बहुजन छात्र को सशक्त करने के लिए होगा बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर सम्मेलन

 Programme on Ambedkar

मऊ। डॉ. भीमराव अम्बेडकर युवा कल्याण समिति के द्वारा बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर युवा छात्र सम्मेलन एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. यह आयोजन दो जुलाई को मऊ नगर पालिका कम्यूनिटी हॉल में सुबह 10 बजे किया जाएगा. सम्मेलन एवं संगोष्ठी का विषय ‘वर्तमान सामाजिक परिदृश्य में युवाओं की भूमिका’ है.

इस कार्यक्रम में यूपी के पूर्व केबिनेट मंत्री दद्दू प्रसाद, विशिष्ट अतिथि एमपी अहिरवार समेत कई अन्य वक्ता भाग लेंगे, इसमें कई मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी. इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में समता सैनिक दल के अध्यक्ष बी.डी. सुजात और वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसर अपना वक्तव्य देंगे. कार्यक्रम के संयोजक प्रवीण कुमार एडवोकेट है.

संयोजक प्रवीण कुमार एडवोकेट ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम का आयोजन देश के विभिन्न शहरो के विश्वविद्यालय और कॉलेजों में आयोजित कराए जाएंगे. बहुजन समाज के छात्रों की ये पहल राष्ट्रीय स्तर पर बहुजन छात्रों को सशक्त करना है. इसमें बहुजन छात्रों के राजनितिक सूझ-बुझ व रणनीति के साथ ही भविष्य की योजनाओं पर मंथन कर आगे की दिशा और दशा तय की जायेगी.

गाय की खाल निकालना सही तो गोमांस खाना गलत कैसे :चेतन भगत

मुबंई। झारखंड में 29 जून को गौ मांस ले जाने के शक में एक मुस्लिम शख्स की भीड़ ने पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. लगातार हो रही घटना से आहत हो कर मशहूर लेखक चेतन भगत ने तथाकथित गोरक्षकों पर अपनी बात रखी है और सवाल उठाया है. चेतन भगत ने उन लोगों से पूछा है कि क्या वे लोग अपनी जान भी लेंगे, क्योंकि वे भी तो गाय के चमड़े से बने जूते पहनते हैं.

दरअसल गुरुवार को प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से कहा कि गोरक्षा के नाम पर जो हिंसा हो रही है वह पूर्णत गलत है और ऐसा करने वालों को माफ नहीं किया जाएगा. प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कुछ घंटों के अंदर ही झारखंड के रामगढ़ जिले में अलीमुद्दीन नाम के व्यक्ति को अपनी मारुती वैन में बीफ ले जाने के शक में भीड़ी ने पीट-पीट कर मार डाला.

पुलिस के मुताबिक अलीमुद्दीन उर्फ असगर अंसारी एक मारुति वैन में ‘प्रतिबंधित मांस’ ले जा रहा था. सूत्रों ने कहा कि लोगों के एक समूह ने बाजरटांड गांव में उसे रोका और उस पर बेरहमी से हमला किया. उसकी वैन को आग के हवाले कर दिया गया. पुलिसकर्मियों ने उसे भीड़ से बचाया और अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

इस घटना पर चेतन भगत ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया. चेतन भगत ने अपने ट्वीट में लिखा- क्या बीफ के नाम पर किसी की भी जान ले लेने वाले खुद की भी जान लेंगे, क्योंकि वो भी तो गाय के चमड़े के बने जूते पहनते हैं. या ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि गाय की खाल उधेड़ना तो ठीक है लेकिन उसका मांस खाना गलत.

आपको बता दें कि झारखंड की इस घटना से पूरे देश में आक्रोश का माहौल है. गौ रक्षा के नाम पर बार-बार हो रही घटनाओं से देश का बड़ा तबका आहत है जो देश में असुरक्षा को माहौल महसूस कर रहा है. विपक्षी पार्टियों का कहना है की भाजपा सरकार जब से बनी है तब से देश में अराजकता का माहौल है.

 इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

…वहां भी तुम पहचानोगे मुझे मेरी जाति से ही

Om Parakash Valmiki दलित साहित्यकारों के प्रतिनिधि सरोकारों में से एक रहे ओमप्रकाश वाल्मीकि की आज जंयती (30 जून 1950) है. ओमप्रकाश वाल्मीकि की दलित साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ओमप्रकाश वाल्मीकि का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के बरला गांव में एक अछूत वाल्‍मीकि परिवार में हुआ था. जिसके बाद उन्होंने अपनी शिक्षा अपने मूल गांव और देहरादून (अब उत्तराखंड) से प्राप्त की. वाल्मीकि का बचपन कठिन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के बीच गुजरा. आरंभिक जीवन में उन्हें जो आर्थिक, सामाजिक और मानसिक कष्ट झेलने पड़े उसकी उनके साहित्य में मुखर अभिव्यक्ति हुई है. वाल्मीकि कुछ समय तक महाराष्ट्र में रहे जहां वे दलित लेखकों के संपर्क में आए और उनकी प्रेरणा से डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर की रचनाओं का अध्ययन करने लगे. बाबा साहेब की रचनाओं का अध्ययन करने से उनकी रचना-दृष्टि में बुनियादी परिवर्तन हुआ. वे देहरादून स्थित आर्डिनेंस फॅक्टरी में एक अधिकारी के रूप में काम करते हुए अपने पद से सेवानिवृत्‍त हो गए. वाल्मीकि के अनुसार दलितों द्वारा लिखा जाने वाला साहित्य ही दलित साहित्य है. उनकी मान्यतानुसार दलित ही दलित की पीडा़ को बेहतर ढंग से समझ सकता है और वही उस अनुभव की प्रामाणिक अभिव्यक्ति कर सकता है. इस आशय की पुष्टि के तौर पर रचित अपनी आत्मकथा ”जूठन” में उन्होंने वंचित वर्ग की समस्याओं पर ध्यान आकृष्ट किया है. ओमप्रकाश वाल्मीकि ने अस्सी के दशक से लिखना शुरू किया, लेकिन साहित्य के क्षेत्र में वे चर्चित और स्थापित हुए 1997 में प्रकाशित अपनी आत्मकथा “जूठन” से. इस आत्मकथा से पता चलता है कि किस तरह वीभत्स उत्पीड़न के बीच एक दलित रचनाकार की चेतना का निर्माण और विकास होता है. किस तरह लंबे समय से भारतीय समाज-व्यवस्था में सबसे निचले पायदान पर खड़ी “चूहड़ा” जाति का एक बालक ओमप्रकाश सवर्णों से मिली चोटों-कचोटों के बीच परिस्थितियों से संघर्ष करता हुआ दलित आंदोलन का क्रांतिकारी योद्धा ओमप्रकाश वाल्मीकि बनता है. दरअसल, यह दलित चेतना के निर्माण का दहकता हुआ दस्तावेज है.

सदियों का संताप —————- दोस्तो, बिता दिए हमने हजारों वर्ष इस इंतजार में कि भयानक त्रासदी का युग अधबनी इमारत के मलबे में दबा दिया जाएगा किसी दिन जहरीले पंजों समेत फिर हम सब एक जगह खड़े होकर हथेलियों पर उतार सकेंगे एक-एक सूर्य जो हमारी रक्‍त शिराओं में हजारों परमाणु क्षमताओं की ऊर्जा समाहित करके धरती को अभिशाप से मुक्‍त कराएगा!

इसीलिए, हमने अपनी समूची घृणा को पारदर्शी पत्‍तों में लपेटकर ठूंठे वृक्ष की नंगी टहनियों पर टांग दिया है ताकि आने वाले समय में ताजे लहू से महकती सड़कों पर नंगे पांव दौडते सख्‍त चेहरों वाले सांवले बच्चे देख सकें कर सकें प्यार दुश्मनों के बच्चों से अतीत की गहनतम पीड़ा को भूलकर

हमने अपनी उंगलियों के किनारों पर दुःस्वप्न की आंच को असंख्य बार सहा है ताजा चुभी फांस की तरह और अपने ही घरों में संकीर्ण पतली गलियों में कुनमुनाती गंदगी से टखनों तक सने पांव में सुना है दहाड़ती आवाजों को किसी चीख की मानिंद जो हमारे हृदय से मस्तिष्‍क तक का सफर तय करने में थक कर सो गई है

दोस्तो, इस चीख को जगाकर पूछो कि अभी और कितने दिन इसी तरह गुमसुम रहकर सदियों का संताप सहना है

वाल्मीकि विभिन्न विधाओं में अपना लेखन कार्य किया जिसमें कविता, कहानी, आत्मकथा, आलोचना, दलित साहित्य, नाटक, अनुवाद आदि शामिल हैं. उनका कविता संग्रह ”सदियों के संताप, बस बहुत हो चुका, अब और नहीं, शब्द झूठ नहीं बोलते काफी चर्चित हैं. जबकि उनके कहानी संग्रह सलाम, घुसपैठिए, अम्मा एंड अदर स्टोरीज, छतरी काफी प्रसिद्ध हैं. उनका आत्मकथा लेखन ”जूठन” भी काफी पढ़ा जाता है. यह अनेक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है. जबकि आलोचनात्मक लेखन की ओर देखें तो दलित साहित्य का सौंदर्य शास्त्र, मुख्यधारा और दलित साहित्य, सफाई देवता काफी चर्चित हैं. उनकी पुस्तक दलित साहित्य: अनुभव, संघर्ष एवं यथार्थ (2013) राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित हुई है. जबकि नाटक दो चेहरे काफी पढ़ी जाती है. इसके अलावा ओमप्रकाश वाल्मीकि ने 60 से अधिक नाटकों में अभिनय, मंचन एवं निर्देशन, अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सेमीनारों में भागीदारी भी निभाई. ओमप्रकाश वाल्मीकि ने कई पुस्तकों का कई भाषाओं में भी अनुवाद किया जिनमें अरुण काले की सायरन का शहर कविता संग्रह का मराठी से हिंदी में अनुवाद, कांचा एलैया की पुस्तक (मैं हिंदू क्यों नहीं) का अनुवाद, लोकनाथ यशवंत की मराठी कविताओं का हिंदी अनुवाद आदि शामिल हैं. ओमप्रकाश वाल्मीकि अपनी जीवन यात्रा के दौरान कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित भी हुए. साल 1993 में डॉ॰ अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार, 1995 में परिवेश सम्मान, 2004 में न्यू इंडिया बुक पुरस्कार, 2001 में कथाक्रम सम्मान, 8वां विश्व हिंदी सम्मलेन 2006 न्यूयोर्क, अमेरिका सम्मान और साहित्यभूषण पुरस्कार (2008-2009) आदि शामिल हैं.

ठाकुर का कुआं ————– चूल्‍हा मिट्टी का मिट्टी तालाब की तालाब ठाकुर का । भूख रोटी की रोटी बाजरे की बाजरा खेत का खेत ठाकुर का । बैल ठाकुर का हल ठाकुर का हल की मूठ पर हथेली अपनी फ़सल ठाकुर की । कुआँ ठाकुर का पानी ठाकुर का खेत-खलिहान ठाकुर के गली-मुहल्‍ले ठाकुर के फिर अपना क्‍या ? गाँव ? शहर ? देश ?

दलित साहित्य में ओमप्रकाश वाल्मीकि का स्थान सबसे ऊपर है. उनके लेखन में उनके जीवन का तीखापन और संघर्ष हमारे सामने साहित्य के रूप में उपस्थित है. उन्होंने अपनी कहानियों में एक ओर जहां ज्ञान और सत्ता के प्रतीक ब्राह्मणवाद और सामंतवाद पर आक्रमण करते हुए दलितों पर हो रहे शोषण, दमन और तिरस्कार का मार्मिक चित्रण किया है, वहीं दूसरी ओर कविताओं में वर्ण और जाति व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए परंपरागत मायाजाल को तोड़ने की कोशिश की है.

आज व हमारे बीच में भौतिक रूप से भले ही न रहे हो लेकिन वैचारिक रूप से वे साहित्य जगत में अमर हैं. उनकी कविता हिंदू धर्म की वर्ण-व्यवस्था के प्रति विरोध की भावना को व्यक्त करती है, जिसके अंतर्गत वे परंपरागत जातीय रूढ़ियों को तोड़ना चाहते हैं. ‘जाति’ नामक कविता की ये पंक्तियां आज भी प्रासंगिक है-

जाति —— स्वीकार्य नहीं मुझे जाना, मृत्यु के बाद तुम्हारे स्वर्ग में। वहां भी तुम पहचानोगे मुझे मेरी जाति से ही!

इस कविता के माध्यम से वे उन तमाम बंधनों से मुक्त होने की जिस आकांक्षा को रखते हैं, उससे सच में एक क्रांति की लहर फूटने वाली लगती है.

चंद्रेशखर की रिहाई के लिए भीम आर्मी महिला विंग ने किया भूख हड़ताल का ऐलान

सहारनपुर: भीम आर्मी अध्यक्ष चंद्रशेखर की रिहाई के लिए भीम आर्मी महिला विंग ने भूख हड़ताल का ऐलान कर दिया है. उन्होनें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर दलित समाज का उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए रावण और दलित समाज के अन्य युवकों की रिहाई की मांग को लेकर 5 जुलाई से भूख हड़ताल और जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी है.

भीम आर्मी की महिला विंग की सदस्या बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट पहुंचीं और मुख्यमंत्री को प्रेषित ज्ञापन डीएम को सौंपा. पत्र में उन्होनें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर पक्षपात एवं दलितों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि सड़क दूधली में भाजपा नेताओं ने बिना अनुमति के बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की शोभायात्रा निकालकर दलितों और मुस्लिमों का टकराव कराया. इस मामले में नेताओं पर भी गैर जमानती वारंट जारी हुए, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि योजनाबद्ध तरीके से एक पक्षीय कार्रवाई की जा रही है. प्रशासन का दलितों के प्रति यही रवैया रहा और बेगुनाह पढ़े लिखे युवाओं को जल्द रिहा नहीं किया गया तो 5 जुलाई से दलित समाज भूख हड़ताल एवं जेल भरो आंदोलन करेगा.

 

भाई के कंधे पर बहन ने दम तोड़ा, चार बार फोन पर भी नहीं पंहुची एंबुलेंस  

मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं की सहायता के लिए दिन प्रतिदिन नई सेवाएं लागू तो करती है, लेकिन असल मायने में उसका फायदा महिलाओं को नहीं मिल पाता है. कल एक दर्दनाक घटना यूपी के मिर्जापुर जिले में हुई जहां 108  एंबुलेंस के समय से न पहुंचने की वजह से मिर्जापुर के मड़िहान सीएचसी के बाहर एक घंटे तक इंतजार के बाद महिला की मौत हो गई. जिसे लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है.

मिर्जापुर क्षेत्र के जुड़िया गांव निवासी मजदूर शिवकुमार की 23 वर्षीय पत्नी सबीतर की दोपहर तीन बजे अचानक तबीयत खराब हो गई थी. जिसके बाद उसे प्राथमिक उपचार केंद्र में भर्ती कराया गया. तबियत ज्यादा बिगड़ने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पातल रेफर कर दिया.

इस दौरान परिजनों ने महिला को जिला अस्पताल ले जाने के लिए लगभग चार बजे 108 एंबुलेंस पर फोन किया. लेकिन एंबुलेंस नहीं आई. अंत में सुविधा नहीं मिलने पर भाई अपनी बीमार बहन को पीठ पर बिठाकर अस्पताल के लिए रवाना हो गया. जहां आधे रास्ते में ही महिला की मौत हो गई.

   

अर्णव शर्मा बनें आईक्यू टेस्ट में नंबर वन, आइंस्टीन और हॉकिंग को छोड़ा पीछा

Arnav Sharma

लंदन। ब्रिटेन में 11 साल के भारतीय मूल के बच्‍चे ने मेन्सा आईक्यू टेस्ट में सर्वाधिक यानि 162 अंक प्राप्त किए हैं. विशेष बात यह है कि इस बच्चे ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग से भी दो अंक ज्‍यादा हासिल किए हैं.

दक्षिण इंग्लैंड में रीडिंग टाउन के अर्णव शर्मा ने बिना किसी खास तैयारी के ये कारनामा कर दिखाया है. उसने इससे पहले कभी ये टेस्ट नहीं दिया था.

द इंडिपेंडेंट की खबर के अनुसार टेस्ट में उसके अंकों ने उसे आईक्यू स्तर पर देश में अव्वल स्थान पर ला दिया है. इस पर अर्णव शर्मा का कहना है कि , ‘मेन्सा टेस्ट मुश्किल होता है और हर कोई इसे पास नहीं कर पाता. मुझे तो इसे पास करने की उम्मीद ही नहीं थी. मैंने ये टेस्ट दिया और इसमें करीब ढाई घंटे लगे. मैंने टेस्ट के लिए कोई तैयारी भी नहीं की थी लेकिन मैं घबरा नहीं रहा था. मेरा परिवार हैरान था, लेकिन वे बहुत खुश हुए जब मैंने उन्हें परिणाम के बारे में बताया’.

इस मौके पर अर्णव की मां मीशा धमिजा शर्मा ने कहा, ‘मैं सोच रही थी कि क्या चल रहा होगा क्योंकि उसने कभी देखा नहीं था कि यह पेपर कैसा होता है’.

अर्णव की मां ने ये भी बताया कि वो जब ढाई साल का था तो ही मैथ्स का कौशल उसमें दिखने लगा था. गौरतलब है कि अर्णव को गाने और डांस करने का भी शौक है.

बता दें कि मेन्सा को दुनिया की सबसे बड़ी और पुरानी उच्च आईक्यू सोसायटी माना जाता है. वैज्ञानिक एवं वकील लांसलॉट लियोनेल वेयर और ऑस्ट्रेलियाई बैरिस्टर रोलैंड बेरिल ने 1946 में ऑक्सफोर्ड में इसकी स्थापना की थी.

उत्तराखंडः सरकारी स्कूल भी होंगे ‘इंग्लिश मीडियम’

Representative School

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक बहुत ही अहम योजना बनाई है. इस योजना के अनुसार राज्य के करीब 18,000 सरकारी स्कूलों के बच्चे अब हिंदी की जगह इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई करेंगे. राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के अनुसार इस परियोजना को कई चरणों में लागू किया जाएगा. इसकी शुरुआत साल 2018-19 शिक्षा सत्र से होगी, जिसमें सबसे पहले क्लास 1 के बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाया जाएगा.

उन्होंने बताया कि अगले साल से क्लास 1 के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाया जाएगा. जिसके बाद धीर-धीरे सभी कक्षाओं में इंग्लिश मीडियम की शुरुआत की जाएगी. सरकारी स्कूलों में इंग्लिश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.

पांडे ने बताया कि सरकारी स्कूलों को हाल ही में अंग्रेजी के 75 सामान्य वाक्य भेजे गए हैं, जिसे उन्हें रोजाना की क्लास रूटीन में शामिल करना अनिवार्य होगा. उनका कहना है कि जब बच्चे छोटे वाक्य और शब्द बोलना सीख जाएंगे तो उनके लिए कठिन वाक्य समझना भी आसान हो जाएगा. इस तरह से बाद में पढ़ाई का माध्यम आसानी से बदला जा सकेगा. इस पहल को लेकर स्कूलों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है.

साउथ अफ्रीका दौरे के लिए भारतीय A टीम की घोषणा

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नई दिल्ली। BCCI ने साउथ अफ्रीका दौरे के लिए भारतीय A टीम की घोषणा कर दी. दौरे की शुरुआत भारतीय टीम वनडे ट्रायंग्युलर सीरीज से करेगी जिसमें तीसरी टीम ऑस्ट्रेलिया की होगी. इसके बाद टीम साउथ अफ्रीका के खिलाफ दो चार दिवसीय मुकाबले खेलेगी. वनडे टीम का कैप्टन मनीष पांडे को बनाया गया है जबकि टेस्ट टीम की अगुआई करुण नायर करेंगे. 26 जुलाई को ग्रोनक्लोफ पर ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ वनडे मैच से भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत करेगी.

सिलेक्टर्स ने वनडे टीम का सिलेक्शन IPL और विजय हजारे ट्रोफी में प्लेयर्स के परफॉर्मेंस को ध्यान में रखते हुए किया है. सिद्धार्थ कौल, क्रुणाल पंड्या, ऋषभ पंत, बासिल थम्पी और मोहम्मद शिराज को IPL के अपने परफॉर्मेंस का इनाम मिला है. इसी तरह टेस्ट टीम के लिए रणजी ट्राफी को आधार बनाया गया है. हालांकि ऋषभ पंत के लिए यह रणजी सीजन भी शानदार रहा था लेकिन उन्हें केवल वनडे टीम में जगह दी गई है.

वनडे टीम: मनदीप सिंह, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन, मनीष पांडे (कैप्टन), दीपक हुड्डा, करुण नायर, क्रुणाल पंड्या, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), विजय शंकर, अक्षर पटेल, युजवेंद्र चहल, जयंत यादव, बासिल थम्पी, मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर और सिद्धार्थ कौल

टेस्ट टीम: प्रियांक पंचाल, अभिनव मुकुंद, श्रेयस अय्यर, अंकित बावने, करुण नायर (कैप्टन), सुदीप चटर्जी, ईशान किशन (विकेटकीपर), हनुमा विहारी, जयंत यादव, शाहबाज नदीम, नवदीप सैनी, मोहम्मद सिराज, शार्दुल ठाकुर, अनिकेत चौधरी और अंकित राजपूत.

 

करीबी रिश्तेदारों के होने पर ही मिलेगी अमेरिका में एंट्री

Donald Trump

वॉशिंगटन। अमेरिका ने 6 मुस्लिम देशों के लोगों और शरणार्थियों को वीजा देने के लिए नए नियम बना दिए हैं. नई नियमों के अनुसार इन देशों के वीजा आवेदक या शरणार्थियों का अमेरिका में पारिवारिक और व्यावसायिक संबंध होना अनिवार्य है. ये शर्त पूरी होने पर ही उन्हें वीजा जारी किया जा सकेगा. ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने रियायत तब दी है, जब सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक तौर पर ट्रम्प के ट्रैवल बैन के आदेश को बहाल कर दिया है.

अमेरिकी एम्बेसी और कॉन्सुलेट को भेजे गए नए नियमों के अनुसार ट्रैवल बैन के दायरे में आने वाले 6 मुस्लिम देशों के लोगों को अमेरिका में पहले से रह रहे अपने रिश्तेदारों के साथ संबंध के सबूत देने अनिवार्य होंगे. वीजा के लिए वो अमेरिका में रह रहे अपने माता-पिता, बच्चों, पति, दामाद, बहू या भाई-बहन जैसे करीबी रिश्तेदारों के साथ ही संबंधों का सबूत दे सकते हैं. नए मानदंडों में ग्रैंड पेरेंट्स, पोते-पोती, चाचा-चाची, भतीजा-भतीजी, ननद, देवर और मंगेतर जैसे अन्य परिवार के सदस्यों को करीबी रिश्तेदार में शामिल नहीं किया गया है.

गौरतलब है कि ट्रम्प के 6 मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक तौर पर बहाल कर दिया था. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर में तय की है. कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को पलटते हुए कहा था कि यह आदेश 6 देशों को उन नागरिकों पर लागू होगा, जिनका अमेरिका में किसी शख्स से कोई संबंध नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि इस प्रतिबंध का जिनके करीबी रिश्तेदार अमेरिका में रह रहे हैं, उन पर या फिर अमेरिकी संस्थानों में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर कोई असर नहीं होगा.

ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद चुनावी वादे के मुताबिक 27 जनवरी को 7 मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन लगाने वाला एग्जीक्यूटिव ऑर्डर सामने आया था ऑर्डर के तहत इराक, लीबिया, ईरान, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के लोगों समेत सभी शरणार्थियों का अमेरिका में प्रवेश रोक दिया गया था. ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का कहना था कि इससे अमेरिका सुरक्षित बनेगा और देश में आतंकी हमलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. निचली अदालत और उसके बाद दो अपीलीय अदालत ने ट्रम्प के ट्रैवल बैन के इस आदेश को गैरसंवैधानिक करार देते हुए इस पर रोक लगा दी थी.

6 मार्च को ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन ने संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें 7 की जगह 6 देश लीबिया, ईरान, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन को इस दायरे में लाया गया. इन देशों के लोगों पर 90 दिन तक यूएस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था. इसके अलावा 120 दिन तक शरणार्थियों के आने पर भी पाबंदी लगाई गई थी.

लखनऊ में खुला पहला ‘फूड एटीएम’, रोज मुफ्त मिलेगा खाना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ‘फूड एटीएम’ नाम की शानदार पहल शुरू हुई है. यह एटीएम आम जनता के लिए फ्री में खाना उपलब्ध कराऐगा. इसकी शुरूआत लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र में रिट्ज् रेस्तरां के पास से की गयी है. इस एटीएम से कोई भी फ्री में खाना ले सकता है और कोई भी खाना दे सकता है. शहर की संस्था ‘राउंड टेबल इंडिया’ की ओर से बचे खाने को जरूरतमंदों को देने के लिए इसकी शुरुआत की गई है.

एक सप्ताह से ट्रायल के तौर पर चल रहे इस फूड एटीएम से रोजाना 30-40 लोग भूख मिटा रहे हैं. इस एटीएम को गुरुवार को स्थायी तौर पर खोल दिया गया. संस्था की योजना अगले एक महीने में 15 और ऐसे फूड एटीएम शुरू करने की है. इसके लिए कुछ और होटल और रेस्तरां से बात चल रही है.

फीडिंग लखनऊ कैंपेन चला रहे ‘राउंड टेबल इंडिया’ लखनऊ चैप्टर के कोषाध्यक्ष पीयूष अग्रवाल ने बताया की कई बार बड़े आयोजनों में बचे खाने की बर्बादी को देखकर मन में कुछ नया करने का विचार आया. हमने रिट्ज प्रबंधन से इस बारे में बात की तो वे हमारे प्रस्ताव पर राजी हो गए. गोमतीनगर स्थित रेस्त्ररां पर ट्रायल के लिए फूड एटीएम लगाया गया. जिसके ट्रांसपैरंट फ्रीजर में रेस्तरां का बचा खाना पैक करके रखा जायेगा. जल्द ही दूसरा एटीएम भी महानगर में लगाया जाएगा. इसमें रखे ट्रांसपैरंट पैकेटों पर एक्सपायरी डेट भी होगी. गौरतलब है की यह योजना सभी के लिए है इसलिए इसमें सभी का सहयोग बेहद जरूरी है इसके लिए कोई भी सहयोग कर सकता हैं.

सहयोग ‘राउंड टेबल इंडिया’ लखनऊ चैप्टर के कोषाध्यक्ष पीयूष अग्रवाल ने बताया कि इस अभियान में कोई भी शामिल हो सकता है. इस फूड एटीएम के पास 24 घंटे एक सुरक्षाकर्मी तैनात रहेगा. मदद के इच्छुक लोग उसे बचा खाना दे सकते हैं. इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि यह खाना बचा हुआ हो, न कि जूठा. रेस्तरां के किचेन में चेक किए जाने के बाद इसे एटीएम में रख दिया जाएगा. यही सुरक्षाकर्मी जरूरतमंदों को खाना भी देगा.

बता दें की विश्व खाद्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया का हर सातवां व्यक्ति भूखा सोता है. विश्व भूख सूचकांक में भारत का 67वां स्थान है. देश में हर साल 25.1 करोड़ टन अनाज का उत्पादन होता है लेकिन हर चौथा भारतीय भूखा सोता है. ऐसे में आम लोगों द्वारा यह पहल बेहद सराहनीय है जिसका रिजल्ट सकारात्मक रहा तो इससे अन्य शहर और राज्य भी जरूर जुड़ेगें.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.  

हूल दिवसः इन दो वीर मूल निवासियों ने दी थी अंग्रेजों को टक्कर

sidho kanhu

भारत के इतिहास में 30 जून का दिन हूल दिवस के नाम से जाना जाता है. इस दिन की कहानी आदिवासी वीर सिदो-कान्हू और चांद-भैरव से जुड़ी हुई है. क्या आप सिदो-कान्हू और चांद-भैरव को जानते हैं. नहीं, तो हम बताते हैं. सिदो-कान्हू और चांद-भैरव झारखंड के संथाल आदिवासी थे. देश को आजादी दिलाने में इनकी अहम भूमिका थी. लेकिन इन्हें पूरा भारत वर्ष नहीं जान पाया. भारत की आजादी के बारे में जब भी कोई बात होती है तो 1857 के विद्रोह को अंग्रेजो के खिलाफ पहला विद्रोह बताया जाता है. लेकिन इससे पहले 1855 में आज ही के दिन सिदो- कान्हू ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह शुरू किया. इसी दिन को बहुजन आंदोलन में हूल दिवस कहा जाता है.

जी हां, 30 जून सन् 1855 में सिदो-कान्हू और चांद-भैरव ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारी बिगुल फूंका था. इन्होंने संथाल परगना के भगनाडीह में लगभग 50 हजार आदिवासियों को इकट्ठा करके अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी थी, जिसमें 20 हजार आदिवासी शहीद हुए. शुरूआत में संथालों को सफलता तो मिली लेकिन बाद में अंग्रेजों ने इन पर काबू पा लिया.

अंग्रेज आदिवासियों को जंगल से बाहर निकालने के लिए दबाव बनाने लगे. अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार थे, हाथी थे. उन्होंने पहाड़ पर चढ़ कर मोर्चा संभाल लिया. जब दोनों ओर से युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेज आदिवासियों पर गोलियों की बौछार करने लगे. जाहिर है, परंपरागत हथियारों से लैस आदिवासी वीर इसका मुकाबला नहीं कर सके. आदिवासी वीर संभल पाते उससे पहले ही अंग्रेजों के बंदूक से निकली गोलियां उन्हे छलनी करने लगी. इस तरह हजारों संथाल आदिवासी मारे गए.

इसके बाद अंग्रेजों ने संथालों के हर गांव पर हमला किया. अंग्रेज यह सुनिश्चित कर लेना चाहते थे कि एक भी विद्रोही संथाल आदिवासी नहीं बचना चाहिए. ये आंदोलन निर्दयी तरीके से दबा दिया गया. इसके बाद सिदो-कान्हू को 26 जुलाई 1855 को ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी. लेकिन इस आंदोलन ने औपनिवेशिक शासन को नीति में बड़ा बदलाव करने को मजबूर कर दिया.

जिस दिन मूलनिवासी आदिवासियों ने अंग्रेजों की सत्ता को मानने से इंकार कर खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया था, बहुजन इतिहास में यही 30 जून का दिन “हूल दिवस” यानी क्रांति दिवस के रूप में दर्ज हो गया. इस दिन को आदिवासी समाज पूरे उल्लास से मनाता है और अपने वीर सिदो-कान्हू और चांद-भैरव को याद करता है. सिदो-कान्हू के नाम से झारखंड में एक विश्वविद्यालय भी 1996 में खोला गया. इस वीर के सम्मान में 2002 में भारतीय डाक ने डाक टिकट भी जारी किया. जय भीम-हूल जोहार का नारा शायद यहीं से निकला होगा.

IAS अफसर राजीव कुमार बने यूपी के मुख्य सचिव

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उत्तर प्रदेश के नए सचिव का भार 1981 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव कुमार को दिया  गया है. गुरुवार को लखनऊ में उन्होंने चार्ज संभाल लिया है. अपना कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ही उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी, नियमों में रहकर कार्य किये जायेगें.

मीडिया से बातचीत में उन्होने कहा कि मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि जो कार्य नियमानुसार और नियमानुकूल है उसे करने में किसी भी अफसर या सरकारी कर्मी को परेशानी नहीं होनी होती. लेकिन जो नियम के अनुसार नहीं हो रहे हैं. उसके लिए सामने वाले को विनम्रता के साथ साथ वास्तविक व सही बातें बताकर मॉफी मांगने में भी कोई गुरेज नहीं होना चाहिए. मुझे उम्मीद है लोग परेशानियों को जरूर समझेंगे.

उन्होने कहा प्रदेश बड़ा है चुनौतियां भी उसी हिसाब से बड़ी है लेकिन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में टीम भावना के साथ सभी चुनौतियों का सामना किया जायेगा. राजनीतिक दबावों से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुनकर भेजे गए जनप्रतिनिधियों से काफी अपेक्षाएं रहती हैं इसलिए नियमों के दायरे मे रहकर उनकी समस्याओं को दूर करना हमारी पहली जिम्मेदारी होती है.

 

यूपी: दलित बहनों से रेप की कोशिश, विरोध पर पीटा

अमरोहा। अमरोहा जिले के डिडौली कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में दलित बहनों से दुष्कर्म की कोशिश की, उनके कपड़े फाड़ दिये गये. कुछ ही समय यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गयी, आरोपियों का विरोध करने पर बहनों व पिता को बेरहमी से पीटकर घायल कर दिया. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है.मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

बता दें की कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी दलित परिवार की दो बहने सोमवार की शाम खेत पर जा रही थी. इसी बीच चार पांच युवकों ने उन्हें दबोच लिया और खींचकर पास के चरई के खेत में ले गए. आरोप ने युवकों ने बहनों से दुष्कर्म की कोशिश की, जिसमें लड़कियों ने शोर मचा दिया. इसी बीच पीछे से किशोरियों का पिता आ गया. उसने आरोपियों का विरोध किया, तो युवकों ने बहनों व पिता को बेरहमी से पीटकर घायल कर दिया और धमकाते हुए भाग गए.

शोर शराबा सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे लोग जमा हो गए. सूचना पर पुलिस पहुंची और घटना की जानकारी ली. रिपोर्ट दर्ज कराने को तहरीर दे दी है. जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है.जांच में पुलिस ने बताया है की दुष्कर्म की कोशिश जैसी कोई बात नहीं हुई है. पर आरोपी रेप की मंशा से ही लड़कियों को खींचकर ले गये थे.

गौरतलब है की दलित लड़कियों, महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाऐँ तेजी से बढ़ी हैं जिनका ग्राफ उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक है.

 

लखनऊ: GST के कारण कल से एसी बसों का सफर महंगा

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लखनऊ: जिस बात का लोगों को डर था, वह डर अब धीरे-धीरे लोगों के सामने आ रहा है। कल से जीएसटी का असर रोडवेज बसों की एसी बस सेवाओं पर भी पड़ेगा. ऐसे में सरकारी परिवहन निगम के एसी बसों का सफर आज आधी रात से महंगा हो जाएगा.

एसी बसों की सभी सेवाओं में पांच फीसदी अतिरिक्त जीएसटी का चार्ज लगेगा. एसी बसों में जनरथ, शताब्दी, वोल्वो, स्कैनिया, महिला स्पेशल बसें शामिल होंगी, जिन पर नया कर लगना तय है. यह पांच फीसदी बढ़ा हुआ किराया 30 जून की आधी रात यानि एक जुलाई से लागू हो जाएगा.

शुक्रवार को एसी बसों के एटीएम में नए किराए के दरों की फिड़िग की जाएगी. मीडिया को यह जानकारी उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के जनसंपर्क अधिकारी अनवर अंजार ने दी.

बता दें की लखनऊ दिल्ली जाने के लिए पहले 1497 रूपये लगते थे तो अब यह किराया बढ़कर 1572 हो गया है वहीं गोरखपुर का किराया 785 से 820,जयपुर का किराया 1613 से 1695, देहरादून का किराय 1660 से 1749, आगरा का किराया 1004 से 1054, वाराणसी का किराया 802 से 842 तथा इलाहाबाद का किराया 526 से बढ़कर 551 हो गया है.

गौरतलब है की रोडवेज का बढ़ा किराया तो शुरूआत मात्र है इसके बाद जीएसटी की मार अन्य क्षेत्रों पर भी पड़नी शुरु हो जायेगी.

दिल्लीः बंद हुए MacDonald’s के 50 में से 43 रेस्तरां, 1700 कर्मचारी हुए बेरोजगार

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नई दिल्ली। लोगों का पसंदीदा बर्गर आउटलेट मैक्डॉनल्ड्स के दिल्ली में मौजूद 50 में से 43 रेस्तरां आज से बंद हो गए है. कनॉट प्लाजा रेस्ट्रान्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बोर्ड (सीपीआरएल) ने इसका फैसला बोर्ड मीटिंग में लिया. इस फैसले के बाद मैक्डी में काम कर रहे 1700 कर्मचारियों के सामने बेरोजगारी की संकट मंडराने लगा है. सूत्रों की माने तो इस फैसले का मुख्य कारण सीपीआरएल बोर्ड के पूर्व प्रबंध निर्देशव विक्रम बख्शी और मैक्डॉनल्ड्स के प्रबंधक के बीच चल रहे विवाद है.

बता दें कि सीपीआरएल, विक्रम बक्शी और अमेरिकी मैकडोनाल्ड के बीच 50-50 फीसद साझेदारी का ज्वाइंट वेंचर है. जो उत्तर और पश्चिम भारत में फास्ट फूड चेन का संचालन करते हैं. सीपीआरएल के पूर्व प्रबंध निदेशक विक्रम बक्शी 168 रेस्त्रां का संचालन करते हैं. बक्शी ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है. लेकिन 43 रेस्त्रां का संचालन अस्थायी रूप से बंद किया जा रहा है. विक्रम बक्शी अपनी पत्नी सहित सीपीआरएल बोर्ड में है और बोर्ड पर वर्चस्व रखते हैं.

ये है मैक्डी के बंद होने की वजह मैक्डी आउटलेट्स को बंद करने का एलान स्काइप के जरिए हुई बोर्ड बैठक के दौरान लिया गया. रेस्तरां को अस्थायी तौर पर बंद की वजह बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच चल रही लड़ाई को माना जा रहा है. जिसकी वजह से सीपीआरएल आवश्यक स्वास्थ्य लाइसेंस रिन्यू कराने में असफल हो गई है. बख्शी को सीपीआरएल के प्रबंध निदेशक पद से अगस्त 2013 में हटा दिया गया था. इसके बाद बख्शी और मैकडॉनल्ड्स के बीच लंबी कानूनी लड़ाई चल रही है, जिसमें उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी फास्ट फूड चेन को कंपनी लॉ बोर्ड में घसीट लिया था. फिलहाल इस मामले में बोर्ड का फैसला नहीं आया है. मैकडॉनल्ड्स लंदन कोर्ट ऑफ इंटरनैशनल आर्बिट्रेशन में बख्शी के खिलाफ मुकदमा लड़ रही है.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.

दो दलित भाइयों को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला

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रोहताश। बिहार के रोहताश जिले में दो भाईयों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी. इन दोनों को बीते बुधवार(28 जून) रात चोरी के शक में पीटा गया था. इस मामले में करीब दो दर्जन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. घटना रात करीब 12.30 बजे हुई जब राहू मुसहर और उसका भाई बब्बन मुसहर कोचस पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले गांव परसिया में एक किसान शौकत अली के घर में कथित तौर पर घुसते पकड़े गए. शौकत अली के शोर मचाने पर गांव के दूसरे लोग भी इक्ट्ठा हो गए और दोनों की जमकर पिटाई की. राहू की उम्र 33 साल और बब्बन की उम्र 31 साल थी, जो परसिया गांव से 20 किमी दूर पगरी गांव के रहने वाले थे.

आरोप है कि गांव वालों ने दोनों भाईयों को हाथों और डंडों से पीटा. पुलिस रात को एक बजे गांव पहुंची और दोनों घायल भाईयों को कोचस के हेल्थकेयर सेंटर ले गई. यहां बुधवार देर रात बब्बन ने दम तोड़ दिया. राहू की मौत रोहताश स्थित सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई.

कोचस पुलिस स्टेशन के इंचार्ज सतीश कुमार ने कहा, “यह साफ नहीं हो सका कि ये दोनों भाई परसिया में किस काम से आए थे. हमने गांव के दो दर्जन से ज्यादा लोगों पर मामला दर्ज किया है. गांव वालों से पूछताछ की जा रही है. दोनों ही पीड़ितों के खिलाफ पहले का कोई आपराधिक मामला नहीं है.” थाना इंचार्ज ने बताया कि मृतकों के परिवार से अभी तक कोई भी नहीं आया है और बताया जा रहा है कि घटना के बाद वो गांव छोड़कर भाग गए हैं.

JNU: नजीब के बारे में सूचना देने वाले को 10 लाख रूपये का इनाम

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नयी दिल्ली। जेएनयू छात्र नजीब अहमद को लापता हुए आठ माह से अधिक हो गये हैं. सीबीआई ने बयान दिया है कि जेएनयू के लापता छात्र नजीब का पता बताने वाले को 10 लाख रूपये का इनाम दिया जायेगा. एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि नजीब के बारे में सूचना देने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति इन नम्बरों 011- 24368641, 24368634, 24368638 और 9650394796 पर संपर्क कर सकते हैं.

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में रहस्यमय तरीके से लापता हुए नजीब के मामले की जांच कर रही सीबीआई हाल ही में विश्वविद्यालय परिसर में स्थित छात्रावास गयी थी. नजीब इसी छात्रावास से लापता हुआ था. नजीब की मां फातिमा नफीस ने हाल ही में मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारियों से भेंट कर छात्र के लापता होने से पहले के घटनाक्रम की जानकारी उन्हें दी थी.

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नजीब छुट्टियों के बाद 13 अक्तूबर 2016  को विश्वविद्यालय लौटा था. फातिमा ने कहा था, 15-16 अक्तूबर की रात नजीब ने उनसे बात कर कहा था कि कुछ गड़बड़ है। नजीब के रूममेट ने बाद में उन्हें बताया कि उसे किसी झगड़े में चोट आयी थी.

उनका कहना है बातचीत के बाद वह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से बस से दिल्ली रवाना हो गयीं. आनंद विहार पहुंचने के बाद उन्होंने फोन पर नजीब से बात की और उससे होटल में मिलने को कहा, जहां वह रूकी हुई थीं. फातिमा ने अपनी शिकायत में कहा है, वहां नजीब का कुछ पता नहीं था. फिर जब वह माही-मांडवी छात्रावास के रूम नंबर-16 पहुंची तो नजीब का कोई अता-पता नहीं था.

दिल्ली पुलिस जब नजीब को नहीं खोज सकी तो वह सीबीआई जांच की मांग लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंचीं. अदालत ने 16 मई को जांच सीबीआई को सौंप दी. मामले पर अगली सुनवायी 17 जुलाई को होनी है. उम्मीद है सीबीआई नजीब अहमद के लापता होने के मामले में बड़ा खुलासा जल्द करेगी.

इस खबर का संपादन नागमणि कुमार शर्मा ने किया है.  

उना दलित कांड के पीड़ित परिवार ने कहा- राष्ट्रपति कोई बने, हमारा दर्द नहीं मिटेगा

Babu Sarviyya

अहमदाबाद। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रामनाथ कोविंद को एनडीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित करते हुए उन्हें “गरीब दलित परिवार में जन्मा पार्टी का वरिष्ठ नेता बताया.” कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मीरा कुमार को यूपीए का राष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित करते हुए कहा कि उन्हें “गर्व” है कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर विपक्ष की पसंद “दलित” नेता हैं. लेकिन बालू सरवैया दोनों ही उम्मीदवारों को दलितों का प्रतिनिधि नहीं मानते.

पिछले साल 11 जुलाई को गुजरात के उना में बालू के दो बेटों और दो भतीजों की कथित गौरक्षकों ने पिटाई कर दी थी. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि गाय को एक शेर ने मारा था. गुजरात में दलितों ने इस पिटाई के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए. 47 वर्षीय बालू सरवैया बुद्ध, बाबासाहेब अंबेडकर और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती की तस्वीर की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं, “वो जैसी भी हों हम मायावती के साथ हैं.”

बालू सरवैया अन्य 50 दलितों के साथ अपने गांव से 30 किलोमीटर दूर एक बसपा से हुई एक बैठक के लिए आए थे. इस बैठक में एक वक्ता गौतम जादव ने कहा, “हम जल्द ही राष्ट्रपति चुनाव के साक्षी बनेंगे. रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दो उम्मीदवार हैं. आज तक हमें पता चला कि प्रतिभा पाटिल की जाति क्या थी? या प्रणब मुखर्जी की? अबकी बार ये कहा जा रहा है कि इस बार दलित राष्ट्रपति होगा और वो हमारा होगा. हम सबको पता है कि केंद्र हमसे कितना प्यार करता है. हमने पिछले 65 में ये देखा है.”

इस बैठक में बालू के भतीजे बेचर (30) और अशोक (20) भी शामिल थे. बालू के बेटों रमेश (23) और वशराम (25) के साथ अशोक और बेचर की कथित गौरक्षकों ने पिटाई की थी. बालू के परिवार में अगर कोविंद और मीरा कुमार के नाम का कोई महत्व है तो वो उनके भतीजे जीतू हैं. जीतू ने हाल ही में भावनगर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है. बालू कहते हैं कि उनका परिवार बौद्ध धर्म ग्रहण करना चाहता है लेकिन उन्हें डर है कि उन लोगों पर फिर से हमला हो सकता है.

Una Dalit Victim

बालू के परिवार ने गाय का चमड़ा उतारने का काम छोड़ दिया है. बालू कहते हैं, “हमारे परिवार ने गाय का चमड़ा उतारने का काम छोड़ दिया है लेकिन गौरक्षकों का डर बना हुआ है. हम चाहते हैं कि हमारे बेटे अहमदाबाद में बस जाएं.” बालू कहते हैं, “मैं गांव में रहूंगा. अगर वो मुझे मार देते हैं तो कोई बात नहीं. वो गुस्सा हैं और कभी भी बदला ले सकते हैं. अगर मेरे बेटे को जेल हुई होती तो मुझे भी ऐसा ही लगता. इस बार उन लोगों ने हम पर हमला किया तो कोई वीडिया वायरल नहीं होगा, लेकिन वो देखने लायक मंजर होगा.”

बालू करीब 20 साल तक भाजपा से जुड़े रहे. बालू के अनुसार वो हर चुनाव में भाजपा के लिए प्रचार करते थे. लेकिन अब उनका भाजपा से मोहभंग हो चुका है. गुजरात पुलिस की सीआईडी ने दलितों की पिटाई मामले में अब तक 43 लोगों को गिरफ्तार किया था जिनमें चार पुलिसवाले भी हैं. पुलिसवालों पर मामले की चार्जशीट में गड़बड़ी करने का आरोप है. मामले के मुख्य आरोपी शांति मोनपारा और पुलिसवालों समेत 20 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है.

ओवैसी: सिर्फ बातें करना जानते हैं पीएम मोदी, कार्रवाई नहीं

नई दिल्ली: महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम की स्थापना के 100 साल पूरे होने का मौका था. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी शताब्दी समारोह में कह रहे थे कि गौरक्षा के नाम पर किसी इंसान को मारना गौसेवा नहीं है.  हिंसा से आज तक कभी किसी समस्या का समाधान नहीं हुआ और ना ही आगे होगा. गाय सेवा के नाम पर इंसानो की हत्या निंदनीय है. इस बयान के आने के बाद पीएम मोदी विपक्षी नेताओं के निशाने पर आ गए हैं.

ऑल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहदुल मुसलमीन (AIMIM) पार्टी के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए पीएम के बयान को केवल जुबानी कार्रवाई बताया. उन्होंने कहा कि वह सिर्फ बातें करना जानते हैं. इससे पहले भी पीएम मोदी गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा पर बयान दे चुके हैं लेकिन हालात वैसे ही हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन लोगों को बीजेपी, आरएसएस की तरफ से लगातार समर्थन मिलता रहा है.

ओवैसी ने आगे ट्वीट करते हुए लिखा कि बस बातें करने से कुछ नहीं होगा. गौरक्षा स्वीकार नहीं है तो पहलू खान के 3 हत्यारों को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया है?  जबकि राजस्थान में बीजेपी की सरकार है.

पीएम मोदी के इस भाषण को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. किसी ने कहा है कि पीएम मोदी ने ये बयान देने में काफी देर कर दी है.  जब उन्हें लग रहा है कि जनता में गौरक्षा के हिंसात्मक रवैया की वजह से आक्रोश बढ़ रहा है और वो सड़कों पर उतर रहे हैं, तब उन्हें इसकी याद आई है.

गौरतलब है की देश भर में गौ-रक्षा के नाम पर लगातार हत्याऐँ हो रही हैं जिसकी खबरें आये दिन लोगों में डर पैदा कर रही है.

 

SSC स्टेनोग्राफर पद पर वैकेंसी, जल्दी करें आवेदन

नई दिल्ली : स्टॉफ सलेक्शन कमिशन (SSC)  ने स्टेनोग्राफर ग्रेड के C और D रिक्ति पद के लिए घोषणा की है. आप भी अगर सरकारी नौकरी पाने का सपना देखते हैं तो जल्द ही आवेदन करें.

योग्यता –

इच्छुक उम्मीदवार के पास किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल शिक्षा बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास या समकक्ष योग्यता प्राप्त होनी चाहिए.

उम्र सीमा-

इस पोस्ट के लिए 18 से 27 साल की उम्र के उम्मीदवार ही आवेदन कर सकते हैं. एसएसी/ एसटी/ ओबीसी और दिव्यांगों को सरकार के नियमानुसार छूट दी जाएगी.

चयन प्रक्रिया-

इस पोस्ट के लिए उम्मीदवार का चयन लिखित परीक्षा और स्किल टेस्ट के आधार पर किया जाएगा.

शुल्क-

इस पोस्ट के लिए अप्लाई करने के लिए 10 रुपए का शुल्क लिया जाएगा.

ऐसे करें आवेदन-

उम्मीदवार www.ssconline.nic.in पर जाकर ‘रिक्रूटमेंट फॉर स्टेनोग्राफर ग्रेड ‘सी’ और ‘डी’ एग्जामिनेशन 2017’ ऑप्शन पर क्लिक करें, इसके बाद क्लिक टू अप्लाई लिंक पर क्लिक करें.

कंप्यूटर परीक्षा-

4 से 7 सितंबर के बीच होगी परीक्षा

आवेदन की अंतिम तारीख-

उम्मीदवार इस पोस्ट के लिए 15 जुलाई शाम 5 बजे तक ही आवेदन कर सकते हैं, चालान से शुल्क के भुगतान की अंतिम तारीख 18 जुलाई शाम 5 बजे तक है.