वारंगल। दलित बुद्धिजीवी और लेखक कांचा इलैया पर वैश्य समाज के लोगों ने हमला कर दिया. ये हमला वारंगल में हुआ. हमले के दौरान उनपर चप्पल भी फेंकी गई. आंध्र प्रदेश और तेलांगाना में कांचा इलैया के खिलाफ पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन हो रहा है. और उन्हें धमकियां भी दी जा रही थीं.
वैश्य समाज के लोग कांचा इलैया द्वारा लिखी गई किताब ‘सामाजिक स्मग्गलुरलू कोमातोल्लू’ (वैश्य सामाजिक तस्कर हैं) का विरोध कर रहे हैं. वारंगल जिले में शनिवार (23 सितंबर) को वैश्य समुदाय के लोगों ने लेखक कांचा इलैया पर हमला बोल दिया. इस दौरान उनपर चप्पल भी फेंके गए.
आरोप है कि वैश्य समुदाय ने किताब के विरोध में उनके साथ कथित तौर पर चप्पलों से मारपीट की. पुलिस का कहना है कि कांचा इलैया तेलंगाना के वारंगल जिले में एक इवेंट में पहुंचे थे. जहां लोगों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसके बाद इलैया को पुलिस स्टेशन ले जाना पड़ा. हालांकि इसके बाद पुलिस स्टेशन में तनाव और बढ़ गया.
ये भी पढ़ेंः दलित चिंतक कांचा इलैया को मिली जान से मारने की धमकी
एक वकील करुणसागर ने सईदाबाद पुलिस स्टेशन में इलैया के खिलाफ मामला दर्ज करवाया. वकील ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी किताब में हिंदुओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही हैं. पुलिस ने बताया वकील का आरोप है कि लेखक ने अपनी चार किताबों में हिंदुओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था.
करुणासागर ने कहा कि कांचा ने हिंदू धर्म और देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी हैं. उन्होंने अपनी किताब में यह भी लिखा कि महात्मा गांधी को मारने वाला नाथूराम भी एक ब्राह्मण था. ऐसा दो समुदायों में नफरत को बढ़ावा देने के लिए किया गया.
गौरतलब है कि इस महीने की शुरूआत से ही कांचा इलैया को जान से मारने और जीभ काटने की धमकी दी जा रही थी. जिसके बाद 15 सितंबर को कांचा इलैया ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी.

दलित दस्तक (Dalit Dastak) एक मासिक पत्रिका, YouTube चैनल, वेबसाइट, न्यूज ऐप और प्रकाशन संस्थान (Das Publication) है। दलित दस्तक साल 2012 से लगातार संचार के तमाम माध्यमों के जरिए हाशिये पर खड़े लोगों की आवाज उठा रहा है। इसके संपादक और प्रकाशक अशोक दास (Editor & Publisher Ashok Das) हैं, जो अमरीका के हार्वर्ड युनिवर्सिटी में वक्ता के तौर पर शामिल हो चुके हैं। दलित दस्तक पत्रिका इस लिंक से सब्सक्राइब कर सकते हैं। Bahujanbooks.com नाम की इस संस्था की अपनी वेबसाइट भी है, जहां से बहुजन साहित्य को ऑनलाइन बुकिंग कर घर मंगवाया जा सकता है। दलित-बहुजन समाज की खबरों के लिए दलित दस्तक को ट्विटर पर फॉलो करिए फेसबुक पेज को लाइक करिए। आपके पास भी समाज की कोई खबर है तो हमें ईमेल (dalitdastak@gmail.com) करिए।

Akhir jis program me ye sahab bye the vha ke logo be ye hone kyo diya.