इमरान खान ने कपिलदेव, गवास्कर, सिद्धू और आमिर खान को भेजा न्यौता

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नई दिल्ली। पाकिस्तान में हुए आम चुनावों में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पार्टी की शानदार जीत के बाद इमरान खान पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे. इसको लेकर तैयारियां जोरों पर है. हालांकि इस दौरान क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान क्रिकेट के अपने दोस्तों को नहीं भूले हैं. इमरान खान ने अपने शपथ ग्रहण समारोह के लिए कपिल देव, सुनील गावसकर और नवजोत सिंह सिद्धू को न्यौता भेजा है. इसके अलावा उन्होंने अभिनेता आमिर खान को न्योता दिया गया है.

माना जा रहा है कि इमरान खान की ओर से भारत में उन हस्तियों को यह न्योता भेजा गया है, जिनके साथ उनके घनिष्ठ संबंध हैं. बता दें आम चुनावों में इमरान की पार्टी पीटीआई को 272 सीटों वाली नैशनल असेंबली में 116 सीटें मिली हैं. खान को सरकार बनाने के लिए 137 सीटों के जादुई आंकड़े की जरूरत है. इसके लिए पीटीआई पाकिस्तान के छोटे दलों के साथ मिलकर गठबंधन सरकार चलाने को तैयार है.

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हरामी व्यवस्थाः दलित होने के कारण महिला अधिकारी को गांव वालों ने नहीं दिया पानी

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कौशांबी। विकास कार्यों की समीक्षा करने एक गांव में गई जिले की उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को दलित होने के चलते अपमान सहना पड़ा. घटना 31 जुलाई की है. जब अधिकारी डॉ. सीमा सरकारी दौरे पर थी. इस दौरान उन्हें प्यास लगी, लेकिन गांव के प्रधान और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी ने उन्हें बर्तन में पानी देने से इनकार कर दिया. पीटीआई की खबर के मुताबिक उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. सीमा ने बताया कि डीपीआरओ के निर्देश पर वह मंगलवार (31 जुलाई) को मंझनपुर विकास खण्ड के अंबावां पूरब गांव गईं थीं. वहां उनकी बोतल का पानी खत्म हो गया था. इस पर उन्होंने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और ग्राम प्रधान से पानी मांगा. दोनों ने उनके दलित जाति से होने के कारण बर्तन में पानी देने से इनकार कर दिया. जब उन्होंने ग्रामीणों से पानी मांगा तो प्रधान और वीडीओ ने उन्हें भी इशारा कर पानी देने से मना कर दिया. घटना से आहत उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने जिलाधिकारी से इस संबंध में शिकायत की है. इस संबंध में जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने बताया कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक को मामले की जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया है.

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बिहारः अब रिमांड होम में किशोरों से अप्राकृतिक यौनाचार

आरा। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक बालिका गृह में 34 लड़कियों के यौन शोषण की घटना से देश भर के लोग अभी सकते में ही हैं कि बिहार से आई एक और खबर ने फिर से सबको चौंका दिया है. नए घटनाक्रम में भोजपुर जिला मुख्यालय आरा स्थित एक रिमांड होम में किशोरों के अप्राकृतिक यौनाचार किए जाने का मामला सामने आया है. आरा नगर थाना क्षेत्र के धरहरा इलाके में स्थित उक्त रिमांड होम में रहने वाले किशोरों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर किए गए हैं. विडियो और तस्वीरों में कुछ लड़कों ने अपने शरीर पर चोट के निशान दिखाए हैं. मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उनमें से कुछ के साथ अप्राकृतिक यौनाचार भी किया गया है. हालांकि प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे हुए है. आरा के पुलिस अधीक्षक अवकाश कुमार ने मारपीट की पुष्टि की है और जांच करने की बात कही है. अब तक इस संबंध में कोई प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की गई है.

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9 अगस्त के आंदोलन के पहले ही एससी-एसटी एक्ट पर संशोधन लाने के खेल को समझिए 

एससी-एसटी एक्ट को लेकर दलित समाज के रोष और एकजुटता के आगे केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने घुटने टेक दिए हैं. सरकार ने एक्ट को पुराने और मूल स्वरूप में लाने का फैसला किया है. इस बारे में बुधवार 01 अगस्त को कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें SC/ST एक्ट संशोधन विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है.

सरकार का यह फैसला तब आया है जब 9 अगस्त को कुछ खास संगठनों और राजनैतिक दलों की ओर से भारत बंद प्रस्तावित था. लेकिन इस बंद को लेकर दलित समाज ने वह उत्साह नहीं दिखाया, जैसा 2 अप्रैल के बंद को लेकर दिखाया गया था. सोशल मीडिया पर बंद के विरोध का माहौल बन गया. तो क्या यह माना जा सकता है कि 9 अगस्त के बंद के पहले ही संशोधन विधेयक इसलिए लाया गया है क्योंकि 9 अगस्त का बंद विफल होने जा रहा था?

विरोध की वजह बंद में रामविलास पासवान की पार्टी की भूमिका का होना रहा. असल में 9 अगस्त के बंद को लेकर जिस तरह रामविलास पासवान और केंद्र सरकार में शामिल कुछ और राजनीतिक दल सक्रिय हो गए थे, दलित समुदाय में उससे नाराजगी थी. लोगों का तर्क था कि 2019 के आम चुनाव के दौरान राजनीतिक लाभ लेने के लिए भाजपा दलित पहचान वाले अपने सहयोगी दलों और कुछ संगठनों को आगे कर यह आंदोलन करवा रही है, ताकि उसके बाद संशोधन विधेयक लाकर केंद्र सरकार इसका क्रेडिट ले लेगी और सरकार में शामिल दलित पहचान वाले लोजपा और आरपीआई जैसे सहयोगी दल भी चुनावी लाभ ले सकेंगे. लेकिन सरकार की यह मंशा सफल नहीं हो सकी.

दरअसल दलित समाज की नाराजगी की वजह यह भी थी कि 2 अप्रैल को बंद के दौरान देश के कई हिस्सों खासकर उत्तर प्रदेश में कई युवाओं को जेल में बंद कर दिया गया था. इसको खिलाफ सरकार में शामिल दलित पहचान वाली किसी पार्टी ने कोई मजबूत आवाज नहीं उठाई थी. एक्ट के पारित होने के बाद भी संसद के भीतर दलित और आदिवासी समाज के सांसदों की ओर से कोई बड़ा विरोध देखने को नहीं मिला था.

 ऐसे में संभव है कि 9 अगस्त का आंदोलन फेल होता देख केंद्र ने पहले ही डैमेज कंट्रोल करते हुए  यह फैसला ले लिया. हालांकि एक्ट में बदलाव तब तक प्रभावी नहीं होगा, जब तक संशोधन विधेयक संसद में पारित नहीं हो जाता. अब देखना यह होगा कि सरकार इसको संसद के पटल पर कब रखती है.

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इंग्लैंड ने रचा इतिहास, 1000 टेस्ट मैच खेलने वाली पहली टीम

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नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच 5 मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला कल एजबेस्टन में शुरू हो चुका है. यह इंग्लैंड का 1000वां टेस्ट है. मैदान पर उतरते ही इंग्लिश टीम ने 1000 मैच खेलने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई. इतिहास पर नजर डालें तो इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने 1877 में पहला टेस्ट मैच खेला था. जहां इंग्लैंड के नाम अब 1000 टेस्ट हो चुके हैं तो दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया के नाम 812 टेस्ट दर्ज हैं. सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेलने के मामले में वह इंग्लैंड के बाद दूसरे नंबर पर है.

अपने इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच में इंग्लैंड टीम टॉस जीतकर पहले बैटिंग कर रही है. जब दोनों टीमें मैदान पर उतरीं तो दर्शकों ने खिलाड़ियों का गर्मजोशी से स्वागत किया. बता दें कि इस मुकाबले के लिए इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने दोनों टीमों को शुभकामनाएं दी थीं.

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SC-ST एक्ट में होगा बदलाव, कैबिनेट ने संशोधन को दी मंजूरी, इसी सत्र में होगा पेश

नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एससी-एसटी एक्ट में संशोधन को मंजूरी दे दी है. संशोधित बिल को मानसून सत्र में ही संसद में पेश किया जाएगा. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘केंद्रीय कैबिनेट ने एससी-एसटी एक्ट के मूल प्रावधानों को दोबारा लागू करने के लिए संशोधन को मंजूरी दे दी है.’ बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने हाल में फैसला सुनाते हुए इस एक्ट के तहत तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. जिसके बाद कई जगह पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे.

इससे पहले लोक जनशक्ति पार्टी से जुड़ी दलित सेना ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून के कमजोर होने का हवाला देते हुए सरकार से इसमें सुधार के लिए जल्द से जल्द अध्यादेश जारी करने की मांग की थी और कहा था कि ऐसा नहीं किये जाने पर वह 9 अगस्त से आन्दोलन शुरू करेगी.

दोनों नेताओं ने कहा था कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर उच्चतम न्यायालय ने 20 मार्च को एक फैसला दिया था जिससे यह कानून कमजोर हुआ है. इससे दलित समुदाय में आक्रोश है. उन्होंने कहा कि इस फैसले को देने में शामिल एक न्यायाधीश को राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण का अध्यक्ष बना दिया गया है जिससे लोगों में और आक्रोश बढ़ गया है दबाव है.

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नेपाल के लिए आज ऐतिहासिक दिन, टीम खेलेगी पहला ODI

नई दिल्ली। वनडे अंतरराष्ट्रीय का दर्जा पाने वाली सबसे नई टीम नेपाल के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है. नेपाल आज अपना पहला वनडे एम्सटेलवीन में नीदरलैंड्स के खिलाफ खेलेगी. इसके साथ ही नेपाल वनडे में डेब्यु करने वाली दुनिया की 27वीं टीम बन जाएगी.

नेपाल की टीम के कप्तान पारस खड़का एक बेहतरीन बल्लेबाज और कप्तान हैं. वहीं इस टीम के स्पिनर संदीप लेमिचाने इस साल इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने वाले पहले नेपाली खिलाड़ी थे. संदीप को दिल्ली डेयरडेविल्स ने खरीदा था. नीदरलैंड्स के खिलाफ आज नेपाल की टीम पूरी तैयारी के साथ उतरेगी. नीदरलैंड्स की टीम अब तक कुल 79 वनडे खेल चुकी है.

नेपाल के कप्तान पारस बताते हैं कि वह और उनकी टीम हमेशा से यहां पहुंचना चाहती थी लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है लगातार आगे बढ़ते जाना. उन्हें उम्मीद है कि उनकी टीम ऐसे ही आगे बढ़ती जाएगी और उनका अगला लक्ष्य टेस्ट मैच खेलना होगा. पारस ने बताया कि नेपाल की टीम ने इस मौके के लिए काफी मेहनत की है.

नेपाल ने इस साल आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप क्वॉलिफायर मुकाबले में पपुआ न्यू गिनी को 6 विकेट से हराया था. इसी साल आयरलैंड और अफगानिस्तान ने अपना पहला टेस्ट मैच खेला था जबकि उपमहाद्वीप की टीम नेपाल को हाल में आईसीसी ने वनडे दर्जा दिया था.

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बुजुर्गों के लिए बाजार में स्पेशल फोन

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नई दिल्ली। घरेलू कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी iBall ने एक नया फीचर फोन Aasaan 4 लॉन्च किया है. यह फोन वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया है. फोन की कीमत 3,499 रुपये है. फोन को इस तरह डिजायन किया गया है कि बुजुर्गों को आसानी हो.

इसका कीपैड बड़ा है, आवाज तेज है और स्क्रीन के फॉन्ट भी बड़े हैं. इसके अलावा इसमें इमरजेंसी अलर्ट सपोर्ट और मोबाइल ट्रैकिंग फंक्शन भी है. नया वर्जन ‘आसान 4’ डुअल सिम को सपोर्ट करता है. इसका डिस्प्ले 2.31 इंच का है और इसमें ब्रेल कीपैड भी दिया गया है.

कंपनी ने एक बयान में कहा कि इसमें ‘टॉकिंग कीपैड’ दिया गया है, जो अक्षरों को दबाने पर उसका उच्चारण करता है. इस फोन में 1,800mAh की बैटरी मौजूद है और इसमें 32GB तक microSD स्टोरेज सपोर्ट है. इसमें 200 टेक्स्ट मैसेज और 1,000 कॉन्टैक्ट्स फोनबुक में सेव करने की क्षमता है. 

इसमें आपातकाली कॉलिंग फीचर के साथ ‘SOS’ बटन भी दिया गया है, जिसे आपातकालीन अवस्था में दबाने पर तेज सायरन बज उठता है, ताकि आसपास के लोग मदद के लिए आ सकें. इसमें मोबाइल ट्रैकिंग फीचर भी दिया गया है. जोकि फोन में नया सिम डाले जाने पर एक निश्चित कॉन्टैक्ट को अलर्ट भेज देगा.

इसके अलावा इस फीचर फोन में फोन लॉक, LED टॉर्च और वायरलेस FM के लिए वन टच बटन का सपोर्ट दिया गया है. साथ ही इसका यूजर इंटरफेस काफी सरल बनाया गया है ताकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए इस फोन का इस्तेमाल करना आसान हो.

(इनपुट- आईएएनएस)

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छत्तीसगढ़ में बसपा का नया फार्मूला

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी में बैठकों का दौर जारी है. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि दोनों दल साथ चुनाव लड़ेगे या नहीं. 31 जुलाई को प्रदेश में चुनावी तैयारियों को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी की एक बड़ी बैठक राजधानी रायपुर में हुई.

इस दौरान प्रदेश प्रभारी अशोक सिद्धार्थ ने विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर तैयारी करने के निर्देश दिए. उन्होंने दावा किया कि बसपा के बिना कोई सरकार नहीं बनेगी. प्रदेश प्रभारी ने चुनाव में बसपा के 10 से 15 सीटें जीतने की बात कही. उन्होंने कहा कि ऐसे में बसपा के बिना किसी पार्टी की सरकार नहीं बनेगी. प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सीटों की स्थिति का आंकलन कर पूरी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष को देंगे. गठबंधन किससे होगा इस बारे में कोई भी फैसला हमारी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती जी करेंगी. उन्होंने प्रदेश की सभी 90 सीटों पर पूरी तैयारी की बात कही.

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भाजपा विधायक के पक्ष में उतरीं मायावती, जातिवाद पर हल्ला बोल

नई दिल्ली। भाजपा की दलित महिला विधायक के मंदिर प्रवेश के बाद मंदिर को शुद्ध किए जाने के मामले पर अब बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी यूपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जातिगत भेदभाव से जुड़े हालिया दो घटनाओं को मुद्दा बनाते हुए बसपा प्रमुख ने भाजपा पर निशाना साधा है. उत्तर प्रदेश की भाजपा महिला विधायक मनीषा अनुरागी के मन्दिर प्रवेश पर उसे गंगाजल से धुलवाने और यूपी के इलाहाबाद में एक दलित महिला अफसर को पीने के लिए पानी नहीं देने के मामले को मायावती ने अमानवीय बताया है.

एक बयान जारी कर इन दोनों घटनाओं की निंदा करते हुए बसपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी की सरकारों में इस प्रकार की जातिवादी व अमानवीय घटनाओं के साथ-साथ दलित व पिछड़े समाज में जन्में संतों व महापुरुषों की प्रतिमाओं को खण्डित व अपमानित करने जैसी घटनायें काफी ज्यादा बढ़ी हैं. इसके बावजूद भी बीजेपी सरकारों का रवैया इन मामलों को लेकर ज्यादातर उदासीन रहता है.

यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकारों की जातिवादी सोच व मानसिकता तथा ऐसे जातिवादी तत्वों के प्रश्रय देते रहने के कारण ही ऐसी घृणित, गै़र-इन्सानी घटनायें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं. ऐसी घटनाएं बीजेपी की कथनी और करनी के अंतर को बेनकाब करती है. दरअसल महिला विधायक का मामला सोमवार को उस वक्त चर्चा में आया, जब मंदिर के ‘शुद्धीकरण’ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. बीजेपी विधायक मनीषा अनुरागी 12 जुलाई को यूपी के बुंदेलखंड इलाके के हमीरपुर जिले में एक स्कूल के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए पहुंची थी, जब घटना घटी. अब यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले को मुद्दा बनाए जाने के बाद भाजपा सफाई देने लगी है.

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NRC पर ममता और मायावती के निशाने पर मोदी सरकार

नई दिल्ली। कहते हैं कि कोई इंसान कितना भी गरीब हो, धरती और आसमान पर सबका समान अधिकार है. किसी फिल्म का एक गाना भी है, जिसमें धरती को बिछौना बनाने और आसमान को ओढ़ने की बात कही गई है. लेकिन अब धरती और आसमान पर भी सरकारों का कब्जा हो गया है. दुनिया में क़रीब एक करोड़ लोग ऐसे हैं जिनका कोई देश नहीं.

सालों से सोई सरकारों को अचानक अपनी जमीन पर रहने वाले कुछ ‘खास’ लोग बेमतलब लगने लगे हैं और वो उन्हें बेदखल करने पर अमादा हो गई है. केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे एनआरसी यानि ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स’ अभियान से असम के लाखों लोगों की जिंदगी में अचानक तूफान आ गया है. इस अभियान के तहत सरकार ने असम में रह रहे उन लाखों लोगों को बाहरी घोषित करने पर तुली है, जिनके पास अपनी भारतीय नागरिकता को साबित करने के लिए कोई ठोस कागज नहीं है.

इस मुद्दे को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है. यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने असम में ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स’ (एनआरसी) से लाखों लोगों के नाम गायब होने पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संकीर्ण और विभाजनकारी नीतियों का परिणाम बताया है. मायावती ने कहा कि इस तरह की गंभीर घटना से देश के लिए सिरदर्द बन सकती है, जिससे निपट पाना बहुत मुश्किल होगा.

इस बारे में जारी एक बयान में बसपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा शासित असम में बरसों से रहने के बावजूद लाखों लोगों की नागरिकता सिर्फ इसलिये छीन ली गयी, क्योंकि वे अपनी नागरिकता के सम्बन्ध में कोई ठोस सबूत नहीं दे पाए. अगर वे प्रमाण नहीं दे सके तो इसका यह मतलब नहीं है कि उन लोगों से उनकी नागरिकता ही छीन ली जाए और उन्हें देश से बाहर निकालने का जुल्म ढाया जाए.

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा और संघ की संकीर्ण विभाजनकारी नीतियों का ही यह परिणाम है कि असम में ऐसा अनर्थ हुआ है. इस साल 31 दिसम्बर को अन्तिम सूची के प्रकाशन के बाद यह देश के लिए एक ऐसा सरदर्द बनकर उभरेगा, जिससे निपट पाना बहुत ही मुश्किल होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों की नागरिकता को लगभग समाप्त करके केन्द्र और असम में अपनी स्थापना का एक प्रमुख उद्देश्य प्राप्त कर लिया है. तो वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि बंगाल में इस घटनाक्रम का गहरा दुष्प्रभाव पड़ेगा लेकिन ‘भाजपा एण्ड कम्पनी’ इसका भी फायदा लेने का प्रयास कर रही है. NRC की दूसरी लिस्ट में 40 लाख लोगों का नाम होने पर पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ जोरदार तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद की है. उनके इस मसले पर दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर अपनी बात रख चुकी हैं.

सिविल वॉर की चेतावनी देते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि बंगाली ही नहीं अल्पसंख्यकों, हिंदुओं और बिहारियों को भी एनआरसी से बाहर रखा गया है. जिन 40 लाख से ज्यादा लोगों ने सत्ताधारी पार्टी के लिए वोट किया था, उन्हें अपने ही देश में रिफ्यूजी बना दिया गया है. ममता ने कहा, ‘वे लोग देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. यह जारी रहा तो देश में खून की नदियां बहेंगी, देश में सिविल वॉर शुरू हो जाएगा.’

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दिल्लीः स्वाति मालीवाल ने होटल से 39 लड़कियों को छुड़ाया

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नई दिल्ली। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल महिलाओं के लिए जैसे फरिश्ता बनकर आई हैं. एक के बाद एक कई मामलों में स्वाति मालीवाल ने सैकड़ों लड़कियों की जिंदगी तबाह होने से बचा ली है. ताजा मामला मंगलवार का है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वेश्यावृति रैकेट के चंगुल से 39 लड़कियों को छुड़ाया है. स्वाति मालीवाल ने दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर मंगलवार देर रात इन लड़कियों को दिल्ली के पहाड़गंज से आजाद कराया. इन लड़कियों को नेपाल से दिल्ली वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेलने के लिए लाया गया था.

यही नहीं, इससे पहले स्वाति मालीवाल ने मंगलवार शाम वसंत विहार पुलिस थाना क्षेत्र से 18 महिलाओं को छुड़ाया था. इनमें भी 16 महिलाएं नेपाल की हैं. पुलिस ने बताया कि एक संयुक्त अभियान में वाराणसी पुलिस की अपराध शाखा और दिल्ली पुलिस ने कल वसंत विहार पुलिस थाना क्षेत्र में एक मकान पर छापेमारी की और 18 महिलाओं को छुड़ाया था. पुलिस के मुताबिक इन महिलाओं को पिछले कुछ दिनों से घर में बंद रखा गया था और उन्हें जल्द ही तस्करी के जरिए खाड़ी देशों में भेजा जाने वाला था. उन्होंने इस बाबत पूछताछ के लिए तीन लोगों को हिरासत में लिया है. दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि इन महिलाओं को आश्रय गृहों में भेजा जाएगा और उन्हें वापस भेजने के लिए नेपाली दूतावास से संपर्क किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को जहां रखा गया था, वहां से 68 पासपोर्ट बरामद किए गए जिनमें से सात भारतीय पासपोर्ट हैं. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नेपाली महिलाओं को नौकरियों का झांसा देकर फंसाया गया. छुड़ाई गई महिलाओं ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष को बताया कि वे नेपाल के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों की रहने वाली हैं. ज्यादातर ने भूकंप में अपने घर-परिवार गंवा दिए हैं. उनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच है. इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं. मालीवाल ने आरोप लगाया कि ‘दिल्ली मानव तस्करी का केंद्र बन गया है. दिल्ली महिला आयोग को इन रैकेटों के बारे में पता चलता है, अन्य राज्यों की पुलिस को उनके बारे में पता चल जाता है, लेकिन दिल्ली पुलिस सोती रहती है. वाराणसी पुलिस ने मुझे बताया कि मैदान गढ़ी के उस मकान का इस्तेमाल पिछले कई साल से महिलाओं की जत्थों में तस्करी के लिए होता था. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर स्थानीय पुलिस को इसके बारे में कैसे पता नहीं चला?

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अधेड़ दरोगा मां-बाप को बंद कर 15 साल की लड़की से करता था रेप

रीवा। सलमान खान की एक फिल्म आई थी ‘वांटेड’. फिल्म में पुलिस बना महेश मांजरेकर का दिल अपने से कम की उम्र की लड़की पर आ जाता है और फिर वह लड़की को परेशान करने लगता है.

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से ऐसी ही एक घटना सामने आई है. मऊगंज थाना प्रभारी महेन्द्र मिश्रा को 15 वर्षीय एक किशोरी को शादी का झांसा देकर उससे बलात्कार करता रहा. मिश्रा की उम्र 45 साल है. 27 जुलाई को मिश्रा ने शादी की बात कहकर लड़की को मऊगंज बुलाया था. यहां एक लॉज में ठहराया और फिर रेप किया. आखिरकार लड़की ने सब्र का बांध टूटने पर इसकी शिकायत कर दी, जिसके बाद मिश्रा को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. पीटीआई की खबर के मुताबिक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) शिव कुमार सिंह ने बताया कि पीड़िता ने शिकायत में कहा है कि उसके घर में ही पिछले कई महीने से रेप किया जा रहा था. इस दौरान आरोपी लड़की के पैरेंट्स को एक कमरे में बंद कर देता था.

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने को गिरफ्तार कर लिया. मऊगंज के अपर सत्र न्यायाधीश मनीष पाटीदार की अदालत में मिश्रा को पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. मिश्रा पहले से ही शादीशुदा है. पीड़ित 9वीं क्लास में पढ़ाई करती हैं. रीवा जिला मुख्यालय से मऊगंज करीब 60 किलोमीटर दूर है.

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दलित दस्तक मैग्जीन का अगस्त 2018 अंक ऑन लाइन पढ़िए

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दलित दस्तक मासिक पत्रिका ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं. जून 2012 से यह पत्रिका निरंतर प्रकाशित हो रही है. मई 2018 अंक प्रकाशित होने के साथ ही पत्रिका ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं. हम आपके लिए सांतवें साल का दुसरा अंक लेकर आए हैं. इस अंक के साथ ही दलित दस्तक ने एक नया बदलाव किया है. इसके तहत अब दलित दस्तक मैग्जीन के किसी एक अंक को भी ऑनलाइन भुगतान कर पढ़ा जा सकता है.

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गोरक्षा को लेकर धंधा करने वालों के विरोध में उतरा भाजपा सांसद

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भाजपा सांसद सुमेधानंद सरस्वती

जयपुर। गोरक्षा के नाम पर गाय का धंधा करने और फिर मॉब लिंचिंग जैसी घटना करने वालों को लेकर भाजपा के एक सांसद ने बड़ा बयान दिया है. अलवर में भीड़ द्वारा पीट-पीट कर मार डाले गए अकबर ख़ान उर्फ रकबर मामले पर सीकर के भाजपा सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने आवाज उठाई है. उन्होंने कहा, ‘बहुत सारे लोग ऐसे हैं जिन्होंने गोरक्षा के नाम पर धंधा शुरू कर दिया है. इन लोगों के गो-तस्करों से वसूली के लिए गिरोह बना रखे हैं. ऐसे लोगों की वजह से ही अलवर जैसी घटनाएं सामने आती हैं.’

जयपुर में भाजपा के स्थानीय कार्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि गोरक्षा की आड़ में धंधा करने वाले इन लोगों की वजह से सही में गोसेवा में लगे लोग और संत समाज बदनाम हो रहा है. उन्होंने फ़र्ज़ी गोरक्षकों के ख़िलाफ़ कठोर से कठोर कार्रवाई करने की मांग की. सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने कहा कि तमाम गोशालाओं के संचालक मुझसे मिलते हैं. उनका कहना है कि हमारे जैसे लोग और साधू-संन्यासी तो निस्वार्थ भाव से गायों की सेवा करते हैं, लेकिन इस काम को धंधा बनाने वाले लोगों की वजह हमारी बदनामी हो रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि गोसेवा की आड़ में लोगों ने गिरोह बना लिए हैं. ये दिखावे के लिए गोसेवा करते हैं. असलियत में ये गायों की तस्करी करवाते हैं. इन लोगों के ख़िलाफ़ सरकार को सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए. अकबर ख़ान की हत्या के मामले पर उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. न्यायिक जांच भी हो रही है. ऐसे में मेरा कुछ बोलना उचित नहीं है. जिन्होंने भी अकबर को मारा है, उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए.’

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कितना जरूरी है 9 अगस्त का भारत बंद

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दो अप्रैल को दलित समाज के लोग जब सड़क पर उतरे थे तो किसी को भी यकीन नहीं था कि विरोध इतना बड़ा होगा. उस दिन जिस तरह बिना किसी संगठन या राजनीतिक दल के बुलावे के लोग अपने अधिकार को बचाने सड़क पर निकले थे, उसने दलित राजनीति की दिशा बदल कर रख दी थी. 2 अप्रैल के बंद में अगर राजनीतिक दलों की भूमिका की बात करें तो इस बंद को सिर्फ बहुजन समाज पार्टी ने अपना समर्थन दिया था, वो भी आखिरी वक्त में. तमाम दल और तमाम दलित नेता इस बंद का राजनीतिक फायदा उठाने से चूक गए थे. ऐसे में दलित राजनीति के उभार और 2019 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनाव में दलित वोटरों का समर्थन हासिल करने की होड़ में एक बार फिर 9 अगस्त को बंद बुलाया गया है.

इस बंद को लेकर अखिल भारतीय अम्बेडकर महासभा का नाम आ रहा है और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी बैनर तले यह बंद बुलाया गया है. राजनीतिक दलों की बात करें तो 9 अगस्त के बंद को लेकर रामविलास पासवान भी सक्रिय हैं. तो दूसरी ओर नई नवेली जनसम्मान पार्टी के अध्यक्ष और नैक्डोर के पूर्व अध्यक्ष अशोक भारती भी बंद को लेकर लगातार लोगों को संगठित करने में जुटे हैं.

हालांकि इस बंद को लेकर दलित समाज के भीतर ही ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है. सोशल मीडिया खंगालने पर यह साफ नजर आ रहा है कि तमाम लोग इस बंद में शामिल होने से बचने को कह रहे हैं और दलित नेताओं पर सवाल उठा रहे हैं. एक बड़ा धड़ा इस सवाल को उठा रहा है कि अगर एससी/एसटी सांसद सच में एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ हैं तो संसद के भीतर आवाज उठाएं. लोगों का कहना है कि समाज सड़क पर अपनी लड़ाई 2 अप्रैल को लड़ चुका है, अब सांसदों और नेताओं की बारी है और उन्हें संसद के अंदर लड़ाई लड़नी चाहिए. अभी संसद का मानसून सत्र चल रहा है ऐसे में दल की राजनीति से ऊपर उठकर एससी/एसटी वर्ग के सभी सांसद एकजुट होकर सरकार के खिलाफ आ जाएं, ऐसे में सरकार इसी सत्र में अध्यादेश लाकर संशोधन को वापस लेने के लिए बाध्य होगी.

एक दूसरा सवाल 2 अप्रैल के बंद के दौरान देश के कई हिस्सों, खासकर उत्तर प्रदेश में दलित समाज के युवाओं के गिरफ्तारी की है. उस आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुए तमाम युवा अब भी जेल में है. तमाम युवाओं पर कई बड़ी धाराएं लगाकर उनका भविष्य खराब करने की साजिश रची गई. मेरठ और हापुड़ में तो 15-17 उम्र के कई बच्चे भी गिरफ्तार हुए. लेकिन किसी भी राजनैतिक दल या किसी बड़े दलित संगठन ने उनकी रिहाई के लिए कोई बड़ा आंदोलन अब तक नहीं किया. ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या 9 अगस्त को दुबारा बंद बुलाने वाले लोगों को जेलों में बंद दलित समाज के उन युवाओं के बारे में नहीं सोचना चाहिए?

इस बंद को भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर रावण की रिहाई से भी जोड़ा जा रहा है, लेकिन चंद्रशेखर रावण के जेल जाने से लेकर उस पर रासुका की अवधि बढ़ाने तक इस मुद्दे को लेकर राजनीति ज्यादा हुई है और इस मुद्दे को उठाने वाले लोग तमाम दावों के बावजूद जमीन पर कोई बड़ा आंदोलन खड़ा करने में सफल नहीं हो पाए हैं. ऐसे में 9 अगस्त के बंद को आम जनता का कितना समर्थन मिलता है, यह देखना होगा.

लोग 15 दिन टीवी और सोशल मीडिया दूर रहें तो उनमें प्यार हो जाएगा

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नई दिल्ली। फिल्म ‘मुल्क’ आगामी 3 अगस्त को रिलिज होने वाली है. फिल्म अपने देश को प्यार न करने की तोहमत और सोशल मीडिया पर अफ़वाहों से बेज़ार आम मुसलमान के अंतर्मन को टटोलती है. इस फिल्म के प्रोमोशन को लेकर निर्देशक अनुभव सिन्हा लगातार व्यस्त हैं. एक कार्यक्रम के दौरान अनुभव सिन्हा ने कहा कि अगर हिन्दू और मुस्लिम 15 दिनों तक टीवी न देखें तो उनमें प्यार हो जाएगा.

फिल्म ‘मुल्क’ के निर्देशक अनुभव सिन्हा का मानना है कि हिंदू और मुसलमान दोनों अपने धर्म और देश से प्यार करते हैं, लेकिन उन्हें इसे (देशभक्ति) साबित करने के लिए मजबूर न किया जाए. उन्होंने कहा कि कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज ने एक नज़्म लिखी थी, ‘अब कोई मज़हब ऐसा भी चलाया जाए, जिसमें इनसान को इनसान बनाया जाए.’

अनुभव सिन्हा का मानना है कि मज़हब कोई बुरा नहीं है, अगर एक दूसरे पर भरोसा किया जाए और एक दूसरे की नीयत पर शक न किया जाए तो 70 साल की नफरत को 70 घंटे में प्यार और खुलूस में बदला जा सकता है. सिन्हा का कहना है कि ‘इस मुल्क में न हिंदू दंगा चाहता है और न ही मुसलमान, बस चंद लोग हैं जो इन दोनों को लड़ते देखना चाहते हैं क्योंकि इसमें उनका फायदा है.’ इसके लिए मीडिया और सोशल मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराते हुए वह सलाह देते हैं कि अगर जनता न्यूज़ चैनल और सोशल मीडिया से नाता तोड़ ले तो प्यार की बरसात बरसने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा.

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मुजफ्फरपुर कांड: पांच साल में 34 लड़कियों के साथ हुआ था रेप

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मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर के जिस बालिका गृह में लड़कियों के यौन शोषण और रेप किए जाने के मामले का खुलासा हुआ है वहां पिछले 5 सालों में 400 से ज्यादा लड़कियां आई थीं. कुछ हफ्ते पहले तक इसी बालिका गृह में रह रहीं 42 लड़कियों का जब मेडिकल टेस्ट किया गया तो 29 के साथ रेप की बात सामने आई. तो वहीं बाद में पांच और लड़कियों के साथ भी रेप किए जाने की बात साबित हुई.

इस मामले में मुख्य अभियुक्त और बालिका गृह का संचालक ब्रजेश कुमार ठाकुर के साथ कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. इनके नाम किरण कुमारी, मंजू देवी, इन्दू कुमारी, चन्दा देवी, नेहा कुमारी, हेमा मसीह, विकास कुमार एवं रवि कुमार रौशन हैं. एक अभियुक्त फरार है. बालिका गृह को 31 मई से बंद कर दिया गया है एवं संस्था को ब्लैक लिस्ट कर दिया गया. मामले की सीबीआई जांच शुरू हो चुकी है. अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर शहर के ताकतवर लोगों में से एक है.

गौरतलब है कि बिहार के समाज कल्याण विभाग की ओर से अनाथ, बेसहारा, सड़क पर रहने वाले बच्चे एवं बाल मजदूरी अथवा मानव व्यापार से मुक्त कराये गये बच्चों के लिए विभिन्न जिलों में 06 से 18 आयु वर्ग के बालक एवं बालिकाओं के लिए बाल गृह संचालित किए जाते हैं. इन बाल गृहों का संचालन राज्य सरकार द्वारा स्वयं तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है.

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गुजरात में नवरात्रि पर नौ दिन की छुट्टी, विरोध में आए स्कूल वाले

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अहमदाबाद। नवरात्रि के दौरान स्कूल और कॉलेजों में गुजरात में नौ दिनों की छुट्टी देकर सरकार युवाओं को खुश करना चाहती है, लेकिन सरकार के इस फैसले के विरोध में स्कूल प्रशासन आ गए हैं. स्कूल मैनेजमेंट को इन छुट्टियों के कारण सिलेबस पूरा होने में मुश्किल दिखाई दे रही है. सरकार के इस फैसले के खिलाफ सोमवार को मुख्यमंत्री के ही गृहशहर राजकोट में करीब 400 स्कूल मैनेजमेंट्स ने आवाज उठाई है.

अभी हाल में साल के 365 दिन में से स्कूल महज 210 दिन ही चलता है. ऐसे में 10 दिन की नवरात्रि की छुट्टी भी मिलेगी तो शिक्षा पर इसका असर होगा. वहीं कांग्रेस ने इस मामले को सियासी रंग दे दिया है. गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि सरकार को छुट्टी देने के साथ-साथ शिक्षा के स्तर को भी देखना चाहिए. शिक्षा का स्तर बढ़ाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार को फैसला लेने से पहले स्कूल और कॉलेज मैनेजमेंट के साथ भी बात करनी चाहिए थी. वहीं सौराष्ट्र के स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि स्कूल में पहले जन्माष्टमी की छुट्टी होती है, जिसके बाद एग्जाम और फिर दिवाली की छुट्टी आ जाती हैं. जिसमें सेमिस्टर खत्म होता है. ऐसे में अगर जन्माष्टमी, फिर नवरात्रि और फिर दिवाली की छुट्टी होगी तो बच्चों के लिए स्कूल में छुट्टी का ही माहौल रहेगा. हालांकि मैनेजमेंट के विरोध के बावजूद सरकार अपने फैसले पर अड़ी हुई है. उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा है कि सरकार किसी से पूछकर फैसला नहीं लेती है.

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एससी-एसटी से जुड़ा विवाद सुलझाने को पीएम मोदी खुद संभालेंगे मोर्चा

नई दिल्ली।  एससी-एसटी कानून के प्रावधानों में बदलाव और जस्टिस एके गोयल को एनजीटी चेयरमेन बनाने से नाराज अपनों को मनाने के लिए प्रधानमंत्री खुद मोर्चा संभालेंगे। इस क्रम में पीएम नरेंद्र मोदी जल्द लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान से बातचीत करेंगे। सरकार मानसून सत्र खत्म होते ही एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाने की तैयारी कर ली है। दरअसल सरकार की मुख्य चिंता दलित संगठनों द्वारा 9 अगस्त को घोषित भारत बंद से सहयोगियों को दूर रखने की है। लोजपा सांसद चिराग पासवान ने शुक्रवार को साफ तौर पर कहा कि अगर जस्टिस गोयल को नहीं हटाया गया तो पार्टी भारत बंद का समर्थन करेगी। असली समस्या इस कानून में बदलाव करने वाले जस्टिस एके गोयल को एनजीटी का चेयरमैन बनाने और यूजीसी द्वारा प्राध्यापकों की नियुक्ति के मामले में रोस्टर है।

इन फैसलों से एनडीए के घटक लोजपा-आरपीआई ही नहीं भाजपा के भी एससी-एसटी सांसद नाराज हैं। सरकार के लिए मुश्किल यह है कि उसके पास फिलहाल जस्टिस एके गोयल को पद से हटाने का रास्ता नहीं है। इसके अलावा सत्र जारी रहते सरकार कानून में बदलाव के खिलाफ अध्यादेश भी जारी नहीं कर सकती।

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