प्रद्युम्न मर्डर केसः ‘CBI ने थर्ड डिग्री देकर कबूल करवाया जुर्म’

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गुरुग्राम। गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुई प्रद्युम्न की हत्या का मामला सुलझने के बजाए उलझता जा रहा है. अब सीबीआई द्वारा आरोपी बनाए गए 11वीं के छात्र के बयान से इस केस में एक नया मोड़ आ गया है. आरोपी छात्र ने सीबीआई को दिए अपने पहले के बयान से मुकरते हुए जांच एजेंसी पर ही गंभीर आरोप लगा दिया है.

13 नवंबर को आरोपी छात्र की काउंसिलिंग और उसका बयान लेने पहुंची बाल सुरक्षा एवं संरक्षण (सीपीडब्ल्यूओ) अधिकारी के सामने आरोपी ने कहा, “मैंने प्रद्युम्न की हत्या नहीं की है. सीबीआई ने मुझसे यह जुर्म कबूल करने के लिए कहा है.” सीपीडब्ल्यूओ रेनू सैनी के सामने आरोपी छात्र ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने उससे कहा कि यह जुर्म उसे कबूल करना पड़ेगा. ऐसा नहीं करने पर उसके भाई की हत्या कर दी जाएगी.

छात्र ने कहा, “मैं अपने भाई को बहुत प्यार करता है, उसे मरते हुए नहीं देख सकता. इसलिए सीबीआई वालों ने जैसा कहा, मैंने वैसा ही किया.” सीबीआई अधिकारी और सीपीडब्ल्यूओ की रेनू सैनी ने आरोपी छात्र से 13 नवंबर को ऑब्जर्वेशन होम जाकर मुलाकात की थी और करीब दो घंटे तक उससे बात की थी.

13 नवंबर को सीबीआई की मौजूदगी में आरोपी छात्र से उसके माता-पिता और भाई की मुलाकात कराई गई. तीनों एक घंटे तक आरोपी छात्र के पास रहे और इस दौरान उसकी मां उससे लिपटकर रोती रही. गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में 8 सितंबर को 7 साल के प्रद्युम्न ठाकुर नाम के छात्र की हत्या कर दी गई थी. प्रद्युम्न का शव स्कूल के टॉयलेट में मिला था. इस मामले की शुरुआत में जांच करने वाली गुरुग्राम पुलिस ने हत्या के आरोप में स्कूल के एक बस कंडक्टर अशोक कुमार को गिरफ्तार किया था.

ईरान-इराक में भूकंप से 400 से ज्यादा लोगों की मौत, 7000 से ज्यादा घायल

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नई दिल्ली। ईरान-इराक सीमा पर आए भकूंप के बाद मंगलवार को भी राहत कार्य जारी हैं. मलबा हटाने का काम बड़े स्तर पर किया जा रहा है. अभी तक भूकंप में मरने वाले लोगों की संख्या 400 के पार पहुंच चुकी है. भूकंप का सबसे ज्यादा नुकसान उस इलाके को हुआ है जिसे 1980 में युद्ध के बाद फिर से बनाया गया था.

ईरान के स्थानीय समयानुसार रात 9:48 मिनट पर आए 7.3 की तीव्रता का भूकंप आया. ईरान के संकट प्रबंधन मुख्यालय के प्रवक्ता बेहनम सईदी ने सरकारी टीवी को बताया कि भूकंप से देश में 400 लोग मारे गए हैं और 7,156 अन्य लोग घायल हुए.

अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप का केंद्र इराक के पूर्वी शहर हलबजा के 31 किलोमीटर बाहर और 23.2 किलोमीटर की गहराई पर था. भूकंप के कारण दुबई की गगनचुंबी इमारतें भी हिल गईं और यह भूमध्यसागरीय तट पर 1,060 किलोमीटर दूर तक महसूस किया गया. इराक के गृह मंत्री के अनुसार भूकंप से सात लोगों की मौत हुई है और 535 लोग घायल हैं. सभी देश के उत्तरी, अर्द्ध स्वायत्त कुर्द क्षेत्र के हैं.

भूकंप के झटके इतने तेज थे कि प्रभावित इलाके में कई इमारत तो कुछ सेकेंड में ही गिर गए. कई इलाकों का एक दूसरे संपर्क भी टूट गया है. भूकंप की वजह से बिजली और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है. बचाव कार्य में तेहरान के लड़ाके भी अन्य बचाव कर्मियों की मदद कर रहे हैं. मलबे की जांच के लिए श्वान दस्ते का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

भाजपा के विधायक ने कहा- बिहार के सिनेमाघरों में नहीं चलने देंगे फिल्म पद्मावती

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पटना। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ की रिलीज़ डेट जितनी करीब आती जा रही है, उतना ही फिल्म को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा है. कई राजपूत संगठन फिल्म पद्मावती में इतिहास से छेड़छाड़ की बात कर रहे हैं. बिहार के उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह के बाद भाजपा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू भी इस विवाद में शामिल हो गये. पटना जिले के बाढ़ से बीजेपी विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू ने मंगलवार का कहा कि पद्मावती फिल्म को बिहार में रिलीज नहीं होने देंगे. पद्मावती फिल्म में अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के पैसे लगे हैं. फिल्म के द्वारा हिंदू संस्कृति पर हमला किया गया है. इस फिल्म को बिहार के सिनेमाघरों में नहीं चलने दिया जाएगा.

वहीं, इससे पहले बिहार के उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह ने कहा था कि रानी पद्मावती के इतिहास को फिल्म में अगर तोड़ मरोड़ कर दिखाया गया तो वे इसका विरोध करेंगे, क्योंकि रानी पद्मावती एक आदर्श के रूप में इतिहास में स्थापित हैं. वे जाति व धर्म से ऊपर हैं. उनके इतिहास को गलत ढंग से दिखाना जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ होगा. फिल्म देखने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.

बता दें कि फिल्म पद्मावती को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहा है. विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि फिल्म में रानी पद्मावती को कई जगहों पर नाचते हुए दिखाया गया है जो कि गलत है. इस प्रकार रानी पद्मावती को नीचा दिखाया गया है और इतिहास से छेड़छाड़ की गई है. रानी पद्मावती हम राजपूतो के लिए त्याग, तपस्या, बलिदान की प्रेरणस्त्रोत है, जो कि पूज्यनीय है. फिल्म पद्मावती से हमारी आस्था को गहरी ठेस पहुंची है. वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि अल्लाउद्दीन खिलजी को फिल्म में महान बताया गया है जो कि पूरी तरह से गलत है. हालांकि, पद्मावती का विरोध होने के बाद डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने कहा था कि इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है, जिसे लेकर विरोध किया जा रहा है. इसके बाद फिल्म में पद्मावती का किरदार निभा रही दीपिका पादुकोण ने इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर स्मृति ईरानी को टैग करते हुए ट्वीट किया था कि इस तरह की घटनाओं पर एक्शन लिया जाना चाहिए.

आपको बता दें कि, फिल्म पद्मावती 1 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है. इसमें दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर अहम भूमिका में हैं.

TSPSC ने निकाली है 10000 पदों पर नौकरियां, आप भी करें अप्लाई

तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग (TSPSC) इन दिनों लगातार भर्ती निकाल रहा है. आयोग ने अलग अलग नोटिफिकेशन के माध्यम से कई पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इस भर्ती में अलग अलग योग्यताओं के अनुसार भर्ती निकाली गई है. अगर आप भी सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आप इन भर्तियों में आवेदन कर सकते हैं.

टीएसपीएसी के इन नोटिफिकेशन में 21 हेल्थ सुपरवाइजर, 1196 स्टाफ नर्स, 416 फिजिकल एजिकेशन टीचर, 1011 लैंग्वेज पंडित, 5415 सैकेंडरी ग्रेड टीचर, 35 रेडियोग्राफर और 9 स्कूल असिस्टेंट पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. इन सभी पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास काफी समय है, सभी भर्तियों में 30 नवंबर तक आवेदन किए जा सकते हैं और कुछ पदों के लिए 11 दिसंबर तक भी आवेदन किया जा सकता है.

बता दें कि इन भर्तियों में हर पद के अनुसार उनकी योग्यता, पे-स्केल, ग्रेड पे, आयु सीमा, आवेदन फीस आदि तय की गई है, जिसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक नोटिफिकेशन से ली जा सकती है.

कैसे करें अप्लाई- इन भर्तियों में अप्लाई करने से पहले हर भर्ती के बारे में अच्छे से जानकारी ले लें. उसके बाद आयोग की आधिकारिक वेबसाइट www.tspsc.gov.in पर जाएं और उसके बाद हर नोटफिकिशेन के अनुसार आवेदन कर दें. कुछ भर्तियों में उम्मीदवारों के चयन के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन भी किया जाएगा, जो कि जनवरी में आयोजित हो सकती है.

‘रसगुल्ला’ पर लगा पश्चिम बंगाल का टैग, ममता ने ट्विटर पर जाहिर की खुशी

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कोलकाता। दो राज्यों में नदियों के पानी और सीमा को लेकर टकराव तो आप सभी ने सुना होगा. लेकिन क्या आपने सुना है, किसी मिठाई के लिए भी दो राज्य टकराव कर सकते हैं. जी हां, पश्चिम बंगाल और ओडिशा दो ऐसे राज्य हैं जो काफी समय से ‘रसगुल्ला’ को लेकर विवाद कर रहे थे. लेकिन अब ये विवाद खत्म हो गया है.

अदालत ने मंगलवार को दिए फैसले में कहा कि रसगुल्ले की आधिकारिक पहचान पश्चिम बंगाल के नाम हो गई है. इस फैसले के बाद बंगाल को अब रसगुल्ले के लिए भौगोलिक पहचान (GI) टैग मिल गया है. इस बाबत पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ट्वीट कर खुशी जताई. ममता ने ट्वीट किया कि सभी के लिए खुशी की खबर है, हम काफी खुश और गर्व महसूस कर रहे हैं कि बंगाल को रसगुल्ले की भौगोलिक पहचान का टैग मिल गया है.

आपको बता दें कि रसगुल्ला पश्चिम बंगाल की काफी फेमस मिठाई है. लेकिन इसका उत्पाद कहां से हुआ इस पर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच लड़ाई चल रही थी. इस मामले की सुनवाई दो साल से चल रही थी, जिसके बाद आज फैसला आया है.

क्या किए गए थे दावे? पश्चिम बंगाल की ओर से दावा था कि रसगुल्ला का ईजाद उनके राज्य से ही हुआ था. 1868 से पहले ही मशहूर मिठाई निर्माता नवीन चंद्र दास ने इसे बनाया था. लेकिन मामला जब सभी की नजरों में आया तब ओडिशा की ओर से इसके लिए टैग मांगा गया था.

ओडिशा सरकार में मंत्री प्रदीप कुमार ने 2015 में दावा किया था कि रसगुल्ला ओडिशा का है. पिछले 600 साल से रसगुल्ला ओडिशा में है. उन्होंने इसे भगवान जगन्नाथ के प्रसाद से भी जोड़ा था. उनका दावा था कि रसगुल्ला के इस्तेमाल पिछले 300 साल से पुरी की रथयात्रा में भी हो रहा है.

सांस्कृतिक इतिहासकार असित मोहंती के अनुसार, ‘भगवान जगन्नाथ द्वारा मां लक्ष्मी को रथयात्रा के समापन के समय रसगुल्ला भेंट करने की परंपरा 300 साल पुरानी है. बंगाल तो खुद ही मान रहा है कि उसका रसगुल्ला 150 साल पुराना है.’

स्मॉग पर NGT ने दिल्ली सरकार को लगाई फटकार

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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार अब राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) से टकराव करने के मूड में हैं. दिल्ली में हो रहे स्मॉग को नियंत्रण करने के लिए दिल्ली सरकार ने ऑड-इवन की नीति अपनाई थी, लेकिन महिलाओं और टू व्हीलर्स को छूट देने के कारण एनजीटी ने इस पर आपत्ति जताई थी और ऑड-ईवन की नीति में महिलाओं और टू-व्हीलर्स को भी शामिल करने के लिए कहा था.

लेेकिन एनजीटी ने एक बार फिर स्मॉग को लेकर दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई है. मंगलवार को एनजीटी ने दिल्ली सरकार से कहा कि आपके हिसाब से हेल्थ इमरजेंसी क्या है. एनजीटी ने अपने 11 नवंबर वाले आदेश को बदलने से मना कर दिया है. जिसमें उन्होंने टू-व्हीलर्स और महिलाओं को ऑड इवन पर छूट ना देने की बात कही थी.

एनजीटी ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों को संक्रमित फेफड़े गिफ्ट मत कीजिये, स्कूल जाते वक़्त उन्हें मास्क की ज़रूरत पड़ती है. और आप लोग एक राज्य दूसरे राज्य पर प्रदूषण फैलाने का आरोप लगा रहा है. ऐसी सूरत में हालात सुधरने की उम्मीद हम कैसे करें.

सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा कि पिछले डेढ़ साल के दौरान हमारे कई आदेशों के बावजूद आपने कुछ नहीं किया. आपने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया, और अब आप टू-व्हीलर्स को ऑड-ईवन से बाहर रखना चाहते हैं. जब हम सबको पता है कि टू-व्हीलर्स से प्रदूषण हो रहा है तो फिर उन्हें ऑड-ईवन से अलग क्यों रखा जाए.

आर्थिक आधार पर प्रदूषण को लेकर किसी को भी रियायत नहीं दी जा सकती है. आप टू-व्हीलर्स के लिए ये रियायत किस आधार पर मांग रहे हो और ये क्यों दी जाए. एनजीटी ने पूछा कि आपने पिछली बार कहा था कि आप 4 हजार नई बसें ला रहे हो, आपने उस पर भी कुछ नहीं किया.

हार्दिक पटेल के समर्थन में जिग्नेश मेवाणी ने किया ट्वीट

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अहमदाबाद। हार्दिक पटेल की कथित सेक्स सीडी ने गुजरात में चुनावी राजनीति गरमा दी है. इस सीडी के बाद हार्दिक पटेल जनता के और राजनीतिक दलों के निशाने पर हैं. लेकिन ऊना कांड के बाद चर्चा में आए दलित कार्यकर्ता और समाजसेवी जिग्नेश मेवाणी ने हार्दिक पटेल का समर्थन किया है.

जिग्नेश मेवाणी ने ट्वीट किया है, ‘प्रिय हार्दिक पटेल, परेशान न हो. मैं आपके साथ हूं. और सेक्स का अधिकार मौलिक अधिकार है. किसी को भी आपकी निजता का हनन करने का हक नहीं.’

अपने ट्वीट को लेकर मेवाणी भी सोशल मीडिया पर लोगों के निशाने पर आ गए. हालांकि मेवाणी ने उन्हें भी तंज लहजे में जवाब देते हुए लिखा, ‘साथियों, फेसबुक के इन बॉक्स में मैसेज मत भेजो कि तुम्हारी सीडी कब आएगी! जब आएगी तब देख लेना.’

इस बीच सीडी प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए हार्दिक पटेल ने इस वीडियो में खुद के होने से इंकार किया है. उन्होंने कहा, ‘मैं मर्द हूं, नपुंसक नहीं, जो करना होगा सीना ठोक कर करूंगा.’ उन्होंने इसे लेकर भाजपा पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘जो सेक्स सीडी सामने आई है, वह फर्जी है. यह वीडियो फर्जी है और भाजपा की गंदी राजनीति का हिस्सा है. भाजपा ने मेरी निजी जिंदगी पर निशाना साधा है. भाजपा में इस तरह का कारनामा करने वाले कई लोग हैं, अब मैं भी उनकी सीडी लेकर आऊंगा.’

हार्दिक पटेल ने इससे पहले सेक्स सीडी सामने आने की आशंका जाहिर करते हुए ये भी दावा किया था, ‘भाजपा ने मुझे बदनाम करने के लिए डॉक्टर्ड सेक्स सीडी तैयार की है. इस सीडी को चुनाव से ठीक पहले रिलीज किया जाएगा. भाजपा से और क्या उम्मीद की जा सकती है.’

ये पहली बार नहीं है जब हार्दिक पटेल की कथित सेक्स सीडी सामने आई है. 2015 में आरक्षण आंदोलन की शुरुआत के तुरंत बाद भी ऐसी ही एक सेक्स सीडी रिलीज की गई थी. हालांकि, हार्दिक ने उस वीडियो क्लिप को कहीं चैलेंज नहीं किया था.

नास्त्रेदमस ने 2018 के लिए की थी पृथ्वी पर तबाही की भविष्यवाणियां

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आपने मशहूर ज्योतिषी नास्त्रेदमस के बारे में अवश्य सुना होगा. नास्त्रोदमस एक फ्रैंच ज्योतिषी और चिकित्सक भी थे. ये प्लेग जैसी बिमारियों का इलाज करते थे. इन्होंने अपनी कविताओं के द्वारा भविष्य में होने वाली घटनाओ का वर्णन किया था. उनका पूरा नाम माइकल नास्त्रोदमस था. उनकी भविष्यवाणियों को दो संग्रह में छापा गया है. उन्होंने 16वीं शताबदी में भविष्यवाणी की थी कि दुनिया में हिटलर और नेपोलियन जैसे दो लोगों का उदय होगा साथ ही साथ ही द्वितीय विश्व युद्ध, अटोमिक बम, कैमेडी भाईयों की मृत्यु और राजकुमारी डायना स्पेंसर की भी भविष्यवाणी की थी.

बीसवीं शताब्दी में नास्त्रेदमस की कथित भविष्यवाणियां आम लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गईं और कई प्रमुख विश्व घटनाओं की भविष्यवाणी का श्रेय उन्हें दिया गया. नास्त्रेदमस ने सभी सालों की तरह आने वाले साल 2018 की भी भविष्यवाणी की थी. आइए जानते हैं आने वाले साल 2018 के लिए नास्त्रेदमस ने क्या भविष्यवाणी की थी.

नास्त्रेदमस ने साल 2018 की जो भविष्यवाणियां की है उसमें कई भयावह घटनाएं है. नास्त्रेदमस के मुताबिक 2018 में मृत आत्माएं अपनी कब्र से बाहर आ जाएंगी और दुनिया में काफी उथल-पुथल मचेगी. नास्त्रेदमस ने 2018 में कई प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी की है.

नास्त्रेदमस ने अपनी किताब द प्रोफेसीज ने साल 2018 में तीसरे विश्व युद्ध की भविष्यवाणी की. नास्त्रेदमस ने भविष्यवाणी के मुताबिक, तीसरा विश्व युद्ध केवल दो और दो से ज्यादा देशों में नहीं बल्कि दो दिशाओं के बीच का होगा यानी पूरब और पश्चिम के बीच. पू्र्व और पश्चिम के देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति के बारे में हमें पता ही है.

भविष्यवाणी के मुताबिक, साल 2018 में लोग एक दूसरे को मारेंगे और अंत में केवल कुछ ही लोग शांति का आनंद उठा पाएंगे. आसमान से उड़ती हुई आग की गेंदे गिरेंगी और लोग असहाय हो जाएंगे.

2018 में विनाशकारी भूकंप की भविष्यवाणी भी की गई है. विनाशकारी भूकंप से चीन सबसे अधिक प्रभावित होगा और बहुत से लोगों की मृत्यु होगी. साल 2018 में होने वाली सर्दी से पैसिफिक की बेल्ट में ज्वाला उठेगा. दुनिया के कई हिस्सों में बाढ़ आने की भी भविष्यवाणी की गई है.

नास्त्रेदमस ने अपनी किताब में लिखा है कि आसमान खुल जाएगा, ताप से सभी खेत जल जाएंगे. विद्वानों ने नास्त्रेदमस की इस भविष्यवाणी की व्याख्या ओजोन लेयर में होने वाले छिद्रों से की है.

भविष्यवाणी के मुताबिक, साल 2018 में विसुवियस आग उठेगी, जिससे पूरा इटली हिल जाएगा. विसुवियस एक सक्रिय ज्वालामुखी से बढ़कर है 2018 के अंत तक इसके फटने की संभावना है या फिर 2019 की शुरूआत में.

भविष्यवाणी के मुताबिक, तीसरे विश्व युद्ध के बाद साल 2025 में दुनिया में फिर से शांति स्थापित हो जाएगी. हालांकि इस शांति का आनंद उठाने के लिए केवल कुछ ही लोग बचेंगे.

गुजरात में बीजेपी नेता और कार्यकर्ताओं में हो गया पंगा!

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गुजरात में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में, इस बार बीजेपी के कार्यकर्ता काफी कनफ्यूज दिखाई दे रहे हैं और इन लोगों को कनफ्यूज करने वाले कोई और नहीं बल्कि खुद इनके ही नेता हैं. दरअसल चुनाव से पहले इस बार कई मुद्दों पर घिरी बीजेपी सरकार जीत के लिए जी जान एक किए हुए है और इस बाबत पार्टी के कई बड़े नेता दिल्ली से आकर यहां कैंपेंन भी कर रहे हैं. साथ ही कार्यकर्ताओं को समझा रहे हैं कि जीत के लिए यहां भी यूपी वाली ही ट्रिक्स अपनाना ठीक रहेगा.

लेकिन बीजेपी कार्यकर्ताओं के सामने दिक्कत ये है कि इस तरह की सालाह देने वाले एक दो नेता नहीं हैं बल्कि दिल्ली के कई नेता ऐसे हैं जो यहां अपनी अहमियत जताने के लिए आते हैं और कार्यकर्ताओं को जीत की घुट्टी पिलाकर चले जाते हैं. ऐसे में कार्यकर्ताओं के सामने दिक्कत ये है कि वो किसकी राह चुने किसकी न चुने.

अपने ज्ञान से कार्यकर्ताओं का मूड ऑफ करने वाले कुछ राष्ट्रीय नेताओं पर अब बीजेपी के कार्यकर्ता नकेल कसने की तैयारी कर रहे हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर बीजेपी नेता अपनी हरकतों से बाज नहीं आते हैं तो वे लोग इनकी शिकायत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से करेंगे. यानि कहीं ऐसा न हो कि कार्यकताओं के बिगड़े मूड से बीजेपी की जीत की कश्ती कहीं चुनावी भवंर में न डूब जाए.

हैदराबाद विश्वविद्यालय में फिर मचा बवाल

हैदराबाद

विश्वविद्यालय का काम है छात्रों को सवाल पूछने के लिए प्रेरित करना और उनके सवालों के जवाब ढूंढना. लेकिन हैदराबाद विश्वविद्यालय सवालों के जवाब दमन से देना जानता है. एक छात्रा अस्वस्थ महसूस करने पर अपने निकटतम मित्र से मिलने हॉस्टल के उसके कमरे पर आई. तभी प्रशासन ने ‘छापा मारा.’ छापे के बाद लड़के को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. “आपके कमरे में एक महिला पाई गई. जवाब दीजिए कि हॉस्टल नियमों के इस उल्लंघन के कारण आपके ख़िलाफ़ कार्रवाई क्यों न की जाए.”

लड़के ने अपने जवाब में इस भाषा पर सख़्त आपत्ति जाहिर की. महिला पाई गई का क्या मतलब? वह कोई आपत्तिजनक सामान है, कोई प्रतिबंधित पदार्थ है, कोई अवैध हथियार है? विश्वविद्यालय अपनी छात्रा के सम्बंध में ऐसी भाषा कैसे लिख सकता है? स्त्री के प्रति ऐसी भाषा अशालीन होने के अलावा अमानवीय भी है.

छात्र ने हॉस्टल नियमों के बेतुकेपन के बारे में भी गम्भीर सवाल उठाए. उसी कैम्पस में विदेशी छात्रों के हॉस्टल में लड़कियां बेरोकटोक आ जा सकती हैं तो केवल भारतीय छात्राओं को अपने मित्रों से मिलने पर रोक क्यों है? क्या विश्वविद्यालय को भारतीय छात्र छात्राओं के चरित्र पर सन्देह है? क्या भारतीय संस्कृति की दृढ़ता पर उसे भरोसा नहीं है, जबकि विदेशी संस्कृति पर है?

ये गम्भीर सवाल हैं. विश्वविद्यालय को जवाब देना चाहिए था. लेकिन उसने उठाकर जवाब मांग रहे दस छात्रों को सस्पेंड कर दिया. अब पूरा कैम्पस मिल कर जवाब मांग रहा है. सवालों से निपटने का यह तरीका नहीं है. जवाब दीजिए. बहस कीजिए. सवाल पूछने वालों को निरुत्तर कीजिए. यह कारण बताओ नोटिस, सस्पेंसन, पुलिस कार्रवाई यह कोई तरीका नहीं है. आज छात्र पूछ रहे हैं. कल सारा देश पूछेगा.

आशुतोष कुमार की फेसबुक वॉल से साभार

कर्ज में फंसी कंपनियों पर भारी पड़ा आयकर विभाग का रुख

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नई दिल्ली। आयकर विभाग का रुख कर्ज में फंसी कंपनियों पर भारी पड़ सकता है. इन कंपनियों पर देश के बैंकों और वित्तीय कंपनियों के भारी कर्ज हैं और वे भुगतान न कर पाने के कारण इस समय राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट में फंसी हुई हैं. अब अगर बैंक इन संपत्तियों को कम कीमत पर बेचते हैं तो आयकर विभाग नए मालिक से इन संपत्तियों की वास्तविक कीमत के आधार पर कर वसूल सकता है.

बोलीदाताओं, निजी इक्विटी कंपनियों और वकीलों का कहना है कि पुराने बीमार औद्योगिक कंपनी कानून (एसआईसीए) में रुग्ण कंपनियों को आयकर से छूट मिली हुई थी लेकिन नए दिवालिया कानून के तहत इन कंपनियों को कर में कोई छूट नहीं है. इससे संभावित बोलीदाता कर्ज में फंसी इन संपत्तियों का मूल्यांकन कम कर सकते हैं. एक बोलीदाता ने बताया कि अगर किसी कंपनी पर 50,000 करोड़ रुपये का भारी भरकम कर्ज है और इस ऋण अधिग्रहण करने के लिए कोई 30,000 करोड़ रुपये की बोली लगाता है तो ऋण की बाकी राशि यानी 20,000 करोड़ रुपये कर्जदार कंपनी की आमदनी मानी जाएगी और इसे खरीदने वाले को आयकर या न्यूनतम वैकल्पिक कर देना होगा.

बोलीदाताओं ने कहा कि दिवालिया कानून में यह भी जरूरी है कि अगर कोई बोलीदाता पंचाट में पहुंची किसी कर्जदार कंपनी का अधिग्रहण करता है तो उसे प्रतिस्पस्‍पर्धा आयोग से भी इजाजत लेनी पड़ेगी. सूत्रों के अनुसार प्रतिस्‍पर्धा कानून से जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील को भी परेशानी हो सकती है. कंपनियां इस मसले को सरकार के समक्ष उठाएंगी.

रांची में स्थापित होगी 150 फीट ऊंची बिरसा मुंडा की प्रतिमा

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रांची। झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासियों के भगवान कहे वाले बिरसा मुंडा की 150 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी. जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ उलगुलान’ के नाम से जाना जाएगा. राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने 13 नवंबर को स्टैच्यू ऑफ उलगुलान के प्रारूप का अनावरण किया. बिरसा मुंडा की 150 फीट ऊंची प्रतिमा बुंडू में स्थापित होगी. उलगुलान फाउंडेशन ने अनावरण समारोह का आयोजन किया.

प्रतिमा को स्थापित करने के लिए बुंडू में निर्माण कार्य जल्द ही प्रारंभ किया जायेगा. फाउंडेशन के संरक्षक सुदेश कुमार महतो का कहना है कि हमारा प्रयास उलगुलान के महानायक भगवान बिरसा की गौरव गाथा तथा आन- बान-शान को देश-दुनिया के फलक पर स्थापित करना है.

फाउंडेशन के सचिव विकास कुमार मुंडा ने कहा कि हमारी कोशिश भगवान बिरसा के गौरवशाली इतिहास को लेकर एक लंबी लकीर खींचने की है, ताकि आनेवाले वक्त में कोई भी बिरसा मुंडा समेत अन्य अमर शहीदों के बलिदानों को छोटा साबित करने की हिमाकत नहीं कर सके़.

आदिवासी वीर योद्धा भगवान बिरसा मुंडा की 142वीं जयंती 15 नवंबर को है. जिसे जिले में अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाएगा. इसमें आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, वाद्य यंत्रों, वेशभूषा के साथ आदिवासी समाज के लोग एकत्रित होंगे. अभी तक आदिवासी योद्धाओं को इतिहास में जगह नहीं दी गई और न ही राष्ट्रीय स्तर पर सरकार द्वारा इनकी जयंतियां मनाई गई.

बिरसा मुंडा, टंट्या मामा, खाज्या नायक, राणा पूंजा भील, झलकारी बाई, तिलका मांझी, दलितों और पिछड़ा वर्ग में शिक्षा की अलख जगाने वाले ज्योतिबा फूले हो या उनके सहयोगी फातिमा सहित ऐसे कई क्रांतिकारियों को न इतिहास में जगह मिली और न ही उन्हें याद किया जाता है.

अभी किसी सियासी पारी का इरादा नहीं है- सहवाग

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मेरठ। टीम इंडिया के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने मेरठ में चल रहे जागरण क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में विजेता टीम को पुरस्कृत किया. इससे पहले वह दैनिक जागरण कार्यालय पहुंचे और क्रिकेट से जुड़े तमाम पहलुओं पर बातचीत की. शहर के कई स्कूलों के बच्चों ने भी सहवाग से सवाल किए. क्रिकेटर बनने की चाहत रखने वालों को सहवाग ने खेल और पढ़ाई में संतुलन का मंत्र दिया.

सहवाग से पूछा गया कि आप सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय रहते हैं. सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर आपकी राय सामने आती रहती है. क्या आगे सियासी पारी का कोई इरादा है? सहवाग का कहना था कि किसी भी मसले पर राय रखने की सोशल मीडिया से सहूलियत मिली है लेकिन, अभी किसी सियासी पारी का इरादा नहीं है. क्रिकेट पर हावी स्टार कल्चर और कोच से लेकर कमेंटेटर तक के निर्णय में कप्तान की भूमिका होने पर उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट में कप्तान का थोड़ा-बहुत प्रभाव हमेशा से था. अभी अगर मेरे कोच बनने वाली बात को लें तो कप्तान विराट कोहली ने मुझसे संपर्क किया. मैंने आवेदन किया, लेकिन मैं कोच नहीं बना. ऐसे में आप कैसे कह सकते हैं कि हर चीज में कप्तान की चलती है. उन्होंने कहा कि अगर कप्तान की चलती तो मैं कोच होता. हालांकि, उनकी इस बात पर यकीन करना इसलिए मुश्किल हो रहा है क्योंकि मौजूदा कोच रवि शास्त्री को विराट कोहली की पसंद माना जाता है. कहा जाता है कि कोहली की वजह से ही शास्त्री टीम के कोच हैं.

आत्मकथा के सवाल पर सहवाग ने कहा कि तमाम क्रिकेटर्स की जीवनी आ रही है. मैं भी इस बारे में सोच रहा हूं. अच्छे लेखक की तलाश है. हो सकता है कि जल्द ही इस बारे में आपको पता चले. अपनी बायोपिक के सवाल पर सहवाग ने कहा कि अभी न तो इस बारे में उनसे कोई संपर्क किया गया है और न ही उन्होंने भी इस बारे में उन्होंने कुछ सोचा है. मेरा मानना है कि पहलवान सुशील कुमार की बायोपिक आनी चाहिए. उनके संघर्ष को मैंने करीब से देखा है.

साभार- दैनिक जागरण