बौद्ध महासम्मेलन में 20 लोगों ने ली धम्म दीक्षा

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बुद्ध महासम्मेलन

महराजगंज। नौतनवा तहसील के बनरसिया कला में बौद्ध महासम्मेलन चल रहा है. इस इस बौद्ध महासम्मेलन में कपिलवस्तु, सारनाथ सहित तमाम जगहों के बौद्ध भिक्षु पहुंचे. सम्मेलन में 20 लोगों ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली और चीवर धारण किया.

तथागत बुद्ध की ननिहाल देवदह के रूप मे विख्यात बनरसियां कला को पहचान दिलाने के लिए हर साल बौद्ध महासम्मेलन का आयोजन किया जाता है. इस साल भी 14 से 20 अक्टूबर तक यह कार्यक्रम चलेगा.

सम्मेलन में चीवर धारण करने वाले छन्ना प्रसाद बौद्ध, वी.पी. भारती, सरमानन्द और गुनई प्रसाद सहित बीस लोगों ने चीवर धारण किया. कपिलवस्तु से आए गुरू महाथेरो धम्मप्रिय ने इन्हें बौद्ध धर्म की दीक्षा दी. इसके बाद बौद्ध गुरूओं ने प्रवचन कर बौद्ध धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला. थाइलैण्ड से आए फा ख्रू रंगसित ने भी सम्मेलन को सम्बोधित किया.

बौद्ध महासम्मेलन को संबोधित करते हुए महाराजगंज के जिलाधिकारी विरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि हम अपनी धरती पर ही बुद्ध को समझ नहीं पाये. अब समय आ गया है कि बुद्ध के विचारों को गहरायी से समझें. राज्य सरकार देवदह पर गम्भीर है. जल्द ही इसका विकास होगा. देवदह को बौद्ध परिपथ से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.

न्याय की आस में 16 दिनों से धरने पर बैठा है दलित परिवार

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महराजगंज। उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार कम होने का नाम नहीं ले रहा है. आए दिन दलितों के साथ भेदभाव और मारपीट की घटना सामने आ रही है. इसी भेदभाव और मारपीट के चलते एक दलित परिवार नौतनवां तहसील परिसर में धरना दे रहा है. ये दलित परिवार पिछले 16 दिनों से यहां न्याय की उम्मीद लिए धरने पर बैठा है, लेकिन पुलिस और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. दरअसल, पिपरा सोहट गांव के रहने वाले रामसेवक अपनी पत्नी आरती और दो छोटे बच्चों के साथ तहसील पर धरना दे रहे हैं. आरती का कहना है कि बीते 14 सितंबर की देर रात करीब आधा दर्जन सवर्ण उनके मकान में पहुंचे और ताला तोड़कर उसमें रखे सारे सामान व नगदी उठाकर ले गए. साथ ही मकान पर कब्जा जमा लिया. जब उन्होंने इसका विरोध किया तो सवर्णों ने मारपीट भी की.

पीड़ित परिवार ने इसकी लिखित शिकायत कोल्हुई थाने पर की. लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. मकान पर कब्जा जमाए लोगों ने धमकी देना भी शुरू कर दिया. अधिकारियों से शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर वह लोग तहसील परिसर में दो अक्टूबर से धरने पर बैठे हैं.

पीड़ित परिवार का आरोप है कि धरने के दौरान पुलिस ने कई बार जबरन उन्हें हटाने की कोशिश की. उनका यह भी आरोप है कि पुलिस की तरफ से फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देकर धरना समाप्त कराने की कोशिश भी की गई. दलित परिवार ने कहा कि न्याय मिलने तक हम धरना जारी रखेंगे.

ममता बनर्जी की हत्या के लिए छात्र को दी गई 65 लाख की सुपारी

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Mamta Benerjee

मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हत्या के लिए व्हाट्सऐप पर 65 लाख रुपये की सुपारी दी गई है. 19 वर्षीय छात्र को यह सुपारी वॉट्सऐप के जरिये दी गई है. यह छात्र मुर्शिदाबाद जिले के बेरहमपुर का रहने वाला है. अमेरिका के फ्लोरिडा में रह रहे एक पॉलीटेक्निक स्टूडेंट के फोन नंबर से ये मैसेज भेजा गया. राज्य की पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.

छात्र ने कहा ने बताया कि सोमवारी की दोपहर 1 बजे से मुझे संदेश मिलने शुरू हुए. संदेश भेजने वाले ने खुद को लैटिन बताया. उसने कहा कि वह एक आतंकी संगठन के लिए काम करता है और उसे भारत में एक पार्टनर की तलाश है.’ दोनों के बीच बातचीत को पढ़ने से पता चला कि उस अज्ञात व्यक्ति ने कहा. ‘इस काम में मदद करने पर उसे एक लाख डॉलर दिया जाएगा. तुम पूरी तरह से सुरक्षित रहोगे. हम तुम्हारा ध्यान रखेंगे. क्या तुम तैयार हो?’ छात्र ने उसे कहा कि ‘इंतजार करो.’ छात्र के इस संदेश पर उसने कहा. ‘ओके. जल्दी करो नहीं तो हम किसी और को चुन लेंगे. एक लाख डॉलर हाथ से जाने मत दो.’

इसके बाद लड़के ने करीब 40 मिनट बाद अपना जवाब भेजा और कहा कि वह इस साजिश में शामिल नहीं होगा. इस पर संदेश भेजने वाले ने उसे लूजर कहा. जब छात्र ने उसे आतंकी कहा तो उसने कहा कि उसके पास पश्चिम बंगाल की सीएम को मारने का कॉन्ट्रैक्ट है.

छात्र ने कहा कि मैंने इस मामले के बारे में पुलिस को बताने का फैसला किया. मैं उस समय डर गया जब पुलिस स्टेशन जाते समय मुझे शाम को मैसेज आया. इसमें लिखा था कि हमें पुलिस स्टेशन के पास तुम्हारी लोकेशन मिली है. क्या तुम पुलिस स्टेशन जा रहे हो. हम तुम पर नजर बनाए हुए हैं. इसलिए हमें मूर्ख न बनाओ अन्यथा तुम्हारी हत्या कर दी जाएगी.’ इस संदेश के बाद पुलिस ने उसे अपना फोन बंद करने के लिए कहा गया है. उधर. पश्चिम बंगाल सीआईडी के आईजी अजय रानाडे ने कहा. ‘हम इस मामले की जांच करेंगे.’

हत्या से पहले हर्षिता दहिया ने फेसबुक पर बताया था अपनी जान को खतरा

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Harshita dahiya

नई दिल्ली। हरियाणा की सिंगर और डांसर हर्षिता दहिया की मंगलवार शाम गोली मारकर हत्या कर दी गई. हर्षिता कुरुक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी की प्रस्तावित रैली के विरोध में हुई एक बैठक से लौट रही थी. वह अपनी कार से सोनीपत की तरफ जा रही थी. पानीपत के पास इसराना में एक कार ने उन्हें ओवरटेक किया. कार से हर्षिता को उतार कर गोली मार दी.

जानकारी के मुताबिक, हर्षिता का खरखौदा के दो कलाकारों से विवाद था. दोनों म्यूजिक कंपनी चलाते हैं. विवाद होने पर दोनों ने हर्षिता को धमकी दी थी. इस पर 12 अक्टूबर को हर्षिता ने खाप को एकत्रित होने के लिए कहा था.

हर्षिता ने कहा था, ‘कुछ दिन पहले तक बहन कहने वाले आज मुझे पीठ पीछे धमकी दे रहे हैं. हिम्मत हैं तो सामने आएं. वह कहते हैं कि 376 और 302 से नहीं डरते. मैं भी धारा 302 से नहीं डरती. मुझे अनाथ बता रहे हैं. हां, मैं अनाथ हूं. इसका फायदा उठाऊंगी. मैं धारा 302 लगवाकर जेल जाऊंगी, क्योंकि मेरे पीछे रोने वाली मां नहीं है.’

इसके बाद सिंगर ने कहा, ‘तुम जान लो कि मेरे भाई तुम्हें छोड़ेंगे नहीं. दहिया खाप इकट्‌ठा हो गई तो पता चल जाएगा. या तो मैं तुम्हें मारूंगी या खुद फांसी लगा लूंगी. लेकिन इज्जत पर कोई सवाल सहन नहीं करूंगी.’

पुलिस के सामने एक हैरान कर देने वाला सवाल ये भी है कि कार में हर्षिता के साथ एक सिंगर निशा और दो अन्य लोग भी बैठे थे. लेकिन बदमाशों ने हर्षिता को कार से खींचकर नीचे उतारा और उसे गोली मार दी. इस दौरान बाकी अन्य लोगों को खरोंच तक नहीं आई है. पुलिस इस मामले में कार में सवार तीनों लोग से भी पूछताछ कर रही है. पुलिस ने कहा कि हम पता लगा रहे हैं कि हर्षिता को कौन धमकी दे रहा था. हमलावरों की तलाश में पुलिस की कई टीमें जुटी हैं.

हर्षिता हरियाणवी सिंगर और डांसर थी. उसे लगातार हत्या की धमकी भी मिल रही थी. कई बार फेसबुक पर इस बारे में बताया भी था. पुलिस इन धमकियों को देने वालों की जांच कर रही है. फेसबुक पर किए गए भद्दे कमेंट की भी पुलिस जांच कर रही है.

केरल सरकार ने ‘दलित’ और ‘हरिजन’ शब्द के इस्तेमाल पर लगया बैन

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Pinarayi Vijayan

कोच्चि। केरल सरकार ने दलित और हरिजन शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. सरकार के पब्लिक रिलेशन यानि जनसंपर्क विभाग ने इसके लिए एक सर्कुलर जारी किया है. विभाग ने एसटी/एससी कमिशन की एक सिफारिश का हवाला देते हुए सभी सरकारी पब्लिकेशन और सरकार की प्रचार-प्रसार सामग्री में ‘दलित’, ‘हरिजन’ शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की अपील की है. इसकी चर्चा पिछले काफी वक्त से चल रही थी. जिसके बाद आखिरकार यह फैसला आ गया है.

जारी किए गए सर्कुलर में दलित/हरिजन शब्दों की जगह एससी/एसटी शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है, सरकार का कहना है कि दलित और हरिजन शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने की सिफारिश उन सामाजिक भेदभावों को खत्म करने के लिए की गई थी जो आज भी कई जगहों पर हो रहे हैं.

हालांकि दलित एक्टिविस्ट और साहित्यकारों को सरकार का यह फैसला पसंद नहीं आया, दलित शब्द को लेकर उनके अपने तर्क हैं.

असल में दलित शब्द दबे-कुचले वर्ग के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन इस समाज ने पिछले दो दशक में खुद को सामाजिक औऱ राजनैतिक तौर पर काफी मजबूत बना लिया है. जिसके बाद यह शब्द एक ताकत और वंचित समाज के मजबूत संगठन के रूप में सामने आया है.

पुलिस ट्रेनिंग सेंटर पर हमले में 32 मरे, 200 से ज्यादा जख्मी

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police

नई दिल्ली। अफगानिस्तान के दक्षिण पूर्वी हिस्से में स्थित एक पुलिस प्रशिक्षण केंद्र पर फिदायीन हमले और गोलीबारी में लगभग 32 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. गरदेज़ के लोक स्वास्थ्य निदेशक हिदायतुल्ला हामिदी ने कहा कि मरने वालों में महिलाएं, छात्र और पुलिस कर्मी हैं. गरदेज़ पकतिया प्रांत की राजधानी है.

गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एक फिदाई बम हमलावर ने प्रशिक्षण केंद्र के नजदीक विस्फोट से भरी अपनी कार को उड़ाया दिया. इससे कई हमलावरों के लिए हमला करने का रास्ता साफ हो गया. बयान के मुताबिक, केंद्र के अंदर बंदूकों से लैस एवं आत्मघाती जैकेट पहने हमलावरों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हुई. यह केंद्र पकतिया पुलिस मुख्यालय के करीब स्थित है.

एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि परिसर के पास दो कारों में विस्फोट हुआ. इस परिसर में राष्ट्रीय पुलिस, सीमा पुलिस और अफगान नेशनल आर्मी का प्रांतीय मुख्यालय भी हैं. पकतिया प्रांतीय परिषद के सदस्य अल्लाह मीर बहराम ने बताया कि बंदूकधारियों का एक समूह परिसर में घुस गया.

10 साल की बच्ची की मौत की वजह बना आधार कार्ड

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Santoshi

सिमडेगा। झारखंड के ​सिमडेगा के पतिअंबा गांव की संतोषी अपने परिवार के साथ कारीमाटी मे रहती थी. करीब 100 घरों वाले इस गांव में कई जातियों के लोग रहते हैं. संतोषी पिछड़े समुदाय की थी. गांव के डीलर ने पिछले आठ महीने से ​संतोषी के परिवार को राशन देना बंद कर दिया था​, क्योंकि, उनका राशन कार्ड आधार से लिंक्ड नहीं था.​ इस दौरान जैसे-तैसे काम चलता रहा, लेकिन पिछले एक हफ्ते से परिवार भोजन का कोई इंतजाम नहीं कर पा रहा था.​ संतोषी ने चार दिन से कुछ भी नहीं खाया था. घर में मिट्टी ​का ​चूल्हा था​ और जंगल से चुन कर लाई गई लकड़ियां भी​ थी​. ​नहीं था तो ​सिर्फ ‘राशन’.​ आखिरकार चार दिनों तक भूख से लड़ने के बाद संतोषी हार गई औऱ उसका परिवार मुंह ताकता रह गया. ​संतोषी की मौत हो गई​. व​ह​ दस साल की थी​.

संतोषी के पिताजी बीमार रहते हैं. कोई काम नही करते. ऐसे में घर चलाने की जिम्मेवारी उसकी मां कोयली देवी और बड़ी बहन पर थी.वे कभी दातून बेचतीं, तो कभी किसी के घर में काम कर लेतीं. लेकिन, पिछड़े समुदाय से होने के कारण उन्हें आसानी से काम भी नहीं मिल पाता था. ऐसे में घर के लोगों ने कई रातें ​भूखे पेट गुजार दीं.

संतोषी की मां ने बताया कि “28 सितंबर की दोपहर संतोषी ने पेट दर्द होने की शिकायत की. गांव के वैद्य ने कहा कि इसको भूख लगी है. खाना खिला दो, ठीक हो जाएगी. मेरे घर में चावल का एक दाना नहीं था. इधर संतोषी भी भात-भात कहकर रोने लगी थी. उसका हाथ-पैर अकड़ने लगा. शाम हुई तो मैंने घर में रखी चायपत्ती और नमक मिलाकर चाय बनायी. संतोषी को पिलाने की कोशिश की. लेकिन, वह भूख से छटपटा रही थी. देखते ही देखते उसने दम तोड़ दिया. तब रात के दस बज रहे थे.”

​हालांकि ​सिमडेगा के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्रि ​संतोषी की मौत की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमिटी की रिपोर्ट ​का हवाला देते हुए​ संतोषी की मौत की वजह मलेरिया ​बताते हैं. ​इसके लिए वह उस डाक्टर का हवाला देते हैं, जिसने संतोषी को देखा था.​

​दूसरी ओर ​जलडेगा के हीं सोशल एक्टिविस्ट तारामणि साहू ​जिला कलेक्टर पर तथ्यों को छिपाने का आरोप लगा​ रहे ​हैं​​​. ​उनका कहना है कि एएनएम माला देवी ने 27 सितंबर को संतोषी को देखा, तब उसे बुखार नहीं था. ऐसे में मलेरिया कैसे हो गया और जिस डाक्टर ने ​जिला कलेक्टर को यह बात बतायी, उसकी योग्यता क्या है.

सरकार को चाहिए कि वह या तो विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा को मान ले या फिर भूख से मौत को खुद परिभाषित कर दे. क्योंकि, हर मौत को यह कहकर टाल देना कि यह भूख से नही हुई है, दरअसल अपनी जिम्मेवारियों से भागना है.​ जाहिर है, भूख से हुई एक दस साल की बच्ची की मौत पूरे समाज के लिए शर्मिंदगी की बात है.

शाइनिंग इंडिया में भूख और कुपोषण से मरते बच्चे!

Shining India

गरीब-दलित के लिए जब उसकी ‘पहचान’ (जातिगत) उसकी मौत का ‘आधार’ बन जाए तो अधिकार की बात करना बेईमानी लगती है. झारखंड के सिमडेगा जिले के कारीमाटी में 28 सितंबर को जब 10 वर्ष की बच्ची संतोषी ने ‘भात-भात’ कहते हुए दम तोड़ दिया. तब मां कोयली देवी ने गोद में अपनी बेटी को मरते हुए देख कर एक मुट्ठी भात के लिए कितना तड़पी होगी. इसका अंदाज़ा ‘भोजन का अधिकार’ कानून बनाने वाले नेताओं को कभी नहीं लग सकता. क्योंकि ये नियम हम जैसे मध्यवर्ग को केवल दिखाने-सुनने के लिए है, ताकि हम भर पेट खाना खाते और फैंकते हुए ये कभी न सोचें कि ये नियम केवल भूखे को और भूखा रखने के लिए हैं.

जिस ‘इंडिया’ में गरीब, आदिवासी और दलित बच्चे भूख, कुपोषण और ऑक्सीजन की कमी से मर रहे हैं, वह शाइनिंग कैसे हो सकता है? गलती केवल सिस्टम की नहीं है, उस ग्रंथी की भी है जिसको इस समाज ने हजारों सालों से अपने में सहेजकर रखा हुआ है. भारतीय समाज के लिए किसी की भूख और ज़िंदगी से बढ़कर अपना अपना जातिगत वर्ण है. इलाके के लोगों ने भी कोयली देवी और उसके परिवार को सिर्फ इस वजह से काम नहीं दिया क्योंकि वे दलित है. ऐसे में यही कहा जा सकता है कि ‘मेरा देश सही में बदल रहा है’ जातिगत भेदभाव के नए-नए समीकरण गढ़ते हुए.

जहां तक प्रशासन की बात है तो प्रशासन ने बड़ी मुश्तैदी दिखाई है इस मामले की जांच में. कमेटी ने इतनी जल्दी जांच करके रिपोर्ट तक बना डाली. डी.एम. मंजूनाथ भजंत्री ने बयान दिया है कि “संतोषी की मौत 28 सितंबर को हुई लेकिन यह खबर छपी 6 अक्टूबर को. मीडिया में आया कि दुर्गा पूजा की छुट्टियों के कारण उसे स्कूल में मिलने वाला मिड डे मिल नहीं मिल पा रहा था. जबकि वह मार्च के बाद कभी स्कूल गई ही नहीं. उसकी मौत की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय कमिटी की रिपोर्ट के मुताबिक संतोषी की मौत की वजह मलेरिया है. इस कमेटी ने उस डॉक्टर से बातचीत की, जिसने संतोषी का इलाज किया था.”

इतनी बेशर्मी इस देश में ही हो सकती है जहां गरीबों-दलितों का जीवन सत्ता के लिए कोई मायने ही नहीं रखता. सत्ता के दलालों कितना ही झूठ बोल लो लेकिन सच्चाई यही है कि संतोषी को तुम्हारी इस ‘ब्राह्मणवादी आधार कार्ड वाली व्यवस्था’ खा गई है.

यह लेख पूजा पवार ने लिखा है.

ताजमहल पर चारों खाने चित हुई भाजपा…

Sangeet Som

नई दिल्ली। भारत जैसा देश अपने मजबूत लोकतंत्र के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. भारतीय लोकतंत्र की दुनियाभर में मिसालें दी जाती हैं. लेकिन जबसे केंद्र में भाजपा सरकार बनीं है, तबसे भारतीय लोकतंत्र चरमराने लगा है. इसकी वजह भारतीय जनता पार्टी के नेता है. जो आए दिन सांप्रदायिक बयान देते हैं. कभी रास्तों और जगहों के नाम बदल देते हैं और तो कभी एक विशेष वर्ग के लोगों को निशाना बनाते हैं. भाजपा अब भारतीय इतिहास को बदलने की भी कोशिश कर रही है.

इसी कड़ी में भाजपा विधायक संगीत सोम ने ताजमहल को लेकर 15 अक्टूबर को एक विवादित बयान दिया. विधायक ने कहा था कि गद्दारों के बनाए ताजमहल को इतिहास में जगह नहीं मिलनी चाहिए. ताजमहल भारतीय संस्कृति पर धब्बा है. इतना ही नहीं, भाजपा विधायक ने तो भारतीय इतिहास को बदलने की भी बात कह दी.

सोम ने कहा कि ये कैसा इतिहास, किस काम का इतिहास है जिसने अपने पिता को ही कैद कर डाला था. इन लोगों ने हिंदुस्तान में हिन्दुओं का सर्वनाश किया था. संगीत सोम ने कहा कि अब भाजपा सरकार देश के इतिहास से बाबर, अकबर और औरंगजेब की कलंक कथा को इतिहास से निकालने का काम कर रही है.

इस बयान के बाद विधायक और भाजपा का विरोध होना शुरू हो गया. सबसे पहले अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी. ओवैसी ने कहा है कि लाल किले को भी गद्दार ने ही बनाया है तो क्या पीएम मोदी लाल किला पर तिरंगा नहीं फहराएंगे?

असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया कि दिल्ली में हैदराबाद हाउस को भी ‘गद्दार’ ने ही बनाया था. क्या मोदी विदेशी मेहमानों को यहां आने से रोकेंगे. ‘गद्दारों ने ही लाल किले को भी बनाया था क्या मोदी वहां तिरंगा फहराना बंद कर देंगे क्या मोदी और योगी देशी और विदेशी सैलानियों को ताजमहल नहीं जाने के लिए कहेंगे.”

इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि अगर वह भारत का ही नाम बदल देंगे तो हम कहां जाएंगे? ममता बनर्जी ने कहा कि हाल ही में मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्टेशन करने वाली भाजपा ने ताज महल को क्यों छोड़ दिया? उसका नाम क्यों नहीं बदला? अगर भाजपा ने अपने देश का नाम बदल दिया तो हम कहां जाएंगे?’

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने कहा कि सिर्फ ताजमहल ही क्यों पार्लियामेंट, राष्ट्रपति भवन, कुतुब मीनार सब को गिरा देना चहिए. उन सभी इमारतों को गिरा देना चाहिए जिनसे कल के शासकों की बू आती है.

इन सब के बीच भाजपा विधायक और सांसद संगीत सोम के समर्थन में बयान दे रहे हैं. जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा है कि अंग्रेजों से ज्यादा क्रूर और उत्पाती मुस्लिम शासक थे. राव ने कहा कि अंग्रेजों ने जितनी लूट और देश की बर्बादी की उससे कई गुना ज्यादा मुस्लिम शासकों ने किया है.

तो सुब्रमण्यम स्वामी तो जीवीएल से एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि ताजमहल चोरी की जमीन पर बना है. शाहजहां ने उसके लिए जयपुर के राजा पर जमीन देने का दबाव बनाया था, मुआवजे के तौर पर 40 गांव दिए गए थे. अब आप ही सोचिए चोरी की जमीन पर कौन मुआवजा देता है? स्वामी दावा कर रहे हैं कि वह इस जुड़े सबूत भी लोगों को दिखाएंगे.

हेमा मालिनी ने बताया, सनी देओल से कैसा है उनका रिश्ता

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  Hema Malini

मुंबई। 16 अक्टूबर को फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी की जीवनी ‘बियॉन्ड द ड्रीमगर्ल’ लांच की गई. यह दिन हेमामालिनी के लिए काफी खास था. इसी दिन जहां इस दिग्गज अदाकार का 69वां जन्मदिन था तो वहीं उन्होंने इसी दिन फिल्म इंडस्ट्री में भी अपने 50 साल पूरे कर लिए. कार्यक्रम की खास बात हेमा मालिनी का सनी देओल को लेकर बयान रहा.

हेमा मालिनी ने अपने पति धर्मेंद्र के बड़े बेटे सनी देओल और अपने रिश्‍तों के बारे में खुलकर बात की. फिल्म अभिनेत्री ने कहा- “लोग सोचते हैं कि हमारे बीच कैसा रिश्‍ता है. तो सच यह है कि जब भी जरूरत होती है, सनी हमेशा साथ होते हैं. जब 2015 में मेरा कार एक्सीडेंट हुआ था, तब सनी सबसे पहले मुझे देखने पहुंचे थे. वो सब चीजों का ख्याल रखते हैं. जिस तरह से वो ध्‍यान रखते हैं, उससे साफ है कि हमारा रिश्‍ता कैसा है.”

असल में माना जाता रहा है कि सनी देओल हेमा मालिनी को पसंद नहीं करते हैं. लेकिन हेमा मालिनी के इस नए खुलासे से नई बात सामने आई है.

फिल्‍मों में आने से पहले धर्मेंद्र ने 19 साल की उम्र में प्रकाश कौर से शादी कर ली थी. प्रकाश कौर और धर्मेंद्र के 4 बच्चे हैं, जिनमें सनी देओल, बॉबी देओल बेटी विजेता और अजीता हैं. जबकि वहीं फिल्मों में आने के बाद धर्मेंद्र का दिल हेमा पर आ गया था और उन्‍होंने हेमा मालिनी से 1979 में शादी कर ली थी.

अरबों की बेनामी संपत्ति की मालिक है हनीप्रीत

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honeypreet

चंडीगढ़। बलात्कारी बाबा की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत जेल में बंद है. इस बीच पुलिस पूछताछ में ये पता चला है कि हनीप्रीत के नाम अरबों रुपये की बेनामी संपत्तियां हैं. अलग-अलग राज्यों में जमीन और मकान से जुड़े डेरे के कई दस्तावेज पुलिस के हाथ लगे हैं, जिनकी बारीकी से जांच की जा रही है. ताकि हकीकत पता लगाई जा सके.

इस संबंध में डेरा सच्‍चा सौदा की चेयरपर्सन विपासना और हनीप्रीत से मिली जानकारियों के आधार जांच की जा रही है. क्रॉस चेकिंग व लैपटॉप की डिलीट फाइलों को रिकवर करने के बाद ही एसआईटी किसी नतीजे पर पहुंचेगी.

राजस्थान में डेराप्रमुख के पैतृक गांव गुरुसर मोडिया से बरामद दस्तावेजों में पिछले कुछ महीनों पहले हुए करोड़ों के लेनदेन की तमाम जानकारी है. इसके अलावा भूरे रंग के बैग से दर्जनों जमीन और मकानों की रजिस्ट्रियां भी मिली हैं. इनमें से ज्यादातर संपत्तियां हनीप्रीत के नाम से खरीदी गई हैं, जो दिल्ली, मुंबई, हिमाचल प्रदेश, पंजाब सहित अन्य कई राज्यों में हैं.

पुलिस के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक 100 से अधिक संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं. जिसकी कीमत कई सौ करोड़ रूपये है. इसके अलावा विभिन्न बैंकों के दर्जनों डेबिट कार्ड से हुए लेन-देन का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है.

इनमें कुछ डेबिट कार्ड हनीप्रीत के खातों के हैं. डेराप्रमुख के बाद डेरे में नंबर दो की हैसियत रखने वाली हनीप्रीत के हाथ में ही डेरा का वित्तीय प्रबंधन था और ज्यादातर लेन-देन उसी के जरिये किया जाता था.

दलित लेखक संघ के अध्यक्ष-महासचिव को यूपी के राज्यपाल ने किया सम्मानित

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लखनऊ। बुद्ध अम्बेडकर कल्याण एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश ने दलित साहित्यकार सेमिनार और सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया. यह आयोजन 15 अक्टूबर को लखनऊ में आयोजित हुआ. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक और विशिष्ट अतिथि अरूणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद रहे.

राज्यपाल राम नाईक ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया. पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद ने दलित लेखक संघ के अध्यक्ष कर्मशील भारती और महासचिव हीरालाल राजस्थानी को उनके दलित साहित्य व कला में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान पत्र देकर सम्मनित किया.

कार्यक्रम में राम नाईक ने कहा कि अम्बेडकर द्वारा रचित साहित्य में मुझे संविधान सबसे प्रिय है. उन्होंने इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल के साथ मिलकर सात किताबों का विमोचन भी किया. इस मौके पर माता प्रसाद ने कहा कि दलित साहित्य मानवीय मूल्यों का साहित्य है जो समता मूलक समाज की मांग करता है.

इस अवसर पर हीरालाल राजस्थानी ने अपने अभिभाषण में कहा कि दलित लेखन बिना उसकी अवधारणा के रचा जाना अपने उद्देश्य से भटकना जैसा होगा. कर्मशील भारती ने कहा कि दलित साहित्य परंपरागत साहित्य की परिपाटी पर आधारित नहीं है.

इसके आलावा इस सम्मलेन में अनेक राज्यों से दलित लेखक चिंतक भी मौजूद रहें. जिनमें, खन्ना प्रसाद गुजरात से, एमडी इंगोले महाराष्ट्र से, डीसी ऊके मध्यप्रदेश से, नवनाथ काम्बले तमिलनाडु से नागेंद्र गौतम, लालती देवी और कालीचरण स्नेही उत्तर प्रदेश से मुख्यरूप से शामिल रहे. मंच संचालन नानक चंद ने किया.

गुलामी की निशानी संसद और लाल किले को भी गिरा दोः आजम खान

azam khan

नई दिल्ली। भाजपा विधायक संगीत सोम के बयान के बाद से शुरू हुए विवाद में सपा नेता आजम खान भी कूद गए हैं. ताजमहल के बहाने आजम खान ने भाजपा पर निशाना साधा है. आजम खान ने कहा कि गुलामी की निशानियों को ना मिटाना राजनीतिक नपुंसकता है.

आजम खान ने कहा कि मैंने तो पहले भी कहा कि सिर्फ ताजमहल ही क्यों पार्लियामेंट, राष्ट्रपति भवन, कुतुब मीनार सब को गिरा देना चहिए. हम तो बादशाह से अपील करते हैं. छोटे बादशाह से तो हमने कहा कि आप आगे चलो हम साथ चलेंगे. पहला फावड़ा आपका होगा दूसरा हमारा होगा. कहने के बाद कदम पीछे हटा लेना राजनीतिक नपुंसकता है.”

आजम खान ने संगीत सोम का नाम लिए बिना कहा कि मैं किसी को जवाब नहीं दे रहा हूं क्योंकि गोश्त के कारखाने चलाने वालों को राय देने का अधिकार नहीं है. इस पर मोदी और योगी जी फैसला करेंगे लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि उन सभी इमारतों को गिरा देना चाहिए जिनसे कल के शासकों की बू आती है.

ओवैसी ने भी किया विरोध संगीत सोम के बयान का AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध किया है. ओवैसी ने कहा है कि लाल किला को भी गद्दार ने ही बनाया है तो क्या पीएम मोदी लाल किला पर तिरंगा नहीं फहराएंगे?

असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया, ”दिल्ली में हैदराबाद हाउस को भी ‘गद्दार’ ने ही बनाया था. क्या मोदी विदेशी मेहमानों को यहां आने से रोकेंगे. ‘गद्दारों ने ही लाल किला को भी बनाया था क्या मोदी वहां तिरंगा फहराना बंद कर देंगे क्या मोदी और योगी देसी और विदेशी सैलानियों को ताजमहल नहीं जाने के लिए कहेंगे.”

उच्च शिक्षा की बदहाली के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं-नीतीश

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि शिक्षा की समस्या किसी राज्य विशेष की समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे देश की समस्या है. उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों को मिलकर काम करना होगा. इसके लिए लोगों की मानसिकता बदलने के साथ ही पूरे सिस्टम को ठीक करना होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी जल्द दूर कर लिया जायेगा.

लोक संवाद कार्यालय के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह बातें कहीं. नीतीश कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों के लिए राज्य सरकार ज्यादा हस्तक्षेप नहीं कर सकती, उसके अपने दायरे हैं. उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में राज्यों के पास सीमित अधिकार हैं. उन्होंने कहा, इसे बदलने की जरूरत है और केंद्र सरकार को इस विषय में राज्य सरकार की क्षमता निर्धारित करना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए शिक्षकों का बड़े पैमाने पर बहाली करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया जारी है, जल्द ही शिक्षकों की बहाली की जायेगी.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोगों का झुकाव भी शिक्षक बनने की तरफ होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारी पूरी कोशिश रहती है कि शिक्षकों को पहली तारीख को तनख्वाह मिल सकें. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में सरकार सीधी बहाली नहीं करती. विश्वविद्यालयों के शिक्षा में राज्य सरकार का रोल सीमित है. उन्होंने कहा कि शिक्षा का संचालन राज्य सरकार को मिले तो बेहतर होगा. नीतीश कुमार ने कहा कि उच्च शिक्षा को बेहतर करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के लिए राज्य सरकार की ओर से करीब चार हजार करोड़ ग्रांट दिया जाता है.

पटना विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने की मांग पर उन्होंने कहा कि यह पुरानी मांग है. संसद में भी हम इसे उठाते रहे हैं. इस बारे में अब केंद्र सरकार को फैसला लेना है. केंद्र सरकार चाहे तो पीयू को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दे या नहीं दें, यह उनके हाथ में है.