हे राम से जय श्रीराम जपने लगे नीतीश कुमार: तेजस्‍वी यादव

पटना। नीतीश कुमार की धोखेबाजी से आहत तेजेस्वी ने कड़े शब्दों में हमला बोला है. गौरतलब है की मीडिया से लेकर वर्तमान सरकार तक लालू यादव और उनके बेटे के पीछे पड़ी है जिसके बाद उनका परिवार मुश्किलों से घिरा नजर आ रहा है पर तेजस्वी न हार न मानने की कसम खा रखी है.

आज नीतीश कुमार के बहुमत परीक्षण के दौरान विधानसभा के अंदर राजद नेता तेजस्‍वी यादव ने मुख्‍यमंत्री पर बोलते हुए कहा कि आपने पूरे बिहार को धोखा दिया है. उन्‍होंने कहा कि आज बिहार का युवा उदास हो गया है. मुझे बहाना बनाकर फंसाया गया. आरजेडी ने जेडीयू का वजूद बचाया था पर अब आप अपनी छवि बचाने के लिए ये सब कर रहे हैं. हम लोग इतने मूर्ख नहीं हैं कि समझ न सकें कि आप लोग क्या कर रहे हैं. उन्होंने कहा की नीतीश ने पूरे बिहार को धोखा दिया है. हिम्मत थी तो मुझे बर्खास्त करते. उन्‍होंने कहा कि नीतीश कुमार हे राम से जय श्रीराम तक पहुंच गए हैं.

उन्‍होंने कहा कि नीतीश ने केवल अपनी छवि बचाने के लिए ढकोसला किया. सवालिया लहजे में पूछा कि यदि बीजेपी के साथ ही आपको जाना था तो चार साल क्‍यों बरबाद किए. इस बीच राजद नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार अवसरवादी राजनीति कर रहे हैं. हमने नीतीश कुमार को पहचानने में भूल की.

इस बीच बिहार में एनडीए की नई सरकार को शुक्रवार को विधानसभा में बहुमत साबित करना है. इसके लिए जैसे ही नीतीश ने विश्वासमत प्रस्ताव पेश किया विधानसभा में हंगामा शुरू हो गया. वहीं विधानसभा के बाहर RJD और कांग्रेस का प्रदर्शन जारी है. वे नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं. केसी त्यागी का कहना है कि हम विश्वासमत हासिल करके सबको चकित कर देंगे और सुशासन सरकार के नारो को बरकरार रखेंगे.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण को बताया असंवैधानिक

मुंबई। आरक्षण में धीरे धीरे कटौती कई प्रदेशों में जारी है पर अब ताजा फैसला महाराष्ट्र से आया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सरकार के विभिन्न विभागों व सार्वजनिक निकायों बीएमसी व बेस्ट जैसे संस्थानों के भीतर पदोन्नति में 33 प्रतिशत आरक्षण को अवैध व असंवैधानिक बताया है.

गौरतलब है की सरकार ने 2004 में पदोन्नति में आरक्षित वर्ग को 33  प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया था. जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. शुरुआत में यह मामला न्यायमूर्ति अनूप मोहता व न्यायमूर्ति एए सैयद की खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आया था. सुनवाई के बाद आए फैसले में न्यायाधीश मोहता ने पदोन्नति में आरक्षण को सही ठहराया था, जबकि न्यायमूर्ति सैयद ने आरक्षण को अवैध व असंवैधानिक बताते हुए उसे रद्द कर दिया था. दो न्यायाधीशों के एकमत ने होने से मामला सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति एमएस सोनक के पास भेजा गया था.

न्यायमूर्ति सोनक ने मामले की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पदोन्नति में आरक्षण के फैसले को गलत बताया है. सरकार की ओर से 2004 में जारी किए गए परिपत्र के तहत पदोन्नति में 13 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 7 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 13% एनटी, वीजेडीटी व एसबीसी के लिए आरक्षण रखा गया था.

इस तरह से सरकार ने पदोन्नति में 33 प्रतिशत आरक्षण तय किया था. इससे पहले महाराष्ट्र प्रशासनिक पंचाट न्यायाधिकरण (मैट) ने भी पदोन्नति में आरक्षण को गलत बताया था तो इस तरह से दलितों को पदोन्नति में आरक्षण न देने के फैसले पर मुहर लग गयी है जोकि दलितों के लिए दुखद फैसला है.

 

हत्या में गवाह दलित युवक की पीट- पीटकर हत्या

आगरा। योगी के उत्तर प्रदेश में हत्या के गवाह युवक को बुरी तरह मार पीटकर हत्या कर दी गयी. यह घटना आगरा की है जहां के सिकंदरा के गांव जऊपुरा में बुधवार रात दबंगों का कहर दलित परिवार पर टूटा. राह चलते चाचा-भतीजे को चोर बताते हुए उन पर हमला बोल दिया गया जिसके बाद लाठियों से पीट-पीटकर चाचा नवाब सिंह (52) की हत्या कर दी, जबकि भतीजा गंभीर रूप से घायल है. नवाब सिंह को पांच अगस्त को आरोपियों के खिलाफ एक मुकदमे में गवाही देनी थी. हत्या के बाद भड़के दलित समुदाय के लोगों ने गुरुवार सुबह थाना घेर लिया. जातीय तनाव के मद्देनजर एसएसपी ने फोर्स के साथ गांव में फ्लैग मार्च किया.

जानकारी के अनुसार जऊपुरा निवासी नवाब सिंह और जग्गो यादव में रंजिश चल रही है उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज करा रखे हैं. नवाब सिंह के भतीजे राकेश की पत्नी महावली के बेटी हुई है और वह बिचपुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती है. बुधवार रात साढ़े सात बजे राकेश चाचा नवाब सिंह के साथ अस्पताल से खाना देकर घर लौट रहा था. गांव में अपने घर के सामने जग्गो यादव, भोला यादव, अशोक, लच्छो, राहुल आदि ने चोर-चोर का शोर मचाते हुए दोनों को घेर लिया. उन्हें पीट-पीटकर अधमरा करने के बाद 100 नंबर पर चोरों को पकड़ने की झूठी सूचना दी. पुलिस आ गई इस बीच नवाब सिंह पक्ष के लोग भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस और ग्रामीणों को देख जग्गो पक्ष के लोग भाग निकले.

गंभीर घायल नवाब सिंह और राकेश को परिजन अस्पताल लेकर गए, जहां कुछ घंटे बाद नवाब सिंह की मौत हो गई. इससे भड़के दलित बस्ती के दर्जनों लोगों ने गुरुवार सुबह सिकंदरा थाने को घेर लिया. वह हमलावरों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे. मृतक के भाई भीमसेन ने बताया कि जग्गो और भोला पक्ष के खिलाफ पांच अगस्त को नवाब सिंह की गवाही होनी थी. आरोपी पक्ष गवाही न देने का दबाव बना रहा था. नवाब के इन्कार करने पर हत्या कर दी.

उधर, नवाब की मौत के बाद गांव में जातीय तनाव के हालात बन गए. दोपहर में एसएसपी दिनेश चंद्र दूबे ने स्वाट टीम के साथ जऊपुरा पहुंच फ्लैग मार्च किया. साथ ही मृतक के परिजनों को आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई का आश्वासन दिया. एसएसपी ने बताया कि हत्या के आरोप में 22 लोगों को नामजद कराया गया है. सतर्कता के चलते गांव में फोर्स तैनात की गई है, दलितों ने कार्यवाही न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.

 

नीतीश कुमार ने विधानसभा में पेश किया बहुमत प्रस्ताव

पटना। पटना। बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार ने अपना बहुमत प्रस्ताव पेश कर दिया है. सुबह 11 बजे पेश होने वाला यह प्रस्ताव राजद के हंगामे के चलते 12 बजे के बाद पेश हो सका. शपथग्रहण से पहले बुधवार देर रात को नीतीश कुमार ने बीजेपी नेताओं के साथ राज्यपाल को 132 विधायकों के समर्थन का पत्र सौंपा था, जिसमें जेडीयू के 71, बीजेपी के 53, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के 2, एलजेपी के 2, जीतनराम मांझी की पार्टी ‘हम’ के 1 और 3 निर्दलीय विधायक शामिल हैं.

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है, ऐसे में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार आसानी से विश्वासमत हासिल करती दिख रही है, हालांकि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सरकार बनाने का न्योता नहीं मिलने से नाराज़ आरजेडी सदन में नीतीश कुमार के विश्वासमत में रोड़ा अटकाने की तैयारी में है. लालू ने दावा किया है कि जेडीयू के कई विधायक उनके संपर्क में हैं. ऐसे में विश्वासमत के दौरान हंगामे के पूरे आसार हैं.

आरजेडी के नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि नीतीश को हमने एक मत से अपना नेता चुना था. लेकिन अंतरात्मा की पुकार पर बिना परामर्श किए उन्होंने गठबंधन तोड़ दिया और बाद में परमात्मा की पुकार पर बीजेपी की गोद में बैठ गए. नीतीश ने जो किया वह जनादेश का अपमान, लोगों ने इसका बुरा माना. हम विश्वास प्रस्ताव का घोर विरोध करेंगे, हम गुप्त मतदान की मांग करते हैं.

उल्‍लेखनीय है कि नीतीश कुमार ने बुधवार की शाम मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके साथ ही 20 महीने पुरानी महागठबंधन सरकार अचानक गिर गई. भाजपा के समर्थन से गुरुवार को नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वह छठी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं. वहीं, भाजपा के सुशील कुमार मोदी ने उप मुख्‍यमंत्री शपथ ली.

नीतीश के इस्तीफे का कारण राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी के साथ नीतीश की तनातनी को माना जा रहा है. जदयू का कहना है कि तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, लेकिन नीतीश के कहने के बावजूद उन्होंने इन आरोपों का तथ्यात्मक जवाब नहीं दिया. वहीं, लालू का कहना है कि आरोप निराधार है, तेजस्वी सीबीआई को जवाब देंगे, नीतीश सीबीआई के निदेशक नहीं हैं. जबकि नीतीश का कहना है कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर इस्तीफा दिया.

2001 में भारत पर परमाणु हमला करना चाहते थे परवेज मुशर्रफ

नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह परवेज मशर्रफ ने खुलासा किया है कि 16 साल पहले वो भारत पर न्युक्लियर अटैक का प्लान बना रहे थे. मुशर्रफ के मुताबिक- वो प्लान जरूर बना रहे थे कि लेकिन जब उन्हें डर था कि भारत भी जवाबी हमला करेगा तो उन्होंने ये इरादा टाल दिया. पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने बात जापान के एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कही.

परवेज मुशर्रफ जो खुलासा कर रहे हैं वो 2001 के संसद हमले से जुड़ा हुआ है. उस वक्त मुशर्रफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे. पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने जापान के अखबार ‘मेनिची शिंबुन’ को एक इंटरव्यू दिया. इसी इंटरव्यू में उन्होंने भारतीय संसद पर हमले और उसके बाद के तनाव का जिक्र किया है. अखबार ने अपने जैपनीज और इंग्लिश दोनों वर्जन में ये इंटरव्यू पब्लिश किया है.

73 साल के मुशर्रफ के मुताबिक, भारतीय संसद पर हमले के बाद वो कई रातों तक सो नहीं पाए. मुशर्रफ ने कहा- मैं खुद से ये सवाल पूछता रहता था कि मुझे एटमी हथियार तैनात करने चाहिए या नहीं. परवेज ने खुलासा किया कि वो एटमी हथियार इस्तेमाल करने के बारे में उन्होंने काफी सोचा लेकिन भारत के जवाबी हमले के डर से इरादा बदल दिया.

अखबार के मुताबिक उस दौर में भी मुशर्रफ ने कभी इस बात से इनकार नहीं किया था कि वो भारत के खिलाफ एटमी हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. मशर्रफ ने इंटरव्यू में ये भी खुलासा किया कि 2001 में भारत और पाकिस्तान दोनों की मिसाइलों पर वॉरहेड्स (एटम बम) नहीं लगाए गए थे. मुशर्रफ ने कहा कि एटमी हमला करने के लिए एक से दो दिन लग सकते थे.

जब उनसे ये पूछा गया कि क्या उन्होंने मिसाइलों पर वॉरहेड्स लगाने का ऑर्डर दिया था? पूर्व तानाशाह ने कहा- हमने ऐसा नहीं किया और मुझे लगता है कि भारत ने भी न्युक्लियर वॉरहेड्स मिसाइलों पर नहीं लगाए होंगे. थैंक गॉड.

नवाज शरीफ लंबे वक्त से पाकिस्तान के बाहर रहे हैं. मुल्क की अदालत ने एक बार उन्हें भगोड़ा भी करार दिया था. 1999 में आर्मी चीफ रहते हुए उन्होंने नवाज शरीफ सरकार का तख्तापलट किया था. उस दौरान शरीफ को कुछ महीने जेल में काटने पड़े थे. इसके बाद मुशर्रफ ने उन्हें सऊदी अरब जाने की इजाजत दे दी थी. 2001 से 2008 तक वो राष्ट्रपति रहे. 2007 में उन पर बेनजीर भुट्टो की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप लगा था.

‘इंदु सरकार’ ने कोर्ट में जीती जंग, कल होगी रिलीज

ऩई दिल्ली। लंबे विवाद के बाद फिल्म ‘इंदु सरकार’ के निर्माता और निर्देशक मधुर भंडारकर के लिए सुप्रीम कोर्ट से एक सुकून भरी खबर आई है. सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म पर रोक लगाने से संबधित याचिका को खारिज कर दिया है जिसके बाद फिल्म कल यानी 28 जुलाई को रिलीज होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ये आर्टिस्टिक अभिव्यक्ति के पैमाने पर कानून के दायरे में है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने ये भी कहा कि ये क्या कानून है कि फिल्म की रिलीज से पहले किसी व्यक्ति की रजामंदी होनी चाहिए. कोर्ट ने माना कि ये फिल्म कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं है. कोर्ट ने कहा कि एक फिल्म की स्क्रिप्ट में ड्रामा होना चाहिए.

आपको बता दें कि खुद को संजय गांधी की जैविक संतान बताने वाली प्रिया पॉल नामक महिला ने इस फिल्म के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. ‘इंदु सरकार’ पहले सेंसर बोर्ड के पास अटकी हुई थी जिसे पिछले हफ्ते ही बोर्ड ने मंजूरी दी है. इसके अलावा इस फिल्म का विरोध कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता भी कर रहे हैं.

कांग्रेस ने सेंसर बोर्ड से मांग की थी कि फिल्म पहले उन्हें दिखाई जाए, कांग्रेस की इस मांग को मधुर भंडारकर ने सिरे से खारिज कर दिया था. असल में फिल्म इमरजेंसी के बैकग्राउंड पर बनाई गई है.

जियो को टक्कर देने के लिए एयरटेल ने निकाला शानदार प्लान

मुंबई। रिलायंस जियो की टक्कर में अब एयरटेल ने एक ओर आकर्षक ऑफर पेश किया है. एयरटेल रोजाना यूजर्स को 4G नेटवर्क का 3GB डाटा देगा. यह नया प्लान 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ लॉन्च किया गया है.

जियो का धन धना धन ऑफर अब खत्म हो चुका है. इसके बाद कंपनी ने प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों ही यूजर्स के लिए नए प्लान्स लॉन्च कर दिए हैं. रिलायंस जियो के प्लान 19 रुपये से शुरू होकर 9999 रुपये तक उपलब्ध है. वहीं, जियो पोस्टपेड प्लान्स 309 रुपये से शुरू होकर 999 रुपये तक उपलब्ध हैं.

एयरटेल का नया प्लान सिर्फ प्रीपेड यूजर्स के लिए है. एयरटेल खासतौर से वॉल्यूम डाटा यूजर्स को ध्यान में रखकर 799 रुपये का प्लान लेकर आया है. 799 रुपये के इस प्लान के अंतर्गत प्रति दिन 3GB 2G/3G/4G डाटा दिया जाएगा. इसी के साथ इसमें किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड लोकल और एसटीडी कॉलिंग भी शामिल है. इस पैक की वैलिडिटी 28 दिन की है.

एयरटेल का यह नया प्लान जियो यूजर्स पर अटैक करता हुआ नजर आ रहा है. क्योंकि जियो यूजर्स की 509 रुपये के पैक में डाटा यूसेज की प्रति दिन सीमा 2GB है. हाल में जियो ने अपना सस्ता 4G फीचर फोन भारत में लॉन्च किया है. इससे भारत में मौजूद अधिकतर 2G यूजर्स रिलायंस जियो 4G में स्विच कर लेंगे.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम सम्मानित, खिलाड़ियोंं को मिले 50-50 लाख

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नई दिल्ली। ICC महिला वर्ल्ड कप में जोरदार प्रदर्शन करने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम को सम्मानित किया गया. गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित सामारोह में रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु की मौजूदगी में बीसीसीआई ने सम्मानित किया. महिला टीम को इससे पहले केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने भी सम्मानित किया.

वर्ल्ड कप में खेली भारतीय महिला क्रिकेट टीम के 15 खिलाड़ियों में से 10 रेलवे कर्मचारी हैं, जिनमें कप्तान मिताली राज और उपकप्तान हरमनप्रीत कौर भी शामिल हैं. रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु ने वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने वाली महिला खिलाड़ियों को रेलवे में समय से पहले प्रमोशन दिए जाने की घोषणा की थी. बीसीसीआई ने इंग्लैंड में हाल में संपन्न हुए आईसीसी महिला वर्ल्ड कप में उप विजेता रही भारतीय टीम की खिलाड़ियों को 50-50 लाख रुपये और सहयोगी स्टाफ को 25 -25 लाख रुपये देकर सम्मानित किया.

इस अवसर पर बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना ने खिलाड़ियों को इनामी राशि देकर सम्मानित किया. उन्होंने कहा कि बीसीसीआई हमेशा पुरुषों की तरह महिला क्रिकेट को भी बढ़ावा देता रहेगा. महिला टीम की 15 में से दस खिलाड़ी रेलवे में कार्यरत हैं और रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आगे भी सहयोग बनाये रखने का वादा किया. उन्होंने कहा, ‘एक समय केवल पुरुष क्रिकेट की बात होती थी लेकिन अब समय बदल रहा है. महिलाओं की इस जीत से देश की आम महिलाओं का भी आत्मविश्वास बढ़ेगा और अन्य महिलायें का ध्यान भी खेल की तरफ मुड़ेगा.

SSC CGL: 5 अगस्त से शुरू होगी परीक्षा

नई दिल्ली। हजारो छात्रों को हर साल नौकरी देने वाली स्टाफ सलेक्शन कमिशन (SCC) ने कंबाइड ग्रैजुएट लेवल की प्रारंभिक परीक्षा 2017 की तारीखों में थोड़ा फेरबदल किया है. कमिशन की वेबसाइट पर नोटिस के जरिए जानकारी दी गई है कि अब यह परीक्षा 5 अगस्त से शुरू होगी जबकि पहले यह परीक्षा एक अगस्त से शुरू होनी थी. पहले 20 अगस्त को ही समाप्त होने वाली यह परीक्षा अब 24 अगस्त को समाप्त होगी. कमिशन ने यह भी बताया है कि 7, 13, 14 और 15 अगस्त को कोई परीक्षा नहीं होगी. आपको बता दें  कि स्टाफ सिलेक्शन कमिशन विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए हर साल परीक्षाएं आयोजित करता है. परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए पिछले साल से कमिशन ने इन परीक्षाओं को ऑनलाइन कराना शुरू कर दिया है. पहले ये परीक्षाएं एक या दो दिन में ही समाप्त हो जाती थीं लेकिन ऑनलाइन होने की वजह से इसमें थोड़ा ज्यादा वक्त लगता है. ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों की कम उपब्धता के कारण ये परीक्षा लंबी चलती है. हालांकि, मुख्य परीक्षा अभी भी ऑफलाइन ही होगी.

बिहार की घटना लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहींः मायावती

लखनऊ। बिहार की सियासत में जिस तरह से उठापटक सामने आई और नीतीश कुमार ने एनडीए के साथ जाने का फैसला लिया है उसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है. उन्होंने कहा कि बिहार में जो कुछ भी हुआ है वह आए दिन किसी ना किसी राज्य में हो रहा है और यह देश के लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है.

मायावती ने कहा कि देश का लोकतंत्र इन घटनाओं से कमजोर हो रहा है. उन्होंने आगे कहा कि अब देश की आम जनता को आगे आकर लोकतंत्र को कमजोर होने से बचाना होगा. लोगों को सचेत करते हुए मायावती ने कहा कि अगर लोग आगे आकर लोकतंत्र को नहीं बचाते हैं तो इससे आगे चलकर उनका ही नुकसान होगा नाकि राजनीतिक दलों व राजनेताओं का.

भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए मायावती ने आरोप लगाया कि पार्टी सरकार की मशीनरी का दुर्पयोग करके लोगों को डरा-धमका रही है. उन्होंने कहा कि पहले मणिपुर, गोवा और अब बिहार में भी भाजपा ने यही किया है. बिहार में जो कुछ भी कल हुआ है वह इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार में लोकतंत्र का भविष्य खतरे में हैं. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने गठबंधन से नाता तोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाकर सही नहीं किया है. इससे उन्होंने धर्मनिरपेक्ष ताकतों को और प्रचंड बहुमत दे दिया है. जनता ने उन्हें जो जनादेश दिया था उसका सम्मान होना चाहिए था.

महागठबंधन टूटते ही केरल इकाई ने नीतीश कुमार से संबंध तोड़ा

पटना। नीतीश कुमार की धोखेबाजी से खफा हो कर उनके पुराने संबधो में दरार तो आनी शुरू हो ही गयी है साथ ही जदयू की केरल इकाई ने गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा भारतीय जनता पार्टी का विरोध किया और खफा होकर संबंध तोड़ लिया. जदयू की केरल इकाई के प्रमुख व राज्यसभा के सदस्य वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वह फासीवादी शक्तियों के खिलाफ लड़ाई में उच्च सदन से इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं. उन्होंने कहा, “इसकी जो भी कीमत होगी, हम चुकाने के लिए तैयार हैं.”

उन्होंने कहा, “हमें जदयू का राजग के साथ गठबंधन स्वीकार नहीं है और नीतीश कुमार के साथ हमारे संबंध समाप्त हो चुके हैं. हम सभी ने सोचा था कि वह फासीवादी प्रवृत्तियों के खिलाफ जंग करेंगे लेकिन वह अब इसका एक हिस्सा बन गए हैं. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि जदयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव और बिहार में पार्टी के विधायक नीतीश कुमार के निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, “ मैं शरद यादव और जदयू विधायकों को फोन कर कहूंगा कि वे कहें कि हम इसे स्वीकार नहीं करते हैं.”

उन्होंने कहा कि वह 5 अगस्त को उप राष्ट्रपति के चुनाव के बाद केरल लौट आएंगे और भविष्य की योजना पर निर्णय लेने के लिए राज्य परिषद बैठक आयोजित करेंगे. नीतीश कुमार ने बुधवार को महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ गठबंधन कर गुरुवार सुबह बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर महागठबंधन को धोखा देने और ‘व्यक्तिगत स्वार्थ’ के लिए भाजपा से हाथ मिलाने को लेकर निशाना साधा है.

‘सामाजिक उत्थान पत्रिका’ के 25 साल पूरे, ‘दलित लेखक संघ’ ने मनाई रजत जयंती

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नई दिल्ली। ‘सामाजिक उत्थान पत्रिका’ के 25 साल पूरे हो गए. इस उपलक्ष्य में ‘दलित लेखक संघ’ ने 25 जुलाई को रजत जयंती समारोह का आयोजन किया. यह समारोह दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ.

समारोह में इस पत्रिका के संपादक नेतराम ठगेला को शाल, सम्मान-पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. समारोह की अध्यक्षता कर्मशील भारती ने किया. उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में पत्रिका के संपादक नेतराम ठगेला को बधाई देते हुए कहा कि इतनी व्यवस्थाएं रखते हुए कोई पत्र निकलना अपने आप में चुनौतीपूर्ण कार्य है.

वहीँ समारोह का संचालन कर रहे हीरालाल राजस्थानी ने शुरूआती भूमिका बनाते हुए कहा कि यह पत्रिका संत दुर्बलनाथ के विचारों से शुरू होकर डॉ. अम्बेडकर के सिद्धांतों का एक अनोखा सफर तय करती आई है. जिसने एक दलित उपजाति (खटीक) को अम्बेडकर की विचारधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर दिखाया है.

मुख्य अतिथि के तौर हीरालाल बड़सीवाल ने भी पत्रिका के 25 वर्ष पूरे होने पर संपादक की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज को जागरूक करने का बहुत सशक्त माध्यम है. वहीँ अशोक कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण अविश्मरणीय रहेगा साथ ही नेतराम जी का एकल प्रयास भी सराहना के काबिल है.

मुख्य वक्ता के तौर पर शील बोधि ने डॉ. अम्बेडकर के अथक प्रयासों को याद करते हुए समाज में एक समाचार पत्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. कार्यक्रम के शुरू में पूनम तुषामड़ ने संविधान की प्रस्तावना पड़ते हुए ‘दलित लेखक संघ’ के इतिहास पर भी एक नज़र डाली. अंजलि ने इस अवसर पर आलेख पाठ पढ़ा. मुकेश मिरोथा ने सम्मान पत्र का वचन किया. अंत में धन्यवाद ज्ञापन हरपाल भारती ने किया.

बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर को समर्पित एक गीत भी श्रवण बेखबर द्वारा रचित गीत भी गया गया. विशेष उपस्थिति में बलविंद्र बलि, निरोतीलाल महामना, प्रेम चौहान, अनुरुद्ध, संजीव कौशल, नरेश राम, सुनीता, कुलीना, श्री सुधीर, दलित दस्तक के संपादक अशोक दास, जय सिंह आर्य, मामचंद रिवाडिया, रामसिंह दिनकर, सलमान, आर. पी. सिंह आदि मौजूद रहे.

बिना सिक्योरिटी क्लीयरेंस के चल रही है प्रभु की तेजस एक्सप्रेस

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मुंबई। रेलवे के बारे में अभी कुछ दिन पहले ही कैग की रिपोर्ट का खुलासा हुआ जिसमें रेलवे के खाने को इंसानो लायक नहीं बताया गया पर अब बड़ी खबर आयी है की मुंबई से गोवा के बीच चलाई गई लग्जरी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस को रेलवे ने बिना क्लीयरेंस के लिए लोगों के लिए शुरू कर दिया. ऐसा करके रेलवे ने लाखों लोगों की जान खतरें में डाल दी. रेलवे ने तेजस को ट्रेन यात्रा का भविष्य बताया था.

जानकारी के मुताबिक रेलवे ने कमिश्नर ऑफ रेलवे सिक्योरिटी (CRS) से अनिवार्य सुरक्षा मंजूरी लिए बिना ही ट्रेन शुरू कर दी. मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन के अंतर्गत आने वाले सीआरएस ने पिछले हफ्ते सेंट्रल रेलवे और रेल मंत्रालय से चिट्ठी लेकर पूछा कि नई ट्रेन क्यों शुरू की गई और बिना सीआरएस के सुरक्षा मंजूरी के उसे क्यों चलाया गया.

इसके जवाब में रेलवे ने दावा किया कि वर्तमान में ट्रेन कई विशेष सुविधाओं के बिना चल रही है और साथ ही किसी नए रोलिंग स्टॉक को शामिल नहीं किया गया, जिसके लिए नए क्लीयरेंस की जरुरत हो. अपने पत्र में सीआरएस ने रेलवे को इस ओर ध्यान दिलाया है कि बिना उसकी मंजूरी के ट्रेन चलाना रेलवे बोर्ड पॉलिसी सर्कुलर नंबर 6 का सीधे-सीधे उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि मौजूदा स्थिति में किसी भी नए रोलिंग स्टॉक की शुरुआत होने पर उसे सेफ्टी ट्रायल की नई प्रक्रिया से होकर गुजरना होता है और ताजा प्रमाण पत्र प्राप्त करना जरुरी होता है. रेलवे के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के सूत्रों ने बताया कि पॉलिसी सर्कुलर महत्वपूर्ण है क्योंकि कोई भी नया रोलिंग स्टॉक व्हील इंट्रेक्शन को बदल देता है और उस स्थिति में नियामक को नई सुरक्षा मंजूरी लेने की आवश्यकता होती है.

बता दें की तेजस एक्सप्रेस को मई में रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने हरी झंडी दिखाई थी. तेजस मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल से गोवा के करमाली के बीच चलती है. तेजस का किराया प्रति टिकट पर प्रति किलोमीटर के हिसाब से देश की ट्रेनों के मुकाबले सबसे ज्यादा है.

सरकारी नौकरी छोड़ पर्यावरण बचाने में लगा दी जिदंगी

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सिरमौर। पर्यावरण को बचाने के लिए लोग लंबे-लंबे लेख तो लेख लिखते हैं पर जमीनी स्तर पर काम करने का हौसला लाखों में से कुछ के ही पास होता है कुछ इस तरह का हौसला लेकर ही अनिल पैदल हुए. हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के मटरू गांव में 21 जनवरी, 1964 में जन्मे डॉ. अनिल को समाजसेवा का शुरू से ही जुनून था. यह जूनून इस हद तक था कि अपनी सरकारी नौकरी को ज्वाइन करने के दो साल बाद ही त्यागपत्र दे दिया. जल, पर्यावरण संरक्षण और लोगों की सेवा का संकल्प लिया और समर्पित हो गए समाज के लिए, 25 साल से उनकी तपस्या लगातार जारी है. बात 1990 की है जब उन्होंने सिरमौर जिले के पच्छाद विकास खंड के घिन्नी घाड़ क्षेत्र का दौरा किया. वहां पर पर्यावरण और ग्रामीणों की दयनीय स्थिति को देखकर वह हैरान रह गए. पूरा क्षेत्र पानी की समस्या से जूझ रहा था, जंगल धड़ाधड़ काटे जा रहे थे. तब उन्होंने निर्णय किया कि यहां के लोगों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के लिए कुछ करेंगे.

बता दें की उन्होंने 1992 में गैर सरकारी संगठन साथी की नींव ऱख पर्यावरण बचाने की मुहिम छेड़ दी थी. संस्था के गठन के बाद ग्रामीणों ने स्वैच्छिक मदद की. इससे अभियान को आगे ले जाने की राह आसान हुई.

सबसे पहले घिन्नी घाड़ क्षेत्र में जल व मृदा संरक्षण के लिए चेकडैम व जोहड़ों का निर्माण करवाया. परंपरागत जलस्नोतों के संरक्षण व वर्षा जल भंडारण के लिए भी लोगों को जागरूक किया गया. सरकार व विश्व बैंक के सहयोग से चल रही योजनाओं का लाभ उठाया गया. जलस्त्रोत बचाए रखने के लिए पनढाल क्षेत्र में 42 हेक्टेयर में वाटर टैंक, चेकडैम व वर्षा जल संग्रहण टैंक बनवाए गए. इससे पानी की समस्या काफी हद तक सुलझने लगी.

पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रामीणों की मांग पर फलदार व लुप्त होते पौधे उपलब्ध करवाए. जब मांग बढ़ी तो स्थानीय लोगों की सहायता से नर्सरी शुरू की गई.

अब साथी संस्था देशभर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों के बीज उपलब्ध करवाती है. चारे व ईंधन की समस्या सुलझाने के लिए भी 85.5 हेक्टेयर में तारबंदी कर पौधे उगाए गए. इसमें पौधों की जीवित दर 65 प्रतिशत से अधिक है. पौधरोपण व चेकडैमों के निर्माण के बाद इस क्षेत्र में जमीन में नमी भरपूर है और प्राकृतिक जलस्नोत कभी सूखते नहीं हैं.

जानकारी देते हुए डॉ. अनिल बताते हैं कि 25 साल से किफायती पर्यावरण मित्र गतिविधियों से 52 गांवों के 6,025 परिवारों को लाभ मिला है. पच्छाद में मिली कामयाबी के बाद अब शहर पांवटा साहिब व शिलाई विकास खंड में भी ‘साथी’ की मुहिम रंग ला रही है. पर्यावरणीय मुद्दों के अलावा लोगों की आजीविका सुधारने के प्रयास सार्थक रहे हैं. संस्था के प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में भूक्षरण, पर्यावरण ठहराव संभव हो पाया है.

कृषि उत्पादकता में प्रति हेक्टेयर दोगुनी वृद्धि हुई है. कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिये युवाओं का मार्गदर्शन किया. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन करवाया गया. हाल ही में शिमला में ‘साथी’ संस्था को सरकार ने सम्मानित किया जिसके बाद हमारे हौसलो का औऱ अधिक बल मिला है. वे कहते हैं कि दूसरे प्रदेशों के लोगों को भी अपने जिले, मंडलो में प्रकृति की प्रति गंभीर होना चाहिए, अगर पेड़, जल नहीं बचेगें तो मानव का आस्तित्व खतरे में आ जायेगा.

 

पंचायत ने परिवार के सामने करवाया लड़की का बलात्कार

मु्जफ्फराबाद। अक्सर सुनने में आता है कि पंचायतें हमारी न्याय व्यवस्था का एक भाग है, लेकिन इन पंचायतों का फैसला हमेशा नकारात्मक और बेहद शर्मनाक होता है. ये सब हमे भारतीय पंचायतों में देखने को मिलता है. लेकिन भारत के अलावा एक देश ऐसा भी है जहां कि पंचायतें अजीबो-गरीब और शर्मनाक फैसले सुनाती है. मामला है पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का. जहां की पंचायत ने लोगों के दिल दहला दिए. दरअसल यहां एक गांव में पंचायत के अजीबोगरीब आदेश पर एक व्यक्ति ने 16 वर्षीय लड़की से उसके ही परिवार के सामने बलात्कार किया.

मीडिया खबर मुताबिक, पीड़ित लड़की के भाई पर मोहल्ले में रहने वाले नाबालिग से 16 जुलाई को रेप करने का आरोप था. यह मामला जब गांव की पंचायत के सामने लाया गया तो उसने लड़की के भाई को पड़ोसी लड़की से रेप का दोषी मानते हुए उसकी बहन से भी रेप किए जाने का फरमान सुना दिया. किशोरी के परिवार ने इसका विरोध किया. इस वारदात के बाद पीड़िता के परिजनों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई और पुलिस ने मुख्य आरोपी सहित पंचायत के सभी सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज करते हुए 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

मुल्तान मंडल के पुलिस प्रमुख अहसान यूनिस ने बताया कि प्रांत के मु्जफ्फराबाद के राजपुर गांव में 18 जुलाई को हुई इस घटना के सिलसिले में पुलिस ने 20 लोगों को गिरफ्तार किया है. इस मामले की जांच हो रही है.

ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह सरकार चला रही है भाजपा: कांग्रेस

लखनऊ। मौजूदा सरकार पर तरह-तरह के आरोप लगते जा रहे हैं और विपक्षी पार्टी काग्रेंस समय समय पर बीजेपी को घेरती रहती है. ताजा बयान में उत्तर प्रदेश कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ ने केंद्र की नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार पर ईस्ट इंडिया कम्पनी की तर्ज पर व्यापार की तरह सरकार चलाने का आरोप लगाया है. चेयरमैन इरशाद अली ने एक बयान में कहा कि जिस तरह अंग्रेज आजादी से पहले भारतीयों से भूखे पेट चप्पू चलवाते थे, उसी तरह देश-प्रदेश की सरकारें आज आम जनता को आधे महीने से कम का भोजन दे कर उन्हें भूखे पेट मरने को मजबूर कर रही हैं, इस सरकार में गरीब सताये जा रहे हैं तो अमीरों की मौज ही मौज है.

बता दें की सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आम उपभोक्ताओं को हर महीने प्रति कार्ड 5 से 7 किलो अनाज दिया जा रहा है, जो किसी भी परिवार के महीने भर का भोजन नहीं हो सकता. उसमें भी कोटेदार की घटतौली भी जारी रहती है. काग्रेंसी नेताओं ने कहा कि पूर्ववर्ती यूपीए सरकार तथा कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने वर्ष 2013 में भोजन का अधिकार कानून बनाकर गरीबों के लिए 2 रुपये किलो गेहूं तथा 3 रुपये किलो चावल और 1 रुपये किलो मोटा अनाज उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराया था. लेकिन आज की भाजपा सरकारें उक्त कानून का अनुपालन कराने में औपचारिकता ही पूरी कर रही हैं, जो ईस्ट इंडिया कम्पनी के कानून जैसा साबित हो रहा है.

नेताओं ने राष्ट्रपति और राज्यपाल से राशन वितरण में हो रही गड़बडिय़ों का संज्ञान लेकर प्रति व्यक्ति खुराक का आंकलन कराकर राशन उपलब्ध कराने की मांग की जिससे की गरीब रेखा से नीचे जीवन जी रहे लोगों में भूखमरी की स्थिति पैदा न हो.

 

भस्मासुर निकले नीतीश, सुप्रीम कोर्ट जाएगी RJD: लालू

 

पटना। राजद नेता लालू यादव ने नीतीश कुमार औरर भाजपा पर पलटवार किया है. लालू ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश को एकजुट किया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों ने उनकी हत्या कर दी. नीतीश के फैसले से गांव-गांव के लोग नाराज हैं. लालू ने कहा कि अफसोस है कि हमारे बीच गांधी नहीं है.

लालू ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों को झांसा दिया. अमित शाह ने कहा कि 15-15 लाख रुपये देने का वादा जुमला था. बीजेपी ने 15-15 लाख देने का ढोंग रचा था, मोदी ने देश की जनता से किया वादा नहीं निभाया.

मायावती का जिक्र करते हुए लालू ने कहा कि दलित भाई और पिछड़े वर्ग के लोगों ने हमें वोट दिया. लालू ने नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने नीतीश के डीएनए पर भी सवाल उठाया था. नीतीश पर निशाना साधते हुए लालू ने बिहार की एक कहावत कही और कहा कि एगो छौड़ी बुड़की.. जिधर देखे दही चूड़ा.. उधर जाए हुड़की.

उन्होंने कहा कि बिहार के लोग जागरूक हैं और उनके फैसले से गांव-गांव के लोग नाराज हैं. राजद नेता ने कहा कि हम सत्ता के लोभी नहीं हैं. नीतीश सत्ता के बहुत बड़े लोभी हैं, अवसरवादी हैं. नरेंद्र मोदी और आरएसएस के खिलाफ हमको मैंडेट मिला था.

लालू ने कहा कि नीतीश ने बीजेपी को खाने पर बुलाकर पत्तल खींचा था. वे लोग आए और ड्रामा शुरू कर दिया. बिहार के लिए जिस पैकेज की घोषणा हुई थी उसका क्या हुआ. उन्होंने कहा कि यह बीजेपी, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ था. जनता ने सेक्युलर ताकतों को वोट दिया था. लालू ने कहा कि आरएसएस के लोगों ने अफवाह फैलाई कि अगर लालू-नीतीश जीत गए तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे.

लालू ने कहा कि मैंने शिव की तरह नीतीश को आशीर्वाद दिया कि जाओ राज करो और वो भस्मासुर निकला. उन्होंने कहा कि हमारे खिलाफ नीतीश के कहने पर केस दर्ज हुआ. सुशील मोदी को कहा गया कि आप रोज प्रेस कान्फ्रेंस करो. नीतीश कुमार अमित शाह से मिल चुके थे. सब सेटिंग था.

उन्होंने कहा कि तेजस्वी ने कौन सा अपराध किया है. बड़ी पार्टी होने के बावजूद हमने नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया. लालू ने कहा कि जो दोस्त होता है वो मुश्किल में काम आता है. नीतीश कुमार ने कभी फोन भी नहीं किया.

मीडिया पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय मीडिया विपक्ष से लड़ रहा है. लालू ने कहा कि मैंने नीतीश को फोन किया था और उन्होंने कहा कि हम इस्तीफा नहीं मांग रहे हैं. सिर्फ मीडिया हल्ला कर रहा है.

लालू ने यह भी कहा कि लालच होता तो नीतीश को मुख्यमंत्री नहीं बनाता. नीतीश कफन की बात कर रहे हैं अरे उनके कफन में तो झोला है. उन्होंने कहा कि अगर नीतीश को मुख्यमंत्री बनने का मन नहीं था, तो नेता चुनते. बैठक बनाकर नेता का चुनाव होना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल को हमें पहले बुलाना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. विधायकों को रात भर कमरे में बंद करके रखा गया. हम इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.

लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार पर मर्डर का केस है. 16 नवंबर 1991 को सीताराम सिंह की हत्या हुई. मेरे छोटे भाई इस मामले में मुदालय हैं. लालू ने कहा कि नीतीश ने सीताराम सिंह की हत्या की. लालू ने कहा कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी कभी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े. अगर लड़ते भाव पता चल जाता.

लालू ने कहा कि नीतीश कुमार की पहले से बीजेपी के साथ सेटिंग थी और उन्होंने बीजेपी के साथ ही जाना था. तेजस्वी तो एक बहाना था. उन्होंने कहा कि अच्छा हुआ कि नकली नीतीश चले गए. लालू ने कहा कि अखिलेश, मायावती, ममता बनर्जी सहित तमाम विपक्षी नेता बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला है. 27 अगस्त को पटना में विपक्ष की जोरदार रैली होगी.

आईआईटी रूड़की में भी दलित-आदिवासी छात्रों से भेदभाव

रूड़की। आरक्षित वर्ग के बच्चे मेहनत करके अगर आईआईटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थान में जगह बना भी लेते हैं तो उनका ऐसा उत्पीड़न किया जाता है कि वे छात्र वहां अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाते. कई छात्रों की ऐसी शिकायत भी रही है कि मनुवादी मानसिकता के अध्यापक कई छात्रों को जानबूझकर फेल भी कर देते हैं ताकि आईआईटी से उनकी पढ़ाई पूरी न हो सके. जातिवादी मानसिकता के अध्यापक पिछड़ों, दलितों और आदिवासी समुदाय के छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

आपको बता दें कि इससे पहले एम्स जैसे बड़े शिक्षण संस्थान समेत कई मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने भी अपने साथ जाति के आधार पर भेदभाव की बाते कहीं थी. बाद में जब उनकी खबरें मीडिया का हिस्सा बनी तो उन छात्रों की दोबारा परीक्षा कराई गई तो सभी छात्र पास हो गए. लेकिन इस प्रकिया में छात्रों के तीन- चार साल बर्बाद हो गए. अब यही जातिवाद का गंदा खेल आईआईटी में भी खेला जा रहा है.

इस मामले में सामाजिक चिंतक और आईआईटी रूड़की के छात्र रहे सुनील कुमार कहते हैं कि देश की शिक्षा-व्यवस्था में भयानक खामियां हैं. आईआईटी में पढ़ने वाले बच्चे अगर अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं तो इसका दोष सिर्फ बच्चों का नहीं है, दोष उन अध्यापकों का भी है जिनके निम्न स्तर के ज्ञान के चलते बच्चों को विषय की पढ़ाई समझ में नहीं आ रही है. अगर खराब प्रदर्शन करने वाले छात्रों को निकाला जाता है तो जिस अध्यापक के छात्र खराब प्रदर्शन कर रहे हैं उसको भी निकाला जाना चाहिए.

आखिरकार ऐसा कैसे संभव है कि देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली प्रवेश परीक्षा को पास करके छात्र वहां अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहा है. आईआईटी के अध्यापकों पर भी इस बात की जिम्मेदारी आनी चाहिए. अगर आईआईटी में पढ़ाने वाले अध्यापकों के छात्र फेल हो रहे हैं तो कहीं न कहीं उनके कमजोर ज्ञान और पढ़ाने के कौशल में कमी के चलते ऐसा हो रहा है. और जहां तक आईआईटी में जातिवाद की बात है तो यहां भी समाज के अन्य जगहों के जैसा ही जातिवाद है. इस बात की पूरी संभावना है कि सवर्ण जातिवादी मानसिकता के अध्यापक छात्रों को जाति के आधार पर फेल करते हों.

वॉयस ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछले एक साल में आईआईटी में खराब प्रदर्शन के आधार पर 889 छात्रों को आईआईटी से बाहर किया गया है. बाहर किए गए छात्रों में से लगभग 98 फीसदी छात्र आरक्षित वर्ग के हैं. जिससे साफ है कि आईआईटी में जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है.

आईआईटी में पढ़ना हर छात्र का सपना होता है. लोगों का मानना है कि यहां से पढ़े हुए छात्र इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बड़ी से बड़ी सफलता हासिल करते हैं. यहां तक की IIT में एडमिशन लेने के लिए भी छात्रों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि पिछले एक साल में IIT के 889 छात्रों को खराब परफॉर्मेंस की वजह से बाहर निकाल दिया गया है. आपको बता दें कि M.Tech और MSC की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की संख्या करीब 630 है.

नीतीश के शपथग्रहण पर राहुल-अखिलेश ने ली चुटकी

नई दिल्ली। भारत में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चायें बिहार की राजनीति को लेकर हैं. जिस तरह से नीतीश ने पाला बदला है उसको देखकर उन पर सवाल उठने लाजमी हैं जिस बीजेपी की नीतीश बुराई करते थकते नहीं थे आज उसकी गोदी में बैठने की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं. बता दें की बीजेपी की मदद से कल इस्तीफा देने वाले नीतीश कुमार आज छठी बार पर मुख्यमंत्री बने हैं. महागठबंधन की सरकार से इस्तीफ़े के तुरंत बाद नीतीश कुमार को बीजेपी का साथ मिल गया और उन्होंने गुरुवार सुबह ही दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है.

उनके इस कदम पर लोगो की खूब प्रतिक्रियाऐं आ रहीं हैं. किसी ने राजनीति का मास्टरस्ट्रोक कहा तो किसी ने इसे मौकापरस्ती कहा. यहां तक कि सोशल नेटवर्टिंग वेबसाइट ट्विटर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी चुटकी ली है. यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सीधे नीतीश कुमार पर ताना कसते हुए ट्विटर पर लिखा- ना ना करते, प्यार तुम्हीं से कर बैठे, करना था इंकार मगर इक़रार तुम्हीं से कर बैठे.

कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने बिहार के घटनाक्रम को लेकर ट्वीट किया- एक बार फिर से बिहार में राज्यपाल ने सरकारिया कमीशन और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया है. Single largest party RJD को मौका नहीं दिया गया है. BJP का प्रजातंत्र में विश्वास ना पहले था ना अब है. इस कृत्य के लिए धिक्कार है.

वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बेहद उदासीन स्वरों में अफसोस जताया. उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान की राजनीति में यही समस्या है. अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर जाते हैं. उन्होंने कहा, “मैं पहले ही जान गया था कि यह (महागठबंधन) ज़्यादा दिन तक नहीं चल पाएगा… हिन्दुस्तान की राजनीति की यही समस्या है कि राजनेता स्वार्थ के लिए कुछ भी कर जाते हैं… जो जनादेश मिला था, वह सांप्रदायिकता के खिलाफ था, लेकिन अब..