दलित रसोइयां के हाथ से बना मिड-डे-मील नहीं खा रहे बच्चे

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छ्त्तीसगढ़

गरियाबंद। देश में जातिवादी मानसिकता का बीज इस कदर बोया जा रहा है कि नादान बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं. कुछ इस तरह का मामला छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से आया है. जहां आंगनवाड़ी के बच्चे दलित महिला रसोइयां के हाथ से बना खाना खाने से मना कर रहे हैं. इस कारण आंगनवाड़ी में अब भोजन बनाना बंद कर दिया गया है. यहां अब बच्चों को सिर्फ गुड़ और चना दिया जा रहा है.

दरअसल, गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक स्थित ध्रुवापारा के आंगनवाड़ी केंद्र में एक दलित महिला के हाथ से पका भोजन बच्‍चे नहीं खा रहे हैं. दलित महिला के हाथ से पका भोजन नहीं खाने की जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने महिला बाल विकास विभाग को भी दी है. लेकिन अब तक विभाग ने न तो कोई पहल की है और न ही कोई कार्रवाई. इसके चलते यहां आज भी गर्म भोजन के बजाय बच्‍चों को चना और गुड़ खिलाकर उनका कुपोषण दूर करने का प्रयास किया जा रहा है.

शुरुआती दौर में आंगनवाड़ी केंद्र में पदस्‍थ सहायिका ने भोजन बनाकर बच्चों को खिलाने की कोशिश की तो बच्चे भोजन को खाने के बजाय फेंक देते थे. उसने एक सप्ताह तक भोजन बनाया लेकिन बच्चों ने खाने से मना कर दिया. इस पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कल्याणी सिन्हा और सहायिका ने एक महिला को पैसे देकर भोजन बनवाना शुरू किया लेकिन उन्‍हें इसके लिए अपने पास से भुगतान करना पड़ता था. लिहाजा कुछ समय बाद यह व्‍यवस्‍था भी बंद कर दी गई‍. अब बच्चों को चना और गुड़ दिया जा रहा है.

ऑड-इवन में दोपहिया वाहनों पर भी लगेगी ब्रेक!

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानि एनजीटी ने केजरीवाल सरकार के ऑड-इवन फार्मूले पर पेंच फंसा दिया है. ऑड इवन पर अपना फैसला सुनाते हुए एनजीटी ने कहा कि वह ऑड-इवन को मंजूरी देने को को तैयार है. लेकिन एनजीटी ने इसमें पेंच फंसा दिया. एनजीटी ने इस स्कीम में दोपहिया वाहनों को भी शामिल करने को कहा है. एनजीटी के इस फैसले के बाद केजरीवाल सरकार मुसीबत में पड़ सकती है. वैसे बिना एनजीटी को भरोसे में लिए ऑड-इनव की घोषणा करने से नाराज यह संस्था पहले से ही केजरीवाल सरकार से नाराज थी. एनजीटी की नाराजगी इस वजह से थी कि उसकी सुनवाई से पहले केजरीवाल ने ऑड इवन पर फैसला ले लिया. एनजीटी ने इस बात पर विरोध भी जताया था. उसका तर्क था कि जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि प्रदूषण का स्तर पिछले कुछ दिनों में कितना घटा या बढ़ा है, तब तक ऑड इवन की घोषणा जरूरी नहीं थी. उसने केजरीवाल द्वारा ऑड इवन में दिए गए तमाम छूटों पर भी आपत्ति जताई थी. अब एनजीटी के इस फैसले के बाद सरकार और एनजीटी के बीच शीतयुद्ध शुरू हो सकता है.

योग सिखाने वाली मुस्लिम टीचर के घर पर हुआ पथराव

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राफिया नाज

रांची। योगा सिखाने वाली प्रसिद्ध मुस्लिम योगा टीचर राफिया नाज़ के खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने फतवा जारी कर दिया है. फतवे के बाद से राफिया को उनके ही समुदाय के लोग उन्हें जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं. प्रशासन ने उनको सुरक्षा तो मुहैया करवाई है लेकिन इस बीच कुछ लोगों ने उनके घर पर पथराव कर दिया. जिसके बाद से उन्हें और कड़ी सुरक्षा के बीच रहना पड़ रहा है.

धमकी और पथराव की शिकायत राफिया ने पुलिस उपाधीक्षक विकासचंद्र श्रीवास्तव से की है. श्रीवास्तव ने कहा कि शुक्रवार को एक टीवी चैनल पर उनका साक्षात्कार दिखाए जाने के बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने उनके घर पर पत्थर फेंके. इसके बाद खुद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उनके घर का दौरा कर उनसे और उनके परिजनों से मुलाकात की और उन्हें पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया. पुलिस मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने पूछताछ के लिए कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है.

दरअसल, राफिया नाज योग टीचर हैं और वह रांची के निवारणपुर स्थित आदिम जाति सेवा मंडल के आश्रम में पहली से 10वीं कक्षा तक के बच्चों को योग सिखाती हैं. डोरंडा इलाके की रहने वाली राफिया नाज़ योग सिखाकर अपनी आजीविका चलाती हैं. योग सिखाना जारी रखने पर उन्हें फतवे के जरिये धमकाया गया है. वह अपने घर में बच्चों में सबसे बड़ी हैं और एक स्थानीय कॉलेज से एम.कॉम कर रही हैं. 2015 में योग गुरु रामदेव के साथ मंच साझा करने के बाद नाज चर्चा में आई थीं.

करियर की संतुष्टि को आत्महत्या मानते हैं इरफान

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नई दिल्‍ली। लीक से हटकर फिल्में करने के लिए मशहूर इरफान खान लगभग 30 वर्षो के करियर के बाद भी अपने करियर से संतुष्ट नहीं हैं. वह कहते हैं कि जिस दिन मैं अपने करियर से संतुष्ट हो गया, वो दिन मेरे लिए आत्महत्या जैसा होगा. इरफान हर फिल्म के साथ दर्शकों को कुछ नया देने की कोशिश करते हैं. इसी कड़ी में उनकी नई फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ में उनकी रोमांटिक साइड खूब भा रही है. इरफान ने आईएएनएस को दिए इंटरव्‍यू में अपने इस रोमांटिक अंदाज के बारे में बताया. उन्होंने कहा, “मैं इमेज में बंधकर नहीं रहना चाहता, जिस दिन लोगों ने मुझे इमेज में बांधना शुरू कर दिया, उस दिन ही मेरे लिए खतरा शुरू हो जाएगा. इसलिए कोशिश होती है कि मैं हर दूसरी फिल्म में अपनी पुरानी इमेज तोड़ दूं.”

‘करीब करीब सिंगल’ सीधे यूथ को टारगेट करती फिल्म है. आज का युवा प्यार ढूंढते-ढूंढते ऑनलाइन पहुंच गया है और यही फिल्म में भी दिखाया गया है. इरफान ऑनलाइन डेटिंग एप के बारे में बताते हैं, “आज के युवाओं के पास कई विकल्प हैं. ऑनलाइन ही कई तरह की वेबसाइट और एप हैं. डेटिंग और वेडिंग एप से बहुत मदद मिल रही है, लोगों की ऑनलाइन शादियां भी हो रही हैं. हमारी फिल्म की कहानी इसी लव ट्रेंड को बयां करती है.” राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता इरफान के लिए इनाम कुछ खास मायने नहीं रखते. वह इनाम की तुलना में दर्शकों की संतुष्टि को तरजीह देते हैं.

इरफान में नीरस और बेदम फिल्म में भी जान फूंकने का हुनर है. वह चाहते हैं कि आज से 30 या 40 साल बाद लोग उन्हें उनके अभिनय की वजह से याद करें. हॉलीवुड में भी अपने काम का डंका बजा चुके इरफान का कहना है, “एक कलाकार के लिए सबसे अधिक मायने यह रखता है कि उसकी कला को पहचान मिले. मैं चाहता हूं कि मुझे लोग मेरे काम की वजह से जानें और इसी कोशिश में ताउम्र काम करता रहूंगा.”

 

सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी में मांसाहारी छात्रों को नहीं मिलेगा गोल्ड मेडल!

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university

पुणे। पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय अपने सर्कुलर की वजह से चर्चा में है. पुणे विश्वविद्यालय के इस सर्कुलर के अनुसार अब विद्यार्थियों को शाकाहारी होने या ना होने के आधार पर गोल्ड मेडल दिया जाएगा. विश्वविद्यालय की ओर से गोल्ड मेडल पाने की शर्तों में शाकाहारी होना, भारतीय संस्कृति का समर्थक होना आदि शामिल है.

सर्कुलर के अनुसार 10 ऐसी शर्तें तय की गई हैं जो महर्षि कीर्तंकर शेलार गोल्ड मेडल के लिए पात्रता तय करते हैं. इनमें शाकाहारी होने की शर्त भी शामिल है. साथ ही इन शर्तों में नशा ना करना, योग, प्राणायाम करना आदि भी शामिल है. इस साल यह सर्कुलर 31 अक्टूबर को फिर से जारी किया गया है. हालांकि छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे हैं.

बता दें कि यह मेडल योग महर्षि रामचंद्र गोपाल शेलार और त्यागमूर्ति श्रीमति सरस्वती रामचंद्र शेलार के नाम पर योग गुरु ट्रस्ट द्वारा दिया जाता है. साथ ही यह मेडल साइंस और नॉन साइंस के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को दिया जाता है. हालांकि यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्होंने यह शर्तें तय नहीं की है और ट्रस्ट के सामने इस मामले को उठाया जाएगा. पुणे यूनिवर्सिटी की ओर से किया गया एक फैसला आगे चलकर विवाद का विषय बन सकता है.

यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल उन लोगों को देने की वकालत कर रही है जो शाकाहारी हैं और शराब नहीं पीते हैं. पुणे की सावित्रीबाई फूले पुणे यूनिवर्सिटी (एसपीपीयू) की ओर से जारी आधिकारिक बयान को पढ़ने के बाद तो कम से कम यही लगता है.

ऑड-ईवन के दौरान डीटीसी-क्लस्टर बसों में मुफ्त होगा सफर

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नई दिल्ली। पिछले एक हफ्ते से स्मॉग और प्रदूषित हवा झेल रहे दिल्ली वालों के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए दिल्ली सरकार ने आदेश दिया है कि ऑड-इवन के दौरान डीटीसी और क्लस्टर बसों में यात्री फ्री में सफर कर सकेंगे. दिल्ली में 13 नवंबर से 17 नवंबर तक ऑड-इवन का तीसरा फेज लागू किया जा रहा है.

दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने इस बात की जानकारी देते हुए ट्वीट किया और लिखा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए और ऑड-इवन के दौरान दिल्ली में सभी डीटीसी और क्लस्टर बसों में सफर करने वाले यात्रियों से कोई भी किराया नहीं लिया जाएगा. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने परिवहन मंत्री के इस फैसले का स्वागत किया है.

इस प्रक्रिया के लिए डीटीसी प्राइवेट ठेकेदारों से 500 अतिरिक्त बसों की व्यवस्था भी करने जा रही है. साथ ही दिल्ली मेट्रो ने भी 20 रूट पर 100 नई फीडर बसें चलाने का भरोसा दिया है. डीटीसी के पास करीब चार हजार बसें हैं जबकि 1,600 क्लस्टर बसें हैं. बहरहाल, AAP के सत्ता में आने के बाद डीटीसी कोई नई बस नहीं खरीद सकी है.

प्रद्युम्न मर्डर केस में एक और छात्र की गिरफ्तारी संभव

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नई दिल्ली। प्रद्युम्न हत्याकांड अब एक नया मोड़ आया है. आरोपी छात्र ने गुरुवार को एक बार फिर से प्रद्युम्न की हत्या करने का जुर्म कबूल किया है. 11वीं के छात्र को भी सीबीआई ने पिता के साथ चार बार पूछताछ के लिए बुलाया था. पांचवी बार में उसे गिरफ्तार किया था. मंगलवार रात गिरफ्तार 11 वीं के छात्र को बुधवार को ही सीबीआई ने किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया था. बोर्ड ने उसे तीन दिन की रिमांड पर सौंपा है.

इस हत्याकांड की जांच कर रही सीबीआई आरोपी छात्र को शुक्रवार सुबह हेडक्वार्टर लेकर पहुंची. खबर है कि आज जांच एजेंसी आरोपी छात्र को स्कूल ले जाकर क्राइम सीन रिक्रिएट करवाएगी ताकि पता लग सके कि आखिरकार 8 सितंबर को प्रद्युम्न की हत्या के दौरान हुआ क्या था.

इस मामले में एक और छात्र का नाम सामने आ रहा है. माना जा रहा है कि जांच एजेंसी सोहना के रहने वाले इस छात्र को गिरफ्तार कर सकती है. गुरुवार शाम सीबीआई की एक टीम सोहना पहुंची और छात्र के घर की लोकेशन देखी. जल्दी ही इस छात्र से भी पूछताछ हो सकती है. दरअसल रेयान स्कूल के माली ने बताया था कि उसे दो लड़कों ने आकर बताया था कि एक बच्चा टॉयलेट में घायल पड़ा है. वहीं सीबीआई की टीम कल सोहना में आरोपी छात्र को अनाज मंडी के उस दुकान पर लेकर गई जहां से उसने हत्या में इस्तेमाल चाकू खरीदा था.

सीबीआई ने आज दुकानदार से पूछताछ की लेकिन वो आरोपी छात्र को पहचान नहीं पाया. इस मामले में अभी तक सीबीआई ने किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी है. आरोपी छात्र के कुछ और दोस्तों से भी पूछताछ हो सकती है. सीबीआई को शक है कि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने अपने कुछ और दोस्तों को भी जानकारी दी थी.

JNU में बिरयानी बनाने पर छात्रों पर जुर्माना

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JNU

नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में चार छात्रों को प्रशासनिक भवन के पास बिरयानी पकाना महंगा पड़ गया है. जेएनयू प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन के आरोप में छात्रों पर छह से दस हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया है. जेएनयू चीफ प्रॉक्टर कौशल कुमार की ओर से छात्रों को नोटिस जारी किया गया है. जुर्माना चुकाने के लिए छात्रों को दस दिन का समय दिया गया है.

आदेश के अनुसार, प्रॉक्टोरियल जांच में छात्रों का प्रशासनिक ब्लॉक के पास बिरयानी पकाने और खाने का दोषी पाया गया है. ऐसे में इसे गंभीर मामला मानते हुए कड़ी कार्रवाई की गई है. आदेश में उन्हें ऐसे कार्यों में शामिल नहीं होने की चेतावनी भी दी गई है. यदि छात्र जुर्माना नहीं चुकाते तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जिन पर जुर्माना लगाया गया है उनमें जेएनयू छात्रसंघ की महासचिव शत्रुपा चक्रवर्ती शामिल हैं, जिनपर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. छात्रों का दावा है कि प्रशासनिक ब्लॉक के पास कई साल से ऐसा हो रहा है. इसके बावजूद उनपर इस तरह का जुर्माना लगाया गया है.

मामला 27 जून का है. उस समय तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित पांडे, सत्रुपा चक्रवर्ती अन्य छात्रों के साथ कुलपति दफ्तर में उनसे कुछ मुद्दों पर बात करने गए थे. छात्रों ने दावा किया कि कुलपति जगदेश कुमार ने बार-बार अनुरोध करने पर भी उनसे मिलने से इनकार कर दिया. इतना ही नहीं उन्होंने अगले दिन का भी अप्वाइंटमेंट देने से इनकार कर दिया.

इसके विरोध में छात्रसंघ अध्यक्ष और छात्रसंघ के दूसरे सदस्यों ने निर्णय लिया कि वे पूरी रात प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर ही कैम्प करेंगे. इस प्रदर्शन में कुछ अन्य छात्र भी शामिल हो गए. इस दौरान सभी ने वहीं पर रात के खाने में बिरयानी बनाया और खाया.

विकास के लिए शिक्षा का लक्ष्य तय करना अहम

बीकानेर। श्री मक्खन जोशी वेलफेयर सोसायटी और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला के मुख्य वक्ता न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल भाई कोठारी ने कहा, शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यक्तित्व एवं समाज का निर्माण होना चाहिए. उन्होंने कहा, आजादी के 70 वर्ष बाद भी हम शिक्षा का लक्ष्य तय नहीं कर पाए हैं. जब तक लक्ष्य तय नहीं होगा देश का विकास संभव नहीं मुख्य अतिथि एमजीएस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.भगीरथ सिंह ने कहा अच्छी शिक्षा और वातावरण होते हुए भी चरित्र निर्माण में सफल नहीं हो पा रहे हैं हम. उन्‍होंने कहा, इस प्रकार की संगोष्ठी निश्चित रूप से विद्यार्थी और समाज के लिए उपयोगी साबित होगी.

अध्यक्षीय उद्बोधन में महापौर नारायण चौपड़ा ने शिक्षा के साथ राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की महती आवश्यकता बताई. कॉलेज प्राचार्य डाॅ. उमाकान्त गुप्त ने व्यक्तित्व विकास की बात कही. डाॅ.अनिला पुरोहित ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन निश्चित रूप से समाजोत्थान एवं व्यक्तित्व विकास में सहायक हो रही है. कार्यशाला में सोसायटी के सचिव अविनाश जोशी, डाॅ.चंद्रशेखर कच्छावा, स्वामी सुबोध गिरी जी महाराज आदि ने विचार रखे. द्वितीय सत्र में दैनिक जीवन में व्यक्तित्व विकास के प्रयोग विषय पर चर्चा हुई.

तृतीय समानांतर में तकनीकी शिक्षा में नैतिकता पर गौरव बिस्सा, डा. देवाराम गोदारा और वैदिक गणित में एन.के.सोनी,डाॅ. शशिकांत वर्मा ने भी अपने पत्र प्रस्तुत किए. कार्यक्रम में डॉ.बेला भनोत, सुनील रामपुरिया, डॉ.प्रकाश अमरावत,डॉ.नंदिता सिंघवी, डॉ.इंद्रा बिश्नोई, डॉ.राजेंद्र आदि शामिल हुए.

साभार: दैनिक भास्कर

बिना राष्ट्रगान आरंभ हुआ T-20 मैच

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भारत और न्यूजीलैंड के बीच 7 नवंबर को तिरूवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल ग्राउंड में केरल क्रिकेट एसोसिएशन (केसीए) ने पहला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित किया था. पूरे दिन लगातार बारिश की वजह से मैच के ओवरों में कटौती कर दी गई और 8-8 ओवरों का मुकाबला कराया गया. नियमों के मुताबिक खेल शुरू होने से पहले दोनों टीमों को अपने-अपने राष्ट्रगान के लिए खड़ा होना चाहिए. हालांकि, उस मुकाबले से पहले नेशनल एंथम नहीं हुआ और टॉस के बाद ही मैच शुरू कर दिया गया.

केसीए के सचिव जयेश जॉर्ज ने इसे अपनी गलती मानी है. उन्होंने डेक्कन क्रॉनिकल से कहा, ‘हां, यह हमारी तरफ से गलती हुई. हम सभी मैदान पर थे और बारिश के बाद मैच शुरू कराने की जल्दी में थे. हम राष्ट्रगान करना भूल गए. यह हमारी तरफ से एक गंभीर चूक है और मैं देश से माफी मांगता हूं. ऐसा फिर कभी नहीं होगा.’ उल्लेखनीय है कि तिरुवनंतपुरम के ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में भारत ने जीत से शुरुआत की. उसने वर्षा बाधित मैच में न्यूजीलैंड पर 6 रनों से रोमांचक जीत हासिल की. भारत के खिलाफ अजेय चल रहे कीवियों ने पहली बार टी-20 सीरीज में हार मिली.

इससे पहले यहां के यूनिवर्सिटी स्टेडियम (तब त्रिवेंद्रम) में दो वनडे मैच खेले गए थे. इनमें से आखिरी वनडे 25 जनवरी 1988 को खेला गया था. इसके साथ ही ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम देश का 50वां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच स्थल बन गया. भारत का पहला मैच स्थल मुंबई का जिमखाना ग्राउंड था, जहां भारतीय टीम ने 15 से 18 दिसंबर 1933 के बीच टेस्ट मैच खेला था.

भाजपा के विरोध के बीच कांग्रेस मना रही है टीपू सुल्तान की जयंती

tipu sultan

बेंगलुरू। 18वीं सदी में मैसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान की आज जयंती है. कर्नाटक में कांग्रेस इसे भारी सुरक्षा बीच मना रही है.  लेकिन भाजपा टीपू सुल्तान की जयंती का विरोध कर रही है. कार्यक्रम के विरोध में मदिकेरी में राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर पत्थबाजी की गई. कोडागू में इसी को ध्यान में रखते हुए धारा 144 लागू कर दी गई है.

राज्य भर में इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 11 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार पिछले तीन सालों से मैसूर के शासक रहे टीपू को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित कर रही है जबकि कोडावा समुदाय, भाजपा और कुछ दक्षिणपंथी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. उनके मुताबिक, टीपू धार्मिक आधार पर कट्टर था. जबरन उसने लोगों का धर्म परिवर्तन कराकर इस्लाम कबूल करवाया था.

विपक्षियों के विरोध के बाद भी कांग्रेस ने टीपू सुल्जतान की जयंती मनाने का फैसला किया. जिसके चलते उसे विरोध का सामना करना पड़ रहा है. पुलिस के निर्देश के मुताबिक, सरकारी कार्यक्रम में होने वाले जुलूस को छोड़कर किसी और को जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी. बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर टी.सुनील कुमार ने बताया कि कर्नाटक राज्य पुलिस की 30 टुकड़ियां और 25 सशस्त्र दल के साथ पुलिसकर्मी और बाकी अधिकारी शहर में तैनात किए गए हैं.

अब नहीं लगाने पड़ेंगे बैंकों के चक्कर, जानिए कैसे

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बैंक शाखाओं में घंटों बरबाद करने से निजात देने के लिए भारतीय र‍िजर्व बैंक ने सभी बैंकों को निर्देश जारी किया है. सभी बैंकों को 31 दिसंबर तक इस निर्देश का पालन करना होगा. आरबीआई ने बैंकों को निर्देश भेजा है कि अक्षम लोगों को घर पर ही बैंकिंग सेवाएं दी जाएं. केंद्रीय बैंक ने यह निर्देश 70 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखकर भेजा है.

वरिष्ठ नागरिकों के अलावा बैंकों को उन लोगों को भी घर पर बैंकिंग सेवाएं देनी होंगी, जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं. इसके अलावा दृष्ट‍िबाध‍ित लोगों को भी यह सुविधा देनी होगी. आरबीआई ने साफ कहा है कि इन लोगों को उनके दरवाजे पर ही लेनदेन से जुड़े सभी काम के लिए सेवा दी जाए. समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक घर पर इन लोगों को जो अहम सुविधाएं देनी जरूरी होंगी. इसमें इन्हें नगदी पहुंचाना, चेक बुक और डिमांड ड्राफ्ट घर पर पहुंचाने समेत अन्य सेवाएं शामिल होंगी.

केंद्रीय बैंकों ने बैंकों को इन लोगों की केवाईसी जरूरत का हर काम और इससे संबंधित दस्तावेज व जीवन प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेज घर जाकर ही देने के लिए कहा है. आरबीआई ने कहा कि कई बार यह देखने में आया है क‍ि बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को उनकी जरूरत के मुताबिक सेवा नहीं मिल पाती है. इसकी वजह से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. 

आरबीआई ने बैंकों को कहा है कि वे इस आदेश को 31 दिसंबर, 2017 तक शब्द और भावना के अनुरूप क्रियान्व‍ित कर लें. इसके साथ ही कहा है कि हर बैंक को अपनी वेबसाइट और शाखा पर इन सुवि‍धाओं का ब्यौरा भी उपलब्ध कराना होगा. केंद्रीय बैंक के इस निर्देश से बुजुर्गों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को काफी ज्यादा राहत मिलेगी और वे आसानी से अपने लेनदेन के काम निपटा पाएंगे.

घर के बाहर सो रही दलित महिला से गैंगरेप

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जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर से एक दलित महिला के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया है. जहां घर के बाहर सो रही एक महिला के साथ 3 युवकों ने अंधेरे का फायदा उठाकर रेप किया और मौके से फरार हो गए. गैंगरेप की ये वारदात घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई.

पीड़िता ने इस मामले में 3 लोगों के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज कराया है. पुलिस को शक है कि शायद महिला के साथ गैंगरेप करने वाले आरोपी उसे पहले से जानते थे. पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह अपने पति के साथ किसी रिश्तेदार के यहां शादी में गई हुई थी. शादी से लौटने के बाद देर रात वह घर के बाहर ही चारपाई पर सो गए.

रात में ठंड लगने की वजह से पति घर के अंदर चला गया और महिला बाहर ही सोती रह गई. इसी दौरान 3 लोग आए और महिला का मुंह दबाकर बारी-बारी से रेप किया. वारदात के बाद रात में ही पीड़िता ने पुलिस थाने में अपने साथ हुए गैंगरेप का मामला दर्ज कराया. पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जब वारदात की जगह के पास लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तो हैरान रह गए.

सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि 3 युवक रात में बाइक से आए और महिला के साथ गैंगरेप कर निकल गए. पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच में जुट गई है. फिलहाल इस मामले में अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है.

दिल्ली-एनसीआर वाले हो रहे हैं नपुंसक

नई दिल्ली। प्रदूषण सिर्फ सांस और फेफड़े की बीमारी ही नहीं बढ़ा रहा है बल्कि यह कई स्तरों पर लोगों की जिंदगी को तबाह करने लगा है. बढ़ता प्रदूषण पुरुषों को नपुंसक और औरतों को बांझ बना रहा है. इस भयंकर प्रदूषण की वजह से पुरुषों में लगातार स्पर्म की संख्या कम हो रही है. स्थिति कितनी भयंकर है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक साल में 5000 पुरुष अपने फर्टिलिटी का इलाज कराने डॉक्टर के पास पहुंचे हैं. शोध के मुताबिक 10 साल पहले दिल्ली में पुरुषों में 60 से 80 मिलियन तक स्पर्म काउंट होता था जो अब घट कर 20 से 35 मिलियन तक रह गया है. सामान्य तौर पर पुरुषों में 50 मिलियन स्पर्म काउंट होना चाहिए. इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. अरविंद वैद के मुताबिक प्रदूषण के संपर्क में आने से शरीर तनाव महसूस करता है. इससे स्पर्म पर भी सीधा असर पड़ता है. वैद के मुताबिक दिल्ली में हर महीने 500 मरीज फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या के लिए आ रहे हैं. गौरतलब है कि स्पर्म मोर्टेलिटी रेट औसतन 40-50 प्रतिशत माना जाता है. दिल्ली में यह 20 प्रतिशत पाया गया. उनमें स्पर्म की गतिशीलता में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी पाई जा रही है. स्पर्म के आकार और गतिशीलता पर असर पड़ने से पुरुषों में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस अचानक बढ़ जाता है और डीएनए भी डैमेज होने लगता है, जिसससे उनकी फर्टिलिटी पर काफी बुरा असर पड़ता है.