यमन में सुरक्षाबलों ने मार गिराए 11 आतंकी

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यमन

अदेन। यमन के दक्षिणपूर्वी प्रांत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा समर्थित यमन के सुरक्षाबलों द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियानों में शुक्रवार को अलकायदा के 11 आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया. सूत्र ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, “यूएई सैन्यकर्मियों द्वारा समर्थित आतंकवाद रोधी जवानों ने आतंकवादियों के कब्जे से कुछ क्षेत्रों को छुड़ाने और हवाता के शाब्वा गांव में स्थिरता बहाल करने के लिए संगठित अभियान शुरू किए.”

सूत्र के मुताबिक, आतंकवादियों से लोहा लेते हुए यूएई समर्थित यमनी की सेना के नेता कर्नल अली बुहार और 10 जवान घायल हो गए. एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि सभी घायल सैनिकों को पड़ोस के हाद्रामाउंट में इलाज के लिए यूएई के हेलीकॉप्टर के जरिए भेजा गया.

सऊदी अरब नीत गठबंधन ने यमन में विद्रोहियों के कब्जे वाली राजधानी सना में रक्षा मंत्रालय पर आज तड़के दो हवाई हमले किए. प्रत्यक्षदर्शियों और विद्रोही मीडिया ने बताया कि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हवाई हमले के बाद भी सना के ऊपर युद्धक विमान चक्कर लगाते रहे.

हुती विद्रोहियों के मीडिया संगठन अल-मसीरा ने भी दो हवाई हमलों की खबर दी है. खबर में किसी के हताहत होने के बारे में नहीं बताया गया है. सऊदी नीत गठबंधन ने पहले भी रक्षा मंत्रालय पर हमले करके इसे भारी क्षति पहुंचाई थी लेकिन यह ताजा हमला सऊदी अरब और हुती विद्रोहियों का समर्थन करने वाले ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच हुआ है.

BPSC ने निकाली 1 हजार से ज्यादा पदों पर वैकेंसी, जल्द करें आवेदन

Bihar Public Service Commission ने Assistant Engineer के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इन पदों के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 6 दिसंबर, 2017 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन से जुड़ी जानकारियां नीचे दी गई हैं. संस्थान का नाम Bihar Public Service Commission पदों के नाम Assistant Engineer पदों की संख्या नोटिफिकेशन के अनुसार कुल पदों की संख्या 1,345 हजार है. योग्यता उम्मीदवार ने किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग की डिग्री ली हो. चयन प्रक्रिया उम्मीदवारों का चयन प्रीलिमरी टेस्ट, मेन टेस्ट और इंटरव्यू के आधार पर होगा. पे-स्केल 9, 300 से 34, 800 रुपये लोकेशन बिहार महत्वपूर्ण तारीख आवेदन करने की अंतिम तारीख 6 दिसंबर, 2017 है. उम्मीदवार शाम 5 बजे से पहले आवेदन कर सकते हैं. कैसे करें आवेदन उम्मीदवार अपने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स नीचे दिए पते पर भेज सकते हैं. Joint Secretary-Cum-Examination Controller, Bihar Public Service Commission 15, Jawahar Lal Nehru Marg (Baily Road), Patna-800001 उम्मीदवार वैकेंसी से संबंधित जानकारी आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाकर देख सकते हैं.

फारूक अब्दुल्ला का विवादित बयान, कहा- पाकिस्तान का है POK

पाकिस्तान

श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) पाकिस्तान का हिस्सा है और उसे पाकिस्तान से कोई छीन नहीं सकता. उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि कश्मीर का जो हिस्सा भारत के पास है, वह भारत का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी जंग क्यों न हो जाए, ये नहीं बदलने वाला है.

अब्दुल्ला ने मांग की कि दोनों ही देशों में कश्मीर की जनता को स्वायत्तता दी जानी चाहिए. फारूक ने कहा कि आजादी की मांग बेइमानी है. कश्मीर चारों तरफ से जमीन और परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्रों से घिरा है. इसलिए आजादी की मांग उचित नहीं है.

फारूक ने केंद्र सरकार के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा की बातचीत पर कहा, ‘मैं इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं कर सकता हूं. उन्होंने बातचीत की है लेकिन केवल बातचीत समाधान नहीं है. यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच का है. भारत सरकार को पाकिस्तान की सरकार के साथ बातचीत करनी चाहिए क्योंकि कश्मीर का एक हिस्सा उनके पास भी है.’

कांफ्रेंस नेता ने कहा, ‘पाकिस्तान के एक मंत्री ने बिल्कुल ठीक कहा है कि आप उस हिस्से को भूल गए हो जो पाकिस्तान के पास है.’ नैशनल कांफ्रेंस नेता ने कहा कि यदि आप अपने हिस्से की बात करते हो तो दूसरे का भी ध्यान रखना चाहिए.

फारूक ने कहा कि अगर कश्मीर में भारत सरकार अमन चैन चाहती है तो उसे पाकिस्तान के साथ भी बातचीत करनी होगी. इसमें कश्मीर के दोनों ही हिस्सों को स्वायत्तता देनी होगी. बता दें कि फारूक अबदुल्ला के विपरीत भारत सरकार का मानना है कि पाक अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है.

13 नवंबर से नहीं लागू होगा ऑड-ईवन

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नई दिल्ली। दिल्ली में सोमवार से ऑड-ईवन लागू नहीं होगा. दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने ऑड-ईवन लागू करने का अपना फैसला वापस ले लिया है. ये फैसला आज दोपहर तीन बजे हुई एक बैठक में लिया गया. सरकार अब सोमवार को दोबारा एनजीटी जाएगी और उसके बाद ऑड-ईवन लागू करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.

दिल्ली के परिवहन मंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि एनजीटी द्वारा ऑड-ईवन से महिलाओं और दोपहिया वाहनों को छूट ना दिए जाने के कारण ऑड-ईवन लागू करने का फैसला वापिस लिया गया है. इसके खिलाफ हम सोमवार को फिर एनजीटी के समक्ष जाकर रिव्यू याचिका लगाएंगे.

दरअसल, एनजीटी ने आज सरकार के ऑड-ईवन फैसले को हरी झंडी देते हुए उसमें कुछ शर्तों को जोड़ दिया था. जिसमें सबसे अहम ये था कि दिल्ली सरकार ने दोपहिया वाहनों को जो छूट दी थी उसे एनजीटी ने अपने फैसले में खारिज कर दिया. एनजीटी के इस आदेश के बाद ही दिल्ली सरकार में हडकंप मच गया, क्योंकि बिना किसी छूट के ऑड-ईवन को लागू करने पर लोगों के सामने भारी समस्याएं आने की आशंका थी.

बता दें कि शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने दिल्ली सरकार की दलीलें सुनने के बाद इसे मंजूरी दी है. इसके साथ ही एनजीटी ने शर्त रखी की ऑड ईवन स्कीम से दोपहिया वाहनों के अलावा महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों को भी राहत नहीं दी जाएगी. मतलब अब इन्हें भी फॉर्मूले के हिसाब से ही घर से निकलना होगा. बता दें कि राजधानी में 66 लाख दोपहिया वाहन हैं. एनजीटी ने अपने फैसले से वीआईपी लोगों को भी बाहर नहीं रखा है लेकिन इमरजेंसी वाहनों को इससे छूट दी गई है. साथ ही दिल्ली सरकार को राजधानी में पार्किंग शुल्क 4 गुना तक करने पर विचार करने के लिए भी कहा है.

हिमाचल में शराब बांट रही थी भाजपा, पत्रकार ने कैमरे में कैद किया तो भाजपाईयों ने जम कर पीटा

हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश में चुनाव हो चुका है. रिजल्ट भी तय तारीख पर निकल जाएगा. लेकिन इस दौरान वहां एक पत्रकार के साथ जो भी हुआ, वह लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है. हिमाचल का चुनाव कवर करने गए एक पत्रकार के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने जो किया, उसने एक बार फिर पार्टी विद डिफरेंट की हकीकत खोल कर रख दी है. पत्रकार से खुद सुनिए उसकी कहानी… शायद मैं हिमाचल अब कभी न जाऊं… हम और हमारी टीम लगातार पिछलें एक महीने से डीपीआर से आज्ञा लेकर चुनावी कवरेज पर थे. सब कुछ अच्छा जा रहा था हिमाचल को बेहद करीब से देखा, जैसा सुना वैसा लगा भी. पर शायद मैं किसी भ्रम में ही था, या शायद कोई बुरा सपना जो परसों रात टूट गया. हम पौंटा साहिब में राहुल की रैली कवर कर के नाहन के लिए निकलें क्योंकि वहां सीएम राजा वीरभद्र की रैली थी. बहुत अच्छा जा रहा था और हम निकलने वाले थे कि स्थानीय लोगों से पता चला यहां रात को शराब बंटती हैं. एक गजब की स्टोरी हमारे सामने थी और हमने सुबह से उस स्टोरी पर काम करना शुरू भी कर दिया था. चूंकि हम बाहरी थे तो हमारे चैनल को वहां के रिपोर्टर का साथ चाहिए था, जो कि मिला भी. दिन में मैं हरियाणा के कुछ मंत्री और एमएलए से मिला, जिनकी मैंने बाईट भी ली. चुनावी माहौल पर चर्चा भी की. पर हमें वहां कुछ ऐसा नहीं लगा जो सूत्रों से पता लगता. मेरे जीवन की सबसे काली रात में से एक थी 7 नवम्बर की रात. शाम 5 बजे तक प्रचार थमने वाला था, जैसे शाम हुई वाकई सरेआम चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई जा रही थी. भाजपा कार्यालय में शराब का बांटी जा रही थी. ग्रामीणों को एक पर्ची दी जा रही थी जो किसी निजी होटल में दिखा शराब लें सकतें थे. मैं और मेरे सर चंद्र मौली शर्मा ने जैसे पूरा माहौल देखा और कुछ हिला देने वाले विजुअल हमारे हाथ लगें तो हम भी हिल गयें कि शराब की इतनी खेप. हमारे हाथ इतना मैटिरियल लग चुका था की हम चैनल पर चला सकें. उसके साथ हमें नाहन से भाजपा प्रत्याशी का पक्ष भी जानना था तो हमने स्थानीय पत्रकार को कॉल की, पर उस समय वो बाहर थे तो हमने भाजपा के मीडिया सलाहकार से समय मांगा की एक बाईट चाहिए तो भाजपा प्रत्याशी ने हमारी टीम को ऑफिस में बाईट लेने का समय दिया. जैसे ही हमने बिंदल जी को बाहर ही पार्टी के ऑफिस के बाहर बाईट लेनी चाही और बताया की आपके यहां के कुछ दृश्य भी हाथ लगें हैं तो भाजपा प्रत्याशी वहां से निकल पड़े और उनके जाने के करीब 2-3 मिनट बाद सभी पार्टी कार्यकर्ता हम पर टूट पड़े. #Mob_lynching को आज तक सिर्फ टीवी पर देखा था. शिकार पहली बार हुए थे. जैसे ही हमारे साथ छीना-झपटी हुई तो उन्होंने सबसे पहले मेरा कैमरा छीना और मुझे अंदर खिंचने लगे. जैसे ही मेरे सर चंद्र मौली जी बीच बचाव को आयें तो उनको वे भाजपा कार्यालय में ले जा रहें थे, तभी सर ने कहा भाग और SP को फोन करो… मैंने जैसे फोन किया पुलिस 1 घंटे बाद आकर उल्टा हमें ही थाने ले जाती है. गुन्नूघाट (नाहन) के थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह थाने ले जाकर कहते हैं, “तुम साले पत्रकार हो जुत्ती खाने लायक” और भी न जानें क्या-क्या कहा.. मेडिकल में जान बुझ कर रात से अगले दिन की शाम करना, ताकि बिना मेडिकल के बात रुक जाये.. सहन बहुत किया पर कुछ स्थानीय पत्रकारों की वज़ह से बहुत सहायता हुई. सर का फोन नही था सिर्फ मेरा फोन था. किस-किस प्रकार का दबाव झेला, एफआईआर वापिस लेने के लिए फोन पर फोन… मैं टूट चुका था, पर सर की हिम्मत से संघी और भाजपा के गुंडों से लड़ाई जारी है… जो सहा सब लिखना चाहता हूं पर हिम्मत नहीं है अब… गौरव सगवाल की फेसबुक वॉल से साभार

गुजरात के इस मुख्यमंत्री की पाकिस्तानी फाइटर ने की थी हत्या

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नई दिल्ली। कांग्रेस द्वारा ट्विटर पर करवाए गए एक सर्वे के बाद गुजरात के एक पूर्व मुख्यमंत्री की हत्या का मामला फिर से चर्चा में आ गया है. दरअसल गुजरात विधानसभा चुनाव की सरगरर्मियों के बीच कांग्रेस ने ट्विटर पर एक सर्वे कराया जिसमें जानने की कोशिश की गई कि किस मुख्यमंत्री को पंचायती राज का चैंपियन माना जाना चाहिए? इसके लिए 4 नाम यूजर्स के सामने रखे गए, जिनमें आनंदी बेन पटेल, केशुभाई पटेल, बलवंत राय मेहता और नरेंद्र मोदी का नाम शामिल है.

रिजल्ट बलवंत राय मेहता के पक्ष में आया क्योंकि उन्होंने पंचायती राज की जड़े मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी. बलवंत राय मेहता का नाम सामने आते ही उनके जीवन से जुड़े रहस्य भी सामने आने लगे. इनमें से एक उनकी हत्या से जुड़ा हुआ है. बलवंत राय मेहता को पाकिस्तान ने हवाई हमले में मारा था. सितंबर 1995 में पाकिस्तान के फाइटर जेट ने मेहता के प्लेन को अपना निशाना बनाया था. हादसा कच्छ के रण में हुआ था. उस समय मेहता बीचक्राफ्ट नाम के प्लेन में अपनी पत्नी, 3 स्टाफ मेंबर, एक पत्रकार और 2 क्रू मेंबर्स के साथ थे.

उस वक्त भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का माहौल गर्म था और पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देने की हर कोशिश में जुटा था. सूत्रों की माने तो मेहता के कच्छ बॉर्डर पर जाने से पहले उन्हें मीठापुर में रोका गया था. इस बीच जब मेहता का प्लेन मीठापुर से निकला तो पाकिस्तानी पायलेट कैश हुसैन ने उनके प्लेन को अपना निशाना बनाया.

रिपोर्ट्स की मानें तो उस समय पायलट हुसैन (25 साल) ने करीब 3000फुट की ऊंचाई पर ही मेहता के प्लेन पर हमला किया था. ये वही वक्त था जब हुसैन पाकिस्तानी आर्मी की तरफ से हमले की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहा था. जब हुसैन हमला करने जा रहा था उस समय मेहता के पायलट ने हवा में प्लेन की विंग्स हिलाकर दया मांगी थी. लेकिन हुसैन ने ऑर्डर मिलने के बाद मेहता के प्लेन पर हमला कर दिया.

तेजस्वी की ताजपोशी से जुड़े सवाल

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने यह घोषणा कर दी है कि बिहार में होने वाला आगामी विधानसभा चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. हालांकि इस घोषणा को औपचारिक ही कहा जाएगा, क्योंकि जिस दिन तेजस्वी गठबंधन सरकार में उपमुख्यमंत्री बने थे, तभी यह तय हो गया था कि राजद का चेहरा तेजस्वी ही होंगे. इसमें अच्छी बात यह रही कि तेजस्वी के नाम पर पार्टी के भीतर और यहां तक की उनके बड़े भाई तेजप्रताप ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई. जाहिर है कि यह लालू यादव और राबड़ी देवी के पार्टी और परिवार को बांध कर रखने की क्षमता दिखाता है. यहां सवाल यह नहीं है कि तेजस्वी योग्य हैं या नहीं, क्योंकि उपमुख्यमंत्री रहने के दौरान और उसके बाद भी तेजस्वी ने जिस तरह से एक सधे हुए नेता की तरह काम किया है, वह काबिले-तारीफ है. इस दौरान सबसे अच्छी बात यह रही कि तेजस्वी आज की राजनीति करते दिखे. कब क्या कहना है, तेजस्वी को इसकी समझ है. अगर वो इसके लिए किसी का सहारा भी लेते हैं तो भी यह कहा जा सकता है कि तेजस्वी ने अच्छी टीम चुनी है. इसलिए यहां सवाल यह है कि लालू यादव ने तेजस्वी के नाम की घोषणा अभी क्यों की? क्या लालू यादव थक चुके हैं, या फिर उन्होंने हार मान ली है और आगे की राजनीति नहीं करना चाहते हैं. या फिर कहीं चारा घोटाले को लेकर सीबीआई के बढ़ रहे शिकंजे के बीच लालू यादव को अपना बचना मुमकिन नहीं लग रहा है? वजह शायद सीबीआई जांच हो सकती है. पहले चारा घोटाला मामले में फंसे होने के बावजूद लालू थके हुए नहीं दिखते थे. वह लगातार संघर्ष करते और विरोधियों को चुनौती देते दिखते थे. विरोधियों को चुनौती का सिलसिला अब भी कायम है, लेकिन लालू के तेवर पहले वाले नहीं हैं. तो क्या कहीं लालू यादव को यह तो नहीं लगने लगा है कि अब चारा घोटाले की सीबीआई जांच का नतीजा आने वाला है. अगर इसकी संभावना थोड़ी सी भी है तो संभव है कि लालू यादव पार्टी के भीतर विरोध या फिर किसी आपात स्थिति को लेकर डर गए हों, जैसा कि इससे पहले इस तरह की स्थिति में लालू यादव ने रातों रात राबड़ी देवी को रसोई घर से निकाल कर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा दिया था. अपने उत्तराधिकारी के तौर पर तेजस्वी की ताजपोशी कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है.

10 सालों से बिना घर के हैं 200 दलित परिवार

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सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो कि वो लोगों की बुनियादी जरुरतों को तो पूरा कर ही दे रही है. लेकिन देश में आज भी कई दलित परिवार ऐसे हैं जिनके सिर पर छत नसीब नहीं हुई है. हम बात कर रहे हैं जम्मू के हीरानगर की जहां पर 200 दलित परिवारों को कोर्ट के आदेश के बावजूद भी आज तक आशियाना हासिल नहीं हुआ है.

दरअसल 1965 में राज्य सरकार ने कठुआ जिले के 350 भूमिहीन दलित परिवारों को बसाने के लिए भूमि मुहैया करवाने की घोषणा की थी, जिसमें 150 परिवारों का घर तो बसा दिया गया, लेकिन हीरानगर के 200 भूमिहीन दलित परिवारों के सर पर आज तक छत मयस्सर नहीं हो पाई है.

इस बाबत पिछले एक दशक से दलित परिवार सरकारी बाबूओं के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं. लेकिन इनके कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है. लोगों का मानना है कि जिस भूमि को सरकार ने उनके लिए आंवटित किया है उस पर भू माफिया कुंडली मारे बैठे हैं और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है.

डीडीसीए में अपनी नई पारी शुरु करने की तैयारी मे हैं गंभीर

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की उम्मीदों के बीच टेस्ट सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर को दिल्ली क्रिकेट में नई जिम्मेदारी मिली है. गंभीर दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ की प्रबंध समिति में सरकार के प्रतिनिधि होंगे. अपनी इस नई भूमिका को लेकर गौतम काफी गंभीर दिखे और उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह विवादों से घिरे संघ का पुराना वैभव लौटाने के लिए अपनी ओर से पूरा प्रयास करेंगे.

दिल्ली के दिग्गज और मौजूदा क्रिकेटर गंभीर ने खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को ट्विटर पर धन्यवाद दिया. उन्होंने लिखा ,‘‘फिरोजशाह कोटला पर फील्ड में बदलाव का मौका मिला. अब डीडीसीए में बदलाव का समय है. इसका खोया गौरव लौटाना है. डीडीसीए की प्रबंध समिति में सरकारी प्रतिनिधि बनकर गौरवान्वित हूं. धन्यवाद राज्यवर्धन सिंह राठौर.’’

गंभीर ने भारत के लिये 58 टेस्ट, 147 वनडे और 37 टी20 मैच खेले हैं. साल की शुरुआत में गंभीर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच के लिए टीम में चुना गया था लेकिन वापसी के बाद एक फिर उन्हें टीम से बाहर कर दिय गया. बल्लेबाजी पर ध्यान देने के लिए गंभीर ने रणजी सीजन 2017-18 के शुरु होने से पहले दिल्ली की कप्तानी छोड़ दी थी.

दलितों पर अत्याचार नहीं रोक पा रही बीजेपी सरकार

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मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार यानि बीजेपी सरकार में दलितों के उपर अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है. यहां एक बार फिर मनुवादियों ने दलितों के उपर जुल्म ढाया है. दरअसल टीकमगढ़ के सुजानपुरा में मनुवादियों ने एक दलित परिवार पर लाठी डंडों से जमकर कहर बरपाया है. इस हमले में एक महिला समेत चार लोग गंभीर रुप से घायल हो गए हैं.

पीड़ित दलित परिवार के लोगों का कहना है. गांव के मनुवादी उनके परिवार के लोगों का रास्ता अक्सर रोक दिया करते हैं. जिस वजह से उनलोगों को आने जाने में काफी परेशानी होती है. साथ ही दलित परिवारों का ये कहना है कि वे लोग इस बात की शिकायत थाने में कई बार कर चुके हैं लेकिन पुलिस के कानों पर कोई असर नहीं हुआ है.

लेकिन इस घटना के बाद जब पुलिस को ये महसूस हुआ कि बात अब उपर तक पहुंचने वाली है तब उसने आनन फानन में मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की बात की. इधर सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती किया गया है. जहां पर उनलोगों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है.

मुंबई में शुरू हुईं इलेक्ट्रॉनिक बसें

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इलेक्ट्रॉनिक बैटरी से चार्ज होने वाली बसें शुक्रवार से मुंबई की सड़कों पर दौड़ना शुरू हो गईं. लगातार घाटे में चल रही बेस्ट बसों को फायदे में लाने और उन पर हो रहे अधिक खर्च से बचने के लिए बेस्ट ने अब इलेक्ट्रॉनिक बसों का सहारा लिया है. ये बसें करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से मुंबई की सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी.

इन बसों में लीथियम आयन बैटरी लगी है, जिसे एक बार चार्ज करने पर बस 200 किमी तक चल सकती है. शुरू में 4 बसों को टेस्टिंग के तौर पर मुंबई की सड़कों पर उतारा गया है. एक बस की कीमत करीब 1.67 करोड़ रुपए है यानि करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर इन बसों को सड़क पर उतारा गया है.

इन ई-बसों को चलाने पर प्रति किलोमीटर का खर्च सीएनजी के मुकाबले 46 प्रतिशत कम तथा डीजल के मुकाबले 60 प्रतिशत कम आएगा. सीएनजी बसों को चलाने में जहां 15 रुपये प्रति घंटा लगता है, डीजल बसों को चलाने में प्रति किलोमीटर 20 रुपये का खर्च आता है, तो वहीं इलेक्ट्रिक बसों को चलाने में प्रति किलोमीटर 8 रुपये का खर्च आएगा. इन बसों में 31 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है. और हर बड़े डिपो में इन बसों का चार्जर लगाया गया है जहां पर इन बसों को चार्ज किया जा सकता है.

दलित रसोइयां के हाथ से बना मिड-डे-मील नहीं खा रहे बच्चे

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छ्त्तीसगढ़

गरियाबंद। देश में जातिवादी मानसिकता का बीज इस कदर बोया जा रहा है कि नादान बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं. कुछ इस तरह का मामला छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से आया है. जहां आंगनवाड़ी के बच्चे दलित महिला रसोइयां के हाथ से बना खाना खाने से मना कर रहे हैं. इस कारण आंगनवाड़ी में अब भोजन बनाना बंद कर दिया गया है. यहां अब बच्चों को सिर्फ गुड़ और चना दिया जा रहा है.

दरअसल, गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक स्थित ध्रुवापारा के आंगनवाड़ी केंद्र में एक दलित महिला के हाथ से पका भोजन बच्‍चे नहीं खा रहे हैं. दलित महिला के हाथ से पका भोजन नहीं खाने की जानकारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने महिला बाल विकास विभाग को भी दी है. लेकिन अब तक विभाग ने न तो कोई पहल की है और न ही कोई कार्रवाई. इसके चलते यहां आज भी गर्म भोजन के बजाय बच्‍चों को चना और गुड़ खिलाकर उनका कुपोषण दूर करने का प्रयास किया जा रहा है.

शुरुआती दौर में आंगनवाड़ी केंद्र में पदस्‍थ सहायिका ने भोजन बनाकर बच्चों को खिलाने की कोशिश की तो बच्चे भोजन को खाने के बजाय फेंक देते थे. उसने एक सप्ताह तक भोजन बनाया लेकिन बच्चों ने खाने से मना कर दिया. इस पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कल्याणी सिन्हा और सहायिका ने एक महिला को पैसे देकर भोजन बनवाना शुरू किया लेकिन उन्‍हें इसके लिए अपने पास से भुगतान करना पड़ता था. लिहाजा कुछ समय बाद यह व्‍यवस्‍था भी बंद कर दी गई‍. अब बच्चों को चना और गुड़ दिया जा रहा है.

ऑड-इवन में दोपहिया वाहनों पर भी लगेगी ब्रेक!

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानि एनजीटी ने केजरीवाल सरकार के ऑड-इवन फार्मूले पर पेंच फंसा दिया है. ऑड इवन पर अपना फैसला सुनाते हुए एनजीटी ने कहा कि वह ऑड-इवन को मंजूरी देने को को तैयार है. लेकिन एनजीटी ने इसमें पेंच फंसा दिया. एनजीटी ने इस स्कीम में दोपहिया वाहनों को भी शामिल करने को कहा है. एनजीटी के इस फैसले के बाद केजरीवाल सरकार मुसीबत में पड़ सकती है. वैसे बिना एनजीटी को भरोसे में लिए ऑड-इनव की घोषणा करने से नाराज यह संस्था पहले से ही केजरीवाल सरकार से नाराज थी. एनजीटी की नाराजगी इस वजह से थी कि उसकी सुनवाई से पहले केजरीवाल ने ऑड इवन पर फैसला ले लिया. एनजीटी ने इस बात पर विरोध भी जताया था. उसका तर्क था कि जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि प्रदूषण का स्तर पिछले कुछ दिनों में कितना घटा या बढ़ा है, तब तक ऑड इवन की घोषणा जरूरी नहीं थी. उसने केजरीवाल द्वारा ऑड इवन में दिए गए तमाम छूटों पर भी आपत्ति जताई थी. अब एनजीटी के इस फैसले के बाद सरकार और एनजीटी के बीच शीतयुद्ध शुरू हो सकता है.

योग सिखाने वाली मुस्लिम टीचर के घर पर हुआ पथराव

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राफिया नाज

रांची। योगा सिखाने वाली प्रसिद्ध मुस्लिम योगा टीचर राफिया नाज़ के खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने फतवा जारी कर दिया है. फतवे के बाद से राफिया को उनके ही समुदाय के लोग उन्हें जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं. प्रशासन ने उनको सुरक्षा तो मुहैया करवाई है लेकिन इस बीच कुछ लोगों ने उनके घर पर पथराव कर दिया. जिसके बाद से उन्हें और कड़ी सुरक्षा के बीच रहना पड़ रहा है.

धमकी और पथराव की शिकायत राफिया ने पुलिस उपाधीक्षक विकासचंद्र श्रीवास्तव से की है. श्रीवास्तव ने कहा कि शुक्रवार को एक टीवी चैनल पर उनका साक्षात्कार दिखाए जाने के बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने उनके घर पर पत्थर फेंके. इसके बाद खुद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उनके घर का दौरा कर उनसे और उनके परिजनों से मुलाकात की और उन्हें पूरी सुरक्षा का आश्वासन दिया. पुलिस मामले की जांच कर रही है. पुलिस ने पूछताछ के लिए कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है.

दरअसल, राफिया नाज योग टीचर हैं और वह रांची के निवारणपुर स्थित आदिम जाति सेवा मंडल के आश्रम में पहली से 10वीं कक्षा तक के बच्चों को योग सिखाती हैं. डोरंडा इलाके की रहने वाली राफिया नाज़ योग सिखाकर अपनी आजीविका चलाती हैं. योग सिखाना जारी रखने पर उन्हें फतवे के जरिये धमकाया गया है. वह अपने घर में बच्चों में सबसे बड़ी हैं और एक स्थानीय कॉलेज से एम.कॉम कर रही हैं. 2015 में योग गुरु रामदेव के साथ मंच साझा करने के बाद नाज चर्चा में आई थीं.

करियर की संतुष्टि को आत्महत्या मानते हैं इरफान

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नई दिल्‍ली। लीक से हटकर फिल्में करने के लिए मशहूर इरफान खान लगभग 30 वर्षो के करियर के बाद भी अपने करियर से संतुष्ट नहीं हैं. वह कहते हैं कि जिस दिन मैं अपने करियर से संतुष्ट हो गया, वो दिन मेरे लिए आत्महत्या जैसा होगा. इरफान हर फिल्म के साथ दर्शकों को कुछ नया देने की कोशिश करते हैं. इसी कड़ी में उनकी नई फिल्म ‘करीब करीब सिंगल’ में उनकी रोमांटिक साइड खूब भा रही है. इरफान ने आईएएनएस को दिए इंटरव्‍यू में अपने इस रोमांटिक अंदाज के बारे में बताया. उन्होंने कहा, “मैं इमेज में बंधकर नहीं रहना चाहता, जिस दिन लोगों ने मुझे इमेज में बांधना शुरू कर दिया, उस दिन ही मेरे लिए खतरा शुरू हो जाएगा. इसलिए कोशिश होती है कि मैं हर दूसरी फिल्म में अपनी पुरानी इमेज तोड़ दूं.”

‘करीब करीब सिंगल’ सीधे यूथ को टारगेट करती फिल्म है. आज का युवा प्यार ढूंढते-ढूंढते ऑनलाइन पहुंच गया है और यही फिल्म में भी दिखाया गया है. इरफान ऑनलाइन डेटिंग एप के बारे में बताते हैं, “आज के युवाओं के पास कई विकल्प हैं. ऑनलाइन ही कई तरह की वेबसाइट और एप हैं. डेटिंग और वेडिंग एप से बहुत मदद मिल रही है, लोगों की ऑनलाइन शादियां भी हो रही हैं. हमारी फिल्म की कहानी इसी लव ट्रेंड को बयां करती है.” राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता इरफान के लिए इनाम कुछ खास मायने नहीं रखते. वह इनाम की तुलना में दर्शकों की संतुष्टि को तरजीह देते हैं.

इरफान में नीरस और बेदम फिल्म में भी जान फूंकने का हुनर है. वह चाहते हैं कि आज से 30 या 40 साल बाद लोग उन्हें उनके अभिनय की वजह से याद करें. हॉलीवुड में भी अपने काम का डंका बजा चुके इरफान का कहना है, “एक कलाकार के लिए सबसे अधिक मायने यह रखता है कि उसकी कला को पहचान मिले. मैं चाहता हूं कि मुझे लोग मेरे काम की वजह से जानें और इसी कोशिश में ताउम्र काम करता रहूंगा.”

 

सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी में मांसाहारी छात्रों को नहीं मिलेगा गोल्ड मेडल!

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पुणे। पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय अपने सर्कुलर की वजह से चर्चा में है. पुणे विश्वविद्यालय के इस सर्कुलर के अनुसार अब विद्यार्थियों को शाकाहारी होने या ना होने के आधार पर गोल्ड मेडल दिया जाएगा. विश्वविद्यालय की ओर से गोल्ड मेडल पाने की शर्तों में शाकाहारी होना, भारतीय संस्कृति का समर्थक होना आदि शामिल है.

सर्कुलर के अनुसार 10 ऐसी शर्तें तय की गई हैं जो महर्षि कीर्तंकर शेलार गोल्ड मेडल के लिए पात्रता तय करते हैं. इनमें शाकाहारी होने की शर्त भी शामिल है. साथ ही इन शर्तों में नशा ना करना, योग, प्राणायाम करना आदि भी शामिल है. इस साल यह सर्कुलर 31 अक्टूबर को फिर से जारी किया गया है. हालांकि छात्र संगठन इसका विरोध कर रहे हैं.

बता दें कि यह मेडल योग महर्षि रामचंद्र गोपाल शेलार और त्यागमूर्ति श्रीमति सरस्वती रामचंद्र शेलार के नाम पर योग गुरु ट्रस्ट द्वारा दिया जाता है. साथ ही यह मेडल साइंस और नॉन साइंस के पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स को दिया जाता है. हालांकि यूनिवर्सिटी का कहना है कि उन्होंने यह शर्तें तय नहीं की है और ट्रस्ट के सामने इस मामले को उठाया जाएगा. पुणे यूनिवर्सिटी की ओर से किया गया एक फैसला आगे चलकर विवाद का विषय बन सकता है.

यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल उन लोगों को देने की वकालत कर रही है जो शाकाहारी हैं और शराब नहीं पीते हैं. पुणे की सावित्रीबाई फूले पुणे यूनिवर्सिटी (एसपीपीयू) की ओर से जारी आधिकारिक बयान को पढ़ने के बाद तो कम से कम यही लगता है.