हैदराबाद विश्वविद्यालय में फिर मचा बवाल

हैदराबाद

विश्वविद्यालय का काम है छात्रों को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना और उनके सवालों के जवाब ढूंढना. लेकिन हैदराबाद विश्वविद्यालय सवालों के जवाब दमन से देना जानता है. एक छात्रा अस्वस्थ महसूस करने पर अपने निकटतम मित्र से मिलने हॉस्टल के उसके कमरे पर आई. तभी प्रशासन ने ‘छापा मारा.’ छापे के बाद लड़के को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. “आपके कमरे में एक महिला पाई गई. जवाब दीजिए कि हॉस्टल नियमों के इस उल्लंघन के कारण आपके ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों न की जाए.”

लड़के ने अपने जवाब में इस भाषा पर सख़्त आपत्ति जाहिर की. महिला पाई गई का क्या मतलब? वह कोई आपत्तिजनक सामान है, कोई प्रतिबंधित पदार्थ है, कोई अवैध हथियार है? विश्वविद्यालय अपनी छात्रा के सम्बंध में ऐसी भाषा कैसे लिख सकता है? स्त्री के प्रति ऐसी भाषा अशालीन होने के अलावा अमानवीय भी है.

छात्र ने हॉस्टल नियमों के बेतुकेपन के बारे में भी गम्भीर सवाल उठाए. उसी कैम्पस में विदेशी छात्रों के हॉस्टल में लड़कियां बेरोकटोक आ जा सकती हैं तो केवल भारतीय छात्राओं को अपने मित्रों से मिलने पर रोक क्यों है? क्या विश्वविद्यालय को भारतीय छात्र छात्राओं के चरित्र पर सन्देह है? क्या भारतीय संस्कृति की दृढ़ता पर उसे भरोसा नहीं है, जबकि विदेशी संस्कृति पर है?

ये गम्भीर सवाल हैं. विश्वविद्यालय को जवाब देना चाहिए था. लेकिन उसने उठाकर जवाब मांग रहे दस छात्रों को सस्पेंड कर दिया. अब पूरा कैम्पस मिल कर जवाब मांग रहा है. सवालों से निपटने का यह तरीका नहीं है. जवाब दीजिए. बहस कीजिए. सवाल पूछने वालों को निरुत्तर कीजिए. यह कारण बताओ नोटिस, सस्पेंसन, पुलिस कार्रवाई यह कोई तरीका नहीं है. आज छात्र पूछ रहे हैं. कल सारा देश पूछेगा.

आशुतोष कुमार की फेसबुक वॉल से साभार

कर्ज में फंसी कंपनियों पर भारी पड़ा आयकर विभाग का रुख

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नई दिल्ली। आयकर विभाग का रुख कर्ज में फंसी कंपनियों पर भारी पड़ सकता है. इन कंपनियों पर देश के बैंकों और वित्तीय कंपनियों के भारी कर्ज हैं और वे भुगतान न कर पाने के कारण इस समय राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट में फंसी हुई हैं. अब अगर बैंक इन संपत्तियों को कम कीमत पर बेचते हैं तो आयकर विभाग नए मालिक से इन संपत्तियों की वास्तविक कीमत के आधार पर कर वसूल सकता है.

बोलीदाताओं, निजी इक्विटी कंपनियों और वकीलों का कहना है कि पुराने बीमार औद्योगिक कंपनी कानून (एसआईसीए) में रुग्ण कंपनियों को आयकर से छूट मिली हुई थी लेकिन नए दिवालिया कानून के तहत इन कंपनियों को कर में कोई छूट नहीं है. इससे संभावित बोलीदाता कर्ज में फंसी इन संपत्तियों का मूल्यांकन कम कर सकते हैं. एक बोलीदाता ने बताया कि अगर किसी कंपनी पर 50,000 करोड़ रुपये का भारी भरकम कर्ज है और इस ऋण अधिग्रहण करने के लिए कोई 30,000 करोड़ रुपये की बोली लगाता है तो ऋण की बाकी राशि यानी 20,000 करोड़ रुपये कर्जदार कंपनी की आमदनी मानी जाएगी और इसे खरीदने वाले को आयकर या न्यूनतम वैकल्पिक कर देना होगा.

बोलीदाताओं ने कहा कि दिवालिया कानून में यह भी जरूरी है कि अगर कोई बोलीदाता पंचाट में पहुंची किसी कर्जदार कंपनी का अधिग्रहण करता है तो उसे प्रतिस्पस्‍पर्धा आयोग से भी इजाजत लेनी पड़ेगी. सूत्रों के अनुसार प्रतिस्‍पर्धा कानून से जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील को भी परेशानी हो सकती है. कंपनियां इस मसले को सरकार के समक्ष उठाएंगी.

रांची में स्थापित होगी 150 फीट ऊंची बिरसा मुंडा की प्रतिमा

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birsa munda

रांची। झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासियों के भगवान कहे वाले बिरसा मुंडा की 150 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी. जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ उलगुलान’ के नाम से जाना जाएगा. राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने 13 नवंबर को स्टैच्यू ऑफ उलगुलान के प्रारूप का अनावरण किया. बिरसा मुंडा की 150 फीट ऊंची प्रतिमा बुंडू में स्थापित होगी. उलगुलान फाउंडेशन ने अनावरण समारोह का आयोजन किया.

प्रतिमा को स्थापित करने के लिए बुंडू में निर्माण कार्य जल्द ही प्रारंभ किया जायेगा. फाउंडेशन के संरक्षक सुदेश कुमार महतो का कहना है कि हमारा प्रयास उलगुलान के महानायक भगवान बिरसा की गौरव गाथा तथा आन- बान-शान को देश-दुनिया के फलक पर स्थापित करना है.

फाउंडेशन के सचिव विकास कुमार मुंडा ने कहा कि हमारी कोशिश भगवान बिरसा के गौरवशाली इतिहास को लेकर एक लंबी लकीर खींचने की है, ताकि आनेवाले वक्त में कोई भी बिरसा मुंडा समेत अन्य अमर शहीदों के बलिदानों को छोटा साबित करने की हिमाकत नहीं कर सके़.

आदिवासी वीर योद्धा भगवान बिरसा मुंडा की 142वीं जयंती 15 नवंबर को है. जिसे जिले में अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाएगा. इसमें आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, वाद्य यंत्रों, वेशभूषा के साथ आदिवासी समाज के लोग एकत्रित होंगे. अभी तक आदिवासी योद्धाओं को इतिहास में जगह नहीं दी गई और न ही राष्ट्रीय स्तर पर सरकार द्वारा इनकी जयंतियां मनाई गई.

बिरसा मुंडा, टंट्या मामा, खाज्या नायक, राणा पूंजा भील, झलकारी बाई, तिलका मांझी, दलितों और पिछड़ा वर्ग में शिक्षा की अलख जगाने वाले ज्योतिबा फूले हो या उनके सहयोगी फातिमा सहित ऐसे कई क्रांतिकारियों को न इतिहास में जगह मिली और न ही उन्हें याद किया जाता है.

अभी किसी सियासी पारी का इरादा नहीं है- सहवाग

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मेरठ। टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने मेरठ में चल रहे जागरण क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में विजेता टीम को पुरस्कृत किया. इससे पहले वह दैनिक जागरण कार्यालय पहुंचे और क्रिकेट से जुड़े तमाम पहलुओं पर बातचीत की. शहर के कई स्कूलों के बच्चों ने भी सहवाग से सवाल किए. क्रिकेटर बनने की चाहत रखने वालों को सहवाग ने खेल और पढ़ाई में संतुलन का मंत्र दिया.

सहवाग से पूछा गया कि आप सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय रहते हैं. सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर आपकी राय सामने आती रहती है. क्या आगे सियासी पारी का कोई इरादा है? सहवाग का कहना था कि किसी भी मसले पर राय रखने की सोशल मीडिया से सहूलियत मिली है लेकिन, अभी किसी सियासी पारी का इरादा नहीं है. क्रिकेट पर हावी स्टार कल्चर और कोच से लेकर कमेंटेटर तक के निर्णय में कप्तान की भूमिका होने पर उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट में कप्तान का थोड़ा-बहुत प्रभाव हमेशा से था. अभी अगर मेरे कोच बनने वाली बात को लें तो कप्तान विराट कोहली ने मुझसे संपर्क किया. मैंने आवेदन किया, लेकिन मैं कोच नहीं बना. ऐसे में आप कैसे कह सकते हैं कि हर चीज में कप्तान की चलती है. उन्होंने कहा कि अगर कप्तान की चलती तो मैं कोच होता. हालांकि, उनकी इस बात पर यकीन करना इसलिए मुश्किल हो रहा है क्योंकि मौजूदा कोच रवि शास्त्री को विराट कोहली की पसंद माना जाता है. कहा जाता है कि कोहली की वजह से ही शास्त्री टीम के कोच हैं.

आत्मकथा के सवाल पर सहवाग ने कहा कि तमाम क्रिकेटर्स की जीवनी आ रही है. मैं भी इस बारे में सोच रहा हूं. अच्छे लेखक की तलाश है. हो सकता है कि जल्द ही इस बारे में आपको पता चले. अपनी बायोपिक के सवाल पर सहवाग ने कहा कि अभी न तो इस बारे में उनसे कोई संपर्क किया गया है और न ही उन्होंने भी इस बारे में उन्होंने कुछ सोचा है. मेरा मानना है कि पहलवान सुशील कुमार की बायोपिक आनी चाहिए. उनके संघर्ष को मैंने करीब से देखा है.

साभार- दैनिक जागरण

रूसी हमलों में कम से कम 50 लोगों की मौत

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सीरिया

बेरूत। सीरिया से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट को खदेड़ने के लिए रूसी अभियान जारी है. पूर्वी सीरिया में विस्थापित लोगों के लिये बनाये गये दो शिविरों एवं इसके आसपास के इलाके में गोलाबारी एवं रूसी बमबारी से दर्जनों नागरिकों की मौत हो गयी.

सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने आज कहा कि पिछले शुक्रवार की रात से दीर एजोर प्रांत में जारी भीषण बमबारी में 50 लोग मारे गए हैं, जिसमें 20 बच्चे शामिल हैं. उन्होंने बताया कि ब्रिटेन स्थित निगरानी संस्था की ओर से शनिवार को मृतकों का आंकड़ा 26 बताया गया था जो कि आज के आंकड़े की तुलना में लगभग आधा है.

बता दें कि बमबारी फरात नदी के करीब के इलाके को निशाना बनाकर की गयी. इसके साथ ही सीरिया के सीमावर्ती शहर अल्बु कमाल और विस्थापितों के गांवों और शिविरों को निशाना बनाया गया.

गौरतलब है कि अल्बु कमाल अंतिम महत्वपूर्ण सीरियाई शहर है, जो इस समय आतंकी संगठन आइएस के नियंत्रण में है. अगर आइएस से यह शहर छिन जाता है, तो उन्‍हें फिर उन्‍हें अंडरग्राउंड होना पड़ेगा. सीरिया के विवाद में अराजकता में बढ़ोतरी 2011 में राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के साथ हुई थी. इसके बाद यह एक जटिल युद्ध में बदल गया, जिसमें अभी तक 3,30,000 से अधिक लोगों की जान चली गई है. वहीं लाखों लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा और शहर के शहर खंडहर में तब्‍दील हो गए.

वायरल सीडी पर बोले हार्दिक- मुझे बदनाम कर लो कोई फर्क़ नहीं पड़ेगा

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अहमदाबाद। गुजरात चुनाव पर देशभर की नजरें हैं. भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य राजनैतिक दल पूरे जोर-शोर से प्रचार प्रसार में लगे हुए हैं. इन सबके बीच पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की एक सीडी लीक होने से गुजरात की राजनीति में नया मोड़ आ गया है. इस सीडी के बारे में दिख रहा है कि हार्दिक एक कमरे में किसी महिला के साथ हैं.

हार्दिक पटेल ने हफ्ते भर पहले ही एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए इस तरह की सीडी के सामने आने की बात की शंका जताई थी. ये सीडी गुजरात के लोकल न्यूज़ चैनल्स पर टेलीकास्ट हो रही हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ये वीडियो इसी साल 16 मई का है.

वीडियो के सामने आने के बाद हार्दिक पटेल ने ट्वीट कर इसपर अपनी बात रखी है. हार्दिक पटेल ने ट्वीट किया कि, “अब गंदी राजनीति की शुरुआत हो गई है. मुझे बदनाम कर लो, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा, लेकिन गुजरात की महिलाओं का अपमान किया जा रहा है.”

इससे पहले बीते 5 नवंबर को ही हार्दिक पटेल ने कहा था कि गुजरात चुनावों में फायदा पाने के लिए भाजपा सेक्स सीडी के जरिए उन्हें बदनाम कर सकती है. हार्दिक ने कहा था कि भाजपा ने एक फर्जी सेक्स सीडी तैयार कराई है, जिसका इस्तेमाल वह चुनावों से पहले मुझे बदनाम करने के लिए करेगी. आप भाजपा से इसके अलावा उम्मीद ही क्या कर सकते हैं? इसलिए इंतजार करिए और देखिए.

10वीं पास के लिए निकली ग्रामीण डाक सेवक के पदों पर वैकेंसी

भारतीय डाक की ओर से उत्तर प्रदेश सर्कल के तहत ग्रामीण डाक सेवक भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए हैं. इन पदों पर ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर, 2017 है. आवेदन से जुड़ी जानकारियां नीचे दी गई हैं. संस्थान का नाम भारतीय डाक पदों के नाम ग्रामीण डाक सेवक पदों की संख्या नोटिफिकेशन के अनुसार पदों की कुल संख्या 5,314 हजार है. योग्यता  उम्मीदवार राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होने चाहिए. साथ ही कंप्यूटर का अच्‍छा ज्ञान होना चाहिए. उम्मीदवारों के पास एक मान्यता प्राप्त कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान से कम से कम 60 दिनों का बेसिक कंप्यूटर ट्रेनिंग सर्टिफिकेट होना चाहिए. चयन प्रक्रिया उम्‍मीदवारों का चयन 10वीं कक्षा में प्राप्‍त अंकों के आधार पर तैयार की गई मैरिट लिस्‍ट से होगा. उम्र सीमा उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 40 साल होनी चाहिए. जॉब लोकेशन उत्तर प्रदेश एप्‍लीकेशन फीस जनरल और ओबीसी श्रेणी के उम्‍मीदवारों को 100 रुपए एप्‍लीकेशन फीस के तौर पर जमा करने होंगे. कैसे करें आवेदन उम्मीदवार भारतीय डाक की आधिकारिक वेबसाइट www.appost.in/gdsonline/ पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. महत्वपूर्ण तारीख आवेदन करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर, 2017 है.

राम मंदिर विवाद सुलझाने अयोध्या जाएंगे श्री श्री रविशंकर, औवेसी ने किया विरोध

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नई दिल्ली। आध्यात्मिक गुरु और ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर अयोध्या विवाद में कूद गए हैं. श्री श्री अब खुद से ही आगे आकर अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं. अपनी यह ख्वाहिश उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के 13वें नेहरू मेमोरियल लेक्चर को संबोधित करने के बाद मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में जाहिर की.

आज सोमवार को जेएनयू के कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह 16 नवंबर को अयोध्या जाएंगे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे. श्री श्री ने कहा, ‘मैं अपनी मर्जी से मंदिर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास कर रहा हूं. अयोध्या विवाद का हल केवल बातचीत से ही हो सकता है और इसके लिए वह सभी हितधारकों के साथ बातचीत कर रहे हैं.’

राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए अपनी मध्यस्थता के प्रयासों की हो रही आलोचना पर उन्होंने कहा, ‘लोग जो चाहें कह सकते हैं. यह विरोध लालच की वजह से है लेकिन यह सब मैं केवल अपनी मर्जी से कर रहा हूं.’ आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि वह 16 नवंबर को अयोध्या का दौरा करेंगे और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से मुलाकात करेंगे.

अयोध्या राम मंदिर मामले में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की मध्यस्थता का विरोध करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उन पर तीखा प्रहार किया है. ओवैसी ने रविशंकर को झूठा बताकर कहा कि उन्होंने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के सदस्यों से कोई मुलाकात नहीं की है. उन्होंने कहा कि ये सब करके उन्हें नोबेल नहीं मिलने वाला.

ओवैसी ने रविशंकर को जोकर बताते हुए कहा कि इतने बड़े मसले में ऐसे कैसे लोगों को मध्यस्थता के लिए बुलाया जा रहा है. ये कोई मजाक है क्या? कोई अपने आप को अकबर का वंशज बताता है तो कोई मुगल का. मैं तो कहता हूं कि मैं आदम का वंशज हूं तो क्या पूरी सल्तनत मेरी हो गई है.

ओवैसी ने आगे कहा कि ये सब करके नोबेल पुरस्कार नहीं मिलने वाला है. मैं कहूंगा कि पहले एनजीटी ने जो उन्हें 75 लाख रुपये का जुर्माना भरने को कहा था वो चुका दें फिर बात करें.

प्रधानाचार्य ने SC की छात्राओं को पूड़ी बनाने से रोका

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रूपवास, राजस्थान। गांव दहिना के राउमावि में अध्ययनरत अनुसूचित जति की छात्राओं को प्रधानाचार्य ने कैंप में पूड़ी बनाने पर रोक दिया. इससे नाराज छात्राओं ने कार्रवाई की मांग को लेकर तहसीलदार शाहिद अली खान से शिकायत की है. छात्रा रितू सागर, माधुरी, प्रियंका, शिवानी, खुशबू मनीषा, शीतल, रीना, पूजा, निशा, मीनू, चंचल, गुड़िया, सोनिया और सुमन जाटव आदि ने बताया कि स्कूल में पांच दिवसीय समाज उपयोगी उत्पादक शिविर चल रहा था. इसमें प्रधानाचार्य ने पूड़ी-सब्जी की दावत बनाने के लिए स्कूल की छात्राओं को काम सौंपा.

लेकिन जब अनुसूचित जाति की ने पूड़ी बनाने का काम शुरू किया तो प्रधानाचार्य ने एससी की बालिकाओं से अन्य काम करने की बात कहकर रसोईघर से बाहर निकाल दिया. जिसका बालिकाओं ने विरोध किया तो टीसी काटने की धमकी दे डाली. छात्र धीरज, सुनील कुमार हरिजन, नवनीत, समिंद्र, रीतेश, गजेंद्र जाटव ने तहसीलदार से कहा कि स्कूल के शिक्षकों ने कैंप में काम करने के नाम यर पांच कमरों व प्रधानाचार्य कक्ष सहित स्कूल की बाउंड्रीवाल की पुताई व साफ-सफाई करवाई. तहसीलदार शाहिद अली खान ने ज्ञापन लेने के बाद जांच कराने व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही.

प्रधानाचार्य गोवर्धनलाल ने फोन पर कहा कि छात्राओं के आरोप निराधार हैं. स्कूल की बालिकाओं ने पूड़ी-सब्जी बनाने का काम किया था तथा बच्चों ने अपनी मर्जी से कैंप में पुताई की है. तहसीलदार के निवास पर स्कूल की चालीस छात्राएं, दस छात्र व बीस अभिभावक मौजूद थे

बड़े पर्दे पर एक बार फिर साथ नजर आएंगे अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित

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नई दिल्ली। बॉलीवुड की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित और एक्टर अनिल कपूर ने साल 2000 में आखिरी बार एक साथ काम किया था. दोनों ने फिल्म ‘पुकार’ में साथ काम किया था और इसके बाद जल्द यह जोड़ी फिर से बड़े पर्दे पर एक साथ नजर आने वाली है. दोनों लगभग 17 साल बाद साथ काम करेंगे और इस बार दोनों कॉमेडी फिल्म ‘टोटल धमाल’ में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म का निर्देशन इंदर कुमार कर रहे हैं.

इस फिल्म की शूटिंग अगले साल जनवरी में शुरू की जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह इस फिल्म को अगले साल दिवाली पर रिलीज करना चाहते हैं लेकिन इसका आखिरी फैसला स्टूडियो द्वारा लिया जाएगा. बता दें, यह फिल्म ‘धमाल’ सीरिज की तीसरी फिल्म होगी.

हालांकि, अगर आप सोच रहे हैं कि इस फिल्म में आपको अनिल और माधुरी के बीच कोई रोमांटिक सीक्वेंस देखने को मिलेगा तो बता दें कि इंदर कुमार ने इस पर कहा है कि यह एक कॉमेडी फिल्म है और इसलिए इसमें आपको कोई रोमांटिक सीन नहीं मिलेगा, लेकिन वादा है कि फिल्म में आपको ढेर सारा धमाल देखने को मिलेगा. अनिल और माधुरी की जोड़ी काम करने के लिए बेहतर है और एक बार फिर से उनके साथ काम करना किसी सपने की तरह है. बता दें कि इस फिल्म में अजय देवगन, रितेश देशमुख, अरशद वारसी और जावेद जाफरी भी नजर आएंगे.

IAS अशोक खेमका का 51वीं बार हुआ ट्रांसफर

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नई दिल्ली। हरियाणा के चर्चित आईएएस डॉ. अशोक खेमका का रविवार को फिर से ट्रांसफर कर दिया गया है. यह उनका 51वां ट्रांसफर है. सरकार ने इस बार उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से हटाकर खेल एवं युवा मामले विभाग का प्रधान सचिव बना दिया है.

यह खबर मिलने के बाद खेमका ने कहा कि अब तो उनको लगता है कि जैसे भेजा फ्राई हो गया है. उन्होंने ट्वीट में लिखा, ‘उनका यह ट्रांसफर एक क्रैश लैंडिंग की तरह है क्योंकि उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में काफी कुछ प्लानिंग कर रखी थी कि अचानक तबादले की खबर आ गई.’

उन्होंने लिखा अवतरण एक बार फिर धमाकेदार रहा. निहित स्वार्थ जीत गए. पूर्वानुभव, लेकिन यह अस्थायी है. नए जोश और ऊर्जा के साथ नई शुरूआत करूंगा. सूत्रों के अनुसार खेमका सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के नशा मुक्ति केंद्रों में चल रहे भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाले थे. मगर, इसके पहले ही उन्हें विभाग से हटा दिया गया.

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में खेमका की सक्रियता सरकार को रास नहीं आई. खेमका विभाग में लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार की परतें खोलना शुरू कर चुके थे, अगर और कुछ समय विभाग में रहते तो बड़ी मछलियां बेनकाब हो सकती थीं. खेमका के खुलासों की आंच सीधे सरकार पर आने की भी आशंका थी.

गौरतलब है कि अशोक खेमका द्वारा उजागर गड़बड़ियों और अनियमितताओं के चलते हरियाणा की भाजपा सरकार के तीन मंत्रियों से उनका टकराव हो चुका है. खेमका सहित सरकार ने रविवार देर शाम 13 आईएएस अधिकारियों के नियुक्ति एवं तबादला आदेश जारी किए हैं. खेमका अब खेल मंत्री अनिल विज के विभाग का जिम्मा संभालने जा रहे हैं. विज पहले ही खेमका के मुरीद हैं और अनेक बार उनकी ईमानदारी की तारीफ कर चुके हैं.

सन्यास लेने की नसीहत देने वालों की बोलती बंद कर दी धोनी ने

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दुबई। टी-20 क्रिकेट को लेकर आलोचकों के निशाने पर आए पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि हर व्यक्ति के जीवन का अपना-अपना नजरिया होता है. पूर्व तेज गेंदबाज अजित आगरकर ने इस प्रारूप से उनकी विदाई की बात कहते हुए टीम प्रबंधन से उनका विकल्प तलाशने को कहा था. वीवीएस लक्ष्मण भी आगरकर से सहमत थे. इसके बाद से ही क्रिकेट जगत दो खेमों में बंट गया था. कुछ ने माही को संन्यास लेने की सलाह दे डाली तो कुछ उनके समर्थन में आ गए थे.

धोनी से जब आगरकर की टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा- हर किसी के जीवन के बारे में अपने विचार होते हैं. इनका सम्मान किया जाना चाहिए. धोनी ने युवा भारतीय टीम के कप्तान के तौर पर 2007 में शुरुआती विश्व टी-20 कप और 2011 वन-डे विश्व कप जीता. भारतीय टीम राजकोट में न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी-20 में 40 रन से हार गई, जिसमें धोनी बल्लेबाजी में जूझते दिखे. इसके बाद उनके संन्यास की मांग उठने लगी.

36 वर्षीय दिग्गज क्रिकेटर ने कहा- सबसे बड़ी प्रेरणा भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा होना है. आपने ऐसे क्रिकेटर भी देखे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से मुकाम हासिल किया है, लेकिन फिर भी वे बहुत आगे तक पहुंचे हैं. ऐसा उनके जुनून की वजह से हुआ है. कोच को उन्हें ढूंढने की जरूरत है. हर कोई देश के लिए नहीं खेलता. धोनी यहां अपनी वैश्विक क्रिकेट अकादमी लॉन्च करने पहुंचे थे. उन्होंने दुबई की पेसिफिक वेंचर्स के साथ मिलकर अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय अकादमी “एमएस धोनी क्रिकेट अकादमी” का उद्घाटन किया.

नतीजों से अहम प्रक्रिया-

धोनी ने कहा- मैंने हमेशा ही माना है कि नतीजों से अहम प्रक्रिया होती है. मैंने कभी भी परिणाम के बारे में नहीं सोचा, मैंने हमेशा यही सोचा कि उस समय क्या करना ठीक होगा, भले ही तब दस रन की जरूरत हो, 14 रन की हो या फिर पांच की. मैं इस प्रक्रिया में ही इतना शामिल रहा कि मैंने कभी इस बात का बोझ नहीं लिया कि तब क्या होगा, अगर नतीजे मेरे हिसाब से नहीं रहे.

हेलीकॉप्टर शॉट पर बोले माही-

अपने ट्रेडमार्क हेलीकॉप्टर शॉट के बारे में पूछने पर धोनी ने कहा कि मैं नहीं चाहूंगा कि कोई युवा इस तरह के शॉट का इस्तेमाल करे, क्योंकि इसमें चोटिल होने की संभावना ज्यादा है. यह ऐसी चीज है जो मैंने सड़क पर टेनिस गेंद से क्रिकेट खेलने के दौरान सीखी है. यह मुश्किल है.

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने आलोचना का शिकार विश्व कप विजेता कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को टी-20 मैचों के प्रति अलग रवैया अपनाने की सलाह दी है. गांगुली ने कहा- वन-डे के मुकाबले उसका टी-20 रिकॉर्ड उतना अच्छा नहीं है. उम्मीद करते हैं कि कोहली और टीम प्रबंधन उनसे अलग से बात करेगा. उसमें काफी क्षमता है.

मुझे लगता है कि धोनी को वन-डे क्रिकेट खेलना जारी रखना चाहिए, लेकिन टी20 में अपना खेलने का तरीका बदलना चाहिए. उन्हें टी-20 मैच स्वच्छंद होकर खेलने होंगे. यह चयनकर्ताओं पर निर्भर करता है, वे क्या चाहते हैं कि वह कैसे खेले.

न्यूजीलैंड के खिलाफ राजकोट में दूसरे टी-20 में 197 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत 97 रन पर 4 विकेट गंवाने के बाद संकट में था, जिसके बाद धोनी, कोहली का साथ देने क्रीज पर उतरे, लेकिन उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा. भारत अंत में मैच हार गया.

राजपूतों को लेकर दिलिप मंडल का खतरनाक पोस्ट

rajput क्ष से क्षत्रिय. यानी ब्राह्मण से नीचे की कटेगरी का वर्ण. ब्रह्मा के कंधे से उत्पत्ति. जाति का कर्म- शस्त्र संचालन, युद्ध करना, और रक्षा करना. हे क्षत्रियों, इस देश में सब तरह के हमलावर आए. शक आए, हूण आए, मंगोल आए, गुलाम वंश वाले आए, तुर्क आए, अफगान आए, मुगल आए, फ्रांसिसी आए, पुर्तगीज आए, अंग्रेज आए. तुम किससे लड़े भाई? देश की रक्षा के लिए तुमने किया क्या? तुम्हारी तलवारें कर क्या रही थीं? हथियार तो शास्त्रसम्मत तरीके से सिर्फ क्षत्रियों के पास थे. वे अपने काम में निकम्मे साबित हुए. हर हमलावर भारत में जीता. क्षत्रियों ने किसी हमलावर को ज्यादा परेशान नहीं किया. एक बात मान लो. तुम्हारे पास एक ही काम था. ब्राह्मणों की लठैती का. उनके लिए तुम नीचे की जातियों को कंट्रोल करते थे. तुम्हारे हथियार इसी काम आए. तुम्हारी तलवारें कमजोरों के खिलाफ चलीं. तुम्हारे लिए शौर्य का यही मतलब था. देश की रक्षा जैसा कोई गौरव तुम्हारे पास कभी नहीं था. क्योंकि वह काम तुमने कभी किया ही नहीं. ब्राह्मण ज्ञान के क्षेत्र में निकम्मे साबित हुए और क्षत्रिय रक्षा में. मैं ब्राह्मणों को ज्यादा दोषी इसलिए मानता हूं क्योंकि जाति बनाई ब्राह्मणों ने है. भारत को ब्राह्मणों ने बीमार बनाया है. लेकिन अब भारत में सब बीमार हैं. हर जाति को अपने नीचे जातियां दिखती हैं, वे उस पर जुल्म करते हैं. नीचे की जातियां भी बराबर बीमार हैं. ** राजपूतों की बहादुरी का कोई जवाब नहीं था साहेब. अंग्रेजों ने देखते ही पहचान लिया था. तो साहेब हुआ यह कि जब अंग्रेजों को लगा कि इतने बड़े भारत पर सिर्फ गोरे सिपाहियों के बूते राज करना नहीं हो पाएगा. तो उन्होंने देश पर नजर दौड़ाई. सबसे बहादुर और सबसे वफादार और अंग्रेजों की सेवा करने के लिए उपलब्ध बिरादरियों की तलाश शुरू हुई. जाहिर है राजपूतों पर अंग्रेज साहेबों की नजर सबसे पहले इनायत हुई. मतलब आप समझ रहे हैं कि कितने बहादुर होंगे राजपूत. 1778 में राजपूतों की पहली बटालियन अंग्रजों की फौज में शामिल हो गई और देश भर में अंग्रेजों का राज स्थापित करने में लग गई. उस समय इन टुकड़ियों में हिंदू जातियों में से सिर्फ राजपूतों को रखा जाता था. 1778 तक मुख्य रूप से सिर्फ बंगाल ही अंग्रेजों के कब्जे में था. बाकी देश को कब्जे में लेने के लिए अंग्रेज फौज सजा रहे थे और राजपूत इस फौज में शामिल होने वालों में सबसे आगे थे. राजपूतों ने अपने खूब जलवे दिखाए. सबसे पहले उन्होंने टीपू सुल्तान के बाप हैदर अली के खिलाफ तमिलनाडु के कड्डलोर में लड़ाई लड़ी. इन बहादुरों ने हैजरी अली से कड्डलोर छीनकर उसे अंग्रेजों के हवाले कर दिया. 1803 में उन्होंने दिल्ली पर धावा बोला और मराठों को दिल्ली से भगाकर दिल्ली अंग्रेजों के हवाले कर दी. फिर 1805 में वे जाट राजा के होश ठिकाने लगाने भरतपुर पहुंचे और अंग्रेजों की ओर से जाटों को सबक सिखाया. फिर वे एंग्लो सिख युद्धों में सिखों के खिलाफ लड़े और आखिरकार सिखों को भी हराया. 1857 की लड़ाई में सिख टुकड़ियों ने बागियों के होश ठिकाने लगा दिए. दिल्ली और अवध की लड़ाई इन्होंने ही अंग्रेजों के लिए जीतीं. उसके बाद भी…मतलब क्या बताएं किस्से इनकी बहादुरी के. पूरा गौरवशाली अध्याय है. अंग्रेजों ने भी इनकी झोली खाली नहीं रहने दी. बहादुरों का अंग्रेज बहुत सम्मान करते थे. दिल्ली में तमाम राजपूत राजाओं के शानदार महल यूं ही नहीं बने. ** दिल्ली में इंडिया गेट के आसपास आपने ढेर सारे भवन और हाउस देखे होंगे. उनमें सबसे ज्यादा हाउस आन-बान और शान वालों के हैं. जैसे धौलपुर हाउस, बीकानेर हाउस, जयपुर हाउस, कोटा हाउस, जोधपुर हाउस, अलवर हाउस, बाड़मेर हाउस, जैसलमेर हाउस वगैरह, वगैरह. मतलब कि जितने राजा उतने हाउस.. अंग्रेजों ने अपनी राजधानी में ये हाउस बनवाए थे. जो भी अंग्रेजों की गुलामी करने को तैयार हुआ उसके हाउस हैं. जो लड़े उनके हाउस नहीं हैं. टीपू के वंशजों का हाउस नहीं है. झांसी हाउस भी नहीं है. अवध हाउस नहीं है. जिनके हाउस बने, उनके लिए जरूरी था कि वे दिल्ली बुलाए जाने पर आएं. वहां ठहरें और परिवार को वहां रखें. बाकी कुछ बताने की जरूरत नहीं है. तो इतनी ज्यादा आन-बान और शान थी ठाकुर साहबों की. दिलिप मंडल

कृष्णा नदी में नाव डूबने से 20 की मौत, 9 लापता

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विजयवाड़ा। आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में हुए नाव हादसे में अब तक 20 लोगों की मौत हो गई है जबकि 9 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. फिलहाल इन लोगों की तलाश जारी है. वहीं हादसे की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है.

हादसे पर बात करते हुए जिला कलेक्टर बी लक्ष्मी कांतम ने सोमवार को बताया, ‘लापता लोगों की तलाश जारी है. सरकार ने इस घटना में जांच के लिए सीनियर अधिकारियों को नियुक्‍त किया है. पुलिस ने भी 4-5 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है जिसमें से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर हादसे पर दुख जताया है. उन्‍होंने पीड़ित के परिजनों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त की है. पीएम मोदी ने कहा है कि आंध्र प्रदेश सरकार व एनडीआरएफ की ओर से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट संतोष कुमार ने बताया, ‘चार टीमों के साथ यहां कल से राहत कार्य जारी है, लापता लोगों की तलाश करने में गोताखोर जुटे हुए हैं.’

टीम घटना आंध्रप्रदेश के कृष्णा जिले के इब्राहिमपट्टनम क्षेत्र की है. हादसे के वक्त नाव में 35 से 40 लोग सवार थे. वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, घटना रविवार (12 नवंबर) शाम पांच बजकर 45 मिनट पर उस समय हुई, जब बोट भवानीपुरम में पुन्नामी घाट से फेरी गांव के पवित्रा संगम की ओर जा रही थी. पवित्रा संगम की ओर लौटते वक्त बीच नदी में नाव का संतुलन बिगड़ गया और यह पलट गई. प्राइवेट कंपनी के इस बोट में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उप-मुख्यमंत्री एन चीना राजप्पा, विपक्ष के नेता वाईएस जगनमोहन रेड्डी और अन्य लोगों ने मृतकों के साथ संवेदना व्यक्त करते हुए घटना पर दुख जताया. राहत और बचाव अभियान का जायजा लेने के लिए उप मुख्यमंत्री एन चीना राजप्पा खुद घटनास्थल पर गये और पुलिस को लापता लोगों का पता लगाने के लिए अतिरिक्त बलों को भेजने का निर्देश दिया. उन्होंने हादसे की जांच के निर्देश भी दे दिए.