अभिषेक पल्लव ने कहा, छात्र ब्लू व्हेल गेम का देसी वर्जन खेल रहे थे. छात्रों का कहना है कि इससे उनकी पर्सनल प्रॉब्लम सॉल्व हो सकती हैं. बच्चों को काउंसलिंग के लिए भेज दिया गया है. सरकार ने भी इस मामले में एडवाइजरी जारी कर दी है. वहीं पुलिस बच्चों भी ब्लू व्हेल गेम से दूर रखने के लिए स्कूलों के साथ मिलकर काम कर रही है. हालांकि मोबाइल फोनों की बढ़ती पहुंच और बच्चों में बढ़ती जिज्ञासा के कारण प्रशासन के लिए इसे रोक पाना बड़ा चैलेंज बनता जा रहा है. पल्लव ने कहा कि एक बच्चे ने बताया कि अगर वो ये गेम खेलेगा, तो उसके पिता शराब छोड़ देंगे. वहीं एक और छात्र ने बताया कि वो अपने पिता को उसकी जबरन शादी कराने से रोकना चाहता है. बच्चों को इंटरनेट और अखबार के जरिए देम के बारे में पता चला होगा. ऐसा लग रहा है कि कोई एक बच्चा दूसरों को गेम के बारे में गाइड कर रहा है. बच्चो बता रहे हैं कि अपने आपको चोट पहुंचाने से उनकी पर्सनल प्रॉब्लम सुलझ रही हैं. ब्लू व्हेल चैलेंज एक ऐसा ‘सुसाइड गेम’ है, जिसने आजकल सोशल नेटवर्क पर खूब हड़कंप मचाया हुआ है. 4 साल पुराना यह ऑनलाइन गेम महज 50 दिन में आपको अपने वश में कर के या तो बिल्डिंग से छलांग मारने के लिए मजबूर कर देता है, या फिर किसी पुल पर चढ़कर या ट्रेन के नीचे आकर खुदकुशी करने के लिए उकसाता है.

अगले 5 साल में बैंकिंग सेक्टर में 30 फीसदी कम होंगी नौकरियां- विक्रम पंडित

अगले 5 साल में बैंकिंग के क्षेत्र में नौकरी में करीब 30 फीसदी तक की कमी आ सकती है”. एक इंटरव्यू में सिटीबैंक के पूर्व सीईओ विक्रम पंडित ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि जिस तरह से बैंकों में रोबोट और ऑटोमेटिक मशीनरी का इस्तेमाल हो रहा है, उस हिसाब से नौकरी की संख्या में कमी आ सकती है.

यह पहली बार नहीं है कि जब बैंकिंग क्षेत्र में नौकरियों की कमी को लेकर किसी ने इस तरह की बात की हो. इससे पहले BCG ग्रुप के सौरभ त्रिपाठी ने कहा था कि बैंकों में छोटे लेवल जैसे डाटा एंट्री पद तक की नौकरियां मशीनरी और नई टेक्नोलॉजी के आने से खत्म हो सकती हैं.

बिजनेस टुडे की खबर के मुताबिक, उन्होंने कहा कि वो सब कुछ जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और नैचुरल लैंग्वेज में होता है उन सभी प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा रहा है.0

आपको बता दें कि बैंकिंग सेक्टर में लगातार इनोवेशन और नई टेक्नोलॉजी के जरिए काम को आसान बनाया जाने की कोशिश है है. बैंकों में डाटा एंट्री, रकम जमा करना, रकम निकालना, फॉर्म भरना आदि काम ऑनलाइन या मशीनरी द्वारा ही हो जाता है, जिसका असर बैंक कर्मचारियों की संख्या पर पड़ सकता है.

बुलेट ट्रेन के विरोध में उतरे आदिवासी-किसान

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मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट शिलान्यास कर रहे थे तो वहीं दूसरी ओर आदिवासियों और किसानों ने बुलेट ट्रेन का विरोध किया. पालघर जिले के बोईसर रेलवे स्टेशन पर आदिवासी व किसान संगठनों ने ट्रेनों को काले झंडे दिखा प्रदर्शन किया. साथ ही ‘बुलेट ट्रेन हटाओ, लोकल ट्रेन सुधारों ‘ जैसे नारे लगाए.

आदिवासियों ने बुलेट ट्रेन के विरोध में प्रदर्शन कर बुलेट ट्रेन को एक इंच जमीन न देने का ऐलान किया. भूमि सेना के अध्यक्ष कालू काका धोधड़े ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि बुलेट ट्रेन के लिए भूमि मिली नहीं और भूमि पूजन कर दिया गया है.

धोधड़े ने सरकार को चेतावनी दी कि बुलेट ट्रेन व वाढ़वन बंदरगाह के लिए लगने वाली जमीन से बड़ी संख्या में किसान व आदिवासी भूमिहीन हो जाएंगे जिससे बर्दाश्त नही किया जाएगा. सरकार अगर बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट रद्द नहीं करती तो मोदी सरकार के विरुद्ध जन आंदोलन छेड़ा जाएगा आदिवासी नेताओं ने आरोप लगाया की पालघर की कई ग्रामपंचायत पेशा कानून के तहत आती है कानून में साफ तौर पर कहा गया है कि बिना वहां के ग्रामवासियों की मर्जी के किसी प्रोजेक्ट के लिए जमीन नही ली जा सकती है.

सरकार पेशा कानून की धज्जियां उड़ा आदिवासियों व किसानों की जमीन हड़प रही है. मुम्बई से अहमदाबाद तक जाने वाली बुलेट ट्रेन के संभावित स्टेशनों में बोईसर भी शामिल है. विरोध करने में आदिवासी एकता परिषद, शेतकरी संघर्ष समिति, भूमिसेना, सूर्य पाणी बचाव, युवा भारत, वाढवणं बंदर विरोधी, कष्टकरी संघटना, अध्यक्ष शेतकरी संघर्ष समिति के साथ कालू राम धोधड़े सैकड़ों आदिवासी व किसान मौजूद थे. साभारःएनबीटी

हनीप्रीत का ड्राइवर प्रदीप राजस्थान से गिरफ्तार

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सिरसा। जेल में बंद बलात्कारी बाबा राम रहीम के करीबी दिलावर सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दिलावर को राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ में पुलिस ने दबोचा. पंचकूला कोर्ट ने उसे 7 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा है. माना जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद फरार चल रही हनीप्रीत के बारे में कुछ जानकारी मिल सकेगी.

साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी गुरमीत राम रहीम के करीबी दिलावर को पुलिस की एसआईटी टीम ने सोनीपत से गिरफ्तार कर लिया. दिलावर पर देशद्रोह, हिंसा भड़काने तथा राम रहीम को भगाने का षडयंत्र रचने का आरोप है. उसे सात दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है.

राम रहीम को दोषी साबित होने के बाद से दिलावर इंसा अंडरग्राउंड हो गया था. माना जा रहा है कि पुलिस को दिलावर से राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत की जानकारी मिल सकती है. हनीप्रीत भी राम रहीम को सजा मिलने के बाद से लापता है. देशद्रोह की आरोपी हनीप्रीत 25 अगस्त से फरार चल रही है.

आपको बता दें कि साध्वी यौन शोषण मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी साबित होने के बाद से दिलावर इंसा अंडरग्राउंड हो गया था. माना जा रहा है कि पुलिस को दिलावर से राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत की जानकारी मिल सकती है. हनीप्रीत भी राम रहीम को सजा मिलने बाद से लापता है.

आजादी के बाद अब तक आरक्षित नहीं हुई यह विधानसभा

शिमला। हिमाचल विधानसभा चुनाव से पहले कुछ सीटों को आरक्षित करने का मामला जोर पकड़ने लगा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी प्रदेश के कई ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जो अब तक एक बार भी आरक्षित नहीं हुए हैं. स्थानीय वोटर इसे आरक्षित करने की मांग कर रहे हैं. इन्हीं में से एक है सराज विधानसभा क्षेत्र. दरअसल, पहले इस विधानसभा क्षेत्र का नाम चच्योट था लेकिन वर्ष 2012 को डिलिमिटेशन के कारण इसे सराज का नाम दिया गया. इस विधानसभा क्षेत्र पर शुरू से ही ठाकुरों का अधिक वर्चस्व रहा है. सिर्फ एक बार ब्राह्मण प्रत्याशी को जीत मिली थी जबकि एससी/एसटी के प्रत्याशी तो कभी यहां नजर भी नहीं आए. यही कारण है कि सराज विधानसभा क्षेत्र में एससी और एसटी समुदायों से जुड़े लोगों ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर इस विधानसभा क्षेत्र का एससी या फिर एसटी के आरक्षित करने की मांग उठाई है. लोगों का कहना है कि सराज विधानसभा क्षेत्र में एससी/एसटी का करीब 33 प्रतिशत वोट है और आजादी के बाद एक बार भी इस विधानसभा क्षेत्र को आरक्षित नहीं किया गया है. इन्होंने चुनाव आयोग से इसपर विचार करते हुए इस विधानसभा क्षेत्र को एससी/एसटी के लिए आरक्षित करने की मांग उठाई है.

सवर्ण की पिटाई के बाद थाने में 4 घंटे मरणासन्न रहा दलित किशोर

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कौशांबी। यूपी में योगी सरकार के आने से सवर्णों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वो खुलेआम दलितों पर अत्याचार कर रहे हैं. केवल इतना ही नहीं पुलिस भी उनका साथ दे रही है. कोई सवर्णों की शिकायत करने जाता है तो पुलिस उसके साथ भी बदसलूकी करती है. डराती-धमकाती है. ऐसा ही एक मामला कौशांंबी से आया है.

यूपी के कौशांबी में एक सवर्ण ने दलित किशोर को बेहरमी से लाठी-डंडों से मार-मार कर मरणासन्न कर दिया. परिजन दलित किशोर को लेकर घटना की शिकायत करने पुलिस स्टेशन पहुंची. लेकिन पुलिस ने उनकी शिकायत नहीं लिखी और उन्हें थाने से भगा दिया. इस दौरान लगभग चार घंटे पीड़ित किशोर थाने में बिना इलाज के पड़ा रहा. पुलिस ने उसे अस्पताल भी नहीं भेजा.

पुलिस के दुर्व्यवहार से परेशान दलित परिवार किशोर को लेकर कौशांबी के एसपी दफ्तर पहुंचे. पीड़ित परिवार की आवाज सुनकर मंझनपुर के सीओ आए तो लेकिन मामले की जानकारी के बाद उल्टे पांव वापस लौट गए. लगभग आधा घंटा तक एसपी की चौखट पर दलित किशोर बेहोशी की हालत मे पड़ा रहा.

जब मीडिया के लोग मौके पर पहुंचे तब कहीं जाकर सीओ ने किशोर को जिला अस्पताल भेजवाया. इसके बाद भी पुलिस की संवेदनहीनता इस कदर कि किशोर की मां की शिकायत पर आरोपी दबंगों के खिलाफ मुक़दमा तक दर्ज नहीं किया. एसपी का कहना है कि मामले की जांच सिराथू के सीओ को सौंपी गई है.

दरअसल, घटना कोखराज थाना के कसिया पूरब गांव की है. 16 वर्षीय दलित उमेश कुमार अपने साथी संतोष के साथ साइकिल पर गेहूं लादकर आटा चक्की पर पिसवाने जा रहा था. पीड़ित के मुताबिक गांव के वीरेंद्र तिवारी के घर के सामने एक नाली में गेहूं की बोरी गिर गई. जब किशोर अपने साथी के सहयोग से गेहूं की बोरी उठाने लगा तो सवर्ण वीरेंद्र तिवारी ने जाति सूचक शब्दों के साथ गालियों का प्रयोग करते हुए कहा कि देखने मे हट्टे-कट्टे हो और एक बोरी नही संभलती. इस पर किशोर ने कहा गेहू की बोरी हमारी गिरी है और आप क्यों हमे गाली दे रहे हो. इतनी सी बात में जातिवादी गुंडे ने किशोर को लाठी से पीट-पीट कर मरणाशन हालत में कर दिया.

शोरगुल सुन जब परिवार के लोग बीच बचाव में आये तो उन्हें भी पीटने के लिए दौड़ा लिया. दलित परिवार जातिवादी गुंडे की गुंडागर्दी से पूरी तरह से भयभीत हो गया और यूपी-100 पुलिस को सूचना दी. जब मौके पर यूपी-100 पुलिस पहुंची तो परिजन किशोर को मरणासन्न हालत में लेकर कोखराज थाने पहुंचे. चार घंटे तक युवक थाने में मरणाशान हालत में पड़ा रहा, लेकिन कोखराज पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस नहीं दर्ज किया.

पुलिस परिजनों पर लगातार समझौते का दबाव बनाती रही. पुलिस अघीक्षक के दफ्तर के बाहर किशोर को रख कर उसकी दुखियारी मां रोते बिलखते एसपी से से न्याय की गुहार लगाती रही. दफ्तर में बैठे एसपी अशोक पांडेय पीड़ित का हाल जानने एक बार भी बाहर नही निकले. मीडिया के दखल के बाद एसपी ने सीओ सदर को मौके पर भेज एम्बुलेंस से जिला अस्पताल में भर्ती कराया. वहीं इस गंभीर मामले में मीडिया के सवाल के बाद जाकर कौशांबी के पुलिस अधीक्षक ने सीओ सिराथू को जांच सौपा. सब कुछ आंखों के सामने आ जाने के बाद भी एसपी का कहना है की जांच के बाद मुक़दमा दर्ज किया जाएगा.

लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ खतरे में…

पांच सितम्बर को गौरी लंकेश जैसी महान पत्रकार की हुई हत्या समाज के लिए निंदनीय है. उनकी हत्या के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए प्रयोग की गयी अभद्र भाषा हमारी सांस्कृति को शोभा नहीं देता. इस अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों पर कार्यवाही होनी चाहिए. भारत में पत्रकारों की हत्या का ये कोई पहला मामला नही है. पत्रकारों की हत्या का सिलसिला 25 मार्च 1931 से शुरू हुआ था जब उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक साम्प्रदायिक हिंसा में गणेश शंकर विद्यार्थी जी की हत्या कर दी गयी थी.

इसके अलावा आजाद भारत में पत्रकारों की हत्याओं के ऐसे कई मामले है जिनमे राजदेव रंजन, हेमंत यादव, संजय पाठक, संदीप कोठरी, जागेन्द्र सिंह, एम.वी.एन. शंकर, तरुण कुमार आचार्य, सांई रेड्डी, राजेश वर्मा, रामचंद्र छत्रपति, थोनाओजम ब्रजमानी सिंह, वी. शैल्वाराज, अधीर राय, एन.ए. लालरुहलु, इरफ़ान हुसैन, शिवानी भटनागर, बक्शी तीरथ सिंह, उमेश डोभाल जैसे महान पत्रकारों की हत्याएं हुई है. यह हत्याएं किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की हत्या है. मीडिया समाज की आवाज होती है और इस आवाज़ का लगातार गला घोटा जा रहा है. कभी डरा-धमकाकर तो कभी लालच देकर समाज की आवाज़ को निरंतर चुप कराया जाता रहा है.

पत्रकारों की सुरक्षा पर निगरानी रखने वाली प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने वर्ष 2016 में 42 पन्नों की अपनी विशेष रिपोर्ट में कहा था भारत में रिपोर्टरों को काम के दौरान पूरी सुरक्षा नहीं मिलती है. इसमें कहा गया था कि भारत में 1992 के बाद से 27 ऐसे मामले दर्ज हुए जब पत्रकारों को उनके काम के सिलसिले में क़त्ल किया गया, लेकिन किसी भी मामले में आरोपियों को सजा नहीं हो सकी. इस रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार कवर करने वाले पत्रकारों की जान को खतरा बताया क्यूंकि इन 27 में 50 प्रतिशत पत्रकार भ्रष्टाचार सम्बन्धी मामलों पर ख़बरें कवर करते थे.

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ जर्नलिस्ट (आईएफजे) के अनुसार वर्ष 2016 में विश्वभर में 93 पत्रकारों की हत्या कर दी गयी. वही भारत में पिछले वर्ष करीब पांच पत्रकारो की हत्या की गयी. मीडिया से जुड़े लोगों की हत्या के मामले में विश्वभर में भारत आठवें स्थान पर है. ग्लोबल एडवोकेसी ग्रुप के रिपोर्टर विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने भारत को पत्रकारों के लिए एशिया का सबसे खतरनाक देश बताया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि पत्रकारों की हत्या के मामले में भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से भी आगे है.

आजाद भारत में पत्रकारो की हत्याओं पर एक नजर

चूंकि मैं भी मीडिया के क्षेत्र से हूं वर्तमान में मास कम्युनिकेशन (अंतिम वर्ष) का छात्र हूँ इससे पूर्व मैंने अपने गृह जनपद फर्रुखाबाद में “यूथ इण्डिया” समाचार पत्र में पत्रकार के रूप में कार्य किया जहां भू-माफियाओं के खिलाफ संपादक शरद कटियार के निर्देशन में समाचारों का प्रकाशन करने के बाद धमकियों का सामना कर चुका हूं. हालांकि माता-पिता के मना करने पर कुछ ही समय में मुझे इस अखबार को छोड़ना पड़ा. मुझे नहीं मालूम मेरा यह फैसला सही था या गलत! लेकिन इस अखबार के (यूथ इण्डिया) संपादक शरद कटियार को झूठे मुक़दमे में फंसाकर 19 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया गया है. क्यूंकि वह अपनी धारदार कलम से सफेदपोश भू-माफियाओं एवं गुंडों की असलियत को सामने लाने का कार्य करते रहे है. इससे पूर्व उनपर कई जानलेवा हमले भी हो चुके है. लेकिन आज भी वह इस आन्दोलन से पीछे नहीं हट रहे है.

अगर ऐसा ही रहा तो यकीनन मीडिया का अस्तित्व ही मिट जायेगा. मीडिया का कार्य समाज की बुराईयों से पर्दा उठाना और सच्चाई को सामने लाना है जबकि मीडिया को सफेदपोश अपने इशारो पर नाचने देखना चाहते है. अब वक़्त है कि प्रत्येक नागरिक को मीडिया की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा के लिए आवाज़ उठानी चाहिए. झूठी और बिकाऊ पत्रकारिता से समाज को कोई लाभ नहीं है. सरकार को चाहिए कि कलम के कातिलों को कठोर से कठोर सजा दी जाये एवं मीडिया की सुरक्षा एवं स्वतंत्रता के लिए कानून बनाया जाये और अगर ऐसा कर पाना संभव न हो तो लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ “मीडिया” को लोकतंत्र से ही बाहर कर देना चाहिए.

 यह लेख पत्रकारिता के विद्यार्थी मोहम्मद आकिब खान ने लिखा है.

दलित छात्र को बंधुआ मजदूर बना करवाते थे कुत्ते की मालिश

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आगरा। यूपी में शिक्षा व्यवस्था के हालात आए दिन बिगड़ते जा रहे हैं. हर दिन स्कूल, टीचर, पढ़ाई आदि की लचर हालत की घटनाएं सामने आ रही है. यह घटनाएं योगी सरकार की असफलता साबित कर रही है. कभी शिक्षामित्रों पर लाठी बरसाई जा रही है, कभी बेसिक शिक्षा अधिकारी शिक्षकों की सैलरी रोक लेते हैं.

इस तरह की तमाम घटानाओं के बाद अब आगरा के एक स्कूल की घटना सामने आई है. यहां के एक स्कूल में दलित छात्र के शोषण की घटना सामने आई है. 10 में पढ़ने वाले एक छात्र स्कूल अधीक्षक ने उसे आगरा से दूर गाजियाबाद सीनियर अधिकारी के घर भेज दिया. वहां अधिकारी छात्र से शौचालय साफ करवाता था. कुत्तों की मालिश करवाता था.

दरअसल, समाज कल्याण विभाग की सहायता से आश्रम पद्धति पर चलने वाले स्कूल में पढ़ रहे 14 साल के छात्र के मालिश करने के हुनर से खुश होकर स्कूल अधीक्षक ने उसे सीनियर अधिकारी के यहां गाजियाबाद भेज दिया.

पीड़ित छात्र का आरोप है कि उसे फ्लैट पर बंधुआ मजदूर के रूप में शौचालय साफ करना पड़ता था. साहब के कुत्तों की मालिश करनी पड़ती थी. वह करीब सवा महीने बाद किसी तरह वहां से भागकर अपने घर आगरा पहुंचा. पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की गई है. वहीं, आरोपी अधिकारी का कहना है कि उनका गाजियाबाद में तो कोई फ्लैट ही नहीं है.

आगरा के सैंया ब्लॉक के सिंकदरपुर गांव का एक किशोर राजकीय स्वच्छकार आश्रम पद्धति विद्यालय इटौरा में 10वीं कक्षा का छात्र है. पीड़ित छात्र के पिता नाई का काम करते हैं. पीड़ित छात्र का कहना है कि वह मालिश का काम जानता है. छात्र का आरोप है कि स्कूल अधीक्षक खुद अपनी मालिश करवाते रहे और फिर आगरा के जिला समाज कल्याण अधिकारी के गाजियाबाद वाले फ्लैट पर लेकर गए. उसे वहां छोड़कर स्कूल अधीक्षक वापस आगरा लौट आए. पीड़ित छात्र ने बताया है कि गाजियाबाद स्थित अधिकारी के फ्लैट पर उससे घर का पूरा काम करवाया जाता था. यहीं नहीं कुत्तों को नहलाने और उनके बालों में कंघी करने का काम भी उसी से कराया जाता था.

छात्र का आरोप है कि अधिकारी के घर पर उसे पेट भर खाना भी नहीं दिया जाता था. पूरे घर का काम करने के बदले में कोई मेहनताना भी नहीं दिया जाता था. सुबह 6 बजे से लेकर देर रात तक उससे काम कराया जाता था. मौका मिलते ही घर का कचरा फेंकने के बहाने वह फ्लैट से भागकर दिल्ली और फिर वहां से किसी तरह आगरा आ पहुंचा. छात्र ने पूरा घटनाक्रम अपने परिजनों को बताया तो उन्होंने मामले की शिकायत स्कूल प्रशासन और उप निदेशक समाज कल्याण से की, लेकिन दोनों ही जगह से कोई कार्रवाई नहीं हुई.

एक सामाजिक संस्था ‘महफूज’ के नरेश पारस ने उसकी आपबीती सुनी और वह परिजनों के साथ छात्र को लेकर एडीएम सिटी के पास पहुंचे. उन्होंने एक शिकायती पत्र देकर पूरे मामले की जांच की मांग की. एडीएम सिटी केपी सिंह का कहना है कि छात्र के आरोपों की जांच की जा रही है. मामले में तथ्य प्रकाश में आने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी. छात्र और उसके परिजनों ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है.