कोरोना इफेक्ट में अमीरों से ज्यादा Tax लेने के सुझाव पर क्यों भड़की मोदी सरकार

0
454

कोरोना के कारण देश की अर्थव्यवस्था को हुए भारी नुकसान को सुधारने के लिए राजस्व सेवा के 51 अफसरों ने अमीरों पर आयकर टैक्स बढ़ाने की सिफारिश की है। इन 51 IRS ने फोर्स 1.0 नाम से एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया कि 1 करोड़ रुपये से ज्यादा आमदनी वालों पर टैक्स को 30 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाए। 5 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति वालों पर वेल्थ टैक्स लगाने का सुझाव दिया गया है, जबकि 10 लाख रुपये से अधिक आमदनी वालों से 4 प्रतिशत वन टाइम कोरोना सेस वसूले जाने का सुझाव है।

इन अधिकारियों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट के जरिए यह सुझाव तो देश हित में दिया था, लेकिन उनका यही सुझाव अब उनके गले की हड्डी बन गया है। केंद्र सरकार ने इस पर भारी नाराजगी जताते हुए इसे गलत कहा है। तो केंद्र की नाराजगी के बाद प्रत्यक्ष टैक्स नीतियों के लिए सर्वोच्च नीति बनाने वाली संस्था केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी (CBDT) ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए अधिकारियों पर जांच शुरू कर दी है।

हालांकि अधिकारियों पर इस कार्रवाई के विरोध में आवाजें उठने लगी है। आईए देखते हैं कि आखिर इस रिपोर्ट में क्या है, जिससे अधिकारियों को लगता है कि ऐसा कर के देश की अर्थव्यवस्था सुधारी जा सकती है। जबकि सरकार इस रिपोर्ट के बाद भड़की हुई है। इस रिपोर्ट में चार मुख्य सुझाव दिये गए हैं। खासतौर पर गरीबों के हित की और अमीरों से ज्यादा टैक्स लेने की बात कही गई है।

(1) सुपररिच पर टैक्स 30 से बढ़ाकर 40 प्रतिशत- IRSA यानी राजस्व सेवा संघ के इन अफसरों ने तीन महीने के लिए देश के धनाढ्य लोग जिन्हें सुपररिच की श्रेणी में रखा जाता है, उन पर 30 की बजाय 40 प्रतिशत सुपर रिच टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सुपर रिच टैक्स या वेल्थ टैक्स में से किसी एक विकल्प पर भी आगे बढ़ा जा सकता है। गौर हो कि वेल्थ टैक्स को खत्म किया जा चुका है।

 (2) विदेशी कंपनियों पर सरचार्ज बढ़ाने का सुझाव- रिपोर्ट में एक अवधि के लिए देश में काम कर रही विदेशी कंपनियों पर सरचार्ज बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। अभी एक से 10 करोड़ रुपये कमाने वाली विदेशी कंपनियों पर 2 प्रतिशत और 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई पर 5 प्रतिशत सरचार्ज लगता है।

(3) गरीबों को हर महीने 5000 रुपये देने की सिफारिश- रिपोर्ट में आर्थिक रूप से कमजोर तबके के परिवारों को छह महीने तक हर महीने 5000 रुपये की मदद की सिफारिश की गई है। इससे 12 करोड़ परिवारों को फायदा होगा। साथ ही यह पैसा तत्काल इकोनॉमी में आएगा।

 (4) सीएसआर फंड में इंसेंटिव बढ़ाने का सुझाव- कोरोना संकट में सीएसआर गतिविधियों के लिए टैक्स इंसेंटिव बढ़ाए जाने का सुझाव दिया गया है। कंपनियों के कर्मचारी जो कोरोना से जुड़े राहत कार्यों में जुटे हैं, उन्हें मिलने वाली सैलरी को सीएसआर फंड में जोड़ा जाए। क्योंकि वे अभी मूल काम नहीं कर रहे हैं।

रिपोर्ट बनाने में किसकी भूमिका-

फोर्स 1.0 नाम की इस रिपोर्ट को 2018-2019 बैच के 15 IRS अधिकारियों ने तैयार किया है। वहीं 2015 से 2018 बैच के 23 अफसरों ने इनमें सहयोग किया है। जबकि 6 अफसर मेंटर हैं। तीन चैप्टर में बनी रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन का है। एक हिस्से में MSMI सेक्टर की वैश्विक स्टडी की गई है। रिपोर्ट के अंतिम हिस्से में देश के 18 विभिन्न क्षेत्रों पर कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन के असर का अध्ययन किया गया है।

लेकिन लगता है कि अमीरों और विदेशी कंपनियों से ज्यादा टैक्स वसूलने और गरीबों को हर महीने 5000 रुपये की सहायाता वाला सुझाव केंद्र सरकार को पसंद नहीं आया है। सरकार को यह दिक्कत है कि आखिर उनके बिना कहे, ऐसा क्यों हुआ। सरकार इसे सेवा नियमों का उल्लंघन बता रही है।

और जाहिर है कि केंद्र सरकार नाराज तो फिर किसी और संस्था द्वारा रिपोर्ट की तारीफ करने का सवाल ही नहीं है, सो केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT का कहना है कि रिपोर्ट को बिना अनुमति के सार्वजनिक किया है। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से पहले उनकी तरफ से कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी।

लेकिन सरकार से उलट आम लोगों के बीच आईआरएस अधिकारियों के खिलाफ जांच की निंदा हो रही है। कहा जा रहा है कि अधिकारियों ने यह रिपोर्ट देश हित में ही तैयार किया है, सरकार उसे मानने या नहीं मानने के लिए आजाद है, लेकिन अधिकारियों पर कार्रवाई समझ से परे है। अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने के सुझाव पर मोदी सरकार का इस तरह भड़कना मोदी सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाती है। सवाल यह भी है कि कोरोना महामारी के वक्त भी कहीं सरकार को देश की अर्थव्यवस्था से ज्यादा चिंता पूंजीपतियों की तो नहीं है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.