18 AIADMK विधायक अयोग्य घोषित

 

चैन्नई। तमिलनाडु राज्‍य विधानसभा के स्‍पीकर पी धनपाल ने सोमवार को 18 विधायकों को अयोग्‍य घोषित कर दिया. स्पीकर का यह फैसला दिनाकरण के लिए बड़ा झटका साबित होगा.

अयोग्य करार दिए गए अन्नाद्रमुक के इन विधायकों के नामों की लिस्‍ट भी जारी हो गई है. अयोग्‍य घोषित विधायकों में थांगा तमिलसेल्वन, सेंथिल बालाजी, पी वेत्रीवल और के मरियप्पन भी शामिल हैं. तमिलनाडु विधानसभा में 1986 पार्टी डिफेक्‍शन लॉ के तहत प्रवक्‍ता ने यह आदेश दिया.

बता दें कि ये विधायक मुख्‍यमंत्री ई. पलानीस्‍वामी को हटाए जाने की मांग कर रहे थे लेकिन स्पीकर पी धनपाल ने इन्‍हें अयोग्य घोषित कर दिया.

एआईएडीएमके के पलानीसामी और पन्नीरसेल्वम के गुटों के विलय के बाद भी तमिलनाडु में राजनीतिक घमासान जारी है. इस विलय के बाद पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम ने एआईएडीएमके की महासचिव शशिकला और उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरन को पार्टी में अलग-थलग कर दिया है.

इस विलय से नाखुश दिनाकरन गुट के 18 विधायकों ने तमिलनाडु के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को हटाने की मांग की थी. विधायकों ने कहा कि पलानीस्वामी के पास बहुमत नहीं है. विधायकों ने राज्यपाल से मिलने से पहले दिनाकरन के आवास पर उनसे मुलाकात की. 18 बागी विधायकों के इस बर्ताव को एआईएडीएमके पार्टी गाइडलाइन का उल्लंघन मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी.

चुनावी रंजिश में घर में घुसकर 5 लोगों की हत्या

फरीदाबाद। हरियाणा में पुलिस प्रशासन की नाकामयाबी हम लोग राम रहीम केस में देख चुके हैं.  पुलिस प्रशासन और हरियाणा सरकार की यह नाकामयाबी चुनावों से संबंधित है. हरियाणा सरकार का राम रहीम पर ढुलमुल रवैया अपनाया था. क्योंकि राम रहीम का बड़ा राज्य सरकार का बहुत बड़ा वोट बैक था. अब फरीदाबा में चुनावी रंजीश का मामला सामने आया है.

फरीदाबाद एक घर के अंदर घुसकर बदमाशों ने 5 लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी. वहीं 8 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज करके इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. 5 अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. इस मामले की जांच जारी है.

इस वारदात की सूचना मिलते ही केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, विधायक सीमा त्रिखा, डॉ. हनीफ कुरैशी सहित पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए. पुलिस टीम ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है. गंभीर रूप से घायल लोगों का अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है. इस वारदात के शिकार पलवली गांव के श्रीचंद के परिवार के लोग हैं. इस परिवार का गांव की सरपंच के परिजनों के साथ चुनावी रंजिश में झगड़ा चल रहा था.

आरोप है कि रविवार की रात करीब 9.30 बजे गांव की सरपंच के पति बिल्लू और उसके कई साथी श्रीचंद के घर में घुसे और उन पर फायरिंग शुरू कर दी. इस फायरिंग में 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और करीब 8 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस के साथ कई नेता घटनास्थल पर पहुंच गए. गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है.

पुलिस ने बताया कि इस वारदात में राजेंद्र प्रसाद (55), ईश्वर चंद (40), श्रीचंद (61), नवीन (36) और देवेंद्र (35) की मौत हो गई. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और विधायक सीमा त्रिखा मौके पर जा पहुंचे. अस्पताल में जाकर पीड़ित परिवार को सांत्वना दी. केंद्रीय मंत्री ने परिजनों को विश्वास दिलाया कि आरोपी चाहे कितना भी बड़ा हो उसे बख्शा नहीं जाएगा. कानून अपना काम करेगा.

बुंदेलखंड में खत्म होने के कगार पर एक ‘कुप्रथा’

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बुंदेलखंड। यूपी के बुदेलखंड में दलित महिलाएं सालों से फैली कुरितियों के खिलाफ आ गई हैं. बुंदेलखंड के ललितपुर की बात करें तो यहां दलित महिलाएं घर के बड़े-बुजुर्गों और ऊंची जातियों के लोगों को देखकर चप्पल सर या फिर हाथ में ले लेती थी. ऐसा वह वर्षों से कर रही थीं, लेकिन अब वह इससे निजात चाहती हैं.

अगर महिलाएं गलती से चप्पल पहनकर बड़े लोगों के सामने चली जाती थीं तो उनपर जुर्माना लगाया जाता था. यह परंपरा पुरुषों पर भी लागू होती थी. जब कोई पुरुष गांव के कथित उच्च लोगों के घर जाता तो उसे ऐसा करना पड़ता था. महरौनी गांव की राधा देवी ने बताया कि चाहे जितनी सर्दी हो, तपती धूप हो, हमें बड़ी जाति के लोगों के सामने चप्पल पहनने की अनुमति नहीं थी. आज भी प्रधान के पास हमारे बुजुर्ग चप्पल पहनकर नहीं जाते, अगर जाते भी हैं तो हाथ में चप्पल लेकर जाते हैं. लेकिन समय के साथ और शिक्षा के प्रसार के कारण अब यह परंपरा खत्म होने लगी हैं. अब न तो महिलाएं इस परंपरा को निभा रही हैं और न पुरुष ही उनसे ऐसा करने के लिए दबाव बना रहे हैं.

ललितपुर गांव की रहने वाली मीरा बताती हैं कि अब हम अपने घर से चप्पल पहनकर निकलते हैं. विरोध करने वाली महिलाओं की संख्या अभी बहुत ज्यादा नहीं है, पर बदलते समय के साथ एक दूसरे के देखा-देखी नई नवेली बहुएं चप्पल पहनकर निकलने लगी हैं. समय के साथ और शिक्षा के प्रसार के कारण अब यह परंपरा खत्म होने लगी हैं. अब न तो महिलाएं इस परंपरा को निभा रही हैं और न पुरुष ही उनसे ऐसा करने के लिए दबाव बना रहे हैं. वर्तमान में देखें तो अब सिर्फ एक से दो प्रतिशत महिलाएं ही इस परम्परा को मानते हैं, बाकि ये प्रथा अब पूरी तरह से समाप्त हो गई है. बदलते वक्त के साथ अब इन महिलाओं की चप्पल हाथों की बजाय पैरों की शोभा बढ़ा रही हैं.

मेरठ में आज मायावती की रैली

मेरठ। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती की आज मेरठ में रैली हो रही है. राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद मायावती आज पहली महारैली को मेरठ में संबोधित करेंगी. बसपा की इस रैली में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के कार्यकर्ता शामिल होंगे. बसपा की महारैली मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज के सामने वाले मैदान में है.

बसपा मेरठ के महारैली में भीड़ जुटाकर विरोधी दलों को अपनी ताकत का एहसास कराने के साथ-साथ खिसकते जानाधार की बात करने वालों को भी वो मुंहतोड़ जवाब देना चाहती हैं.

रैली स्थल पर मेरठ, सहानरपुर और मुरादाबाद मंडल के वर्करों के बैठने के लिए तीन अलग-अलग ब्लॉक बनाए गए हैं, ताकि यह पता रहे कि किस मंडल से कितनी भीड़ आई. महिलाओं के बैठने के लिए मंच के बिल्कुल सामने जगह बनाई गई है. महिला बीबीएफ की वर्कर उनकी जिम्मेदारी संभालेंगी.

मेरठ के सरधना से प्रत्याशी रहे हाफिज इमरान याकूब ने कहा कि मेरठ की रैली एक ऐतिहासिक रैली होगी और करीब 5 लाख लोगों की भीड़ जुटेगी. दरअसल पिछले दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के शब्बीरपुर में हुई दलित और राजपूत के बीच हिंसा हुई थी. मायावती इस मुद्दे पर राज्यसभा में बोलना चाहती थीं, लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया था. मायावती को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने राज्यसभा के सदस्य पद से ही इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद उन्होंने रैलियों के जरिए दलित उत्पीड़न की बात उठाना चाहती हैं. मायावती ने यूपी के सभी मंडलों में हर महीने की 18 तारीख को रैली करने का ऐलान किया था. इसी कड़ी में सोमवार को पहली रैली मेरठ में हो रही है.

Whatsapp पर भेजा इस्लाम के खिलाफ मैसेज, कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा

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लाहौर। पाकिस्तान में अपने दोस्त को व्हाट्सअप पर इस्लाम के लिए अपमानजनक संदेश भेजने पर एक व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई. बताया जा रहा है कि मैसेज सामने आने के बाद उग्र भीड़ ने उसे घेर लिया था हालांकि, वो बच निकला और बाद में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. दोषी करार दिए गए शख्स के वकील का कहना है कि उसका मुवक्किल बेगुनाह है. उन्होंने कहा कि युवक को जानबूझकर मामले में फंसाया जा रहा है. वो कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे.

जानकारी के मुताबिक, जेम्स मसीह नाम के शख्स के दोस्त ने पुलिस में शिकायत की थी कि उसने व्हाट्सऐप पर एक कविता भेजी थी जो इस्लाम का अपमान कर रह रही थी. इस पर जेम्स से खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया था. वहीं मामला सामने आने के बाद नाराज लोगों ने उसका घर घेर लिया.

भीड़ से बचने के लिए जेम्स पंजाब प्रांत के सारा ए आलमगीर कस्बे से भाग गया. बाद में उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. उसकी सुनवाई सुरक्षा कारणों से जेल में एक साल से अधिक समय तक चली. यह जेल लाहौर से करीब 200 किलोमीटर दूर है.

अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि जेम्स मसीह को मृत्युदंड के साथ ही 3,00000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. वहीं जेम्स के वकील अंजुम वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल बेगुनाह है. उन्होंने कहा, ”मेरा मुवक्किल लाहौर उच्च न्यायालय में अपील करेगा क्योंकि एक मुस्लिम लड़की से प्रेमप्रसंग के चलते उसे फंसाया गया है.” अंजुम वकील के अनुसार सुरक्षा कारणों से जेल के अंदर सुनवाई हुई.

भारत सरकार नहीं जानती कब और कैसे हुई बाबासाहेब की मृत्यु?

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नई दिल्ली। दलित हितैषी होने का दावा करने वाली भारत सरकार एक बार फिर विवादों में फंस सकती है. क्योंकि भारत सरकार को बाबासाहेब अम्बेडकर बारे में कोई जानकारी नहीं है. सरकार को नहीं पता कि संविधान निर्माता बाबासाहेब अम्बेडकर की मृत्यु कब और कैसे हुई थी? सरकार की इस नासमझी का खुलासा एक आरटीआई के माध्यम से हुआ है.

अलीगढ़ के चर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रतीक चौधरी एडवोकेट ने दिनांक 29 मई 2017 को जनसूचना अधिकारी गृह मंत्रालय, भारत सरकार से सूचना के अधिकार के तहत तीन बिंदुओं पर सूचना मांगी थी कि डा. भीमराव अम्बेडकर की मृत्यु कब हुई?, किन हालात में हुई?, स्वाभाविक हुई या हत्या की गई?. अगर हत्या की गई तो हत्यारोपी का नाम, पद, एफआईआर और पोस्टमॉर्टम की कॉपी भी मांगी गई. इस पर भारत सरकार ने क्या कार्यवाई की.

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डा. अम्बेडकर प्रतिष्ठान, भारत सरकार ने इसका हास्यास्पद जबाव दिया. सरकार ने 14 जुलाई 2017 को भेजे गए पत्र में लिखा कि डा. अम्बेडकर प्रतिष्ठान, भारत सरकार के पास डा. भीमराव अम्बेडकर की मृत्यु के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

इस उत्तर के खिलाफ प्रतीक चौधरी एड्वोकेट ने अपीलीय अधिकारी ग्रह मंत्रालय, भारत सरकार को दिनांक 14 अगस्त 2017 को अपील भेजी है और अब वह केंद्रीय सूचना आयोग में अपील की तैयारी कर रहे हैं क्योंकि प्रतीक को यकीन है कि भारत सरकार इस बार भी सूचना नहीं देगी.

प्रतीक चौधरी का कहना कि आज बाबासाहेब की मृत्यु के बारे में तमाम तरह की अफवाहें समाज मे फैली हुई हैं. संसद भवन के अंदर भरतपुर के सांसद जाट राजा बच्चू सिंह के द्वारा डा. अम्बेडकर की हत्या की बात कही जाती है. जबकि डा. अंबेडकर की मृत्यु स्वाभाविक थी और केवल राजनीतिक हितों की पूर्ति हेतु ये अफवाह फैलाई गई. जिसके आधार पर आज जातिवाद की राजनीति हो रही है.

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प्रतीक ने कहा कि भारत सरकार को भारत के महापुरुषों के जीवन चक्र के बारे में आमजन को जनजागरण द्वारा अवगत कराया जाना चाहिए. भारतीय नागरिक होने के नाते ये मेरा अधिकार है कि मैं जान सकूं की मेरे देश के संविधान निर्माता की मृत्यु किस तारीख को किस वजह से हुई. सरकार को ये सारी चीजें स्वयं ही सार्वजनिक कर देनी चाहिए परन्तु सरकार तो कानूनी तरीक़े से पूछने पर भी नहीं बता रही है.

प्रतीक ने आगे कहा कि दलित और पिछड़े वर्ग इस देश की बुनियाद हैं. इस बुनियाद में जो दरार राजनीति ने डाली है, मैं इस दरार को भर कर और दिलों को जोड़कर ही दम लूंगा. इसके लिए मुझे किसी भी न्यायालय या उच्चतम न्यायालय ही क्यों ना जाना पड़े.

भारत में चल रहा है कंपनी राज!

डिजिटल इंडिया से न्यू इंडिया की संकल्पना आजकल सरकार की प्रमुखता में है. इसके प्रचार-प्रसार के लिए काफी धनराशि खर्च की जा रही है. हालांकि अभी भी हमारा देश कई चुनौतियों से जूझ रहा है जिनमें आतंकवाद, नक्सलवाद तो गंभीर समस्यायें हैं ही, इसके अतिरिक्त भी भारतीय नागरिक कई प्रकार के विषम और कठिन दौर का सामना कर रहे है.

देश में आजादी से पहले और आजादी के बाद कुछ कार्य ऐसे हैं जिनको हमारी सरकारें अभी तक पूर्ण रुप से संपन्न नहीं कर पायी हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य जो किसी भी राष्ट्र की मूल समस्या तो होती है. एक समृद्ध राष्ट्र की पहचान देश की बेहतर शिक्षा प्रणाली और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से भी आंकी जाती है. आज का बच्चा कल का नागरिक होता है. कल देश को संभालने की जिम्मेदारी भी आज के नौनिहालों के हाथ में ही होती है.

देश का भविष्य वर्तमान में गहरे संकट में नजर आ रहा है. कुपोषण और इलाज के अभाव में हर साल लाखों बच्चे मौत के मुंह में समा जाते है. और इन मौतों को अगस्त महीने की पारंपरिक मौत कह कर देश के राजनेता क्रूर मजाक करने से बाज नहीं आते है. देश का हर क्षेत्र अमीर-गरीब, ऊंच-नींच और असमानता की खाइयों से भरा नजर आता है. गरीब का वोट तो कीमती होता है मगर गरीब की और उनके बच्चों की कोई कीमत नहीं होती है. अगर होती तो गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कालेज और सैफई का मेडिकल कालेज गरीब बच्चों की कब्रगाह नहीं बनता. जहां आक्सीजन की कमी से सैकड़ों बच्चे अकाल मौत के मुँह में समा जाते हैं और संवेदना व्यक्त कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से विमुख हो जाती है.

किसके सपनों का भारत बनाना चाहते हैं हम? खून-पसीने से देश को सींचने वालों का या खून चूसने वालों का? आंकडों पर नजर डाली जाये तो सरकार स्कूलों में पढ़ने वाले और सरकारी अस्पतालों में मरने वाले अधिकांश गरीब और वंचित तबके के ही लोग होते है. ऐसा लगता है देश का गरीब राम भरोसे और देश का अमीर सरकार भरोसे है. ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह भारत में इस वक्त कंपनी का ही राज चल रहा है. निजीकरण के नाम पर उद्योगपतियों को सरकार निरंतर मजबूत कर रही हैं. पर गरीबी हटाने में हम सफल तो नही हुए हैं मगर गरीब को ही हटाने का अच्छा तरीका भारत के स्वास्थ्य महकमें और खाद्य महकमें ने इजाद कर लिया है!

राष्ट्र भक्ति और देश प्रेम के नारे तो लगवाये जाते हैं मगर भूखे पेट कोई देश भक्त नहीं हो सकता, ये सच्चाई भी स्वीकार करनी पड़ेगी. वोट की कीमत अगर बराबर होती तो गरीब और अमीर के बीच प्रथम चुनाव से लेकर अब तक अमीर और गरीब के बीच धरती और आसमान का फर्क नहीं होता. एक ओर बुलेट ट्रेन की सौगात और दूसरी तरफ कहीं एक साइकिल चलाने का भी रास्ता नहीं है. जबकि ये हकीकत है कि भारत गांव का देश है और 70 प्रतिशत जनता कृषि पर निर्भर है. लेकिन किसान आत्म हत्या कर रहा है. अमीर के लिए बुलेट ट्रेन लाई जा रही है. क्या इस बुलेट ट्रेन में देश का वो गरीब मजदूर और किसान भी सफर कर पायेगा जिसने सरकारों से अपने लिए भी कुछ सपने देख कर बढ़चढ़ कर वोट किया था.

मेरा मकसद विकास को कोसना नहीं है मगर असमानता की खाई भी विकास के साथ-साथ कम होनी चाहिए. संचार क्रांति और सोशल मीडिया से जहां समाज की मीडिया से निर्भरता कम हुई है. वहीं डाटा और आटा में भी संतुलन बनाने की जरूरत है. डाटा निरंतर सस्ते पे सस्ता होता जा रहा है और वहीं गरीब मजदूर आटे-दाल के भाव देखकर चिंतित है. संतुलित आहार जिस प्रकार शरीर के लिए आवश्यक है उसी प्रकार संतुलित विकास भी देश के चहुमुखी विकास के लिए भी आवश्यक है.

यह लेख आईपी हृयूमन ने लिखा है.

दलित महिला सरपंच पर जातिवादी गुंड़ों ने किया जानलेवा हमला

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फिरोजपुर। पंजाब के फिरोजपुर में सवर्णों ने दलित सरपंच के घर में घुसकर जानलेवा हमला किया. हमले में सरपंच सहित उसकी मां, पिता और भाई भी गंभीर रूप से घायल हो गए. तीनों घायलों को रात में ही उपचार के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

फिरोजपुर के रंगाला-राजपुर, धमाला एवं चकरंगाला गांव की धमाला ग्राम पंचायत है. धमाला ग्राम पंचायत की दलित सरपंच सीमा रानी है. बताया जा रहा है कि रंगाला राजपुर गांव में उसके परिवार के बच्चों एवं गांव के कुछ उच्च जाति के बच्चों के बीच मंगलवार (12 सितंबर) की शाम को कहासुनी हो गई थी.

जिसके बाद उच्च जाति के लोगों ने दलित सरपंच के घर पर जानलेवा हमला कर दिया. सरपंच के परिजनों का आरोप है कि जातिसूचक शब्दों का उपयोग कर उन्हें गालियां देने के साथ-साथ जान से मारने की धमकी भी दी गई. जानलेवा हमले में सरपंच का पिता, मां व भाई राकेश गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों को उपचार के लिए सिविल अस्पताल ले जा गया गया है.

आरोप है कि कहासुनी के बाद उच्च जाति के लोगों ने सरपंच सीमा रानी के घर पर रात करीब आठ बजे लाठी डंडों से जानलेवा हमला बोल दिया. इस जानवेला हमले में सरपंच का पिता रामफल, मां मूर्ति देवी तथा भाई राकेश गंभीर रूप से घायल हो गए. तीनों घायलों को रात में ही उपचार के लिए सिविल अस्पताल लाया गया.

डा. नीतीश अग्रवाल ने घायलों का प्राथमिक उपचार किया. उच्च जाति के द्वारा किए गए जानलेवा हमले के बाद से सरपंच का परिवार दहशत में है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

बाढ़ पीड़ित दलितों को अनुदान देने में भेदभाव कर रहे हैं सवर्ण अधिकारी-सरपंच

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छपरा। इस साल लगभग पूरा देश बाढ़ से प्रभावित रहा. जिनमें बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, गुजरात, मुंबई, असम बाढ़ से अधिका प्रभावित हुए. बिहार में स्थिति सबसे ज्यादा दयनीय रही. जहां करोड़ों लोगो प्रभावित हुए. सैकड़ों लोगा मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए.

बाढ़ के बाद बिहार के कई जिलों और सैकड़ों गांव के हालात सुधरने में न जाने कितना वक्त लगेगा. एक तो लचर सरकारी व्यवस्था उसमें भी जातिवाद का दंश. सरकार द्वारा दी जा रही खाने-पीने वस्तुएं और अनुदान को भी अधिकारी और सरपंच जाति के आधार पर बांटी जा रही है.

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बिहार के सारण जिले के अमनौर प्रखंड में बाढ़ पीड़ित परिवारों को सरकारी अनुदान देने के लिए हो रहे सर्वे में दर्जनों दलित परिवारों के नाम जोड़े नहीं गए. इसको लेकर शेखपुरा पंचायत के वार्ड संख्या एक के दर्जनों दलित परिवार प्रखंड कार्यालय गए. लेकिन अंचलाधिकारी ने आवेदन लेने से इंकार कर दिया.

इसके बाद दलितों ने जिलाधिकारी हरिहर प्रसाद को आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत पत्र में दलितों ने लिखा है कि बाढ़ परिवारों को दिये जाने वाले परिवारिक अनुदान से वंचित करने को लेकर प्रगणक सहशिक्षक, वार्ड सदस्य पक्षपात कर दलित परिवारों का अनुदान से सूची से नाम हटा दिया है. वहीं वे लोगों अनुदान की राशि गबन करने के लिए अपने नाबालिक बच्चों एवं सगे-संबंधियों का नाम जोड़ दिया है.

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उन्होंने कहा है कि बाढ़ से वार्ड संख्या एक के सभी दलित परिवारों की घर-गृहस्थी पूरी तरह प्रभावित हो गई है. लेकिन स्थानीय सवर्ण जनप्रतिनिधियों और प्रगणक सहशिक्षक मिलीभगत कर बाढ़ प्रभावित दलित परिवारों को मिलने वाले सरकारी अनुदान से वंचित करने की साजिश कर रहे हैं. इस पर डीएम ने आपदा प्रबंधन विभाग के पदाधिकारियों जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

सनौता में दलितों के घरों पर हुआ हमला

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मेरठ। सनौता में दो सगे भाइयों की हत्या के बाद लोगों ने दलितों के घरों पर हमला बोल दिया था. जिससे दहशत में आए दलित परिवार अपने-अपने घरों पर ताले लगाकर बृहस्पतिवार आधी रात को गांव से चले गए. गांव की गलियों में शुक्रवार को दिनभर सन्नाटा पसरा रहा. चप्पे-चप्पे पर पुलिस व पीएसी का पहरा था. एसएसपी सनौता गांव में शुक्रवार तड़के ही पहुंच गई थीं. दोनों भाइयों के शव सुपुर्द-ए-खाक होने पर एसएसपी ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि सभी आरोपियों को जेल भेजा जाएगा. इसके बाद एसएसपी ने खुद गांव में कई लोगों से बातचीत की. जिसमें जानकारी मिली कि गांव में हिस्ट्रीशीटर परवेज और गुलफाम पक्ष में चुनाव व वर्चस्व को लेकर विवाद चल रहा है. बृहस्पतिवार को धर्मवीर के घर के सामने परवेज पक्ष के मनसाद व उसके भाई दिलशाद द्वारा कार खड़ी करने पर विवाद हुआ था.

एसएसपी ने दलित परिवारों के घरों पर ताले लटके देखे तो आसपास के लोगों से उनके बारे में पूछा. जिस पर लोगों ने बताया कि मारपीट और गोलियां सिर्फ मनसाद, दिलशाद और धर्मवीर के परिवार में चली थीं. लेकिन हिस्ट्रीशीटर परवेज और गुलफाम की रंजिश के चलते 18 लोगों को नामजद कराया गया है. दलित परिवार को धमकी दी जा रही थी. जिसके चलते आधी रात को ही वे अपने-अपने घर में ताला लगाकर चले गए.

पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर परवेज और गुलफाम शातिर अपराधी हैं. दोनों में वर्चस्व को लेकर विवाद चल रहा हैं. दोनों ने गांव में अपने-अपने गुट बनाए हैं. प्रधानी चुनाव, ब्लॉक प्रमुख या विधानसभा का चुनाव हो. हर चुनाव में इनकी गुटबाजी गांव में साफ नजर आती है है. इस डबल मर्डर के बाद भी दोनों की गुटबाजी साफ दिखाई दे रही है. हालांकि एसएसपी ने कहा कि नामजदगी के आधार पर गिरफ्तारी नहीं होगी. सही आरोपी ही जेल भेजे जाएंगे.

दलित युवक की पेड़ से बांधकर पिटाई का विडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला

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बटाला। देशभर में दलितों पर अत्याचार रूकने का नाम नहीं ले रहा है. कभी उत्तर प्रदेश में, तो कभी मध्य प्रदेश में, तो कभी राजस्थान में दलितों पर अत्याचार हो रहा है. अब पंजाब के बटाला से भी दलित शोषण की खबर आई है.

दरअसल, बटाला के भुल्लर गांव में एक मकान मालिक ने दलित किराएदार को पेड़ से बांधकर पीटा. मकान मालिक ने दलित टिक्का मसीह पर पंखा चुराने का आरोप लगाया. टिक्का मसीह ने मकान मालिक के आरोप को खारिज भी किया. इसके बावजूद मकान मालिक ने उसकी एक बात नहीं सुनी और उसे कुछ लोगों की मदद से पेड़ से बांध दिया और पीटना शुरू कर दिया.

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टिक्का मसीह की पिटाई के बाद उनके मकान मालिक देबा सिंह और उनके दोस्तों ने घटना की विडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया. जिसके बाद यह घटना सबके सामने आई. टिक्का मसीह की पत्नी सुनीता के मुताबिक घटना के बाद से उनका पति गायब है. इस घटना को पांच दिन बीत चुके हैं लेकिन पुलिस इस मामले में कोई भी उचित कार्रवाई नहीं कर रही है. इसके बाद सुनीता ने मीडिया से संपर्क कर इस मामले की जामकारी दी. सुनीता ने कहा कि उसके मकान मालिक देबा ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर टिक्का की पिटाई कर उससे जबरन जुर्म कबूल करवाया.

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सुनीता ने कहा कि इस घटना की जानकारी जैसे ही मुझे मिली मैं तुरंत 1300 रुपए लेकर घटनास्थल पर पहुंची. मैंने पंखे की कीमत चुका दी फिर भी देबा मेरे पति को अपने साथ ले गया और कहने लगा कि वो टिक्का को सबक सिखाने के लिए अपने साथ लेकर जा रहा है. मेरे पति तब से ही गायब हैं और जब मैंने देबा से उनके बारे में पूछा तो वह कोई भी संतुष्ट करने वाला जवाब नहीं दे पाया.

सुनीता ने बताया कि उन्होनें इस घटना की शिकायत पुलिस में करानी चाही लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज़ करने से इनकार कर दिया और सुनीता को थाने से डांट कर भगा दिया.

लंदन मेट्रो में हुआ बम ब्लास्ट, 20 लोग घायल

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लंदन। लंदन में अंडरग्राउंड मेट्रो में धमाका हुआ है. मेट्रो में हुए भीषण विस्‍फोट में तकरीबन 20 लोग घायल हुए हैं. घटना पार्संस ग्रीन स्टेशन की है. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस व राहत दल घटनास्थल पर पहुंच गया है. स्थानीय मीडिया के अनुसार धमाका एक बाल्टी में हुआ है.

ब्‍लास्‍ट के लिए इंप्रोवाइज्‍ड एक्‍सप्‍लोसिव डिवाइस (आईईडी) का इस्‍तेमाल किया गया है. इस घटना के बाद पीएम थेरेसा ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. धमाके की सूचना मिलने के बाद मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया है. साथ ही अन्य मेट्रो सेवाओं को भी रोक दिया गया है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रेन के पीछे वाले कंपार्टमेंट में रखे एक सफेद कंटेनर में धमाका हुआ जिसके बाद ट्रेन के अंदर धुआं फैल गया. दावा है कि यह एक होम मेड छोटा विस्फोटक था जो कि मेट्रो के एक डिब्बे में था. फिलहाल इस डिब्बे की जांच की जा रही है. वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि इसी तरह का एक और एक्सप्लोसिव को निष्क्रिय किया गया है.

धमाके के बाद डर के मारे लोग जान बचाने के लिए भागने लगे. कहा जा रहा है की भगदड़ के चलते कई लोग गिर गए जिसके कारण भी उन्हें चोट आई है.

लंदन में इस तरह की यह चौथी घटना है. इससे पहले इसी साल जून में लंदन के मध्य इलाके में छुरे लिए और नकली आत्मघाती जैकेट पहने तीन हमलावरों ने एक बाजार में हमला किया जिससे कम से कम सात व्यक्तियों की मौत हो गई और 48 लोग घायल हो गए. यह हमला आठ जून को होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले हुआ था.

प्रद्युम्न हत्याकांड की जांच करेगी CBI

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गुरूग्राम। प्रद्युम्न हत्याकांड की जांच अब सीबीआई करेगी. हरियाणा के मुख्मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है. हत्या के एक हफ्ते बाद मनोहर लाल खट्टर प्रद्युम्न के घर गए. मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि परिवार की और समाज के अन्य लोगों की मांग थी इस केस की जांच सीबीआई से कराई जाए. इसी मांग को देखते हुए हम सीबीआई को यह केस दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच के अलावा गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल को अगले तीन के लिए हरियाणा सरकार टेकओवर करेगी. डिप्टी कमिश्नर इसके कामकाज को देखेंगे.

प्रद्युम्न के पिता ने कहा, ”सरकार पर हमारा पूरा भरोसा है. सीएम कह कर गए हैं कि इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कराएंगे और जांच सीबीआई को सौंपेंगे. यह बच्चों से जुड़ा हुआ मामला है इसलिए सभी इसे संवेदनशील मान रहे हैं. इसीलिए मुझे लगता है कि जांच सही से की जाएगी. मेरी बेटी को उसी स्कूल में भेजने की बात है तो यह उस बच्ची पर ही निर्भर करता हा वो जाएगी या नहीं.”

प्रद्युम्न के पिता ने कहा कि मेरी मांग पिंटो परिवार या किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है. मेरी मांग है कि ऐसी कार्रवाई हो जिससे अन्य स्कूल प्रशासन भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर सजग हों.

प्रद्युम्न की हत्या का आरोपी कंडक्टर अपने बयान से पलट गया है. आरोपी कंडक्टर अशोक के वकील ने कहा है कि पुलिस ने अशोक को मारपीट और करंट के झटके देकर जबर्दस्ती बयान दर्ज करवाया था. अशोक ने वकील को कहा कि हत्या से उसका कोई लेना देना नहीं है.

ब्लू व्हेल गेम की चपेट में 30 आदिवासी बच्चे

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दंतेवाड़ा। ब्लू व्हेल गेम देश भर में अपने पैर पसार रही है. अब तक कई बच्चे ब्लू व्हेल गेम के कारण सुसाइड कर चुके हैं. जिन बच्चों ने सुसाइड किया है, उनमें ज्यादातर शहरी इलाकों में रहने वाले हैं. लेकिन अब ये गेम देश के दूर दराज के इलाकों में भी फैल चुका है. ब्लू व्हेल गेम अब आदिवासी लड़कों को भी अपने चपेट में ले रही है. छ्त्तीसगढ़ के दंतेवाडा़ के एक सरकारी स्कूल में 30 बच्चों को ब्लू व्हेल गेम से बचाया गया. स्कूल ने पुलिस को जानकारी दी थी कि स्टूडेंट्स ने ब्लेड व अन्य धारदार चीजों का इस्तेमाल कर अपनी बांह में व्हेल की शेप के डिजाइन बनाए हैं. अस्सिटेंट सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस अभिषेक पल्लव ने कहा, छात्र ब्लू व्हेल गेम का देसी वर्जन खेल रहे थे. छात्रों का कहना है कि इससे उनकी पर्सनल प्रॉब्लम सॉल्व हो सकती हैं. बच्चों को काउंसलिंग के लिए भेज दिया गया है. सरकार ने भी इस मामले में एडवाइजरी जारी कर दी है. वहीं पुलिस बच्चों भी ब्लू व्हेल गेम से दूर रखने के लिए स्कूलों के साथ मिलकर काम कर रही है. हालांकि मोबाइल फोनों की बढ़ती पहुंच और बच्चों में बढ़ती जिज्ञासा के कारण प्रशासन के लिए इसे रोक पाना बड़ा चैलेंज बनता जा रहा है. पल्लव ने कहा कि एक बच्चे ने बताया कि अगर वो ये गेम खेलेगा, तो उसके पिता शराब छोड़ देंगे. वहीं एक और छात्र ने बताया कि वो अपने पिता को उसकी जबरन शादी कराने से रोकना चाहता है. बच्चों को इंटरनेट और अखबार के जरिए देम के बारे में पता चला होगा. ऐसा लग रहा है कि कोई एक बच्चा दूसरों को गेम के बारे में गाइड कर रहा है. बच्चो बता रहे हैं कि अपने आपको चोट पहुंचाने से उनकी पर्सनल प्रॉब्लम सुलझ रही हैं. ब्लू व्हेल चैलेंज एक ऐसा ‘सुसाइड गेम’ है, जिसने आजकल सोशल नेटवर्क पर खूब हड़कंप मचाया हुआ है. 4 साल पुराना यह ऑनलाइन गेम महज 50 दिन में आपको अपने वश में कर के या तो बिल्डिंग से छलांग मारने के लिए मजबूर कर देता है, या फिर किसी पुल पर चढ़कर या ट्रेन के नीचे आकर खुदकुशी करने के लिए उकसाता है.