बैंक ऑफ बड़ौदा में स्पेशलिस्ट ऑफिसर बनने का सुनहरा मौका

बैंक ऑफ बड़ौदा ने स्पेशलिस्ट ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. बैंक की ओर से मांगे गए इन पदों पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति अलग अलग वर्ग में की जाएगी. अगर आप भी भर्ती में आवेदन करना चाहते हैं और इन पदों के लिए योग्य हैं तो आप आवेदन करने की आखिरी तारीख 8 दिसंबर से पहले इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं.

पदों का विवरण- कुल 427 उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा, जिसमें क्रेडिट रिस्क हेड का एक पद, आई सिक्योरिटी के 5 पद, रिलेशनशिप मैनेजर के 2 पद, सेल्स के 150 पद, ट्रेड फाइनेंस के 50 पद आरक्षित है.

योग्यता- इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को एमबीए या इसके समकक्ष डिग्री या डिप्लोमा किया होना आवश्यक है. वहीं पार्ट-टाइम कोर्स किए हुए उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.

आयु सीमा- इसमें जेएमजी पदों के लिए 21 से 30 साल तक, एमएमजी पदों के लिए 25 से 37 साल तक और एसएमजी पदों के लिए 30 से 45 साल तक के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं.

चयन प्रक्रिया- उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा और इंटरव्यू के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा.

आवेदन फीस- भर्ती में आवेदन करने के लिए एससी-एसटी, दिव्यांग उम्मीदवारों को 100 रुपये और अन्य उम्मीदवारों को 600 रुपये फीस देनी होगी. फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग के आधार पर किया जा सकता है.

ऐसे करें अप्लाई- आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.bankofbaroda.co.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

चोट के बावजूद पहला एशेज टेस्ट खेलेंगे डेविड वॉर्नर

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ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज डेविड वॉर्नर गले की चोट के बावजूद इंग्लैंड के खिलाफ कल से शुरू हो रहा पहला टेस्ट खेलेंगे. 31 साल के उपकप्तान वॉर्नर को इस सप्ताह अभ्यास के दौरान कैच लपकते हुए गर्दन में चोट लगी थी.

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ ने कहा कि उनकी स्थिति में सुधार आया है. उन्होंने कहा, ‘वह आत्मविश्वास से ओतप्रोत हैं और खेलने को तत्पर भी. चोट लगना खेल का हिस्सा है. उनकी हालत में सुधार आया है और उम्मीद है कि मैच के समय तक वह शत प्रतिशत फिट हो जाएंगे.’

एक दिन पर वॉर्नर ने कहा था,‘मेरे गले में जकड़न है. मैंने ऊंचा कैच लपका और मेरे गले में चोट लग गई. ऐसी जकड़न पहले कभी महसूस नहीं हुई.’ उन्होंने कहा,‘मुझे नहीं लगता कि गले में सूजन के कारण मैं मैच से बाहर रहूंगा. यह चोट अगले एक-दो दिन में ठीक हो जाएगी. मुझे अपनी तकनीक पर कुछ काम करना होगा.’

यूपी निकाय चुनावः 24 जिलों में शाम 5 बजे तक होगी वोटिंग

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 24 जिलों में बुधवार सुबह नगर निकाय के पहले चरण का मतदान जारी है. जिनमें शामली, मेरठ, हापुड़, बिजनौर, बदायूं, हाथरस, कासगंज, आगरा, कानपुर नगर, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, कौशांबी, प्रतापगढ़, उन्नाव, हरदोई, अमेठी, फैजाबाद, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, गाजीपुर और सोनभद्र जिले शामिल है. कुल 230 निकायों में 1.09 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल शाम 5 बजे तक करेंगे.

इस बार नगर निगमों के चुनाव ईवीएम से हो रहे हैं जबकि नगर पालिका और नगर पंचायत के लिए बैलेट पेपर का प्रयोग किया जा रहा है. संवेदनशील मतदान केंद्रों की वेब कास्टिंग भी की जा रही है. पहले चरण में 40 कंपनी केंद्रीय बल भी तैनात किए गए हैं.

सत्तारूढ़ भाजपा के लिए यह चुनाव सबसे अहम है क्योंकि पहले चरण में शामिल 5 में 4 नगर निगमों पर भाजपा का कब्जा था. वहीं, अयोध्या उसकी सियासत की केंद्रीय धुरी है. सपा, कांग्रेस के साथ पहली बार सिंबल पर चुनाव लड़ रही बसपा भी भाजपा की जमीन खिसकाने की कोशिश में है.

आंकड़ों की नजर से 230 कुल निकाय 05 नगर निगम 71 नगर पालिका 154 नगर पंचायत 26,314 उम्मीदवार 1.09 करोड़ मतदाता 3732 मतदान केंद्र

रेल मंत्री पीयूष गोयल का बड़ा ऐलान- बंद होंगे डीजल इंजन

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नई दिल्ली। केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि भारतीय रेल से अगले 5 सालों में डीजल इंजन को पूरी तरह से बाहर कर दिया जाएगा इसकी जगह बिजली इंजन का उपयोग किया जाएगा। इससे ट्रेन की गति भी बढ़ेगी और लोगों का समय भी बचेगा। जिसके बाद डीजल इंजन एक तरह से बंद ही हो जाएगा।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि अगले बजट में रेलवे को अधिक धन की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह अपनी संपत्तियों के बदलाव पर भी जोर देगी. गोयल ने फिक्की की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठक से इतर संवाददाताओं से कहा, “इससे पहले, मैंने सुझाव दिया था कि आनेवाले दिनों में रेलवे को ज्यादा धन की जरूरत नहीं होगी, जितना इसे पिछले तीन बजट में दिया गया है.”

मंत्री ने कहा, “पिछले तीन सालों में रेलवे में संप्रग दो यानि मनमोहन सरकार की तुलना में दोगुना धन आवंटित किया गया, और इस साल (वित्त वर्ष 2017-18) हमने करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है. रेलवे को सुरक्षा और यात्री सुविधाएं बढ़ाने के लिए भारी धन राशि दी गई है.”

उन्होंने कहा, “मेरी प्राथमिकता रेलवे में यह देखना है कि यह खुद अपने आंतरिक श्रोतों से कैसे कमाई कर सकता है. इसलिए रेलवे को आंतरिक स्त्रोतों से कमाई करनी होगी. कई संपत्तियां हैं, जिससे रेलवे पैसा बना सकता है.” रेलवे अपने श्रोतों से इकट्ठा किए गए धन से, ‘अपनी सेवाओं को सुधारेगा, कुशलतापूर्वक चलाएगा और लोगों की सेवा करेगा.’ अगले बजट में किराया बढ़ाने की योजना के बारे में पूछे जाने पर गोयल ने कहा, “मैं समझता हूं कि हमें किराया बढ़ाने के बजाए कुशलता बढ़ानी चाहिए.”

भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, ICJ में दूसरी बार जज चुने गए दलवीर भंडारी

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dalveer bhandari

संयुक्त राष्ट्र। जस्टिस दलवीर भंडारी को हेग स्थित अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय (आईसीजे) के लिए दोबारा चुन लिया गया है. उनका मुकाबला ब्रिटेन के जस्टिस क्रिस्‍टोफर ग्रीनवुड से था. लेकिन ब्रिटेन को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपेक्षित समर्थन नहीं मिला. लिहाजा ब्रिटेन ने अंतिम समय में उनकी उम्मीदवारी वापस ले ली. इस प्रकार बहुमत के समर्थन से जस्टिस दलवीर भंडारी (70) को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए आईसीजे के लिए चुना गया. चुने जाने के बाद जस्टिस भंडारी ने कहा कि मैं उन सभी देशों को आभारी हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया. आप सभी जानते हैं कि यह मुकाबला काफी बड़ा था.

अंतिम क्षणों में ब्रिटेन के हटने की घोषणा से सुरक्षा परिषद को झटका लगा है, क्योंकि परिषद के सभी महत्‍वपूर्ण मामलों में स्थायी सदस्यों की अहम भूमिका होती है लेकिन इसके बावजूद संयुक्त राष्ट्र महासभा के समर्थन के बूते जस्टिस दलवीर का चुना जाना संयुक्त इसके स्थायी सदस्यों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

जस्टिस दलवीर भंडारी की जीत से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य ‘सकते’ में है, क्योंकि यह एक मिसाल तय करेगा जो भविष्य में उनकी शक्ति को चुनौती दे सकता है. पर्यवेक्षकों का ऐसा आंकलन है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्य- अमेरिका, रूस, फ्रांस और चीन ग्रीनवुड के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे थे. सुरक्षा परिषद का पांचवां स्थायी सदस्य ब्रिटेन है.

बहरहाल, वीटो की शक्ति रखने वाले पांच स्थायी सदस्यों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से भारत की जीत की संभावना से ये पांचों देश- ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस, और अमेरिका सकते में हैं क्योंकि यह एक मिसाल पेश करेगा और वे नहीं चाहते कि यह हो. सूत्रों ने कहा कि आज ब्रिटेन है और कल हममें से कोई भी हो सकता है. इस दलील ने इन सभी पांच सदस्यों को साथ ला दिया है.

10वीं बार RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने लालू यादव

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पटना। लालू यादव राष्ट्रीय जनता दल(राजद) के दसवीं बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं. पटना के एसकेएम हॉल में आयोजित राजद के खुले अधिवेशन में उनको पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार सौंपा गया. इस कार्यक्रम में बिहार एवं झारखंड समेत 24 राज्यों के कार्यकर्त्ता शामिल हुए. कार्यक्रम का आयोजन पार्टी के वरिष्ठ नेता की अध्यक्षता में किया गया. कार्यक्रम में लालू को चांदी का मुकुट और तलवार भी भेंट की गई.

राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के बाद लालू यादव ने पीएम नरेंद्र मोदी से पूछा कि काला धन कहां है? उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने काला धन लाने के नाम पर जनता को धोखा दिया. नरेंद्र मोदी ने चुनाव के समय कहा था कि स्विस बैंक में इंडिया के लोगों का इतना पैसा जमा है, जिससे सभी गरीबों की तंगी दूर हो जाएगी. काला धन लाने और उसे गरीबों को देने के नाम पर नरेंद्र मोदी ने देश की गरीब जनता से चीटिंग की. वह सबसे बड़े चीटर हैं.

लालू ने कहा कि जदयू के पास पहले से चार गरीहन्डा (गाली देने वाले) प्रवक्ता थे. अब भाजपा के पास एक हथ कटवा (हाथ काटने वाला) नेता भी है. वह लोगों के हाथ काटने की बात करते हैं. कैसी राजनीतिक कर रहे हैं भाजपा के लोग. लालू ने कहा कि देश आर्थिक तंगी की ओर बढ़ रहा है. कृषि खत्म हो गई है. पीएम बोले थे कि किसानों को उनकी लागत का चार गुणा पैसा देंगे.सरकार में आने के बाद किसानों को कितना पैसा मिला. यूपी में बीजेपी ने कहा था कि सरकार बनने पर पहली कैबिनेट मीटिंग में किसानों का कर्ज माफ करेंगे. कितना कर्ज माफ किया? एक और दो रुपए.

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर लालू अब 2020 तक पार्टी की कमान संभालेंगे. इस मौके पर उनकी पत्नी राबड़ी देवी और दोनों पुत्र तेजस्वी और तेजप्रताप भी उपस्थित थे.

पद्मावती विवादः ‘अंग्रेजों के सम्मान में झुककर 40 सलाम करते थे राजा-महाराजा’

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नई दिल्ली। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर चल रहे विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने विवादित बयान दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आजम ने रामपुर में चुनावी सभा के दौरान ‘पद्मावती’ विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि यह कैसी राजगिरी है, एक फिल्म में डांस करने वाली ‘नचनिया’ से डर गए. बड़ी-बड़ी पगड़ियां लगाकर फिल्मों का विरोध कर रहे हैं. फिल्मों की मुखालिफत नहीं की जाती है, मजे लिए जाते हैं.

आजम खान ने ये भी कहा कि आज जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं जो वो कल तक अंग्रेजों के बस्ते उठाया करते थे. अंग्रेजों के सम्मान में झुककर 40 सलाम करते थे. आजम खान से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी इस फिल्म का विरोध करने पर राजपूतों के लिए आपत्तिजनक बात कही थी. थरूर ने कहा था कि ब्रिटिशों ने जब मान सम्मान रौंदा था तो भाग खड़े हुए थे ये महाराजा.

आजम खान ने कहा कि मुसलमानों का दिल बड़ा था इसलिए हमने मुगलेआजम का विरोध नहीं किया था. इस फिल्म में अनारकली को सलीम की महबूबा बताया गया था. सच्चाई तो यह है कि ऐसी कोई कहानी नहीं है. इतिहास से इसका कोई लेना देना नहीं, कोई वास्ता नहीं. सुनते हैं, अनारकली नाम की कोई तवायफ लाहौर में रहा करती थी. फिल्म में बाप-बेटे का मुकाबला दिखाया गया था. किसी मुसलमान ने कोई विरोध नहीं किया, क्योंकि यह कहानी थी.

गौरतलब है कि पद्मावती को लेकर राजपूत और कुछ हिंदू संगठनों में भारी गुस्सा है. फिल्म का विरोध कर रहे इन लोगों का कहना है कि इस फिल्म में संजय लीला भंसाली ने राजपूतों के इतिहास के साथ छेड़छाड़ की है. फिल्म पर चल रहे विवाद को देखते हुए इसकी निर्माता कंपनी ने रिलीज़ डेट भी आगे बढ़ा दी है. पहले ये फिल्म 1 दिसंबर को रिलीज़ होनी थी लेकिन अब ये कब पर्दे पर दिखेगी इस बारे में कोई तारीख तय नहीं की गई है.

प्रद्युम्न मर्डर केसः कंडक्टर के मामा और आरोपी छात्र के रिश्तेदार का ऑडियो वायरल

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नई दिल्ली। प्रद्युम्न ठाकुर मर्डर केस को लेकर आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं. इसी बीच आरोपी कंडक्टर अशोक और आरोपी छात्र के रिश्तेदारों के बीच बातचीत का ऑडियो वायर हो रहा है. इस ऑडियो में आरोपी अशोक का मामा ओपी चोपड़ा आरोपी छात्र के एक रिश्तेदार से बातचीत कर रहा है.

इस बातचीत में आरोपी कंडक्टर का मामा कह रहा है कि अशोक को तो सीबीआई से क्लीन चिट मिली है और वो छूठ जाएगा. अशोक को निकल जाने दे फिर मैं तुम्हारे साथ आ जाउंगा. कंडक्टर अशोक कुमार के मामा ओपी चोपड़ा कह रहे हैं कि हम इस मामले को घुमा देंगे और सारा दोष स्कूल पर डाल देंगे. ऑडियो वायरल होने के बाद अशोक के मामा को सीबीआई ने पूछताछ के लिए बुलाया है.

पहला ऑडियो

ओ.पी. चोपड़ा (अशोक का मामा)- मैं तुम्हें टेक्निक बताऊंगा. मैंने तुम्हारा नंबर डिलीट कर दिया है, जो मैंने दुकान से लिया था. मीडिया मेरे पास आएगा. तुम यहां मत आना. जल्दबाजी में मामला खराब हो सकता है. ये केस तुम्हार फेवर में रहेगा. हम लोग इस मामले को नया मोड़ दे देंगे और सारा दोष स्कूल पर डाल देंगे. ये स्कूल की ओर से किया है.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- जी ये स्कूल की ओर से ही किया गया है.

ओ.पी. चोपड़ा- तुम नहीं जान सकते ये कैसे हुआ.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- आप मुझे बताएं इस मामले से कैसे निपटा जाए.

ओ.पी. चोपड़ा- ठीक है वक्त आने पर बताऊंगा कि कब और क्या करना है. जल्दबाजी मत करो.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- आप मुझे बताएं कि कहां आना है?

ओ.पी. चोपड़ा- मैं तुम्हें बताऊंगा कि कौन लोग हैं जो तुम्हारी मदद कर सकते हैं.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- आप किस वक्त मुझे कॉल करेंगे?

ओ.पी. चोपड़ा- पहले मुझे मेरे भांजे अशोक को इस मामले से निकालना है. वकील साहब (आरोपी स्टूडेंट का पिता) से कहिए कि वो परेशान न हों. नहीं तो वो अपने बेटे को खो देंगे. आशा मत छोड़िए, मैं आपकी मदद करूंगा. ये सीबीआई का मामला है. अगर ये लोकल पुलिस का मामला होता तो अब तक निपट गया होता. सीबीआई को जांच करने दीजिए.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- क्या हमारे पास पूरे सबूत हैं.

ओ.पी. चोपड़ा- हां हमारे पास पूरे सबूत हैं. मैं आपको बताऊंगा कि स्कूल की क्या गलती है.

दूसरा ऑडियो

ओ.पी. चोपड़ा- तुम दुकान पर नहीं हो क्या? मैं ड्राइवर के परिवार से मिला. ड्राइवर और माली को टॉर्चर किया गया है. हमें कुछ करना होगा.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- हां, हमें कुछ तो करना होगा.

ओ.पी. चोपड़ा- दोनों ने मुझसे कहा कि आपका बच्चा निर्दोष है. प्रिंसिपल दोषी हैं. उन्होंने इस मामले में बच्चे को फंसा दिया. आप शांत रहें.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- हां हम शांत हैं और कुछ नहीं कर रहे.

ओ.पी. चोपड़ा- सीबीआई किसी को मारती नहीं है. अशोक को भी कभी नहीं मारा गया. मीडिया हमारे फेवर में है. अब मेरा ध्यान स्कूल के स्टॉफ पर है. मैं इस मामले को अलग-अलग चैनल में ले जाऊंगा. सीबीआई की खिलाफत मत करो.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- हां, अशोक जानता है कि क्या सही है और क्या गलत. वो सच जानता है.

ओ.पी. चोपड़ा- उसे बाहर आने दो. वो दो तीन महीने में बाहर आ जाएगा.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- क्या उनकी ओर से तुम्हें पैसे दिए गए?

ओ.पी. चोपड़ा- नहीं ये सब गलत है.

तीसरा ऑडियो

ओ.पी. चोपड़ा- जल्दबाजी में मत रहो. एक और लड़के का नाम सामने आएगा. इस मामले में स्कूल का रोल भी सामने आने वाला है.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- अच्छा जी, हम कुछ नहीं कर रहे.

ओ.पी. चोपड़ा- भाई साहब (आरोपी स्टूडेंट का पिता) से कहिए कि वो शांत रहें.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- आशोक कब बाहर आ रहा है?

ओ.पी. चोपड़ा- उसे बाहर आने दो, फिर मैं तुम्हारे साइड हो जाऊंगा.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- दूसरा लड़का कौन है? हम कब मिल सकते हैं. सारी बातें फोन पर नहीं की जा सकती.

ओ.पी. चोपड़ा- नहीं-नहीं मुझसे मिलने की जरूरत नहीं. मैं मीडिया से घिरा हुआ हूं.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- ठीक है जैसा आप कहें.

ओ.पी. चोपड़ा- सभी बच्चे फंसाए जा रहे हैं.

आरोपी स्टूडेंट का रिश्तेदार- हां, पहले अशोक और अब ये लड़का.

अंडमान में अपने अस्तित्व की लड़ाई रहे हैं झारखंडी आदिवासी

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अंडमान-निकोबार को झारखंडियों ने अपनी कर्मठता और मेहनत के बल पर सुगम बनाया है. छोटानागपुर के आदिवासियों ने इस दुर्गम भूखंड को रहने लायक बनाया़. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के घनघोर जंगलों के चप्पे-चप्पे में झारखंड के आदिवासियों के पौरुष की कहानी है. झारखंडियों ने अंडमान-निकोबार में दूसरों को बसाया. इस खूबसूरत वादियों में आज लोग रहते हैं. देश-दुनिया से लोग अंडमान-निकोबार को देखने पहुंचते हैं. लगभग सौ वर्ष पहले दक्षिणी छोटानागपुर से हजारों की संख्या में झारखंड के आदिवासियों को जंगल कटाई के लिए यहां लाया गया था़. आज इनकी दूसरी पीढ़ी अंडमान-निकोबार के विभिन्न द्वीपों में रहती है. अकेले पोर्ट ब्लेयर में 50 हजार से ज्यादा झारखंड के आदिवासी होंगे़ गुमला, खूंटी, सिमडेगा, रांची जैसे इलाके के आदिवासी यहां हैं. झारखंड के आदिवासियों ने अंडमान-निकोबार को अपना बनाया़. यहां रच-बस गये, लेकिन इस भू-भाग में वे पहचान की संकट झेल रहे हैं. झारखंड के आदिवासियों को यहां एसटी का दर्जा नहीं है. आदिवासी होने के अधिकार से वंचित हैं. वर्षों से यहां झारखंडी आदिवासी अपनी पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं. सरकारी नौकरियों में किसी तरह का आरक्षण नहीं मिल रहा है. केंद्र शासित इस प्रदेश में सरकारी नौकरी में झारखंडियों की भागीदारी नगण्य है. खेतीबाड़ी के लिए इनके पास जमीन नहीं है. झारखंड के आदिवासियों को पोर्ट ब्लेयर में लोग रांची भाई पुकारते हैं, लेकिन बस केवल कहने भर के लिए झारखंडी आदिवासी को भाई कहा जाता है, व्यवहार सौतेला है. दूसरों को बसाने वाले हो गये अतिक्रमणकारी अंडमान-निकोबार में दूसरों के सहज जीवन के लिए खून-पसीना बहाने वाले झारखंडी आदिवासी ही यहां अतिक्रमणकारी हो गये़. र्षों पहले इनके मां-बाप या दादा-दादी अंडमान-निकोबार आये थे़. किसी परिवार के बसे हुए 100 वर्ष हो गये, तो किसी के 70 वर्ष़ लेकिन इनको अपने बसेरे के लिए जमीन नहीं मिली़. अलग-अलग जगहों पर जंगल काट कर अपना घर-बगान बनाया है, लेकिन सरकार इसको अवैध मानती है़. पोर्ट ब्लेयर में भी एक छोटी सी बस्ती है, लेकिन सरकार की नजर में यह अतिक्रमण है़ पोर्ट ब्लेयर की एक दुकान में काम करने वाली युवती सिलबिया ने बताया कि हमारे पास जमीन नहीं है. वर्षों पहले पिताजी जंगल विभाग में काम करते थे. उन्होंने ही एक छोटी सी जमीन में घर बनाया है. हमें किसी तरह की सरकारी सहायता नहीं मिलती है. हमें इनक्रोचर बताया जाता है. लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं झारखंडी झारखंडी आदिवासी अपनी मुकम्मल पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं. देश की आजादी के बाद भी इस भू-भाग में इनको अधिकार नहीं मिला़ इस बड़े समुदाय के लिए प्राइवेट की छोटी नौकरियां और मजदूरी करने की विवशता है़ पोर्ट ब्लेयर से दिगलीपुर की तरफ जाते हुए फेरारगंज, बाराटांग, जिरकाटांग एवं रामनगर में रांची भाई की बस्तियां हैं. इस बड़े समुदाय ने प्रधानमंत्री रहे इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी के सामने दूसरी जगहों की तरह अंडमान में भी आदिवासी दर्जा दिये जाने की मांग की है. वर्षों से लड़ाई लड़ रहे हैं. इन समुदायों द्वारा बार-बार धरना-प्रदर्शन किया जाता है और जुलूस निकाला जाता है. रांची भाइयों का अपना संगठन है, लेकिन हक आज तक नहीं मिला़.

…पोर्ट ब्लेयर से लौटकर आनंद मोहन. प्रभात खबर से साभार

हजारों परिवारों का पेट भर रही लाल चींटे-चींटियों की चटनी

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बस्तर। छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग वैसे तो नक्सली घटनाओं के लिए ही चर्चा में रहता है, लेकिन वनाच्छादित यह क्षेत्र आदिवासी संस्कृति की तमाम खूबियां के लिए भी जाना जाता है. प्राकृतिक सौंदर्य से लदा बस्तर अपनी परंपराओं, खान-पान, कला, सांस्कृतिक गतिवधियों, तीज-त्योहार और उत्सवधर्मिता के लिए विशिष्ट पहचान रखता है. इनमें से कई तो काफी विचित्रता लिए हैं, जैसे चापड़ा चटनी. पेड़ों पर पाए जाने वाले लाल चींटे-चींटियों से यहां के आदिवासी चापड़ा चटनी बनाते हैं.

औषधीय गुणों से युक्त यह चटनी विदेशी सैलानियों को भी दीवाना बना चुकी है. इस कारोबार में लिप्त आदिवासी समाज का दावा है कि चापड़ा चटनी अनेक बीमारियों तक को हर लेती है जबकि स्वाद के कहने ही क्या. यह चटनी रोजगार का बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है. हालांकि यह शाकाहारियों के लिए नहीं है. कोलावल के सुदन कहते हैं कि वह और उनके साथी तड़के पांच-छह बजे जंगल जाकर चापड़ा एकत्र करते हैं और सुबह नौ बजे वाली

बस से जगदलपुर आ जाते हैं. यहां चापड़ा बेचने वाली महिलाएं उसे खरीद लेती हैं. ऐसा कर वे प्रतिमाह पांचसात हजार रुपये कमा लेते हैं. इसे दस रुपये दोनी (छोटा दोना) के भाव से बेचा जाता है. बाजार में दशापाल, सरगीपाल, नानगूर, मेटगुड़ा, दरभा, बड़े बोदल आदि गांवों की महिलाएं भी चापड़ा बेचने पहुंचती हैं.

संजय बाजार में पिछले 10-12 साल से चापड़ा बेच रहीं राताखंडी की फूलो कश्यप, दशापाल की नंदना भातरा, कोष्टागुड़ा सोनपुर की सोमारी कश्यप व मेटगुड़ा की चिंगरी कश्यप बताती हैं कि चापड़ा कच्चा धंधा है. लोग जीवित चापड़ा चींटी खरीदना पसंद करते हैं इसलिए इन्हें सहेजने में बड़ी परेशानी होती है.

ऐसे पकड़ते हैं कोलावल के सुदन ने बताया कि पेड़ों में पत्तों से बनाए छत्तानुमा घरोंदों में लाल चींटे या चींटियां झुंड में रहते हैं. इन्हें एकत्र करने के लिए आदिवासी हाथ में राख लगाकर पेड़ पर चढ़ते हैं. इससे चींटियों के काटने पर जलन कम होती है. इन छत्तों को झटके से थैलीनुमा टोकरी में झाड़ने से चींटियां उसमें भर जाती हैं. उन्होंने बताया कि लोग जिंदा चींटों की चटनी बनाना ही पसंद करते हैं क्योंकि मरने के कुछ देर बाद उसके अम्लीय तत्व खराब होने लगते हैं.

औषधीय गुणों से युक्त है चापड़ चटनी आमतौर पर आम, जामुन, अमरूद, साल, काजू, अर्जुन आदि वृक्षों में लाल चींटों का छत्ता होता है. बस्तर संभाग में इन लाल चींटों के छत्ते को चापड़ा कहा जाता है. इसी से यहां के आदिवासी चटनी बनाते हैं. औषधीय गुणों से युक्त यह चटनी स्वादिष्ट भी खूब होती है. इसकी बढ़ती मांग के चलते बस्तर के हजारों ग्रामीणों के लिए चापड़ा चटनी रोजगार का स्थायी माध्यम बन चुकी है. बुखार, पित्त, सिरदर्द व बदन दर्द में आदिवासी इसी का प्रयोग करते हैं. हालांकि, संपन्न् वर्ग में इसका इस्तेमाल खान-पान के साथ होता है.

हेमंत कश्यप की रिपोर्ट नई दुनिया से साभार है

चार धावकों का 200 मीटर फाइनल में राष्ट्रीय रिकार्ड से भी बेहतर प्रदर्शन

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विजयवाड़ा। चार धावकों ने आज यहां 33वीं जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के अंतिम दिन अंडर 16 लड़कों के 200 मीटर फाइनल में राष्ट्रीय रिकार्ड से बेहतर प्रदर्शन किया. दिल्ली के फर्राटा धावक निसार अहमद ने 21. 73 सेकेंड के समय के साथ नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता. महाराष्ट्र के रजत पदक विजेता करण (21. 99 सेकेंड), कर्नाटक के कांस्य पदक विजेता शशिकांत (22.00 सेकेंड) और एएफआई पंजाब के सतनाम सिंह (22.04 सेकेंड) 22.11 सेकेंड के पिछले रिकार्ड से बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे.

लड़कों की अंडर 18 त्रिकूद में तमिलनाडु के मणिराज ने 15.83 मीटर के प्रदर्शन से 15. 63 मीटर का पिछला रिकार्ड तोड़ते हुए सोने का तमगा जीता. चैंपियनशिप के अंतिम दिन छह मीट रिकार्ड बने.

अंडर 18 लड़कों की 200 मीटर दौड़ में दिल्ली के अक्षय नैन ने 21.59 सकेंड के केरल के जिजिन विजयन के 2011 के पिछले रिकार्ड की बराबरी करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. हरियाणा की टीम 408 अंक के साथ ओवरआल चैंपियन बनी. उत्तर प्रदेश ने हरियाणा के साथ लड़कों का टीम चैंपियनशिप खिताब बांटा. केरल ने लड़कियों की चैंपियनशिप जीती.

12वीं पास के लिए SSC ने निकाली 3259 पदों पर वैकेंसी

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने लॉअर डिविजन क्लर्क, जूनियर सेक्रेटेरियट असिस्टेंट, पोस्टल असिस्टेंट और डेटा एंट्री ऑपरेटर पदों पर भर्ती निकाली है. इन पदों के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 18 दिसंबर, 2017 तक आवेदन कर सकते हैं. आवेदन से जुड़ी जानकारी नीचे दी गई हैं.

संस्थान का नाम Staff Selection Commission (SSC)

पदों के नाम लॉअर डिविजन क्लर्क जूनियर सेक्रेटेरियट असिस्टेंट पोस्टल असिस्टेंट डेटा एंट्री ऑपरेटर

पदों की संख्या नोटिफिकेशन के अनुसार कुल पदों की संख्या 3259 है.

योग्यता इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार ने किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से 12वीं कक्षा पास की हो.

सैलरी Lower Division Clerk : 5,200 से 20, 200 रुपये.

Junior Secretariat Assistant : 5,200 से 20,200 रुपये.

Postal Assistant: 5,200 से 20200 रुपये.

उम्र सीमा आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 18 साल और अधिकतम आयु 27 साल होनी चाहिए.

चयन प्रक्रिया इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन कंप्यूटर द्वारा लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा.

अंतिम तिथि 18 दिसंबर 2017

कैसे करें आवेदन आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

आगरा में दलित परिवार पलायन को मजबूर

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agra

आगरा। उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार रूकने का नाम नहीं ले रहा है. राज्य के हर जिले से दलितों के साथ मारपीट-भेदभाव की खबरें आए दिन आ रही है. इसी क्रम में आगरा के बरनाहल थाना क्षेत्र के विनायकपुर में मनुवादियों के अत्याचार से पीड़ित दलित परिवार गांव से पलायन करने को मजबूर है.

दरअसल, शनिवार(18 नवंबर) की रात गांव की महिला प्रधान के पति और उसके साथियों ने दलित परिवार को बंदूक के दम पर धमका कर उनकी जमीन पर भगवान की मूर्ति स्थापित कर दी. जब दलित परिवार ने इसका विरोध किया तो मनुवादियों ने हवा में फायरिंग कर दी. जिससे दलित परिवार डर गया.

विधवा पीड़िता अनीता देवी ने बताया कि दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अभी तक भगवान की मूर्ति नहीं हटवाई है. परिवार दहशत में है. उन्होंने आगे कहा कि अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो परिवार गांव से पलायन करने को मजबूर होगा.

पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान के पति शिवानंद यादव, गौरव, मुनीश, अवनीश, यशपाल, अजय उर्फ चांदा, सोनेलाल, संजय और रमनकांत के खिलाफ एससी/एसटी समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है. लेकिन अभी तक जमीन पर स्थापित की गई मूर्ति को नहीं हटवा पाई है और ना ही किसी आरोपी को गिरफ्तार कर पाई है.

LIC पॉलिसी लेते वक्त ध्यान रखें ये 7 बातें

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नई दिल्ली। अगर आप भी भारतीय जीवन बीमा निगम से कोई बीमा पॉलिसी ले रहे हैं तो आपको कुछ बातें ध्यान रखनी चाहिए. एलआईसी को अधिकतर लोग सबसे अच्छा मानते हैं और इसी का फायदा उठाकर धोखाधड़ी करने वाले लोग भी लोगों को ठगने की कोशिश करते हैं. एलआईसी ने लोगों को ऐसी धोखाधड़ी से बचाने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है. इसमें 7 खास बातें बताई गई हैं, जिनका पॉलिसी लेते समय ध्यान रखना जरूरी है. आइए जानते हैं क्या हैं ये 7 बातें. 1- साइन करने से पहले पढ़ें- भले ही आपको पॉलिसी कोई एजेंट दे रहा हो या फिर कोई और, लेकिन कोई भी पॉलिसी लेने से पहले उसे ध्यान से पढ़ें. बीमा पॉलिसी से जुड़ी सभी नियम व शर्तों को ध्यान से पढ़ने के बाद ही पॉलिसी पर साइन करें. 2- असली दस्तावेज किसी को न दें- एलआईसी के किसी भी एजेंट को किसी शख्स से उसके असली दस्तावेज लेने का अधिकार नहीं है. अगर आपसे कोई आपके दस्तावेज मांगता है तो उसे सिर्फ फोटोकॉपी ही दें. किसी को भी अपने असली दस्तावेज न दें. 3- झांसों में न आएं- अगर एलआईसी के नाम से आपको कोई फोन आए और वह आपके कंपनी के नाम पर कोई लुभावना ऑफर दे तो उसकी जांच जरूर करें. ऐसा भी हो सकता है कि वह किसी धोखेबाज का फोन हो. फोन पर किसी को भी अपनी कोई निजी जानकारी न दें. 4- बकाया किस्त के लिए फोन से रहें सतर्क- कई बार एलआईसी की तरफ से बकाया किस्त भरने के लिए भी फोन आता है. ध्यान रहे कि कभी भी एलआईसी ऐसा कोई फोन नहीं करती है. अगर आपके पास ऐसा कोई फोन आए तो तुरंत उसकी शिकायत एलआईसी से करें. 5- चेक देने से पहले यह ध्यान रखें- अगर आप अपनी बीमा पॉलिसी की रकम चेक के जरिए देना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि उसे सिर्फ Life Insurance corporation of India के फेवर में ही दें. अगर कोई एजेंट किसी दूसरे नाम से चेक देने की बात करे तो एक बार कंपनी से बात करें तभी कोई फैसला लें. वरना आपके साथ ठगी हो सकती है. 6- शंका होने पर पूछें- अगर आपको कोई समस्या हो तो पॉलिसी के बारे में एजेंट से बात जरूर करें. अगर एजेंट कोई आनाकानी करे तो उससे पॉलिसी न लें. अपने मन में किसी भी तरह की शंका न रखें. पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद ही पॉलिसी लें. 7- स्टेटस चेक करते रहें- अपनी बीमा पॉलिसी का बीच-बीच में स्टेटस जरूर चेक करते रहें. इससे आपको यह साफ रहेगा कि जो भी प्रीमियम आपने दिया है, वह एलआईसी तक पहुंचा भी है या नहीं.

थरूर के बयान से निराश नहीं हैं मानुषी छिल्लर

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मुंबई। मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर का कहना है कि विश्व सुंदरी का ताज मिलने की सफलता से वह इतना आनंदित हैं कि कांग्रेस नेता शशि थरुर द्वारा उनके उपनाम का मजाक उड़ाये जाने से निराशा नहीं हुई. मानुषी के मिस वर्ल्ड बनने से 17 वर्षों बाद भारत के हिस्से में यह खिताब आया है. यह खिताब जीतने वाली छठी भारतीय मानुषी ने ट्वीट किया, जिस लडकी ने अभी अभी दुनिया जीती है वह किसी मजाक से नाखुश नहीं होगी. हमें नहीं भूलना चाहिए कि चिल्लर में चिल भी है. कांग्रेस सांसद ने कल ट्वीट कर उनके उपनाम का मजाक उडाया था.

थरुर ने कहा था, हमारी करंसी की नोटबंदी कर कितनी गलती की गई. भाजपा को महसूस करना चाहिए कि भारतीय नकदी पूरी दुनिया में प्रभाव रखती है. देखिए हमारी छिल्लर भी मिस वर्ल्ड बन गई. मानुषी का उपनाम लेकर केंद्र द्वारा की गई नोटबंदी प्रहार करना पूर्व मंत्री को उल्टा पड गया और सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हुई.

बहरहाल, टाइम्स ग्रुप के एमडी विनीत जैन ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट पर कहा कि थरुर का बयान आक्रामक नहीं था. सौंदर्य प्रतियोगिता के भारतीय चैप्टर में जैन की भी भूमिका होती है. उन्होंने लिखा, मैंने मानुषी छिल्लर के बारे में शशि थरुर का बयान देखा. वह टाइम्स गर्ल हैं लेकिन मुझे यह अपमानजनक नहीं लगा. हमें मजाक के बारे में ज्यादा सहिष्णु बनना चाहिए. मानुषी ने जैन का समर्थन करते हुए ट्वीट किया, निश्चित तौर पर. विनीत जैन मैं आपसे सहमत हूं.

मोदी पर उंगुली उठाने वालों का हाथ काटेंगे भाजपा अध्यक्ष!

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पटना। बिहार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने विवादित बयान दिया है. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कठिन परिस्थितियों से निकलकर देश का नेतृत्व कर रहे हैं. ये हमारे लिए गर्व की बात है. यदि उन पर कोई उंगली उठाएगा तो उसका हाथ काट देंगे.

नित्यानंद राय, वैश्य और कनु समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. मोदी के प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को लेकर राय ने कहा कि मोदी की मां ने खाना परोसने का काम किया. आज उस परिस्थिति से उठकर वो देश के पीएम बने हैं. एक गरीब का बेटा पीएम बना है, उसका स्वाभिमान होना चाहिए. हर व्यक्ति को इसकी इज्जत करनी चाहिए.

उन्होंने आगे कहा कि उनकी ओर उठने वाली उंगली और हाथ को हम सब मिलकर तोड़ देंगे और जरुरत पड़ी तो काट भी डालेंगे. बता दें कि इस कार्यक्रम के दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी सहित भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद थे. बयान को लेकर नित्यानंद राय से मीडिया ने जब सवाल पूछे तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि मैंने हाथ काटने वाली बात एक मुहावरे के रूप में कही थी. इसे विपक्षी पार्टी और आम आदमी से जोड़ कर नहीं देखा जाए. मोदी के संघर्ष पर सवाल उठाना गलत है.

राय के बयान के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भाजपा पर तीखा वार किया. उन्होंने कहा कि भाजपा किस बात पर गर्व कर रही है. उनके पास गर्व करने लायक कुछ भी नहीं है.

गौरतलब है कि राय वैशाली से आते हैं और दिसंबर 2016 में बिहार भाजपा के अध्यक्ष बने थे. उनकी मदद से भाजपा बिहार में दबदबा कायम करना चाहती है. हाजीपुर से एमएलए रहे राय को भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनावों में उजियारपुर से टिकट दिया था. उन्हें राज्य में सुशील मोदी, नंद किशोर और प्रेम कुमार के अलावा एक बड़े नेता के तौर पर गिना जाता है.

राहुल-तेजस्वी के लंच पर इतना हंगामा है क्यों बरपा?

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कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले कुछ दिनों में दो निर्णय लिए. एक उन्होंने झारखंड में पार्टी की कमान एक ऐसे व्यक्ति डॉक्टर अजय कुमार के हाथ में दी जो कुछ साल पहले ही पार्टी में आए हैं. दूसरा राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव के पुत्र और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने साथ भोजन किया. लंच तेजस्वी के साथ किया गया और भुगतान राहुल गांधी ने किया, लेकिन यह भोजन और ख़ासकर इसकी तस्वीर कई लोगों को पच नहीं रही. विशेष रूप से लालू यादव के विरोधी और कांग्रेस के अन्दर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को. भाजपा के नेताओं का कहना था कि जो राहुल गांधी लालू यादव के साथ मंच साझा करने से परहेज़ कर रहे थे, उन्हें तेजस्वी के साथ लंच करने में कोई गुरेज़ नहीं. लेकिन कांग्रेसियों का कहना है कि इस आलोचना में कोई दम नहीं क्योंकि वो ये निर्णय नहीं ले सकते या फ़रमान नहीं जारी कर सकते कि राहुल गांधी किसके साथ लंच या डिनर करें.

इस लंच से सबसे ज़्यादा ख़ुश अगर कोई है तो वो हैं राजद अध्यक्ष लालू यादव. महागठबंधन के समय जहां लालू नीतीश कुमार से तेजस्वी को राजनीतिक रूप से बढ़ाने की उम्मीद रखते थे और नीतीश ने एक ईमानदार सहयोगी की तरह तेजस्वी को आगे बढ़ाया भी. लेकिन राहुल के साथ भोज के बाद लालू यादव इसलिए प्रसन्‍न हैं कि गांधी परिवार ने तेजस्वी को वैसे ही उनका राजनीतिक वारिस मान लिया है जैसा कि उतर प्रदेश में अखिलेश यादव को. ना केवल बिहार में बल्कि पूरे देश में राहुल के साथ इस फ़ोटो के बाद तेजस्वी का राजनीतिक कद बढ़ा है.

लेकिन कांग्रेसियों की और खासकर पुराने विधायकों, सांसदों की असल परेशानी यह है कि जिस गांधी परिवार ने आजतक चाय बिस्कुट से अधिक के लायक उन्हें नहीं समझा उस गांधी परिवार के भविष्य राहुल गांधी ने आख़िर तेजस्वी को सीधे खाना खिलाने के लायक कैसे समझ लिया. यहां ये बात किसी से छिपी नहीं कि राहुल से ज़्यादा तेजस्वी ने जैसे फ़ोटो को ट्वीट कर पूरे प्रकरण को भुनाने की कोशिश की है वो भी कांग्रेसियों की परेशानी का कारण है. और ये वही राहुल गांधी हैं जिन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के अध्यादेश को फाड़ा था, जिसके लिए लालू यादव और उनका परिवार उन्हें पानी पी पी कर कोसता था. ये अध्यादेश लालू यादव को सज़ा होने पर उनकी सदस्यता बरक़रार रहे, इसलिए लाया जा रहा था. ख़ुद राहुल गांधी ने कई लोगों को यह बात बताई है कि लालू यादव उनसे नाराज़ रहते हैं. इसके बावजूद जो राहुल लालू यादव की रैली से दूर रहते हैं, उनका ये क़दम कई लोगों की समझ से परे है. ख़ासकर इस पृष्‍ठभूमि में कि तेजस्वी यादव ख़ुद भी भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई के अलावा प्रवर्तन निदेशालय की जांच झेल रहे हैं. किसी भी समय ये एजेंसियां उनके ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर कर सकती हैं.

लेकिन कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल-तेजस्वी भोज का असर उल्टा भी हो सकता है. राहुल को सहयोगियों की क़द्र करने की कला मालूम है, लेकिन शायद उन्हें इस बात का आभास ना हो कि तेजस्वी या लालू गांधी परिवार के साथ अपनी इस नज़दीकी को आधार बनाकर बिहार के कांग्रेसियों की उपेक्षा कर सकते हैं. जैसे जब से नीतीश महागठबंधन से बाहर गए हैं तब से लालू बिहार कांग्रेस के नेताओं के सामने हमेशा ये बात कहते हैं कि वो किसी भी मामले का समाधान सोनिया गांधी से बात कर निकालेंगे. लालू ने बिहार के कुछ कांग्रेस विधायकों के लिए चि‍रकुट जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था. वहीं तेजस्वी भी राहुल के साथ इस नज़दीकी को बिहार में अपने सहयोगियों को सम्मान ना देने का आधार बना सकते हैं. राजद के विधायक भी लालू यादव के दोनों बेटों तेजप्रताप और तेजस्वी यादव के बारे में ये बात खुलेआम कहते हैं कि राजनीतिक शिष्टाचार क्या होता है, इसके ज्ञान का नितांत अभाव आपको दोनों भाईयों में हर समय देखने को मिल सकता है.

वहीं कई नेता लंच के पीछे एक नये राहुल गांधी को पाते हैं जिन्हें अपने सहयोगियों की शक्ति और भविष्य की राजनीति में उनके महत्व के आधार पर संबंध मज़बूत करने के लिए अब चाय बिस्कुट से आगे जाने में कोई परहेज़ नहीं. राहुल को मालूम है कि केंद्र में भाजपा की मोदी सरकार से लड़ने में वो राजद और तेजस्वी जैसे सहयोगियों की उपेक्षा नहीं कर सकते. यही कारण है कि जब नीतीश कुमार महागठबंधन के आख़िरी हफ़्ते में उनके पास ये अपेक्षा लेकर गए कि जैसे राहुल ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम पर मुहर लगायी थी, वैसे ही भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी बनाए जाने पर तेजस्वी यादव के इस्तीफ़े पर भी अपनी सहमति देंगे. तब राहुल ने मौन रहना बेहतर समझा. नीतीश कुमार आज तक ये दावा करते हैं कि अगर राहुल ने साथ दे दिया होता तो सरकार बच जाती. लेकिन राहुल को इस बात का अंदाज़ा हो गया था, ख़ासकर राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद के नाम के समर्थन के बाद कि भाजपा नेताओं के साथ वो अपनी सीधी लाइन स्थापित कर चुके हैं और बस एक बहाना ढूंढ रहे हैं. इसलिए राहुल ने मुलाक़ात की औपचारिकता से ज़्यादा कुछ नहीं कर नीतीश को जाने का जहां मौक़ा दिया लेकिन राजद के साथ अपने संबंधों में एक नया अध्याय शुरू किया.

हालांकि राहुल के क़रीबी मानते हैं कि अब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्हें घेरने की कोशिश होगी. लेकिन उन्हें मालूम है कि न खाएंगे न खाने देंगे के नारे पर जो भाजपा सरकार सत्ता में आयी उसने अपने क़दमों से इस मुद्दे पर लोगों के बीच अपनी विश्‍वसनीयता खोई है. भाजपा सरकार की सत्ता के दौरान जिस सीबीआई ने भ्रष्टाचार के आरोप में तब तृणमूल नेता और अब भाजपा में शामिल मुकुल रॉय को चार्जशीट किया, उनको अपनी पार्टी में शामिल करा कर या महाराष्ट्र में नारायण राणे जैसे विवादास्पद नेता को एनडीए की सदस्यता देकर कम से कम अब भाजपा किसी को नसीहत नहीं दे सकती कि उसने भ्रष्टाचार से समझौता कर लिया. साथ ही जैसे ही आप भाजपा के साथ होते हैं, तब सारी जांच एजेंसी की जांच धीमी आंच के चूल्हे पर चली जाती है.

जहां तक नीतीश कुमार का सवाल है, तो उन्‍होंने जय शाह के मुद्दे पर जैसे मौन धारण किया या भ्रष्टाचार के आरोपियों को भाजपा में शामिल कराने पर अपनी कुर्सी के ख़ातिर आंख मूंदे रहे, तो अब उनके समर्थक भी मानते हैं कि इन सबके बाद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उनके बोलने की कोई विश्‍वसनीयता नहीं रही. ख़ासकर बिहार में जैसे हर पंद्रह दिन में एक नए घोटाले का ख़ुलासा होता है, उससे सरकार के ऊपर हर दिन भ्रष्टाचार के छींटे पड़ रहे हैं. भले नीतीश ख़ुद साफ़ हैं और उनके विरोधी भी उनके ऊपर अंगुली नहीं उठाते हैं, लेकिन अगर उसी बिहार में घोटाले की साज़िश रचने वाले नीतीश कुमार के अपने कस्‍बे बख्तियारपुर में बनने वाले शौचालय के पैसों की भी बंदरबांट कर दें, तब आपको उनकी हिम्मत की दाद देने के अलावा सरकार के इक़बाल के बारे में सोचने पर मजबूर होना पड़ता है. लेकिन इसके लिए और वर्तमान स्थिति के लिए नीतीश ख़ुद भी ज़िम्मेवार हैं. वर्षों बाद इस साल बाढ़ में एक नहीं चार-चार जगह तटबंध टूटे, लेकिन उस विभाग के प्रधान सचिव को दुरुस्त करने की जगह उसकी तारीफों के पुल बांधने में नीतीश कुमार कोई कसर नहीं छोड़ते जो उनकी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कथनी और करनी के फ़र्क़ को दर्शाता है.

इसलिए राहुल गांधी को मालूम है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सभी मापदंड केवल उन्हीं के ऊपर नहीं लागू हो सकते. वो चाहे पार्टी हो या सहयोगी, वो किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं. उनके लिए अब समय कम है और अपना संगठन अगर मज़बूत नहीं है तो फ़िलहाल सहयोगियों की बैसाखी के सहारे विरोधियों से फ़िलहाल उन्हें लड़ने में कोई परहेज़ नहीं. और जब बिहार में विधायक दल की टूट की ख़बर आयी तो हर विधायक से मिलकर उनकी बात सुनने में उन्‍हें कोई दिक़्क़त नहीं रही.

लेकिन कांग्रेसी कहते हैं कि गांधी परिवार के समर्थन और स्नेह के चलते अगर आप उनके विश्‍वास के साथ खेलने की कोशिश करेंगे तो उसका परिणाम भी भुगतने के लिए तैयार रहना पड़ेगा. इस सच का अनुभव पूर्व में लालू यादव कर चुके हैं और फ़िलहाल बिहार कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी को करना पड़ रहा है. लालू ने जब भी कांग्रेस पार्टी को अपनी शर्तों पर डिक्टेट करने की कोशिश की तो उसका ख़ामियाज़ा उन्हें भुगतना पड़ा है. जिस अशोक चौधरी का राहुल गांधी के समर्थन के कारण कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाया, लेकिन एक बार राहुल गांधी को इस बात का शक हो गया कि अशोक विधायकों को तोड़ने में लगे हैं, तब से उनका राजनीतिक हश्र सब लोग देख सकते हैं. चाहे वो अजय कुमार की नियुक्ति हो या तेजस्वी यादव के साथ लंच, राहुल गांधी को राजनीति में आप नज़रंदाज नहीं कर सकते.

मनीष कुमार NDTV इंडिया में एक्ज़ीक्यूटिव एडिटर हैं… साभारः एनडीटीवी इंडिया

अयोध्या में बने राम मंदिर, लखनऊ में बने मस्जिदः शिया वक्फ बोर्ड

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wasim rizvi

लखनऊ। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर और लखनऊ में ‘मस्जिद-ए-अमन’ का निर्माण कराया जा सकता है. वसीम रिजवी ने सोमवार को लखनऊ में प्रेस वार्ता कर कहा कि विभिन्न पार्टियों के साथ चर्चा के बाद हमने एक प्रस्ताव तैयार कर सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया है. इसमें अयोध्या में राम मंदिर बनाया जा सकता है और लखनऊ में ‘मस्जिद-ए-अमन’ का निर्माण कराया जा सकता है. यह समाधान देश में शांति और भाईचारे को सुनिश्चित करेगा.’

शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी और नरेंद्र गिरी ने मसौदा मीडिया के समक्ष जारी किया. इस मौके पर रिजवी ने कहा कि कस्टोडियन होने के नाते शिया वक्फ बोर्ड कभी अपना अधिकार नहीं जतायेगा और दावा नहीं करेगा. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस मामले को बढ़ा रहा है. अब सुप्रीम कोर्ट मामले में फैसला होगा.

सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या में रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को सुलझाने के लिए शिया वक्फ बोर्ड और अयोध्या के महंतों को पांच दिसंबर से पहले एक प्रस्ताव तैयार करने को कहा था. शीर्ष अदालत ने कोर्ट में पेश किये गये आठ भाषाओं में मौजूद संबंधित कागजात का अंगरेजी में अनुवाद भी पांच दिसंबर को होनेवाली सुनवाई के दौरान मांगा है.

इससे पहले शिया वक्फ बोर्ड ने कहा था कि अयोध्या में मंदिर बनाया जा सकता है और मस्जिद का निर्माण किसी मुसलिम बहुल इलाके में कराया जा सकता है. इसी आलोक में उन्होंने अयोध्या विवाद को लेकर आपसी समझौते के लिए उन्होंने अयोध्या में महंत धरमदास और महंत सुरेशदास सहित कई महंतों से मुलाकात भी की थी.

टिकट बंटवारे को लेकर पाटीदारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प

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अहमदाबाद। गुजरात के चुनावी माहौल में टिकट बंटवारे को लेकर पाटीदारों और कांग्रेस में विवाद गहराता जा रहा है. रविवार देर रात जैसे ही कांग्रेस ने अपने 77 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की, वैसे ही पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएएस) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई. पाटीदार अनामत आंदोलन समिति का आरोप है कि टिकट वितरण में उन्हें नजरअंदाज किया गया है.

इस लिस्ट के बाद गुजरात कांग्रेस और पाटीदार नेताओं में कोहराम मच गया है. 77 की लिस्ट में पाटीदार अनामत आंदोलन समिति से सिर्फ दो लोगों के नाम होने पर पाटीदारों ने जमकर बवाल मचाया है. अहदमदाबाद में गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी के घर के बाहर पाटीदारों ने जमकर हंगामा किया. इस दौरान भरत सिंह सोलंकी तो सामने नहीं आए लेकिन पाटीदार आंदोलन के कनवीनर दिनेश बामनिया ने कहा कांग्रेस ने बिना बातचीत के उम्मीदवारों का एलान किया है.

सोलंकी के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे पाटीदारों और पुलिस में झड़प भी हुई. वहीं सूरत में भी पाटीदारों ने हंगामा किया. पाटीदार नेता कांग्रेस से 25 सीटों की मांग कर रहे थे लेकिन कांग्रेस 11 से ज्यादा सीटें देने को राजी नहीं है. पूरे विवाद के पीछे वजह कांग्रेस उम्मीदवारों की पहली लिस्ट है. जिसमें हार्दिक के करीबी ललित वसोया को धोराजी से और पीएएएस नेता निलेश कंबानी को कमरेज से टिकट दिया गया है.

कांग्रेस की लिस्ट से नाराज पाटीदार नेता दिनेश बामणिया ने कहा बिना भरोसे में लिए दो पाटीदार नेताओं के नाम का एलान कर दिया गया है. बामणिया ने पूरे राज्य में कांग्रेस के विरोध की धमकी दी है.