मायावती के समर्थन में सड़कों पर उतरा दलित संगठन

kodarama

कोडरमा। कोडरामा जिले के झुमरीतिलैया में मायावती के समर्थन में विरोध मार्च निकाला गया. इस विरोध मार्च में लोगों ने केद्र सरकार की अलाचोना की और मायावती के समर्थन में नारे बाजी की.

बसपा प्रमुख मायावती को राज्यसभा में बोलने से रोकने के विरोध में दलित शोषण मुक्ति मंच ने 19 जुलाई की शाम को विरोध मार्च निकाला. यह मार्च झुमरीतिलैया के पानी टंकी रोड से शुरू हुआ. विरोध मार्च मुख्य सड़कों से होते हुए झंडा पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया.

विरोध मार्च में कार्यकर्ता संसद के अंदर दलित नेताओं का अपमान करना बंद करो, जनादेश के नाम पर दादागिरी बंद करो, संसद एवं सड़कों पर लोकतंत्र को बहाल करो, सहारनपुर के दलितों को इंसाफ दो आदि नारे लगाए. विरोध मार्च का नेतृत्व मंच के संयोजक प्रेम प्रकाश, वार्ड पार्षद घनश्याम तुरी, गणपत भुईयां, शंभू पासवान, सहदेव दास, बसंती देवी कर रहे थे.

इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार भारी जनादेश के घमंड में लोकतंत्र को कुचलना चाह रही है. संसद के अंदर दलित नेता मायावती को सहारनपुर के दलितों की पीड़ा तक की बात रखने का मौका नहीं दिया. ऐसा करके सरकार अपने दलित विरोधी चेहरे को सामने लाई है. सरकार के एजेंडा में दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक एवं प्रगतिशील बौद्धिक तबके को बर्बाद करने पर तुली है.

गौरतलब है कि मायावती मानसून सत्र के दूसरे दिन सहारनपुर हिंसा पर अपनी बात रख रही थी. लेकिन राज्यसभा  के उपसभापति पीजे कुरियन ने उन्हें बोलने का मौक नहीं दिया. इससे नाराज होकर मायावती ने सभा में इस्तीफे की पेशकश की और शाम होते-होते उन्होंने सभापति को इस्तीफा दे दिया. लेकिन उस समय उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया. दो दिन बाद मायावती ने दोबार इस्तीफा दिया और सभापति ने उसे स्वीकार कर लिया.

मध्यप्रदेश में मस्जिद जलाने की कोशिश के बाद बवाल

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भोपाल। देश में हिन्दू-मुस्लिम के बीच माहौल जिस तरह से बना हुआ है इसकी खबर अन्य देशों तक भी पहुंच चुकी है जिसकी आलोचना वहां की मीडिया कई बार कर चुकी है. हिन्दू-मुस्लिम के बीच बड़े विवादों की घटनाऐँ उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, महाराष्ट्र, कश्मीर, केरल, गुजरात जैसे राज्यों के बाद मध्य प्रदेश में भी गहराने लगी है जहां एक गांव में बड़ा विवाद सामने आया है. एमपी के छिपनार गांव में गुरुवार (20 जुलाई) एक नाबालिग लड़के को मस्जिद में आग लगाने की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया. गांव के मुसलमानों के करीब एक दर्जन घर क्रोधित भीड़ ने जला दिया था. गुरुवार को जब गांव की मस्जिद से धुआं निकलता दिखा तो लोगों को चिंता हुई. जब गांववाले मस्जिद में पहुंचे तो वहां एक चटाई जलती देखी.

गांव के कुछ लोगों का कहना है कि लड़का इंदौर का रहने वाला है और छिपनार में रहने वाले अपने दादा-दादी के पास आया है. लड़के को सिहोर के किशोर एवं बाल न्यायालय में पेश किया गया है. न्यायालय ने उसे कानूनी अभिरक्षा में भेज दिया है. इस महीने इसी गांव में एक मुस्लिम व्यक्ति और एक नाबालिग हिन्दू लड़की के घर से भाग जाने के बाद गांव में तनाव फैल गया था और कुछ मुसलमानों की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया गया था.

एसडीपीओ अनिल त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि चश्मदीद गवाहों के अनुसार लड़के ने मस्जिद में लूटपाट और आग लगाने की कोशिश की थी और उसने ये बात स्वीकार भी की थी. गांववालों के अनुसार आठ जुलाई को लड़के के दादा-दादी का घर भी भीड़ ने जला दिया था. नाबालिग लड़के पर भारतीय दंड संहिता की धारा 436 और धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया गया था. पुलिस अधिकारियों के अनुसार मस्जिद में केवल जली हुई चटाई मिली थी. पुलिस के अनुसार इस घटना के बाद एक बार फिर गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया है.

जुलाई के पहले हफ्ते में तब तनाव फैल गया था जब एक मुस्लिम व्यक्ति एक नाबालिग हिंदू लड़की के संग घर से भाग गया था. घटना के बाद क्रोधित हिंदुओं ने मुसलमानों के कई घर जला दिए थे. बाद में युवक और नाबालिग लड़की को महाराष्ट्र से पुलिस ने पकड़ा. युवक पर पुलिस ने अपहरण और बलात्कार का मुकदमा दर्ज किया है गांव में तनाव बना हुआ है.

भाजपा का दलित विरोधी चेहरा सामने लाएंगी मायावती

लखनऊ। मायावती राज्यसभा में शब्बीरपुर हिंसा के बारे में खुद को बोलने का वक्त नहीं मिलने पर चुप बैठने के मूड में नहीं हैं. बसपा इस मुद्दे पर डट कर अपने बात रखेगी और केंद्र सरकर का दलितों के प्रति यह रवैया पूरे देश की जनता को दिखाएगी. राज्यसभा सदस्य के रूप में 20 जुलाई को इस्तीफा स्वीकार होने के बाद बसपा प्रमुख मायावती अब अगले कदम पर विचार करेंगी. इसके लिए वह 23 जुलाई को नई दिल्ली में पार्टी के नेताओं के साथ रणनीति तैयार करेंगी.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने 23 जुलाई को पार्टी के राज्यसभा सांसदों, विधायकों, जोन इंचार्ज, जिलाध्यक्ष सहित पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं को दिल्ली तलब किया है. माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर की इस बैठक में मायावती आगामी रणनीति तय करेगी. दलितों के मुद्दे पर राज्यसभा में बात रखने का मौका न मिलने से नाराज बसपा प्रमुख ने पिछले दिनों अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. कल इस्तीफा स्वीकार होने के बाद मायावती ने दिल्ली में ही रविवार को उत्तर प्रदेश के साथ ही दूसरे राज्यों के प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है.

यहां क्लिक कर देखिए वीडियो में क्या कहा मायावती ने

सूत्रों का कहना है दलितों के मुद्दे पर बसपा प्रमुख द्वारा इस्तीफा देने की बात को अब गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी है. बसपा प्रमुख ने राज्यसभा में जो बोला उसे सोशल मीडिया आदि पर वीडियो के जरिए दलितों के बीच पहुंचाकर यह संदेश देने की कोशिश है कि मायावती ही उनकी सच्ची हितैषी हैं. दलितों की लड़ाई लडऩे के लिए बसपा प्रमुख ने अपने पद की परवाह नहीं की.

दलित हित में सांसदी कुर्बान करने की छवि को उभारने के लिए पार्टी सड़कों पर भी संघर्ष करेगी. 23 जुलाई को दिल्ली में आहूत बैठक में इसकी रणनीति तैयार की जाएगी. आंदोलन से आमतौर पर दूर रहने वाली बसपा बदले हालात में संघर्ष की राह पकड़ती दिख रही है. विधानसभा में भी बसपा आक्रामक तेवर अपनाए हुए है.

कैग ने किया रेलवे के बारे में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। रेलवे सफाई और गुणवत्ता के मामले में बहुत पहले से घिरा हुआ है अब एक नया खुलासा ट्रेन के खाने को लेकर हुआ है. दरअसल ट्रेनों में और रेलवे स्टेशन पर आप जिस खाने को चाव से खाते हैं वो इंसानों के खाने लायक ही नहीं है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(कैग) ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि स्टेशनों पर दूषित खाद्य पदार्थ, डिब्बा बंद, रिसाइकिल किया और उपयोग की अंतिम तारीख खत्म हो चुकी चीजें बेची जाती हैं. कैग ने यह खुलासा संसद में रखी अपनी रिपोर्ट में किया है.

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कैटरिंग पॉलिसी में लगातार बदलाव के चलते यात्रियों को मिलने वाली कैटरिंग सुविधा में अनिश्चितता की स्थिति पैदा करता है. जांच में पता लगा कि साफ सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जाता वहीं जो भी चीजें यात्रियों को परोसी जाती हैं उनके बिल भी नहीं दिए जाते हैं. रेलवे और कैग की संयुक्त टीम द्वारा 74 रेलवे स्टेशनों और 80 ट्रेनों में किए गए सर्वे के बाद ऑडिट नोटिस में कहा गया है कि ट्रेन और स्टेशन दोनों पर साफ सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता.

इसमें कहा गया है नलों से बिना साफ किया हुए पानी का उपयोग खाने-पीने की चीजों को बनाने में किया जाता है वहीं खाली कचरे के डिब्बों को ना तो ढका जाता है और ना ही समय-समय पर साफ किया जाता है. खाने की चीजों को मक्खियों और अन्य कीड़ों से बचाने के लिए ढका तक नहीं जाता. ट्रेनों में चूहों के अलावा कॉक्रोच, मक्खियां और धूल पाई गई है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यात्रियों को खाने के बिल नहीं दिए जाते, साथ ही प्रिंटेड मेनू कार्ड भी उपलब्ध नहीं है. ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि खाने की चीजे लिखी हुई मात्रा से कम होती हैं वहीं बिना अप्रूव किया हुआ पीने का पानी बेचा जाता है. इसके अलावा ट्रेनों में बेचा जाना वाला सामान बाजार भाव से कहीं महंगा होता है और गुणवत्ता बिल्कुल खराब होती है.

3 दिवसीय अंबेडकर इंटरनेशनल कांग्रेस का उद्घाटन करेंगे राहुल गांधी

बंगलुरू। दलित वोट भारत की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा बीजेपी और काग्रेंस को बहुत पहले हो चुका है. चूकिं कर्नाटक में दलित वोट की संख्या अधिक है इसलिए सभी की राजनीति के केन्द्र में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर हैं. इसको ध्यान में रखते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को बंगलुरु में तीन दिवसीय बाबा साहेब बी.आर. अंबेडकर इंटरनेशनल कांग्रेस ऑन सोशल जस्टिस का उद्घाटन करेंगे.

इस कार्यक्रम में राहुल गांधी के अलावा कई अन्य बड़ी हस्तियां शामिल हो सकती हैं. जिसमें नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी, पूर्व सांसद प्रकाश अंबेडकर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मार्टिन लूथर किंग-III मौजूद होंगे.

बता दें की इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को राजस्थान में कांग्रेस के किसान आक्रोश आंदोलन की शुरुआत की थी. इस आंदोलन के जरिये कांग्रेस पार्टी पूरे देश में हो रही किसानों की खुदकुशी का मुद्दा उठाएगी, यह आंदोलन पूरे देश में चलेगा. इस मौके पर राहुल गांधी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में किसान रैली को संबोधित भी किया था.

यहां उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, ‘आज लोकसभा में हम किसानों के मुद्दे पर बोलना चाहते थे. प्रधानमंत्री भी सदन में मौजूद थे, लेकिन हमें बोलने नहीं दिया गया.’ उन्होंने बीजेपी पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा, ‘जीएसटी के लिए रात 12 बजे पार्लियामेंट खोला जाता है, लेकिन किसानों के लिए एक मिनट बात नहीं करने देते.’ गौरतलब है कि बीजेपी पर किसानों की अनदेखी का लगातार आरोप लग रहा है जिस पर काग्रेंस लगातार सरकार को घेर रही है.

दलित महिला की लाठी से पीट-पीट कर हत्या

मुरैना। मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के चिन्नौनी थाना क्षेत्र में एक 65 वर्षीय दलित महिला उच्च जाति के लोगों ने हत्या कर दी. उच्च जाति के एक ही परिवार के तीन लोगों ने मामूली विवाद के चलते लाठियों और डंडो से दलित महिला धनकुवेर देवी की हत्या कर दी. घटना के बाद से पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है.

चिन्नौनी थाना पुलिस ने एक युवक और तीन महिलाओं पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. दरअसल हुसैनपुर गांव के रहने वाला विनोद चौहान बस पर कंडेक्टरी का काम करता है. बीते मंगलवार को देर रात जब वह वापस लौटा तो उसने मृतक धनकुवेर के बेटे से सिगरेट जलाने के लिए माचिस मांगी तो मृतक के बेटे ने माचिस देने से इंकार कर दिया.

बुधवार (19 जुलाई) की सुबह दलित युवक की मां धनकुवेर जब इसकी शिकायत विनोद के घर करने गई तब विनोद और उसके परिवार की तीन महिलाओं ने मिलकर महिला धनकुवेर की लाठी और डंडो से जमकर मारपीट की जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

हादसे के बाद आरोपी विनोद और उसके परिवार की महिलाओं सहित पूरा परिवार घर पर ताला लगाकर फरार हो गया है. पुलिस ने विनोद चौहान और उसके परिवार की तीनों महिलाओं के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है.

लालू को बड़ा झटका, बेटे के पेट्रोल पंप का लाइसेंस निरस्त

पटना। राजद प्रमुख लालू यादव की मुश्किलें दिन बे दिन बढ़ती जा रही हैं अब उनके परिवार के लिए एक नयी आफत आ गयी है. अब तक लालू के एक ही बेटे तेजस्वी विवाद में उलझे हुए थे लेकिन अब दूसरे बेटे तेज प्रताप भी परेशानी में आ गए हैं. दरअसल तेज प्रताप के पेट्रोल पंप का लाइसेंस निरस्त हो गया है जिस पर बीजेपी के मंत्रियों ने सवाल उठाये थे.

बता दें की राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के पटना के बेउर इलाके में स्थित पेट्रोल पंप का लाइसेंस रद करने के भारत पेट्रोलियम के निर्देश पर लगा स्टे सब जज-11 की अदालत ने वापस ले लिया है जिसके बाद कोर्ट के इस फैसले के बाद अब तेज प्रताप का पेट्रोल पंप का आवंटन रद माना जाएगा.

गौरतलब है कि भाजपा ने आरोप लगाया था कि तेज प्रताप यादव ने धोखाधड़ी कर दूसरे की जमीन को अपनी बता कर भारत पेट्रोलियम से पेट्रोल पंप लाइसेंस हासिल कर लिया है. इसके बाद भारत पेट्रोलियम ने इस मामले की जांच कर पेट्रोल पंप का आवंटन रद कर दिया था.

कंपनी के इस आदेश पर पटना के सबजज-11 शची मिश्रा की अदालत ने बीते दिनों स्टे लगा दिया था. लेकिन गुरुवार को सबजज-11 की अदालत ने अपने स्टे आदेश को वापस ले लिया जिसके बाद उनका लाइसेंस निरस्त हो गया है.

तो अब 2000 के नोट नहीं छापेगा RBI

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मुंबई। इन दिनों 2000 रुपए के नोटों की तंगी से बैंकर और एटीएम ऑपरेटर परेशानी में पड़ गए हैं. उनका कहना है कि सर्कुलेशन में 2000 रुपए के नोटों की संख्या काफी कम हो गई है. भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से नए नोटों की सप्लाई में कमी आई है.

2,000 रुपये के नोट अब पहले की तरह आसानी से नहीं मिला करेंगे, क्योंकि सीएनबीसी आवाज को मिली जानकारी के मुताबिक सरकार ने दो हजार के ज्यादा नोट नहीं छापने का फैसला लिया है. सरकार दो हजार रुपये के सौ करोड़ नोट छापने की भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मांग को ठुकरा चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, दो हजार रुपये के नोट छापने में भारी कटौती की गई है.

दो हजार के नोट को बढ़ावा नहीं देना चाहती सरकार सूत्रों का कहना है कि सरकार 2,000 रुपये के नोट को बढ़ावा नहीं देना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने दो हजार के ज्यादा नोट नहीं छापने का फैसला किया है. 11 अप्रैल को नोटों की छपाई के लिए प्रोडक्शन प्लानिंग की बैठक हुई थी. इस मीटिंग में रिजर्व बैंक ने 2,000 रुपये के सौ करोड़ नोट छापने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन 2,000 के नोट छापने का प्रस्ताव नामंजूर कर दिया गया था.

सूत्रों ने बताया कि मीटिंग में रिजर्व बैंक की तरफ से अलग-अलग नोटों की छपाई की इजाजत मांगी गई थी. बाकी सभी दूसरे नोट छापने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी. सूत्रों का कहना है कि दो हजार के नोट छापने का फैसला नोटबंदी के दौरान तात्कालिक राहत पहुंचाने के लिए था. फिलहाल, दो हजार रुपये के नोट वापस लेने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है.

अमेरिकी संसद में भारत की बात रखने वाले सांसद को मस्तिष्क कैंसर

वाशिंगटन। अमेरिका के वरिष्ठ सांसद जॉन मैक्केन जो भारत के बड़े समर्थक माने जाते हैं उन्हें एक गंभीर बीमारी मस्तिष्क कैंसर ने जकड़ लिया है. हाल में अस्वस्थ हुए मैक्केन की मेडिकल जांच में यह बात सामने आई है. मैक्केन सन 2008 के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार थे.

हाल ही में पाकिस्तान के दौरे में मैक्केन ने वहां आतंकवाद के खिलाफ और काम करने की जरूरत बताई थी. पिछले 30 सालों से सांसद 80 वर्षीय मैक्केन नवंबर के चुनाव में छठी बार सीनेट के लिए चुने गए हैं. वह अमेरिकी नौसेना के पूर्व पायलट हैं. पिछले हफ्ते बाईं आंख में आए रक्त के थक्के को हटाने के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उसी दौरान हुए परीक्षणों की रिपोर्ट में कैंसर होने का पता चला है.

यह कैंसर बहुत तेजी से विकसित होने वाला है और यह अपने अंतिम चरण के नजदीक है. लेकिन शुरुआती इलाज से मैक्केन आराम महसूस कर रहे हैं. मैक्केन इस समय एरिजोना स्थित अपने आवास में आराम कर रहे हैं. कई सहयोगी सांसद उनसे मिलने पहुंचे हैं और उन्होंने वरिष्ठ सांसद के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है.

मैक्केन को देखने कांग्रेस के उनके सभी साथी पहुंचे और जल्‍द स्‍वस्‍थ हो जाने की कामना की. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ‘गेट वेल सून’ कहते हुए बताया कि ‘सीनेटर जॉन मैक्‍केन हमेशा फाइटर रहे हैं.‘ वहीं पूर्व डेमोक्रेटिक राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने मैक्‍केन को अमेरिकी हीरो बताया

मैक्‍केन अमेरिकी नेवी पायलट थे. 1967 में उनके विमान को वियतनाम में गिरा दिया गया और उन्‍होंने पांच साल से अधिक का समय युद्ध बंदी के तौर पर बिताया, जहां उन्‍हें प्रताड़ित भी किया गया था. मैक्‍केन को पहले भी कैंसर था. तीन बार वे इस स्‍थिति से उबर चुके हैं.

तथागत साबुन पर ऐसे निकला था योगी सरकार का गुस्सा

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उत्तर प्रदेश के दलित संगठनों (डायनमिक एक्शन ग्रुप, बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच, जन मंच, तथा पीयूसीएल) द्वारा मेरे नेतृत्व में 3 जुलाई, 2017 को लखनऊ प्रेस क्लब में 12 बजे से 4 बजे तक “दलित उत्पीड़न तथा समाधान” विषय पर परिचर्चा तथा प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था. इसमें शामिल होने के लिए गुजरात के 43 दलित साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन से तथा प्रदेश के अन्य जिलों से कई दलित आ रहे थे. गुजरात के दलित अपने साथ 125 किलो का साबुन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को भेंट करने के लिए भी ला रहे थे. उनका कहना था कि 5 मई को जब मुख्यमंत्री जी कुशीनगर गए थे तो वहां पर मुसहर बस्ती में दलितों को साबुन तथा शैम्पू बांटा गया था तथा उन्हें आदेशित किया गया था कि वे इससे नहा- धोकर मुख्यमंत्री जी के सामने आयें. गुजरात के दलितों ने इसे दलितों का अपमान माना था तथा इसके प्रत्युत्तर में वे मुख्यमंत्री को लखनऊ में उक्त साबुन जिसे “तथागत साबुन” का नाम दिया गया था, भेंट करना चाहते थे.

2 जुलाई, 2017 को शाम को जब साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन झांसी पहुंची तो पुलिस द्वारा गुजरात से लखनऊ आ रहे 43 दलित जिनमें 11 महिलाएं भी थीं को जबरन ट्रेन से उतार लिया गया. उन्हें रातभर पुलिस हिरासत में रखा तथा अगले दिन सवेरे गुजरात जाने वाली गाड़ी में सामान्य बोगी में भर कर अहमदाबाद भेज दिया तथा उनके द्वारा लाये गए साबुन को ज़ब्त कर लिया गया. इस प्रकार पुलिस द्वारा गुजरात से आये दलितों के जीवन तथा दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण के मौलिक अधिकार का हनन किया गया.

2 जुलाई, 2017 को ही उक्त कार्यक्रम में भाग लेने के लिए 23 दलित कार्यकर्ता बाहर से लखनऊ पहुंचे थे जिन्हें नेहरु युवा केंद्र में ठहराया गया था. पुलिस ने रात में ही उन्हें नज़रबंद कर लिया तथा उन्हें 3 जुलाई की शाम तक नज़रबंद रख कर छोड़ा. इस प्रकार इन कार्यकर्ताओं के भी जीवन एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण के मौलिक अधिकार का हनन किया गया.

इसी प्रकार 3 जुलाई, 2017 को जब हम लोग घोषित कार्यक्रम के अनुसार 12 बजे प्रेस क्लब लखनऊ पहुंचे तो देखा कि वहां पर भारी मात्रा में पुलिस मौजूद थी. प्रेस क्लब के प्रबंधक श्री बी.सी. जोशी ने पूछने पर बताया कि उन्होंने प्रेस क्लब के सचिव जोखू तिवारी के कहने पर हम लोगों का प्रेस क्लब का आबंटन रद्द कर दिया है और वहां पर कोई भी कार्यक्रम न करने के लिए कहा. हम लोगों ने जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने कोई भी कारण नहीं बताया. इस पर हम लोग वहां पर बैठ कर अपने अग्रिम कार्यक्रम के बारे में विचार विमर्श करने लगे और तय किया कि अब हम लोग रमेश दीक्षित जी के दारुलशफा स्थित कार्यालय में जाकर बैठेंगे और अगला कार्यक्रम तय करेंगे.

इसके बाद जब हम लोग उठ कर जाने लगे तो पुलिस ने हमें जबरदस्ती बैठा लिया और कहा कि आप लोगों को गिरफ्तार किया जाता है. इस पर मैंने पूछा कि हम लोगों ने क्या अपराध किया है. इस पर उन्होंने हमें बताया कि आप लोग बिना अनुमति के प्रेस क्लब में कार्यक्रम करने जा रहे थे और आप लोगों ने धारा 144 का उल्लंघन करके यहां पर शांति भंग की है. इस पर मैंने उन्हें बताया कि हमारी जानकारी में प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता/गोष्ठी करने हेतु किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है. दूसरे धारा 144 सड़क पर लगती है न कि प्रेस क्लब के अन्दर. इस पर जब उन्होंने पूछा कि अब आप लोग कहाँ जायेंगे तो मैंने उन्हें बताया कि यहाँ पर तो आप लोगों ने दबाव डाल कर हम लोगों का कार्यक्रम रद्द करवा दिया है, अतः अब हम लोग दारुलशफा में दीक्षित जी के कार्यालय में जाकर बैठेंगे और अगला कार्यक्रम बनायेंगे. उस समय पुलिस क्लब में सीओ कैसर बाग़, सिटी मैजिस्ट्रेट, एसपी सिटी, अपर जिलाधिकारी, निरीक्षक कैसबाग़ तथा अन्य कई अधिकारी मौजूद थे.

जब हम लोग चलने लगे तो उन्होंने हमें घेर लिया और 13.30 बजे 8 लोगों (रमेश चंद दीक्षित, राम कुमार, आशीष अवस्थी, के.के.वत्स, पी.सी. कुरील, डी.के यादव, कुलदीप कुमार बौद्ध तथा एस.आर. दारापुरी) को गिरफ्तार करके बस में बैठा कर पुलिस लाइन ले गये. वहां पर हम लोगों को पता चला कि पुलिस ने हम लोगों को धारा 151 दंड प्रक्रिया संहिता में गिरफ्तार किया था और हमारे ऊपर प्रेस क्लब से निकल कर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने की योजना बनाने का आरोप लगाया गया था जो कि एकदम असत्य एवं निराधार है. इसके साथ ही हम लोगों को धारा 107/116 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत 20,000 के व्यक्तिगत मुचलके पर 17.30 बजे छोड़ा गया. ऐसा प्रतीत होता है पुलिस ने हम लोगों को गिरफ्तार करने के लिए हम लोगों पर पर झूठा एवं मनगढ़ंत आरोप लगाया है. इस प्रकार पुलिस ने हम लोगों के ऊपर फर्जी आरोप लगा कर हमें गिरफ्तार करके हमारे जीवन तथा दैहिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार तथा हमारे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन किया है. प्रशासन का यह कार्य हम लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन, कानून एवं सत्ता का दुरूपयोग है.

ट्रैफिक में फंसी पत्रकार ने कहा- कोई कांवड़ियों का इलाज करेगा क्या ?

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ऩई दिल्ली। कावड़ यात्रा के कारण इस महीने में दिल्ली औऱ आस पास के क्षेत्रों में भीषण जाम का सामना करना पड़ रहा है. जगह जगह रूट डायवर्ट किया गया है तो कुछ रास्ते को बिल्कुल बंद कर दिया गया जिसके कारण यात्रियों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गौरतलब है की  सावन का महीना होने की वजह से इस वजह बड़ी संख्या में कांवड़िये दिल्ली से होकर गुजर रहे हैं. इस वजह से कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की भी स्थिति पैदा हो जाती है.

ऐसे ही एक ट्रैफिक जाम में पत्रकार राणा अय्यूब फंस गई तो उन्होंने कांवड़ियों पर अपनी अपनी भड़ास निकाली. राणा अय्यूब ने ट्वीट कर कहा, ‘ निजामुद्दीन से डोमेस्टिक हवाई अड्डा पहुंचने में दो घंटे लग गये, अपना फ्लाइट लगभग मिस ही कर चुकी थी,  क्या कोई इन कांवरियों पर लगाम नहीं सकता जिन्होंने पूरा ट्रैफिक बिगाड़ रखा है.’

बता दें कि निजामुद्दीन से डोमेस्टिक एयरपोर्ट की दूरी लगभग 19 किलोमीटर है, और गुरुवार सुबह दिल्ली में झमाझम बारिश होने की वजह से भी कई इलाकों में जाम लगा हुआ था. इस वजह से कई लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई. लेकिन राणा अय्यूब ने जब ये ट्वीट किया तो उन्हें कई लोगों का गुस्सा भी झेलना पड़ा.

ट्विटर पर कृष्णा नाम के एक यूजर ने सड़क पर नमाज पढ़ने वाले लोगों की तस्वीर लगा कर लिखा, ‘एयरपोर्ट जा रही मैडम का रास्ता रोकते कांवड़िये.’ अजहर नाम के शख्स ने लिखा, ‘कांवडियों को दोष देना गलत है, सावन होने की वजह से आपको पता होगा कि ये कांवड़ यात्रा का मौसम है, इसी के मुताबिक आपको प्लान करना चाहिए था.’ आदित्य त्रिवेदी नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘जाम कांवड़ियों की वजह से नहीं, बारिश की वजह से लगी है, आप ट्रैफिक के मुद्दे को भी कम्युनल क्यों बनाना चाहती हैं.’

 

रामनाथ कोविंद बने भारत के 14वें राष्ट्रपति

New President

नई दिल्ली। रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे. गुरुवार को हुई मतगणना के बाद उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया है. कोविंद 65.65 प्रतिशत वोटों से जीत गए हैं. यह जीत देश के साथ उत्तर प्रदेश के लिए भी बहुत अहम है. राजनीतिज्ञ विशेषज्ञ एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत पहले ही सुनिश्चित कर चुके थे. अब वो 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे.

अब तक 14 में से 9 प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश ने आज देश को राष्ट्रपति भी दे दिया. अभी तक उत्तर प्रदेश से प्रधानमंत्री तो कई बने पर राष्ट्रपति बनाने का सौभाग्य प्रदेश को हासिल नहीं हुआ था. बिहार को यह गौरव देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद दे चुके हैं. यूपीए प्रत्याशी मीरा कुमार यदि जीतती, तो वह बिहार से बनने वाली दूसरी राष्ट्रपति होतीं, साथ ही देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति भी होतीं.

जातीय समीकरण के हिसाब से भी यह राष्ट्रपति चुनाव बहुत अहम था. दलित वर्ग से आने वाले केआर नारायणन पहले राष्ट्रपति थे. उनके बाद यह दूसरी बार था, जब एक साथ दो दलित नेता राष्ट्रपति चुनाव में आने सामने थे.

देश में सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बड़े बदलाव का सपना देख रही भाजपा के लिए कोविंद की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि अब तक उनकी पार्टी का कोई नेता देश के सर्वोच्च पद पर नहीं बैठा था.पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति पद के लिए चुना था और वो जीते भी थे, लेकिन वह भाजपा या एनडीए में कभी किसी पद पर नहीं रहे थे.

एक सामान्य दलित परिवार के बेटे की देश के प्रथम नागरिक तक का उनका सफर बेहद प्रेरणास्पद है. कानपुर देहात के परौंखा गांव के रहनें वाले कोविंद को चुनाव से पहले ही 63 प्रतिशत वोटों का समर्थन प्राप्त हो चुका था. जिससे उनकी जीत लगभग तय थी. चुनाव परिणाम के बाद होने वाले जश्न और शपथ ग्रहण समारोह के लिए उनके परिजन गांव से दिल्ली पहुंच गए हैं. नए राष्ट्रपति 25 जुलाई से अपना पदभार ग्रहण कर लेंगे.

कोठे से छुड़ाकर बांधा सात जन्मों का बंधन

दिल्ली। आज के दौर में यह कहानी फिल्मी सी मालूम होती है पर यह भी सच है कि प्यार की ताकत के साथ लोग नयी मिसाल कायम करते हैं ऐसी ही एक मिसाल सामने आयी है. जिसमें दिल्ली के रहने वाले एक युवक को जीबी रोड के कोठे में एक नेपाली युवती से प्यार हो गया जिसके बाद युवक ने उस युवती को कोठे से छुड़ाने की कसम खा ली. उसने पुलिस व महिला आयोग से युवती को छुड़ाने की गुहार लगायी, जिसमें कामयाबी प्राप्त हुई. बता दें कि ये फिल्मी कहानी लगने वाली घटना दो प्यार करने वालों के संघर्ष की सच्चाई है. 16 जुलाई को आर्य समाज मंदिर में ब्याह रचाने के बाद प्रेमी जोड़े ने कोर्ट मैरिज कर ली. बीते माह प्रेमी की गुहार के बाद दिल्ली महिला आयोग ने पुलिस के साथ छापेमारी कर युवती को जीबी रोड की बदनाम गलियों से बाहर निकाला था जिसके बाद राजधानी के एक आर्य समाज मंदिर में हुई इस शादी में लड़के के परिवार वालो और आसपास के लोगों ने भी हिस्सा लिया.

इससे पहले युवक ने महिला आयोग पहुंचकर बताया था कि वह जीबी रोड के कोठे पर रहने वाली एक युवती से प्यार करता है और उसके साथ जिंदगी बिताना चाहता है. जिसके बाद आयोग की टीम ने पुलिस और एनजीओ शक्तिवाहिनी के साथ मिलकर लड़की को कोठे नंबर-68 से छुड़ाया था. शादी के बाद नवदंपत्ति बुधवार को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से मिलने पहुंचा और दोनों ने बताया कि वे शादी करके बेहद खुश हैं.

नवदंपत्ति ने मालीवाल को जानकारी देते हुए बताया की जीबी रोड पर युवतियों से जबरन काम कराया जाता है. लड़की के विरोध करने पर उन्हें मारा-पीटा तक जाता है. लड़के ने कहा कि वह चाहता है कि समाज के और लोग भी आगे आएं और ऐसी महिलाओं को नया जीवन दें.

वोट बैंक साधने के लिए दलित के घर भोजन करेंगे अमित शाह

amit shah

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तीन दिवसीय राजस्थान दौरे के दौरान एक दिन दलित के यहां भोजन करेंगे. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने बताया की अमित शाह राजस्थान के तीन दिवसीय दौरे पर आ रहे है और शाह अपने प्रवास के दौरान एक दिन दलित के यहां भोजन करेंगे.

हालांकि उन्होंने यह खुलासा नहीं किया कि वह किस दलित के यहां और कब भोजन करेंगे तथा उनके साथ कौन-कौन से जनप्रतिनिधि होंगे. उल्लेखनीय है कि पार्टी द्वारा दलित वोट बैंक को साधने के लिये ऐसे कायर्क्रम आयोजित किये जा रहे है. इसके तहत शाह एवं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी अन्य प्रदेशों में दलितों के यहां भोजन कर चुके है.

समाचार जगत के मुताबिक पार्टी सूत्रों ने बताया कि अमित शाह के दलित के यहां भोजन करने के संबंध में पार्टी ने विभिन्न स्थानों पर चार दलित परिवारों का चयन किया है और सुरक्षा बलों की ओर से इन स्थानों का सर्वे भी कर लिया गया है. बताया जाता है कि सुरक्षा कारणों के कारण अभी यह खुलासा नही किया गया है कि शाह किस दलित के यहां और कब भोजन करेंगें.

मायावती ने दोबारा लिखकर दिया इस्तीफा, हुआ मंजूर

mayawati

नई दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती का राज्यसभा से इस्‍तीफा मंजूर हो गया है. वह इस सिलसिले में दोबारा उपराष्ट्रपति से मिली थीं. वहां पर उन्‍होंने एक लाइन का इस्तीफा उनको दिया. उसके बाद इस्‍तीफे को स्‍वीकार कर लिया गया. दरअसल इससे पहले तीन पेज का अपना इस्तीफा उन्होंने सभापति से मिलकर दिया था लेकिन उस पर फैसला नहीं हो पाया. उसकी वजह यह बताई गई कि उनके द्वारा दिया गया इस्तीफा तयशुदा प्रारूप में नहीं था. इसलिए मायावती को दूसरी बार एक लाइन में अपना इस्‍तीफा तयशुदा रूप में देना पड़ा, जिसको स्‍वीकार कर लिया गया.

मायावती ने मंगलवार शाम को सभापति हामिद अंसारी से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा था. उन्होंने तीन पेज में अपना इस्तीफा सौंपा है. पत्र में उन्होंने मुख्य रूप से दो बातों पर आपत्ति जताई है. एक-उन्हें सत्ता पक्ष के मंत्रियों और सदस्यों ने सदन में बोलने से रोका. दूसरा-कार्य स्थगन के नोटिस पर बोलने के लिए तीन मिनट की समय सीमा किसी नियम में तय नहीं है.

इस मुद्दे पर सदन में काफी हंगामा मचा. उसके बाद बुधवार को राज्यसभा के सभापति पीजे कुरियन ने मायावती से अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील की. सभापति ने कहा कि सदन की इच्छा है कि मायावती अपना इस्तीफा वापस लें.

गौरतलब है कि सहारनपुर हिंसा पर सदन में न बोल पाने के कारण मायावती ने राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया. तीन पेज का अपना इस्तीफा उन्होंने सभापति से मिलकर दिया. मायावती इस बात से नाराज थीं कि शून्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में दलितों पर हुए अत्याचारों पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश करने के बाद उन्हें बोलने के लिए सिर्फ तीन मिनट का समय दिया गया.

दलित समाज की चेतना कब जागेगी?

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सीवर में लोगों और शहरों की गंदगी साफ़ करने वाले कर्मी सालाना सैकड़ों की संख्या में मर रहे हैं, सालाना हजारों किसान आत्महत्या कर रहे हैं, मजदूरों की मजदूरी और रोजगार के ठिकाने नहीं हैं. पंद्रह लाख रोजगार इसी साल खत्म कर दिए गये. नोटबंदी के बाद से किसान मजदूर और छोटे व्यापारी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाए हैं. इस पर तुर्रा ये कि आगे बेरोजगारी और सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ता ही जाने वाला है.

इसका भारत की नैतिकता और सभ्यता से कोई संबंध है?

इसे ऐसे देखिये, आज जब इतने किसान मर रहे हैं और इतने सफाई कर्मी गटर साफ़ करते हुए मारे जा रहे हैं. सामाजिक वैमनस्य और अविश्वास बढ़ता जा रहा है. तब भी इस समाज की सामूहिक चेतना में धर्मगुरुओं, नेताओं, समाज के ठेकेदारों के मन में कोई सवाल नहीं उठ रहा है. समाज में एक आम आदमी अपने ही जैसे लोगों के रोज इस तरह मरते जाने पर कोई दुख नहीं हो रहा है.

इसका सीधा मतलब ये है कि ये एक सभ्य समाज नहीं है. भारत का समाज असल में बहुत ही स्वार्थी और विभाजित या एकदूसरे का शोषण करने वाली जमातों की एक बर्बर भीड़ है. इसमें सामूहिक हित सार्वजनिक सम्पत्ति, सामूहिक हित के साझे प्रयास या एक साझे भविष्य की कल्पना तक नहीं है.

सोचिये आज मीडिया, इन्टरनेट, कम्प्यूटर और यूरोपीय शिक्षा और ज्ञान विज्ञान के आने के बावजूद भारतीय समाज की सभ्यता की ये हालत है तो इन्होने अतीत में मध्यकाल में या प्राचीन इतिहास में क्या-क्या न किया होगा? सोचकर ही रूह कांप उठती है. कैसी हैवानियत न बरपाई होगी इन्होंने अपनी गरीब जनता और स्त्रीयों पर.

सती प्रथा, विधवाओं का शोषण, शूद्रों का उत्पीड़न, देवदासी प्रथा, हरिबोल प्रथा, बहु झुठाई प्रथा, बेगार, बंधुआ मजदूरी, दास की खरीदी विक्रय, जमीन के साथ मजदूरों तक को बेचने की परम्परा, स्त्रियों शूद्रों को शिक्षा से वंचित रखने के धार्मिक आदेश, एक ही अपराध के लिए अलग अलग जातियों के लिए अलग दंड विधान, इत्यादि न जाने कितनी ही बातें हैं जो ब्रिटिश राज के दौर में रिकार्ड की गयी हैं. अगर न की जातीं तो इन्हें भी पुराणों की गप्प में घोट पीसकर किसी मिथक या परियों की कहानी में छुपा दिया जाता.

अब इस बात को दूसरे ढंग से देखिये. ये मामला इतिहास लेखन और इतिहास बोध से भी गहराई से जुड़ता है. ऐसा असभ्य, बर्बर और पाखंडी समाज अपना इतिहास किस मुंह से लिखेगा? उस इतिहास में क्या लिखेगा?

भारत में इतिहास नहीं लिखा गया. इस सवाल का उत्तर इसी बात में छिपा है. चोर लुटेरे या हत्यारे अपना इतिहास लिखेंगे भी कैसे? अपने ही बहुसंख्य लोगों का खून चूसने वाली सत्ताएं अपना इतिहास कैसे, किसके लिए और क्यों लिखेंगी?

मेरे लिए इतिहास बोध असल में नैतिकता बोध से जुड़ा हुआ सवाल है. एक अनैतिक समाज एक स्वस्थ इतिहास बोध को न तो जन्म दे सकता है न उसे बनाये रख सकता है. इसीलिये वो अपने इतिहास से अपने ही क्रमिक विकास के चरणों से शिक्षा नहीं ले सकता और बार बार उन्ही गलतियों को दोहराता है.

(लेखक के निजी विचार हैं)

शूटिंग के दौरान घायल हुई कंगना, माथे पर लगे 15 टांके

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनोट की आने वाली फिल्म ‘मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ झांसी’ के सेट पर गंभीर रूप से चोट लग गई है.यह हादसा तब हुआ जब हैदराबाद में कंगना एक एक्शन सीन शूट कर रही थीं. जानकारी के मुताबिक, कंगना अपने को-स्टार निहार पांड्या के साथ शूटिंग कर रही थीं.

एक एक्शन सीन के दौरान दोनों तलवारबाजी कर रहे थे, तभी गलती से तलवार कंगना के सिर पर जा लगी और उनके सिर से खून बहने लगा. कंगना को फौरन हैदराबाद के अपोलो अस्पताल ले जाया गया. वहां भर्ती करने के बाद करने के बाद कंगना को माथे पर 15 टांके लगाए गए और पांच से छह दिनों तक आराम करने की सलाह दी गई है. कंगना अब अगले हफ्ते ही फिल्म की शूटिंग पर दोबारा लौट सकेंगी.

जानकारी देते हुए ‘मणिकर्णिका–द क्वीन ऑफ झांसी’ के निर्माता कमल जैन ने बताया की बुधवार की शाम तकरीबन चार बजे के आसपास कंगना रनौत और निहार पंड्या के बीच तलवारबाजी का सीन फिल्माया जा रहा था. सीन के मुताबिक, कंगना को झुककर निहार के तलवार के वार से बचना था, मगर टाइमिंग में गड़बड़ी के चलते कंगना समय पर ऐसा नहीं कर पाईं और कंगना को माथे पर ये चोट आई.”

कमल ने आगे बताया कि इस हादसे के बाद फिल्म की शूटिंग फौरन रोक दी गई और कंगना को कार के जरिए अपोलो अस्पताल ले जाया गया. आधे घंट की ड्राइव के बाद निर्माता कमल जैन ने कंगना को अस्पताल पहुंचकर उन्हें वहां भर्ती कराया. कमल के मुताबिक, घायल होने के बाद भी कंगना ने हौसला बनाए रखा और अगले दिन शूटिंग पर लौटकर बचा हुआ सीन पूरा करने की बात कही, मगर डॉक्टर की सलाह के अनुसार फिलहाल कंगना अब आराम करेंगी और अगले हफ्ते ही फिल्म की शूटिंग पर लौटेंगी.