रामपुर में 300 से ज्यादा EVM खराब होने पर भड़के अखिलेश यादव

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(फाइल फोटो)

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण का मतदान हो रहा है. इसके बाद दो चरणों का मतदान और बाकी है. तीसरे चरण के बीच में ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव में जोर देकर ईवीएम का मुद्दा उठाया है. दरअसल समाजवादी पार्टी के बड़े चेहरे आजम खान रामपुर से चुनाव लड़ रहे हैं. वहां उनके सामने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही जया प्रदा हैं. आजमगढ़ में आज ही वोटिंग हो रही है. मतदान के दौरान रामपुर में 300 से अधिक ईवीएम मशीन खराब होने की शिकायत मिलने से बलाव मच गया, जिसके बाद मामले को उठाते हुए अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर ट्विट कर दिया.

ट्विटर पर अखिलेश यादव ने कहा, ‘पूरे भारत में ईवीएम में खराबी या बीजेपी के लिए मतदान. डीएम का कहना है कि ईवीएम के संचालन के लिए मतदान अधिकारी अप्रशिक्षित हैं. 350 से अधिक ईवीएम को बदला जा चुका है. यह आपराधिक लापरवाही है. क्या हमें डीएम पर विश्वास करना चाहिए, या कुछ और अधिक भयावह है?’

इससे पहले आजम खान के विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम ने कहा कि 300 से अधिक ईवीएम काम नहीं कर रहे हैं. मतदाताओं के घर में घुसकर पुलिस उन्हें डरा रही है. यह सब मतदाताओं को डराने के लिए किया जा रहा है, जहां हम आसानी से जीत सकते हैं. हालांकि, रामपुर के डीएम ने अब्दुल्ला के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.

देहरादून में 13-22 अप्रैल तक धूमधाम से मनाया गया ‘भीम महोत्सव’

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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के अम्बेडकरवादियों द्वारा लगातार दूसरे साल भीम महोत्सव का आयोजन किया गया। पिछले साल की भांति ही यह महोत्सव शहर के परेड ग्राउंड में हो रहा है। यह भव्य मेला 13 अप्रैल से शुरू है जो 22 अप्रैल तक चलेगा। इसका आयोजन भीम महोत्सव आयोजन समिति, देहरादून द्वारा किया गया है।

देहरादून में आयोजित भीम महोत्सव का दृश्य

आयोजकों के मुताबिक इस आयोजन का उद्देश्य समानता, स्वतंत्रता और न्याय की विचारधारा को संपूर्ण भारतवर्ष में फैलाने वाले आधुनिक भारत एवं भारत के संविधान निर्माता को और उनके सिद्धांतों को याद करना है। दरअसल यह आयोजन अम्बेडकर जयंती के मौके पर किया जाता है। साल 2018 में दून बुद्धिस्ट सोसाइटी द्वारा इस आयोजन की शुरूआत की गई थी। इस वर्ष के कार्यक्रमों की बात करें तो लगातार 10 दिनों तक अलग-अलग कार्यक्रम का आयोजन होता रहा है। इसमें बहुजन संस्कृति और नायकों से जुड़े नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है।

देहरादून में आयोजित भीम महोत्सव का दृश्य
इस आयोजन में पूरे शहर के लोग इकट्ठा होते हैं। आयोजकों का कहना है कि बाबासाहेब डॉ. आम्बेडकर ऐसे व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने हर समाज की भलाई के लिए काम किया है, ऐसे में पूरे समाज के बीच उनके द्वारा किए गए काम को ले जाना ही हमारा उद्देश्य है। यह आयोजन उसी का हिस्सा है।

इस तस्वीर को देखकर वाजपेयी के दिल पर क्या गुजरती?

मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव के चुनाव प्रचार का दृश्य, ढाई दशक बाद दोनों नेता एक साथ थे

अटल बिहारी वाजपेयी ने सपा-बसपा के बारे में कहा था कि “एक काँटे से दूसरे काँटें को निकाला और फिर दोनों काटों को फेंक दिया.” आज दोनों “काँटे” फिर से इकट्ठा हैं. बताइए कि आज जिस तरह दोनों तरफ मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव बैठे थे और बीच में बहनजी बैठी थीं, उस तस्वीर को देखकर वाजपेयी के दिल पर क्या गुज़रती.

यूपी में 24 साल बाद बहनजी और नेताजी के एक साथ आने के बाद अब प्रदेश में राजनीति की तस्वीर साफ हो गई है. यह बहुत बड़ा सामाजिक समीकरण हैं, जिसमें दलित-पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी के बाद इसे रोक पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा. बाकी जनता मालिक है लोकतंत्र में. जिसे चाहे जिता दे, जिसे चाहे हरा दे.

सपा और बसपा ने अपनी पिछली कड़वाहट भुलाई है, यह महत्वपूर्ण है. इस कड़वाहट का बुरा असर दलितों और पिछड़ों दोनों ने झेला है. सपा राज में दलितों और बसपा राज में पिछड़ों का काफी अहित हुआ है. इसके अलावा दोनों दलों को जीतने के लिए सवर्णों की शरण में जाना पड़ा था क्योंकि दोनों दलों का अपना वोट बैंक इन्हें जिताने के लिए काफी साबित नहीं हो पा रहा था. इस वजह से दोनों दलों की राजनीति में काफी विकृतियां आ गईं थी, जिससे देश भर के आंबेडकरवादी और लोहियावादी निराश हो रहे थे. अब उनकी कई शिकायतें दूर हो सकती हैं.

अब बसपा और सपा के साथ आने के बाद सवर्णों की लल्लो -चप्पो करने की दोनों की मजबूरी खत्म हो गई है. इस सभा में मायावती और अखिलेश यादव दोनों ने नरेंद्र मोदी को नकली ओबीसी कहा है. ये लोकसभा चुनाव का बड़ा मुद्दा बन सकता है. इसके अलावा इस रैली में बहनजी ने घोषणा की है कि निजी क्षेत्र की नौकरियों में भी आरक्षण लागू करेंगी.

  • वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल के फेसबुक वॉल से साभार।

साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ कोर्ट पहुंचे मालेगांव धमाके में पीड़ित के पिता

साध्वी प्रज्ञा (फाइल फोटो)

मालेगांव धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल सीट से बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बनाया है. इस ऐलान के बाद से ही साध्वी प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने की कवायद शुरू हो गई है. सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला के बाद अब मालेगांव धमाके के पीड़ित के पिता ने महाराष्ट्र के एनआईए कोर्ट में याचिका दायर करके साध्वी की जमानत पर सवाल उठाए हैं.

एनआईए कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि साध्वी प्रज्ञा को कोर्ट ने स्वास्थ्य कारणों के चलते जमानत दी थी, तो ऐसे में वह भोपाल से लोकसभा का चुनाव कैसे लड़ सकती हैं. पीड़ित के पिता ने मांग की कि कोर्ट साध्वी प्रज्ञा को 2019 का चुनाव लड़ने से रोकने के साथ ही इस मामले हाईकोर्ट के आदेशानुसार उन्हें (साध्वी प्रज्ञा) सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने प्रस्तुत होने का आदेश दिया जाए.

पीड़ित के पिता ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर को जमानत इस शर्त पर दी गई थी कि वह सुनवाई में हिस्सा लेंगी, लेकिन वह अपने आपको अस्वस्थ और स्तन कैंसर से पीड़ित बताकर सुनवाई में हिस्सा नहीं ले रही हैं. जबकि साध्वी विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं और आपत्तिजनक भाषण दे रही हैं.

तहसीन पूनावाला ने भी की थी शिकायत, चुनाव आयोग ने किया सिरे से खारिज

इससे पहले गुरुवार को ही सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग में साध्वी प्रज्ञा के चुनाव लड़ने के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में तहसीन पूनावाला ने प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की है. हालांकि, चुनाव आयोग ने पूनावाला की शिकायत को खारिज कर दिया था. चुनाव आयोग ने कहा था कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर किसी भी मामले में दोषी नहीं हैं. उनपर कोई भी दोष साबित नहीं हुआ है.

साध्वी ने कहा था, मुझे स्वास्थ्य के आधार पर बेल नहीं मिली

गुरुवार को आजतक से बातचीत में साध्वी प्रज्ञा ने अपने जमानत को हो रही बयानबाजी पर कहा था, ‘उनकी जानकारी गलत है. मुझे लगता है उन्होंने यह क्यों नहीं कहा कि मुझे तत्काल फांसी पर लटका देना चाहिए. इनका षड्यंत्र तो यही था. मुझे स्वास्थ्य के आधार पर बेल नहीं मिली है.’

आतंकवाद के आरोपों पर साध्वी प्रज्ञा ने कहा था, ‘आरोप भी इनके कहने पर लगाया है. और उन्होंने षड्यंत्र के तौर पर यह काम किया है. कि जिससे कोई भी देशभक्त हो वह खड़ा न हो सके. और यह इनका छल है. मैं जमानत पर हूं. मुझे एनआईए ने क्लीन चिट दी है. क्योंकि मेरे विरुद्ध कभी कुछ नहीं था और न ही है.’

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क्यों हुआ जेट कर्मचारियों का यह हाल

जेट एयरवेज में लगभग 20 हजार कर्मचारी काम करते थे। आज से जेट एयरवेज बन्द हो गया। ये पूछ रहे है कि “who will give us jobs now? (अब इन्हें नौकरी कौन देगा)। यदि हर परिवार में औसतन 5 लोग हो तो इस फैसले से एक लाख लोगों की जिंदगी दांव पर लग गयी। जिसमें किसी कर्मचारी की माँ का कैंसर की बीमारी का इलाज चल रहा है तो कुछ लोग अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

कई सरकारी कंपनियाँ बंद हो गयी और कई बंद होने के कागार पर हैं। और ऐसा इसलिए है क्योंकि जब सरकार से सवाल करना था तब आप ‘आधी रोटी खाएंगे लेकिन मंदिर वही बनायेंगे’ का नारा दे रहे थे। गाय के नाम पे तो लड़ रहे थे लेकिन तमाम नौकरियों के खत्म होने से आपको कोई दिक्कत नहीं थी। जरा सोचिए, अब खुद क्या खाइएगा और अपनी ‘राजनीतिक गाय’ को क्या खिलायेगा? शिक्षा के निजीकरण और दिन पर दिन महंगी होती शिक्षा पर आप तालियां बजा रहे थे। अब अपने बच्चों की स्कूल फीस कैसे चुकायेंगे? आपका ताली बजाना सिर्फ आपकी नहीं आपके बच्चों के भविष्य को भी अंधेरे में डाल गया।

जेट एयरवेज बंद होने के बाद बिलखते कर्मचारी

अपनी नौकरियां गंवाने और इस फैसले के विरोध में आज से ये सभी कर्मचारी दिल्ली में धरना देने जा रहे हैं। हम आपके दुःख और संघर्ष में साथ हैं, लेकिन काश! आप उनलोगों के साथ होते जब लाखों लोग अपनी नौकरियों के जाने, जमीन के छिने जाने, शिक्षा और शिक्षण संस्थाओं को बर्बाद करने के खिलाफ सड़कों पर थे। काश! आप मंदिर-मस्जिद, अली-बजरंगबली, औरंगजेब, गाय और शमशान आदि पर तालियां न बजा रहे होते। काश! आप यह समझते कि ये क्यों किया जा रहा है? आपके इन्ही मुद्दों को भटकाया जा रहा था। काश! जब किसान, नौजवान और छात्र अपनी समस्याओं को लेकर, महिलाएं अपनी समस्याओं को लेकर जब सड़क पर थी तब उनके दर्द को समझते हुए आप भी उनके समर्थन में सडकों पर आए होते। शायद आज ये समस्या आपतक नही पहुंचती।

ऐसा थोड़े न संभव है कि बस्ती में आग लगे और आपके घर तक न पहुंचे। आपको मालूम था कि बस्ती में आग लगी है लेकिन आप इसलिए तालियां बजा रहे थे कि घर किसी और का जल रहा था। तो लीजिये आग आपके घर तक पहुंच ही गयी। किसी भी देश में नागरिक अपनी जिम्मेदारियों को निभाना बन्द कर देगा तो उसका यही परिणाम होता रहा है। देश सिर्फ सरकार भरोसे नहीं चलती, नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाना पड़ता है। लोकतंत्र को पूंजीतंत्र से बचाइए। लोकतंत्र जब कुछ लोगों की मुट्ठी में कैद हो जाएगा तो यही परिणाम होगा। हम आपके इस दुख की घड़ी में साथ हैं, लेकिन याद रखें कि सबको मिलकर अपने नागरिक होने की जिम्मेवारी को निभाना पड़ेगा तभी सभी नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सकता है। लोकतंत्र लोगों के लिए तभी होगा जब लोग इसे पूंजीतंत्र के कैद से आजाद कराएंगे।

  • राकेश रंजन के फेसबुक वॉल से

भाजपा को रोकने के लिए 24 साल बाद एक मंच पर होंगे मायावती और मुलायम

नई दिल्ली। सपा-बीएसपी-रालोद महागठबंधन की चौथी रैली शुक्रवार को मैनपुरी में होगी. इस दौरान बसपा अध्यक्ष मायावती भी अपने दशकों पुराने प्रतिद्वंद्वी सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के लिये वोट मांगेंगी. मैनपुरी की क्रिश्चियन फील्ड में होने वाली इस रैली में मायावती और मुलायम के मंच साझा करेंगे. इसके जरिये महागठबंधन प्रतिद्वंद्वियों को यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि सभी दल बीजेपी के खिलाफ एकजुट हैं. सपा के जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा ने बताया कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बसपा मुखिया मायावती और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह रैली को सम्बोधित करेंगे. इस मौके पर सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव भी मौजूद रहेंगे. रैली की तैयारियों में जुटे मैनपुरी सदर से सपा विधायक राज कुमार उर्फ राजू यादव ने बताया कि मुलायम ने कल रैली में हिस्सा लेने की पुष्टि की है.

शुरू में ऐसी खबरें थीं कि मुलायम रैली में शामिल नहीं होंगे. वर्मा ने बताया कि रैली स्थल पर 40 लाख लोगों को जुटाने की तैयारी की गयी है. इस बीच, बीएसपी जिलाध्यक्ष शिवम सिंह ने बताया कि मायावती शुक्रवार को सैफई के रास्ते मैनपुरी पहुंचेंगी. मालूम हो कि साल 1993 में गठबंधन कर सरकार बनाने वाली सपा और बसपा के बीच पांच जून 1995 को लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस काण्ड के बाद जबर्दस्त खाई पैदा हो गयी थी. हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले सपा से हाथ मिलाने के बाद मायावती स्पष्ट कर चुकी हैं कि दोनों पार्टियों ने बीजेपी को हराने के लिये आपसी गिले—शिकवे भुला दिये हैं. अब सबकी निगाहें कल मायावती के सम्बोधन पर होंगी.

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन किया है. इस समझौते के तहत 38-38 सीटों पर बीएसपी और सपा चुनाव लड़ रही हैं और दो सीटें शुरू में आरएलडी के लिए छोड़ी गई थी बाद में एक सीट और आरएलडी की दी गई है. वहीं इस गठबंधन ने अमेठी और रायबरेली में अपने प्रत्याशी न उतारने का फैसला किया है.

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BSP की जगह गलती से दबा BJP का बटन, पछतावा होने पर काटी उंगली

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उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक युवक ने अपने हाथ की उंगली इसलिए काट डाली क्योंकि मतदान के दौरान गलती से उसने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को वोट दे दिया. दरअसर, वोट डालते वक्त उसे चुनाव चिह्न हाथी का बटन दबाना था, लेकिन उसने गलती से कमल का बटन दबा दिया. जब उसने इसका अहसास हुआ तो वो बेहद दुखी हुआ और घर आकर उसने वो उंगली ही काट दी जिससे वोट डाला था.

यह हैरान करने वाली घटना बुलंदशहर के शिकारपुर इलाके की है. बताया जा रहा है कि मतदाता दलित समुदाय का है, ऐसे में बसपा का समर्थक है. मतदान के वक्त उसे जब अपनी गलती का अहसास हुआ तब तक बटन दब चुका था. बता दें कि यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन है, ऐसे में एक दलित होने के नाते वो बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को वोट देना चाहता था.

बता दें कि लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में गुरुवार को उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर मतदान हुआ. जिसमें नगीना, अमरोहा, बुलंदशहर, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा और फतेहपुर में वोट डाले गए. मतदान के दौरान कई स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) में गड़बड़ी की वजह से मतदान प्रभावित होने की खबरें भी सामने आईं.

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मध्यप्रदेश : मुरैना में बसपा ने बदला प्रत्याशी, अब करतार सिंह भडाना लड़ेंगे चुनाव

मध्यप्रदेश की मुरैना लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी ने प्रत्याशी बदल दिया है. पहले इस सीट से डॉ. रामलखन कुशवाहा चुनाव लड़ने वाले थे, लेकिन अब यह जिम्मेदारी करतार सिंह भडाना को दे दी गई है. पार्टी द्वारा यह फैसला लेने पर बसपा कार्यकर्ताओं में रोष व्याप्त है. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब बाहर का ही प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारना है तो रामलखन कुशवाहा को ही यह जिम्मेदारी मिलनी चाहिए क्योंकि वह पिछले दो महीने से यहां काम कर रहे हैं.

कार्यकर्ताओं की इस बात पर बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामडी गौतम ने कहा कि यह पार्टी प्रमुख मायावती का निर्णय है. रामजी गौतम व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डीपी चौधरी ने बुधवार को गांधी बाल निकेतन में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में हरियाणा के पूर्व विधायक करतार सिंह भड़ाना को मुरैना-श्योपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रत्याशी घोषित किया था. उन्होंने कहा था कि भडाना का चुनाव लड़ना तय है, उनके नाम की सूची भी जल्द जारी हो जाएगी.

इससे पहले शनिवार को कुशवाहा दिल्ली के लिए रवाना हुए थे. बताया जाता है कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उन्हें बुलाया था. तभी से इस बात की अटकलें तेज हो गईं थीं कि यहां से प्रत्याशी बदला जा सकता है. बुधवार शाम को बसपा ने सूची जारी करते हुए इस अटकल को सही साबित कर दिया.

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दलित दूल्हा दर्शन न करे, इसलिए मंदिर के दरवाजे बंद किए; जान से मारने की भी कोशिश

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इंदौर (मध्यप्रदेश)। शहर के मांगलिया के पास टोड़ी गांव में एक दलित दूल्हे को मंदिर में दर्शन नहीं करने दिया. दरअसल, शादी की रस्म के दौरान वह मंदिर में पूजन के लिए जाना चाहता था. कुछ लोगों ने इसका विरोध किया और मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए. तलवार से हमले की कोशिश भी की गई. बैंड बंद करा दिया गया. बाद में पुलिस और समाज के लोगों ने पहुंचकर दूल्हे को मंदिर के दर्शन कराए. इस मामले में पुलिस ने दो भाइयों के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है.

मांगलिया पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात 10 बजे ग्राम टोड़ी में रहने वाले बीकॉम के छात्र और दूल्हा शुभम परमार मंदिर में जाना चाहते थे. उसकी बारात सोनकच्छ जाने वाली थी, तभी किसी ने गांव के राम मंदिर का कपाट बंद कर दिया. इस पर बारातियों ने आपत्ति जताई.

परिवार ने कहा- लोगों ने जानबूझकर ऐसा किया दूल्हे के परिवार का आरोप था कि दलित की बारात होने के कारण कुछ लोगों ने जानबूझकर ऐसा किया. वहां विवाद होने लगा, तभी गांव के दो युवक राहुल और दिलीप पंवार पहुंचे. उन्होंने तलवार लहराई. शुभम को भी मारने का प्रयास किया. बारातियों ने बीच-बचाव कर आरोपियों को हटाया. कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दी.

दूल्हे का आरोप- पुलिस चौकी प्रभारी बोले, दूर से कर लो दर्शन मांगलिया चौकी प्रभारी विश्वनाथ सिंह तोमर ने पहुंचकर विवाद सुलझाया तो आरोपी वहां से भाग गए. दूल्हे का कहना है कि प्रभारी तोमर ने दूर से मंदिर दर्शन करने को कहा. इस पर बारातियों ने इंदौर में रहने वाले समाज के कुछ वरिष्ठों को बुलाया. उन्होंने प्रभारी के सामने मंदिर के पट खुलवाए और दर्शन करवाए. दूल्हे पक्ष का आरोप है कि जब शिकायत की तो पुलिस ने आरोपी की तलवार जब्त करने के बजाय आचार संहिता का हवाला देकर ढोलक बंद करा दी. हमने एसडीएम की परमिशन दिखाई तो ढोलक वाले को छोड़ा गया. देर रात दूल्हे ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया है.

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बॉक्स ऑफिस: वरुण आलिया के करियर की सबसे बड़ी फिल्म बनी कलंक, तोड़े ये रिकॉर्ड

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मुम्बई। करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी मल्टीस्टारर ने उम्मीद के मुताबिक़ ही बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन किया है. फिल्म ने 2019 में अब तक पहले दिन कमाई करने के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वरुण धवन और आलिया भट्ट स्टारर ने भारतीय बाजार में पहले दिन यानी बुधवार को 21.60 करोड़ रुपये की कमाई की.

ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक़ कलंक ने एक और दिलचस्प रिकॉर्ड बनाया. ये फिल्म आलिया और वरुण धवन के करियर में अब तक पहले दिन कमाई करने वाली सबसे बड़ी फिल्म बन गई है. इस साल पहले दिन सबसे ज्यादा कमाई करने का रिकॉर्ड करण जौहर के ही प्रोडक्शन में बनी अक्षय कुमार स्टारर केसरी के नाम था. केसरी ने पहले दिन 21.06 करोड़ रुपये कमाए थे. सर्वाधिक कमाई के मामले में तीसरे नंबर पर आलिया भट्ट और रणवीर सिंह की फिल्म गली बॉय (19.40 करोड़ रुपये) है. जबकि कॉमेडी ड्रामा टोटल धमाल (16.50 करोड़ रुपये) चौथे नंबर पर है.

लंबे वीकेंड का मिलेगा फायदा, सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी

कलंक कलंक को बुधवार को महावीर जयंती की छुट्टी के मौके पर रिलीज किया गया था. कलंक भारत में करीब 4000 स्क्रीन्स पर है. माना जा रहा है कि फिल्म को पांच दिनों का लंबा वीकेंड मिलेगा. ये फिल्म अपने पहले वीकेंड में ही 100 करोड़ की कमाई का आंकड़ा पार कर सकती है.

कलंक करण जौहर का ड्रीम प्रोजेक्ट है. इसका निर्देशन अभिशेल वर्मन ने किया है. फिल्म को लेकर क्रिटिक्स ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है. फिल्म में वरुण आलिया के अलावा संजय दत्त, माधुरी दीक्षित, आदित्य रॉय कपूर और सोनाक्षी सिन्हा भी अहम भूमिकाओं में हैं.

कौन हैं वो IAS अधिकारी, जिन्होंने ली PM मोदी के काफिले की तलाशी, सस्पेंड!

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चुनाव आयोग ने कर्नाटक के एक आईएएस अधिकारी को कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले की तलाशी लेने की कोशिश पर सस्पेंड कर दिया है. इस अधिकारी का नाम मोहम्मद मोहसिन है, उन्हें संबलपुर में जनरल ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त किया गया था. बताया जा रहा है कि मोहम्मद मोहसिन ने पीएम के काफिले के एक वाहन की तलाशी की कोशिश की थी.

दरअसल मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के संबलपुर में चुनावी दौरा किया था और उस वक्त कर्नाटक बैच के आईएएस अफसर मोहम्मद मोहसिन संबलपुर में जनरल ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त थे. उन्होंने पीएम मोदी के काफिले की तलाशी लेने की कोशिश की. इस बात को लेकर पीएमओ ने चुनाव आयोग से शिकायत की.

उसके बाद चुनाव आयोग को एसपीजी सुरक्षा के बावजूद तलाशी लेने की जानकारी मिली और चुनाव आयोग ने निर्देशों के उल्लंघन के आरोप में आईएएस मोहम्मद मोहसिन को सस्पेंड कर दिया. कहा जा रहा है कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों से अलग अधिकारी ने कार्रवाई की थी. एसपीजी सुरक्षा प्राप्त लोगों को ऐसी जांच से छूट प्राप्त होती है.

मोहसिन साल 1996 बैच के कर्नाटक कैडर के आईएएस अफसर हैं, जिन्हें जनरल ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त किया गया था. बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग सभी संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में सामान्य पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हो सके. पारदर्शिता और स्थानीय प्रशासन से दूरी सुनिश्चित करने के लिए ये हमेशा राज्य के बाहर के अधिकारी होते हैं.

कौन हैं आईएएस मोहम्मद मोहसिन?

मोहम्मद मोहसिन पटना के रहने वाले हैं और कर्नाटक सरकार में सचिव (सोशल वेलफेयर विभाग) हैं. वे कर्नाटक कैडर से आईएएस बने हैं. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से एम कॉम की पढ़ाई की है और साल 1994 में वो यूपीएससी सिविल सर्विसेज की पढ़ाई करने दिल्ली आए थे.

पहले अटेंप्ट में वो सिविल सर्विसेज प्री परीक्षा में सफल नहीं हो पाए और उसके बाद उन्होंने वापस तैयारी की. उसके बाद वो इस परीक्षा में सफल हुए, हालांकि उनके नंबर कम रह गए और वो आईएएस नहीं बन सके.

साल 1969 में जन्मे मोहम्मद मोहसिन ने फिर तैयारी की और 1996 बैच से आईएएस अधिकारी बने. उन्होंने उर्दू स्टडीज के साथ अपनी पढ़ाई की थी. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार वो कर्नाटक सरकार के शिक्षा विभाग और अन्य विभागों में अधिकारी रह चुके हैं. वो कर्नाटक में कई प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

वे शुरुआत में एसडीएम पद पर रहे और उसके बाद जिला पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में डेप्यूटी कमिश्नर आदि पदों पर कार्य कर चुके हैं.

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नक्सलियों ने ओडिशा में महिला मतदान अधिकारी की हत्या की

नक्सलियों ने ओडिशा में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के ठीक एक दिन पहले एक महिला मतदान अधिकारी की हत्या कर दी. इसके मतदान के लिए अपने बूथ की ओर जा रहे वाहन को आग लगा दी. पुलिस ने बताया कि दोनों घटनाएं नक्सल प्रभावित कंधमाल जिले में घटी. यहां पर नक्सलियों ने लोगों को चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी दी है.

डीजीपी बीके शर्मा ने बताया कि सेक्टर ऑफिसर संजुक्ता दिगल चुनाव कराने के लिए एक बूथ की ओर मतदान कर्मियों के साथ जा रही थीं. जब उनकी गाड़ी गूदपाड़ा पुलिस स्टेशन के नजदीक बालंदपाड़ा के पास जंगल से गुजर रही थी तभी रास्ते में संदिग्ध वस्तु पड़े होने पर वह जांचने के लिए गाड़ी से उतरी तभी नक्सलियों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी. गाड़ी में सवार चार अन्य मतदानकर्मियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. यह घटना कंधमाल लोकसभा सीट के तहत फूलबनी विधानसभा क्षेत्र के तहत घटी. यहां पर बृहस्पतिवार को सुबह 7 बजे से मतदान होना है.

दूसरी घटना में नक्सलियों ने मतदान अधिकारियों को ले जा रहे वाहन को आग के हवाले कर किया. यह घटना फिरिंगिया पुलिस स्टेशन के एक गांव में घटी. कंधमाल के जिला अधिकारी डी ब्रुंडा ने कहा कि हथियारों से लैस नक्सलियों ने आग लगाने से पहले मतदान कर्मियों को गाड़ी से नीचे उतरने को कहा था. पुलिस ने कहा कि सभी अधिकारी सुरक्षित हैं लेकिन ईवीएम समेत अन्य चुनाव सामग्री का क्या हुआ, यह पता नहीं चल पाया है.

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दूसरे चरण की वोटिंग: सबसे अधिक फायदा या नुकसान माया का, ‘मुस्लिम-दलित’ गठजोड़ का भी टेस्ट

मथुरा। लोकसभा चुनाव के लिए दूसरे चरण का मतदान जारी है. यूपी की 8 सीटों पर मतदान हो रहे हैं और इसमें से 6 सीटें गठबंधन के लिहाज से बीएसपी के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं. खासकर ब्रज क्षेत्र में गठबंधन के लिए ‘मुस्लिम-दलित’ वोटरों के गठजोड़ का भी टेस्ट होगा. एसपी-बीएसपी के साथ आने से गठबंधन को इस वोट बैंक (मुस्लिम-दलित) को साथ रखने की उम्मीद है. बीएसपी चूंकि यहां 8 में से 6 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती उसी के सामने है. गठबंधन की सहयोगी एसपी हाथरस सीट से जबकि मथुरा की सीट से आरएलडी चुनाव लड़ रही है.

दरअसल, जिन 8 सीटों पर दूसरे चरण के तहत मतदान हो रहे हैं, उनमें से 5 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओें की संख्या 20 फीसदी से अधिक है. वहीं 8 में से 4 सीटें एससी के लिए आरक्षित हैं. आगरा को तो उत्तर भारत का दलित कैपिटल तक कहा जाता है. वहीं नगीना सीट की बात करें तो यहां दलित और मुस्लिम वोटर 60 फीसदी से अधिक हैं. इसी तरह अमरोहा में करीब 55 फीसदी जबकि आगरा और अलीगढ़ में करीब 50 फीसदी मतदाता दलित और मुस्लिम समाज से हैं. गठबंधन में मायावती को ये सीटें मिली थीं.

यही वजह है कि पिछले दिनों एक रैली में मायावती ने मुस्लिम वोटरों से सीधे-सीधे पार्टी को वोट देने और अपना वोट बंटने नहीं देने की अपील कर दी थी. हालांकि बाद में चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाते हुए 48 घंटे तक उनके चुनाव प्रचार पर बैन लगा दिया था.

8 सीटों पर 85 प्रत्याशी आमने-सामने

दूसरे चरण के मतदान के तहत गुरुवार को बॉलिवुड के दो दिग्गज भी मैदान में हैं. मथुरा से हेमा मालिनी चुनावी मैदान में हैं तो फतेहपुर सीकरी से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर किस्मत आजमा रहे हैं. आठ सीटों पर कुल 85 प्रत्याशी मैदान में हैं. अगर 2014 लोकसभा चुनाव की बात करें तो इन सभी आठ सीटों पर बीजेपी ने कब्जा किया था. हालांकि इस बार एसपी-बीएसपी और आरएलडी साथ हैं. उधर, कांग्रेस भी खोए जनाधार को वापस लाने के लिए चुनाव प्रचार में जोर-शोर से जुटी है.

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चंद्रशेखर का ऐलान, नहीं लड़ेंगे वाराणसी से चुनाव

chandrashekharभीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने ऐलान किया है कि वे वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे. चंद्रशेखर ने चुनाव न लड़ने की वजह के बारे में भी खुलासा किया है. चंद्रशेखर का कहना है कि उन्होंने चुनाव न लड़ने का फैसला इसलिए किया है कि क्योंकि वे महागठबंधन को कमजोर नहीं करना चाहते. उनके संगठन का साथ सपा-बसपा गठबंधन को मिलेगा. चंद्रशेखर ने हाल ही में ऐलान किया था कि वे वाराणसी से प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनावों में उतरेंगे.

‘मिरर नाउ’ को दिए गए इंटरव्यू में चंद्रशेखर ने कहा, ‘पहले उम्मीद थी कि महागठबंधन मुझे समर्थन देगा लेकिन महागठबंधन का समर्थन न मिलने से मुझे निराशा हाथ लगी है. मेरा अंतिम उद्देश्य नरेंद्र मोदी को हराना है. बहुजन वोट मेरे लड़ने से बंट जाएगा. अगर फूट पड़ेगी तो लूट मचेगी.’

वाराणसी में पीएम मोदी के खिलाफ न तो महागठबंधन ने किसी प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया है न ही कांग्रेस ने. हालांकि यह बहुत पहले साफ हो गया था कि भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) की ओर से प्रधानमंत्री अपनी संसदीय सीट पर दोबारा चुनाव लड़ेगे.

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बैन खत्म होते ही मायावती ने चुनाव आयोग के खिलाफ खोला मोर्चा

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नई दिल्ली। चुनाव प्रचार पर बैन के 48 घंटे पूरे होने के बाद बसपा प्रमुख  मायावती ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया है. बसपा प्रमुख ने ट्वीट कर आयोग पर निशाना साधा है और सवाल खड़ा किया है। मायावती ने बैन की अवधि पूरा होते ही ट्विट कर पूछा कि “यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ बैन के बाद मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और चुनावी लाभ ले रहे हैं. उन पर आयोग इतना मेहरबान क्यों है?”

मायावती ने आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा, चुनाव आयोग की पाबंदी का खुला उल्लंघन करके यूपी के सीएम योगी शहर-शहर व मन्दिरों में जाकर एवं दलित के घर बाहर का खाना खाने आदि का ड्रामा करके तथा उसको मीडिया में प्रचारित/प्रसारित करवाके चुनावी लाभ लेने का गलत प्रयास लगातार कर रहे हैं किन्तु आयोग उनके प्रति मेहरबान है, क्यों?

बसपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि-अगर ऐसा ही भेदभाव व बीजेपी नेताओं के प्रति चुनाव आयोग की अनदेखी व गलत मेहरबानी जारी रहेगी तो फिर इस चुनाव का स्वतंत्र व निष्पक्ष होना असंभव है. इन मामलों मे जनता की बेचैनी का समाधान कैसे होगा? बीजेपी नेतृत्व आज भी वैसी ही मनमानी करने पर तुला है जैसा वह अबतक करता आया है?’

आज दूसरे चरण के लिए देश भर के 95 सीटों पर मतदान हो रहा है, जिसमें यूपी की 8 और बिहार की पांच लोकसभा सीटें शामिल है। ऐसे मौके पर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि आज दूसरे चरण का मतदान है और बीजेपी व पीएम मोदी उसी प्रकार से नर्वस व घबराए लगते हैं जैसे पिछले लोकसभा चुनाव में हार के डर से कांग्रेस व्यथित व व्याकुल थी. इसकी असली वजह सर्वसमाज के गरीबों, मजदूरों, किसानों के साथ-साथ इनकी दलित, पिछड़ा व मुस्लिम विरोधी संकीर्ण सोच व कर्म है.

दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के देवबंद में रैली में मायावती के मुसलमान वोटरों से वोट की अपील पर एक्शन लेते हुए चुनाव आयोग ने मायावती के प्रचार करने पर 48 घंटे की रोक लगाई थी. ये बैन मंगलवार सुबह 6 बजे शुरू हुआ और 18 अप्रैल सुबह 6 बजे तक चला. इन 48 घंटे में मायावती कोई चुनावी सभा, रोड शो या राजनीतिक ट्वीट नहीं कर सकती थीं. गुरुवार को जैसे ही बैन की अवधि खत्म हुई बसपा प्रमुख ने आय़ोग के साथ ही भाजपा पर भी निशाना साधा. बैन हटने के बाद बहनजी आज 18 अप्रैल को उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बिहार के गोपालगंज जिले में बसपा प्रत्याशी के लिए चुनाव प्रचार कर रही हैं. हालांकि मायावती ने जो आरोप लगाया है, वह चुनाव आय़ोग पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

IRCTC पर काउंटर टिकट को भी ऑनलाइन कर सकते हैं कैंसिल और पा सकते हैं रिफंड

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नई दिल्ली। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (आईआरसीटीसी) इंडियन रेलवे के काउंटर, स्टेशन, रिजर्वेशन ऑफिस और बुकिंग ऑफिस से बुक कराई गई टिकट को भी ऑनलाइन कैंसल करने की सुविधा देता है. यह सुविधा आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट www.irctc.co.in पर मिलती है.

इससे पहले यात्रियों को भारतीय रेलवे काउंटर और आरक्षण कार्यालयों के माध्यम से बुक किए गए ट्रेन टिकट को रद्द कराने के लिए रेलवे स्टेशन या बुकिंग काउंटर पर जाना ही होता था. भारतीय रेलवे उन यात्रियों से कैंसिलेशन शुल्क वसूलता है जो अपनी ट्रेन टिकट रद्द करना चाहते हैं.

जानिए आप काउंटर टिकट को कैसे ऑनलाइन कैंसिल करा सकते हैं-

स्टेप-1: आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट www.irctc.co.in पर जाइए. स्टेप-2: अब अपने माउस के कर्सर को ट्रेन ऑप्शन पर ले जाएं. यह ऑप्शन आपको होमपेज के सबसे ऊपर दिख जाएगा. स्टेप-3: अब अपने कर्सर को ड्राप डाउन मेन्यू में कैंसिल टिकट पर ले जाएं. स्टेप-4: अब काउंटर टिकट पर क्लिक करें. स्टेप 5: अब पीएनआर नंबर पर क्लिक करें, यह ट्रेन टिकट पर छपा हुआ होता है. स्टेप-6: अब कैप्चा को एंटर करें और चेक बॉक्स को कन्फर्म करें कि नियमों और प्रक्रिया को पूरी तरह पढ़ लिया गया है. स्टेप-7: अब सबमिट पर क्लिक करें. स्टेप-8: अब वन टाइम पासवर्ड को एंटर करें जो कि आपके मोबाइल पर भेजा गया है. ये वही नंबर है जिसे आपने बुकिंग के वक्त उपलब्ध कराया था. अब सबमिट पर क्लिक करें. स्टेप-9: ओटीपी वैलिडेट होने के बाद अपनी पीएनआर डिटेल को वेरिफाई करें. स्टेप-10: फुल टिकट कैंसिलेशन के लिए कैंसिल टिकट पर क्लिक करें. इसके बाद, रिफंड की राशि स्क्रीन पर दिखने लगेगी और यूजर को एक एसएमएस प्राप्त होगा जिसमें पीएनआर और रिफंड की जानकारी होगी.

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जेट एयरवेज ने भरी आखिरी उड़ान

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नई दिल्ली। वित्तीय संकट में फंसी जेट एयरवेज ने बुधवार रात से अस्थाई तौर पर अपनी सभी उड़ानों को सस्पेंड करने का फैसला किया क्योंकि कंपनी के पास कैश खत्म हो गया है और बैंकों ने उसे और कर्ज देने से इनकार कर दिया है. 26 साल से अपनी सेवाएं दे रही जेट एयरवेज ने आखिरकार अपनी उड़ाने रोक दी हैं. गौर करने वाली बात है कि जेट ने एक दिन में 650 फ्लाइट्स तक का परिचालन किया है. जेट की उड़ानें रुक जाने के बाद अब कंपनी के 16,000 स्थाई और 6,000 कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पिछले एक दशक में किंगफिशर के बाद कामकाज बंद करने वाली जेट दूसरी कंपनी बन गई है. विजय माल्या की किंगफिशर ने साल 2012 में कामकाज बंद किया था.

अब जेट की फ्लाइट्स दोबारा तभी उड़ान भर पाएंगी जबकि कंपनी को एक नया खरीददार मिले जो इसे नए सिरे से शुरू कर सके. जेट ने बुधवार रात अस्थाई तौर पर अपनी सेवाएं बंद करने का ऐलान करते हुए बीएसई की फाइलिंग में लिखा, ‘बैंकों या किसी अन्य जरिये से कोई इमरजेंसी फंडिंग नहीं आ रही है. हमारे पास कामकाज जारी रखने के लिए तेल खरीदने या किसी अन्य सेवा के लिए भुगतान करने लायक पैसा भी नहीं है. इसलिए जेट तुरंत अपनी सारी इंटरनेशनल और डोमेस्टिक फ्लाइट्स बंद करने पर मजबूर हो गई है. आखिरी फ्लाइट बुधवार को उड़ान भरेगी.’

जेट ने मंगलवार के अपनी उड़ानों का परिचालन जारी रखने के लिए एसबीआई की अगुआई वाले कर्जदाताओं से 983 करोड़ रुपये के इमरजेंसी फंड की मांग की थी.

एयर सहारा की महंगी डील से कभी नहीं उबर पाई जेट एयरवेज जेट की आखिरी फ्लाइट अमृतसर-मुंबई कई तरह से प्रतीकात्मक रही. यह उड़ान उसी मुंबई में खत्म हुई, जहां 5 मई, 1993 को जेट ने अपनी शुरुआत की थी. 5 मई, 1993 को ही मुंबई-अहमदाबाद के लिए जेट की पहली फ्लाइट ने उड़ान भरी थी. इस प्लेन का नाम बोइंग 737 था. 2007 में 1,450 करोड़ रुपये की महंगी डील के साथ एयर सहारा खरीदने वाले नरेश गोयल ने कंपनी को जेटलाइट नाम दिया था. यही वह बेहद कीमती डील थी जिससे जेट कभी उबर नहीं पाई. आखिरकार कंपनी 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गई.

लेकिन अभी भी जेट के दोबारा उड़ान भरने की उम्मीद है. जेट की इमर्जेंसी फंडिंग की अपील को कर्जदाताओं ने खारिज कर दिया लेकिन उन्होंने एयरलाइन से मंगलवार रात कहा, ‘ऐक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट हमें मिल चुका है और बोली के दस्तावेज योग्य प्राप्तकर्ताओं को जारी कर दिए गए हैं. बोली के दस्तावेज में कंपनी के जल्द इस संकट से उबरने का मजबूत प्लान बताया गया है. बोली की यह प्रक्रिया 10 मई, 2019 तक चलेगी. हम भरपूर कोशिश कर रहे हैं कि बोली की प्रक्रिया के जरिए कंपनी की मुश्किल का कोई स्थाई हल ढूंढा जा सके.’

पिछले नवंबर तक जेट के पास बोइंग 777 और एयरबस ए330, सिंगल बी737 और टर्बोप्रॉप एटीआर के साथ कुल 124 एयरक्राफ्ट थे. कंपनी हर दिन करीब 600 फ्लाइट्स ऑपरेट कर रही थी. अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के मामले में जेट एयरवेज देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस में से एक थी.

मंगलवार को एयरलाइन के बोर्ड ने कर्जदाताओं से इमर्जेंसी फंड पाने की अंतिम कोशिश के बाद, सीईओ विनय दुबे को कंपनी की उड़ानों का परिचालन बंद करने का फैसला करने की अनुमति दे दी. बुधवार शाम कर्मचारियों को लिखे एक मेल में दुबे ने कहा, ‘कर्जदाताओं से इमर्जेंसी फंडिंग और किसी दूसरे सोर्स से कोई भी फंडिंग न मिलने के चलते कंपनी के लिए अब उड़ानें जारी रखने के लिए ईंधन और दूसरी सेवाओं का भुगतान करना मुश्किल संभव नहीं होगा. परिणामस्वरूप, हम सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को तत्काल प्रभाव से बंद करने पर मजबूर हैं.

दुबे ने अपने कर्मचारियों को सांत्वना दी और बताया, ‘बिक्री की प्रक्रिया में कुछ समय लगेगा और आने वाले समय में हमें कई और चुनौतियों का सामना करना होगा, जिनमें से कई का जवाब हमारे पास आज नहीं है. उदाहरण के लिए, हम अभी इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब नहीं जानते कि ‘बिक्री की प्रक्रिया के दौरान, हम कर्मचारियों का क्या होगा.’

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इन दो सेलिब्रिटी पर दिल्ली में दांव खेलने को तैयार कांग्रेस!

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव-2019 के तहत देश की राजधानी दिल्ली की सातों सीटों पर 12 मई को मतदान होना है, जबकि इसके लिए नामांकन 16 अप्रैल (मंगलवार) से ही शुरू हो चुका है. इस बीच खबर आ रही है कि कांग्रेस दिल्ली में आम आदमी पार्टी से गठबंधन का इंतजार नहीं करते हुए बुधवार शाम तक सभी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर देगी.

मिली जानकारी के मुताबिक, वीआइपी सीट दक्षिणी दिल्ली पर चुनाव लड़ने के लिए अगर ओलंपियन सुशील कुमार राजी नहीं हुए तो पार्टी बॉक्सर विजेंद्र सिंह पर भी दांव लगा सकती है. सेलिब्रिटी उम्मीदवार के तौर पर पार्टी सुशील के साथ-साथ ओलंपियन विजेंद्र के नाम पर भी गंभीरता से विचार कर रही है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक पहलवान सुशील कुमार पश्चिमी दिल्ली से ही लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, जबकि पार्टी इस सीट से अपने इकलौते पूर्वांचली नेता महाबल मिश्र को उतारना चाहती.

वहीं, पार्टी की एक सोच यह भी है कि पश्चिमी दिल्ली से AAP उम्मीदवार बीएस जाखड़ और भाजपा के संभावित उम्मीदवार प्रवेश वर्मा भी जाट हैं. जबकि, सुशील कुमार भी जाट ही हैं. ऐसे में जाट वोट भी आपस में बंट सकता है. इसी समीकरण के तहत पार्टी सुशील को दक्षिणी दिल्ली से लड़वाना चाह रही है, मगर वह राजी नहीं हो रहे. पूर्व सांसद रमेश कुमार के नाम पर इस सीट से पहले ही ना हो चुकी है. वरिष्ठ पार्टी नेता ओमप्रकाश बिधूड़ी भी मना कर चुके हैं,वहीं चतर सिंह के नाम पर सहमति नहीं बन रही है.

ऐसे में मंगलवार को पार्टी के आला नेताओं में इस सीट से चुनाव लड़ाने के लिए बॉक्सर विजेंद्र सिंह के नाम पर भी चर्चा हुई. हालांकि, विजेंद्र सिंह ने इस बाबत फिलहाल अनभिज्ञता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि कल का तो कुछ कहा नहीं जा सकता, लेकिन अभी तक उनसे किसी ने कोई संपर्क नहीं किया है.

वहीं, याद दिला दें कि पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर भी लोकसभा चुनाव से पहले पिछले महीने 21 मार्च को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. वित्त मंत्री अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी में दिल्ली में वह भाजपा में शामिल हुए. कयास लगाए जा रहे हैं कि वह मीनाक्षी लेखी की जगह नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ेंगे.

गौतम गंभीर एक जानामाना नाम है. वह दिल्ली में जन्मे, पढ़े और दिल्ली में हर स्तर पर उन्होंने क्रिकेट क्रिकेट खेला है. भाजपा में शामिल होने के दौरान गौतम गंभीर के चुनाव लड़ने के पूछे गए सवाल पर अरुण जेटली ने कहा कि था पार्टी जब भी कोई फैसला करेगी, सूचना दे दी जाएगी. अभी इसका फैसला नहीं किया गया है. वैसे यह कयाम कई महीने से लगाए जा रहे हैं कि गौतम गंभीर दिल्ली की किसी सीट से जरूर चुनाव लड़ेंगे. नई दिल्ली सीट कई समीकरणों के चलते गौतम गंभीर के मुफीद है, इसलिए उऩ्हें यहां से लड़ाया जा सकता है.

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आप 2 रुपये खर्च कर जान सकते हैं किसे दिया वोट

नई दिल्ली। मतगणना में गड़बड़ी की आशंका पर वीवीपैट को चैलेंज किया जा सकता है. इसके लिए वोटर को केवल दो रुपये खर्च करने होंगे, लेकिन शर्त यह भी है कि वीवीपैट को गलत चैलेंज करने पर संबंधित के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी. चुनाव में पारदर्शिता लाने व पूर्व में मशीनों में गड़बड़ी के आरोप लगने के बाद निर्वाचन आयोग ने इस बार एडवांस एम-3 वीवीपैट मशीनों में यह नई व्यवस्था की है.

मतगणना के दौरान यदि कोई वोटर मशीन में गड़बड़ी का आरोप लगाता है और कहता है कि उसने वोट जिस दल को दिया था उसका वोट उस दल को नहीं पड़ा तो वह दो रुपये जमाकर वीवीपैट को चैलेंज कर सकता है. इसके बाद प्रशासन द्वारा वहां मौजूद एजेंटों के सामने संबंधित बूथ की वीवीपैट का ट्रॉयल किया जाएगा और उसकी सच्चाई को सामने लाया जाएगा. यदि आरोप गलत साबित होता है तो संबंधित के खिलाफ प्रशासन द्वारा एफआइआर दर्ज कराई जाएगी.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में इवीएम पर राजनीतिक दलों ने गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सवाल खड़े किए थे. बाद में भी इवीएम पर लगातार आरोपों का सिलसिला जारी रहा. इसके बाद निर्वाचन आयोग ने एम-3 मशीन बनवाई और इसमें चैलेंज करने की व्यवस्था जारी की.

वीवीपैट को गलत चैलेंज करने पर आयोग द्वारा दो अधिनियमों की धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज करने का प्रावधान रखा गया है. इसमें आइपीसी की धारा 177 के तहत रिपोर्ट दर्ज की जाएगी. इस धारा के अंतर्गत छह माह की कारावास के साथ एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जा सकता है. इसके साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 26 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी.

सुनील कुमार सिंह (एडीएम वित्त एवं राजस्व व उप जिला निर्वाचन अधिकारी) के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में निर्वाचन आयोग द्वारा पूरी तरह से वीवीपैट का इस्तेमाल किया जा रहा है. गड़बड़ी की आशंका पर वीवीपैट को चैलेंज करने की व्यवस्था बनाई गई है. यदि किसी के द्वारा वीवीपैट को गलत तरीके से चैलेंज किया जाता है तो उसके खिलाफ प्रशासन द्वारा एफआइआर दर्ज कराई जाएगी.

मतदान के दौरान जब मतदाता बैलेट यूनिट पर बटन दबाता है तो वीवी पैट में दिए गए स्क्रीन पर दल का नाम व क्रम संख्या आठ सैकेंड तक प्रदर्शित होता है. इससे वोटर की पुष्टि होती है कि उसने जिस दल व प्रत्याशी को वोट देने के लिए बटन दबाया है, वोट उसी उम्मीदवार को गया है. इसके साथ संबंधित दल व प्रत्याशी की एक पर्ची पिंट्र होकर मशीन में गिर जाती है.

वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट एक तरह की मशीन होती है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ जोड़ा जाता है. इस व्यवस्था के तहत मतदाता द्वारा वोट डालने के तुरंत बाद कागज की एक पर्ची बनती है. इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव चिह्न छपा होता है. ईवीएम में लगे शीशे के एक स्क्रीन पर यह पर्ची सात सेकंड तक दिखती है. यह व्यवस्था इसलिए है ताकि किसी तरह का विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोटों के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके.

सबसे पहले इसका इस्तेमाल नगालैंड के विधानसभा चुनाव में 2013 में हुआ. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट मशीन बनाने और इसके लिए पैसे मुहैया कराने के आदेश केंद्र सरकार को दिए. चुनाव आयोग ने जून 2014 में तय किया अगले आम चुनाव यानी साल 2019 के चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा.

चुनाव आयोग ने चिट्ठी लिख कर वीवीपैट के लिए केंद्र सरकार से 3174 करोड़ रुपये मांगे. बीईएल ने साल 2016 में 33,500 वीवीपैट मशीनें बनाईं. इसका इस्तेमाल गोवा के चुनाव में 2017 में किया गया. बीते दिनों में पांच राज्यों के चुनावों में चुनाव आयोग ने 52,000 वीवीपैट का इस्तेमाल किया.

कैसे काम करती है VVPAT?

जब आप EVM में किसी उम्मीदवार के सामने बटन दबाकर उसे वोट करते हैं तो VVPAT से एक पर्ची निकल आती है, जो बताती है कि आपका मत किस उम्मीदवार के हिस्से गया है. इस पर्ची पर उम्मीदवार का नाम और उसका चुनाव चिन्ह छपा होता है. आपके और VVPAT से निकली पर्ची के बीच कांच की एक दीवार लगी होगी, मतदाता के रूप में आप 7 सेकेंड तक इस पर्ची को देख पाएंगे और फिर यह सीलबंद बॉक्स में गिर जाएगी, यह आपको नहीं मिलेगी. सिर्फ पोलिंग अधिकारी ही इस VVPAT तक पहुंच सकते हैं. मतगणना के वक्त किसी भी तरह की असमंजस या डिस्प्यूट की स्थिति में इन पर्चियों की भी गणना हो सकती है.

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नोटबंदी के बाद भारत में 50 लाख लोगों ने गंवाई नौकरी

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर 2016 को लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद बीते दो सालों में 50 लाख लोगों की नौकरियां चली गई हैं. एक नई रिपोर्ट के अनुसार, खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 50 लाख लोगों ने नोटबंदी के बाद अपना रोजगार खो दिया है. बेंगलुरु स्थित अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ सस्टेनेबल एम्प्लॉयमेंट (CSE) द्वारा मंगलवार को जारी ‘State of Working India 2019′ रिपोर्ट में यह कहा गया है कि साल 2016 से 2018 के बीच करीब 50 लाख पुरुषों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है.

सीएसई के अध्यक्ष और रिपोर्ट लिखने वाले मुख्य लेखक प्रोफेसर अमित बसोले ने हफिंगटनपोस्ट से कहा कि, इस रिपोर्ट में कुल आंकड़े हैं. इन आंकड़ों के हिसाब से 50 लाख रोजगार कम हुए हैं. कहीं और नौकरियां भले ही बढ़ी हों लेकिन ये तय है कि पचास लाख लोगों ने अपना नौकरियां खोई हैं. यह अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है. बसोले ने आगे बताया कि कि डेटा के अनुसार, नौकरियों में गिरावट नोटबंदी के आसपास हुई (सितंबर और दिसंबर 2016 के बीच चार महीने की अवधि में) और दिसंबर 2018 में अपने स्थिरांक पर पहुंची.

रिपोर्ट कॉपी

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा किए जाने के आसपास ही नौकरी की कमी शुरू हुई, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इन दोनों के बीच संबंध पूरी तरह से स्थापित नहीं किया जा सकता है. यानी रिपोर्ट में यह साफ तौर पर बेरोजगारी और नोटबंदी में संबंध नहीं दर्शाया गया है.

‘सेंटर फॉर सस्टेनेबल एम्लॉयमेंट’ की ओर से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अपनी नौकरी खोने वाले इन 50 लाख पुरुषों में शहरी और ग्रामीण इलाकों के कम शिक्षित पुरुषों की संख्या अधिक है. इस आधार पर रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि नोटबंदी ने सबसे अधिक असंगठित क्षेत्र को ही तबाह किया है.

‘2016 के बाद भारत में रोजगार’ वाले शीर्षक के इस रिपोर्ट के 6ठे प्वाइंट में नोटबंदी के बाद जाने वाली 50 लाख नौकरियों का जिक्र है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 के बाद से कुल बेरोजगारी दर में भारी उछाल आया है. 2018 में जहां बेरोजगारी दर 6 फीसदी थी. यह 2000-2011 के मुकाबले दोगुनी है.

रवीश का ब्लॉग- कांग्रेस के घोषणा पत्र में न्याय योजना सबसे खास